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  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा

    भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा


    भोपाल । भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बदमाश का पीछा कर रहे दो पुलिसकर्मियों की बाइक की चपेट में आने से आठ साल की बच्ची घायल हो गई। हादसा 11 नंबर इलाके में हुआ जहां गुंडा स्क्वाड के पुलिसकर्मी एक फरार आरोपी का पीछा कर रहे थे। टक्कर के बाद बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में चोट लगने से खून निकलने लगा। बच्ची को घायल देखकर मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो गए और सिविल ड्रेस में मौजूद दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया। कुछ देर तक मौके पर झूमाझटकी की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान बताकर आईडी कार्ड दिखाया जिसके बाद लोगों को पता चला कि वे पुलिसकर्मी हैं और मामला शांत हुआ।

    पुलिस के मुताबिक कमला नगर थाने में संपत्ति हड़पने के मामले में एक आरोपी फरार चल रहा है। उसकी तलाश में गुंडा स्क्वाड की टीम लगातार जुटी हुई है। शनिवार शाम करीब छह बजे पुलिसकर्मी दीपक कटियार और बलराम बाइक से 11 नंबर इलाके में आरोपी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी भी बाइक से भाग रहा था और दोनों पुलिसकर्मी उसका पीछा कर रहे थे। पीछा करने के दौरान अचानक आठ साल की बच्ची पुलिस बाइक के सामने आ गई। पुलिसकर्मी संभल पाते उससे पहले बाइक बच्ची से टकरा गई।

    हादसे में बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में गंभीर चोट लगने से खून निकलने लगा। टक्कर के बाद जिस आरोपी का पुलिस पीछा कर रही थी वह मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिसकर्मियों ने आरोपी का पीछा जारी रखने के बजाय तुरंत घायल बच्ची को संभाला। उन्होंने बच्ची की स्थिति देखी और आसपास के लोगों की मदद से उसे संभालने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के बाद डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई। बच्ची को इलाज के लिए हजेला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है।

    हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि बाइक सवार दोनों व्यक्ति पुलिसकर्मी हैं। दोनों सिविल ड्रेस में थे और उनके पास पुलिस की वर्दी नहीं थी। बच्ची के घायल होने के बाद लोगों का गुस्सा दोनों पर फूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी अखिलेश गिनारे के मुताबिक लोगों ने दोनों को घेर लिया और उनके साथ झूमाझटकी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने अपना परिचय दिया और पहचान पत्र दिखाया। इसके बाद लोगों को उनकी वास्तविक पहचान के बारे में जानकारी हुई और मौके पर तनाव कम हुआ।

    घटना में दोनों पुलिसकर्मियों को चोट नहीं आई है। वहीं घायल बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के मुताबिक फिलहाल बच्ची के परिजनों की ओर से पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस के सामने एक तरफ फरार आरोपी को पकड़ने की चुनौती है तो दूसरी तरफ हादसे में घायल बच्ची की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सिविल ड्रेस में किसी आरोपी का पीछा करते समय पुलिसकर्मियों को सड़क पर सुरक्षा और आम लोगों की मौजूदगी का कितना ध्यान रखना चाहिए। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

  • पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा

    पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा


    भोपाल । भोपाल के पिपलानी इलाके में 17 साल की नाबालिग आयुषी की संदिग्ध मौत के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस ने अब इस मामले में हत्या का केस दर्ज करते हुए मृतका की मां कमला और मामा विजय राय को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां बेटी की शादी अपनी पसंद के युवक से करवाना चाहती थी। शादी को लेकर मां और बेटी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को पुलिस हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है और मामले में ऑनर किलिंग के एंगल को भी खंगाला जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक आयुषी अपनी मां के साथ घरों में काम करती थी। परिवार में उसकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी लेकिन मां और बेटी की पसंद अलग थी। आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां चाहती थी कि बेटी उसकी पसंद के युवक से विवाह करे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद किस तरह बढ़ा और घटना वाले दिन घर में वास्तव में क्या हुआ था।

