Tag: CBI investigation

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार

    राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार


    मध्य प्रदेश। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठी है। मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष, व्यापक और गहन जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना है कि परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है और इस मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आना जरूरी है।

    विपिन रघुवंशी का दावा है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है और इसमें दूसरे राज्य का भी पहलू जुड़ा हुआ है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य चर्चित मामलों में सीबीआई जांच कराई जा सकती है, तो राजा रघुवंशी हत्याकांड में भी ऐसी जांच होनी चाहिए।

    गौरतलब है कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून के लिए शिलांग गए थे। पुलिस के अनुसार, वहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि सोनम रघुवंशी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और घटना को अंजाम दिया। मामले में सोनम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर हैं।

    इसी संदर्भ में विपिन रघुवंशी ने आशंका जताई है कि जमानत पर बाहर होने के कारण मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले। हालांकि, यह परिवार की ओर से व्यक्त की गई आशंका और मांग है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    विपिन ने कहा कि उनके परिवार को अभी तक यह महसूस नहीं होता कि राजा को पूर्ण न्याय मिला है। उनका मानना है कि सीबीआई जांच से मामले की हर कड़ी की नए सिरे से जांच संभव होगी और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए।

    राजा रघुवंशी हत्याकांड सामने आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना था। मामले में पुलिस जांच, गिरफ्तारियां और बाद की कानूनी प्रक्रियाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। अब मृतक के परिजनों द्वारा एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग किए जाने से यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया है।

    फिलहाल मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और संबंधित अदालत में सुनवाई की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। वहीं, परिजन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि उन्हें न्याय मिलने का भरोसा मजबूत हो सके।

  • डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।

    डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।


    नई दिल्ली । राजस्थान के जयपुर जिले से शुरू हुई यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म के पटकथा जैसी लगती है, जहाँ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ चुके लोग ही व्यवस्था की जड़ें खोदने में लग गए। जमवा-रामगढ़ के एक रसूखदार बीवाल परिवार ने अपनी साख को दांव पर लगाकर वह रास्ता चुना जो सीधे अपराध की दुनिया की ओर ले जाता है। इस परिवार की पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है, जिसके चार बच्चे पहले ही अपनी मेहनत के दम पर डॉक्टर बनकर समाज में मिसाल पेश कर चुके थे। लेकिन इस बार लालच और अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने की जिद ने इस पूरे परिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के शिकंजे में ला खड़ा किया है। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप पर तैरते कुछ पन्नों ने न केवल एक छात्र का भविष्य अंधकार में डाल दिया, बल्कि एक प्रतिष्ठित परिवार की बरसों की कमाई हुई इज्जत को भी मिट्टी में मिला दिया।

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का केंद्र बिंदु दिनेश बीवाल और उसके भाई मांगीलाल थे। इनका भतीजा विकास, जो पिछले साल इस कठिन परीक्षा में असफल हो गया था, इस बार उनके निशाने पर था। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह डील गुरुग्राम और नासिक के अन्य गिरोहों के साथ मिलकर तय की गई थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जब हजारों छात्र रातों को जागकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दे रहे थे, तब यह परिवार व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से प्रश्नपत्रों के सौदे कर रहा था। दिनेश ने न केवल अपने परिजनों के लिए यह पेपर हासिल किया, बल्कि सूत्रों का कहना है कि उसने इसे लगभग दस अन्य लोगों के साथ भी साझा किया, जिससे यह जाल और भी गहरा होता चला गया। यह महज एक पेपर की चोरी नहीं थी, बल्कि उन लाखों ईमानदार छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ था जो दिन-रात एक कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।

    इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ सीकर के एक सजग कोचिंग शिक्षक की सतर्कता से हुआ। जब उन्होंने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे गेस पेपर की तुलना असली सवालों से की, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बिना देरी किए अधिकारियों को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी, जिसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि, जांच की कमान सीबीआई के हाथों में आने के महज चौबीस घंटों के भीतर ही बीवाल परिवार के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब जांच का दायरा सीकर के उन कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंच गया है, जहां यह संदेह जताया जा रहा है कि यह लीक हुआ पेपर बड़े पैमाने पर फैलाया गया था। इस मामले ने एक बार फिर से देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों को उजागर कर दिया है।

    प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्थानीय जांच एजेंसियों को शुरुआती दिनों में ही पेपर लीक होने के पुख्ता संकेत मिल गए थे, तो आखिर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हुई। सरकार और संबंधित विभागों की यह चुप्पी उन दलालों और माफियाओं के लिए मददगार साबित हुई जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रश्नपत्र को आग की तरह फैला दिया। वर्तमान में सीबीआई इन सभी आरोपियों को दिल्ली ले जाकर कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। यह मामला समाज के लिए एक कड़ा सबक है कि शॉर्टकट से हासिल की गई सफलता न केवल अस्थाई होती है, बल्कि वह आपके पूरे जीवन की गरिमा को भी समाप्त कर सकती है। अब इस परिवार के वो सदस्य जो वास्तव में डॉक्टर हैं, वे भी समाज के शक के घेरे में आ गए हैं और उनकी पूर्व की सफलताओं पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

  • नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि

    नीट यूजी परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच के आदेश से हड़कंप, जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि


    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट यूजी को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने लाखों छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। इस निर्णय के बाद अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, हालांकि नई तारीखों का ऐलान अभी नहीं किया गया है।

    यह परीक्षा देशभर में एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द किए जाने का मुख्य कारण पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच शुरू की गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा के कुछ प्रश्नों और सामग्री के लीक होने की शिकायतें सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद जांच एजेंसियों को मामले की जानकारी भेजी गई और सभी तथ्यों की समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट और शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जिससे इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती थी।

    इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है और अब पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई है। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़े सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और जानकारी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके।

    इस फैसले के बाद छात्रों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ परीक्षा रद्द होने से निराशा है, वहीं दूसरी ओर यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि दोबारा परीक्षा अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी।

    परीक्षा प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने पहले आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके आवेदन विवरण और परीक्षा केंद्र मान्य रहेंगे। इसके अलावा किसी भी अभ्यर्थी से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और पहले जमा की गई फीस से जुड़े नियमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    नई परीक्षा की तिथियों की घोषणा जल्द ही आधिकारिक रूप से की जाएगी। साथ ही एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी सूचनाएं भी नए शेड्यूल के अनुसार जारी की जाएंगी। प्राधिकरण ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से दूर रहें।

    इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यह कदम लंबे समय में परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी था।

    अब सभी की नजरें आगामी जांच और नई परीक्षा कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे विवाद के बाद एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।

  • राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!

    राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!



    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच की जाए और इस मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

    यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। मामले की सुनवाई पहले 6 मई को नए मामलों की सूची में शामिल थी, लेकिन याची की अर्जेंट अपील पर इसे चैंबर में सुनवाई के लिए मंजूरी दी गई। अब इस पर आज दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होनी है।

    याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीर जांच आवश्यक है। याचिका में सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इस पूरे मामले में आरोप है कि राहुल गांधी की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो सकती है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

    फिलहाल अदालत में इस याचिका की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।

  • कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    नई दिल्ली /बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में हुए भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी सहित कुल 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस चर्चित प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। अदालत ने अपने आदेश में इस घटना को गंभीर आपराधिक साजिश से जुड़ा मामला मानते हुए कड़ी सजा का आधार तैयार किया।

    विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश की भूमिका सामने आई है। अदालत ने विनय कुलकर्णी को इस पूरे प्रकरण का प्रमुख सूत्रधार मानते हुए हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

    यह घटना 15 जून 2016 की है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम परिसर में हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। विस्तृत जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और अदालत में सुनवाई शुरू हुई।

    विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों और सबूतों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया और तेज हो गई थी।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की संगठित आपराधिक गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसलिए दोषियों को कठोर सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    सभी दोषियों को हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं, जो कानून के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मृतक के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।

    इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्षों पुराने इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • हैवानियत का अंत: बांदा कोर्ट ने मासूमों के गुनहगार 'इंजीनियर' पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा बांदा,

    हैवानियत का अंत: बांदा कोर्ट ने मासूमों के गुनहगार 'इंजीनियर' पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा बांदा,


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के न्याय के मंदिर से एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला आया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बांदा की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण करने वाले और उनके अश्लील वीडियो डार्क वेब पर दुनिया भर में बेचने वाले रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए सख्त लहजे में कहा दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए।

    1. सफेदपोश की आड़ में छिपा ‘दरिंदा’
    रामभवन कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात था। समाज में सम्मानजनक पद पर रहते हुए वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक ऐसा घिनौना नेटवर्क चला रहा था, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए।

    शिकार: 5 से 16 साल के गरीब और मासूम बच्चे।

    प्रलोभन: मोबाइल गेम, खिलौने, पैसे और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देकर बच्चों को घर बुलाया जाता था।

    अपराध का तरीका: पति-पत्नी मिलकर बच्चों का यौन शोषण करते थे और लैपटॉप के जरिए उनकी वीडियो और फोटो रिकॉर्ड करते थे।

    2. डार्क वेब के जरिए 47 देशों में ‘मासूमियत’ का सौदा
    सीबीआई की जांच में जो खुलासे हुए, वे चौंकाने वाले थे। यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल सिंडिकेट का हिस्सा था।

    ग्लोबल नेटवर्क: इंटरपोल से मिले इनपुट के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।

    निर्यात: ये आरोपी बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचते थे।

    साक्ष्य: सीबीआई को एक पेनड्राइव मिली जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें थीं।

    3. सीबीआई की मुस्तैदी और ऐतिहासिक ट्रायल
    अक्टूबर 2020 में मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने बेहद पेशेवर तरीके से जांच की:

