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  • सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव

    सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। कोंटा जनपद पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा की बैठक हुई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों और स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    ग्राम सभा की ओर से बाहरी पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके लिए पुनपल्ली गांव में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर धर्म बदल चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी ग्राम सभा की जमीन नहीं दी जाएगी। ग्राम सभा ने तय किया है कि चर्च, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

    ग्राम सभा के फैसलों की जानकारी जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने दी। उन्होंने बताया कि विशेष ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में ‘शांति और न्याय समिति’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधियों के लिए गांव में आता है तो उसे सबसे पहले समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने स्थानीय स्तर पर विवादों से निपटने के लिए भी इस समिति की व्यवस्था की है।

    इन फैसलों में पेसा कानून का भी उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत की रक्षा करना है।

    ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि उसके फैसलों से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय नियमों का सम्मान करने की अपील की गई है। इस फैसले के तहत विशेष रूप से ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान किए गए हैं। सूचना-पट्ट के जरिए धार्मिक गतिविधियों और बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।

  • छत्तीसगढ़: बालोद जिले में ट्रक-पिकअप के बीच जोरदार टक्कर, 6 लोगों की मौत, 7 घायल

    छत्तीसगढ़: बालोद जिले में ट्रक-पिकअप के बीच जोरदार टक्कर, 6 लोगों की मौत, 7 घायल


    बालोद।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बालोद जिले (Balod district) में नेशनल हाईवे-30 (National Highway 30) पर शुक्रवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. धमतरी से कांकेर के बीच मरकटोला घाट में डीजे सिस्टम लेकर जा रही पिकअप और धान से भरे ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई. हादसा इतना भीषण था कि पिकअप और डीजे सिस्टम के परखच्चे उड़ गए।

    हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य घायल बताए जा रहे हैं. सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

    हादसा बालोद जिले के पुरुर थाना क्षेत्र में हुआ. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. एडिशनल एसपी चन्द्रकान्त गवर्ना ने 6 लोगों की मौत और 7 के घायल होने की पुष्टि की है।

  • बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प की योजना और राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी। उन्होंने बस्तर को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने राज्य की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुविधा मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए विशेष सहायता की मांग की, जहां सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अब तक ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था संचालित हो रही है। उन्होंने रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर विजन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला बस्तर अब विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। राशन, स्वास्थ्य बीमा, जनधन खाते, वन अधिकार और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के बच्चों को बेहतर अवसर और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बस्तर में बढ़ती कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। रेल परियोजनाओं, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई योजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

    बैठक में छत्तीसगढ़ में बढ़ते निवेश और उद्योगों के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नई औद्योगिक नीतियों के कारण बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं और कई क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और सुशासन से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है और आने वाले समय में यह विकास और अवसरों का केंद्र बनेगा।

  • CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

    CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की लोक संस्कृति (Folk Culture) को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी गायिका (Pandvani singer) पद्म विभूषण तीजन बाई (Padma Vibhushan Teejan Bai) का रविवार सुबह 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    दुर्ग जिले की निवासी तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली, दमदार प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के माध्यम से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता।

    तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और गाने का शौक था। सामाजिक विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को नहीं छोड़ा। महिलाओं के लिए उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ में प्रस्तुति देना वर्जित माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई। तीजन बाई ने 13 साल की उम्र में सबसे चंद्रखुरी में अपनी प्रस्तुति दी।

    तीजन बाई ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला का डंका बजाया। उनकी कला की सराहना देश-विदेश में हुई। तीजन बाई को कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं- पद्मश्री (1988) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995) पद्मभूषण (2003), पद्म विभूषण (2019)।

    तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थीं। उन्होंने अपने जीवन के छह दशक लोककला को समर्पित किए और नई पीढ़ी को पंडवानी की समृद्ध परंपरा से जोड़ा।

  • देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    नई दिल्ली /छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दिए गए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संबोधन में देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का दावा किया गया है, जिसे सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर यह कहा गया कि वर्षों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भय, असुरक्षा तथा हिंसा के वातावरण की जगह शांति, विश्वास और विकास की नई धारा ने स्थान ले लिया है। संबोधन में यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती को समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया, जो सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और समन्वित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है।

    इस दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया और कहा गया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और जोखिम भरे इलाकों के बावजूद जवानों ने लगातार साहस और धैर्य के साथ अभियान को आगे बढ़ाया। यह भी उल्लेख किया गया कि अभियान के दौरान कई स्तरों पर रणनीतिक कार्रवाई की गई, जिसके चलते नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ा और धीरे-धीरे इसका प्रभाव समाप्त होने की दिशा में बढ़ा। इस पूरे अभियान को एक लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया गया, जिसमें सुरक्षा बलों की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

