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  • चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक

    चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इलाके में लूट की कोशिश का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले से कुछ ही दूरी पर पांच युवकों ने एक युवक को रोककर लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपियों ने चाकू निकाल लिया और युवक की ओर बढ़ने लगे। अपनी जान को खतरा देखकर पीड़ित को मौके से भागना पड़ा। घटना के बाद पीड़ित ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। वारदात से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।

    जानकारी के मुताबिक रांझी निवासी वैभव दुबे एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। 12 अक्टूबर की रात करीब 1 बजकर 52 मिनट पर वह एक्टिवा से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान जब वह सिविल लाइन चौराहे पर पहुंचा तो दो एक्टिवा पर सवार पांच युवकों ने उसे रोक लिया। अचानक रास्ता रोके जाने से वैभव मुश्किल स्थिति में आ गया। आरोपियों में से एक युवक अपनी गाड़ी से उतरकर उसके करीब पहुंचा। वैभव ने हिम्मत दिखाते हुए उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन हालात जल्द ही बदल गए।

    बताया गया है कि वैभव के विरोध करने पर आरोपी वहां से हटने लगे। हालांकि कुछ दूरी पर जाकर वे फिर रुक गए। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने के मुताबिक आरोपियों ने चाकू निकाला और वैभव की ओर बढ़ने लगे। बदमाशों के हाथ में चाकू देखकर वैभव को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ और उसने वहां से दौड़ लगा दी। करीब 56 सेकेंड के फुटेज में आरोपी एक्टिवा पर सवार होकर तेज रफ्तार से इंद्रा मार्केट की ओर भागते नजर आ रहे हैं।

    घटना के बाद वैभव किसी तरह सिविल लाइन थाने पहुंचा और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। मामला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के बंगले के नजदीक का होने के कारण भी इलाके की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि और आरोपियों की भूमिका का पता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक पांच आरोपियों में से मास्क पहने एक युवक की पहचान करने में सफलता मिली है। बाकी आरोपियों की पहचान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी शशि धुर्वे के अनुसार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द हिरासत में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    इस घटना में राहत की बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार युवक आरोपियों के चंगुल से निकलने में सफल रहा। अब पुलिस के सामने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी संदिग्धों की पहचान करने और घटना की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य लूट था और वारदात की योजना किस तरह बनाई गई थी।

  • कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक

    कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में नगर परिषद की कचरा उठाने वाली सरकारी गाड़ी चोरी होने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 31 अगस्त की रात नगर परिषद परिसर से चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी को पुलिस ने अशोकनगर जिले के साढ़ौरा से बरामद कर लिया है। वाहन की तलाश में पुलिस ने कोलारस से साढ़ौरा तक करीब 50 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और एक के बाद एक मिले सुरागों को जोड़ते हुए चोरी हुई गाड़ी तक पहुंच गई। फिलहाल वाहन को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर कोलारस थाने पहुंचा दिया है जबकि CCTV फुटेज में नजर आए संदिग्ध की तलाश जारी है।

    जानकारी के मुताबिक नगर परिषद कोलारस की टाटा ट्रिपर कचरा गाड़ी क्रमांक MP33L2598 को 31 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे नगर परिषद कार्यालय परिसर से चोरी कर लिया गया था। रात में गाड़ी के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद नगर परिषद कर्मचारियों ने आसपास के इलाके में तलाश शुरू की लेकिन वाहन का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।

    जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग उस समय मिला जब CCTV फुटेज में चोरी की गई गाड़ी रात करीब 9:40 बजे रेलवे स्टेशन रोड की तरफ जाती दिखाई दी। इसके कुछ देर बाद रात करीब 10 बजे यही वाहन पूरनखेड़ी टोल प्लाजा से गुजरता हुआ नजर आया। टोल प्लाजा के कैमरों में गाड़ी को ले जाते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति भी दिखाई दिया। इस फुटेज ने पुलिस की जांच को नई दिशा दी।

    नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की शिकायत पर कोलारस थाने में मामला दर्ज किया गया। थाना प्रभारी पुनीत बाजपेई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वाहन की तलाश शुरू की। पुलिस ने केवल एक या दो स्थानों के CCTV पर निर्भर रहने के बजाय पूरे संभावित रास्ते की फुटेज खंगालना शुरू किया। कोलारस से साढ़ौरा तक अलग अलग स्थानों पर लगे करीब 50 CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई। कई कैमरों में वाहन की गतिविधियों को जोड़ते हुए पुलिस ने उसके संभावित मार्ग का पता लगाया।

