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  • प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया नया रिकॉर्ड सीएम योगी बोले जनविश्वास का प्रतीक है यह ऐतिहासिक उपलब्धि

    प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया नया रिकॉर्ड सीएम योगी बोले जनविश्वास का प्रतीक है यह ऐतिहासिक उपलब्धि



    नई दिल्ली: 
    प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। वे अब भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं। इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उन्हें बधाई देते हुए इसे जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि 145 करोड़ भारतीयों की सेवा में निरंतर समर्पित प्रधानमंत्री मोदी अब देश के सबसे लंबे समय तक शासन प्रमुख रहने वाले नेता बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जनता के गहरे विश्वास और समर्थन को दर्शाती है।

    अपने संदेश में Yogi Adityanath ने यह भी उल्लेख किया कि Narendra Modi का नेतृत्व ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ जैसे मंत्रों को भारत की प्रगति का आधार बताया और कहा कि देश ने विकास और सुशासन के नए आयाम स्थापित किए हैं।

    सीएम योगी ने अपने संदेश के अंत में भगवान श्रीराम से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे।

    इससे पहले भाजपा के आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने भी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए अब 8931 दिनों तक सार्वजनिक पद पर रहते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

    Amit Malviya के अनुसार, इस अवधि में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि दशकों की निरंतर जनसेवा और मजबूत नेतृत्व को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं और स्वतंत्रता के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री हैं। साथ ही वे 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार विजेता रहे हैं, जो उनके प्रति जनता के भरोसे को दर्शाता है।

    यह उपलब्धि न केवल राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नेतृत्व, अनुभव और जनसमर्थन मिलकर किसी भी नेता को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं। Narendra Modi का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

  • यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज

    यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज


    नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार होने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने के लिए कैबिनेट में बड़े बदलाव कर सकती है। सूत्रों के अनुसारइस विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और साथ ही प्रदेश को तीसरा उपमुख्यमंत्री भी मिल सकता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकवर्तमान में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैंजबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों की अनुमति है। ऐसे में छह पद खाली हैंजिन्हें भरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगीबल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करना है।

    तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा क्यों?

    इस बार कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री को लेकर है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं-केशव प्रसाद मौर्यओबीसी वर्ग और बृजेश पाठकब्राह्मण वर्ग। सूत्रों के अनुसारतीसरे उपमुख्यमंत्री का पद अनुसूचित जातिSC समुदाय को दिए जाने की संभावना हैजिससे सामाजिक संतुलन को और मजबूत किया जा सके। इस पद के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद साध्वी निरंजन ज्योति का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती हैतो यह भाजपा की सामाजिक समरसता की राजनीति को और मजबूती देगा। साथ ही दलित समुदाय में पार्टी के संदेश को भी बल मिलेगा।

    सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस

    भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय को साधने के लिए भी सरकार कैबिनेट में कुछ बड़े चेहरे शामिल कर सकती है। इस संदर्भ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी चर्चा में है। वे पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

    बागी नेताओं को भी मिल सकता है मौका

    सूत्रों के मुताबिकइस कैबिनेट विस्तार में भाजपा के कुछ बागी नेताओंसमाजवादी पार्टी से अलगहोकर आएनेताओं और सहयोगी दलों-राष्ट्रीय लोक दलRLDऔर अपना दल-के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जा सकती है। संभावित नामों में पूजा पालमनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नेताओं की चर्चा है।राजनीतिक विश्लेषकों कामानना है कि बागीनेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा न सिर्फ विपक्ष की धार कमजोर करना चाहती हैबल्कि अपने राजनीतिक आधार को भी व्यापक बनाना चाहती है।

    चुनावी रणनीति से जुड़ा है विस्तार

    विशेषज्ञों के अनुसारयह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इससे सरकार को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सामाजिकक्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने में मदद मिलेगी। नए चेहरों को मौका देकर संगठन के भीतर भी उत्साह बढ़ाया जा सकता है।हालांकिमंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई हैलेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर मुहर लग सकती है। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।