Tag: Ceasefire

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक

    रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक


    वाशिंगटन।
    रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) में फरवरी, 2022 से ही लड़ाई जारी है. दोनों देश अब सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यह युद्ध रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए यह ऐलान किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में 9 से 11 मई तक तीन दिन सीजफायर रहेगा.सीजफायर के दौरान सभी सैन्य गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे की क्रेमलिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelensky) ने पुष्टि कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर इस सीजफायर का ऐलान किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हूं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन (9, 10 और 11 मई) सीजफायर रहेगा।

    उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा है कि रूस में यह जश्न विजय दिवस के लिए है और यूक्रेन के लिए भी, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के समय वह भी इसका हिस्सा था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि दोनों देश एक-दूसरे के एक हजार कैदियों की अदला-बदली करने पर भी सहमत हो गए हैं।


    रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में तबाही की तस्वीरें

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सीजफायर का क्रेडिट लेते हुए कहा है कि यह अनुरोध सीधे मेरी ओर से किया गया था. उन्होंने अपना सीजफायर का अनुरोध स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की की तारीफ भी की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में यह उम्मीद भी जताई है कि यह सीजफायर लंबे, घातक और कठिन लड़ाई के अंत की शुरुआत साबित होगा.

    उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है और हम हर रोज समाधान के और करीब पहुंच रहे हैं. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे की पुष्टि कर दी है. आईएफक्स के मुताबिक क्रेमलिन ने कहा है कि रूस ने ट्रंप की ओर से प्रस्तावित सीजफायर पर सहमति जताई है.

    क्रेमलिन की ओर से यह भी कहा गया है कि रूस ने इस बात के लिए भी सहमति दे दी है कि युद्धबंदियों की अदला-बदली की जाएगी. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप के ऐलान की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस के साथ एक हजार कैदियों की अदला-बदली की जाएगी.

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट

    रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट


    नई दिल्ली। जारी संघर्ष के बीच रूस और यूक्रेन ने विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस से पहले तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

    क्या है रूस का फैसला?
    रूस ने घोषणा की है कि वह विक्ट्री डे के मौके पर सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।हालांकि रूस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी तरह का हमला या बाधा उत्पन्न होती है तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    🇺🇦 यूक्रेन की स्थिति
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम की सहमति का संकेत दिया है और कहा है कि उनका देश निर्धारित समय से संघर्ष रोकने को तैयार है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

    सुरक्षा और तनाव बरकरार
    रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्ट्री डे परेड को लेकर रूस में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कई सैन्य तैयारियों में बदलाव किया गया है और कुछ भारी हथियारों की प्रदर्शनी भी सीमित कर दी गई है।

    विक्ट्री डे का महत्व
    विक्ट्री डे रूस के लिए एक बेहद अहम राष्ट्रीय दिवस है, जिसे देशभक्ति और सैन्य शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस बार पहली बार वर्षों में परेड का स्वरूप पहले से अलग और सीमित नजर आएगा।हालांकि दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे युद्धविराम अक्सर टिकाऊ साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि किसी बड़े टकराव की आशंका फिर से गहराने लगी है।

    इस्लामाबाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ फिलहाल कोई सीजफायर लागू नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ईद के दौरान जो युद्धविराम हुआ था, वह सिर्फ तीन दिन का अस्थायी समझौता था, जो अब समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान फिर से सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    दरअसल, फरवरी और मार्च के दौरान दोनों देशों के बीच जबरदस्त सैन्य टकराव देखने को मिला था। तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच सीमा पर कई दिनों तक भीषण झड़पें हुईं। यह संघर्ष तब भड़का, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पार हमले किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था।

    हालात को देखते हुए ईद से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन अब पाकिस्तान के ताजा बयान ने उस समझौते को पूरी तरह खत्म मान लिया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, द्वारा किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में उसके नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है।

    हालांकि, अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। वहीं भारत पर लगाए गए आरोपों को भी नई दिल्ली ने सिरे से नकार दिया है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान के ‘नो सीजफायर’ वाले बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सीमा पर शांति फिलहाल दूर की बात है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से बड़े सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को लेकर अब समय-सीमा ही विवाद का कारण बन गई है। अलग-अलग बयानों की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि आखिर सीजफायर कब और किस समय समाप्त होगा। समय को लेकर क्यों बना भ्रम?
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, युद्धविराम 22 अप्रैल सुबह 4:50 बजे (पाकिस्तानी समय) खत्म होना तय है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का बयान इससे अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया है कि सीजफायर वॉशिंगटन समय के अनुसार शाम तक जारी रह सकता है।  यानी दोनों पक्ष अलग-अलग टाइम ज़ोन के हिसाब से सीजफायर की समाप्ति को देख रहे हैं—यही इस भ्रम की सबसे बड़ी वजह है।
    ईरान की चुप्पी से बढ़ी अनिश्चितता इस पूरे मामले में ईरान की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्या तेहरान तय समय पर सीजफायर खत्म मानेगा?या बातचीत के लिए इसे बढ़ाने को तैयार है?इन सवालों पर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रंप की सख्त चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर तय अवधि तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
    उन्होंने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका है, लेकिन वे सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। बातचीत भी अधर में 11–12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रहीदूसरे दौर को लेकर अब भी स्थिति साफ नहींपाकिस्तान ने भी कहा है कि उसे ईरान की भागीदारी पर औपचारिक जवाब का इंतजार हैघड़ी चल रही है, लेकिन समय तय नहीं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी समस्या यही है कि सीजफायर का “एक तय समय” सभी पक्षों के बीच सहमति से निर्धारित नहीं है। जब तक ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक यह दुविधा बनी रह सकती है—और इसके साथ ही युद्ध फिर भड़कने का खतरा भी।

