Tag: Bollywood news

  • बॉलीवुड में शोक की लहर, संजय गुप्ता को याद कर भावुक हुए ऋतिक और अमिताभ, बोले इतनी जल्दी चले गए दोस्त

    बॉलीवुड में शोक की लहर, संजय गुप्ता को याद कर भावुक हुए ऋतिक और अमिताभ, बोले इतनी जल्दी चले गए दोस्त


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक संजय गुप्ता के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार को मुंबई स्थित अपने घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से फिल्मी दुनिया ने एक ऐसे निर्देशक को खो दिया है जिन्होंने अपनी अलग कहानी कहने की शैली और दमदार फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड के कई सितारों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। इस बीच अभिनेता ऋतिक रोशन और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की भावुक प्रतिक्रियाओं ने सभी का ध्यान खींचा है। दोनों कलाकारों ने संजय गुप्ता को याद करते हुए उनके साथ बिताए पलों और उनके व्यक्तित्व से जुड़ी यादें साझा की हैं।

    अभिनेता ऋतिक रोशन ने निर्देशक संजय गुप्ता के निधन पर सोशल मीडिया के जरिए अपना दुख जाहिर किया। ऋतिक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर संजय गुप्ता की एक तस्वीर साझा की और एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि संजय को वह हमेशा याद करेंगे और उनके साथ केवल एक फिल्म करना काफी नहीं था। ऋतिक के इस बयान से साफ जाहिर हुआ कि दोनों के बीच केवल निर्देशक और अभिनेता का रिश्ता नहीं था बल्कि एक अच्छी दोस्ती और आपसी सम्मान भी था।

    ऋतिक ने अपने संदेश में संजय की हंसी उनके जुनून और उनके भीतर छिपे उस बच्चे का जिक्र किया जो किसी नए और अच्छे विचार को सुनकर उत्साहित हो जाता था। अभिनेता ने लिखा कि उन्हें संजय के साथ अभी बहुत कुछ करना था लेकिन उनका इस तरह चले जाना बेहद दुखद है। ऋतिक के मुताबिक वह उनके साथ बिताए समय को हमेशा प्यार से याद रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि काश वह संजय को आखिरी बार और कसकर गले लगा पाते और फिल्म काबिल के जरिए उन्हें जिंदगी का बेहतरीन अनुभव देने के लिए धन्यवाद कह पाते।

    ऋतिक ने फिल्म काबिल में संजय गुप्ता के योगदान को याद करते हुए कहा कि शायद कोई पूरी तरह नहीं समझ पाएगा कि निर्देशक ने इस फिल्म में अपना कितना कुछ लगाया था। अभिनेता ने संजय को दोस्त बताते हुए उनके प्रति आभार जताया और उनके परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत मिलने की प्रार्थना की। ऋतिक का यह संदेश पढ़कर उनके प्रशंसक भी भावुक हो गए।

    वहीं अमिताभ बच्चन ने भी संजय गुप्ता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने ब्लॉग पर निर्देशक को याद करते हुए उन्हें मित्र और सहपाठी बताया। अमिताभ ने लिखा कि एक मित्र एक सहपाठी एक कलाकार और कला का पुजारी इतनी कम उम्र में दुनिया छोड़कर चला गया। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि समझ में नहीं आ रहा कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है।

    अमिताभ बच्चन ने संजय गुप्ता की याद में एक कविता भी लिखी। उनकी इन पंक्तियों में अपनों के लगातार बिछड़ने का दर्द और जिंदगी की अनिश्चितता साफ झलकती है। कविता के जरिए उन्होंने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की और दोस्त को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

    संजय गुप्ता का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति है। ऋतिक रोशन और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों की भावुक श्रद्धांजलि बताती है कि संजय ने अपने काम के साथ लोगों के दिलों में भी खास जगह बनाई थी। उनकी फिल्में और उनसे जुड़ी यादें हमेशा प्रशंसकों और फिल्मी दुनिया के लोगों के बीच जीवित रहेंगी।

  • सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द

    सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द


    नई दिल्ली। फिल्मी दुनिया में प्रकाश राज अपनी दमदार अदाकारी के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह कई बार ऐसे विषयों पर खुलकर बोल चुके हैं जिन पर मनोरंजन जगत के दूसरे कलाकार सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचते हैं। उनकी इसी स्पष्टवादिता का असर उनके पेशेवर जीवन पर भी पड़ा। अब उनकी पत्नी और कोरियोग्राफर पोनी वर्मा ने एक इंटरव्यू में प्रकाश राज के संघर्ष और उनके फैसलों से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। पोनी के मुताबिक प्रकाश राज को अपनी बात रखने की कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें काम मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई विज्ञापन तथा फिल्में भी उनके हाथ से निकल गईं। इसके बावजूद उन्होंने अपने विचारों से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।