    संबोधन में यह भी कहा गया कि कुछ राजनीतिक परिस्थितियों में इस अभियान को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका, लेकिन इसके बावजूद प्रयासों को लगातार जारी रखा गया और परिणामस्वरूप स्थिति में निर्णायक बदलाव देखने को मिला। बस्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह इलाका कभी नक्सल गतिविधियों के कारण अत्यधिक प्रभावित माना जाता था, लेकिन अब वहां सामान्य जीवन की बहाली स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच बढ़ता आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना इस परिवर्तन का प्रमुख संकेत माना जा रहा है।

    इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अब क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति देने पर जोर दिया जाएगा, जिसमें सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में योजनाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रयास किया जाएगा कि शांति और स्थिरता को लंबे समय तक बनाए रखा जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह जोड़ा जा सके। लोगों के जीवन में आए बदलाव को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां भय के स्थान पर अवसरों की नई संभावनाएं उभर रही हैं।

    अंत में यह संदेश दिया गया कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा व्यवस्था की सफलता नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी है, जिसमें समाज, प्रशासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त भूमिका ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में अब एक नए युग की शुरुआत का दावा किया जा रहा है, जहां स्थायी शांति, विकास और विश्वास को प्राथमिकता दी जाएगी और आगे की दिशा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय होगी।

  • Chhattisgarh: सक्ती के बिजली प्लांट में भीषण विस्फोट… 13 श्रमिकों की मौत, 21 घायल

    Chhattisgarh: सक्ती के बिजली प्लांट में भीषण विस्फोट… 13 श्रमिकों की मौत, 21 घायल


    सक्ती।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सक्ती जिले (Sakti district) में एक निजी बिजली प्लांट (Private power plant.) में भीषण विस्फोट के बाद आग लग गई। इससे 13 श्रमिकों की मौत हो गई जबकि कम से कम 21 अन्य घायल हो गए हैं। धमाका इतना जोरदार था कि आवाज दूर तक सुनाई दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, बचाव दल मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान चलाया। घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।


    4 की मौके पर ही मौत

    सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि धमाका अपराह्न करीब 2:30 बजे जिले के डभरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिंघीतराई गांव में स्थित वेदांता लिमिटेड के बिजली संयंत्र में बॉयलर से टरबाइन तक हाई-प्रेशर भाप पहुंचाने वाली एक ट्यूब में हुआ। घटना में 4 श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य ने अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घायलों को पड़ोसी रायगढ़ और बिलासपुर जिले के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।


    इलाज के दौरान 9 ने तोड़ा दम

    वहीं रायगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में इलाज के दौरान नौ अन्य श्रमिकों की मृत्यु हुई है जबकि 21 घायल श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। घटना के बाद प्लांट में अफरातफरी मच गई। कर्मचारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। घायल मजदूरों को बचाने के लिए राहत कार्य तेजी से चलाया गया। धमाका पहले ट्यूब में हुआ। ब्लास्ट के बाद मौके पर हालात बेहद खराब हो गए।


    सीएम ने जताया शोक

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Chief Minister Vishnu Dev Sai) ने हादसे पर शोक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि सक्ती जिले में सिंघीतराई स्थित ‘वेदांता पावर प्लांट’ में बॉयलर फटने से हुई भीषण दुर्घटना की सूचना अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ईश्वर प्रभावित परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।


    घटना की होगी जांच, नहीं बख्शे जाएंगे दोषी

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आगे कहा कि राहत और बचाव कार्य जारी हैं। घायलों के बेहतर इलाज के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। घटना की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को इस घटना की जांच करने का आदेश दिया है। वहीं जिला प्रशासन ने भी इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।


    पीएम और सीएम ने किया आर्थिक मदद का ऐलान

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये जबकि घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं पीएम मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। पीएमओ की ओर से घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की बात कही गई है।


    बलौदाबाजार में भी हुआ था ऐसा ही ब्लास्ट

    इसी साल जनवरी महीने में छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में ऐसा ही हादसा सामने आया था। जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के बकुलाही गांव स्थित रियल इस्पात फैक्ट्री के फर्नेस में अचानक जोरदार धमाका हो गया था। हादसे में बिहार के रहने वाले 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे में कई अन्य बुरी तरह झुलस गए थे। प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी।

    अधिकारियों की मानें तो शुरुआती जांच में SOP का पालन नहीं करने के कारण हादसा हुआ था। पाया गया कि ‘किल्न’ को बंद किए बिना मजदूरों से बेहद खतरनाक हालत में काम कराया गया। साथ ही न तो डस्ट-सेटलिंग चैंबर का दरवाजा बंद किया गया और न ही काम के लिए कोई सही आदेश जारी किया गया। हादसे के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर हुई जांच में सुरक्षा नियमों की बड़ी अनदेखी पाए जाने के बाद कारखाना अधिनियम के तहत ‘किल्न’ सभी कामों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया गया था।