  • सीजफायर के ऐलान के बाद 20400 मीट्रिक टन LPG लेकर आज भारत पहुंचेगा पहला भारतीय जहाज जग विक्रम

    सीजफायर के ऐलान के बाद 20400 मीट्रिक टन LPG लेकर आज भारत पहुंचेगा पहला भारतीय जहाज जग विक्रम


    नई दिल्ली।
    भारतीय झंडे वाला जहाज जग विक्रम (Indian-flagged ship Jag Vikram) 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 14 अप्रैल को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने बताया कि यह जहाज 11 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है। इस यात्रा को नई दिल्ली के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन के युद्धविराम की घोषणा के बाद यह पहला भारतीय जहाज (Indian ship) है जो इस समुद्री मार्ग से गुजरा है। जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार हैं।

    एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने कहा, ‘भारतीय झंडे वाला LPG वाहक जहाज जग विक्रम के 11 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद 14 अप्रैल को कांडला पहुंचने की संभावना है। इस जहाज में 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लदा हुआ है और इसमें 24 नाविक सवार हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय झंडे वाले जहाज से संबंधित कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।

    2177 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी
    मंत्रालय ने अब तक 2177 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में ही 93 नाविक शामिल हैं। इस प्रक्रिया में विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री हितधारकों के साथ निरंतर तालमेल बनाए रखा जा रहा है। मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाहों पर सामान्य परिचालन की पुष्टि की है। सभी भारतीय बंदरगाहों पर कामकाज बिना किसी बाधा के चल रहा है और किसी भी प्रकार की भीड़ या कंजेशन की रिपोर्ट नहीं आई है। समुद्री कर्मियों की भलाई सुनिश्चित करना मंत्रालय की प्राथमिकता है।

    क्षेत्रीय तनाव के बावजूद मंत्रालय निरंतर निगरानी और समन्वय के माध्यम से भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। जग विक्रम का सफलतापूर्वक आना इस बात का सबूत है कि युद्धविराम के बाद समुद्री मार्ग धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात खाड़ी क्षेत्र के देशों से करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम मार्ग की सुरक्षा और सुचारू परिचालन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  • होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

    होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है।

    भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयान
    इस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारी

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।

    20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्क

    सूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है।

    ईरान और ओमान दोनों की भूमिका
    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है।

    भारत को पहले मिली थी राहत
    युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजर
    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट

    सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट


    तेहरान।
     करीब 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ, तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही हालात बदलते नजर आ रहे हैं। तीनों प्रमुख पक्ष—ईरान, इजरायल और अमेरिका—के बयान अलग-अलग दिशा में जाते दिख रहे हैं, जिससे सीजफायर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

    अमेरिका ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव
    कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रस्ताव को “कूड़े के डिब्बे में डाल दिया गया।” इससे संकेत मिला कि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है और वह इजरायल के रुख का समर्थन कर रहा है।


    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजफायर समझौते में लेबनान से जुड़े हमलों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उस मोर्चे पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

    लेबनान पर इजरायल के हमले तेज
    सीजफायर के तुरंत बाद इजरायल ने समझौते की तकनीकी खामी का हवाला देते हुए कहा कि लेबनान में उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इसके बाद इजरायली हमलों में तेजी देखी गई, जिनमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है।
    इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा और यह कार्रवाई सीजफायर का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी।

    ईरान की चेतावनी—हमले हुए तो खत्म समझौता
    इजरायल के रुख पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने कहा कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो सीजफायर स्वतः समाप्त माना जाएगा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि “गेंद अब आपके पाले में है”, यानी जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

    क्या हो सकता है असर?

    अगर सीजफायर पूरी तरह टूटता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। हिजबुल्लाह के सीधे युद्ध में उतरने से संघर्ष कई मोर्चों पर फैल सकता है और ईरान की प्रत्यक्ष भागीदारी का खतरा बढ़ जाएगा।
    विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बिगड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

    महज 24 घंटे में समझौते का डगमगाना यह दिखाता है कि पक्षों के बीच अविश्वास कितना गहरा है और शांति की राह अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है।

  • ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध  के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है। सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है।

    बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है।

    तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है। बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।