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  • Bihar Assembly Election: बिहार चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची PK की जन सुराज पार्टी

    Bihar Assembly Election: बिहार चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची PK की जन सुराज पार्टी


    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी ने राज्य में हुए विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने चुनाव के दौरान महिलाओं को सीधे ₹10,000 ट्रांसफर किए जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए इसे अवैध करार दिया है और नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
    जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की शुक्रवार को सुनवाई करेगी। याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।

    10 हजार रुपये ट्रांसफर पर उठे सवाल

    याचिका में कहा गया है कि चुनाव से ठीक पहले और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के दौरान राज्य सरकार की ओर से महिला मतदाताओं को ₹10,000 का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया गया, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम है। पार्टी का दावा है कि इससे 25 से 35 लाख महिला वोटर्स प्रभावित हुईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

    संविधान के कई अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप

    जन सुराज पार्टी ने कोर्ट से यह घोषित करने की मांग की है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनावी अवधि में नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें भुगतान करना संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही, चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की भी अपील की गई है।

    जीविका दीदियों की तैनाती पर भी आपत्ति

    याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि दो चरणों में कराई गई वोटिंग के दौरान जीविका स्वयं सहायता समूह की करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। पार्टी ने इसे अवैध और अनुचित बताया है।

    दोबारा चुनाव की मांग

    जन सुराज पार्टी ने चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देते हुए बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। साथ ही, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार 2013 मामले में दिए गए निर्देशों को लागू कराए और मुफ्त योजनाओं व डीबीटी स्कीम्स पर स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश तय करे।

    बढ़ेगा सियासी तापमान

    इस याचिका के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में बिहार की सियासत की दिशा तय कर सकता है।

  • अनंत सिंह कल लेंगे विधायक पद की शपथ, एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली अनुमति

    अनंत सिंह कल लेंगे विधायक पद की शपथ, एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली अनुमति


    नई दिल्ली । 2025 के विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत दर्ज करने वाले विधायक अनंत सिंह कल मंगलवार, 03 फरवरी, 2026 11 बजे विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेंगे. इसके लिए उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट से अनुमति मिल गई है. वर्तमान में वह दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में बेउर जेल में बंद हैं. शपथ के लिए उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच विधानसभा लाया जाएगा.

    खारिज हो चुकी है जमानत याचिका

    बता दें कि जिस दुलारचंद यादव के केस में अनंत सिंह जेल में हैं जिनकी हत्या विधानसभा चुनाव के दौरान 30 अक्टूबर को हुई थी. इस कांड में उनकी गिरफ्तारी हुई और तब से वे जेल में हैं. हालांकि जमानत के लिए सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी लेकिन वह खारिज हो गई.

    चुनाव में प्रचार भी नहीं कर सके थे अनंत सिंह
    मोकामा सीट से अनंत सिंह की जीत होगी ये पार्टी और समर्थक जान रहे थे. वे जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे. जब दुलारचंद यादव की हत्या हुई तो आरोप लगने के बाद अनंत सिंह जेल चले गए थे और ऐसे में वे प्रचार नहीं कर पाए थे. उनके लिए ललन सिंह जैसे नेताओं ने क्षेत्र में जनसभा की थी. नतीजा आया तो बंपर अंतर से अनंत सिंह की जीत हुई.

    अनंत सिंह से पहले उनकी पत्नी मोकामा से विधायक थीं. उपचुनाव में उन्हें जीत मिली थी. 2025 के चुनाव के दौरान जब अनंत सिंह जेल से बाहर थे तो उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया. जेडीयू से टिकट मिला तो उनके सामने आरजेडी की ओर से वीणा देवी को पार्टी ने उतार दिया. हालांकि वह जीत नहीं पाईं. अब अनंत सिंह को शपथ के लिए मौका मिल गया है. नतीजे आने के बाद जेल में रहने के चलते वे शपथ नहीं ले पाए थे. अनंत सिंह हमेशा चर्चा में रहते हैं. अभी कुछ दिनों पहले सिगरेट पीते हुए उनका एक वीडियो सामने आया था जिसके बाद विपक्ष ने घेरा भी था.

  • बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह

    बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह


    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा का बजट सत्र आज 2 फरवरी 2026 से शुरू हो गया और पहले दिन ही चर्चा का केंद्र बने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। उन्हें व्हीलचेयर पर विधानसभा परिसर में आते देखा गया।  RJD ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तेजस्वी यादव के पैर में चोट लगी है। पार्टी के अनुसार यह चोट 25 जनवरी को लगी थी, जिससे उनके पैर के अंगूठे का नाखून उखड़ गया। चोट के कारण उन्हें चलने और लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई हो रही है। तेजस्वी यादव फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने विधानसभा में व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया।

    बजट सत्र का पहला दिन
    सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से सेंट्रल हॉल में संबोधित किया। वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव 3 फरवरी को वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इस बजट सत्र में न केवल वित्तीय मुद्दों पर चर्चा होगी बल्कि विकास योजनाओं और विभिन्न विभागों के बजट पर भी बहस होगी। यह सत्र 27 फरवरी तक चलेगा।

    विपक्ष की एकजुटता पर रहेगी नजर

    तेजस्वी यादव को शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष चुना गया था, लेकिन कांग्रेस ने RJD से दूरी बनाकर अलग रणनीति अपनाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट सत्र में विपक्ष एकजुट होकर मुद्दों पर आवाज उठाता है या अलग-अलग रुख अपनाता है। AIMIM पहले ही विपक्ष से अलग हो चुकी है।

  • केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला

    केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला


    नई दिल्ली । आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला किया है. एक्स पर पोस्ट करते हुए शनिवार 31 जनवरी, 2026 को तेजस्वी यादव ने कहा कि नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता. पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज्ड तंत्र की विफलता है जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते हैं.

    उन्होंने कहा नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जांच भी बंद कर दी. यही इस मामले में होना है. कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा  क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होंगी

    चरित्र हनन तक की कोशिश: मनोज झा
    उधर बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नीट छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आग्रह पर आरजेडी सासंद मनोज कुमार झा ने कहा बिहार में आज के दिन स्थिति ठीक नहीं है. इस घटना में भी चरित्र हनन तक की कोशिश की गई. अब आप छलावरण कर रहे हैं.

    सरकार की नीयत साफ: विजय कुमार सिन्हा

    बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “सरकार की नीयत साफ है. हमने ईमानदारी से जांच करने का प्रयास किया. पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं था इसलिए मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया गया. पूरी तरह से न्याय मिले, ये सरकार सुनिश्चित कर रही है. वहीं सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि देर से उठाया सही कदम पर इस मामले में तत्काल उच्च न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए! अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव लिखते हैं इस मामले में कई बड़े-बड़े को बचाने के लिए घृणित स्तर तक खेल चला है इसमें सबको बेनकाब करना जरूरी है! मनीष के पीछे कौन है DGP साहब?

  • नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत

    नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत


    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर सामने आए एक वीडियो ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह नीतीश कुमार की मौजूदगी में निशांत कुमार से कहते नजर आ रहे हैं
    “अब बोल दीजिए कि मान जाएंगे, आज बोल ही दीजिए।” इस एक लाइन ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है।

    दरअसल, शुक्रवार को पटना में एक पूजा स्थल पर नीतीश कुमार दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां निशांत कुमार पहले से मौजूद थे। उसी दौरान ललन सिंह, विजय चौधरी समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे। बातचीत के दौरान ललन सिंह ने निशांत के कंधे पर हाथ रखकर यह बात कही। हालांकि, निशांत कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।

    नीतीश कुमार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी और पूजा में लीन रहे। मौके पर मौजूद लोग इस बातचीत पर मुस्कुरा दिए, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद जदयू और भाजपा दोनों दलों में बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि वीडियो का संदर्भ स्पष्ट नहीं है और यह जरूरी नहीं कि बात राजनीति में आने को लेकर ही हो। वहीं प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे और सक्षम युवा हैं, लेकिन राजनीति में आने का फैसला पूरी तरह उनका और पार्टी नेतृत्व का होगा।

    भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।

    भाजपा नेता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि निशांत कुमार में क्षमता है और अगर वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय निशांत कुमार का ही होगा और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार के राजनीतिक डेब्यू की चर्चा हुई हो।

    इससे पहले भी जदयू नेताओं और समर्थकों की ओर से पोस्टर, उपवास और नारेबाज़ी के जरिए उन्हें राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी निशांत की वकालत कर चुके हैं।

    फिलहाल, नीतीश कुमार और निशांत कुमार की खामोशी बनी हुई है, लेकिन ललन सिंह का यह बयान बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर गया हैक्या निशांत कुमार जल्द सियासी मैदान में उतरेंगे या यह चर्चा यूं ही चलती रहेगी