    लगातार जांच के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी की गई सरकारी गाड़ी अशोकनगर जिले के साढ़ौरा तक पहुंच चुकी है। इसके बाद पुलिस टीम ने साढ़ौरा रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की। इसी दौरान चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी बरामद कर ली गई। वाहन को पुलिस ने कब्जे में लेकर कोलारस थाने भेज दिया।

    पुलिस की जांच में एक और अहम बात सामने आई है। बरामद गाड़ी के टैंक में डीजल नहीं मिला है। ऐसे में प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि रास्ते में डीजल खत्म होने के बाद संदिग्ध ने गाड़ी को साढ़ौरा रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया और वहां से ट्रेन पकड़कर फरार हो गया। हालांकि यह अभी पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है। आरोपी ने वाहन को क्यों छोड़ा और वह किस दिशा में फरार हुआ इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    अब पुलिस का पूरा ध्यान CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्ध की पहचान और गिरफ्तारी पर है। पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी की तस्वीर और हुलिए का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोरी की वारदात अकेले व्यक्ति ने की थी या इसके पीछे कोई और भी शामिल था। नगर परिषद परिसर से सरकारी वाहन चोरी होने के कारण पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है।

    फिलहाल चोरी हुई कचरा गाड़ी बरामद होने से नगर परिषद और पुलिस ने राहत की सांस ली है लेकिन इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। 50 CCTV कैमरों से मिले सुरागों ने पुलिस को वाहन तक तो पहुंचा दिया है अब सबसे बड़ी चुनौती उस व्यक्ति तक पहुंचना है जिसने सरकारी गाड़ी को नगर परिषद परिसर से चोरी किया था।

  • PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात

    PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात


    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की रकम बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपए हो गई है। मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल पर भी पुलिस की जांच का शिकंजा कस गया है। उसके परिजनों का दावा है कि मंगलवार देर रात पुलिस उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हालांकि, पुलिस ने उसकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    जांच के दौरान बालेली गांव निवासी विशाल की एक CCTV फुटेज सामने आई है, जिसमें वह करेंसी की गड्डी से नोट निकालता हुआ दिखाई दे रहा है। विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और पिछले डेढ़ साल से करेंसी चेस्ट में पार्ट टाइम हाउस कीपर के रूप में तैनात था।

    दो FIR में दर्ज हुआ मामला
    करेंसी चेस्ट में हुई गड़बड़ी को लेकर सदर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं। एक FIR में नकली नोट मिलने का मामला है, जबकि दूसरी में 4.30 लाख रुपए गायब होने की जानकारी दी गई है।

    विशाल के पिता बीरम सिंह के मुताबिक, मंगलवार देर रात पुलिस टीम उनके घर पहुंची और विशाल को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से बार-बार पूछने के बावजूद पुलिस टीम ने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

    परिवार के कई सदस्य बैंकिंग क्षेत्र में
    बीरम सिंह ने बताया कि उनका परिवार खेती-बाड़ी करता है। उनका बड़ा बेटा और बहू पीएनबी की सहारनपुर शाखा में तैनात हैं। उनसे छोटा बेटा ग्रामीण बैंक में काम करता है, जबकि एक अन्य बेटा निजी नौकरी करता है। विशाल परिवार का सबसे छोटा बेटा है।

    परिजनों के अनुसार, विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के पद पर काम कर रहा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी तैनाती करेंसी चेस्ट में की गई थी।

    29 लाख के नकली नोट और मिले
    पीएनबी की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का आंकड़ा बुधवार को करीब 29 लाख रुपए और बढ़ गया। इससे नकली नोटों की कुल रकम अब 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

    शुरुआत में करेंसी चेस्ट से 7 करोड़ 40 लाख रुपए के नोट नकली पाए गए थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़कर 17 करोड़ रुपए हुआ और अब करीब 29 लाख रुपए के नकली नोट और मिलने के बाद कुल रकम 17.29 करोड़ रुपए हो गई है।

