Tag: cabinet

  • जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया। श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। इस फेरबदल में सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है।

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या नौ हो गई है। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। इस तरह उमर अब्दुल्ला सरकार ने मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या पूरी कर ली है। अब नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने और मौजूदा विभागों में बदलाव को लेकर नजर रहेगी।

    इस विस्तार में राजनीतिक अनुभव, महिला प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में जगह देने पर जोर दिखाई देता है। अली मोहम्मद सागर और मीर सैफुल्लाह पहले भी मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। शमीमा फिरदौस के शामिल होने से सरकार में महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।

    अली मोहम्मद सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह श्रीनगर जिले की खानयार विधानसभा सीट से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वह महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह उमर अब्दुल्ला सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

    मीर सैफुल्लाह उत्तरी कश्मीर के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह चार बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिछले तीन कार्यकाल कुपवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे, जबकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की। पेशे से वकील रहे सैफुल्लाह पहले भी मंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके मंत्रिमंडल में लौटने से उत्तरी कश्मीर का प्रतिनिधित्व सरकार में मजबूत होगा।

    शमीमा फिरदौस नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। वह श्रीनगर की हब्बाकदल विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी गई हैं। पहली बार मंत्री बनने के साथ ही वह सकीना इट्टू के बाद मंत्रिमंडल में दूसरी महिला मंत्री होंगी। उनके शामिल होने से सरकार में महिला नेतृत्व की भागीदारी बढ़ेगी।

    अल्ताफ अहमद कल्लू, जिन्हें अल्ताफ कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह दूसरी बार विधायक बने हैं और विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। विधानसभा और विधान परिषद का अनुभव रखने वाले कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिली है।

    इस बीच, कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होने तक सरकार में शामिल नहीं होने का अपना रुख बरकरार रखा है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर ही हुआ है। अब विभागों के बंटवारे से यह स्पष्ट होगा कि नए मंत्रियों को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में कितना बदलाव होता है।

  • मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस

    मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 और 24 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत 2047 है। इसमें सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर विचार किया जा रहा है।

    चिंतन शिविर के पहले दिन कैबिनेट मंत्रियों की ओर से अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज से संबंधित प्रस्तुतियां रखी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों में अब तक किए गए कार्यों, प्रमुख योजनाओं की स्थिति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े विषय शामिल हैं।

    दूसरे दिन मंत्रियों और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। मूल जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा के बाद मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाना है। हालांकि, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इस बार का चिंतन शिविर कैबिनेट मंत्रियों पर केंद्रित है। इससे पहले राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों के लिए अलग से दो दिवसीय मंथन रखा गया है।

    बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खासतौर पर जेन जी के साथ बेहतर तालमेल, उनके प्रमुख मुद्दों और सरकार की योजनाओं के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मंत्रियों से जानकारी मांगी जा रही है।

    मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और उनके साथ संवाद के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी प्रस्तुति देनी है। रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की सोच, उनकी संतुष्टि और असंतुष्टि को समझने के लिए किए गए प्रयास भी चर्चा का हिस्सा हैं।

    महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर भी मंथन किया जाना है। दिए गए विवरण के अनुसार, अप्रैल में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब इसे आगे बढ़ाने के तरीकों और इससे जुड़े सुझावों पर मंत्रियों के विचार लिए जाने हैं।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मुद्दे को भी प्रस्तुतियों में शामिल किया गया है। इस विषय को लेकर जेन जी की सोच, संबंधित क्षेत्र में इसके प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर मंत्रियों से जानकारी रखने को कहा गया है।

    चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य सरकार के कामकाज का जायजा लेने के साथ अगले चरण के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न मंत्रालयों के काम को आगे बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार की यह समीक्षा प्रक्रिया केवल वर्तमान बैठक तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 से जुड़ी चर्चाओं और प्रस्तुतियों का क्रम पहले से जारी है। आने वाले समय में भी इस विषय पर आगे के मंथन के दौर आयोजित किए जाने की योजना है।

