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  • ईरान-इजरायल तनाव के बीच गालिबाफ और अराघची कथित तौर पर थे निशाने पर, अमेरिकी दखल से टली कार्रवाई, शांति वार्ता बचाने की कोशिश तेज

    ईरान-इजरायल तनाव के बीच गालिबाफ और अराघची कथित तौर पर थे निशाने पर, अमेरिकी दखल से टली कार्रवाई, शांति वार्ता बचाने की कोशिश तेज

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बीच ईरान और इजरायल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्धविराम और बातचीत की प्रक्रिया के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची पर संभावित हमले की आशंका जताई गई थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद यह कार्रवाई टल गई, जिससे शांति वार्ता प्रभावित होने से बच गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक उस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी रूप देने तथा आगे की बातचीत को लेकर प्रयास जारी थे। इसी दौरान आशंका जताई गई कि यदि वार्ता में शामिल शीर्ष ईरानी नेताओं को निशाना बनाया जाता, तो दोनों देशों के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंच सकता था। ऐसी स्थिति में कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को गंभीर झटका लगने का खतरा था।

    बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ने क्षेत्रीय सहयोगी देशों के माध्यम से संभावित सुरक्षा जोखिम की जानकारी ईरानी पक्ष तक पहुंचाई। इसके बाद संबंधित नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य बातचीत की प्रक्रिया को बाधित होने से बचाना और क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका को कम करना था।

    अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी तनाव में दोनों देशों की रणनीतियां अलग-अलग प्राथमिकताओं पर आधारित रही हैं। एक ओर सुरक्षा और सैन्य दबाव की नीति अपनाई जाती रही है, वहीं दूसरी ओर परमाणु कार्यक्रम, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर कूटनीतिक संवाद भी समानांतर रूप से चलता रहा है। ऐसे में वार्ता से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय मानी जाती है।

    रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संबंधित ईरानी नेताओं की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार अतिरिक्त सतर्कता बरती गई थी। बीते वर्षों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों पर हमलों की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से अधिक सतर्क हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय दौरों और महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाते रहे हैं।

    एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में आयोजित वार्ता के दौरान भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। वापसी यात्रा के दौरान संभावित खतरे की सूचना मिलने पर विमान की उड़ान योजना में बदलाव किया गया और प्रतिनिधिमंडल को वैकल्पिक मार्ग से सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया गया। हालांकि इस संबंध में संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। किसी भी शीर्ष राजनीतिक या कूटनीतिक नेतृत्व पर संभावित हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, बल्कि शांति प्रक्रिया को भी गंभीर रूप से बाधित कर सकता है। ऐसे में सभी पक्षों के लिए संवाद बनाए रखना और तनाव कम करने की दिशा में निरंतर प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • तनाव के बीच इजरायल ने रोकी सैन्य कार्रवाई, नेतन्याहू की चेतावनी- किसी भी हमले का जवाब होगा पहले से ज्यादा सख्त

    तनाव के बीच इजरायल ने रोकी सैन्य कार्रवाई, नेतन्याहू की चेतावनी- किसी भी हमले का जवाब होगा पहले से ज्यादा सख्त

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने की घोषणा की है। हालांकि इस घोषणा के साथ उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में इजरायल की सुरक्षा को किसी प्रकार का खतरा पैदा किया गया या फिर से हमला किया गया, तो उसका जवाब पहले की तुलना में अधिक कठोर और व्यापक होगा।

    देश के नाम अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने दावा किया कि हाल की सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य उन खतरों को समाप्त करना था, जिन्हें इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता रहा है। उनके अनुसार, सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनका लक्ष्य संभावित खतरों को समय रहते नियंत्रित करना था।

    प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी संप्रभुता या नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित करे। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय मौजूदा परिस्थितियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इजरायल अपनी सतर्कता कम करेगा।

    नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि पिछले कुछ समय में हुए घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी रक्षा नीति के तहत उन सभी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी है, जिन्हें वह अपने हितों के लिए खतरा मानता है। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा बल भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों और समूहों का भी उल्लेख किया तथा कहा कि इजरायल किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

    विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा क्षेत्रीय तनाव को अस्थायी रूप से कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से दी गई चेतावनियां यह भी दर्शाती हैं कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और भविष्य में घटनाक्रम किस दिशा में जाएंगे, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

    पश्चिम एशिया लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र रहा है। ऐसे में किसी भी सैन्य गतिविधि का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा बाजार और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और संवाद की अपील लगातार की जाती रही है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास यह तय करेंगे कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या फिर नई चुनौतियां सामने आती हैं। फिलहाल इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा को तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जबकि सुरक्षा संबंधी चेतावनी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति पर सतर्क निगरानी जारी रहेगी।

  • इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें”

    इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें”

    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और ईरान से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। उन्होंने दोनों देशों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब “गोलीबारी बंद” कर देनी चाहिए और स्थिति को और आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल दागे जाने की खबर सामने आई, जिसके जवाब में इजरायल ने भी तेहरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बेहद संक्षिप्त लेकिन सख्त संदेश जारी करते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने-अपने हमले रोक देने चाहिए क्योंकि आगे टकराव बढ़ाने से केवल स्थिति और गंभीर होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब समय संघर्ष नहीं बल्कि कूटनीति का है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में ईरान से अपील करते हुए कहा था कि मिसाइल हमलों को रोककर उसे वार्ता की मेज पर लौटना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते के बेहद करीब थे, लेकिन हालिया घटनाओं ने उस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। ट्रंप के अनुसार, अगर हालात शांत रहते तो आने वाले दिनों में समझौता संभव था।

    एक अन्य बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री से सीधे बात करेंगे और उनसे जवाबी कार्रवाई को रोकने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला कर दिया है और अब आगे की कार्रवाई से बचना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र को और अधिक अस्थिर होने से बचाने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं।

    इस बीच क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाइयों के कारण स्थिति तेजी से अस्थिर होती जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

    इजरायली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि यह स्थिति पहले के हमलों और गतिविधियों का परिणाम है, जिससे तनाव और अधिक गहरा गया है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस टकराव को रोका जा सकेगा या हालात और बिगड़ेंगे।

  • Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता

    Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीजफायर के दावों के बीच हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं, जहां एक तरफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों को खाली करने का आदेश जारी कर दिया है।

    दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने 9 से अधिक कस्बों को खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे पहले से विस्थापित लाखों लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई लोग सीजफायर के बाद लौटे थे, लेकिन नए हालात के चलते एक बार फिर पलायन का खतरा पैदा हो गया है।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले हफ्तों में हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इसे “दोस्त देशों के लिए खुला और दुश्मनों के लिए सीमित” कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका इसे खोलने के लिए दबाव बना रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर टकराव देखने को मिला है, जहां ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों को भविष्य के तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक

    रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक


    वाशिंगटन।
    रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) में फरवरी, 2022 से ही लड़ाई जारी है. दोनों देश अब सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यह युद्ध रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए यह ऐलान किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में 9 से 11 मई तक तीन दिन सीजफायर रहेगा.सीजफायर के दौरान सभी सैन्य गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे की क्रेमलिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelensky) ने पुष्टि कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर इस सीजफायर का ऐलान किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हूं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन (9, 10 और 11 मई) सीजफायर रहेगा।

    उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा है कि रूस में यह जश्न विजय दिवस के लिए है और यूक्रेन के लिए भी, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के समय वह भी इसका हिस्सा था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि दोनों देश एक-दूसरे के एक हजार कैदियों की अदला-बदली करने पर भी सहमत हो गए हैं।


    रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में तबाही की तस्वीरें

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सीजफायर का क्रेडिट लेते हुए कहा है कि यह अनुरोध सीधे मेरी ओर से किया गया था. उन्होंने अपना सीजफायर का अनुरोध स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की की तारीफ भी की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में यह उम्मीद भी जताई है कि यह सीजफायर लंबे, घातक और कठिन लड़ाई के अंत की शुरुआत साबित होगा.

    उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है और हम हर रोज समाधान के और करीब पहुंच रहे हैं. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे की पुष्टि कर दी है. आईएफक्स के मुताबिक क्रेमलिन ने कहा है कि रूस ने ट्रंप की ओर से प्रस्तावित सीजफायर पर सहमति जताई है.

