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  • ‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला

    ‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद जहां दर्शकों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं अक्षय कुमार की फीस को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने इस फिल्म के लिए करीब 1.7 से 1.8 करोड़ रुपये की फीस ली है। अब खुद अक्षय कुमार ने इन चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है।

    ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान जब मीडिया ने उनसे उनकी फीस को लेकर सवाल किया तो अक्षय कुमार ने मुस्कुराते हुए इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसने कहा है ये? आपने कहा 1.7 करोड़? मैंने इतने नहीं लिए, ना ही मुझे इतने मिले हैं।” अक्षय के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    अक्षय कुमार ने इस मौके पर फिल्म से जुड़े अपने भावनात्मक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यादों से जुड़ा एक खास अध्याय है। अभिनेता ने दिवंगत लेखक और निर्देशक नीरज वोहरा को याद करते हुए कहा कि उनकी कॉमेडी की समझ को निखारने में नीरज का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

    अक्षय ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी की बारीकियां तीन दिग्गजों से सीखी हैं प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और नीरज वोहरा। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार कहा है कि मेरी कॉमेडी की समझ इन तीन लोगों की वजह से बनी है। इनमें नीरज वोहरा का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। इस फिल्म से मेरा एक भावनात्मक जुड़ाव भी है क्योंकि इसी सफर में मैं उनके साथ जुड़ा था।”

    कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के साथ अपने लंबे रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह उन्हें पिछले 36 वर्षों से जानते हैं। अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह उस समय अक्सर फिरोज नाडियाडवाला के ऑफिस जाया करते थे। दिलचस्प अंदाज में अक्षय ने कहा, “मैं तब भी स्ट्रगल कर रहा था और आज भी स्ट्रगल कर रहा हूं।” उनके इस बयान ने दर्शकों और मीडिया का ध्यान खींचा।

    ‘वेलकम टू द जंगल’ मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के अलावा कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म में सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, रवीना टंडन, लारा दत्ता, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    गौरतलब है कि यह साल 2007 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘वेलकम’ का तीसरा भाग है। पहली फिल्म में अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर, नाना पाटेकर और परेश रावल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। इसके बाद 2015 में ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुई थी। अब लगभग एक दशक बाद ‘वेलकम टू द जंगल’ के जरिए यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक बार फिर हंसी और मनोरंजन का भरपूर डोज देने का वादा करती है।

  • समस्याओं को सुलझाने का आसान तरीका बताया, अमिताभ बच्चन का अनुभव आया सामने

    समस्याओं को सुलझाने का आसान तरीका बताया, अमिताभ बच्चन का अनुभव आया सामने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपने अनुशासन और कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने हालिया ब्लॉग में बताया कि वह देर रात तक काम करते हैं और कई बार सुबह 4 बजे तक अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहते हैं। 83 साल की उम्र में भी उनका काम के प्रति समर्पण पहले जैसा ही मजबूत है। ब्लॉग में उन्होंने फैंस को भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने और गर्मी में हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी।

    ‘प्रॉब्लम हमेशा प्रॉब्लम रहती है’  बिग बी का जीवन मंत्र
    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में समस्याओं को लेकर एक गहरी सोच साझा की। उनके अनुसार,
    “प्रॉब्लम की अच्छी बात यह है कि वे बाद में भी प्रॉब्लम ही रहती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत हल करने का दबाव नहीं होना चाहिए।” उनका कहना है कि हर समस्या हमें कुछ नया सिखाती है और समय के साथ हम उनसे निपटना सीखते हैं। यह अनुभव इंसान को अधिक समझदार बनाता है।

    पॉजिटिविटी और कॉन्फिडेंस पर जोर
    उन्होंने आगे लिखा कि जीवन में केवल समस्याओं को हल करना ही जरूरी नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
     बिग बी के अनुसार, कॉन्फिडेंस और पॉजिटिविटी ही वह आधार हैं, जिनसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। उनका मानना है कि अनिश्चितताएं ही जीवन को दिलचस्प और जीने योग्य बनाती हैं।

