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  • छिंदवाड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, कार की टक्कर से पति-पत्नी की मौत, तीन बेटियां घायल, एक बच्ची नागपुर रेफर

    छिंदवाड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, कार की टक्कर से पति-पत्नी की मौत, तीन बेटियां घायल, एक बच्ची नागपुर रेफर


    मध्य प्रदेश।
    के छिंदवाड़ा क्षेत्र में पांढुर्णा के तिगांव हाईवे पर रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत हो गई, जबकि उनकी तीन मासूम बेटियां घायल हो गईं। परिवार देवियों के दर्शन करने के बाद बाइक से अपने गांव चाटवा लौट रहा था। इसी दौरान फोरलेन सड़क पार करते समय एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसा रात करीब 12 बजे हुआ। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने पति-पत्नी को मृत घोषित कर दिया। घायल बच्चियों में से एक की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है।

    मृतकों की पहचान चाटवा गांव निवासी वासुदेव उईके, उम्र 40 वर्ष, और उनकी पत्नी सुनीता उईके, उम्र 35 वर्ष, के रूप में हुई है। दोनों अपनी तीन बेटियों के साथ बाइक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। धार्मिक दर्शन के बाद परिवार की यात्रा उस समय हादसे में बदल गई, जब तिगांव हाईवे पर फोरलेन सड़क पार करते हुए उनकी बाइक कार की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि दंपती की जान नहीं बचाई जा सकी। तीनों बच्चियां भी दुर्घटना में घायल हो गईं।

    हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ी। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने घायल बच्चियों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। अस्पताल में जांच के बाद चिकित्सकों ने वासुदेव और सुनीता को मृत घोषित कर दिया। माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चियों के इलाज की व्यवस्था की गई। परिवार पर एक साथ आई इस विपत्ति से गांव में भी दुख का माहौल है।

    दुर्घटना में घायल तीन वर्षीय वैष्णवी को गंभीर चोट आई है। उसके पैर की हड्डी टूटने की जानकारी सामने आई है। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए नागपुर रेफर करने का निर्णय लिया। उसे आगे के इलाज के लिए नागपुर भेजा गया है। वहीं, पांच वर्षीय राखी और सात वर्षीय सोनू को पांढुर्णा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों बच्चियों का उपचार जारी है। चिकित्सक उनकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। परिवार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता घायल बच्चियों के स्वास्थ्य और इलाज की है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब परिवार बाइक से फोरलेन सड़क पार कर रहा था। सड़क पर कार की टक्कर से बाइक सवार दंपती और उनकी बेटियां गिरकर घायल हो गईं। हालांकि, दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और कार की गति कितनी थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    थाना प्रभारी अमित दानी के अनुसार, दुर्घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने संबंधित कार की पहचान कर ली है और फरार चालक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जांच की जा रही है। चालक की तलाश और हादसे के कारणों का पता लगाना जांच का अहम हिस्सा है।

    यह हादसा एक परिवार के लिए बेहद दुखद साबित हुआ है। देवियों के दर्शन कर घर लौट रहे माता-पिता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचीं। एक बच्ची को गंभीर चोट के कारण नागपुर भेजना पड़ा, जबकि अन्य दो का पांढुर्णा में उपचार जारी है। पुलिस की जांच के बाद दुर्घटना से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकेगी।

  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    मध्य प्रदेश: सरकार ने शासकीय धन के गबन और भ्रष्टाचार से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ पेंशन संबंधी कड़ी कार्रवाई की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े मामले में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी की पेंशन न्यूनतम करते हुए 7,750 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत पदस्थ रहीं एक प्राचार्य की देय पेंशन स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।

    पहले मामले में जनपद पंचायत छिन्दवाड़ा में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे सुनील कुमार अंधवान के खिलाफ अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता से संबंधित अनियमितताओं की जांच की गई थी। जांच में उनके द्वारा 23 फर्जी प्रकरण तैयार किए जाने और इनके माध्यम से 50.25 लाख रुपये के शासकीय धन के गबन का आरोप सही पाया गया।

    प्रकरण में कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने सुनील कुमार अंधवान को दंडित किया है। उनकी पेंशन राशि को न्यूनतम स्तर पर निर्धारित करते हुए अब 7,750 रुपये कर दिया गया है। अंधवान 30 जून 2025 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी मामले में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की गई।

    अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने से जुड़ी सरकारी व्यवस्था है। ऐसे मामलों में फर्जी प्रकरण तैयार कर शासकीय राशि का इस्तेमाल किए जाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। इसी आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई।

    दूसरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झकनावदा में प्राचार्य और प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर रहीं शकुंतला शंखवार की देय पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है।

    शकुंतला शंखवार के खिलाफ लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना इंदौर से जुड़े एक आपराधिक प्रकरण में विशेष न्यायालय झाबुआ ने 4 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया था। न्यायालय ने उन्हें अलग-अलग मामलों में चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।

    न्यायालय से सजा मिलने के बाद राज्य सरकार ने पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके परिणामस्वरूप उनकी देय पेंशन को स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    दोनों मामलों में सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि शासकीय सेवा के दौरान वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। एक मामले में सरकारी धन के गबन से जुड़े आरोप सही पाए जाने के बाद पेंशन न्यूनतम की गई, जबकि दूसरे मामले में न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई।

  • छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    मध्य प्रदेश: के छिंदवाड़ा जिले में गलत इलाज के बाद एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के मरीजों का एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों को दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। महिला की मौत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दोनों के पास चिकित्सा शिक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले।

    पुलिस के अनुसार घटना 18 जुलाई 2026 की है। ग्राम बम्होरी निवासी 43 वर्षीय आरती, पत्नी रामभगस साहू, को बुखार आया था। तब उसके परिजन इलाज के लिए महाराजा मार्केट स्थित एक क्लिनिक पर लेकर पहुंचे थे। यहां राजेश सिन्हा नाम का व्यक्ति इलाज करता था। महिला की जांच और उपचार के दौरान उसके भाई ज्योतिप्रकाश मंडल उर्फ काली ने फोन पर राजेश से बातचीत की।

    इसके बाद ज्योतिप्रकाश ने आरती को दो इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल हर्रई अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान आरती की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपचार से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

    जांच के दौरान पुलिस को राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल के पास चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र, डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। इसके अलावा दोनों के पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके बावजूद दोनों मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें दवाएं तथा इंजेक्शन दे रहे थे। पुलिस ने इसी आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) के साथ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच का मुख्य आधार महिला को दिए गए उपचार, दोनों आरोपियों की चिकित्सा योग्यता और घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से जुड़े तथ्य रहे।

    मामला बिना वैध चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने से जुड़ा है। जांच में दोनों आरोपियों के पास इलाज करने के लिए जरूरी डिग्री, डिप्लोमा और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दे रहे थे।

    आरती को बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन दो इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

  • MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया

    MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा (Chhindwara) में मंगलवार दोपहर मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे भगवा झंडे को हटाने को लेकर विवाद हो गया. नगर निगम के कर्मचारियों ने पोल से भगवा झंडा (Saffron flag) उतार दिया था. जब हिंदू संगठनों के सदस्यों को पता चला कि झंडा नीचे पर पड़ा है, तो वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिसके बाद वहां जल्द ही भीड़ जमा हो गई. रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत (Arvind Rajput) ने आरोप लगाया कि कलेक्टर हरेंद्र नारायण (Collector Harendra Narayan) के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के कहने पर भगवा झंडा हटाया गया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नगर आयुक्त खुद मौके पर आकर झंडा दोबारा नहीं लगा देते।

    विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर निगम कमिश्नर सीपी राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और खंभे पर दोबारा केसरिया झंडा लगा दिया. इसके बाद विरोध-प्रदर्शन खत्म हो गया और हालात सामान्य हो गए. जानकारी के मुताबिक, खंभे पर लगे भगवा झंडे की जगह तिरंगा लगाने की योजना थी, लेकिन जिस तरह से झंडा हटाया गया, उससे विरोध शुरू हो गया. इसके बाद फिलहाल भगवा झंडे को उसकी मूल जगह पर वापस लगा दिया गया. इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने भीड़ जमा हो गई. प्रशासन ने झंडा हटाने के आरोपों को लेकर कोई अलग बयान जारी नहीं किया है।