    यूट्यूब चैनल प्रेमा को दिए इंटरव्यू में पोनी वर्मा ने बताया कि शुरुआत में वह प्रकाश राज की राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों को लेकर काफी चिंतित रहती थीं। उन्हें डर लगता था कि लगातार खुलकर बोलने की वजह से उनके पति को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन साल 2017 में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या ने प्रकाश राज को अंदर तक झकझोर दिया। पोनी के अनुसार गौरी लंकेश प्रकाश राज की बेहद करीबी दोस्त थीं और दोनों की दोस्ती 35 साल से भी अधिक पुरानी थी। उनकी हत्या की खबर मिलने के बाद प्रकाश राज पूरी तरह टूट गए थे। हालांकि इस घटना ने उन्हें चुप रहने के बजाय अपनी आवाज और मजबूती से उठाने के लिए प्रेरित किया।

    पोनी वर्मा ने बताया कि गौरी की हत्या के बाद प्रकाश राज के मन में यह सवाल था कि आखिर कब तक डरकर रहा जा सकता है। पोनी खुद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं। उन्हें लगता था कि लगातार राजनीतिक मुद्दों पर बोलना उनके लिए खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन प्रकाश राज का मानना था कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। पोनी के मुताबिक गौरी लंकेश भी अपने विचारों पर मजबूती से खड़ी रहती थीं और उनकी हत्या ने प्रकाश राज को इस बात का अहसास कराया कि डर के कारण अपनी बात कहना बंद नहीं किया जा सकता।

    पोनी ने यह भी बताया कि प्रकाश राज की बेबाकी का असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ा। उनके मुताबिक इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्हें प्रकाश राज की राजनीतिक राय पसंद नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उनके विज्ञापन बंद हो गए और कुछ फिल्में भी उनसे छीन ली गईं। पोनी ने कहा कि मनोरंजन जगत में कई कलाकार अपने काम और कमाई को सुरक्षित रखने के लिए विवादित मुद्दों पर बोलने से बचते हैं। लेकिन प्रकाश राज ने अपने जमीर की आवाज को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार प्रकाश राज का मानना है कि जब उन्हें कोई बात गलत लगती है तो उस पर चुप रहना सही नहीं है।

    गौरी लंकेश की हत्या ने उस समय पूरे देश में अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी थी। बेंगलुरु में 2017 में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपनी निडर पत्रकारिता और सामाजिक मुद्दों पर मुखर विचारों के लिए जानी जाती थीं। उनकी मौत से प्रकाश राज भी गहरे प्रभावित हुए थे।

    पोनी वर्मा की बातों से साफ है कि प्रकाश राज के लिए सामाजिक मुद्दों पर बोलना केवल सार्वजनिक छवि का हिस्सा नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ा फैसला है। पेशेवर नुकसान और आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपनी राय रखना जारी रखा। उनके इस सफर में गौरी लंकेश की हत्या एक ऐसा मोड़ बनी जिसने उन्हें और मजबूती से अपनी बात रखने का हौसला दिया।

  • दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब

    दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में 30 अक्टूबर को आयोजित उनके कॉन्सर्ट के दौरान CJP प्रोटेस्ट और फिल्म सतलुज को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। दिलजीत ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ। उनके इस बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़े अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अभिजीत ने दिलजीत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए कहा कि एक मुद्दे पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उनके मन में सिंगर के लिए सम्मान कम हो गया है।

    दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का औरा इंडिया टूर 2026 का कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही पिछले कुछ समय से चल रही आलोचनाओं पर भी बात की। विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब NEET पेपर लीक से जुड़े आंदोलन के दौरान दिलजीत ने कहा था कि उन्हें इस मुद्दे से दूर रखा जाए क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया हुई थी। CJP से जुड़े अभिजीत दिपके ने भी उस समय सिंगर की आलोचना की थी।

    अब दिल्ली के कॉन्सर्ट में दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह चुप हैं तो उन्हें चुप ही रहने दिया जाए। वह सभी का समर्थन करते हैं लेकिन पंजाबियों को लड़ना न सिखाया जाए। उन्होंने फिल्म सतलुज का जिक्र करते हुए कहा कि जिस फिल्म का मंच पर मजाक उड़ाया जा रहा है वह जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़ी कहानी है और उस फिल्म के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है। दिलजीत ने यह भी कहा कि अगर कोई उनसे नफरत करता है तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उनकी तरफ से सभी के लिए प्यार है।

