Tag: CBI investigation

  • अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

    सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

    सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

  • भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

    भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई


    भोपाल । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की चार्जशीट में आरोपों में बदलाव के बाद जमानत याचिका पर नए कानूनी आधारों के साथ विचार किया जाएगा। पहले मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा लगाई गई थी लेकिन जांच के बाद आरोपपत्र में इसे हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। ऐसे में अब अदालत बदली हुई कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी।
    इससे पहले जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह को जमानत आवेदन में संशोधन करने की अनुमति दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को हटाने और नए आरोप के अनुरूप जरूरी बदलाव करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की अनुमति देते हुए कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों के आधार पर जमानत पर बहस करने से पहले आवेदन में आवश्यक सुधार किया जाए। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया है।
    ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में हुई थी। 33 वर्षीय ट्विशा फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शुरुआती मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और क्रूरता सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
    मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। इस आदेश को मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों सहित कई पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।
    ट्विशा के परिजनों ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच को लेकर सवाल उठाए थे और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मृत्यु को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में ऐसी महत्वपूर्ण चोटों के नहीं मिलने की बात भी कही गई जो हमले या संघर्ष का संकेत देती हों।
    CBI ने जांच के दौरान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की। जांच से संबंधित रिपोर्टों में चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। अब गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट बदले हुए आरोपों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करेगा। वहीं ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित बताई गई है। जमानत पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • दिशा सालियान के पिता ने मांगी सुरक्षा, वकील का दावा- धमकियां मिल रहीं, PM मोदी समेत कई लोगों को भेजा पत्र

    दिशा सालियान के पिता ने मांगी सुरक्षा, वकील का दावा- धमकियां मिल रहीं, PM मोदी समेत कई लोगों को भेजा पत्र


    नई दिल्ली ।दिशा सालियान मामले में उनके पिता सतीश सालियान और वकील नीलेश ओझा समेत चार लोगों ने पुलिस सुरक्षा की मांग की है। वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उन्हें और मामले से जुड़े अन्य लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सुरक्षा की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जांच ब्यूरो, भारत के मुख्य न्यायाधीश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी है।

    नीलेश ओझा के मुताबिक, सुरक्षा की मांग करने वाले चार लोगों में दिशा के पिता सतीश सालियान, मामले से जुड़े गवाह समीर वानखेड़े, आशुतोष पाठक और वह खुद शामिल हैं। उनका कहना है कि सीबीआई की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद तत्काल पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।

    वकील ने दावा किया कि मामले को सामने लाने वाले और जांच से जुड़े लोगों को कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस स्थिति में सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। ओझा ने यह भी सवाल उठाया कि मामले से जुड़े कुछ लोगों को सुरक्षा मिली हुई है, जबकि शिकायत और जांच से जुड़े लोगों के लिए सुरक्षा की मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।

    ओझा ने मामले में सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए गवाह संरक्षण योजना और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी मांग के संबंध में उपलब्ध सामग्री जांच एजेंसी को भी दी गई है। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों की भूमिका और सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारणों की जांच की मांग भी की गई है।

    दिशा सालियान की मौत का मामला साल 2020 का है। वह सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम कर चुकी थीं। जून 2020 में मुंबई की एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर मामले को आकस्मिक मौत के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में उनकी मौत को आत्महत्या के तौर पर भी देखा गया। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते रहे हैं और उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की।

    सितंबर 2026 में मामले में नया घटनाक्रम सामने आया, जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई। एफआईआर में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और सबूतों से जुड़ी धाराओं के तहत जांच की जा रही है।

    एफआईआर में कई लोगों के नाम और उनकी कथित भूमिकाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, जांच में नाम आने और आरोपी साबित होने के बीच अंतर है। जांच एजेंसी को संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी है। संबंधित पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    दिशा सालियान की मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हुई थी। दोनों घटनाओं की समय-सीमा को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, दोनों मामलों की जांच अलग-अलग परिस्थितियों में हुई है।

    फिलहाल दिशा सालियान मामले में सीबीआई की जांच जारी है। वहीं, सतीश सालियान, नीलेश ओझा और अन्य लोगों की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। धमकियों से जुड़े दावों और सुरक्षा की जरूरत पर संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

  • कल्पना मिश्रा मौत मामले में मजिस्ट्रियल जांच पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी

    कल्पना मिश्रा मौत मामले में मजिस्ट्रियल जांच पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । रीवा की कल्पना मिश्रा की मौत का मामला अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। मामले की CBI जांच की मांग को लेकर विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रविवार को गांधी प्रतिमा के सामने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। मंच के अध्यक्ष दिलीप तिवारी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में विंध्य क्षेत्र से आए नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की गई तथा कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई।

    प्रदर्शनकारियों ने कल्पना मिश्रा को न्याय दो और CBI जांच लागू करो जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। मंच का कहना है कि कल्पना ने मौत से पहले इलाज और मदद के लिए गुहार लगाई थी लेकिन उनकी आवाज पर समय रहते उचित ध्यान नहीं दिया गया। मंच ने इस पूरे प्रकरण को केवल एक परिवार से जुड़ा मामला नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।

