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  • सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत घरेलू सर्राफा बाजार के लिए तेज़ी भरी रही। सोने और चांदी की कीमतों में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,43,404 तक पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव बढ़कर ₹2,23,000 प्रति किलोग्राम हो गया। कीमतों में आई इस तेजी का असर देश के प्रमुख शहरों के खुदरा बाजारों में भी देखने को मिला, जहां सोना पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहा है।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने में ₹1,150 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की कीमत ₹3,159 प्रति किलोग्राम बढ़ने के बाद नए स्तर पर पहुंच गई। विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में भी समान रूप से तेजी देखने को मिली। 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज होने से आभूषण बाजार और निवेशकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,370 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत ₹1,44,220 रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना ₹1,44,270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में कीमतों का यह अंतर स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और व्यावसायिक लागत पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में सोने की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका पहला कारण परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने में आने वाला खर्च अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों में बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन क्षेत्रों में सोने की खरीद अधिक होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार दरों में अंतर देखने को मिल सकता है।

    स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी अपने-अपने क्षेत्रों की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दरें निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही ज्वेलर्स द्वारा पहले खरीदे गए स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराना स्टॉक अधिक कीमत पर खरीदा गया है तो उसका प्रभाव खुदरा बाजार की कीमतों पर भी दिखाई देता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्क प्रमाणित ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए ताकि शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न आधिकारिक बाजार दरों का मिलान करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में स्पष्ट अंतर होता है।

    बुलियन बाजार में आई इस नई तेजी ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। आगामी दिनों में वैश्विक बाजार के रुझान, घरेलू मांग और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों और ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा दरों की जानकारी लेकर ही निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।

  • सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी के दाम स्थिर बने रहे। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 480 रुपये की बढ़त के साथ 1,46,135 रुपये पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 440 रुपये बढ़कर 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती रही। लगातार बदलते भावों के बीच ज्वेलरी खरीदने और निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के दाम लगभग समान स्तर पर बने रहे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, चंडीगढ़, पुणे और नागपुर सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोना 1,46,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। कुछ शहरों जैसे इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में यह मामूली अंतर के साथ 1,46,035 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। 22 कैरेट सोने की कीमत अधिकांश शहरों में 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 18 कैरेट सोने के दाम भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, हालांकि इनमें स्थानीय बाजार और ज्वेलर्स के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

    चांदी के बाजार में आज स्थिरता देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव पड़ता है। वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की मांग, अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां और रुपये की विनिमय दर जैसे कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन, शादी-ब्याह की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रति ग्राम या प्रति 10 ग्राम कीमत देखकर आभूषण खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। खरीदारी के समय मेकिंग चार्ज, वस्तु एवं सेवा कर (GST), हॉलमार्क प्रमाणन और शुद्धता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है। निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अलग-अलग विक्रेताओं के दामों की तुलना करने और बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

    बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा में बदलाव के कारण आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे नियमित रूप से बाजार के रुझानों पर नजर रखें और अपनी आवश्यकता तथा वित्तीय योजना के अनुसार ही खरीदारी का निर्णय लें।

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बदले निवेश रुझान के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कारोबार के दौरान यह अपने शुरुआती स्तर से भी नीचे फिसल गया। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए बड़े निवेश से बच रहे हैं।

    चांदी के वायदा अनुबंध में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ होने के बाद इसकी कीमत दो लाख तीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे इसकी कीमतों में और नरमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना रहा। वैश्विक निवेशकों ने जोखिम से जुड़े परिसंपत्तियों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी सतर्क रुख अपनाया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों की प्राथमिकता लगातार बदल रही है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में विभिन्न वैश्विक घटनाक्रम निवेश निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

    बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का माना जा रहा है। क्षेत्र में हालिया घटनाओं के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान कमोडिटी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। निवेशक लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी निवेश रणनीति में बदलाव करते हैं। यही कारण है कि एक ओर ऊर्जा बाजार में तेजी देखने को मिल रही है, जबकि दूसरी ओर कीमती धातुओं में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