  • नीतीश के दोनों डिप्टी सीएम उनसे अमीर, सम्राट के पास कैश तो विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी

    नीतीश के दोनों डिप्टी सीएम उनसे अमीर, सम्राट के पास कैश तो विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी


    नई दिल्ली। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत सभी मंत्रियों ने अपने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास दोनों डिप्टी सीएम से कम संपत्ति है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 1 करोड़ 65 लाख रुपए की संपत्ति के मालिक हैं. उनके पास महज 20 हजार रुपए नकद हैं. दिल्ली के द्वारका में एक फ्लैट है, जिसकी कीमत 1 करोड़ 48 लाख रुपए है. साथ ही उनके पास दस गाय है. दो लाख रुपए की ज्वेलरी भी है, जिसमें 2 सोने की अंगूठी 1 चांदी की अंगूठी भी है. 10 साल पुरानी एक फोर्ड इकोस्पोर्ट कार है, जिसकी कीमत 11 लाख 32 हजार रुपए है.
    वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास नीतीश के मुकाबले करीब 7 गुना अधिक कैश है. उनके पास 1 लाख 35 हजार की नकदी है, उनकी पत्नी कुमारी ममता के पास 35 हजार की नकदी है. सम्राट चौधरी के बैंक खातों में 17 लाख 45 हजार 488 रुपए जमा है. उनकी पत्नी के खाते में 6 लाख 43 हजार बेटी के खाते में 1 लाख 34 हजार, बेटे प्रणय के खाते में 1 लाख 8 हजार रुपए जमा हैं.
    बॉन्ड और इंश्योरेंस में निवेश, हथियार के शौकीन हैं सम्राट
    सम्राट चौधरी ने बॉन्ड्स में 31 लाख रुपए का निवेश किया है. निप्पोन इंडिया, फ्रैंकलिन इंडिया और HDFC के बॉन्ड में उन्होंने निवेश किया है. वहीं 19 लाख रुपए LIC में निवेश किए हैं. राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी के पास NP बोर रायफल है जिसकी कीमत 4 लाख रुपए है. वहीं पिता शकुनि चौधरी की दी हुई रिवॉल्वर भी है. इसकी कीमत 2 लाख रुपए है.डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पास 88 हजार 560 रुपए की नकदी है, वहीं उनकी पत्नी सुशीला देवी के पास 67 हजार 528 रुपए कैश हैं. विजय सिन्हा के पास करीब 1 करोड़ की चल संपत्ति है. वहीं उनकी पत्नी के पास 1 करोड़ 73 लाख रुपए की चल संपत्ति है. इसमें बैंक खातों में जमा राशि, शेयर्स और गहने शामिल हैं.

    विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास दो लाख रुपए की ज्वेलरी है, जिसमें 2 सोने की अंगूठी, 1 चांदी की अंगूठी है. सम्राट चौधरी के पास पास 20 लाख रुपए का सोना, पत्नी के पास भी 20 लाख का सोना और 75 हजार मूल्य की चांदी है. वहीं विजय सिन्हा के पास 9 लाख 90 हजार के गहने हैं. उन्होंने बताया है कि यह उन्हें शादी के वक्त तोहफे में मिले थे. वहीं उनकी पत्नी के पास 49 लाख 50 हजार रुपए के गहने हैं.
  • तेजू भैया से रंगदारी मांगने की हिम्मत कौन कर गया? थाने में दर्ज कराया केस, मच गया सियासी शोर

    तेजू भैया से रंगदारी मांगने की हिम्मत कौन कर गया? थाने में दर्ज कराया केस, मच गया सियासी शोर


    नई दिल्ली । पटनाः जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप ने अपने ही दल के पूर्व प्रवक्ता रहे संतोष रेणु यादव के खिलाफ सचिवालय थाना में गंभीर आरोपों के साथ मामला दर्ज कराया. तेज प्रताप ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकी दी गई और उनसे रंगदारी की मांग की गई है. इस शिकायत के सामने आते ही राजधानी की राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया. तेज प्रताप की शिकायत के मुताबिक, संतोष रेणु यादव द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था और फोन कॉल के जरिए रंगदारी की मांग की गई. साथ ही उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई.
    सचिवालय थाना पुलिस ने इस मामले में आवेदन के आधार पर सनहा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है. दूसरी ओर, संतोष रेणु यादव ने भी पलटवार करते हुए बेऊर थाना में आवेदन देकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है. संतोष रेणु यादव का कहना है कि उन्हें झूठे आरोपों में उलझाकर बदनाम किया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है. उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है.
    संतोष रेणु यादव क्या बोले?