    दिलजीत के इस बयान पर अभिजीत दिपके ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जून में जब प्रोटेस्ट चल रहा था तब दिलजीत की एक बात से उन्हें दुख पहुंचा था। हालांकि उनका कहना था कि यह नाराजगी किसी निजी वजह से नहीं थी। अभिजीत ने बताया कि वह हमेशा से दिलजीत को ऐसे कलाकार के रूप में देखते आए हैं जो जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। यही वजह थी कि उस समय उनकी बात उन्हें थोड़ी चुभ गई थी।

    अभिजीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और आज भी उनका संगीत सुनते हैं। उन्होंने लिखा कि इस साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में दिलजीत के कॉन्सर्ट में भी शामिल हुए थे। उनके मुताबिक वह केवल संगीत सुनने नहीं गए थे बल्कि एक इंसान के तौर पर दिलजीत के प्रति उनके मन में सम्मान भी रहा है।

    अभिजीत ने दिलजीत की तारीफ करते हुए उनके बेबाक अंदाज अपनी बात पर कायम रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की सराहना की। उन्होंने साफ किया कि किसी एक बात पर असहमति या गलतफहमी के कारण उनके मन में दिलजीत के लिए प्यार और सम्मान कम नहीं हुआ है। अंत में उन्होंने दिलजीत से छोटे भाई की गलती समझकर माफ करने की अपील भी की।

    इस तरह कॉन्सर्ट में दिलजीत के बयान और अभिजीत के जवाब के बाद यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों की बातों से साफ है कि असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश भी सामने आया है।

  • संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी

    संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म खलनायक के सीक्वल खलनायक रिटर्न्स को लेकर दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। साल 1993 में रिलीज हुई इस फिल्म में संजय दत्त ने बलराम प्रसाद उर्फ बल्लू का यादगार किरदार निभाया था। अब एक बार फिर संजय दत्त इसी किरदार के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करने की तैयारी में हैं। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सलमान खान के नाम की हो रही है। खबरें हैं कि सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में दिखाया जा सकता है। हालांकि फिल्म के निर्देशक और निर्माता सुभाष घई ने अभी इन खबरों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुभाष घई अपनी राइटिंग टीम के साथ मिलकर फिल्म की कहानी पर काम कर रहे हैं। इसी दौरान सलमान खान के लिए एक खास किरदार तैयार किए जाने की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि सलमान फिल्म में ऐसे पुलिसवाले की भूमिका निभा सकते हैं जो संजय दत्त के किरदार बल्लू की मदद करता नजर आएगा। यह किरदार कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और फिल्म की घटनाओं को नया मोड़ दे सकता है। हालांकि अभी तक सलमान खान की कास्टिंग आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है।

    फिल्म से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया है कि सलमान का संभावित किरदार केवल कैमियो तक सीमित नहीं होगा बल्कि उसका कहानी पर भी असर पड़ सकता है। इस भूमिका के लिए सलमान खान को उपयुक्त बताया जा रहा है। लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले अभी तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में मेकर्स पहले कहानी को अंतिम रूप देना चाहते हैं और उसके बाद ही कलाकारों की कास्टिंग को लेकर फैसला लिया जाएगा।

    सलमान खान की एंट्री को लेकर सुभाष घई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस समय कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि फिल्म की स्क्रिप्टिंग का काम जारी है। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म किस दिशा में आगे बढ़ेगी और कौन से कलाकार इसका हिस्सा होंगे। उनके बयान से साफ है कि फिलहाल सलमान खान की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अगर सलमान खान इस फिल्म में काम करते हैं तो यह सुभाष घई के साथ उनकी दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म युवराज में साथ काम कर चुके हैं। वहीं संजय दत्त और सलमान खान की जोड़ी को पर्दे पर देखना भी दर्शकों के लिए खास अनुभव हो सकता है। दोनों कलाकारों की अपनी अलग पहचान और मजबूत फैन फॉलोइंग है।

    खलनायक की बात करें तो यह फिल्म साल 1993 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त के साथ जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके अलावा राखी गुलजार अनुपम खेर और राम्या कृष्णन जैसे कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म में बल्लू का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसके सीक्वल को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    दूसरी ओर सलमान खान की आगामी फिल्म मातृभूमि को लेकर भी चर्चा जारी है। अपूर्वा लाखिया के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी। इसकी कहानी भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिलहाल इसकी रिलीज डेट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दर्शकों की नजरें अब खलनायक रिटर्न्स की स्क्रिप्ट और सलमान खान की संभावित एंट्री पर टिकी हैं।

  • नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल

    नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में दुर्योधन की भूमिका निभाकर घर घर में पहचान बनाने वाले पुनीत इस्सर ने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयानों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह उनके सीनियर ही नहीं बल्कि शिक्षक भी रहे हैं और एक बेहतरीन कलाकार हैं। इसके बावजूद देश से जुड़े मुद्दों पर उनके बयान देने के तरीके से वह सहमत नहीं हैं। पुनीत का आरोप है कि नसीरुद्दीन शाह कई अहम विषयों पर चुप रहते हैं और कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी राय सामने रखते हैं।

    एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान पुनीत इस्सर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह का सम्मान अपनी जगह है लेकिन जब कोई सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखता है तो उसे सभी पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक देश और दुनिया में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिन पर कलाकारों और बुद्धिजीवियों को अपनी बात रखनी चाहिए। पुनीत ने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह का नजरिया एकतरफा दिखाई देता है और वह वामपंथी तथा नक्सल समर्थक विचारों से जुड़े मुद्दों पर ही अधिक बोलते हैं। उन्होंने इसे चुनिंदा मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति बताया।

    पुनीत इस्सर ने अपनी बातचीत में जेएनयू के छात्रों और कथित टुकड़े टुकड़े गैंग का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में दोषी अपराधियों और जेल में बंद आतंकवादियों से जुड़े मामले सामने आते हैं तो कुछ लोग उनके समर्थन में आवाज उठाते हैं। पुनीत के अनुसार ऐसे मामलों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर भी स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए। ये सभी पुनीत इस्सर के निजी विचार हैं।

    अभिनेता ने यह भी साफ किया कि उन्हें नसीरुद्दीन शाह के विचार रखने या सरकार की आलोचना करने के अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात कहने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है। लेकिन यदि किसी को मौजूदा सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं तो उसे राजनीतिक रास्ता भी अपनाना चाहिए। पुनीत ने कहा कि ऐसे लोगों को चुनावी मैदान में उतरना चाहिए जनता के बीच जाना चाहिए और चुनाव जीतकर सरकार को बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है। इसलिए केवल असहमति जताने के बजाय राजनीतिक विकल्प के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहिए। उनके इस बयान को नसीरुद्दीन शाह की हालिया टिप्पणियों पर सीधी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। छात्र अपनी छात्र यूनियन को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में खुद को दिमागी नक्सल बताया था। नसीरुद्दीन शाह ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था।

    इन्हीं बयानों के बाद पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया सामने आई है। दोनों अभिनेता अपने अपने विचारों को लेकर चर्चा में हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर फिल्मी दुनिया के कलाकारों की राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर राय को लेकर बहस तेज कर दी है।

  • नेपोटिज्म की बहस पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी, परिवार की पहचान मिली लेकिन मुश्किलें भी खुद झेलीं

    नेपोटिज्म की बहस पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी, परिवार की पहचान मिली लेकिन मुश्किलें भी खुद झेलीं


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को अक्सर इस सवाल का सामना करना पड़ता है कि क्या उन्हें अपने पारिवारिक संबंधों की वजह से फिल्मों में आसानी से मौके मिल जाते हैं। अब अभिनेत्री सारा अली खान ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा ने माना कि फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें कई फायदे मिले हैं लेकिन उन्होंने अपने करियर में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके बयान के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में अवसरों और संघर्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में सारा अली खान ने कहा कि फिल्मी विरासत के अपने फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। उनके मुताबिक परिवार की पहचान होने से उन्हें अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले ही पहचान और अवसर मिलने लगे थे। किसी बड़े फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकार के लिए शुरुआत में कुछ दरवाजे आसानी से खुल सकते हैं। सारा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उन्हें भी इसका फायदा मिला और उन्हें फिल्मों में डेब्यू करने का अवसर मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ दर्शकों और इंडस्ट्री की उम्मीदें भी काफी बढ़ जाती हैं।

    सारा ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने भी अपना परिवार खुद नहीं चुना। उनका जन्म जिस परिवार में हुआ वह उनकी पसंद नहीं बल्कि किस्मत का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्मी परिवार से आने के कारण मिलने वाले अवसरों को स्वीकार करने के साथ कलाकारों की मेहनत को भी देखा जाना चाहिए। सारा के अनुसार किसी कलाकार की पारिवारिक पृष्ठभूमि उसके करियर का एक हिस्सा हो सकती है लेकिन लंबे समय तक काम करने के लिए अपनी प्रतिभा और मेहनत भी दिखानी पड़ती है।

