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  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।

  • अमेरिका के 50 प्रतिशत नए टैरिफ से बढ़ा व्यापारिक तनाव, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत की पेशकश कर समाधान पर दिया जोर

    अमेरिका के 50 प्रतिशत नए टैरिफ से बढ़ा व्यापारिक तनाव, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत की पेशकश कर समाधान पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश इस विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा अपने नागरिकों और उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ रचनात्मक वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका की ओर से प्रस्तावित नया शुल्क हाल के वर्षों में अपनाई गई एकतरफा व्यापारिक नीतियों की श्रृंखला का हिस्सा है। उनका कहना है कि यह कदम कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको व्यापार समझौते की भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा के ऑटोमोबाइल क्षेत्र सहित कई उद्योगों पर लगाए गए शुल्क मुक्त व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

    कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक हर कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और अपने अधिकारों के अनुरूप उठाया है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रांत, उद्योग, किसान, कारोबारी और श्रमिक इस चुनौती के समय एकजुट होकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखना और रोजगार पर किसी भी संभावित असर को कम करना है।

    कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों को सुलझाने के लिए व्यापक प्रस्ताव देता रहा है। उनका मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सप्ताहों में दोनों पक्षों के बीच वार्ता तेज होगी और ऐसा समाधान निकलेगा जिससे दोनों देशों को समान लाभ मिल सके।

    उन्होंने दोहराया कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का समर्थक है। इसी सोच के तहत देश ने हाल के समय में कई नई आर्थिक और सुरक्षा साझेदारियां विकसित की हैं। कार्नी के अनुसार, व्यापारिक विवादों का सबसे अधिक असर आम उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर पड़ता है। उनका कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।

    अमेरिका ने अपने फैसले के पीछे यह तर्क दिया है कि कनाडा कुछ अमेरिकी उत्पादों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, मादक पेय और डेयरी वस्तुओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है। इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने विशेष कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए सैकड़ों कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि ऊर्जा, पोटाश, महत्वपूर्ण खनिज, मछली और पहले से अलग शुल्क व्यवस्था के तहत आने वाले कुछ उत्पादों को इस फैसले से बाहर रखा गया है।

    नई शुल्क व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, आपूर्ति श्रृंखला और विभिन्न उद्योगों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द किसी सहमति पर नहीं पहुंचते हैं तो उत्तरी अमेरिका के व्यापारिक वातावरण में अनिश्चितता बढ़ सकती है। ऐसे समय में कनाडा की ओर से बातचीत की पेशकश इस बात का संकेत है कि वह टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहता है, जबकि अमेरिका के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

    US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर ट्रेड वॉर (Trade War) शुरू कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पड़ोसी देश कनाडा (Canada) से आयातित अधिकांश सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। अब ट्रंप के इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने से जुड़े तीन फैसलों को मंजूरी दी है। अमेरिका के ट्रेड एक्ट ऑफ 1930 की धारा 338 के तहत फैसला तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि चीन के अलावा कनाडा ही उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ का जवाब जवाबी शुल्क से दिया था। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के रवैये के लिए कनाडा की जवाबदेही तय की जानी जरूरी थी।

    बता दें कि ट्रेड एक्ट की धारा 338 को लागू कर ट्रंप पहले भी कई देशों पर इस तरह के शुल्क लगा चुके हैं। इसके बाद बीते साल डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस सेक्शन को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। सांसदों ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल एकतरफा टैरिफ लगाने के लिए कर सकते हैं। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है।


    किन चीजों पर पड़ेगा असर?

    ट्रंप के नए आदेश के तहत कनाडा के कुछ अहम सेक्टरों को बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी गई है। ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और दुर्लभ खनिजों को 50 फीसदी टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि यह 50 फीसदी टैरिफ उन कई उत्पादों पर भी लागू होगा जिन्हें पहले ‘यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट’ (USMCA) के तहत सीमा शुल्क से सुरक्षा मिली हुई थी। 2020 में लागू हुआ यह व्यापार समझौता हाल ही में खत्म हुआ था। फिलहाल इसे दोबारा लागू करने के लिए बातचीत जारी है।


    बढ़ सकती है महंगाई, रिश्तों में खटास

    अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी दरार आ सकती है। यही नहीं ट्रंप आने वाले दिनों में टैरिफ और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। मामले की जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को कनाडा पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।

  • कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड

    कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड


    टोरंटो।
    कनाडा (Canada) के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी (Scorching heat) का दौर जारी है, तेज गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. टोरंटो (Toronto) समेत दक्षिणी ओंटारियो (Southern Ontario) के कई शहरों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड (Old Records) तोड़ दिए. टोरंटो के डाउनटाउन इलाके में मंगलवार को तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के इस समय के लिए 31 साल पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा रहा।

    एनवायरनमेंट कनाडा के मुताबिक, इससे पहले 14 जुलाई को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा तापमान 1995 में दर्ज किया गया था, जब पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. इस बार तापमान उस स्तर को पार कर गया. हालांकि, तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस हुई।


    कई प्रांतों में हीट वॉर्निंग जारी

    भीषण गर्मी के चलते ओंटारियो के ज्यादातर हिस्सों में हीट वॉर्निंग जारी की गई. इसके अलावा मैनिटोबा, सस्केचेवान, अल्बर्टा और नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के कई इलाकों में भी गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट जारी किए गए. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बने एक बड़े हाई प्रेशर सिस्टम की वजह से कनाडा के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है. इस सिस्टम ने अमेरिका के ऊपरी मैदानी इलाकों से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र और क्यूबेक तक गर्म हवा का प्रभाव बढ़ाया है.


    हीटवेव के साथ एयर क्वालिटी की चिंता

    गर्मी के बीच पश्चिमी कनाडा में जंगलों की आग का धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. थंडर बे के आसपास के क्षेत्रों में जंगलों की आग से उठने वाला धुआं हवा के साथ पहुंच रहा है, जिससे कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी खराब दर्ज की गई.

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और प्रदूषित हवा का एक साथ असर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

    नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें. धुएं वाले दिनों में N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह हवा में मौजूद बारीक कणों को रोकने में ज्यादा प्रभावी होता है.


    क्यूबेक में तूफान और टॉरनेडो का अलर्ट

    जहां एक ओर देश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वी कनाडा में मौसम का अलग रूप देखने को मिला. क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई. मॉन्ट्रियल से क्यूबेक सिटी के बीच के इलाकों में कुछ समय के लिए टॉरनेडो वॉच भी जारी की गई थी.


    कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक सुविधाएं शुरू

    गर्मी से राहत देने के लिए ओटावा समेत कई शहरों ने कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल खोल दिए हैं. कुछ व्यवसायों ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से काम बंद करने का फैसला किया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है. लोगों को मौसम के अलर्ट पर नजर रखने और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • कनाडा के टोरंटो में स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान फायरिंग, 2 की मौत, 3 घायल, हमलावर की तलाश जारी

    कनाडा के टोरंटो में स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान फायरिंग, 2 की मौत, 3 घायल, हमलावर की तलाश जारी


    नई दिल्ली। कनाडा के टोरंटो शहर में आयोजित वार्षिक स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान शनिवार शाम हुई अंधाधुंध गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

    टोरंटो पुलिस सर्विस के अनुसार, यह घटना शनिवार रात करीब 8 बजे मिडटाउन टोरंटो स्थित सेंट क्लेयर एवेन्यू वेस्ट और अर्लिंगटन एवेन्यू के पास हुई। उस समय वहां सालाना लैटिन सांस्कृतिक उत्सव ‘साल्सा ऑन सेंट क्लेयर’ आयोजित किया जा रहा था। गोलीबारी शुरू होते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल पर पांच लोग गोली लगने से घायल मिले, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। बाकी तीन घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

    ‘एक्टिव शूटर’ अलर्ट जारी
    प्रारंभिक जांच के आधार पर टोरंटो पुलिस ने इस घटना को ‘एक्टिव शूटर’ मामला बताया है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और संदिग्ध की तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल इस इलाके से दूर रहें।

    हमले की वजह अब भी स्पष्ट नहीं
    फिलहाल पुलिस ने गोलीबारी के पीछे की वजह या हमलावर के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। अब तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि भी नहीं हुई है। जांच टीम चश्मदीदों से पूछताछ कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर हमलावर की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

  • कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कल्याणी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी से जुड़े मामले में व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस कार्रवाई के दौरान विदेशों में अघोषित बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध सीमा-पार वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। फिलहाल एजेंसी इन सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।

    जांच के दौरान ईडी को ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनी के निर्यात से प्राप्त होने वाली कुछ विदेशी रकम निर्धारित समय के भीतर भारत नहीं लाई गई। एजेंसी के अनुसार, लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने के बावजूद बकाया राशि की वसूली के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रयास नहीं किए गए। इससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका और मजबूत हुई है।

