क्या है पूरा मामला
उपभोक्ता आयोग का फैसला

क्या है पूरा मामला
उपभोक्ता आयोग का फैसला

इंदौर हादसे की जांच में सामने आया कि देश के सात बड़े शहर पानी की गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए हैं।
दूषित पानी के सेवन से आम लोगों में दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन शहरों में पानी की शुद्धता पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह केवल स्वास्थ्य आपात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है।
इंदौर की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दूषित पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन गई है। इसलिए प्रशासन को अब निष्क्रियता छोड़कर, सख्त निरीक्षण और त्वरित सुधार लागू करना होगा, ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

रैली को रवाना करने से पहले कोकता बायपास क्षेत्र ‘बोल बम’ और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए इतिहास और आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आज वही सोमनाथ मंदिर फिर से अपने वैभव में भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहा है।
ट्रैक्टर रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाया गया था, उसी तर्ज पर अब सरकार ने पूरे साल को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह केवल एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सालभर किसानों के हित में योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक किसानों की आय, खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के लिए काम करेंगे, ताकि खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत किया जा सके।
रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को सरकार की आगामी योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत सरकार का विशेष फोकस उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, उच्च उत्पादकता और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी कारण राज्य सरकार लगातार कृषि बजट में बढ़ोतरी कर रही है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर योजना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाएं पहले से संचालित हैं।
इस भव्य ट्रैक्टर रैली और कार्यक्रम के चलते भोपाल की कई सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। कोकता बायपास, मिसरोद-सलैया क्षेत्र, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के आसपास और जंबूरी मैदान तक जाने वाले मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।
कुल मिलाकर, 1101 ट्रैक्टरों की यह रैली केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को केंद्र में रखकर विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के जरिए सरकार का लक्ष्य अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

ट्रैफिक डायवर्शन की जानकारी
जम्बूरी मैदान जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों की एंट्री रोक दी गई है, और कई मुख्य सड़कें डायवर्ट की जाएंगी। खासतौर पर उन रास्तों पर ज्यादा दबाव रहेगा, जो ट्रैक्टर रैली और किसानों के वाहन ले जा रहे होंगे। इसके अलावा, परीक्षार्थियों के लिए विशेष मार्ग व्यवस्था की गई है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी परीक्षा में शामिल हो सकें।
मुख्य रूट डायवर्शन और वैकल्पिक मार्ग
भोपाल मिसरोद-सलैया क्षेत्र 11 मील बायपास रोड, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप। भोपाल फंदा ब्लॉक-बैरासिया रोड खजूरी सड़क, मोबारकपुर बायपास, लांबाखेड़ा बायपास चौराहा, चोपड़ा कला बायपास चौराहा, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सामने लाइन अप। रायसेन और विदिशा से आने वाले ट्रैक्टर संबंधित मार्गों से होते हुए प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप करेंगे।
जम्बूरी मैदान पार्किंग
जन सामान्य जीप/कार/दो पहिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। वीआईपी वाहन: गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, अयप्पा मंदिर, गैस गोदाम, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। मीडिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, जम्बूरी मैदान पानी की टंकी के पास।
ऑप्शनल मार्ग
किसान रैली में शामिल होने वाले जिलों की सूची

पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन बीते बुधवार सुबह प्रिया कॉलेज जाने के बजाय अपने दोस्त तुषार के घर चली गई थी। तुषार चूना भट्टी इलाके की पारिका सोसाइटी में बने स्टे होम में केयर टेकर का काम करता है। दोपहर 12 बजे छात्रा की छत से गिरने की घटना हुई, और तुषार उसे अस्पताल छोड़कर भाग गया।
परिजनों का आरोप है कि यह मामला सिर्फ विवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि एक साल से चले आ रहे प्रेम संबंध और उत्पीड़न का परिणाम है। पहले तुषार ईश्वर नगर में रहता था और प्रिया से उसकी दोस्ती थी, लेकिन अब मामला गंभीर रूप ले चुका है। पुलिस आरोपी की तलाश में पूरी तरह सक्रिय है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
यह मामला भोपाल में छात्रों और युवाओं के बीच सुरक्षा की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है, और स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सक्रिय जांच के लिए प्रेरित करता है।