    लगातार सक्रिय है करियर
    वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन जल्द ही फिल्म सेक्शन 84 में नजर आ सकते हैं। इसके अलावा वह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट कल्कि 2898 एडी -पार्ट 2 का भी हिस्सा हैं, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया है। पहले भाग में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी, और दूसरे पार्ट से भी दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    एक प्रेरणा बने हुए हैं बिग बी
    समय बदल गया है, उम्र बढ़ गई है, लेकिन अमिताभ बच्चन का काम करने का जुनून और जीवन को देखने का नजरिया आज भी उतना ही मजबूत है। उनका यह संदेश कि “समस्याएं जीवन का हिस्सा हैं” हर उम्र के लोगों के लिए एक सीख की तरह है।

  • पत्नी के प्रति वफादारी पर बोले आर माधवन, दिया मजेदार और ईमानदार जवाब

    पत्नी के प्रति वफादारी पर बोले आर माधवन, दिया मजेदार और ईमानदार जवाब

    नई दिल्ली। अभिनेता आर. माधवन ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक दिलचस्प और बेहद साफगोई भरा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि पत्नी सरिता के साथ उनकी 27 साल लंबी शादी की मजबूत नींव भरोसे, ईमानदारी और आपसी समझ पर टिकी है। माधवन ने कहा कि उनके लिए लॉयल्टी कोई रणनीति नहीं, बल्कि परिवार से मिली हुई एक सीख है। उनके अनुसार, “मुझे लगता है लॉयल रहना हमारे परिवार की परंपरा में है। मेरा पूरा खानदान हमेशा अपनी जिम्मेदारियों के प्रति वफादार रहा है।”

    ‘डरपोक मद्रासी मिडल क्लास हूं’ -खुद को लेकर खुलकर बोले माधवन
    अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आर. माधवन ने हल्के-फुल्के अंदाज में खुद को “डरपोक मद्रासी मिडल क्लास आदमी” बताया। उन्होंने कहा कि वह भले ही आकर्षण महसूस करते हों, लेकिन अंत में उनके लिए परिवार और पत्नी ही सबसे अहम हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी पत्नी सरिता उनकी जिंदगी के कई अहम पहलुओं को संभालती हैं, यहां तक कि फाइनेंस और अकाउंट्स तक का जिम्मा भी उनके पास है।

    मणिरत्नम की सीख और रिश्तों की समझ
    माधवन ने फिल्मकार मणिरत्नम से मिली एक सलाह का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मणिरत्नम ने उन्हें कहा था कि जब रिश्ता अच्छा चल रहा हो, तो उसे बार-बार “टेस्ट” नहीं करना चाहिए। माधवन के मुताबिक, “कभी-कभी रिश्तों को परखने की कोशिश ही उन्हें खराब कर देती है। बेहतर है कि चीजों को स्वाभाविक रूप से चलने दिया जाए।

    शादी के वक्त भी रखा सच का रास्ता
    अभिनेता ने यह भी बताया कि जब उन्होंने सरिता से शादी की थी, तब वह अपने करियर के शुरुआती और सफल दौर में थे। उस समय उन्हें सलाह दी गई थी कि शादी को छिपाकर रखें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि रिश्तों में पारदर्शिता ही असली ताकत होती है। इसलिए उन्होंने कभी भी अपनी शादी को छिपाने की कोशिश नहीं की।

    प्रोफेशनल लाइफ में भी लगातार सक्रिय
    वर्क फ्रंट की बात करें तो आर. माधवन हाल ही में अपनी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी परफॉर्मेंस को लगातार सराहा जाता रहा है। आने वाले समय में वह कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं, जिनमें मल्टीस्टार कास्ट भी शामिल है।