    संतोष रेणु यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं. माधव सेवा के अध्यक्ष के रूप में लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि तेज प्रताप द्वारा उन्हें बदनाम करने और झूठे केस में फंसाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि वे कानून में भरोसा रखते हैं और सच सामने आएगा. दोनों पक्षों की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है. सिटी एसपी (पश्चिमी) पटना भानु प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों तरफ से लिखित आवेदन मिले हैं. पुलिस ने दोनों मामलों में सनहा दर्ज कर लिया है और सभी आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
    क्या है पूरा मामला
    पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पार्टी के अंदर ही इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा हो गया. दरअसल, जनशक्ति जनता दल से जुड़े नेता तेज प्रताप ने सचिवालय थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए संतोष रेणु यादव पर धमकी देने और रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है. वहीं, संतोष रेणु यादव ने बेऊर थाना में आवेदन देकर कहा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है. दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अब पूरे मामले पर सबकी नजर पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है.
  • पटना हिजाब विवाद: PDP ने नीतीश कुमार के खिलाफ FIR की मांग की, महिला सम्मान मुद्दा बना राजनीति का केंद्र

    पटना हिजाब विवाद: PDP ने नीतीश कुमार के खिलाफ FIR की मांग की, महिला सम्मान मुद्दा बना राजनीति का केंद्र


    नई दिल्ली
    ।पटना में हिजाब विवाद ने एक बार फिर राजनीति और सामाजिक चर्चा में उबाल ला दिया है। हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे महिला सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है।

    जम्मू-कश्मीर की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP ने इस घटना को गंभीर मानते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराने का फैसला किया है। PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। PDP का कहना है कि यह केवल धार्मिक पहचान का मामला नहीं है बल्कि महिलाओं के सम्मान, गरिमा और निजता से जुड़ा है।

    दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर जब मंच पर पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर उनके चेहरे से हिजाब हटा दिया। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद देशभर में इस पर प्रतिक्रियाएं आईं और विपक्ष ने इसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।इस मामले पर PDP की इल्तिजा मुफ्ती ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि क्या बिहार सरकार महिलाओं के सम्मान और अपमान में फर्क नहीं समझती। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सत्ता के अहंकार का परिचायक है और महिलाओं की निजता पर चोट पहुंचाता है। PDP का यह भी कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति से इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है।

    हिजाब विवाद तब और बढ़ गया जब केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए बयान दिया कि नियुक्ति पत्र लेने के लिए चेहरा दिखाना अनिवार्य है और मुख्यमंत्री ने अभिभावक की तरह व्यवहार किया। इस बयान के बाद इल्तिजा मुफ्ती ने प्रतिक्रिया दी कि गिरिराज सिंह का बयान अपमानजनक और असंवेदनशील है।PDP का कहना है कि यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाया जाएगा। FIR दर्ज होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस विवाद ने एक बार फिर से राजनीति, धर्म और महिला सम्मान के सवाल को केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासी हलचल तेज रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बिहार में आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि महिलाओं की निजता और धार्मिक पहचान का सम्मान करना हर नागरिक और पदाधिकारी की जिम्मेदारी है।इस विवाद ने साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया और वायरल वीडियो अब किसी भी राजनीतिक घटना को राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बना सकते हैं। PDP का कहना है कि वह कानून के दायरे में रहते हुए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी और इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचाएगी।

  • सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा

    सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा


    नई दिल्ली।
    बिहार की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक आस्था महिला सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया है। आयुष चिकित्सकों के नियुक्तिपत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला चिकित्सक से हिजाब हटाने को कहे जाने की घटना अब राज्य से बाहर तक चर्चा का विषय बन गई है। इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया है कि सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को धमकी देने का वीडियो सामने आया है जिसकी जांच बिहार पुलिस ने शुरू कर दी हैबताया जा रहा है कि पाकिस्तान के कुख्यात डॉन शहजाद भट्टी की ओर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुलेआम धमकी दी गई है। वीडियो में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें अन्यथा भविष्य में होने वाली घटनाओं की शिकायत न करें। इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए बिहार पुलिस के साइबर थाना को जांच सौंपी गई है।