  • युवा विधायक सम्मेलन का समापन, उप सभापति बोले- युवाओं की सक्रियता से पूरा होगा विकसित भारत का सपना

    युवा विधायक सम्मेलन का समापन, उप सभापति बोले- युवाओं की सक्रियता से पूरा होगा विकसित भारत का सपना


    भोपाल । उप सभापति राज्यसभा हरिवंश सिंह ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज गति से उभरती अर्थव्यवस्था है। भारत चुनौतियों से निपट कर नया इतिहास बना रहा है और आने वाली सदी भारत की होगी। इसके लिए सकारात्मक और दूरदर्शी सोच के साथ कार्य करना आवश्यक है। उप सभापति राज्यसभा सिंह मंगलवार को मप्र विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत@2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये।

    उप सभापति राज्यसभा सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा देश का इतिहास, दिशा और भविष्य बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत का सपना युवाओं की सक्रियता से ही पूरा होगा। भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में विकास की यही गति जारी रही तो वर्ष@2047 के पहले भी भारत विकसित राष्ट्र बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत@2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है। तोमर ने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए।

    कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसेासिएशन इंडिया रीजन के डॉ. राहुल कराड़ ने कहा कि हर विधानसभा में इस तरह के सम्मेलन किये जाना चाहिए। समाज का रूख बदलने में विधायकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विधायक अपने-अपने क्षेत्र के ब्रांड एम्बेसेडर होते है। उन्होंने ट्रेनिंग और एजुकेशन के साथ एआई के महत्व को भी बताया।

    सम्मेलन में विधानसभा के सात दशक पर केन्द्रित विधायिनी पत्रिका का विमोचन हुआ। विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय, संतोष वरवडे, रामसिया भारती, छत्तीसगढ़ से श्रीमती विद्यावती सिदार, राजस्थान से थावर चंद सहित अन्य विधायकों ने विचार व्यक्त किये। दो दिवसीय सम्मेलन में तीन राज्यों के लगभग 40 विधायकों ने सम्मेलन में दिए गए विषयों पर अपने वक्तव्य दिए।

    कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय सहित अन्य पदाधिकारी एवं युवा विधायक मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में विधानसभा के सचिव अरविन्द शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

  • क्या है छत्तीसगढ़ का ‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन, किसानों की पहल से जल संरक्षण की नई मिसाल

    क्या है छत्तीसगढ़ का ‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन, किसानों की पहल से जल संरक्षण की नई मिसाल

    रायपुर। छत्‍तीसगढ़ (Chhattisgarh) में जल संरक्षण को लेकर किसानों ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसे ‘आवा पानी झोकी’ नाम दिया गया है। इस आंदोलन के तहत किसान अपनी खेती की जमीन का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संग्रह के लिए अलग रख रहे हैं, ताकि बारिश का पानी खेतों में ही संरक्षित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और लंबे समय में जल क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाना है।
    खेतों में बन रहे छोटे तालाब और गड्ढे
    Ministry of Jal Shakti के मुताबिक, इस अभियान में किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में छोटे रिचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे बनवा रहे हैं। इन संरचनाओं में बारिश का पानी जमा होता है और धीरे-धीरे जमीन में समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

    इस व्यवस्था से मानसून के दौरान गिरने वाली पानी की हर बूंद को खेतों में ही रोका और पुनः उपयोग किया जा रहा है।

    इलाके में दिखने लगे सकारात्मक परिणाम

    मंत्रालय ने इस प्रयोग को उल्लेखनीय बताया है। पहले जो बारिश का पानी बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल स्रोतों का पुनर्भरण कर रहा है। इससे मिट्टी के कटाव में कमी आई है और सूखे के समय फसलों में नमी भी बनी रहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए भारी निवेश से ज्यादा सामूहिक भागीदारी जरूरी होती है।

    महिलाएं बनीं ‘नीर नायिका’, युवक ‘जल दूत’

    इस अभियान में ग्रामीण समुदाय की बड़ी भूमिका है। गांवों की महिलाएं ‘नीर नायिका’ बनकर घर-घर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए जागरूकता फैला रही हैं।

    वहीं युवाओं को ‘जल दूत’ कहा जा रहा है, जो नालियों का मानचित्रण करने, नहरों से गाद निकालने, नुक्कड़ नाटक और भित्ति चित्रों के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

