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  • भारत-चीन संबंधों पर जयशंकर का स्पष्ट संदेश, सीमा पर स्थायी शांति के बिना सामान्य रिश्तों की नहीं बन सकती मजबूत नींव

    भारत-चीन संबंधों पर जयशंकर का स्पष्ट संदेश, सीमा पर स्थायी शांति के बिना सामान्य रिश्तों की नहीं बन सकती मजबूत नींव

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के रिश्तों में स्थायी सुधार तभी संभव है, जब सीमा क्षेत्रों में पूरी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांतिपूर्ण माहौल दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सामान्य संबंधों की सबसे पहली तथा अनिवार्य शर्त है। यह संदेश उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान दिया, जिसमें दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान भारत ने यह भी दोहराया कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, समान हितों और संवेदनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े तथा प्रभावशाली पड़ोसी देशों के बीच स्थिर और संतुलित संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एशिया और वैश्विक स्तर पर भी उनका व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के लिए संवेदनशील मुद्दों का समाधान जिम्मेदारी और संवाद के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।

    विदेश मंत्री ने सीमा क्षेत्रों में हालात सुधारने के लिए पिछले कुछ समय में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर संवाद और समन्वय के जरिए कई सकारात्मक पहल की हैं। इसके बावजूद सीमा क्षेत्रों में स्थायी शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक तंत्र के बीच निरंतर संपर्क तथा सक्रिय सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के तनाव की संभावना कम हो सके।

    भारत ने बैठक के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में निष्पक्ष और पारदर्शी अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे संतुलित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने भरोसेमंद और स्थिर सप्लाई चेन की अहमियत पर बल देते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आर्थिक सहयोग को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाना समय की मांग है।

    बैठक में दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई गई। विदेश मंत्री ने कहा कि नियमित संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, यात्रा सुविधाओं में सुधार और विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की सक्रिय बैठकों से आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर संवाद बनाए रखना भविष्य के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

    भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें विवाद या टकराव में बदलने से रोकना दोनों पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। विदेश मंत्री ने कहा कि संवाद और कूटनीति ही ऐसे मुद्दों का सबसे प्रभावी समाधान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत रचनात्मक सहयोग और सकारात्मक संबंधों का पक्षधर है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    हाल के समय में दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में संवाद और सहयोग बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक पहल देखने को मिली है। हालांकि भारत का स्पष्ट मानना है कि सीमा पर स्थायी शांति और विश्वास का वातावरण ही भविष्य में मजबूत, संतुलित और दीर्घकालिक भारत-चीन संबंधों की वास्तविक आधारशिला बन सकता है।

  • नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी

    नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की जमीन कब्जा करने के नेपाली पीएम बालेन शाह (Nepali PM Balen Shah) के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रक्रिया दी है। कहा कि सीमा विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र है, जिसके जरिये समाधान निकाला जाएगा। साथ ही इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) से सटे नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बालेन शाह के बयान के खिलाफ डडेलधुरा समेत कई स्थानों पर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) पर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगडंडी मार्गों, चेकपोस्टों और सीमावर्ती गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां सीमा अपेक्षाकृत खुली है और लोगों का आवागमन अधिक रहता है।


    एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त

    मंगलवार को बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने संयुक्त गश्त की। इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी जारी रहेगी।


    बालेन शाह के बयान पर विदेश मंत्रालय

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान को भी देखा है।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा निर्धारित हो चुका है, फिर भी कुछ हिस्से को सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने सीमा संबंधी सभी मामलों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

    हाल में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जायसवाल ने कहा कि हम संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अंदरूनी मामलों पर ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।