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  • कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह

    कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह



    नई दिल्ली। कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना मंगलवार रात साढ़े 9 बजे विंडसर इलाके में हुई, जब हमलावर उसके घर में घुसे और उसे घर के भीतर ही कई बार चाकू मारे। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नैन्सी का जन्म हरियाणा में हुआ था और बाद में उनका परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया। उनकी मां जालंधर में रहती हैं।

    नैन्सी ग्रेवाल अपने यूट्यूब वीडियो के लिए विवादित रही हैं। वह खुलकर खालिस्तानियों, अकाल तख्त जत्थेदार और डेरा ब्यास मुखी की आलोचना करती थीं। हत्या से पहले नैन्सी ने इंस्टाग्राम पर अकाल तख्त जत्थेदार और डेरे के मुखी पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने धार्मिक नेताओं की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

    कनाडा पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद रात में टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अस्पताल में नैन्सी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने नैन्सी के घर और आसपास का क्षेत्र सील कर सबूत जुटाए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और किसी के पास जानकारी होने पर डिटेक्टिव सार्जेंट जेमी नेस्टर से संपर्क करने को कहा है।

    नैन्सी की मां छिंदरपाल कौर ने कहा कि बेटी पहले भी कई बार धमकी और हमले का शिकार हो चुकी थी। पिछले हमले में घर में आग लगाई गई थी, जिससे नैन्सी बच गई थी। इस बार हमलावरों ने उसकी रेकी कर बेरहमी से कत्ल किया। मां ने आरोप लगाया कि इसमें 3-4 लोग शामिल थे और उन्होंने उनके नाम नोट कर लिए हैं। छिंदरपाल ने कनाडा पुलिस से अपील की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाए।

    नैन्सी पेशे से नर्स थीं और दो कंपनियों में काम करती थीं। वह गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती थीं। उनके परिवार ने बताया कि बेटी ने हमेशा सच के रास्ते पर चलने की सीख दी।

    पुलिस के अनुसार हत्या की घटना की गंभीर जांच की जा रही है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी फुटेज और आसपास के सबूत जुटाए जा रहे हैं। नैन्सी ग्रेवाल के परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है और बताया कि उनका यह कट्टर विरोध और निर्भीक व्यक्तित्व कई लोगों को परेशान करता था।

    नैन्सी की हत्या ने कनाडा और पंजाब की समाज में सनसनी मचा दी है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भारतीय समुदाय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और जिम्मेदारों को कानून के तहत सजा दिलाने की मांग की है।

  • कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?

    कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?


    ओटावा।
    अमेरिका और कनाडा (America and Canada) के बीच चल रहे राजनयिक और व्यापारिक तनाव (Diplomatic and trade tensions) ने अब रक्षा संबंधों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कनाडा (Canada) में अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा (US Ambassador Pete Hoekstra) ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा 88 F-35 लड़ाकू विमान खरीदने के अपने वादे से पीछे हटता है, तो नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) की संरचना में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।


    मुख्य विवाद क्या है?

    होकस्ट्रा का यह बयान तब आया है जब पिछले महीने कनाडा ने अमेरिका से 19 बिलियन डॉलर की F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की डील की ‘समीक्षा’ करने का फैसला किया। कनाडा सरकार ने यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी के बाद लिया है। 2023 में, कनाडा ने लॉकहीड मार्टिन से 88 F-35 जेट खरीदने का सौदा किया था। इसमें से 16 विमानों का भुगतान किया जा चुका है और उनकी डिलीवरी 2026 में होनी है।


    NORAD पर क्या असर पड़ेगा?

    1957 में स्थापित NORAD अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य संगठन है। इसका मुख्य काम उत्तरी अमेरिका की हवाई और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें मिसाइलों और दुश्मन के विमानों का पता लगाना शामिल है। यह समझौता दोनों देशों को यह अनुमति देता है कि खतरा दिखने पर किसी भी देश का निकटतम विमान कार्रवाई कर सकता है, चाहे वह किसी भी हवाई क्षेत्र में हो।

    अमेरिकी राजदूत ने CBC News को बताया- अगर कनाडा यह क्षमता (F-35) प्रदान नहीं करने जा रहा है, तो हमें उन कमियों को खुद भरना होगा। उनका कहना है कि अगर कनाडा इन आधुनिक विमानों की खरीद से पीछे हटता है, तो उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन करना पड़ेगा।