    आने वाले दिनों में सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कमोडिटी बाजार में भी स्थिरता लौटने की संभावना है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतों, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करेंगे।

  • लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इनके दाम में लगभग 1.20 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नरमी का असर भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिससे निवेशकों और कारोबारियों ने सतर्क रुख अपनाया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतों में लगातार गिरावट बनी रही और सोना दिन के शुरुआती घंटों में एक हजार रुपये से अधिक सस्ता होकर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला स्तर भी छुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना हुआ है।

    चांदी के वायदा कारोबार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। सितंबर 2026 डिलीवरी वाले अनुबंध की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और अधिक कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के पहले कुछ घंटों में चांदी एक प्रतिशत से अधिक टूट गई। दिन के दौरान इसके भाव लगातार दबाव में बने रहे, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का झुकाव फिलहाल सुरक्षित मुनाफावसूली की ओर है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में आई बिकवाली का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव और डॉलर से जुड़े संकेतों का प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक नए आर्थिक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

    हालांकि कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने की मांग से जुड़ा एक अलग रुझान भी सामने आया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान गोल्ड लोन का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। हालिया आकलनों के अनुसार, गोल्ड लोन अब सुरक्षित ऋण श्रेणी में सबसे बड़ा एसेट क्लास बनकर उभरा है और इसने वाहन ऋण को भी पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक जरूरतों के समय लोग सोने को वित्तीय सुरक्षा के प्रभावी साधन के रूप में अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। निवेशकों को केवल दैनिक मूल्य परिवर्तन के आधार पर निर्णय लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों के रुझान, मुद्रा बाजार की चाल और घरेलू मांग जैसे व्यापक कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना रहता है तो निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, घरेलू मांग और निवेशकों की खरीदारी की रणनीति आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते निवेश माहौल के बीच सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि अल्पकालिक अस्थिरता निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का भविष्य अब भी मजबूत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की मांग उच्च स्तर पर बनी रह सकती है और इसकी कीमतों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

    दुनियाभर में जारी युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों में बदलाव का सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ रहा है। ऐसे समय में निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके कारण सोना एक बार फिर भरोसेमंद निवेश साधन के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में इसकी अहमियत लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देशों में सोने की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ी हुई है। शादी-विवाह, त्योहारों और पारंपरिक अवसरों पर सोने की खरीदारी का चलन वर्षों से कायम है। इसके अलावा युवा आबादी में बढ़ती आय, संगठित ज्वैलरी बाजार का विस्तार और ब्रांडेड आभूषणों की बढ़ती स्वीकार्यता भी इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत बना रही है।

    हालांकि बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दिया है। जब सोने के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो कई ग्राहक खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। वहीं कीमतों में स्थिरता आने या सीमित गिरावट होने पर बाजार में मांग फिर से बढ़ने लगती है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता पूरी तरह बाजार से दूर नहीं हो रहे हैं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने खरीद निर्णय में बदलाव कर रहे हैं।

    बीते वित्तीय वर्ष के दौरान सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इसका प्रभाव शुरुआती महीनों में मांग पर पड़ा और बाजार में खरीदारी अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि वर्ष के दूसरे हिस्से में स्थिति में सुधार देखने को मिला और आभूषणों के साथ-साथ सोने के सिक्कों की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद सोने के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बरकरार है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कई देशों द्वारा व्यापारिक नीतियों में बदलाव, आयात शुल्क में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने कारोबारी रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनियां बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप अपनी योजनाओं में संशोधन कर अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही हैं। मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कारोबारी सतर्कता भी बढ़ाई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अब भी एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बना रहेगा। आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और वैश्विक जोखिमों के दौर में सोना निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकाल में सोने की चमक बरकरार रहने और इसकी मांग मजबूत बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • 8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    नई दिल्ली । कारोबारी जगत के लिए शुक्रवार का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भरा रहा। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ा नया अपडेट सामने आया, वहीं करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए ब्याज जमा होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इसके अलावा पूंजी बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज की बड़ी फंड जुटाने की पहल, सोने-चांदी की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजार की मजबूत बढ़त दिनभर चर्चा का केंद्र बनी रही।