    जांच के अनुसार 26 अगस्त को शादी की बात को लेकर घर में फिर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान कमला और उसके भाई विजय राय ने आयुषी का दुपट्टे से गला घोंट दिया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस अभी घटना के पूरे क्रम और दोनों आरोपियों की वास्तविक भूमिका को लेकर विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    आयुषी की मौत के बाद परिजन कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद मामले में अहम मोड़ 29 अगस्त की शाम आया जब पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट में गला घोंटने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या की दिशा में आगे बढ़ाया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पिपलानी पुलिस ने रविवार तड़के आयुषी की मां कमला और मामा विजय राय के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खासतौर पर शादी को लेकर चल रहे विवाद घटना से पहले की परिस्थितियों और अंतिम संस्कार की तैयारी के पीछे की वजहों को समझने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पसंद की शादी को लेकर परिवार में चल रहा विवाद हत्या की संभावित वजह के तौर पर सामने आया है। इसी कारण मामले में ऑनर किलिंग की आशंका को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हत्या की वास्तविक वजह और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल नाबालिग की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

  • भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला

    भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में बारिश के बीच मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर रहवासियों का गुस्सा रविवार को सड़क पर देखने को मिला। अमलतास चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में जलभराव सड़कों पर गड्ढे गंदगी और बंद स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे नियमित रूप से टैक्स वसूला जा रहा है लेकिन उसके बदले जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रहवासियों के मुताबिक कटारा हिल्स की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों के अंदर की सड़कों तक जगह जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश होने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।

    इलाके के लोगों का कहना है कि रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। अंधेरे और खराब सड़कों के कारण वाहन चालकों को गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रहवासियों ने मांग की है कि खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द दुरुस्त कराया जाए और सड़कों की मरम्मत कराकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी लोगों के साथ मौजूद रहे। युवक कांग्रेस के अनिकेत द्विवेदी ने वार्ड 85 के कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी मार्ग तक गड्ढों की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान इलाके के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। कॉलोनियों के आसपास जलभराव के साथ कीचड़ फैलने से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने का आरोप लगाया गया। लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होती है।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम का पुतला जलाया। इस दौरान लोगों ने निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।

    प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान भोपाल युवा कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष राहुल मंडलोई रोहित राजोरिया शिवी शर्मा लोकेंद्र शर्मा अनिल मीणा और राजकुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। फिलहाल कटारा हिल्स में रहवासियों के प्रदर्शन ने बारिश के दौरान शहर की जल निकासी सड़क और सफाई व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।

  • भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल। केबल एवं कनेक्टिविटी समाधान के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक कंपनी एलएपीपी ने मध्य प्रदेश की राजधानी
    भोपाल स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र के विस्तारित परिसर का उद्घाटन किया। विस्तार के बाद भोपाल संयंत्र कंपनी के विश्वभर में संचालित सभी विनिर्माण संयंत्रों में सबसे बड़ा बन गया है। नई सुविधा में पावर लो-वोल्टेज केबल के निर्माण की व्यवस्था की गई है।

    कंपनी के अनुसार, नई इकाई में तैयार होने वाली लो-वोल्टेज केबल का उपयोग कारखानों, व्यावसायिक भवनों, परिवहन प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, उपयोगिता परियोजनाओं सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इस सुविधा का निर्माण वर्ष 2025 में शुरू किया गया था और अब यह पूरी तरह परिचालन में आ गई है।

    कंपनी ने यह विस्तार ऐसे समय में किया है, जब देश में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही पावर लो-वोल्टेज केबल की मांग में भी वृद्धि हो रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में वर्तमान और आगामी वित्त वर्ष के दौरान बुनियादी ढांचा क्षेत्र में करीब 24 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में प्रत्येक वर्ष लगभग 50 से 55 गीगावाट की वृद्धि होने की संभावना है।

    भारत कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार

    एलएपीपी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने कहा कि भोपाल में किया गया निवेश ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ‘भारत में भारत के लिए’ रणनीति के तहत देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले कनेक्टिविटी समाधान तैयार किए जा रहे हैं। भारत एलएपीपी के लिए एशिया का महत्वपूर्ण बाजार है, जबकि मध्य प्रदेश कंपनी के लिए एक अहम विनिर्माण केंद्र बन चुका है।

    एलएपीपी ने वर्ष 2012 में भोपाल में अपना विनिर्माण संयंत्र शुरू किया था। शुरुआती दौर में यहां एकल-कोर केबल का उत्पादन किया जाता था। समय के साथ कंपनी ने संयंत्र में बहु-कोर केबल, सौर केबल, कंपाउंडिंग और ई-बीम तकनीक जैसी नई क्षमताएं जोड़ीं।