    अभिनेत्री ने इंडस्ट्री में करीब आठ साल बिताने के बाद अपने विशेषाधिकार को लेकर बार बार सफाई देने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि वह अपने पारिवारिक बैकग्राउंड के फायदे को समझती हैं और उसे छिपाने की कोशिश नहीं करतीं। लेकिन उनके मुताबिक किसी कलाकार के काम और उसके सफर को केवल परिवार के नाम तक सीमित करके देखना भी सही नहीं है। सारा की बातों से यह स्पष्ट हुआ कि वह नेपोटिज्म की बहस में अपने फायदे स्वीकार करने के साथ अपनी व्यक्तिगत यात्रा को भी सामने रखना चाहती हैं।

    अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए सारा ने कहा कि वह अपनी मां के साथ रहीं और उनके पिता ऐसे व्यक्ति नहीं थे जो उनके लिए काम दिलाने के लिए फिल्म निर्माताओं के कार्यालयों के चक्कर लगाते या लोगों से उन्हें अपनी फिल्मों में लेने की गुजारिश करते। उन्होंने फिल्म केदारनाथ के दौरान आई मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्हें कई चीजें खुद संभालनी पड़ीं। सारा ने यह भी कहा कि उन्हें इंडस्ट्री में कोई ऐसा गॉडफादर नहीं मिला जो हर परिस्थिति में उनके लिए रास्ता आसान कर देता।

    सारा अली खान ने साल 2018 में फिल्म केदारनाथ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह कई फिल्मों में नजर आईं और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती रहीं। हाल के वर्षों में वह अलग अलग तरह की भूमिकाओं में दिखाई दी हैं। उनकी फिल्मों को दर्शकों से कभी अच्छी तो कभी मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है।

    सारा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में स्टार किड्स को मिलने वाले अवसरों और बाहरी प्रतिभाओं के संघर्ष पर बहस जारी है। उनके विचारों में एक तरफ पारिवारिक विरासत से मिले फायदे स्वीकार करने की बात है तो दूसरी तरफ अपने काम और मेहनत को भी महत्व देने की अपील है। इस बयान से यह बहस फिर सामने आई है कि फिल्मी परिवार से जुड़ाव शुरुआती अवसर दिला सकता है लेकिन करियर में आगे बढ़ने के लिए कलाकार को अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती है।

  • शाहरुख की ‘किंग’ में रोमांस भी और खूनी एक्शन भी, नए पोस्टर ने बढ़ाया इंतजार, क्रिसमस पर बॉक्स ऑफिस पर होगा बड़ा मुकाबला

    शाहरुख की ‘किंग’ में रोमांस भी और खूनी एक्शन भी, नए पोस्टर ने बढ़ाया इंतजार, क्रिसमस पर बॉक्स ऑफिस पर होगा बड़ा मुकाबला


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की आगामी फिल्म किंग को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ती नजर आ रही है। मंगलवार 27 अक्टूबर को फिल्म का नया पोस्टर जारी किया गया जिसमें शाहरुख का अंदाज पहले से काफी अलग दिखाई दे रहा है। पोस्टर में उनके होंठों के बीच गुलाब नजर आ रहा है जबकि आंखों में गुस्सा और चेहरे पर गंभीरता दिखाई दे रही है। इस लुक में रोमांस और एक्शन का अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। शाहरुख ने पोस्टर साझा करते हुए लिखा कि आज फिर याद आया कातिल नहीं आशिक हूं। उनके इस अंदाज ने फिल्म को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

    फिल्म किंग का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इससे पहले वह शाहरुख खान के साथ पठान जैसी सफल फिल्म में काम कर चुके हैं। ऐसे में दोनों की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन और मनोरंजन का नया अनुभव देने की तैयारी में है। फिल्म का निर्माण रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और मार्फ्लिक्स पिक्चर्स मिलकर कर रहे हैं। कहानी में एक मेंटर और उसके शिष्य के सफर को दिखाए जाने की बात कही गई है जहां मुश्किल हालात के बीच अस्तित्व की लड़ाई और संघर्ष देखने को मिलेगा। हालांकि फिल्म की कहानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    किंग की सबसे बड़ी खासियत इसकी दमदार स्टारकास्ट भी है। फिल्म में शाहरुख खान के अलावा दीपिका पादुकोण रानी मुखर्जी अभिषेक बच्चन सुहाना खान अनिल कपूर अभय वर्मा और अरशद वारसी जैसे कलाकार नजर आएंगे। अभिषेक बच्चन फिल्म में खलनायक की भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। शाहरुख के साथ इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। फिल्म में एक्शन के साथ भावनात्मक रिश्तों और रोमांस का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होने की उम्मीद है।