    प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निर्यात भुगतान उन विदेशी कंपनियों से प्राप्त हुए, जिनका नाम निर्यात दस्तावेजों, इनवॉइस या शिपिंग बिल में खरीदार अथवा भुगतानकर्ता के रूप में दर्ज नहीं था। ईडी का मानना है कि इस प्रकार के लेनदेन की प्रकृति और उद्देश्य की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।

    जांच एजेंसी ने अब तक कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों और संभावित निवेशों की पहचान किए जाने का दावा किया है। इन खातों और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों और संपत्तियों की जानकारी संबंधित भारतीय प्राधिकरणों के समक्ष विधिवत घोषित की गई थी या नहीं।

    तलाशी अभियान के दौरान बरामद दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि धर्मेश नरेंद्र संगानी की कनाडा में संचालित एक कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हो सकती है। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस विदेशी निवेश और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी नियामकीय संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ अघोषित संपत्तियों के संबंध में दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।

    ईडी ने तलाशी के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री को अपने कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक और वित्तीय जांच शुरू कर दी है। एजेंसी विभिन्न देशों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी संस्थाओं के साथ कारोबारी संबंधों का भी विश्लेषण कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जानकारी साझा करने और सहयोग लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

    फिलहाल यह जांच प्रारंभिक चरण में है और एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करेगी। मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

  • भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने अपने हालिया कनाडा दौरे को भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कनाडा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है। इस दौरान उनकी मुलाकात कनाडा के शीर्ष नेतृत्व, व्यापार जगत के प्रतिनिधियों और निवेश से जुड़े प्रमुख हितधारकों से हुई, जहां भविष्य की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    दौरे के दौरान Piyush Goyal ने कनाडा के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों को विकसित करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच मौजूदा आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सरकारें साझा रूप से काम कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है, जिसे वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को गति देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें।

    कनाडा यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निवेश गोलमेज बैठकों में भाग लिया और विभिन्न उद्योग जगत के नेताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीनटेक, एग्रीटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर के साथ भी बैठक की, जिसमें विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए उसे दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि दोनों देश मिलकर काम करें तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने अपनी यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा लेकर आया है।

    कुल मिलाकर यह दौरा भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल

    अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल



    नई दिल्ली। अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस ने 89 हथियारों की अवैध खेप के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इन्हें अमेरिका से कनाडा भेजने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों में एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है।

    जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई स्टेट रूट-90 पर उस समय हुई जब पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। शुरुआती पूछताछ में जवाब असंगत पाए जाने पर जब तलाशी ली गई तो कार के भीतर भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। कुछ हथियार पीछे की सीट पर खुले तौर पर रखे हुए थे।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय मलिक ब्रॉमफील्ड (कनाडा नागरिक), 25 वर्षीय फैजान अली (पाकिस्तानी नागरिक) और 22 वर्षीय कमाल सलमान (कनाडा-अमेरिका-जॉर्डन की नागरिकता) के रूप में हुई है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, फैजान अली के पास एक एक्सपायर्ड पाकिस्तानी नेशनल ड्राइविंग परमिट भी मिला है, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी था। बरामद हथियारों में कम से कम 17 चोरी की बंदूकें भी शामिल हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि आरोपी 80 से अधिक हथियार कनाडा पहुंचाने की योजना में थे। इस पूरे ऑपरेशन में न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस, एफबीआई और एटीएफ की संयुक्त टीम शामिल रही।

    यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने बताया कि सभी आरोपियों पर अवैध हथियार तस्करी, बिना लाइसेंस हथियार कारोबार और चोरी के हथियार रखने सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को 5 से 15 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को कनाडा और अमेरिका दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। 

  • अल्बर्टा में कनाडा से अलग होने की मांग तेज: 3 लाख हस्ताक्षर जुटे, अक्टूबर में रेफरेंडम की संभावना

    अल्बर्टा में कनाडा से अलग होने की मांग तेज: 3 लाख हस्ताक्षर जुटे, अक्टूबर में रेफरेंडम की संभावना



    नई दिल्ली। देश के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अलगाववादी समूहों ने दावा किया है कि उन्होंने जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के लिए जरूरी संख्या से कहीं ज्यादा, करीब 3 लाख हस्ताक्षर जुटा लिए हैं, जबकि नियमों के अनुसार लगभग 1.78 लाख हस्ताक्षर ही पर्याप्त थे।