    डीजीपी विनय कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वीडियो की सत्यता और उसके स्रोत की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आर्थिक अपराध इकाईईओयू के अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान ने कहा कि ईओयू का साइबर प्रभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि जिस महिला आयुष चिकित्सक को नियुक्तिपत्र देने के दौरान मुख्यमंत्री ने हिजाब हटाने को कहा था उसने नौकरी ज्वॉइन न करने का फैसला किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। न तो संबंधित महिला चिकित्सक की ओर से कोई सार्वजनिक बयान आया है और न ही विभाग की तरफ से इस पर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है।

    विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियुक्तिपत्र मिलने के बाद ज्वॉइनिंग के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद भवन में आयुष चिकित्सकों का नियुक्तिपत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कुल 1283 नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्तिपत्र सौंपे गए थे जिनमें से 10 चिकित्सकों को प्रतीकात्मक रूप से मुख्यमंत्री ने स्वयं नियुक्तिपत्र दिया था।हिजाब विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दलराजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटना को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि नियुक्तिपत्र वितरण जैसे गरिमामय कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला से हिजाब हटाने को कहना न केवल महिला सम्मान के खिलाफ है बल्कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति सरकार की सोच को भी दर्शाता है। एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री और सरकार से इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    वहीं सत्तारूढ़ जनता दलयूनाइटेड ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जदयू के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेटियों के सशक्तीकरण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने हर धर्म जाति और वर्ग की महिलाओं की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति के लिए लगातार काम किया है। नीरज कुमार ने राजद पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को पहले अपने अतीत पर नजर डालनी चाहिए। फिलहाल हिजाब विवाद महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा और पाकिस्तान से आई धमकी-इन तीनों मुद्दों ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगी।

  • हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    नई दिल्ली/श्रीनगर।एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम युवती का हिजाब हटाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। इस मामले ने अब राष्ट्रीय राजनीति में भी तूल पकड़ लिया है। जम्मूकश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार की आलोचना की है और इसे शर्मनाकअस्वीकार्य और पिछड़ी सोच का प्रतीक बताया है। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में किसी महिला के पहनावे को लेकर सार्वजनिक तौर पर दखल देना गलत है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल महिला की गरिमा के खिलाफ हैबल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आज़ादी पर भी सीधा हमला है।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती से जुड़ी एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में सत्ता के दौरान ऐसी सोच पहले भी सामने आती रही है।उन्होंने कहा मेरे चुनाव के समय भी एक घटना सामने आई थीजब एक वैध महिला वोटर का पोलिंग स्टेशन के अंदर बुर्का हटवाया गया था। यह उसी मानसिकता का हिस्सा है। तब जो हुआवह दुर्भाग्यपूर्ण था और आज जो नीतीश कुमार के मामले में हुआ हैवह भी उतना ही शर्मनाक है।

    महिला का सार्वजनिक अपमान अस्वीकार्य

    नीतीश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसी महिला का सार्वजनिक रूप से अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद नियुक्ति पत्र नहीं देना चाहते थेतो वे ऐसा करने से इनकार कर सकते थेलेकिन किसी महिला को मंच पर इस तरह अपमानित करना पूरी तरह गलत है।उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को लंबे समय तक एक धर्मनिरपेक्षसंवेदनशील और समझदार नेता के रूप में देखा गयालेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी छवि पर सवाल खड़े करती हैं।उन्होंने कहा धीरेधीरे नीतीश कुमार की असली सोच सामने आ रही हैजिसे अब तक लोग अलग नजरिए से देखते थे।

    लोकतंत्र और व्यक्तिगत आज़ादी पर सवाल
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसारयह विवाद केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैबल्कि यह महिलाओं के अधिकारधार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद जैसे मुद्दों से जुड़ा हुआ है। उमर अब्दुल्ला का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि देश में सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। वित्तीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को भी घेराइस दौरान उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की राज्यों के वित्तीय अनुशासन पर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मूकश्मीर को विरासत में मिली आर्थिक चुनौतियों के साथ काम करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद जम्मूकश्मीर को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी नहीं मिल रही हैजिससे बजट पर दबाव बढ़ा है।उमर अब्दुल्ला ने कहाहम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हैं और केंद्र सरकार पर निर्भर हैं। इसके बावजूद हमने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।

    वित्तीय जिम्मेदारी का दावा
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले 15–16 महीनों में उनकी सरकार ने किसी भी तरह की वित्तीय लापरवाही नहीं की है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का एक भी मामला सामने आता हैतो वह खुद जवाबदेही लेने को तैयार हैं। हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का बयान न केवल नीतीश कुमार की आलोचना हैबल्कि यह महिलाओं की गरिमाव्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है। यह मामला आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।