    इस फिल्म का एक खास पहलू शाहरुख खान और उनकी बेटी सुहाना खान का पहली बार बड़े पर्दे पर साथ दिखाई देना है। सुहाना इससे पहले 2023 में रिलीज हुई ओटीटी फिल्म द आर्चीज में अभिनय कर चुकी हैं। अब किंग के जरिए वह सिनेमाघरों में अपनी शुरुआत करेंगी। पिता और बेटी की जोड़ी को एक साथ देखने के लिए प्रशंसकों में खास उत्साह है। हालांकि फिल्म में दोनों के किरदारों और उनके आपसी रिश्ते को लेकर ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    फिल्म में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की जोड़ी भी लंबे समय बाद दर्शकों के सामने आएगी। दोनों इससे पहले कभी अलविदा ना कहना में साथ नजर आए थे। वहीं दीपिका पादुकोण के साथ शाहरुख की जोड़ी भी एक बार फिर दिखाई देगी। दोनों ओम शांति ओम चेन्नई एक्सप्रेस हैप्पी न्यू ईयर पठान और जवान जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। इस वजह से फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक किंग को 24 दिसंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी है। क्रिसमस के मौके पर रिलीज होने के कारण फिल्म को हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों से मुकाबला करना पड़ सकता है। जुमांजी एवेंजर्स डूम्सडे और ड्यून पार्ट थ्री जैसी फिल्मों की संभावित रिलीज से बॉक्स ऑफिस पर प्रतिस्पर्धा दिलचस्प हो सकती है। फिलहाल नए पोस्टर ने शाहरुख के प्रशंसकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है और अब दर्शकों को इसके टीजर ट्रेलर और अन्य अपडेट का इंतजार है।

  • जावेद अख्तर सोशल मीडिया से क्यों हुए दूर, बेईमान और मूर्खतापूर्ण रवैये पर जताई नाराजगी

    जावेद अख्तर सोशल मीडिया से क्यों हुए दूर, बेईमान और मूर्खतापूर्ण रवैये पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से कुछ दिनों का ब्रेक लेने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सकारात्मक कामों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कुछ लोगों के व्यवहार को निराशाजनक बताते हुए कहा कि मूर्खतापूर्ण और बेईमानी भरा रवैया देखकर उन्हें परेशानी होती है। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया है लेकिन उनके बयान को लेकर यूजर्स अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    जावेद अख्तर ने एक्स पर लिखा कि वह कुछ दिनों का ब्रेक ले रहे हैं ताकि कुछ सकारात्मक काम कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मूर्खतापूर्ण और बेईमानी से भरा रवैया देखना काफी निराशाजनक है। उन्हें इस बात पर भी हैरानी होती है कि ऐसे लोग भी बाकी इंसानों की तरह ही होमो सेपियन्स यानी मानव प्रजाति का हिस्सा हैं। उनके इस बयान से जाहिर होता है कि सोशल मीडिया पर होने वाली कुछ चर्चाओं और लोगों के व्यवहार से वह असहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका यह फैसला किसी एक घटना की वजह से है या लगातार मिल रही प्रतिक्रियाओं के कारण उन्होंने कुछ समय दूर रहने का निर्णय लिया है।

    जावेद अख्तर की पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने उनका समर्थन किया। एक यूजर ने उन्हें सलाह दी कि वह बेवजह लोगों की बातों पर अपनी ऊर्जा खर्च न करें और मानसिक शांति को प्राथमिकता दें। वहीं एक अन्य यूजर ने उनसे अपील की कि वह नसीरुद्दीन शाह की वजह से नाराज या परेशान न हों। इस टिप्पणी के बाद लोगों के बीच यह सवाल भी उठा कि क्या जावेद अख्तर के ब्रेक का किसी हालिया विवाद से संबंध है। हालांकि जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में नसीरुद्दीन शाह का नाम नहीं लिया है इसलिए इस तरह की प्रतिक्रियाओं को यूजर्स की अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    जावेद अख्तर हाल के दिनों में रश्मिका मंदाना के हिंदी उच्चारण को लेकर चल रही ऑनलाइन बहस पर अपनी राय देने के कारण भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने अभिनेत्री के हिंदी बोलने के अंदाज का मजाक उड़ाने वालों की आलोचना की थी। उनका कहना था कि किसी की भाषा या उच्चारण के आधार पर उसका मजाक उड़ाना उचित नहीं है। इस दौरान उन्होंने रश्मिका को गलती से तमिल अभिनेत्री कह दिया था जबकि वह कन्नड़ भाषी हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने जावेद अख्तर की इस गलती को लेकर सवाल उठाए। बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी।