  • सलमान के देर रात पोस्ट ने मचाया हलचल, वरुण धवन ने दिया मजेदार जवाब

    सलमान के देर रात पोस्ट ने मचाया हलचल, वरुण धवन ने दिया मजेदार जवाब


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के पीछे की सच्चाई पर बात की। उन्होंने कहा कि बाहर से एक्टर्स की जिंदगी जितनी ग्लैमरस दिखती है, अंदर से उतनी ही अकेली और दबाव से भरी होती है। वरुण के मुताबिक, “अक्सर 90 प्रतिशत एक्टर्स अकेलेपन का सामना करते हैं। स्टारडम का प्रेशर इतना होता है कि लोग मानसिक रूप से भी संघर्ष करते हैं, लेकिन यह सब बाहर नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें करियर की शुरुआत में ही इस हकीकत का एहसास हो गया था, इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वह ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन एक जैसी ही पर्सनैलिटी रखेंगे।

    ‘मैं वही हूं जो मैं हूं’ -वरुण की सोच
    वरुण धवन ने कहा कि उन्होंने कभी भी अलग-अलग पर्सनैलिटी बनाने की कोशिश नहीं की। उनके अनुसार, यह दिखावा मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा, “मैं वही हूं जो मैं यहां और वहां हूं। अगर आप अलग-अलग चेहरे बनाएंगे तो एक समय के बाद वह बबल फट जाता है और आप खुद को खो देते हैं।” वरुण ने यह भी माना कि सोशल मीडिया के दौर में लोग अब बहुत सोच-समझकर बोलते हैं, लेकिन वह खुद पहले की तरह बेझिझक बात करना पसंद करते हैं।

    सलमान खान के वायरल पोस्ट पर प्रतिक्रिया
    इंटरव्यू के दौरान वरुण धवन से सलमान खान के हाल ही में वायरल हुए देर रात के इंस्टाग्राम पोस्ट के बारे में भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि,“जब मैंने सलमान भाई के रात वाले पोस्ट देखे, तो वह अलग ही जोन में चले गए थे। उनका इशारा इस बात की ओर था कि कभी-कभी बड़े सितारे भी अपने निजी मूड या भावनात्मक स्थिति में सोशल मीडिया पर अलग तरह से प्रतिक्रिया दे देते हैं।

    सोशल मीडिया और सीमाओं की बात
    वरुण ने यह भी कहा कि आज के समय में हर चीज सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैलती है। ऐसे में कलाकारों को हर कदम सोचकर उठाना पड़ता है, क्योंकि एक छोटी सी बात भी बड़े विवाद में बदल सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे लोग आपको पसंद करें या आलोचना करें, सबसे जरूरी है कि इंसान अपनी असल पहचान बनाए रखे।

    फिल्मी करियर की बात
    वर्क फ्रंट की बात करें तो वरुण धवन की हालिया फिल्म “है जवानी तो इश्क होना है” रिलीज हो चुकी है, जिसमें उनके साथ पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है।

  • विक्रम भट्ट ने रिलेशनशिप और करियर पर की खुलकर बात, कहा- दोनों साथ नहीं चले

    विक्रम भट्ट ने रिलेशनशिप और करियर पर की खुलकर बात, कहा- दोनों साथ नहीं चले


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर और हॉरर फिल्मों के लिए जाने जाने वाले विक्रम भट्ट एक बार फिर अपने निजी जीवन को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने पुराने रिश्तों, खासकर सुष्मिता सेन और अमीषा पटेल के साथ डेटिंग को लेकर खुलकर बातचीत की।

    विक्रम भट्ट ने बताया कि उनके जीवन का एक दौर ऐसा भी था जब पेशेवर सफलता और निजी जीवन दोनों ही एक साथ उलझे हुए थे। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों ने तो सफलता हासिल की, लेकिन उनकी रिलेशनशिप्स लंबे समय तक नहीं टिक सकीं। इसी बात को मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा, “मेरी फिल्में तो चलीं, लेकिन रिलेशनशिप नहीं।”