राय ने कहा, नगर निगम को कई शिकायतें मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत संबंधित स्थानों पर जाकर जांच कर रहे हैं। शिकायत होने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कर रही है। रिसाव या सार्वजनिक शिकायतों की स्थिति में नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच कर रहे हैं। वे लोगों की शिकायतों के आधार पर जांच कर रहे हैं और सैंपलों को संबंधित अधिकारियों को भेज रहे हैं।
मेयर ने यह भी बताया कि शहर के एक स्लॉटर हाउस को उसके नमूनों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सील कर दिया गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्लॉटर हाउस के सैंपल गलत पाए गए हैं। नमूने गलत पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारी, निजी विक्रेता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सीवेज प्रोजेक्ट में हुई लापरवाही के कारण गंदा पानी पीने के पानी के स्रोतों में मिल रहा है, जिससे जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट में सीवेज का पानी नर्मदा नदी में मिलने और वहां से पीने के पानी की आपूर्ति होने पर गहरी चिंता जताई है। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद, अब पूरे प्रदेश में जल संकट और स्वच्छता को लेकर प्रशासन पर भारी दबाव है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

बुधवार की सुबह कोहरे के कारण प्रदेश के आधे हिस्से में दृश्यता कम रही। विशेष रूप से सतना. दतिया. गुना. रीवा. ग्वालियर. राजगढ़. खजुराहो. नौगांव और सीधी जैसे इलाकों में कोहरे का असर सबसे ज्यादा रहा। इस कारण दिल्ली से आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट हो गई हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही. इंदौर. रायसेन. ग्वालियर. मऊगंज. धार और नर्मदापुरम जिलों के स्कूलों में भी बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कोल्ड वेव और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले भी शाजापुर. शहडोल. सिवनी. मंदसौर. सीहोर में शीतलहर का असर देखा गया था. और भोपाल-राजगढ़ में तीव्र शीतलहर भी चली थी।
प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस सर्दी की वजह से ही इंदौर. उज्जैन. मंदसौर. शाजापुर. विदिशा. ग्वालियर. अशोकनगर. रायसेन. आगर-मालवा. भिंड. टीकमगढ़. हरदा. नीमच. रतलाम. राजगढ़. मंडला. जबलपुर. दमोह. डिंडौरी. नर्मदापुरम. झाबुआ. छतरपुर. सीधी. बैतूल और कई अन्य जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।
इंदौर. रायसेन. ग्वालियर और नर्मदापुरम में बुधवार को भी स्कूलों की छुट्टियां जारी रही। वहीं. भोपाल. धार. सीहोर. अनूपपुर. बड़वानी. मुरैना और खरगोन में स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खोले गए हैं। इस कड़ाके की ठंड ने बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कतें दी हैं. खासकर छोटे बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।
इस बार कड़ाके की ठंड का असर खास रहा है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी थी. और दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में भी प्रदेश में माइनस तापमान की स्थिति देखने को मिली।
सर्दी का यह मौसम क्यों खास है
मौसम विभाग के मुताबिक. दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से सर्द हवाएं प्रदेश की ओर आती हैं. जिसके कारण इन महीनों में कड़ाके की ठंड होती है। इन दो महीनों में खासतौर पर शीतलहर और कोल्ड वेव जैसी स्थितियां बनती हैं। पिछले 10 सालों में ऐसे ही ट्रेंड देखे गए हैं. और इस बार भी जनवरी में मावठा हल्की बारिश का असर कुछ जिलों में देखा गया है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में जनवरी के मौसम का ट्रेंड भी बहुत दिलचस्प है
भोपाल18 जनवरी 1935 को यहां का रात का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।इंदौरजनवरी में माइनस तापमान का रिकॉर्ड 16 जनवरी 1935 को माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस था।उज्जैन22 जनवरी 1962 को यहां पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था।
अंत में. मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी और कोहरे का असर अत्यधिक देखा जा रहा है. जिससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. बल्कि स्कूलों और ट्रेनों की समय सारणी भी गड़बड़ाई है। ठंड और कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट हो रही हैं. और छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार. यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

