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  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सीबीआई और राज्य सरकार ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत मिलेगी या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यह आरोप भी लगाया गया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सीबीआई और राज्य सरकार ने आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो मामले के गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकारी पक्ष ने याचिका खारिज करने की मांग की।

    सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से संबंधित रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों से जांच को आगे बढ़ाने और मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा भी जमानत का विरोध करते समय उठाया गया।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। इसके अलावा यह तर्क रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

    यह मामला भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना के बाद मामले की जांच और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

    मामले में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका में सीबीआई, गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को प्रतिवादी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।

    अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हैं। जमानत के पक्ष में बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और हिरासत की अवधि से जुड़े तर्क रखे हैं, जबकि सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच की स्थिति तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के आधार पर विरोध किया है। अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा।

  • CBI: केनरा बैंक से 212 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में IL&FS के एमडी और निदेशकों पर केस दर्ज

    CBI: केनरा बैंक से 212 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में IL&FS के एमडी और निदेशकों पर केस दर्ज


    मुंबई।
    केनरा बैंक (Canara Bank) की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) (Central Bureau of Investigation – CBI) ने आईएल एंड एफएस एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (IL&FS Energy Development Company Limited) और उसके प्रबंध निदेशकों व निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह मामला बैंक के साथ कथित धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है. सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में बैंक को 212.34 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है. मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

    सीबीआई ने यह मामला मुंबई के बांद्रा पूर्व स्थित केनरा बैंक के मंडल कार्यालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है. मामले में कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशक सुनील वाधवा, अनूप सेठ, हरि शंकरन, रमेश चंद्र बाव और अरुण कुमार साहा के नाम शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

    सीबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत तत्कालीन सिंडिकेट बैंक से 100 करोड़ रुपये का सावधि कर्ज लिया था. यह कर्ज मुंबई की एलसीबी शाखा से लिया गया था. इसके अलावा लंदन शाखा से 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज भी लिया गया था. आरोप है कि कंपनी ने बैंक से मिले पैसों का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए नहीं किया, जिसके लिए कर्ज मंजूर किया गया था. सीबीआई के मुताबिक, कंपनी ने बैंक की रकम को अपनी सहयोगी कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेज दिया और इससे बैंक को नुकसान हुआ।


    मुंबई, दिल्ली और नोएडा में सीबीआई की छापेमारी

    सीबीआई ने 21 अक्टूबर 2026 को मामला दर्ज करने के बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली. ये तलाशी मुंबई, दिल्ली और नोएडा समेत कई जगहों पर की गई.तलाशी के दौरान जांच से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए. इनमें बैंक से जुड़े दस्तावेज, जमा पर्चियां, म्यूचुअल फंड से जुड़े कागजात, निदेशकों के बैंक खातों और संपत्तियों की जानकारी और कंपनी के बही-खाते शामिल हैं. सीबीआई ने इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया है।

  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए। पूछताछ हरिद्वार के भेल क्षेत्र स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में हुई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम और पूर्व विधायक वहां से रवाना हो गए। इस पूछताछ के बाद मामले की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

    पूछताछ के बाद सुरेश राठौड़ ने बाहर आकर अपने बयान में कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने जो भी सवाल पूछे, उनसे संबंधित बातें उन्होंने सत्यता के साथ बताईं। उन्होंने कहा, “मैंने सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग किया है। न इससे कम, न इससे ज्यादा।” पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करते रहेंगे।

    वायरल ऑडियो पर सवाल, उर्मिला सनावर से अनभिज्ञता जताई
    पूछताछ के बाद पत्रकारों ने सुरेश राठौड़ से कथित वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े संबंधों को लेकर सवाल किए। इस पर पूर्व विधायक ने उर्मिला सनावर के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि उर्मिला सनावर कौन हैं और उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वायरल ऑडियो को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में यह सवाल अहम माना जा रहा है, हालांकि पूछताछ में अधिकारियों ने किन-किन विशिष्ट बिंदुओं पर सवाल किए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अंकिता के परिजनों ने की थी कार्रवाई की मांग

    पिछले कुछ दिनों में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था और सीबीआई मुख्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। परिजनों ने मामले में जल्द और कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई थी। परिवार की ओर से न्याय की मांग लगातार चर्चा में रही है। इसी बीच सीबीआई की ओर से पूर्व विधायक से पूछताछ किए जाने की घटना जांच की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद बढ़ा था विवाद
    इससे पहले सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इस रिकॉर्डिंग को लेकर अलग-अलग सवाल उठे और मामले ने राजनीतिक चर्चा का रूप भी लिया। हालांकि, किसी कथित रिकॉर्डिंग में कही गई बातों और उनकी सत्यता को जांच के निष्कर्ष के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी कारण इस प्रकरण में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    सीबीआई जांच में किन पहलुओं पर नजर?