    मामले की जांच के लिए बुधवार को लखनऊ से आरबीआई के कई अधिकारी और पांच सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी सहारनपुर पहुंची। टीम करीब 11 बजे सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट शाखा पहुंची और अन्य जांच टीमों के साथ मिलकर देर शाम तक नोटों की गिनती और जांच करती रही।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोटों की कुल संख्या 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है। मामले की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों के घर भी खंगाले गए हैं।

    आरबीआई, पीएनबी, SIT और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
    करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आरबीआई, पीएनबी, एसआईटी और फॉरेंसिक टीम अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं। जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, उनके स्थान पर नया स्टाफ भी तैनात किया गया है।

    पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल से पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, मामले की जांच के लिए बृहस्पतिवार को एनआईए की टीम के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मेरठ के पीएनबी हेड ऑफिस में भी जांच
    सहारनपुर करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की जांच का दायरा मेरठ तक पहुंच गया है। बुधवार को मेरठ बाईपास स्थित वेदव्यासपुरी के पीएनबी हेड ऑफिस का मुख्य द्वार बंद कर शाम तक जांच की गई। पीएनबी के जीएम अजय कुमार टिबरेवाल के पीए सचिन बिश्नोई ने कहा कि मामले से जुड़ी सभी जानकारी सहारनपुर से ही दी जा सकती है।

    स्ट्रांग रूम में प्रवेश की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
    फॉरेंसिक टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद फिंगरप्रिंट, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट स्ट्रांग रूम तक कैसे पहुंचे।

    बताया गया है कि करेंसी चेस्ट के स्ट्रांग रूम में प्रवेश के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। प्रवेश से पहले फिंगरप्रिंट स्कैन किया जाता है और सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है। स्ट्रांग रूम की दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास रहती हैं और उसे खोलने के लिए दोनों चाबियों का इस्तेमाल जरूरी होता है।

    दोनों चाबियां लगाए जाने और दोनों संबंधित व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट स्कैन होने के बाद ही स्ट्रांग रूम में प्रवेश संभव होता है। फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट रखने के लिए इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

    इसके अलावा नकली नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही और प्रिंटर की भी जांच की जा रही है। जांच की जिम्मेदारी पीएनबी हेड ऑफिस और आरबीआई की टीम ने संभाली हुई है।

    नोडल अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई थीं FIR
    करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के जाली नोट मिलने के मामले में नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से सदर थाने में दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

    इन मामलों में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक शर्मा, करेंसी चेस्ट खरा बाजार जगाधरी के प्रबंधक अमित कुमार और पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल को आरोपी बनाया गया है।

  • रात 3 बजे भोपाल में दहशत! दो बदमाशों ने खुलेआम चलाई गोलियां, CCTV में कैद हुई वारदात; FIR में देरी का आरोप

    रात 3 बजे भोपाल में दहशत! दो बदमाशों ने खुलेआम चलाई गोलियां, CCTV में कैद हुई वारदात; FIR में देरी का आरोप


    भोपाल । भोपाल में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात फायरिंग की घटना से इलाके में दहशत फैल गई। कजलीखेड़ा थाना क्षेत्र में रात करीब 3 बजे दो बदमाशों ने कथित तौर पर फायरिंग की। घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें दोनों आरोपी फायरिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। देर रात हुई इस वारदात के बाद आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल बन गया। पुलिस अब वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच में जुटी है।

    बताया जा रहा है कि फायरिंग की यह घटना पुरानी रंजिश से जुड़ी हुई है। घटना के बाद फरियादी अजय बैरागी शिकायत दर्ज कराने कजलीखेड़ा थाने पहुंचा। फरियादी ने आरोप लगाया कि उसने पुलिस को घटना की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की लेकिन तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई और उसे थाने से वापस भेज दिया गया। इस आरोप के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    हालांकि कजलीखेड़ा थाना प्रभारी पल्लवी पांडे ने पुलिस पर लगे आरोपों को खारिज किया है। थाना प्रभारी के मुताबिक मामले में FIR दर्ज करने में पुलिस की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। उन्होंने बताया कि फरियादी पक्ष थाने में मौजूद है और मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है और आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।