    गिरफ्तारी: 17 नवंबर 2020 को दोनों को दबोचा गया।

    चार्जशीट: मात्र 88 दिनों के भीतर 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।

    गवाही: कोर्ट में 74 गवाहों को पेश किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और एम्स (AIIMS) दिल्ली में हुए बच्चों के मेडिकल परीक्षण ने आरोपियों के खिलाफ केस को अभेद्य बना दिया।

    4. कोर्ट का कड़ा रुख और मुआवजे की मांग
    अदालत ने माना कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम) श्रेणी में आता है। जहां पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव बनाने और समझौते के लिए मजबूर करने का भी दोषी पाया गया, वहीं रामभवन मुख्य अपराधी था।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि उनके पुनर्वास में मदद मिल सके।

  • केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला

    केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला


    नई दिल्ली । आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला किया है. एक्स पर पोस्ट करते हुए शनिवार 31 जनवरी, 2026 को तेजस्वी यादव ने कहा कि नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता. पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज्ड तंत्र की विफलता है जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते हैं.

    उन्होंने कहा नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जांच भी बंद कर दी. यही इस मामले में होना है. कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा  क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होंगी

    चरित्र हनन तक की कोशिश: मनोज झा
    उधर बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नीट छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आग्रह पर आरजेडी सासंद मनोज कुमार झा ने कहा बिहार में आज के दिन स्थिति ठीक नहीं है. इस घटना में भी चरित्र हनन तक की कोशिश की गई. अब आप छलावरण कर रहे हैं.

    सरकार की नीयत साफ: विजय कुमार सिन्हा

    बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “सरकार की नीयत साफ है. हमने ईमानदारी से जांच करने का प्रयास किया. पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं था इसलिए मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया गया. पूरी तरह से न्याय मिले, ये सरकार सुनिश्चित कर रही है. वहीं सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि देर से उठाया सही कदम पर इस मामले में तत्काल उच्च न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए! अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव लिखते हैं इस मामले में कई बड़े-बड़े को बचाने के लिए घृणित स्तर तक खेल चला है इसमें सबको बेनकाब करना जरूरी है! मनीष के पीछे कौन है DGP साहब?

  • नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार

    नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार



    नई दिल्ली। नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुए दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में CBI की एंट्री 21 जनवरी की रात हुई, जब जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़े दस्तावेज और फाइलें अपने साथ ले लीं।

    यह कदम इस बात का संकेत है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भूमि आवंटन, निर्माण मानक और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला बन चुका है।

    अब CBI इस केस में स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन और MJ विजटाउन की भूमिका की जांच करेगी।

    CBI की जांच का केंद्र: स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट और बिल्डर की भूमिका
    हादसा स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 (ए-3) में हुआ था। यह वही जगह है जहाँ गहरे पानी से भरा गड्ढा था और युवराज की कार उसमें गिर गई थी।यह प्लॉट 27,185 वर्ग मीटर का है और लेआउट में इसे कॉमर्शियल उपयोग के लिए दिखाया गया था।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MJ विजटाउन को इस प्लॉट का एक हिस्सा आवंटित किया गया था और इस पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है।

    यही वजह है कि CBI अब इस प्लॉट के आवंटन, उपविभाजन और बिल्डर के कर्ज के मसले की भी जांच करेगी।

    फॉरेंसिक टीम ने की गहन जांच
    घटना स्थल पर फॉरेंसिक टीम ने इंच-इंच माप कर जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी।

    जांच में यह बात सामने आई कि हादसे वाली जगह पर सुरक्षा रेलिंग या ठोस बैरिकेडिंग नहीं थी, जिसे हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों ने कोहरे के बीच बचाव कार्य किया, लेकिन युवा इंजीनियर को बचाया नहीं जा सका।

    अभय कुमार की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
    इस मामले में MJ विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उन्हें सूरजपुर की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी की और निर्देश दिए कि यह स्पष्ट किया जाए कि लापरवाही किसकी हैनाली टूटने की जिम्मेदारी किसकी, और बैरिकेडिंग नहीं लगाने की जिम्मेदारी किसकी।

    क्या था पूरा मामला?
    गुरुग्राम में काम करने वाले इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 में निर्माण स्थल के पास उनकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
    कथित तौर पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं पहुंची और उनकी मौत हो गई।

    उनके पिता राज कुमार मेहता ने इस पूरी त्रासदी को अपनी आंखों के सामने देखा।

    अब तक 4 गिरफ्तार, 2 FIR दर्ज
    नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज की हैं और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
    CBI की जांच के बाद यह संख्या बढ़ने की भी संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा भूमि आवंटन और प्राधिकरण के फैसलों तक पहुंच गया है।

    यह मामला अब सिर्फ हादसा नहीं रहा। CBI की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही और किसके स्वार्थ ने एक युवा की जान ली।
    अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं—क्योंकि इस केस में न सिर्फ बिल्डर, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है।