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वायरल ऑडियो से जुड़े सवाल भी इस मामले की चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, पूर्व विधायक से पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने किन विशेष जानकारियों की पुष्टि करने की कोशिश की और इस पूछताछ से जांच को क्या निष्कर्ष मिला, इसका आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    फिलहाल सुरेश राठौड़ ने जांच में सहयोग करने की बात कही है और उर्मिला सनावर को लेकर जानकारी होने से इनकार किया है। सीबीआई की पूछताछ को मामले की जांच की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आगे की कार्रवाई और जांच से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम के व्यापक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह याचिका ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

    ट्विशा के पिता ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई भोपाल के बजाय दिल्ली में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिका पर आगे विचार किए जाने तक भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई का स्थान बदलने को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला उनके परिवार की ओर से घटना पर सवाल उठाए जाने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद चर्चा में आया था। ट्विशा पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं। उन्होंने मॉडलिंग के अलावा तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने लगीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों की शादी दिसंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद 12 मई को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    ट्विशा के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उनके पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया था कि शादी से पहले ही समर्थ का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। परिवार की ओर से समर्थ की मां और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर भी दहेज के लिए ट्विशा को परेशान करने का आरोप लगाया गया है।

    मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के सिर, कान और हाथ पर चोट के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट में इन चोटों के मौत से पहले लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत से उनके संबंध को लेकर जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से बहू के व्यवहार और कथित नशे की आदत को लेकर आरोप लगाए गए थे। आवेदन में दावा किया गया था कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी और नशा नहीं मिलने पर उनका व्यवहार असामान्य हो जाता था। ये दावे जमानत आवेदन में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

    ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने भी परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ट्विशा काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए नोएडा लौटने की इच्छा जताई थी।
    अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगी अंतरिम रोक के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। दिल्ली में सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इस बीच, ट्विशा की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार जारी रहेगा।

  • पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, धांधली और लेनदेन के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया गया था। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई चिट्ठी और उसमें लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और उनके सहयोगियों नितिन गोहल तथा बीर देविंदर के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताई थी और पंजाब पुलिस के रवैये से संतुष्ट नहीं होने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

    पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में इस मामले पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनाव से पहले लगाए जा रहे ऐसे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। विकास सिंह ने कहा कि ये आरोप राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित हैं और चुनाव से पहले ऐसे मामले गढ़े जा रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को इसी आधार पर चुनौती दी है।

    मामले की शुरुआत ईडी की गोपनीय जांच से जुड़ी है। ईडी ने अपनी जांच के दौरान आरोपों से संबंधित सामग्री जुटाई थी। इसमें अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग करवाने, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कामों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोपों का उल्लेख था। ईडी ने 30 जुलाई 2026 को यह सामग्री पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी थी और मामले में केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। इसके बाद इस मामले को लेकर जांच और कार्रवाई का मुद्दा अदालत तक पहुंचा।

    पंजाब हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएमओ से जुड़े लोगों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से पंजाब डीजीपी को भेजे गए पत्रों के आधार पर सीबीआई को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा था। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

    मामले में सरकार का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित तरीके से उठाया जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला किया था। अदालत ने जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

    अब सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती पर सुनवाई के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में ईडी की ओर से जुटाई गई सामग्री में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कार्यों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप शामिल हैं। पंजाब सरकार ने इन आरोपों और जांच की प्रक्रिया को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई को केस दर्ज कर जांच करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे चुका है।

  • दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने सोमवार को दिशा सालियान मामले को लेकर शिवसेना यूबीटी विधायक आदित्य ठाकरे पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मामले में आरोपों के बीच आदित्य ठाकरे विदेश जा चुके हो सकते हैं या विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने कहा कि आदित्य ठाकरे ने रविवार को मुंबई में आयोजित विरोध मार्च में हिस्सा नहीं लिया। यह मार्च सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाला गया था। राणे ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे गिरफ्तारी के डर से इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं। इसके करीब एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत भी अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर उस समय कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान की मौत के मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जांच के आधार पर पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने आत्महत्या की थी।

    दिशा सालियान के पिता ने उनकी मौत के मामले में आदित्य ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाल में मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि प्राथमिकी में किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है। आदित्य ठाकरे ने अपने बचाव में कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उनका नाम दिशा सालियान मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

    नितेश राणे ने कहा कि रविवार को आदित्य ठाकरे मंच पर मौजूद नहीं थे और उनकी गैरमौजूदगी की वजह बीमारी बताई गई। उन्होंने कहा कि केवल गैरमौजूदगी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आदित्य ठाकरे विदेश चले गए हैं या जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने यह भी कहा कि यह संभावना हो सकती है कि वह विदेश गए हों और उनके आवास पर जाकर उनकी मौजूदगी की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दिशा सालियान की मौत से संबंधित प्राथमिकी और बयानों में आदित्य ठाकरे का नाम बार-बार सामने आया है और जांच एजेंसियों से उनसे पूछताछ कर तथ्यों का पता लगाने की मांग की।