    कनाडा का ‘प्लान बी’ और अमेरिका की आपत्ति

    अपनी F-35 डील की समीक्षा के साथ-साथ, कनाडा अब स्वीडन की डिफेंस कंपनी Saab से बात कर रहा है। कनाडा कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। जैसे-72 ग्रिपेन ई जेट्स और 6 ग्लोबलआई सर्विलांस एयरक्राफ्ट। अमेरिकी राजदूत होकस्ट्रा ने स्पष्ट किया कि यदि कनाडा सरकार ‘ग्रिपेन’ जेट्स का विकल्प चुनती है, तो भी NORAD व्यवस्था पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने स्वीडिश विमानों को अमेरिकी F-35 की तुलना में कमजोर बताया।

    होकस्ट्रा ने कहा- अगर वे फैसला करते हैं कि वे एक ऐसे ‘कमतर उत्पाद’ के साथ जा रहे हैं जो F-35 की तरह ‘इंटरऑपरेबल’ (एक-दूसरे के सिस्टम के साथ काम करने योग्य) नहीं है, तो इससे हमारी रक्षा क्षमता बदल जाती है। और ऐसे में, हमें यह पता लगाना होगा कि हम उस कमी को कैसे पूरा करेंगे।

    इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिकी तकनीक पर ही निर्भर रहे, ताकि दोनों देशों की सेनाएं आसानी से मिलकर काम कर सकें। वहीं, कनाडा व्यापारिक दबावों (टैरिफ) के जवाब में अपनी संप्रभुता और अन्य विकल्पों को तलाशने का संकेत दे रहा है।

  • ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते

    ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते


    नई दिल्ली।ट्रम्प का बयान कनाडा अमेरिका की बजाय चीन की ओर झुक रहा है। ट्रम्प ने कहा कि यह उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है।

    व्यापार विवाद

    कनाडा-चीन व्यापार समझौते में चीनी ईवी पर टैरिफ 100% से घटाकर 6.1% किया गया।

    चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी।

    अमेरिका इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

    गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर मतभेद

    अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट 175 अरब डॉलर इजराइल के आयरन डोम पर आधारित है।

    ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।

    दावोस फोरम में तल्खी

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की।

    ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया।

    पूर्व विवाद और संभावित भविष्य

    ग्रीनलैंड और नाटो मुद्दों पर दोनों नेताओं के पहले भी मतभेद रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन के मुद्दों से अमेरिका-कनाडा संबंध और जटिल हो सकते हैं।

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

  • पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा

    पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा


    वैंकूवर।
    कनाडा (Canada) ने एयर इंडिया (Air India) को सूचित किया है कि 23 दिसंबर 2025 को उसकी एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान (International flight) के संचालन से ठीक पहले एयरलाइन का एक पायलट शराब के नशे में पाया गया। यह कनाडाई कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। कनाडा के परिवहन नियामक ट्रांसपोर्ट कानाडा ने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और 26 जनवरी 2026 तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।

    यह सूचना पायलट के ब्रीथ एनालाइजर (BA) टेस्ट में फेल पाए जाने के एक दिन बाद भेजी गई। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एयर इंडिया से अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


    आरसीएमपी की पुष्टि और संभावित कार्रवाई

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट कनाडा द्वारा 24 दिसंबर को एयर इंडिया को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने एयरलाइन को बताया कि संबंधित कप्तान 23 दिसंबर को उड़ान संख्या AI 186 की ड्यूटी के लिए शराब के नशे में पहुंचा था और उड़ान संचालन के लिए अयोग्य पाया गया। वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर RCMP द्वारा कराए गए दो ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई, जिसके बाद पायलट को विमान से उतारकर ड्यूटी से हटा दिया गया।

    पत्र के अनुसार, यह घटना कनाडा के एविएशन रेगुलेशंस के साथ-साथ एयर इंडिया के फॉरेन एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (FAOC 1946) की शर्तों का भी उल्लंघन है। FAOC की एक शर्त है कि विदेशी एयर ऑपरेटर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगा। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में RCMP और स्वयं उसका विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।


    DGCA को सूचना, विवरण मांगा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया ने कनाडाई अधिकारियों से ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट का पूरा विवरण, जिसमें अल्कोहल का स्तर भी शामिल है, मांगा है। साथ ही, एयरलाइन ने भारत के विमानन नियामक DGCA को भी इस घटना की जानकारी दे दी है। ऑपरेशन सिंदूर के चलते पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के बाद एयर इंडिया की उत्तरी अमेरिका से भारत आने वाली अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल उड़ानों को बीच में ईंधन भरने के लिए ठहराव करना पड़ रहा है। AI 186 को वैंकूवर से वियना तक दो सेट पायलटों (प्रत्येक सेट में एक कप्तान और एक सह-पायलट) द्वारा संचालित किया जाना था। वियना से दिल्ली के लिए तीसरा सेट उड़ान संचालित करता।

