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  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा


    भोपाल  भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब मुकदमे की अगली प्रक्रिया उसी विशेष अदालत में आगे बढ़ेगी जहां से पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को इस मामले में शुरुआत में अग्रिम जमानत मिली थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को विशेष न्यायाधीश ओडब्ल्यू पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे तथा ट्विशा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर इसी अदालत में आगे की सुनवाई होगी।

    मामले में अधिवक्ता अंकुर पांडे के अनुसार विशेष अदालत ने ही पहले गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि बाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया था। वह तब से जेल में हैं। अब मामले को उसी विशेष अदालत में भेजे जाने के बाद मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

    ट्विशा शर्मा मौत मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसकी जांच सीबीआई कर रही है। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल की अदालत में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने अगला अहम चरण आरोप तय करने का है। उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालतों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपियों पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास करना होता है। ऐसे में इस मामले में भी सुनवाई की दिशा अब तेजी से आगे बढ़ सकती है।

    मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार ट्विशा के शरीर पर किसी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं मिले थे। दूसरी ओर इससे पहले एम्स भोपाल में तैयार की गई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। दोनों रिपोर्टों में सामने आए इस अंतर ने मामले को और गंभीर बना दिया है और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की अहमियत बढ़ गई है।

    अब अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई किस दिशा में जाती है यह अदालत के सामने पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा घटनाक्रम यही है कि मुकदमे को विशेष न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है और इसी अदालत में गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह के खिलाफ मामले की अगली कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

  • JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग

    JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग


    नई दिल्ली । झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित JPSC Prelims 2025 को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है। हालांकि अभी यह याचिकाकर्ता की मांग है और इन आरोपों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

    याचिका में कहा गया है कि परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच होना जरूरी है ताकि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जा सके और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों की तैयारी के बाद ऐसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

    याचिका में प्रस्तावित स्वतंत्र जांच समिति की संरचना को लेकर भी विस्तार से मांग रखी गई है। इसके मुताबिक समिति की अध्यक्षता झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश से कराई जा सकती है। इसके अलावा समिति में फोरेंसिक साइंस और आईटी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ परीक्षा सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। OMR जांच और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों के अलावा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े जानकारों को भी समिति का हिस्सा बनाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित प्रत्येक पहलू की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करना बताया गया है।

    याचिका में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें मूल OMR शीट से लेकर प्रश्न पत्र और आंसर की तक को संरक्षित रखने की बात कही गई है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों से संबंधित बायोमेट्रिक रिकॉर्ड परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज डिस्पैच रजिस्टर परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट और स्कैनिंग तथा मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक ये दस्तावेज किसी भी स्वतंत्र जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं।

    JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के रुख पर नजर रहेगी। फिलहाल परीक्षा रद्द होगी या नहीं और CBI अथवा किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाएगी या नहीं इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई

    ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई


    भोपाल । भोपाल की मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार को जिला अदालत में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर जांच एजेंसियों के साथ साथ दोनों पक्षों की भी नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि माना जा रहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई इस दौरान दिल्ली एम्स की दूसरी पोस्टमॉर्टम की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर सकती है। वहीं मामले के दोनों आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई जा सकती है।

    ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। घटना के बाद ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी करते हुए दिल्ली एम्स से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई 2026 को सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। इसके बाद एजेंसी लगातार वैज्ञानिक साक्ष्यों डिजिटल रिकॉर्ड घटनास्थल की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान सीबीआई ने घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन भी कराया और कई तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए।

    सूत्रों के अनुसार दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पृष्ठों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी थी। रिपोर्ट की एक प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि जांच में कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू और ट्विशा की गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता का उल्लेख किया गया है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीबीआई के पास जांच पूरी कर चालान पेश करने की वैधानिक समय सीमा तेजी से पूरी होने की ओर है। कानून के अनुसार एजेंसी को निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। यदि तय समय में चालान पेश नहीं किया जाता है तो आरोपी पक्ष को डिफॉल्ट जमानत का दावा करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।

    ऐसे में अदालत की आज की कार्यवाही इस हाई प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सीबीआई फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ चालान भी पेश करती है तो जांच अगले चरण में पहुंच जाएगी और मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सकती है। पूरे प्रदेश की नजर अब अदालत की कार्यवाही और सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी

    ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी


    नई दिल्ली। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे। इस संवेदनशील मामले पर अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।

    सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच की निष्पक्षता और प्रगति के लिए आवश्यक है।

    जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जारी है। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से जांच को नई दिशा मिल सकती है इसलिए सभी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जांच का अहम हिस्सा है लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के अनुसार लैपटॉप में मौजूद संभावित डिजिटल जानकारी और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए पासवर्ड जरूरी है। इसके बिना कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।

    सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इससे पहले अदालत ने 16 जून को दोनों आरोपियों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब एजेंसी ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच पूरी की जा सके। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों आरोपी आगे भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे या नहीं।

    गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 11 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी बीच हाल ही में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर चोरी की घटना भी सामने आई थी जिसमें कुछ दस्तावेज और जेवरात चोरी करने का प्रयास किया गया था हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी सामान छोड़कर फरार हो गए थे। अब पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है क्योंकि उसी के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

    ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी


    मध्य प्रदेश । भोपाल में चर्चित एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत अब 30 जून तक बढ़ा दी गई है। मंगलवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष अपनी ओर से कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से जुड़ी खबरों को काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सामग्री पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार उपलब्ध कराया जाए।

    इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने वकीलों से मिलने के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा को समाप्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए कानूनी सलाह और रणनीति पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि बचाव पक्ष की रणनीति बेहतर ढंग से तैयार की जा सके। हालांकि अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया जाना है, परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी प्रक्रिया में है। इसी आधार पर सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से अदालत में कुछ अन्य आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ट्विशा के बैंक खाते, कथित सात लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से संबंधित जांच की मांग शामिल थी। अदालत ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है।

    मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा। गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि परिजनों को सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही जांच के दौरान जब्त की गई दवाइयों के जब्ती पंचनामा की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। अदालत ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लीगल एड वकील आरोपी पक्ष के साथ जुड़े दिखाई दिए, जबकि उनकी नियुक्ति गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

  • ट्विशा शर्मा केस में CBI ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत की मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब भी इंतजार

    ट्विशा शर्मा केस में CBI ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत की मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब भी इंतजार


    भोपाल:  भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को अदालत में महत्वपूर्ण आवेदन प्रस्तुत करते हुए आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने फिलहाल किसी भी आरोपी की पुलिस रिमांड नहीं मांगी और केवल न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया।

    सुनवाई के दौरान ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया है कि मामले से जुड़ी दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक एजेंसी को प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे मौत की परिस्थितियों और कारणों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश पड़ सकता है। ऐसे में रिपोर्ट का इंतजार जांच एजेंसी के साथ-साथ मृतका के परिजनों और आम जनता को भी है।

    अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। दोनों वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और वर्चुअल माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही में शामिल हुए। सीबीआई की ओर से न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग के बाद अदालत ने पक्षों की दलीलें सुनीं। अब इस मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनाया जाएगा।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला शुरुआत से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी लगातार मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और अब तक कई अहम साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया जा चुका है। हालांकि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अभाव में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना अभी बाकी माना जा रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में बेहद अहम दस्तावेज होती है। यह रिपोर्ट न केवल मौत के कारणों की पुष्टि करती है, बल्कि जांच की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही वजह है कि अदालत और जांच एजेंसी दोनों इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    फिलहाल मामले की अगली सुनवाई और अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने की स्थिति में सीबीआई को जांच आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। वहीं दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच में नए खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है। ट्विशा शर्मा केस प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है और हर सुनवाई के साथ लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार

    राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार


    मध्य प्रदेश। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठी है। मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष, व्यापक और गहन जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना है कि परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है और इस मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आना जरूरी है।

    विपिन रघुवंशी का दावा है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है और इसमें दूसरे राज्य का भी पहलू जुड़ा हुआ है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य चर्चित मामलों में सीबीआई जांच कराई जा सकती है, तो राजा रघुवंशी हत्याकांड में भी ऐसी जांच होनी चाहिए।

    गौरतलब है कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून के लिए शिलांग गए थे। पुलिस के अनुसार, वहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि सोनम रघुवंशी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और घटना को अंजाम दिया। मामले में सोनम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर हैं।

    इसी संदर्भ में विपिन रघुवंशी ने आशंका जताई है कि जमानत पर बाहर होने के कारण मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले। हालांकि, यह परिवार की ओर से व्यक्त की गई आशंका और मांग है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    विपिन ने कहा कि उनके परिवार को अभी तक यह महसूस नहीं होता कि राजा को पूर्ण न्याय मिला है। उनका मानना है कि सीबीआई जांच से मामले की हर कड़ी की नए सिरे से जांच संभव होगी और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए।

    राजा रघुवंशी हत्याकांड सामने आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना था। मामले में पुलिस जांच, गिरफ्तारियां और बाद की कानूनी प्रक्रियाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। अब मृतक के परिजनों द्वारा एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग किए जाने से यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया है।

    फिलहाल मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और संबंधित अदालत में सुनवाई की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। वहीं, परिजन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि उन्हें न्याय मिलने का भरोसा मजबूत हो सके।

  • डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।

    डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।


    नई दिल्ली । राजस्थान के जयपुर जिले से शुरू हुई यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म के पटकथा जैसी लगती है, जहाँ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ चुके लोग ही व्यवस्था की जड़ें खोदने में लग गए। जमवा-रामगढ़ के एक रसूखदार बीवाल परिवार ने अपनी साख को दांव पर लगाकर वह रास्ता चुना जो सीधे अपराध की दुनिया की ओर ले जाता है। इस परिवार की पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है, जिसके चार बच्चे पहले ही अपनी मेहनत के दम पर डॉक्टर बनकर समाज में मिसाल पेश कर चुके थे। लेकिन इस बार लालच और अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने की जिद ने इस पूरे परिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के शिकंजे में ला खड़ा किया है। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप पर तैरते कुछ पन्नों ने न केवल एक छात्र का भविष्य अंधकार में डाल दिया, बल्कि एक प्रतिष्ठित परिवार की बरसों की कमाई हुई इज्जत को भी मिट्टी में मिला दिया।

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का केंद्र बिंदु दिनेश बीवाल और उसके भाई मांगीलाल थे। इनका भतीजा विकास, जो पिछले साल इस कठिन परीक्षा में असफल हो गया था, इस बार उनके निशाने पर था। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह डील गुरुग्राम और नासिक के अन्य गिरोहों के साथ मिलकर तय की गई थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जब हजारों छात्र रातों को जागकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दे रहे थे, तब यह परिवार व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से प्रश्नपत्रों के सौदे कर रहा था। दिनेश ने न केवल अपने परिजनों के लिए यह पेपर हासिल किया, बल्कि सूत्रों का कहना है कि उसने इसे लगभग दस अन्य लोगों के साथ भी साझा किया, जिससे यह जाल और भी गहरा होता चला गया। यह महज एक पेपर की चोरी नहीं थी, बल्कि उन लाखों ईमानदार छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ था जो दिन-रात एक कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।

    इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ सीकर के एक सजग कोचिंग शिक्षक की सतर्कता से हुआ। जब उन्होंने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे गेस पेपर की तुलना असली सवालों से की, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बिना देरी किए अधिकारियों को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी, जिसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि, जांच की कमान सीबीआई के हाथों में आने के महज चौबीस घंटों के भीतर ही बीवाल परिवार के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब जांच का दायरा सीकर के उन कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंच गया है, जहां यह संदेह जताया जा रहा है कि यह लीक हुआ पेपर बड़े पैमाने पर फैलाया गया था। इस मामले ने एक बार फिर से देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों को उजागर कर दिया है।

    प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्थानीय जांच एजेंसियों को शुरुआती दिनों में ही पेपर लीक होने के पुख्ता संकेत मिल गए थे, तो आखिर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हुई। सरकार और संबंधित विभागों की यह चुप्पी उन दलालों और माफियाओं के लिए मददगार साबित हुई जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रश्नपत्र को आग की तरह फैला दिया। वर्तमान में सीबीआई इन सभी आरोपियों को दिल्ली ले जाकर कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। यह मामला समाज के लिए एक कड़ा सबक है कि शॉर्टकट से हासिल की गई सफलता न केवल अस्थाई होती है, बल्कि वह आपके पूरे जीवन की गरिमा को भी समाप्त कर सकती है। अब इस परिवार के वो सदस्य जो वास्तव में डॉक्टर हैं, वे भी समाज के शक के घेरे में आ गए हैं और उनकी पूर्व की सफलताओं पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

  • नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि

    नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि


    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट यूजी को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने लाखों छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। इस निर्णय के बाद अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, हालांकि नई तारीखों का ऐलान अभी नहीं किया गया है।

    यह परीक्षा देशभर में एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द किए जाने का मुख्य कारण पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच शुरू की गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा के कुछ प्रश्नों और सामग्री के लीक होने की शिकायतें सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद जांच एजेंसियों को मामले की जानकारी भेजी गई और सभी तथ्यों की समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट और शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जिससे इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती थी।

    इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है और अब पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई है। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़े सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और जानकारी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके।

    इस फैसले के बाद छात्रों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ परीक्षा रद्द होने से निराशा है, वहीं दूसरी ओर यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि दोबारा परीक्षा अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी।

    परीक्षा प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने पहले आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके आवेदन विवरण और परीक्षा केंद्र मान्य रहेंगे। इसके अलावा किसी भी अभ्यर्थी से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और पहले जमा की गई फीस से जुड़े नियमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    नई परीक्षा की तिथियों की घोषणा जल्द ही आधिकारिक रूप से की जाएगी। साथ ही एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी सूचनाएं भी नए शेड्यूल के अनुसार जारी की जाएंगी। प्राधिकरण ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से दूर रहें।

    इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यह कदम लंबे समय में परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी था।

    अब सभी की नजरें आगामी जांच और नई परीक्षा कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे विवाद के बाद एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।

  • राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!

    राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!



    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच की जाए और इस मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

    यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। मामले की सुनवाई पहले 6 मई को नए मामलों की सूची में शामिल थी, लेकिन याची की अर्जेंट अपील पर इसे चैंबर में सुनवाई के लिए मंजूरी दी गई। अब इस पर आज दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होनी है।

    याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीर जांच आवश्यक है। याचिका में सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इस पूरे मामले में आरोप है कि राहुल गांधी की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो सकती है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

    फिलहाल अदालत में इस याचिका की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।