    विक्रम भट्ट और सुष्मिता सेन की मुलाकात 1996 में फिल्म ‘दस्तक’ के सेट पर हुई थी। उस समय विक्रम, महेश भट्ट को असिस्ट कर रहे थे और सुष्मिता अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं। वहीं से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और डेटिंग शुरू हुई, लेकिन कुछ समय बाद यह रिश्ता खत्म हो गया।

    इसी तरह विक्रम भट्ट का नाम एक्ट्रेस अमीषा पटेल के साथ भी जुड़ा। दोनों ने साल 2002 से 2007 के बीच एक-दूसरे को डेट किया। हालांकि यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका।

    इंटरव्यू के दौरान विक्रम भट्ट ने अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थे। उनके पास साधारण जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं होते थे। उन्होंने कहा, “मैं स्ट्रगलिंग डायरेक्टर था, कई बार हालात ऐसे थे कि मेरे पास सीडी खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे।”

    उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग उन्हें सफल समझ रहे थे, तब भी उनकी जिंदगी आसान नहीं थी। उन्होंने कहा कि उसी दौर में वह सुष्मिता सेन जैसी बड़ी हस्ती को डेट कर रहे थे, लेकिन अंदर से वह संघर्ष कर रहे थे।

    विक्रम ने आगे कहा कि उनके जीवन में जो भी लोग आए, उन्होंने कुछ न कुछ अच्छा ही दिया। उनके मुताबिक, हर रिश्ता एक सीख लेकर आया। चाहे वह प्यार हो, समय हो या जीवन का अनुभव—हर किसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है।

    उन्होंने अपने पुराने रिश्तों को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई, बल्कि उन्हें सकारात्मक अनुभव बताया। विक्रम भट्ट ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें केवल प्यार और सीख ही नजर आती है।

    अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि असली जीत फिल्मों और मेहनत की होती है, क्योंकि वही समय के साथ लोगों को याद रहती है, जबकि निजी जीवन की कहानियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं।

  • शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे।

    किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया

    फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था।

    ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’

    ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी।

    एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल

    फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था।

    15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।

  • “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस

    “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में इन दिनों दो बड़ी फिल्मों-Ranbir Kapoor की ‘रामायण’ और Priyanka Chopra की फिल्म ‘वाराणसी’-को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दोनों फिल्मों के कथित बजट को लेकर सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री तक लगातार बहस चल रही है। इसी बीच मनोज बाजपेयी ने इन चर्चाओं को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि फिल्मों के बड़े बजट की बातें अक्सर “पीआर का जरिया” बन जाती हैं और पिछले कई वर्षों से यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। उनका कहना है कि दर्शकों को इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि किसी फिल्म का बजट कितना है, बल्कि यह देखना चाहिए कि फिल्म उन्हें पसंद आई या नहीं।

    “दर्शकों को सिर्फ फिल्म से मतलब होना चाहिए”
    मनोज बाजपेयी ने कहा कि आजकल दर्शक एयरपोर्ट या सार्वजनिक जगहों पर उनसे फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नंबर तक पूछते हैं। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे कई बार लोगों को डांट भी देते हैं। उनके अनुसार, “अगर बॉक्स ऑफिस का पैसा दर्शकों के बैंक अकाउंट में नहीं जा रहा, तो उन्हें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रोड्यूसर्स और मेकर्स का मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शकों का फिल्म से सिर्फ इतना संबंध होना चाहिए कि उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं।

    4000 करोड़ और 1400 करोड़ के बजट पर चर्चा
    इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा ‘रामायण’ के बजट की हो रही है, जिसे लगभग 4000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। वहीं ‘वाराणसी’ का बजट करीब 1400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे यह भी बड़े पैमाने की फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। इन आंकड़ों ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है-क्या इतने बड़े बजट वास्तव में जरूरी हैं या यह सिर्फ प्रचार का हिस्सा हैं?

