Tag: CBI investigation

  • कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    नई दिल्ली /बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में हुए भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी सहित कुल 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस चर्चित प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। अदालत ने अपने आदेश में इस घटना को गंभीर आपराधिक साजिश से जुड़ा मामला मानते हुए कड़ी सजा का आधार तैयार किया।

    विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश की भूमिका सामने आई है। अदालत ने विनय कुलकर्णी को इस पूरे प्रकरण का प्रमुख सूत्रधार मानते हुए हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

    यह घटना 15 जून 2016 की है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम परिसर में हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। विस्तृत जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और अदालत में सुनवाई शुरू हुई।

    विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों और सबूतों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया और तेज हो गई थी।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की संगठित आपराधिक गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसलिए दोषियों को कठोर सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    सभी दोषियों को हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं, जो कानून के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मृतक के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।

    इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्षों पुराने इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • हैवानियत का अंत: बांदा कोर्ट ने मासूमों के गुनहगार 'इंजीनियर' पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा बांदा,

    हैवानियत का अंत: बांदा कोर्ट ने मासूमों के गुनहगार 'इंजीनियर' पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा बांदा,


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के न्याय के मंदिर से एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला आया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बांदा की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण करने वाले और उनके अश्लील वीडियो डार्क वेब पर दुनिया भर में बेचने वाले रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए सख्त लहजे में कहा दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए।

    1. सफेदपोश की आड़ में छिपा ‘दरिंदा’
    रामभवन कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात था। समाज में सम्मानजनक पद पर रहते हुए वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक ऐसा घिनौना नेटवर्क चला रहा था, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए।

    शिकार: 5 से 16 साल के गरीब और मासूम बच्चे।

    प्रलोभन: मोबाइल गेम, खिलौने, पैसे और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देकर बच्चों को घर बुलाया जाता था।

    अपराध का तरीका: पति-पत्नी मिलकर बच्चों का यौन शोषण करते थे और लैपटॉप के जरिए उनकी वीडियो और फोटो रिकॉर्ड करते थे।

    2. डार्क वेब के जरिए 47 देशों में ‘मासूमियत’ का सौदा
    सीबीआई की जांच में जो खुलासे हुए, वे चौंकाने वाले थे। यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल सिंडिकेट का हिस्सा था।

    ग्लोबल नेटवर्क: इंटरपोल से मिले इनपुट के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।

    निर्यात: ये आरोपी बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचते थे।

    साक्ष्य: सीबीआई को एक पेनड्राइव मिली जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें थीं।

    3. सीबीआई की मुस्तैदी और ऐतिहासिक ट्रायल
    अक्टूबर 2020 में मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने बेहद पेशेवर तरीके से जांच की:

    गिरफ्तारी: 17 नवंबर 2020 को दोनों को दबोचा गया।

    चार्जशीट: मात्र 88 दिनों के भीतर 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।

    गवाही: कोर्ट में 74 गवाहों को पेश किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और एम्स (AIIMS) दिल्ली में हुए बच्चों के मेडिकल परीक्षण ने आरोपियों के खिलाफ केस को अभेद्य बना दिया।

    4. कोर्ट का कड़ा रुख और मुआवजे की मांग
    अदालत ने माना कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम) श्रेणी में आता है। जहां पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव बनाने और समझौते के लिए मजबूर करने का भी दोषी पाया गया, वहीं रामभवन मुख्य अपराधी था।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि उनके पुनर्वास में मदद मिल सके।

  • केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला

    केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला


    नई दिल्ली । आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला किया है. एक्स पर पोस्ट करते हुए शनिवार 31 जनवरी, 2026 को तेजस्वी यादव ने कहा कि नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता. पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज्ड तंत्र की विफलता है जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते हैं.

    उन्होंने कहा नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जांच भी बंद कर दी. यही इस मामले में होना है. कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा  क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होंगी

    चरित्र हनन तक की कोशिश: मनोज झा
    उधर बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नीट छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आग्रह पर आरजेडी सासंद मनोज कुमार झा ने कहा बिहार में आज के दिन स्थिति ठीक नहीं है. इस घटना में भी चरित्र हनन तक की कोशिश की गई. अब आप छलावरण कर रहे हैं.

    सरकार की नीयत साफ: विजय कुमार सिन्हा

    बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “सरकार की नीयत साफ है. हमने ईमानदारी से जांच करने का प्रयास किया. पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं था इसलिए मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया गया. पूरी तरह से न्याय मिले, ये सरकार सुनिश्चित कर रही है. वहीं सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि देर से उठाया सही कदम पर इस मामले में तत्काल उच्च न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए! अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव लिखते हैं इस मामले में कई बड़े-बड़े को बचाने के लिए घृणित स्तर तक खेल चला है इसमें सबको बेनकाब करना जरूरी है! मनीष के पीछे कौन है DGP साहब?

  • नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार

    नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार



    नई दिल्ली। नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुए दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में CBI की एंट्री 21 जनवरी की रात हुई, जब जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़े दस्तावेज और फाइलें अपने साथ ले लीं।

    यह कदम इस बात का संकेत है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भूमि आवंटन, निर्माण मानक और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला बन चुका है।

    अब CBI इस केस में स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन और MJ विजटाउन की भूमिका की जांच करेगी।

    CBI की जांच का केंद्र: स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट और बिल्डर की भूमिका
    हादसा स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 (ए-3) में हुआ था। यह वही जगह है जहाँ गहरे पानी से भरा गड्ढा था और युवराज की कार उसमें गिर गई थी।यह प्लॉट 27,185 वर्ग मीटर का है और लेआउट में इसे कॉमर्शियल उपयोग के लिए दिखाया गया था।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MJ विजटाउन को इस प्लॉट का एक हिस्सा आवंटित किया गया था और इस पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है।

    यही वजह है कि CBI अब इस प्लॉट के आवंटन, उपविभाजन और बिल्डर के कर्ज के मसले की भी जांच करेगी।

    फॉरेंसिक टीम ने की गहन जांच
    घटना स्थल पर फॉरेंसिक टीम ने इंच-इंच माप कर जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी।

    जांच में यह बात सामने आई कि हादसे वाली जगह पर सुरक्षा रेलिंग या ठोस बैरिकेडिंग नहीं थी, जिसे हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों ने कोहरे के बीच बचाव कार्य किया, लेकिन युवा इंजीनियर को बचाया नहीं जा सका।

    अभय कुमार की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
    इस मामले में MJ विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उन्हें सूरजपुर की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी की और निर्देश दिए कि यह स्पष्ट किया जाए कि लापरवाही किसकी हैनाली टूटने की जिम्मेदारी किसकी, और बैरिकेडिंग नहीं लगाने की जिम्मेदारी किसकी।

    क्या था पूरा मामला?
    गुरुग्राम में काम करने वाले इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 में निर्माण स्थल के पास उनकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
    कथित तौर पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं पहुंची और उनकी मौत हो गई।

    उनके पिता राज कुमार मेहता ने इस पूरी त्रासदी को अपनी आंखों के सामने देखा।

    अब तक 4 गिरफ्तार, 2 FIR दर्ज
    नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज की हैं और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
    CBI की जांच के बाद यह संख्या बढ़ने की भी संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा भूमि आवंटन और प्राधिकरण के फैसलों तक पहुंच गया है।

    यह मामला अब सिर्फ हादसा नहीं रहा। CBI की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही और किसके स्वार्थ ने एक युवा की जान ली।
    अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं—क्योंकि इस केस में न सिर्फ बिल्डर, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है।