    पुलिस के मुताबिक फायरिंग का आरोप बैरागढ़ चीचली निवासी जीतू यादव पर लगाया गया है। दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद और पुरानी रंजिश होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पुरानी रंजिश की वजह क्या थी और इसी विवाद के चलते फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया या इसके पीछे कोई दूसरा कारण भी था।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिला है। वीडियो में दो लोग फायरिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस वीडियो की सत्यता और उसमें नजर आ रहे लोगों की पहचान की जांच कर रही है। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे अन्य कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा सकती है ताकि वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फायरिंग के समय घटनास्थल पर कितने लोग मौजूद थे और आरोपियों के पास हथियार कहां से आया। घटना के बाद आरोपी मौके से किस दिशा में भागे और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति ने मदद पहुंचाई या नहीं इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    आधी रात करीब 3 बजे हुई इस फायरिंग ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के लिए देर रात खुलेआम गोली चलने की घटना डर का कारण बनी हुई है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करना और फायरिंग के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाना है। फिलहाल पुलिस वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

  • आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'

    आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'


    मंदसौर । मध्य प्रदेश के मंदसौर जिला अस्पताल में आधी रात को हुई बैग चोरी की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल में अपने बेटे का इलाज कराने पहुंची महिला के पास रखा करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषणों से भरा बैग अचानक गायब हो गया। परिवार को पहले आशंका हुई कि अस्पताल परिसर में किसी ने बैग पर हाथ साफ कर दिया है लेकिन जब पुलिस ने अस्पताल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो जो सच सामने आया उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। बैग किसी इंसान ने नहीं बल्कि एक कुत्ते ने मुंह में दबाकर अस्पताल से बाहर पहुंचाया था।

    मामला 23 और 24 अगस्त की दरमियानी रात का बताया जा रहा है। कयामपुर निवासी लताबाई अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मंदसौर जिला अस्पताल आई थीं। महिला ने घर में रखे कीमती जेवर सुरक्षा की दृष्टि से अपने साथ अस्पताल लाए थे। बैग में करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण के अलावा लगभग 2 हजार रुपये नकद और खाने पीने का सामान भी रखा था। रात करीब 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला को बैग गायब होने का पता चला। लाखों रुपये के जेवरात गायब होने से परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने तत्काल पुलिस से मदद मांगी।

    लताबाई ने कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बिना देर किए अस्पताल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। पुलिस को उम्मीद थी कि फुटेज से किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सकेगी लेकिन कैमरे में जो दृश्य सामने आया उसने पूरे मामले को ही अलग मोड़ दे दिया। CCTV फुटेज में एक कुत्ता अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के आसपास घूमता दिखाई दिया। कुछ देर बाद वही कुत्ता बैग को मुंह में दबाकर अस्पताल के दरवाजे से बाहर निकलता नजर आया।

    पुलिस ने इसके बाद कुत्ते की गतिविधियों और उसके जाने की दिशा का पता लगाने के लिए आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की भी मदद ली। अलग अलग स्थानों की फुटेज को जोड़कर पुलिस टीम ने कुत्ते के रास्ते को ट्रेस किया और लगातार तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को ज्वेलरी से भरा बैग मिल गया। बैग में रखे सोने चांदी के आभूषण और अन्य सामान सुरक्षित पाए गए। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पूरा सामान महिला को वापस सौंप दिया।

    कीमती सामान वापस मिलने के बाद लताबाई और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। महिला ने पुलिस की तत्परता के लिए आभार जताया। अगर पुलिस समय रहते CCTV फुटेज खंगालकर कुत्ते की दिशा का पता नहीं लगाती तो लाखों रुपये के जेवरात बरामद करना मुश्किल हो सकता था। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का तरीका भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आमतौर पर चोरी के मामलों में संदिग्ध इंसान की तलाश की जाती है लेकिन यहां जांच का रास्ता एक कुत्ते तक पहुंचा।

    हालांकि घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता सामने आई है। सवाल यह है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा कुत्ते रात के समय वार्ड तक कैसे पहुंच रहे हैं। इस घटना में महिला का कीमती सामान वापस मिल गया लेकिन अगर बैग किसी दूसरी जगह चला जाता या कुत्ता उसे कहीं छोड़ देता तो लाखों रुपये के आभूषणों का पता लगाना काफी मुश्किल हो सकता था।

    फिलहाल इस अजीबोगरीब घटना की चर्चा पूरे मंदसौर में है। जिस मामले की शुरुआत लाखों रुपये की चोरी की आशंका से हुई थी उसका अंत एक ऐसे CCTV खुलासे के साथ हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस की तत्परता और CCTV की मदद से महिला का कीमती सामान सुरक्षित वापस मिल गया और यह मामला मंदसौर जिला अस्पताल की उन घटनाओं में शामिल हो गया जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी

    भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी


    भोपाल । भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में दर्ज कार लूट के चर्चित मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर लूट की वारदात के रूप में दर्ज इस मामले में पुलिस जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जिन्होंने पूरे घटनाक्रम पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच पैसों के लेनदेन से जुड़ी चैट मिली है। इसके साथ ही एक ऐसा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एफआईआर में दर्ज लूट के समय से करीब दो घंटे बाद आरोपी और फरियादी एक ही ढाबे पर साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार पंचवटी कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय सौरव सीतलानी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके परिचित आदित्य शर्मा उर्फ छोटू ने उसे परवलिया स्थित एक ढाबे पर बुलाया था। वहां आदित्य के साथ बाबर उर्फ मंडी मुईन और बुशरान भी मौजूद थे। खाना खाने के बाद सभी लोग सौरव की टाटा टियागो कार से भोपाल लौट रहे थे। आरोप है कि मनुआभान टेकरी के पास आदित्य ने दोस्त से मिलने का बहाना बनाकर कार रुकवाई और इसके बाद चारों ने मारपीट कर कार लूट ली।

    हालांकि जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने इस कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फुटेज के अनुसार लूट की कथित वारदात के लगभग दो घंटे बाद सभी लोग परवलिया रोड स्थित उसी ढाबे पर एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सीसीटीवी में दर्ज समय सही है या किसी तकनीकी कारण से उसमें गड़बड़ी है। इसके लिए ढाबा संचालक से भी पूछताछ की जाएगी।

    जांच में फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच हुई चैट भी पुलिस के हाथ लगी है जिसमें पैसों के लेनदेन का जिक्र है। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि मामला केवल कार लूट का नहीं बल्कि आर्थिक विवाद से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार फरियादी पहले एक मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालन से जुड़ा रहा है और इस मामले में उसे राजस्थान पुलिस पहले गिरफ्तार भी कर चुकी है। पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि आरोपी भी उसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से अब पूरे मामले में सट्टा कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों बुशरान और मुईन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है जबकि मुख्य आरोपी आदित्य समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। लूटी गई टाटा टियागो कार भी अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों मोबाइल चैट सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि फरियादी का पुराना रिकॉर्ड सामने आया है लेकिन शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि उसके साथ मारपीट हुई और कार भी छीनी गई। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में होटल बना रणक्षेत्र: हथियारबंद बदमाशों ने मचाया आतंक, होटल कर्मचारियों को भी बेरहमी से पीटा

    भोपाल में होटल बना रणक्षेत्र: हथियारबंद बदमाशों ने मचाया आतंक, होटल कर्मचारियों को भी बेरहमी से पीटा


    भोपाल । भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में शनिवार रात उस समय दहशत फैल गई जब बंगरसिया भोजपुर रोड स्थित एक होटल में 10 से 15 हथियारबंद बदमाश अचानक घुस आए। तलवार चाकू हॉकी और बेसबॉल बैट से लैस हमलावरों ने होटल के भीतर जमकर उत्पात मचाया और चार युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया। बीच बचाव करने पहुंचे होटल के शेफ और अन्य कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा गया। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई जिससे अब पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    हमले में 24 वर्षीय लीलाधर कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तत्काल एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनकी मेडिकल लीगल केस रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें 10 से 12 लोगों के समूह द्वारा धारदार हथियारों से हमला किए जाने का उल्लेख किया गया है। एक अन्य घायल युवक का भी उपचार कराया गया है।

    घायल लीलाधर के अनुसार वह अपने तीन साथियों के साथ मंडीदीप स्थित फैक्ट्री में ड्यूटी पूरी करने के बाद रात में खाना खाने होटल जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से बाइक चला रहे कुछ युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। जान बचाने के लिए चारों युवक होटल के भीतर चले गए लेकिन कुछ ही मिनटों बाद बड़ी संख्या में बदमाश हथियार लेकर वहां पहुंच गए।

    आरोप है कि हमलावरों ने होटल में घुसते ही युवकों पर हमला शुरू कर दिया। इसके बाद लीलाधर को घसीटकर बाहर ले जाया गया और उनकी गर्दन सहित शरीर के कई हिस्सों पर धारदार हथियारों से वार किए गए। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने किसी तरह बचाव नहीं किया होता तो उसकी जान भी जा सकती थी।