    फिल्मों के बिजनेस पर भी उठे सवाल
    मनोज बाजपेयी ने यह भी कहा कि 500-600 करोड़ या हजारों करोड़ रुपये के आंकड़ों पर दर्शकों को ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्म के बिजनेस का असर केवल प्रोड्यूसर्स और निवेशकों पर पड़ता है, आम दर्शकों पर नहीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आजकल फिल्मों के बजट और कमाई के आंकड़े कई बार चर्चा बढ़ाने और फिल्म को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    दिवाली और 2027 में रिलीज की तैयारी
    ‘रामायण’ का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने की संभावना है, जिसे डायरेक्टर Nitesh Tiwari निर्देशित कर रहे हैं। वहीं ‘वाराणसी’ फिल्म 2027 में रिलीज होने की उम्मीद है, जिसका निर्देशन S. S. Rajamouli कर रहे हैं। दोनों फिल्मों को लेकर पहले से ही दर्शकों में भारी उत्साह है और अब बजट विवाद ने इन प्रोजेक्ट्स को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

    मनोज बाजपेयी का बयान एक बार फिर इस बहस को हवा दे गया है कि क्या भारतीय सिनेमा में बढ़ते बजट वाकई गुणवत्ता का संकेत हैं या सिर्फ मार्केटिंग रणनीति। फिलहाल, दर्शक इन बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

  • रणवीर सिंह ने घटाई फीस, लेकिन मुनाफे में हिस्सेदारी से करेंगे बड़ी कमाई

    रणवीर सिंह ने घटाई फीस, लेकिन मुनाफे में हिस्सेदारी से करेंगे बड़ी कमाई


    नई दिल्ली। रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म सीरीज ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। फिल्म की को-प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने खुलासा किया कि रणवीर ने इस प्रोजेक्ट के लिए पारंपरिक तरीके से बड़ी फीस नहीं ली थी। इसके बजाय उन्होंने एक छोटी निश्चित फीस के साथ “बैकएंड डील” यानी फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी का विकल्प चुना। यही रणनीति बाद में उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई।

    निर्देशक आदित्य धर ने भी लिया रिस्क
    फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने भी इसी मॉडल को अपनाया। उन्होंने भी कम फिक्स्ड फीस लेकर फिल्म के लाभ में हिस्सेदारी स्वीकार की।निर्माताओं के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों की सफलता में सीधी भागीदारी हो और सभी का फोकस बेहतर परिणाम देने पर रहे।

    जब बजट बढ़ा, लेकिन दांव सफल रहा
    ज्योति देशपांडे के मुताबिक फिल्म का वास्तविक खर्च शुरुआती अनुमान से काफी अधिक हो गया था। शुरुआत में जो बजट तय किया गया था, वह बाद में लगभग दोगुना हो गया। हालांकि फिल्म की शानदार कमाई ने इस जोखिम को सफलता में बदल दिया और निवेशकों से लेकर कलाकारों तक सभी को इसका लाभ मिला।

    एक फिल्म से बनी दो फिल्मों की फ्रेंचाइजी
    निर्माताओं का कहना है कि शुरुआत में ‘धुरंधर’ को एक ही फिल्म के रूप में बनाया जा रहा था। लेकिन पहले शेड्यूल की शूटिंग पूरी होने के बाद कहानी और फुटेज का दायरा इतना बढ़ गया कि इसे दो भागों में रिलीज करने का फैसला लिया गया। यही निर्णय बाद में फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।

    शानदार स्टारकास्ट ने बढ़ाई फिल्म की ताकत
    फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, गौरव गेरा, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकार नजर आए।

    रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई ‘धुरंधर 2
    रिपोर्ट्स के अनुसार ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ ने मिलकर दुनिया भर में लगभग 3000 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वहीं ‘धुरंधर 2’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। इस सूची में शीर्ष स्थान पर दंगल बनी हुई है।

    ‘धुरंधर’ की सफलता यह दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में केवल बड़ी फीस ही कमाई का रास्ता नहीं होती। सही रणनीति, जोखिम उठाने की क्षमता और मुनाफे में हिस्सेदारी का मॉडल कलाकारों और निर्माताओं दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