    संबंधित पायलट का वियना में लेओवर था और वह कथित तौर पर वैंकूवर ड्यूटी-फ्री से शराब खरीद रहा था। चूंकि वह कनाडा से बोर्ड कर ऑस्ट्रिया में उतरने वाला था, इसलिए दोनों विदेशी स्टेशनों पर सामान्यतः ब्रीथ एनालाइजर जांच नहीं होती। हालांकि, ड्यूटी-फ्री स्टाफ को उसकी सांस से शराब की गंध आई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने उसे एयर इंडिया की उड़ान तक ट्रेस किया।


    ‘12 घंटे पहले शराब निषिद्ध’

    वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि उड़ान से कम से कम 12 घंटे पहले शराब पीना सख्त वर्जित है। यदि कोई पायलट इस नियम का पालन नहीं कर पाता, तो उसे चिकित्सा कारणों से उड़ान संचालन से इनकार कर देना चाहिए। ऐसा करने से उसकी नौकरी, लाइसेंस और करियर सुरक्षित रह सकता है।

    एयर इंडिया ने बुधवार को जारी बयान में कहा- 23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली उड़ान AI 186 में अंतिम क्षणों में देरी हुई, क्योंकि एक कॉकपिट क्रू सदस्य को उड़ान से पहले उतार दिया गया। कनाडाई अधिकारियों ने पायलट की ड्यूटी के लिए फिटनेस पर चिंता जताई, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

  • कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई

    कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । कनाडा (Canada)के मिसिसॉगा शहर(Mississauga City) में एक 25 वर्षीय भारतीय मूल के युवक को गिरफ्तार किया गया है। उस पर कई मेडिकल क्लीनिकों (Medical clinics)में महिला स्टाफ, विशेषकर महिला डॉक्टरों के सामने खुद को अश्लील रूप से प्रदर्शित करने के आरोप लगे हैं। इस मामले की पुष्टि पील रीजनल पुलिस (PRP) ने की है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान वैभव के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि वैभव बीते कई महीनों से मिसिसॉगा के अलग-अलग मेडिकल सेंटर और क्लीनिकों में बार-बार पहुंचता था। वह नकली मेडिकल समस्याएं बताकर महिला डॉक्टरों से अनुचित शारीरिक संपर्क करवाने की कोशिश करता था।

    PRP ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 12 डिवीजन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशंस ब्यूरो (CIB) ने इंडीसेंट एक्ट जांच के सिलसिले में ब्रैम्पटन निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार और चार्ज किया है।

    झूठी पहचान भी करता था इस्तेमाल
    पुलिस ने आरोप लगाया है कि वैभव ने कई बार महिला मेडिकल स्टाफ के सामने खुद को नंगा कर दिया और कई मौकों पर नकली पहचान भी अपनाई। जांच में सामने आया है कि वह कभी-कभी आकाशदीप सिंह नाम का इस्तेमाल करता था, ताकि डॉक्टरों को धोखे में रख सके।

    PRP के अनुसार- आरोपी ने कई बार मेडिकल कंडीशन का नाटक किया ताकि महिला डॉक्टर उसकी शरीर की अनुचित तरीके से जांच करें। कुछ मामलों में उसने झूठी पहचान का भी इस्तेमाल किया। वैभव को 4 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया और वह फिलहाल हिरासत में है। उसकी बेल (जमानत) हियरिंग अभी पेंडिंग है।

    कई गंभीर आरोप दर्ज
    सार्वजनिक स्थान पर अशोभनीय हरकत
    किसी लाभ के उद्देश्य से पहचान धोखाधड़ी
    पहचान दस्तावेज का अवैध कब्जा
    पहचान चोरी

    पुलिस को अन्य पीड़ितों की तलाश
    जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसी और भी महिलाएं हो सकती हैं जो इस आरोपी की हरकतों का शिकार हुई हों, लेकिन अब तक आगे नहीं आईं। पुलिस ने कहा- जो भी व्यक्ति इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी रखता है, वह 12 डिवीजन CIB से 905-453-2121, एक्सटेंशन 1233 पर संपर्क करे। पील रीजनल पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट करने में हिचकिचाएं नहीं, ताकि जांच आगे बढ़ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।