    जावेद अख्तर लंबे समय से अपने विचारों और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह सामाजिक मुद्दों और धर्म से जुड़े विषयों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनकी टिप्पणियों पर कभी समर्थन मिलता है तो कभी सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना भी देखने को मिलती है। उनकी पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी के साथ धर्म और रोजमर्रा की अभिव्यक्तियों को लेकर हुई बातचीत भी पहले चर्चा का विषय बन चुकी है। ऐसे मामलों में उनके विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस होती रही है।

    इस बार एक्स से ब्रेक लेने के उनके फैसले ने फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया की लगातार चलने वाली बहसें सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को किस तरह प्रभावित करती हैं। जावेद अख्तर ने फिलहाल केवल कुछ दिनों की दूरी बनाने की बात कही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि वह दोबारा कब सक्रिय होंगे। फिलहाल उनका कहना है कि वह अपना समय सकारात्मक कामों में लगाना चाहते हैं। उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वह जल्द लौटेंगे और अपने विचारों को पहले की तरह साझा करेंगे।

  • रामायण के गानों को लेकर छिड़ी बहस पर एआर रहमान ने तोड़ी चुप्पी, रणबीर कपूर की फिल्म रिलीज से पहले बढ़ा विवाद

    रामायण के गानों को लेकर छिड़ी बहस पर एआर रहमान ने तोड़ी चुप्पी, रणबीर कपूर की फिल्म रिलीज से पहले बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली । रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण रिलीज से पहले ही अपने गानों को लेकर चर्चा में आ गई है। फिल्म के संगीतकार एआर रहमान को मंगल रंग और रावण तांडव जैसे गानों के लिए सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दर्शकों को फिल्म का संगीत पसंद आ रहा है तो कुछ लोग इसकी धुन और प्रस्तुति पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच एआर रहमान ने अपनी प्रतिक्रिया देकर साफ कर दिया है कि वह दर्शकों की प्रतिक्रियाओं को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हैं और उन्हें अपने काम पर पूरा भरोसा है।

    हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने कहा कि किसी भी संगीत को तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। नए विचारों पर काम करने से लेकर धुनों को बार बार सुधारने और पूरी रचना को परखने तक संगीतकार को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। उनके मुताबिक जब कोई काम दर्शकों के सामने पहुंचता है तब तक उसे कई बार जांचा और सुधारा जा चुका होता है। ऐसे में हर प्रतिक्रिया को देखने और उस पर लगातार विचार करने के लिए ऊर्जा नहीं बचती। उन्होंने कहा कि वह अपना काम लोगों के सामने रख देते हैं और उम्मीद करते हैं कि दर्शक उसे पसंद करेंगे।

    रहमान ने यह भी बताया कि उनका बेटा उन्हें सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के बारे में जानकारी देता रहता है। उनके बेटे के अनुसार कभी लोग किसी बात की आलोचना करते हैं तो कभी वही लोग अपनी राय बदल लेते हैं या माफी मांग लेते हैं। इस पर रहमान का नजरिया सहज है। उनका कहना है कि उन्होंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग उनके प्रयास की सराहना करेंगे। उनके बयान से यह साफ है कि वह सोशल मीडिया पर होने वाली हर टिप्पणी को अपने काम का अंतिम मूल्यांकन नहीं मानते।

    दरअसल रामायण का गाना मंगल रंग रिलीज होने के बाद से ही चर्चा में है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना साल 2012 में आई फिल्म रॉकस्टार के लोकप्रिय गीत कुन फाया कुन से की है। इस गाने को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। वहीं कुछ दर्शकों ने मंगल रंग की प्रस्तुति को कव्वाली जैसा बताते हुए सवाल उठाए हैं। गाने की धुन और संगीत की शैली को लेकर अलग अलग राय सामने आ रही हैं। हालांकि किसी फिल्म के संगीत को लेकर दर्शकों की पसंद अलग होना सामान्य बात है और अंतिम प्रतिक्रिया फिल्म देखने के बाद भी बदल सकती है।