    मंच अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने कहा कि यदि सरकार जल्द मामले की CBI जांच कराने की दिशा में कदम नहीं उठाती है तो विंध्य क्षेत्र के लोग भोपाल में एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग भी की। धरने में अनीश शर्मा भूपेन्द्र मिश्रा अभिषेक तिवारी प्रवीण शर्मा सुरजन संदीप विश्वकर्मा देवराज राणा अंकित रघुवंशी और धीरेंद्र राणा सहित कई लोग मौजूद रहे।

    प्रदर्शन के दौरान मामले में चल रही मजिस्ट्रियल जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए। मंच का तर्क है कि जिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं उन्हीं से जुड़ी व्यवस्था के स्तर पर होने वाली जांच से निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह बना रह सकता है। इसी वजह से मंच ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग रखी है।

    विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। मंच का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं और इलाज नहीं मिल पा रहा है जबकि कुछ डॉक्टर निजी नर्सिंग होम में अधिक ध्यान दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अस्पतालों से मरीजों को कथित तौर पर निजी अस्पतालों की ओर भेजने और इलाज के नाम पर वसूली के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

    मंच ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं जिनमें मृत व्यक्ति का इलाज दर्ज होने और जीवित व्यक्ति को मृत दिखाए जाने जैसी स्थिति बताई गई है। हालांकि ये मंच की ओर से लगाए गए आरोप हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।

    मामले की शुरुआत 25 अगस्त को हुई थी जब रीवा जिले के हटवा गांव की 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा डिलीवरी के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंची थीं। परिवार के अनुसार यह उनकी पहली डिलीवरी थी और गर्भावस्था के दौरान उनकी हालत सामान्य थी। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे उनका सी-सेक्शन हुआ। बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद कल्पना और नवजात दोनों की मौत हो गई।

    मौत से पहले का एक वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। वीडियो में कल्पना अस्पताल में मदद और वहां से ले जाने की गुहार लगाती नजर आई थीं। इसके बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। मामले में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाकर डॉ. प्रियंक शर्मा को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद जच्चा-बच्चा की मौत की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।

    अब विंध्य नागरिक अधिकार मंच इस जांच से संतुष्ट नहीं है और CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कह रहा है। मंच का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा


    भोपाल । भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब मुकदमे की अगली प्रक्रिया उसी विशेष अदालत में आगे बढ़ेगी जहां से पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को इस मामले में शुरुआत में अग्रिम जमानत मिली थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को विशेष न्यायाधीश ओडब्ल्यू पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे तथा ट्विशा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर इसी अदालत में आगे की सुनवाई होगी।

    मामले में अधिवक्ता अंकुर पांडे के अनुसार विशेष अदालत ने ही पहले गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि बाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया था। वह तब से जेल में हैं। अब मामले को उसी विशेष अदालत में भेजे जाने के बाद मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

    ट्विशा शर्मा मौत मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसकी जांच सीबीआई कर रही है। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल की अदालत में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने अगला अहम चरण आरोप तय करने का है। उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालतों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपियों पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास करना होता है। ऐसे में इस मामले में भी सुनवाई की दिशा अब तेजी से आगे बढ़ सकती है।

    मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार ट्विशा के शरीर पर किसी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं मिले थे। दूसरी ओर इससे पहले एम्स भोपाल में तैयार की गई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। दोनों रिपोर्टों में सामने आए इस अंतर ने मामले को और गंभीर बना दिया है और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की अहमियत बढ़ गई है।

    अब अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई किस दिशा में जाती है यह अदालत के सामने पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा घटनाक्रम यही है कि मुकदमे को विशेष न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है और इसी अदालत में गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह के खिलाफ मामले की अगली कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

  • JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग

    JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग


    नई दिल्ली । झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित JPSC Prelims 2025 को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है। हालांकि अभी यह याचिकाकर्ता की मांग है और इन आरोपों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

    याचिका में कहा गया है कि परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच होना जरूरी है ताकि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जा सके और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों की तैयारी के बाद ऐसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

    याचिका में प्रस्तावित स्वतंत्र जांच समिति की संरचना को लेकर भी विस्तार से मांग रखी गई है। इसके मुताबिक समिति की अध्यक्षता झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश से कराई जा सकती है। इसके अलावा समिति में फोरेंसिक साइंस और आईटी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ परीक्षा सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। OMR जांच और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों के अलावा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े जानकारों को भी समिति का हिस्सा बनाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित प्रत्येक पहलू की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करना बताया गया है।

    याचिका में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें मूल OMR शीट से लेकर प्रश्न पत्र और आंसर की तक को संरक्षित रखने की बात कही गई है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों से संबंधित बायोमेट्रिक रिकॉर्ड परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज डिस्पैच रजिस्टर परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट और स्कैनिंग तथा मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक ये दस्तावेज किसी भी स्वतंत्र जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं।

    JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के रुख पर नजर रहेगी। फिलहाल परीक्षा रद्द होगी या नहीं और CBI अथवा किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाएगी या नहीं इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई

    ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई


    भोपाल । भोपाल की मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार को जिला अदालत में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर जांच एजेंसियों के साथ साथ दोनों पक्षों की भी नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि माना जा रहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई इस दौरान दिल्ली एम्स की दूसरी पोस्टमॉर्टम की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर सकती है। वहीं मामले के दोनों आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई जा सकती है।

    ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। घटना के बाद ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी करते हुए दिल्ली एम्स से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई 2026 को सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। इसके बाद एजेंसी लगातार वैज्ञानिक साक्ष्यों डिजिटल रिकॉर्ड घटनास्थल की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान सीबीआई ने घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन भी कराया और कई तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए।

    सूत्रों के अनुसार दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पृष्ठों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी थी। रिपोर्ट की एक प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि जांच में कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू और ट्विशा की गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता का उल्लेख किया गया है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीबीआई के पास जांच पूरी कर चालान पेश करने की वैधानिक समय सीमा तेजी से पूरी होने की ओर है। कानून के अनुसार एजेंसी को निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। यदि तय समय में चालान पेश नहीं किया जाता है तो आरोपी पक्ष को डिफॉल्ट जमानत का दावा करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।

    ऐसे में अदालत की आज की कार्यवाही इस हाई प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सीबीआई फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ चालान भी पेश करती है तो जांच अगले चरण में पहुंच जाएगी और मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सकती है। पूरे प्रदेश की नजर अब अदालत की कार्यवाही और सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी

    ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी


    नई दिल्ली। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे। इस संवेदनशील मामले पर अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।

    सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच की निष्पक्षता और प्रगति के लिए आवश्यक है।

    जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जारी है। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से जांच को नई दिशा मिल सकती है इसलिए सभी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जांच का अहम हिस्सा है लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के अनुसार लैपटॉप में मौजूद संभावित डिजिटल जानकारी और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए पासवर्ड जरूरी है। इसके बिना कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।

    सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इससे पहले अदालत ने 16 जून को दोनों आरोपियों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब एजेंसी ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच पूरी की जा सके। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों आरोपी आगे भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे या नहीं।

    गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 11 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी बीच हाल ही में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर चोरी की घटना भी सामने आई थी जिसमें कुछ दस्तावेज और जेवरात चोरी करने का प्रयास किया गया था हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी सामान छोड़कर फरार हो गए थे। अब पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है क्योंकि उसी के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

    ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी


    मध्य प्रदेश । भोपाल में चर्चित एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत अब 30 जून तक बढ़ा दी गई है। मंगलवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष अपनी ओर से कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से जुड़ी खबरों को काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सामग्री पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार उपलब्ध कराया जाए।

    इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने वकीलों से मिलने के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा को समाप्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए कानूनी सलाह और रणनीति पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि बचाव पक्ष की रणनीति बेहतर ढंग से तैयार की जा सके। हालांकि अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया जाना है, परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी प्रक्रिया में है। इसी आधार पर सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से अदालत में कुछ अन्य आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ट्विशा के बैंक खाते, कथित सात लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से संबंधित जांच की मांग शामिल थी। अदालत ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है।

    मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा। गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि परिजनों को सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही जांच के दौरान जब्त की गई दवाइयों के जब्ती पंचनामा की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। अदालत ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लीगल एड वकील आरोपी पक्ष के साथ जुड़े दिखाई दिए, जबकि उनकी नियुक्ति गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

  • ट्विशा शर्मा केस में CBI ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत की मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब भी इंतजार

    ट्विशा शर्मा केस में CBI ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत की मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब भी इंतजार


    भोपाल:  भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को अदालत में महत्वपूर्ण आवेदन प्रस्तुत करते हुए आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने फिलहाल किसी भी आरोपी की पुलिस रिमांड नहीं मांगी और केवल न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया।

    सुनवाई के दौरान ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया है कि मामले से जुड़ी दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक एजेंसी को प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे मौत की परिस्थितियों और कारणों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश पड़ सकता है। ऐसे में रिपोर्ट का इंतजार जांच एजेंसी के साथ-साथ मृतका के परिजनों और आम जनता को भी है।

    अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। दोनों वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और वर्चुअल माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही में शामिल हुए। सीबीआई की ओर से न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग के बाद अदालत ने पक्षों की दलीलें सुनीं। अब इस मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनाया जाएगा।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला शुरुआत से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी लगातार मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और अब तक कई अहम साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया जा चुका है। हालांकि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अभाव में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना अभी बाकी माना जा रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में बेहद अहम दस्तावेज होती है। यह रिपोर्ट न केवल मौत के कारणों की पुष्टि करती है, बल्कि जांच की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही वजह है कि अदालत और जांच एजेंसी दोनों इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    फिलहाल मामले की अगली सुनवाई और अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने की स्थिति में सीबीआई को जांच आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। वहीं दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच में नए खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है। ट्विशा शर्मा केस प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है और हर सुनवाई के साथ लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है।