    क्रेमलिन की ओर से यह भी कहा गया है कि रूस ने इस बात के लिए भी सहमति दे दी है कि युद्धबंदियों की अदला-बदली की जाएगी. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप के ऐलान की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस के साथ एक हजार कैदियों की अदला-बदली की जाएगी.

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट

    रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट


    नई दिल्ली। जारी संघर्ष के बीच रूस और यूक्रेन ने विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस से पहले तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

    क्या है रूस का फैसला?
    रूस ने घोषणा की है कि वह विक्ट्री डे के मौके पर सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।हालांकि रूस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी तरह का हमला या बाधा उत्पन्न होती है तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    🇺🇦 यूक्रेन की स्थिति
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम की सहमति का संकेत दिया है और कहा है कि उनका देश निर्धारित समय से संघर्ष रोकने को तैयार है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

    सुरक्षा और तनाव बरकरार
    रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्ट्री डे परेड को लेकर रूस में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कई सैन्य तैयारियों में बदलाव किया गया है और कुछ भारी हथियारों की प्रदर्शनी भी सीमित कर दी गई है।

    विक्ट्री डे का महत्व
    विक्ट्री डे रूस के लिए एक बेहद अहम राष्ट्रीय दिवस है, जिसे देशभक्ति और सैन्य शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस बार पहली बार वर्षों में परेड का स्वरूप पहले से अलग और सीमित नजर आएगा।हालांकि दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे युद्धविराम अक्सर टिकाऊ साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि किसी बड़े टकराव की आशंका फिर से गहराने लगी है।

    इस्लामाबाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ फिलहाल कोई सीजफायर लागू नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ईद के दौरान जो युद्धविराम हुआ था, वह सिर्फ तीन दिन का अस्थायी समझौता था, जो अब समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान फिर से सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    दरअसल, फरवरी और मार्च के दौरान दोनों देशों के बीच जबरदस्त सैन्य टकराव देखने को मिला था। तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच सीमा पर कई दिनों तक भीषण झड़पें हुईं। यह संघर्ष तब भड़का, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पार हमले किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था।

    हालात को देखते हुए ईद से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन अब पाकिस्तान के ताजा बयान ने उस समझौते को पूरी तरह खत्म मान लिया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, द्वारा किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में उसके नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है।

    हालांकि, अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। वहीं भारत पर लगाए गए आरोपों को भी नई दिल्ली ने सिरे से नकार दिया है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान के ‘नो सीजफायर’ वाले बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सीमा पर शांति फिलहाल दूर की बात है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से बड़े सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को लेकर अब समय-सीमा ही विवाद का कारण बन गई है। अलग-अलग बयानों की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि आखिर सीजफायर कब और किस समय समाप्त होगा। समय को लेकर क्यों बना भ्रम?
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, युद्धविराम 22 अप्रैल सुबह 4:50 बजे (पाकिस्तानी समय) खत्म होना तय है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का बयान इससे अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया है कि सीजफायर वॉशिंगटन समय के अनुसार शाम तक जारी रह सकता है।  यानी दोनों पक्ष अलग-अलग टाइम ज़ोन के हिसाब से सीजफायर की समाप्ति को देख रहे हैं—यही इस भ्रम की सबसे बड़ी वजह है।
    ईरान की चुप्पी से बढ़ी अनिश्चितता इस पूरे मामले में ईरान की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्या तेहरान तय समय पर सीजफायर खत्म मानेगा?या बातचीत के लिए इसे बढ़ाने को तैयार है?इन सवालों पर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रंप की सख्त चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर तय अवधि तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
    उन्होंने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका है, लेकिन वे सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। बातचीत भी अधर में 11–12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रहीदूसरे दौर को लेकर अब भी स्थिति साफ नहींपाकिस्तान ने भी कहा है कि उसे ईरान की भागीदारी पर औपचारिक जवाब का इंतजार हैघड़ी चल रही है, लेकिन समय तय नहीं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी समस्या यही है कि सीजफायर का “एक तय समय” सभी पक्षों के बीच सहमति से निर्धारित नहीं है। जब तक ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक यह दुविधा बनी रह सकती है—और इसके साथ ही युद्ध फिर भड़कने का खतरा भी।