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग ने आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग के लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त होने वाला यह डेटा भविष्य में वेतन, पेंशन और भत्तों से संबंधित सिफारिशों का आधार बनेगा। समय-सीमा बढ़ाए जाने से संबंधित विभागों और संस्थानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

    इधर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए भी राहतभरी खबर रही। वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज राशि खातों में जमा किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से पात्र खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि पहुंचाई जाएगी। इससे नौकरीपेशा वर्ग को अपनी बचत पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा और लंबे समय से जारी इंतजार समाप्त होगा।

    कॉरपोरेट क्षेत्र में अदाणी एंटरप्राइजेज की क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला। घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से उम्मीद से अधिक रुचि दिखाई गई, जिसके बाद कंपनी ने अपने फंड जुटाने के आकार में भी वृद्धि की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेशकों के बढ़ते विश्वास और कंपनी की दीर्घकालिक योजनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत है।

    कीमती धातुओं के बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के प्रभाव से सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले समय में दोनों धातुओं की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ती रुचि भी इस तेजी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

    शेयर बाजार ने भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और निवेशकों की खरीदारी से बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को वैश्विक बाजारों, विशेषकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जारी उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी दिन नौकरीपेशा वर्ग, निवेशकों और पूंजी बाजार से जुड़े सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण रहा। वेतन आयोग और EPF से जुड़े अपडेट जहां आम कर्मचारियों के लिए अहम रहे, वहीं पूंजी बाजार, बुलियन और कॉरपोरेट गतिविधियों में आई तेजी ने आर्थिक गतिविधियों को नई चर्चा का विषय बना दिया।

  • पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर वैश्विक बुलियन बाजार तक दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार का समग्र रुख कमजोर बना रहा।

    घरेलू वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत पिछले बंद स्तर की तुलना में एक प्रतिशत से अधिक टूटकर खुली। दिन के दौरान बिकवाली और तेज हुई, जिससे सोना करीब 1.37 प्रतिशत तक फिसलकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में सीमित खरीदारी लौटने से इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं बन सकी।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह कमजोरी देखने को मिली। सितंबर डिलीवरी वाला चांदी वायदा शुरुआती कारोबार में करीब एक प्रतिशत गिरावट के साथ खुला और दिन के शुरुआती सत्र में ही निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद के कारोबार में मामूली सुधार हुआ, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा और बड़े निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड में लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्पॉट सिल्वर दो प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो सोना कई वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मजबूत हुई हैं। ऐसी स्थिति में निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए आगे भी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या उनमें बढ़ोतरी कर सकता है।

    ऊंची ब्याज दरों की संभावना से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे निवेशकों का आकर्षण कम होता है और बिकवाली का दबाव बढ़ने लगता है। यही वजह रही कि सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में भी इस बार कमजोरी देखने को मिली।

    इस बीच कच्चे तेल के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीदों के बावजूद हालिया मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इसके चलते निवेशक फिलहाल किसी बड़े जोखिम वाले निवेश से बचते हुए आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं। तेल बाजार में आई नरमी ने भी वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से गैर-कृषि रोजगार, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े तथा यूरोजोन की मुद्रास्फीति रिपोर्ट निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत संकेत देती है और फेड की सख्त नीति बरकरार रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। वहीं किसी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम या आर्थिक संकेत में बदलाव से बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने की संभावना बनी रहेगी।

  • Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव और निवेशकों की बदली रणनीति का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कीमती धातु दबाव में रही। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई कमी के कारण सोने के भाव नरम बने हुए हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां 24 कैरेट से लेकर 10 कैरेट तक लगभग सभी श्रेणियों के सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में लगभग 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रति 10 ग्राम कीमत में 1,300 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। वहीं सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें दबाव में रहीं। दिनभर के कारोबार में भावों में उतार-चढ़ाव देखने के बाद शाम तक कीमतें सुबह के मुकाबले नीचे रहीं। इससे स्पष्ट है कि बाजार में फिलहाल खरीदारी की गति कमजोर बनी हुई है।

    शुद्धता के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोना करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.31 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 18 कैरेट सोने के दाम भी एक लाख रुपये से ऊपर बने रहे। इसके अलावा 20, 16, 14, 12 और 10 कैरेट श्रेणियों में भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका लाभ उन उपभोक्ताओं को मिल सकता है जो निकट भविष्य में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में समान रुख देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, पटना, इंदौर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव में नरमी रही। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय करों और बाजार की परिस्थितियों के कारण कीमतों में मामूली अंतर बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर फिलहाल सोने की चाल पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की बदलती धारणा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी के कारण सोने में सुरक्षित निवेश की मांग कुछ कम हुई है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में भी सोना दबाव में बना हुआ है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर लगातार पड़ रहा है।

    इंडियन बुलियन बाजार में दिनभर के दौरान भी कीमतों में कई बार बदलाव दर्ज किया गया। सुबह के मुकाबले दोपहर में कुछ तेजी दिखाई दी, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक फिर गिरावट दर्ज हो गई। इससे साफ है कि बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है और निवेशक नई आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं।

    पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में भी सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के आधार पर सोने की दिशा तय होगी। ऐसे में निवेशकों और आभूषण खरीदारों को बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने और निवेशकों का जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ने के कारण शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे, जिससे बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुई तेज बिकवाली ने सोना-चांदी की कीमतों को महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे पहुंचा दिया है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की कीमतों में कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी का रुख दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में सोना दो प्रतिशत से अधिक टूट गया और दिन के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों में तनाव कम होने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला है।

    चांदी के बाजार में भी भारी दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान चांदी में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह दिन के निचले स्तरों तक पहुंच गई। विश्लेषकों का मानना है कि चांदी पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में सोना और चांदी दोनों कमजोर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर अधिक केंद्रित हो गया है। इससे कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण फिलहाल कुछ कम हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को काफी हद तक मुनाफावसूली का परिणाम भी माना जा रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, महंगाई को लेकर आशंकाएं, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने निवेशकों की रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, लीवरेज्ड ट्रेडिंग पोजीशन के कम होने से भी बाजार में बिकवाली बढ़ी है।

    हालांकि विशेषज्ञ इस गिरावट को दीर्घकालिक दृष्टि से पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितताएं अभी भी सोने के पक्ष में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुएं अब भी आकर्षक निवेश विकल्प बनी हुई हैं।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं या गिरावट का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा। अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी पर विचार करने का उपयुक्त समय हो सकता है।

    सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम का इन धातुओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और आर्थिक संकेतकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने और शांति समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। इस घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती सक्रियता और बाजार की बेहतर होती धारणा के बीच दोनों प्रमुख कीमती धातुओं ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की।

    कमोडिटी बाजार में कारोबारी गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हजारों रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में कीमतें लगातार मजबूत बनी रहीं और दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। निवेशकों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव और बाजार की स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आई और शुरुआती घंटों में ही यह तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की नई खरीदारी ने चांदी को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है। इसके चलते चांदी ने महत्वपूर्ण स्तरों को पार करते हुए नई मजबूती के संकेत दिए हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि से वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की खबर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें मौजूदा प्रतिरोध क्षेत्र के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो निकट अवधि में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, प्रमुख समर्थन स्तरों के नीचे फिसलने पर कीमतों में सीमित गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

    चांदी के संबंध में भी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है। प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने की स्थिति में इसमें और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कीमतों का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना आवश्यक होगा। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।

    वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, ऊर्जा बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोना एवं चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल ने निवेशकों को राहत दी है और कीमती धातुओं के बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है।