    वर्ष 2021 में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर आयोजित किए गए थे। पहला शिविर 14 सितंबर को हुआ था, जबकि अंतिम बैठक नवंबर में हुई थी। प्रत्येक सत्र करीब पांच घंटे चला था। इनमें मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

    नवंबर 2021 में 77 मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर अलग-अलग प्रशासनिक विषयों पर काम आगे बढ़ाने की कवायद भी की गई थी। वर्तमान चिंतन शिविर में भी सरकार के मौजूदा कामकाज की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं और सुधारों की दिशा तय करने पर जोर है।

  • एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, साइबर सुरक्षा और भूमि संबंधी नीतियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल 10 हजार 630 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

    कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस के माध्यम से 12 प्रमुख मार्गों के निर्माण के लिए 4,600 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी। इस ऋण के लिए राज्य सरकार की ओर से गारंटी प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित मार्गों में भोपाल-विदिशा, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास, नीमच-मनासा-रामपुरा-झालावाड़, इंदौर-देपालपुर, चापड़ा-नेवरी-देवास, दिनारा-दतिया-सेवड़ा, आगर-सारंगपुर, सोयत-माचलपुर-जीरापुर, राहतगढ़-खुरई-खिमलासा और अन्य मार्ग शामिल हैं।

    राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व नाममात्र मूल्य पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। इसके बदले निगम राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी जारी करेगा। ऋण और ब्याज का भुगतान टोल संग्रह तथा अन्य प्राप्तियों से किए जाने का प्रावधान है। परियोजनाओं में राशि का उपयोग आवश्यकता के अनुसार जस्ट इन टाइम सिद्धांत पर किया जाएगा।

    कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट मार्ग के लिए भी बड़ा फैसला लिया। 91.64 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को चार लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ विकसित करने तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए कुल 3,960 करोड़ 9 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें निर्माण लागत, संचालन अवधि में भुगतान और भू-अर्जन सहित अन्य पूर्व निर्माण कार्य शामिल हैं। यह मार्ग सिवनी और बालाघाट को जोड़ने के साथ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों, खनिज क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों से संपर्क बेहतर करेगा। इससे लगभग 8 से 10 लाख आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई है।

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 19 योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए 1,740 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इन योजनाओं में पेंशन, परिवार सहायता, कन्या विवाह-निकाह सहायता, दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक मदद, प्रशिक्षण, कृत्रिम अंग वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और नशा पीड़ितों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रभावी संचालन के लिए कुल 244 पदों और व्यक्तियों की स्वीकृति दी गई। इनमें 154 नियमित, एक संविदा और 89 आउटसोर्स पद शामिल हैं। इससे स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा से संबंधित प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने का उद्देश्य है।

    कैबिनेट ने राज्य कम्प्यूटर सेक्युरिटी इंसीडेंट-रेसपॉन्स ऑपरेशन सेंटर के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 80 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसमें नए पद, तकनीकी संसाधन, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक और इंसीडेंट रिस्पॉन्स से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा मानव संसाधन तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग स्नातकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी मंजूर की गई।

    नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और संबंधित कार्यालयों के संचालन तथा प्रस्तावित मध्यांचल भवन के विस्तार के लिए भी राशि स्वीकृत की गई। आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति में संशोधन को मंजूरी देते हुए ग्रामीण कृषि भूमि के लिए पुनर्वास अनुदान संबंधी प्रावधान में बदलाव किया गया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को भारतीय न्याय संहिता की परिवर्तित धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत करने संबंधी अधिसूचना में संशोधन को भी मंजूरी मिली।

    इसके अलावा महिला टी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट 2025 ब्लाइंड में स्वर्ण पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश की तीन खिलाड़ियों को कुल 75 लाख रुपये और उनके तीन प्रशिक्षकों को कुल 3 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। खिलाड़ियों सुनिता सराठे, दुर्गा येबले और सुषमा पटेल को 25-25 लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि तीन प्रशिक्षकों को एक-एक लाख रुपये की राशि मिलेगी।