  • ‘फिल्म इंडस्ट्री से दूरी जरूरी थी’ – भारत भाग्य विधाता से पहले कंगना रनौत का बड़ा बयान, जानिए वजह

    ‘फिल्म इंडस्ट्री से दूरी जरूरी थी’ – भारत भाग्य विधाता से पहले कंगना रनौत का बड़ा बयान, जानिए वजह


    नई दिल्ली। अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर चल रहे प्रमोशन के दौरान कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक रहने के बाद अक्सर कलाकार एक “बबल” में जीने लगते हैं, जहां वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के किरदार में खुद को ढालना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि इस भूमिका को सही तरीके से निभाने के लिए वास्तविक जीवन के अनुभव जरूरी हैं।

    नर्स के किरदार ने बदला नजरिया
    कंगना इस फिल्म में एक नर्स का किरदार निभा रही हैं, जो 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह किरदार केवल अभिनय नहीं, बल्कि “एक तरह की तपस्या” जैसा अनुभव था। उनके मुताबिक, मिडल क्लास बैकग्राउंड से आने के बावजूद लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में रहने के कारण असल जिंदगी से दूरी बढ़ जाती है।

    राजनीति और आम लोगों से जुड़ाव का असर
    कंगना रनौत ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीति से जुड़े रहने के कारण उन्हें आम लोगों से सीधे बातचीत का मौका मिला, जिससे उनके अभिनय में और गहराई आई। उनके अनुसार, एक कलाकार के लिए सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि समाज की वास्तविकता को समझना भी जरूरी है।

    फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ पर चर्चा तेज
    फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म में कंगना का किरदार मुंबई हमलों के दौरान मेडिकल स्टाफ की भूमिका पर केंद्रित है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कंगना रनौत का कहना है कि वास्तविक जीवन से दूरी कभी-कभी कलाकारों के लिए जरूरी हो सकती है, ताकि वे अपने किरदारों को ज्यादा प्रामाणिक तरीके से निभा सकें। ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए वह एक बार फिर गंभीर और संवेदनशील भूमिका में नजर आने वाली हैं।

  • ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

    ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । अभिनेता Ranveer Singh और फिल्म Don 3 को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। वरिष्ठ फिल्म निर्माता T.P. Aggarwal ने Federation of Western India Cine Employees द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ घोषित गैर-सहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) के फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    क्या है मामला?
    रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह के डॉन 3 से अलग होने के बाद FWICE ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा की थी। संगठन का कहना था कि मामला सुलझने तक उससे जुड़े सदस्य अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे।

    टीपी अग्रवाल ने क्या कहा?
    पूर्व Film Federation of India अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में FWICE और Indian Motion Picture Producers Association के खिलाफ याचिका दायर की है।

    उनका तर्क है कि किसी भी फिल्म संगठन या ट्रेड बॉडी को किसी कलाकार को काम करने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले कलाकारों की आजीविका, काम करने की स्वतंत्रता और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सीधा असर डालते हैं।

    विवाद की जड़
    साल 2023 में रणवीर सिंह को डॉन 3 में नए डॉन के रूप में कास्ट किया गया था। फिल्म के निर्देशक Farhan Akhtar ने इसका टीजर भी जारी किया था, जिसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बाद में खबरें आईं कि रचनात्मक मतभेदों के चलते रणवीर इस प्रोजेक्ट से दूर हो गए।

    अब आगे क्या?
    मामला अब अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट फिल्म संगठनों की शक्तियों और कलाकारों के काम करने के अधिकार को लेकर क्या रुख अपनाती है। इस फैसले का असर भविष्य में फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और संगठनों के बीच होने वाले विवादों पर भी पड़ सकता है।

    यह मामला केवल रणवीर सिंह तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि फिल्म उद्योग में ट्रेड बॉडी की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ सकता है।