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  • 'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना को उद्योग जगत ने रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस योजना के प्रभाव से अगले पांच वर्षों में देश में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही भारत केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली तक सीमित न रहकर वैश्विक चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सेमिकॉन 2.0 का दायरा केवल सेमीकंडक्टर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादन, एडवांस्ड पैकेजिंग और आधुनिक सप्लाई चेन जैसी उच्च तकनीक वाली गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे देश में एक व्यापक और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    हाल ही में केंद्र सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, अनुसंधान और प्रतिभा विकास को नई गति देना है, ताकि देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े अधिकांश पदों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण चिप डिजाइन, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इंजीनियरिंग से जुड़े उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

    उद्योग जगत का यह भी मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे देश को इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही घरेलू कंपनियों को भी उच्च मूल्य वाले उत्पादों और बौद्धिक संपदा के विकास का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग मुख्य रूप से असेंबली आधारित उत्पादन पर केंद्रित रहा है, लेकिन सेमिकॉन 2.0 के माध्यम से देश चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकेगा। इससे न केवल नई तकनीकों का विकास होगा, बल्कि दीर्घकाल में भारतीय उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी मिलेगी।

    सरकार ने इस योजना के तहत चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एटीएमपी और ओसैट यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास जैसे छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उद्योग जगत का मानना है कि इन पहलों से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकेगा।

  • सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क, उर्वरक उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी लाना है। कैबिनेट के फैसलों में वाराणसी के लिए नई आधारभूत परियोजनाएं, सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण, मोबाइल निर्माण प्रोत्साहन योजना, रेलवे विस्तार और यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसी प्रमुख घोषणाएं शामिल हैं।

    मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और आने वाले वर्षों में देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से बड़े निवेश और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    मोबाइल विनिर्माण को गति देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण क्षमता का विस्तार करना, निर्यात बढ़ाना, घरेलू ब्रांडों को प्रोत्साहित करना और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाराणसी में बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों और रिंग रोड को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात दबाव कम करना, आवागमन को तेज बनाना और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

    उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।

    रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा भीड़भाड़ कम होने के साथ समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन सभी फैसलों से औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, परिवहन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।

  • जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

    बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

    मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है।

    सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश: सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में युवाओं, किसानों, कारोबारियों, पंचायतों और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने वर्ष 2027 को प्रदेश में ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में आगे बढ़ाने के बाद अब वर्ष 2027 पूरी तरह युवाओं को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि युवा वर्ष के दौरान रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, खेल, कौशल प्रशिक्षण और नवाचार से जुड़े कार्यक्रम व्यापक स्तर पर संचालित किए जा सकें। सरकार आम नागरिकों और युवाओं से भी सुझाव लेकर अंतिम कार्ययोजना तैयार करेगी।

    कैबिनेट बैठक में डिजिटल माध्यम से रचनात्मक कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया गया। हाल ही में आयोजित ‘मेरा युवा मेरा गौरव’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सकारात्मक और रचनात्मक योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित करने के लिए विशेष डिजिटल पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को तकनीक के माध्यम से समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

    बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने घर-घर पोषण आहार वितरण व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को मंजूरी दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों तक पोषण सामग्री समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंच सके। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्थाओं को भी स्वीकृति दी गई। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली पोषण सेवाएं अधिक प्रभावी होंगी।

    ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतों के लिए नए डिजिटल पोर्टल को भी मंजूरी दी गई। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों, विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी आसान होगी और आम नागरिकों को भी विभिन्न सेवाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगा।

    बैठक में कारोबार और कर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया। सरकार ने जीएसटी से संबंधित आवश्यक बदलावों और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। साथ ही किसानों के हितों, कृषि क्षेत्र के विकास और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य विकास की गति को तेज करना और सभी वर्गों को योजनाओं का बेहतर लाभ उपलब्ध कराना है।

    कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर आगे की नीतियां तैयार की जाएंगी। युवा वर्ष की घोषणा को राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी, डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से मध्य प्रदेश को विकास के नए चरण में पहुंचाने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

  • शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में सोमवार को हुए व्यापक कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार में कुल 35 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनमें 13 कैबिनेट मंत्री और 22 राज्य मंत्री शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल द्वारा सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई, जिसके बाद राज्य में नई राजनीतिक ऊर्जा का माहौल बन गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसे सरकार की रणनीतिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है। नए मंत्रियों की सूची में Arjun Singh, Tapas Roy, Shankar Ghosh, दीपक बर्मन, तापस रॉय और मनोज कुमार उरांव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं को सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए चुना गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में विभागीय कार्यों का पुनर्गठन किया जाएगा। इस विस्तार के जरिए सरकार ने अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों में तेजी आने की उम्मीद है।