  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    नई दिल्ली । टाटा संस के चेयरमैन पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले एन चंद्रशेखरन का नाम अब केंद्र सरकार में संभावित मंत्री पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह अटकल तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित फेरबदल के दौरान चंद्रशेखरन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार चंद्रशेखरन को कॉर्पोरेट मामलों या शिक्षा जैसे किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर बात हो रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि उन्होंने इस तरह की चर्चा सुनी है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक नियुक्ति से जुड़ी अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    चंद्रशेखरन ने हाल में टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा जताई थी। बताया गया कि उन्होंने 12 अगस्त को इस्तीफा दिया था और उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त होना था। उनके इस्तीफे के पीछे टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेदों की चर्चा भी सामने आई है।

    चंद्रशेखरन की उम्र 63 वर्ष है। राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में यह उम्र अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ पदों के लिए 75 वर्ष की आयु सीमा का नियम चर्चा में रहा है, हालांकि अलग-अलग परिस्थितियों में इसके अपवाद भी देखे गए हैं। इसी वजह से उनकी उम्र को संभावित जिम्मेदारी के रास्ते में बड़ी बाधा के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

    शिक्षा मंत्रालय को लेकर चंद्रशेखरन का नाम सामने आने की चर्चा ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी कई नेताओं के पास रही है। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान इस पद पर रह चुके हैं। अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में इन सभी को बाद में पद से हटना पड़ा।

    शिक्षा क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों ने भी संभावित बदलाव को लेकर चर्चाओं को बढ़ाया है। परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की जिम्मेदारी इंफोसिस के पूर्व सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को दिए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता रखने वाले गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को अधिक भूमिका देने पर विचार कर रही है।

    इसी संदर्भ में चंद्रशेखरन की संभावित नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उद्योग और प्रबंधन क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें प्रशासनिक और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है। यदि सरकार उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो यह पारंपरिक राजनीतिक नियुक्तियों से अलग एक महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकता है।

    फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से प्रह्लाद जोशी के पास है। यह व्यवस्था उस समय बनी थी जब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सवाल उठे और धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे में अब निगाहें संभावित कैबिनेट फेरबदल और शिक्षा मंत्रालय के लिए सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। चंद्रशेखरन के नाम पर चल रही चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि उनकी नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।

  • मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं

    मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में अचानक बदलाव ने राज्य की राजनीति में चर्चाओं को तेज कर दिया है। नियमित रूप से मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक अब सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित की जाएगी। बैठक के कार्यक्रम में हुए इस बदलाव की आधिकारिक वजह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताई गई है।

    कैबिनेट बैठक के दिन में बदलाव अपने आप में प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके तुरंत बाद होने वाली महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर सोमवार को गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के लिए डिनर का कार्यक्रम रखा गया है।

    इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच भी चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में कैबिनेट बैठक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक बैठक को लेकर गठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

    मुख्यमंत्री फडणवीस का हालिया दिल्ली दौरा भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली दौरे के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने और अब कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में बदलाव के कारण सत्ता के गलियारों में संभावित बदलावों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हालांकि, अभी तक सरकार या महायुति की ओर से किसी बड़े राजनीतिक बदलाव, मंत्रिमंडल फेरबदल या गठबंधन के समीकरण में परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और आपसी समन्वय के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

    सरकारी स्तर पर कैबिनेट बैठक और गठबंधन नेताओं की बातचीत का उद्देश्य सरकार के कामकाज में बेहतर तालमेल, आपसी मतभेदों को दूर करना और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाना बताया जा रहा है। महायुति सरकार के सामने विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    सोमवार को होने वाली बैठक में सरकार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके बाद वर्षा बंगले पर होने वाली बैठक में गठबंधन के नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच समन्वय सत्ता के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शीर्ष नेताओं का एक साथ बैठना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल कैबिनेट बैठक को एक दिन पहले करने का कारण प्रशासनिक कार्यक्रम बताया गया है, जबकि उसके बाद होने वाली महायुति नेताओं की बैठक ने संभावित राजनीतिक फैसलों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों और नेताओं के बयानों से तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

  • कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के साथ अपना संपर्क तथा संचार मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर देना तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों का सोशल मीडिया परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया। लगभग साढ़े तीन महीने के कामकाज और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई इस रैंकिंग सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे हैं।

    मंत्रियों का यह विशेष रिपोर्ट कार्ड 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक जैसी प्रमुख नेटवर्किंग साइट्स पर मंत्रियों की सक्रियता का गहन विश्लेषण किया गया। रैंकिंग तय करने के लिए दैनिक पोस्ट की संख्या, यूजर्स एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया।

    रिपोर्ट में केवल सत्ता पक्ष के मंत्रियों का ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और कंगना रनौत जैसे नेताओं ने उच्च रैंकिंग हासिल की। वहीं विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल भी शीर्ष डिजिटल प्रभाव वाले नेताओं में शामिल रहे।

    हाल के समय में राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद सरकार ने अपनी डिजिटल संचार नीति में व्यापक बदलाव किया है। अब पारंपरिक और औपचारिक राजनीतिक बयानों के स्थान पर लघु रील्स, अनौपचारिक संवाद और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं की पसंद के अनुसार सरल और प्रभावकारी भाषा में अपनी बात पहुंचाना है।

    इसी कड़ी में विभिन्न मंत्रालयों को नए और लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम के तहत विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू किया है। इसके अलावा कैबिनेट में यह निर्णय भी लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री सीधे संवाद के लिए देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर छात्रों से चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मंत्रियों के इस प्रत्यक्ष और डिजिटल संवाद कार्यक्रम को लागू करने की योजना है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीति से सरकार और युवा वर्ग के बीच सीधे संवाद का एक पारदर्शी माध्यम स्थापित होगा, जिससे सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक तेजी से पहुंचेगी।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति

    कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान-Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही देश की समृद्धि की आधारशिला है और इसी उद्देश्य से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना फरवरी, 2019 में शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है।

    योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। सरकार ने कहा कि योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने से कृषि निवेश, उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विकसित भारत की यात्रा में करोड़ों किसानों की भूमिका और सशक्त होगी।


    पानी पर तैरेंगे सोलर प्लांट

    पीएम सूर्य घर योजना के बाद अब सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत बांध, जलाशय और पोखर में बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। पांच वर्ष तक चलने वाली इस योजना पर करीब 5,070 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा, देश में जलाशयों के जरिये 102.18 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए दो घंटे का स्टोरेज भी रखा जाएगा।


    ‘खेलो इंडिया’ पर 36 हजार करोड़ खर्च होंगे

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया योजना के विस्तारित स्वरूप और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफ) को मिलने वाली वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। सरकार वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने पहली बार खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई खेलो इंडिया योजना का बजट करीब आठ गुना बढ़ाया गया है। इसके लिए 29,054 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के लिए 7,387 करोड़ को मंजूरी दी है। इससे भारत में 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और ओलंपिक की दावेदारी को मजबूती मिलेगी।


    सभी केंद्रों को एकीकृत करने की योजना

    सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, साई प्रशिक्षण केंद्र, खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमी, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को एकीकृत किया जाएगा। इन सभी संस्थानों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान की सुविधा मिलेगी।

  • कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति

    कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनकल्याण को गति देने के लिए लगभग 2 हजार 480 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई। बैठक में खेल गतिविधियों, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई।