    200 से अधिक लोगों को रोजगार

    वर्तमान में भोपाल संयंत्र में 200 से अधिक लोग कार्यरत हैं। कंपनी के विश्वभर के संयंत्रों में सबसे बड़ा होने के साथ ही यह केंद्र कई आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां उन्नत पॉलिमर सामग्री का निर्माण भी कंपनी स्वयं करती है। इससे केबल की गुणवत्ता और प्रदर्शन पर बेहतर नियंत्रण संभव होता है।

    ई-बीम तकनीक के उपयोग से केबल को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के साथ उनकी ताप सहने की क्षमता भी बढ़ाई जाती है। कंपनी के मुताबिक भोपाल संयंत्र का विस्तार एलएपीपी इंडिया के 30वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर हुआ है।

    जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार

    एलएपीपी के लिए जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी इसे प्रमुख विकास बाजार के रूप में देखती है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा है। समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने बचपन में अपने परिवार के साथ भारत की यात्राएं की थीं। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रियास लैप वर्ष 2000 से जर्मनी के दो राज्यों में भारत के मानद वाणिज्यदूत के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।

  • भोपाल से शुरू Ayurozena Ayurveda, 12 साल के फार्मास्युटिकल अनुभव के साथ आयुर्वेदिक पर्सनल केयर में नई पहल

    भोपाल से शुरू Ayurozena Ayurveda, 12 साल के फार्मास्युटिकल अनुभव के साथ आयुर्वेदिक पर्सनल केयर में नई पहल

    भोपाल: से शुरू हुआ Ayurozena Ayurveda पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक फार्मास्युटिकल गुणवत्ता और पर्सनल केयर की जरूरतों के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। ब्रांड की शुरुआत फार्मास्युटिकल क्षेत्र में करीब 12 वर्षों का अनुभव रखने वाले विजय मिश्रा ने की है। उनका उद्देश्य ऐसे आयुर्वेद आधारित उत्पाद विकसित करना है, जिनमें पारंपरिक सामग्री के साथ गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

    Ayurozena Ayurveda की शुरुआत के पीछे विजय मिश्रा की फार्मेसी शिक्षा और पेशेवर अनुभव महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। उन्होंने भोपाल के Technocrats Institute of Technology से B.Pharm तथा RKDF College of Pharmacy से M.Pharm की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने फार्मास्युटिकल और मेडिकल क्षेत्र में लगभग 12 वर्षों तक काम किया।

    अपने पेशेवर अनुभव के दौरान मिश्रा ने formulations, active ingredients और quality processes को नजदीक से समझा। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पर्सनल केयर उत्पादों के निर्माण में केवल बाहरी प्रस्तुति के बजाय formulation और manufacturing process को महत्वपूर्ण मानते हुए ब्रांड की दिशा तय की।

    ब्रांड को बाजार में उतारने से पहले विभिन्न स्तरों पर उत्पादों और निर्माण प्रक्रियाओं को समझने की कोशिश की गई। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कई manufacturing units का दौरा किया गया। उत्पादन प्रक्रियाओं को देखने के साथ विभिन्न formulations को source, test और compare किया गया।

    ब्रांड के अनुसार, कई formulations को ingredients की गुणवत्ता, consistency और भारतीय त्वचा तथा जलवायु के अनुरूप उपयोगिता जैसे मानकों के आधार पर परखा गया। इस प्रक्रिया के बाद शुरुआती उत्पाद श्रृंखला में Baby Care Soap, Royal Ubtan Bar और Charcoal Detox Bar को शामिल किया गया।

    Ayurozena Ayurveda की कार्यप्रणाली में आयुर्वेदिक ingredients और आधुनिक pharmaceutical approach को साथ लेकर चलने पर जोर दिया गया है। ब्रांड की सोच के अनुसार पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक गुणवत्ता प्रक्रियाएं एक-दूसरे के विकल्प के बजाय पूरक भूमिका निभा सकती हैं।

    उत्पादों के निर्माण के लिए third-party manufacturing partner की सेवाएं ली जाती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्माण प्रक्रिया में GMP-aligned practices का पालन किया जाता है। उत्पादन से पहले प्रत्येक formulation की Founder स्तर पर व्यक्तिगत approval प्रक्रिया भी रखी गई है।

    शुरुआती चरण में तीन उत्पादों के साथ बाजार में मौजूदगी बनाने के बाद ब्रांड का लक्ष्य अपनी Ayurvedic skincare और personal care range का विस्तार करना है। इस विस्तार में ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जिनमें पारंपरिक आयुर्वेदिक सोच के साथ आधुनिक manufacturing practices और गुणवत्ता पर ध्यान रखा जाए।