    राज्य मंत्रियों में भी कई नए चेहरों को जगह दी गई है, जिनमें स्वतंत्र प्रभार वाले तीन मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन मंत्रियों के माध्यम से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने की योजना पर काम कर रही है। विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि छोटे और प्रभावी मंत्रिमंडल के साथ-साथ व्यापक सहयोगी टीम से योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के लिए नए मंत्रियों को उनके-उनके क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विस्तार का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करना भी है। सरकार पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए विभागों का पुनर्वितरण जरूरी माना जा रहा था। अब नए मंत्रियों के शामिल होने से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल तैयार किया गया है, जिससे विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे सरकार को जमीनी स्तर पर अपनी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

    राज्य में इस कैबिनेट विस्तार के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है क्योंकि जल्द ही विभागों का औपचारिक आवंटन किया जाएगा। इसके बाद सरकार की नई टीम अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यभार संभालकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाएगी। इस बदलाव को आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली और नीति दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया की उम्मीद के साथ यह विस्तार राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

    कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से Siddaramaiah के इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई कैबिनेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्ता की बागडोर संभालने की प्रक्रिया के बीच आज शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए नेतृत्व और मंत्रिमंडल के गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस नई सरकार का नेतृत्व DK Shivakumar के हाथों में होने की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई कैबिनेट का स्वरूप तय करने की तैयारी में है। संभावित मंत्रियों की सूची भी सामने आई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जगह दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    नई कैबिनेट में जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक है उनमें यतींद्र सिद्धारमैया, दिनेश गुंडू राव, लक्ष्मी हेब्बालकर, रामलिंगा रेड्डी, रिजवान अरशद और यू.टी. खादर जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा प्रियंक खरगे जैसे युवा चेहरों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले Priyank Kharge का नाम भी संभावित सूची में चर्चा में बना हुआ है।

    इसके साथ ही G. Parameshwara, एम.बी. पाटिल, कृष्णा बायरेगौड़ा, ईश्वर खंड्रे, के.जे. जॉर्ज, एच.सी. महादेवप्पा और संतोष लाड जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी का उद्देश्य सभी क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देते हुए एक संतुलित कैबिनेट तैयार करना बताया जा रहा है।

    इधर, कांग्रेस संगठन के शीर्ष नेतृत्व में भी लगातार बैठकों का दौर जारी है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala की मौजूदगी में होने वाली आज की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में सभी विधायक, एमएलसी और सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नए नेतृत्व के चयन और मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम सहमति बनाई जा सके।

    सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि नई कैबिनेट में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाए रखा जाए। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद ही नए मंत्रिमंडल की तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी और अगले चरण में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता संतुलन और संगठनात्मक रणनीति दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अब सबकी नजर आज शाम होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है, जो नई सरकार की दिशा तय कर सकती है।

  • मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुई सत्ता और संगठन की समीक्षा बैठकों के बाद यह संकेत सामने आए हैं कि राज्य के राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें केवल सीमित कार्यों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक गति देना और विभागों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन विभागों में जहां कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों को और अधिक स्वतंत्र जिम्मेदारियां देने की योजना पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि फाइलों के निपटारे में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    बताया जा रहा है कि जिन राज्यमंत्रियों को अब तक सीमित कार्य या केवल समन्वय की भूमिका दी गई थी, उन्हें अब कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इनमें विभागीय निर्णयों में भागीदारी, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और कुछ स्तर तक स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति शामिल हो सकती है। इससे राज्यमंत्रियों की भूमिका केवल औपचारिक न रहकर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो जाएगी।

    सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत राज्यमंत्रियों को इस बदलाव का अधिक लाभ मिल सकता है। इन विभागों में काम का दायरा बड़ा होने के कारण प्रशासनिक दबाव भी अधिक रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है।

    वर्तमान व्यवस्था में कई राज्यमंत्रियों के पास केवल सीमित कार्यों की जिम्मेदारी है, जबकि कुछ को केवल कर्मचारी स्तर के तबादलों या छोटे प्रशासनिक निर्णयों तक ही सीमित रखा गया है। नए प्रस्ताव के तहत इस संरचना में बदलाव कर उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जहां एक ओर विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन भी स्थापित हो सकेगा।

    हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन चर्चा के स्तर पर इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसे लागू किया जाता है तो मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बन सकती है।

  • शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग

    शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग


    कोलकाता।
    सबका साथ, सबका विकास के अपने राजनीतिक नारे को जमीन पर उतारते हुए भाजपा ने मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर दिया है। शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) ने मंत्रिमंडल (Cabinet) में ऐसे चेहरों को जगह दी है, जिनकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है। इसमें फैशन डिजाइनर (Fashion Designer) से राजनीति में आई महिला नेता हैं,

    आरएसएस (RSS) के प्रचारक रहे संगठनकर्ता हैं। राजवंशी और अनुसूचित जाति समुदाय के चेहरे हैं, तो आदिवासी इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री (Chief Minister) के साथ शपथ लेने वालों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदिराम टुडू बतौर मंत्री शामिल हैं। हालांकि विभागों का बंटवारा बाद में किया जाएगा, लेकिन शुरुआती तस्वीर से साफ है कि भाजपा ने राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को प्राथमिकता दी है।


    अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से भाजपा की आक्रामक महिला चेहरा

    अग्निमित्रा पॉल उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने राजनीति में आने से पहले अलग क्षेत्र में पहचान बनाई। अग्निमित्रा ने भाजपा में तेजी से अपनी जगह बनाई और प्रदेश उपाध्यक्ष तक पहुंचीं। बॉटनी ऑनर्स में बीएससी, फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और एमबीए करने वाली अग्निमित्रा भाजपा के मुखर महिला चेहरों में हैं। कायस्थ समुदाय से आने वाली अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया।


    दिलीप घोष: आरएसएस प्रचारक से भाजपा के संगठन निर्माता

    दिलीप घोष का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद बंगाल भाजपा की कमान सौंपी गई। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते भाजपा को बूथ स्तर तक मजबूत किया और ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार किया। 2016 में खड़गपुर सदर से विधायक बने। 2019 में मेदिनीपुर से सांसद चुने गए। बंगाल में भाजपा को मुख्य विपक्षी ताकत बनाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष को दिया जाता है। 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद 2026 विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर से वापसी की।


    निशीथ प्रमाणिक: सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे

    निशीथ प्रमाणिक बंगाल में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं। सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे निशीथ राजवंशी समुदाय से आते हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस में रहे निशीथ 2019 में भाजपा में शामिल हुए और उसी साल कूचबिहार से सांसद चुने गए। 35 की उम्र में केंद्र के सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुए और गृह राज्य मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। 2026 में माथाभांगा सीट से जीत दर्ज की। उत्तर बंगाल में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका रही।


    अशोक कीर्तनिया: सीमावर्ती राजनीति का मजबूत चेहरा

    उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव उत्तर क्षेत्र से आने वाले अशोक कीर्तनिया लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अनुसूचित जाति बहुल और सीमावर्ती इलाके में भाजपा का संगठन मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्होंने लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की है। व्यवसाय और राजनीति से जुड़े अशोक को भाजपा के मजबूत एससी चेहरे के रूप में देखा जाता है।


    क्षुदिराम टुडू: आदिवासी चेहरा

    उत्तर रानीबांध सीट से जीत दर्ज करने वाले क्षुदिराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने जंगलमहल और आदिवासी इलाकों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने में सक्रिय रहे टुडू को भाजपा ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में महत्वपूर्ण चेहरा मानती है। शुभेंदु के पहले मंत्रिमंडल में दक्षिण बंगाल, उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों सभी को प्रतिनिधित्व दिया गया।

  • बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी

    बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या को लेकर मंगलवार को अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने SC में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला छह साल बाद लिया गया है, जब 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 33 किया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना व न्याय प्रक्रिया को तेज (Justice Process Speeding up) करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि फिलहाल अदालत में 33 न्यायाधीश और एक मुख्य न्यायाधीश हैं। संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी। यह फैसला न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है।


    SC में कुछ इस तरह बढ़ती गई जजों की संख्या

    सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था। 1960 में इसे 13 और बाद में 17 किया गया। 1986 के संशोधन से संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया। फिलहाल ताजा प्रस्ताव के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है, जो देश के न्यायिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

    भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद तय करती है। समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है। इस बढ़ोतरी का मकसद लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी पूरी तरह दूर नहीं हो सकती।