    प्रमुख निर्णयों में अक्टूबर 2026 में भोपाल में ‘महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी’ के भव्य आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य की खेल अवसंरचना और पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी। कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए रिहन्द एवं मल्हारगढ़ सिंचाई परियोजनाओं और किसानों को समर्थन मूल्य पर बोनस भुगतान योजना की निरंतरता को मंजूरी मिली। प्रदेश को तकनीकी रूप से अग्रणी बनाने के उद्देश्य से आईआईएसईआर (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और आईटी पार्कों के विकास के लिए 857 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इन निर्णय में आई टी पार्क की स्थापना के वर्ष 2031 तक संचालन की निरंतरता की स्वीकृति महत्वपूर्ण है ,इसके तहत करीब 8000 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण के लिए 198 करोड़ रुपये, कर्मचारी कल्याण एवं पेंशन योजनाओं के लिए 982 करोड़ रुपये और ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा के निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और नारायणगढ़ में 9 नए न्यायिक पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

    महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल में आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने माह अक्टूबर 2026 में महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल के बरखेड़ा नाथू में स्थित अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स में आयोजन के लिए संभावित व्यय राशि 18 करोड़ 74 लाख रूपये के व्यय की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

    हॉकी इण्डिया को अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ द्वारा देश में हॉकी खेल का संचालन, प्रोत्साहन और अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए अधिकृत किया गया है। प्रतियोगिता वर्ष 2010 से निरन्तर 2 वर्ष के अन्तराल में आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का मुख्य उद्‌द्देश्य एशियाई महिला हॉकी टीमों की प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है। महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 में एशिया की प्रमुख 6 महिला टीमों (भारत, चीन, जापान, मलेशिया, साउथ कोरिया, एवं थाईलैण्ड) के लगभग 200 खिलाडी व सपोर्ट स्टॉफ के सम्मिलित होने की संभावना है।

    यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता हॉकी इण्डिया और खेल और युवा कल्याण विभाग ‌द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जायेगी। अनुबंध अनुसार हॉकी इण्डिया को खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा ‘पेजेंटिंग पार्टनर’ राईटस के लिए 11 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए विभाग दवारा 7 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय किया जायेगा। इस प्रकार आयोजन पर लगभग 18 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय होना संभावित है।

    भोपाल के बरखेड़ा नाथू में अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स को नवीन एवं आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार किया गया है। एशिया स्तर की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन से वैश्विक स्तर पर मध्यप्रदेश में निर्मित खेल अधोसरंचना का प्रचार प्रसार होगा। इससे प्रदेश के हॉकी खिलाड़ियों के मनोबल में वृ‌द्धि होगी और एशिया के प्रमुख देशों से सम्मिलित हुई टीमों के खिलाड़ियों के भोपाल आगमन से प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 111 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली की रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना को सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 111 करोड़ 4 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना का मुख्य उद्देश्य गोविन्द वल्लभ पंत सागर रिजर्वायर (रिहन्द नदी पर स्थित) से संचित जल का उद्वहन कर सिंगरौली, माड़ा, वैढन और जावद तहसील के 119 गांवों में 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए जल प्रदान करना है।

    मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 184 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 184 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदसौर जिले की 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

    ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 857 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने आईसर में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए 85 करोड़ 51 लाख रूपये सहित विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 857 करोड़ 21 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

    आई टी पार्क स्थापना की निरंतरता को मंजूरी: 8000 को मिलेगा रोजगार

    प्रदेश में आईटी पार्क की स्थापना’ संबंधी योजना के लिए 595 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश में इन्दौर, भोपाल, जबलपुर एवं ग्वालियर में आई.टी. पार्को की स्थापना की गयी है। आई.टी. पार्क एवं आई.टी. टावर्स की स्थापना से प्रदेश में आधुनिक तकनीकी अधोसंरचना का विकास होगा जिससे देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर निवेश एवं औ‌द्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। परिणामस्वरुप प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा 8000 से अधिक स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि अब तक लगभग 22000 युवाओ को रोजगार प्राप्त हो चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के अंतर्गत संपादित एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से आई.टी. एवं ई.एस.डी.एम. क्षेत्र का विस्तार होगा जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ होगी। डिजिटल एवं तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी तथा मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते तकनीकी एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।