खास बात यह है कि इन टीमों में केवल उन्हीं खिलाड़ियों का चयन किया गया है, जो कि वैदिक मंत्रों का उच्चारण अच्छे से कर पाते हैं। जानकारी देते हुए आयोजकों ने कहा कि इस टूर्नामेंट में केवल वैदिक और कर्मकांडी ब्राह्मण ही हिस्सा ले रहे हैं, जिनका चयन इस आधार पर हुआ है कि वह संस्कृत में मंत्रों का उच्चारण करने में कितने निपुण हैं।
यह है आयोजन का उद्देश्य
आयोजकों ने बताया कि इस टूर्नामेंट के आयोजन का उद्देश्य देवभाषा संस्कृत का प्रचार प्रसार करना और लोगों को अपनी भाषा, परंपरा और संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि खेल, लोगों को भाषा और परंपरा से जोड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम है। आगे उन्होंने बताया कि यहां खेल रही टीमों में हिस्सा लेने के लिए केवल वैदिक स्कूल व विश्व विद्यालय में पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपकी संस्कृत भाषा व वैदिक मंत्रों के उच्चारण पर कितनी अच्छी पकड़ है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वैदिक मंत्रों का उच्चारण ना कर पाने वालों को यहां पर खेलने का मौका नहीं दिया जाता है।
चतुष्कम यानी चौका, षठकम यानी छक्का
संस्कृत में कमेंट्री होने की वजह से लोगों को यहां क्रिकेट की आम शब्दावली से अलग शब्द सुनने को मिल रहे हैं। जिसके अनुसार यहां बैट को वल्लक:, गेंद को कन्दुकम, चौके को चतुष्कम और छक्के को षठकम् कहा जा रहा है।
टीमों के नाम भी हैं बेहद खास
इस टूर्नामेंट में मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली और महाराष्ट्र की कुल 27 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, और इन टीमों के नाम भी बेहद खास हैं। जैसे वेंकटेश्वर बालाजी, बागेश्वर ब्लास्ट, आचार्य पाणिग्रही, मां शशि गुरुकुल, मां नर्मदा खंड, हिंगलाज एकादश, बाहुबली एकादश, रीवा एकादशी, विश्वनाथ एकादशी, गांधीनगर एकादशी आदि।
हो रहे 8-8 ओवर के मैच
इस टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन 5 से 9 जनवरी तक किया जा रहा है और इसका आयोजन वैदिक ब्राह्मण युवा खेल कल्याण समिति और परशुराम कल्याण बोर्ड द्वारा करवाया जा रहा है। इसमें होने वाले मैच आठ-आठ ओवर के हैं। आयोजकों ने आईपीएल में भी अन्य भाषाओं की तरह संस्कृत में कमेंट्री करवाने की मांग रखी।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।
प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।
यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है

सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक
आज के खास आयोजनों की जानकारी
धोती-कुर्ता में क्रिकेट संस्कृत में कमेंट्री, स्थान अंकुर खेल मैदान शिवाजी नगर वेदिक ब्राह्मणों का अनोखा क्रिकेट टूर्नामेंट जिसमें खिलाड़ी धोती-कुर्ता पहनकर खेलेंगे और संस्कृत में कमेंट्री की जाएगी। आयोजन महर्षि मैत्री मैच श्रृंखला-6 5 से 9 जनवरी
शलाका आर्ट एग्जीबिशन
भर्ती की जानकारी
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के 4767 पद आवेदन MP Online के जरिए
MPESB में 474 पदों पर सीधी भर्ती मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य संस्थान और विभागीय कार्यालय अंतिम तिथि 7 जनवरी 2026 संशोधन की आखिरी तारीख 12 जनवरी 2026खिलाओ और खेलो – बच्चों के लिए फार्म फन डे