    रेफरेंडम की राह में अभी कई अड़चनें
    हालांकि इतने हस्ताक्षर जुटा लेना अंतिम मंजूरी नहीं है। अब इन हस्ताक्षरों की जांच चुनाव आयोग करेगा। इसके अलावा कानूनी अड़चनें भी मौजूद हैं, जिनकी वजह से फिलहाल प्रक्रिया पर अदालत की रोक भी लगी हुई है।अगर सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं, तो प्रस्तावित जनमत संग्रह 19 अक्टूबर को कराया जा सकता है, जिसमें अलगाव के मुद्दे पर भी मतदान संभव है।

    क्या पूछे जाएंगे सवाल?
    अगर वोटिंग होती है, तो जनता से पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए। लेकिन मौजूदा सर्वे बताते हैं कि अभी सिर्फ करीब 30% लोग ही अलग देश बनने के पक्ष में हैं।

    आर्थिक और राजनीतिक नाराजगी बनी वजह
    अल्बर्टा लंबे समय से कनाडा सरकार से असंतुष्ट रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं

    तेल और गैस से भारी कमाई के बावजूद कम लाभ मिलने की शिकायत

    टैक्स और संसाधनों के फैसलों पर ओटावा (केंद्र सरकार) का नियंत्रण

    पर्यावरण नियमों को लेकर टकराव

    अलग राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान की भावनाअल्बर्टा कनाडा के कुल तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा (लगभग 84%) देता है, जिससे वहां अलगाव की भावना और मजबूत होती गई है।

    सरकार का रुख अलग
    अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि यदि कानूनी रूप से आवश्यक हस्ताक्षर पूरे होते हैं, तो वे जनमत संग्रह की अनुमति देंगी, लेकिन वह स्वयं अलग देश बनने के पक्ष में नहीं हैं।

    अमेरिका से जुड़ते आरोप और चर्चा
    कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका में कुछ राजनीतिक समूह अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से संपर्क में हैं। यहां तक कि कुछ लोग इसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की भी बात कर रहे हैं, हालांकि यह विचार आधिकारिक नहीं है।

    कनाडा का कड़ा रुख
    कनाडा में पहले भी अलगाववाद को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार कोई भी प्रांत बिना स्पष्ट बहुमत और केंद्र सरकार की बातचीत के अलग नहीं हो सकता। इसके बाद 2000 में Clarity Act लागू किया गया, जिसने अलग होने की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया।

    अल्बर्टा का अलगाव आंदोलन एक बार फिर चर्चा में जरूर है, लेकिन कानूनी बाधाएं, कम जन समर्थन और केंद्र सरकार का सख्त रुख इसे एक जटिल और लंबी प्रक्रिया बना देता है।

  • केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए

    केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए


    नई दिल्ली/केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है। असम में 126 सीटों, केरल में 140 सीटों और पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा और नतीजों की घोषणा 4 मई को होगी। इन चुनावों में कुल 1,899 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं और राज्य-केन्द्रीय स्तर पर राजनीतिक संतुलन पर बड़ा असर डालने की संभावना है।

    केरल में इस बार 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में हैं। हालांकि, बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या के कारण कई निर्वाचन क्षेत्र बेहद प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। कुल 27 लाख मतदाता राज्य के 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हुए हैं। मतदाता सुबह से ही अपने मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े नजर आए। केरल में तीन मुख्य गठबंधन- लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के बीच कड़ा मुकाबला है। एलडीएफ लगातार पांचवीं बार सत्ता में बने रहने का लक्ष्य लेकर चुनाव लड़ रहा है, जबकि यूडीएफ और एनडीए उसे चुनौती दे रहे हैं।

    पुडुचेरी में कुल 9.50 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें 24,919 प्रथम बार वोट डालने वाले शामिल हैं। यहां कुल 294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश चार क्षेत्रों- पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम से मिलकर बना है। वर्तमान में ‘ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस’ (AINRC) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, जिसकी कमान मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के हाथों में है और भाजपा का समर्थन उसे प्राप्त है।

    असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिलाएं शामिल हैं। लगभग 2.5 करोड़ पंजीकृत मतदाता इन चुनावों में भाग लेने के लिए योग्य हैं। राज्य ने मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 31,490 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। असम में यह चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार में वापसी की कोशिश कर रही है। यह चुनाव 2023 में हुए परिसीमन के बाद पहला चुनाव है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की संभावना है।

    मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता इस बार भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो लोकतंत्र में नागरिकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाती हैं। इस चुनाव का परिणाम न केवल राज्य सरकारों के भविष्य को तय करेगा बल्कि देश के राजनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डालेगा।