    मंत्रि-परिषद ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की स्थापना के लिए कुल लागत 85 करोड़ 51 लाख रूपये में से 17 करोड़ 90 लाख रूपये को आगामी तीन वर्षों तक प्रदाय किए जाने की स्वीकृति दी है। यह एक उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करेगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन प्रौ‌द्योगिकी, UAV डिजाइन एवं निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों तथा उन्नत अनुप्रयोगों पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्र में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC), प्रोटोटाइप विकास एवं परीक्षण जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी, जिससे राज्य में ड्रोन प्रौ‌द्योगिकी का एक समग्र एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकेगा।

    ‘नई तकनीक के लिए एम.पी.एस.ई.डी.सी. एवं अन्य संस्थाओं को सहायता’ योजना के लिए 110 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य शासन एवं उसके विभिन्न विभागों को नवीनतम सूचना प्रौ‌द्योगिकी एवं डिजिटल समाधान उपलब्ध कराकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना एवं नागरिकों को त्वरित, सरल और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना है। इसमें AI/ML आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, व्हाट्‌सऐप चैटवॉट, ड्रोन सेवाएं, एसएमएस गेटवे, MP CODE, ई-साइन, राज्य ई-मेल नीति, लो-कोड/नो-कोड प्लेटफॉर्म और सिक्योरिटी ऑडिट लैब जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं।

    ‘मध्यप्रदेश स्टेट स्पाटियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर (एम.पी. एस एस डी आई)’ योजना के लिए 40 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। योजना के उद्देश्य राज्य में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग कर एकीकृत स्थानिक डाटा (Spatial Data) का निर्माण, संधारण एवं अद्‌यतन करते हुए विभिन्न विभागों, एजेसियों तथा योजनाओं को अद्‌यतन, विश्वसनीय एवं सुगम जीआइएस आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इससे आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति, भूमि प्रबंधन, शहरी विकास एवं सड़क मरम्मत जैसे क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय क्षमता में वृद्धि हुई है।

    इसी तरह ‘क्लाउड सेवाओं का प्रदाय व प्रबंधन’ के लिए 26 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने और शासन की सभी सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन (डिटिटल ट्रांसफार्मेशन) को गति देना है। इस योजना के अंतर्गत, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) ‌द्वारा तैयार क्लाउड अंगीकरण रूपरेखा (Cloud Adoption Framework) के आधार पर सभी शासकीय एवं अर्ध-शासकीय विभागों को सुरक्षित, लचीली, स्केलेवल एवं किफायती क्लाउड सेवाएं प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से शासन को अपने आईटी संसाधनों के निर्माण और रखरखाव पर भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकतानुसार कम्प्यूटिंग संसाधन, स्टोरेज, नेटवर्किंग तथा सॉफ्टवेयर सेवाएँ क्लाउड प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते है।

    ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय की स्थापना की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। सृजन संबंधी कार्यवाही के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है। उल्लेखनीय है कि सभी बड़े राजस्व संभागों (सागर, शहडोल, नर्मदापुरम को छोडकर) में विद्युत निरीक्षकालय के वृत्त कार्यालय स्थापित है। वर्तमान में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रहण संबंधी कार्य भोपाल मुख्यालय से संपादित होते हैं। ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय प्रारंभ करने से विशेषत: मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर औ‌द्योगिक क्षेत्र को लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त भविष्य में मुरैना में 600 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किया जाना है जिसके लिए भी ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय स्थापित किया जाना आवश्यक है।

    नारायणगढ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का एक नवीन पद सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इससे वहां नियमित रूप से न्यायालय का संचालन हो सकेगा जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं और लोगों की मांग के साथ प्रकरणों का निराकरण किया जा सकेगा और आम जन को सुलभ व त्वरित न्याय मिल सकेगा।

    प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन के लिए 129 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की गतिविधियों से संबंधित योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 129 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति राशि से अकादमी के स्थापना एवं कार्यालयीन व्यय, मिशन कर्मयोगी, विभागीय परिसंपतियों का संधारण एवं प्रशासन अकादमी परिसर में प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए भौतिक सुविधाओं का निर्माण संबंधित कार्य किए जायेंगे।

    संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के लिए 198 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 198 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

    संकल्प -हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना का उद्देश्य जिला स्तर पर एक ऐसी इकाई के रूप में कार्य करना है जो महिलाओं को उनके कल्याण और सशक्तिकरण के लिए योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता के साथ-साथ पहुंच प्रदान करें। यह योजना पूर्व से सभी 52 जिलों में संचालित है और अब इसे 3 नवगठित जिलों में संचालित किया जायेगा।

    शक्ति सदन का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना तथा अवैध व्यापार, संकट में फंसी महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से उबार कर एक नई शुरुआत करवाना है। वर्तमान में प्रदेश में 14 शक्ति सदन अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से संचालित है। भारत सरकार द्वारा 5 नये शक्ति सदन स्वीकृत किये गये हैं।

    शहरी/ग्रामीण कामकाजी महिलाओं को सुविधाजनक व सुरक्षित आवास प्रदान करने के लिए सखी निवास योजना को लागू किया गया है। पूर्व में इस योजना का नाम महिला विश्रामालय था। सखी निवास में सभी वर्ग की कामकाजी महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है। सखी निवास में महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर संचालन का भी प्रावधान है। प्रदेश में 3 शासकीय सखी निवास संचालित है।

    कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा योजनाओं के लिए 982 करोड़ रूपये की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा की योजनाओं के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 982 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा की योजनाओं, पेंशन तथा कर्मचारी कल्याण संचालनालय, जिला पेंशन कार्यालय, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, पेंशनर कल्याण कोष, शासकीय सेवक परिवार कल्याण निधि पर ब्याज, शासकीय कर्मचारी समूह बीमा योजना, शासकीय कर्मचारी सह समूह बीमा योजना को संचालित किया जायेगा।

    समर्थन मूल्य पर उपार्जन पर किसानों को बोनस भुगतान योजना की निरंतरता की स्वीकृति
    मंत्रि-परिषद ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत 500 करोड़ से अधिक की योजना अंतर्गत समर्थन मूल्य पर किसानों को उपार्जन पर बोनस भुगतान के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक में निरंतर संचालन की स्वीकृति दी है।

    मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम 2011 में संशोधन की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में संशोधन की स्वीकृति दी है। भारत सरकार द्वारा जनविश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 में किए गए संशोधनों को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने, Compliance Reduction and Deregulation के अंतर्गत की गई अनुशंसाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क के पुनरीक्षण के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है।
  • पेपर लीक पर सरकार की बड़ी तैयारी, 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने वाला संशोधन प्रस्ताव आज कैबिनेट में संभव

    पेपर लीक पर सरकार की बड़ी तैयारी, 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने वाला संशोधन प्रस्ताव आज कैबिनेट में संभव

    नई दिल्ली । देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कानून में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जा सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो संशोधन विधेयक आगामी संसदीय प्रक्रिया के तहत लोकसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत मौजूदा दंड प्रावधानों को और कठोर बनाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान कानून में व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक करने और जुर्माने की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    सूत्रों के मुताबिक, संगठित अपराध के मामलों में पांच से दस वर्ष तक की सजा और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर या अन्य एजेंसियों की भूमिका यदि किसी अनियमितता में पाई जाती है तो उन पर भी एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जाएगा।

    सरकार मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को भी कानून का हिस्सा बनाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर की जा सकेगी और उन्हें अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना और भविष्य में होने वाले अपराधों के प्रति कड़ा संदेश देना है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में छात्रों के नाम जारी अपने संदेश में स्पष्ट कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक हर कदम उठाएगी। इसी क्रम में कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और विश्वास को प्रभावित किया है। इसके चलते परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग लगातार उठती रही है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना भी है। यदि मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इसे परीक्षा सुधार और नकल माफिया पर कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।