    घटना के दौरान होटल में मौजूद ग्राहकों और कर्मचारियों में अफरा तफरी मच गई। हमलावरों ने होटल के अंदर तोड़फोड़ भी की और बीच बचाव करने पहुंचे कर्मचारियों के साथ मारपीट की। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरों में साफ दिखाई दे रही है जिसमें हथियार लेकर होटल में घुसते और हमला करते बदमाश नजर आ रहे हैं। पीड़ित पक्ष ने यह फुटेज पुलिस को सौंप दी है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद मिसरोद थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और घायलों के बयान दर्ज किए। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और पीड़ितों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। फिलहाल पुलिस हमले के पीछे की वजह और शामिल सभी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

  • एक साल बाद फिर मंदिर में चोरी देवास के हनुमान मंदिर से चांदी का मुकुट गायब सीसीटीवी बना अहम सुराग

    एक साल बाद फिर मंदिर में चोरी देवास के हनुमान मंदिर से चांदी का मुकुट गायब सीसीटीवी बना अहम सुराग


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास शहर में एक बार फिर मंदिर से चोरी की घटना सामने आई है। मोती बंगला क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर से भगवान का चांदी का मुकुट चोरी हो गया। पूरी वारदात मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। फुटेज के आधार पर पुलिस एक संदिग्ध महिला की तलाश में जुट गई है। खास बात यह है कि इसी मंदिर में करीब एक वर्ष पहले भी मुकुट चोरी की घटना हो चुकी है।

    मंदिर से जुड़े किशोर तिलवंकर ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 10 बजकर 45 मिनट पर एक महिला मंदिर में प्रवेश करती हुई दिखाई दी। वह कुछ समय तक मंदिर के अंदर रही और करीब दो मिनट बाद बाहर निकल गई। सीसीटीवी फुटेज में महिला के हाथ में चांदी के मुकुट जैसा सामान दिखाई दे रहा है जिससे चोरी की आशंका और मजबूत हो गई।

    शाम के समय जब किशोर तिलवंकर के पिता नियमित पूजा के लिए मंदिर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि भगवान हनुमान का चांदी का मुकुट अपने स्थान पर नहीं है। इसके बाद मंदिर परिसर की जांच की गई और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। रिकॉर्डिंग देखने पर महिला की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं और मुकुट चोरी होने की पुष्टि हुई।

    मंदिर प्रबंधन के अनुसार चोरी हुए चांदी के मुकुट की कीमत सात हजार रुपए से अधिक आंकी जा रही है। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेकर महिला की पहचान करने और उसे जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही मंदिर में बार बार चोरी की घटनाएं होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लगभग एक वर्ष पहले भी इसी मंदिर से भगवान का मुकुट चोरी हुआ था। लगातार दूसरी घटना के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी है और उन्होंने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

    पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध महिला की पहचान की जा रही है। आसपास के क्षेत्रों में भी जांच की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामला केवल जमीन पर कब्जे या पुलिसकर्मियों पर हमले तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसमें सबूत गायब होने, कथित आर्थिक लेनदेन और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार विवादित जमीन को लेकर हुए संघर्ष के दौरान बीट पर तैनात पुलिस जवानों पर हमला किया गया था। घटना स्थल के पास स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जांच के लिए सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, लेकिन बाद में वही डीवीआर गायब हो गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई। खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली और उनकी भूमिका की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के आदेश के बाद अब पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के वीडियो उपलब्ध थे और आरोपियों की पहचान भी कथित रूप से हो चुकी थी, तब एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई। इस निर्णय ने पुलिस की मंशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि पहचान स्पष्ट थी तो नामजद मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

    सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विवाद से एक दिन पहले मोहसिन नामक व्यक्ति द्वारा थाने में 10 लाख रुपये पहुंचाए गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यह भी आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार किया और उसका वीडियो भी मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।

    मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है कि उज्जैन का एक व्यक्ति जो इस विवाद से जुड़ा हुआ था, उसे पुलिस वाहन के माध्यम से वहां से रवाना किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

    घटना में घायल हुए पुलिस जवानों पर मीडिया से दूरी बनाए रखने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल हमले का मामला नहीं बल्कि पूरे घटनाक्रम को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा।

    फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।