    गाने के वीडियो में दिखाए गए एक दृश्य को लेकर भी बहस हुई है। इसमें रणबीर कपूर के राम वाले किरदार के साथ सीता की भूमिका में दिखाई गई अभिनेत्री को हल्दी की रस्म के दौरान दिखाया गया है। कुछ यूजर्स ने इस दृश्य पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे पारंपरिक हिंदू रीति रिवाजों के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए था। इस मुद्दे पर फिल्म के निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह विवाद फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं तक ही सीमित है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रामायण को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता है। फिल्म पर कई वर्षों से काम चल रहा है और इसके कलाकारों तथा तकनीकी टीम की मेहनत को लेकर भी चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म को अमेरिका ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में एडवांस बुकिंग के दौरान अच्छा शुरुआती प्रतिसाद मिल रहा है। हालांकि फिल्म की वास्तविक सफलता का आकलन रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से ही हो सकेगा। फिलहाल एआर रहमान का बयान और गानों को लेकर जारी बहस ने फिल्म की रिलीज से पहले इसकी चर्चा और तेज कर दी है।

  • विजय देवरकोंडा का ट्रोलर्स को दोटूक जवाब, बोले- हम दोनों बहुत खुश हैं, अब साइबर पुलिस में भी पहुंचा मामला

    विजय देवरकोंडा का ट्रोलर्स को दोटूक जवाब, बोले- हम दोनों बहुत खुश हैं, अब साइबर पुलिस में भी पहुंचा मामला


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के चर्चित सितारे विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनकी फिल्मों की वजह से नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर हो रही टिप्पणियों और कथित भ्रामक पोस्ट को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों की टीम ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित झूठे दावों और फर्जी सामग्री के खिलाफ हैदराबाद साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। टीम ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो बिना तथ्यों की पुष्टि किए दोनों कलाकारों के निजी जीवन को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय और रश्मिका की टीम के एक प्रतिनिधि ने पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर गलत स्क्रीनशॉट और भ्रामक दावों के जरिए दोनों कलाकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। टीम ने कथित पेड कैंपेन की आशंका का भी जिक्र किया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की जांच के नतीजे सामने आना अभी बाकी है।

    विजय और रश्मिका की टीम ने स्पष्ट किया है कि उन्हें लोगों के अपनी राय रखने के अधिकार से कोई परेशानी नहीं है। टीम का कहना है कि हर व्यक्ति को किसी विषय पर अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है और वे इसका सम्मान करते हैं। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल किसी के खिलाफ झूठी जानकारी फैलाने या गलत तथ्यों को सच बताकर पेश करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। टीम के मुताबिक किसी भी कलाकार के निजी जीवन को लेकर अपुष्ट दावों को वायरल करना उचित नहीं है। इसी आधार पर कथित तौर पर भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

    दरअसल विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना हाल ही में कॉफी विद करण के सीजन 9 में नजर आए थे। इस दौरान दोनों ने अपने रिश्ते और शादी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं। बातचीत के दौरान रश्मिका ने बताया कि उन्होंने विजय को शादी के लिए मनाने की कोशिश की थी। वहीं विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बात शादी तक पहुंचने में कई बार प्रस्ताव देने की भूमिका रही। शो में दोनों की बातचीत और उनके निजी रिश्ते से जुड़ी टिप्पणियां सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गईं। इसके बाद कुछ यूजर्स ने विजय को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां कीं और उनके रिश्ते पर मीम्स भी बनाए।

    इस पूरे विवाद के बीच विजय देवरकोंडा ने सोशल मीडिया पर रश्मिका के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा कर अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने रश्मिका को अपनी सबसे प्यारी दोस्त पत्नी और जीवनसाथी बताते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी जिंदगी का बेहद खूबसूरत हिस्सा मानते हैं। विजय ने यह भी लिखा कि कुछ लोगों को उनके रिश्ते से परेशानी हो सकती है लेकिन वे दोनों अपनी जिंदगी में खुश हैं। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बीच एक स्पष्ट जवाब के तौर पर देखा गया।

    रश्मिका मंदाना ने भी इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उनकी पोस्ट के बाद प्रशंसकों के बीच चर्चा और तेज हो गई। दोनों कलाकारों के समर्थकों ने ऑनलाइन उत्पीड़न और निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल के खिलाफ आवाज उठाई है। वहीं इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर आलोचना और किसी के खिलाफ जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने के बीच अंतर कैसे तय किया जाए।

    फिलहाल इस मामले में साइबर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि लगाए गए सभी आरोप साबित हो गए हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित भ्रामक पोस्ट के पीछे कौन लोग हैं और क्या किसी संगठित अभियान के तहत ऐसी सामग्री फैलाई गई थी।