    राणे ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास यह संदेह करने का कानूनी आधार है कि आदित्य ठाकरे देश छोड़ सकते हैं, तो कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने लुकआउट नोटिस जारी करने और पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदमों का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही कहा कि ऐसी कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक इसके लिए ठोस सबूत और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। भाजपा नेता ने एक निकाय ठेके से जुड़े मामले में जांच का सामना कर रहे अभिनेता डिनो मोरिया को महज एक ‘मुखौटा’ बताते हुए आदित्य ठाकरे को उनका ‘गॉडफादर’ होने का आरोप भी लगाया। राणे ने कहा कि उनकी मांग निष्पक्ष जांच की है और कानून व्यक्ति के पद या हैसियत की परवाह किए बिना सभी के लिए समान होना चाहिए।

  • एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एलआईसी निवेश फ्रॉड मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत के सामने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस एडीए ग्रुप के ग्रुप एमडी अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास जोशी और एलआईसी के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

    मामला एलआईसी की ओर से वर्ष 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 1,500 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार ये डिबेंचर गंभीर रूप से गलत जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे। एलआईसी की ओर से की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 1 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि डिबेंचर की सदस्यता से प्राप्त धनराशि बाद में एडीए ग्रुप की कंपनियों में भेजी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे एलआईसी को कथित तौर पर गलत तरीके से नुकसान हुआ और संबंधित आरोपियों तथा संस्थाओं को अनुचित लाभ मिला।

    जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में एलआईसी को हुआ कुल कथित नुकसान 3,750 करोड़ रुपये है। सीबीआई ने कहा है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने और दूसरे आरोपों की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। चार्जशीट में शामिल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दर्ज मामले के आधार पर हैं। मामले में आगे की जांच के साथ अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।

    इसके अलावा सीबीआई की बीएसएफबी, दिल्ली शाखा ने कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एलआईसी और ईपीएफओ से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस एडीए ग्रुप की अन्य संस्थाओं के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले अलग-अलग शिकायतों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं। एजेंसी इन मामलों में भी जांच आगे बढ़ा रही है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में इससे पहले सात चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। मौजूदा चार्जशीट इन मामलों में आठवीं चार्जशीट है। एजेंसी ने बताया कि अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एलआईसी निवेश मामले में दाखिल मौजूदा चार्जशीट के बाद जांच का दायरा आगे भी जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका तथा अतिरिक्त आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!

    LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!


    नई दिल्ली।
    अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई-CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी) (Reliance Capital Limited – RCAP), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। एक खबर के मुताबिक यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (Life Insurance Corporation of India – LIC) के निवेश से जुड़े 2684 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। हालांकि, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों को खारिज किया है।


    क्या कहा प्रवक्ता ने?

    प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा, ”सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है। अनिल अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के बोर्ड में गैर कार्यकारी निदेशक/चेयरमैन रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कंपनी के निदेशक मंडल को हटाकर एक प्रशासक नियुक्त कर दिया था।” प्रवक्ता के मुताबिक अनिल अंबानी ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और कानून के तहत उन्हें मिले सभी अधिकारों को वह सुरक्षित रखते हैं।


    क्या है आरोप?

    सीबीआई के अनुसार, एलआईसी का आरोप है कि 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच उसने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड द्वारा जारी किए गए पांच अपरिवर्तनीय ‘डिबेंचर’ खरीदे थे, जिनकी कुल कीमत 3,900 करोड़ रुपये थी। ये निवेश सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों, फंड की जरूरतों और मौजूदा कर्ज को फिर से री-फाइनेंस के लिए किए गए थे।

    एलआईसी का आरोप है कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश रची और कई अपराध किए, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक कदाचार, फंड का गलत इस्तेमाल/गबन और खातों में हेराफेरी शामिल हैं। एलआईसी का आरोप है कि आरोपियों ने गलत जानकारी देकर उसे कंपनी में निवेश करने के लिए छल से राजी किया और उसके बाद धोखाधड़ी से फंड को अन्य खातों में भेज दिया। इन कथित कृत्यों की वजह से एलआईसी को 2,684 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।


    पहले भी कई मामले दर्ज

    सीबीआई ने बताया कि उसने पहले कई सरकारी बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ आठ प्राथमिकी दर्ज की थीं।

    इन मामलों में अब तक छह आरोपपत्र दाखिल किये जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बयान में कहा गया है कि मामलों की जांच चल रही है और उच्चतम न्यायालय इनकी निगरानी कर रहा है।