    श्रमदान से तालाबों का पुनर्जीवन

    इस आंदोलन के दौरान सामूहिक श्रमदान से 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों का पुनरुद्धार किया गया, जो अब प्राकृतिक जल पुनर्भरण के स्रोत बन गए हैं।

    इसके अलावा Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से ज्यादा लाभार्थियों ने भी अपने घरों के पास जल संरक्षण के गड्ढे बनवाए हैं।

    हजारों किसानों ने अपनाया 5% मॉडल

    जानकारी के अनुसार 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण के लिए अलग रखा है और पूरे Koriya District में 2,000 से ज्यादा सोख गड्ढे बनाए गए हैं।

    एक उदाहरण में ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से सिर्फ तीन घंटे में 660 सोख गड्ढे बना दिए, जो इस अभियान में लोगों की भागीदारी को दर्शाता है।

    भूजल स्तर में भी हुआ सुधार

    मंत्रालय के अनुसार इस पहल के परिणाम अब स्पष्ट दिखने लगे हैं। कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ गया है, जबकि 17 दूरस्थ जनजातीय बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से बहने लगे हैं।

    मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है और बेहतर आजीविका के कारण मौसमी पलायन में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, विधानसभा में पुष्पांजलि अर्पित

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, विधानसभा में पुष्पांजलि अर्पित


    भोपाल । मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में बुधवार को एक भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधानसभा परिसर में स्थापित उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन एवं कार्यों को याद किया गया। इस मौके पर विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर श्री रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा, पूर्व विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता और स्व. श्री शुक्ला के परिवारजन भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 10 फरवरी 1930 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने लोकतंत्र की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 1985 से 1990 तक वे मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे और इसके बाद राज्य सरकार में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पदयात्राओं के माध्यम से जन जागरण का कार्य किया और एक लोकप्रिय जन नेता के रूप में पहचाने गए।

    छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, स्व. शुक्ला ने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवाएँ दीं। उनके नेतृत्व में विधानसभा की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती को नई दिशा मिली। उन्होंने ‘असंसदीय अभिव्यक्तियां’ नामक पुस्तक की संकल्पना की, जो विधायी कामकाज पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन गई। इसके अलावा उन्होंने संसदीय मामलों सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जो विधि और संसदीय इतिहास के लिए अमूल्य स्रोत हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर की सराहना की और कहा कि प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा विधानसभा अध्यक्ष जैसे व्यक्तित्वों की जयंती और पुण्यतिथि पर विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण करने की परंपरा स्थापित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। इस प्रकार यह कार्यक्रम न केवल स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और विधायी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूती देने वाला आयोजन साबित हुआ।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली

    छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों ने बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर ठगी का नया तरीका अपनाया है। नए बिजली कनेक्शन के डिमांड भुगतान के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं के लिए एडवाइजरी जारी की है और सतर्क रहने की अपील की है।

    कंपनी के कार्यपालक निदेशक वीके साय ने बताया कि ठग उपभोक्ताओं को व्हाट्सएप पर संदिग्ध फाइल भेजते हैं और उसे डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही उपभोक्ता फाइल डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल हैक हो जाता है और खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा कभी भी कोई एपीके फाइल नहीं भेजी जाती और न ही उपभोक्ताओं से इसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

    CSPDCL ने उपभोक्ताओं को चेताया है कि वे हमेशा अधिकारिक चैनलों से ही भुगतान करें। कंपनी किसी भी 10 अंकों के निजी मोबाइल नंबर से भुगतान लिंक नहीं भेजती। केवल CSPDCL-एस आईडी से आधिकारिक संदेश ही मान्य होते हैं। भुगतान केवल MOR बिजली एप, ATP केंद्र, आधिकारिक वेबसाइट या बिजली कार्यालय में ही करना चाहिए।

    उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क करें या नजदीकी वितरण केंद्र को सूचना दें। कंपनी ने चेतावनी दी है कि फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करने पर मोबाइल हैक होने के साथ-साथ बैंक खाते से पैसे भी चोरी हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नई तकनीक अपनाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। बिजली कनेक्शन और बिल भुगतान जैसे सामान्य मामलों में भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी अज्ञात लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

    CSPDCL ने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में विभाग सक्रिय रूप से निगरानी रख रहा है और साइबर अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वितरण केंद्र या टोल फ्री नंबर पर दें।

    इस चेतावनी के बावजूद कई उपभोक्ता अब भी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और बैंक सुरक्षा के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication), मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल जरूरी है। बिजली उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल और बैंक खातों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना ही सबसे प्रभावी तरीका है।

    इस एडवाइजरी से स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी गंभीर रूप ले चुकी है और उपभोक्ताओं को अपनी सावधानी बढ़ाने की आवश्यकता है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।