    भोपाल से शुरू हुई यह पहल मध्य प्रदेश में आयुर्वेद आधारित पर्सनल केयर क्षेत्र में स्थानीय उद्यमिता और फार्मास्युटिकल अनुभव के मेल का उदाहरण प्रस्तुत करती है। ब्रांड के आगे बढ़ने के साथ उत्पादों की संख्या, श्रेणी और बाजार पहुंच में विस्तार इसकी आगामी दिशा का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

  • सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    मध्य प्रदेश: में कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। सीहोर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए भोपाल-इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है। यह व्यवस्था 23 अगस्त की सुबह 9 बजे से 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू रहेगी।

    इस दौरान भारी वाहनों को भोपाल-इंदौर हाईवे से सीधे गुजरने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था में किए गए इस बदलाव का असर दूसरे वाहनों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करने की सलाह दी गई है।

    सीहोर में 25 अगस्त को कांवड़ यात्रा का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान सीहोर से होकर गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए पहले से व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है।

    भारी वाहनों के लिए रूट में बदलाव किए जाने के कारण भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। यातायात पुलिस के अनुसार लोगों को अपने सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को समय का ध्यान रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आवश्यकता नहीं होने पर भीड़ वाले मुख्य रास्तों से बचें और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करें। वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को भी निर्धारित दिशा और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में मार्ग परिवर्तन से होने वाली असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय रखने की जरूरत है। खासकर बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी वाहनों से सफर करने वालों को निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।

    भोपाल-इंदौर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में तीन दिनों के लिए लागू होने वाली यह व्यवस्था यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है। सामान्य यातायात के मुकाबले वैकल्पिक मार्गों पर दूरी और भीड़ के कारण सफर लंबा होने की संभावना है।

    यातायात संबंधी किसी परेशानी या मार्ग को लेकर जानकारी की जरूरत होने पर यातायात पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

    कांवड़ यात्रा समाप्त होने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू इस बदलाव के कारण भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना और संभावित देरी के लिए पर्याप्त समय रखना जरूरी होगा।

  • मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश :  में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 32 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों के मैदानी प्रशासन तक कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। इस फेरबदल में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, अपर कलेक्टरों और अनुविभागीय अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

    नए आदेश के तहत नगर निगम और विकास प्राधिकरण के स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। धार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी को ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। दतिया जिला पंचायत के सीईओ अक्षय कुमार तेम्रवाल को भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

    सतना नगर निगम के आयुक्त पद पर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को पदस्थ किया गया है। उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। वहीं विवेक के.व्ही. को जबलपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पंचायत स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त रहे संघ प्रिय को सिंगरौली जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सिंगरौली के सीईओ जगदीश कुमार गोमे को सागर जिला पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। देवास जिला पंचायत के सीईओ पद पर नवीत कुमार धुर्वे की पदस्थापना की गई है।

    खंडवा में अपर कलेक्टर रहीं सृष्टि देशमुख गौड़ा को रीवा जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अभिषेक सराफ को सीधी, सौम्या आनंद को खंडवा, ऐश्वर्य वर्मा को श्योपुर और आशीष को टीकमगढ़ जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है। इसके अलावा अर्पित गुप्ता को बड़वानी और तनुश्री मीणा को बालाघाट जिला पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रशासनिक फेरबदल का असर मंत्रालय स्तर पर भी दिखाई दिया है। संजना जैन को जल संसाधन विभाग में उप सचिव, ज्योति शर्मा को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव, अंजली जोसेफ जोनाथन को लोक निर्माण विभाग में उप सचिव और अनिल कुमार डामोर को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। कार्तिकेय जायसवाल, विशाल धाकड़ और सोनाली देव को भी उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है।

    मैदानी प्रशासन में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। काजल जावला को राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल में अपर मिशन संचालक बनाया गया है। श्रद्धा शुक्ला को खंडवा का अपर कलेक्टर पद सौंपा गया है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में राजस्व एसडीओ के पदों पर भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

    आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली और पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी का एसडीओ राजस्व बनाया गया है। सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जामदार फरहान इरफान को शहपुरा, ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा का एसडीओ राजस्व नियुक्त किया गया है।

    राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक फेरबदल को जिलों और स्थानीय निकायों में कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।