    निगम कमिश्नर ने खुद लगाया झंडा

    कमिश्नर सीपी राय ने बताया कि मंगलवार दोपहर नगर निगम के कर्मचारियों ने मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे एक खंभे से भगवा झंडा हटा दिया था. हिंदू संगठनों के सदस्यों को झंडा नीचे पड़ा देखकर इस घटना का पता चला. इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे. नगर निगम की एक टीम भी वहां पहुंची. जब झंडे को लेकर विवाद बढ़ने लगा, तो वे खुद मौके पर गए लोगों की बात सुनी, खुद झंडा लगाया और मामले को सुलझाया।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मध्य प्रदेश। के छिंदवाड़ा जिले का निवासी एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़का अभिनय क्षेत्र में अपना करियर बनाने और एक प्रसिद्ध टेलीविजन धारावाहिक में काम करने की चाहत में बिना बताए घर से निकलकर मुंबई पहुंच गया। लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे इस किशोर को मुंबई की गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी परिसर में पुलिस की सतर्कता से सकुशल बरामद कर लिया गया है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, आरे पुलिस स्टेशन की गश्ती टीम को गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी के पास एक नाबालिग अकेले घूमता हुआ दिखाई दिया। संदिग्ध स्थिति में घूम रहे लड़के को सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने रोककर पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आरे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उसने अपने घर से भागकर मुंबई आने की पूरी जानकारी पुलिस अधिकारियों के सामने साझा की।

    नाबालिग ने बताया कि वह गुरुवार दोपहर को अपने घर से स्कूल जाने का बहाना बनाकर निकला था, लेकिन वह स्कूल न जाकर सीधे छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। वहां से उसने ट्रेन पकड़कर पहले नागपुर का सफर किया और फिर नागपुर से कनेक्टिंग ट्रेन लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गया। अगले दिन सुबह गोरेगांव रेलवे स्टेशन उतरने के बाद वह पैदल ही फिल्म सिटी परिसर तक पहुंच गया।

    पूछताछ में लड़के ने स्वीकार किया कि वह देश के लोकप्रिय कॉमेडी टेलीविजन धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से अत्यधिक प्रभावित था और उसमें अभिनय का अवसर प्राप्त करना चाहता था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से अभिनय के जुनून में आए इस लड़के के संदर्भ में जब मुंबई पुलिस ने स्थानीय पुलिस और परिजनों से संपर्क किया, तो पता चला कि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी।

    मुंबई पुलिस ने बालक के परिजनों को उसके सुरक्षित मिलने की जानकारी दे दी है। फिलहाल नाबालिग को आरे पुलिस स्टेशन में सुरक्षा और देखरेख में रखा गया है। सूचना मिलने के बाद उसके पिता छिंदवाड़ा से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर अपने पुत्र को सकुशल घर वापस ले जा सकें।

  • मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार

    मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार


    मध्य प्रदेश:
    भारत सरकार के अर्बन चैलेंज फंड के पहले चरण में मध्य प्रदेश के लिए 2753.10 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह स्वीकृति राज्य के कई शहरों में जल प्रदाय, सीवरेज नेटवर्क, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन से जुड़े विकास कार्यों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ प्रमुख नगर निगम आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं कर सके, जिसके कारण उन्हें पहले चरण का लाभ नहीं मिल पाया।

    पहले चरण में सबसे बड़ा झटका छिंदवाड़ा, कटनी और ग्वालियर नगर निगमों को लगा। इन शहरों की परियोजनाएं समय पर निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्तुत नहीं हो सकीं, जिससे इन्हें अब अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय तैयारी में कमी के कारण प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाए।

    छिंदवाड़ा नगर निगम ने लगभग 67 करोड़ रुपये की जल प्रदाय परियोजना तैयार की थी, लेकिन इसके लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था और ऋण संबंधी दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने के कारण प्रस्ताव अधूरा माना गया। इसी प्रकार कटनी नगर निगम ने लगभग 600 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की योजना बनाई थी, लेकिन समय पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से परियोजना पहले चरण में शामिल नहीं हो सकी।

    ग्वालियर नगर निगम की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही। यहां जल प्रदाय और सीवरेज से जुड़े 1500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित थे, लेकिन विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन समय पर तैयार नहीं हो पाया। इसके कारण इतने बड़े निवेश वाली योजना भी फिलहाल अगले चरण के लिए स्थगित कर दी गई। राजधानी भोपाल को भी पहले चरण में परियोजना के तहत राशि नहीं मिल सकी।

    इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और रीवा जैसे शहरों की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इंदौर में जल प्रदाय व्यवस्था और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 907 करोड़ रुपये तथा सीवर नेटवर्क उन्नयन और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 306 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जबलपुर में जल प्रदाय विस्तार के लिए 64 करोड़ और सीवरेज परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। रीवा को जल प्रदाय व्यवस्था के लिए 99 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।

    धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन को इस चरण में सबसे बड़ी मंजूरी मिली है। यहां 11 प्रमुख मंदिर परिसरों के समग्र विकास और कॉरिडोर निर्माण के लिए 1124 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और शहरी अधोसंरचना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    अर्बन चैलेंज फंड के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, यानी लगभग 688.28 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। शेष राशि में 50 प्रतिशत संबंधित नगरीय निकायों को बॉण्ड, ऋण या अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से जुटानी होगी, जबकि निजी निवेश को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य का कुल हिस्सा लगभग 5000 करोड़ रुपये रहेगा और इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की शहरी विकास परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस पूरी प्रक्रिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी करना भी उतना ही आवश्यक है। जिन नगर निगमों की परियोजनाएं पहले चरण से बाहर रह गई हैं, उनके लिए अगले चरण से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करना बड़ी चुनौती होगी। यदि ऐसा किया जाता है तो भविष्य में इन शहरों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं और आधारभूत विकास का लाभ मिल सकेगा।

  • सौंसर में मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड को मिली नई दिशा, वन विभाग ने 9.5 करोड़ रुपये एनपीवी जमा कराने और नए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की रखी शर्त

    सौंसर में मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड को मिली नई दिशा, वन विभाग ने 9.5 करोड़ रुपये एनपीवी जमा कराने और नए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की रखी शर्त

    मध्य प्रदेश। पांढुर्ना जिले के सौंसर क्षेत्र में वर्षों से प्रस्तावित स्पेशल इकोनामिक जोन (एसईजेड) परियोजना को अब नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी नहीं हो सकी थी। अब इसे पारंपरिक एसईजेड के बजाय मल्टी प्रोडक्ट स्पेशल इकोनामिक जोन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस बदलाव से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब आठ हजार एकड़ अधिगृहित भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना में अब राज्य की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। इसके लिए राज्य के औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट की स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया है। सरकार का मानना है कि मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड का स्वरूप निवेशकों को अधिक आकर्षित करेगा और क्षेत्र में विविध उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    हालांकि परियोजना के नए स्वरूप के साथ ही वन विभाग ने महत्वपूर्ण शर्तें भी सामने रख दी हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक वृक्षारोपण के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के रूप में 9 करोड़ 50 लाख रुपये जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही भू-उपयोग में बदलाव होने के कारण परियोजना के लिए नए सिरे से वन स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। वन विभाग का यह अभिमत परियोजना की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    जानकारी के अनुसार प्रस्तावित एसईजेड का एक बड़ा हिस्सा वन भूमि से जुड़ा हुआ है। पहले चरण में इस भूमि के उपयोग के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराकर प्रारंभिक वन स्वीकृति प्राप्त कर ली गई थी, लेकिन उस समय निर्धारित नेट प्रेजेंट वैल्यू की राशि जमा नहीं कराई गई थी। अब परियोजना का स्वरूप बदलने के बाद पूर्व में मिली स्वीकृतियां पर्याप्त नहीं मानी जाएंगी और पूरी प्रक्रिया को संशोधित नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।

    इस नई स्थिति में परियोजना विकसित करने वाली कंपनी को वन विभाग की सभी शर्तों का पालन करते हुए आवश्यक दस्तावेज, स्वीकृतियां और वित्तीय दायित्व पूरे करने होंगे। इसके बाद ही परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा। प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर मिल जाती हैं तो मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे विनिर्माण, प्रसंस्करण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों का भी विस्तार हो सकता है।

    फिलहाल परियोजना का भविष्य वन विभाग की शर्तों के पालन और राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति पर निर्भर है। यदि सभी औपचारिकताएं तय समय पर पूरी होती हैं तो लंबे समय से प्रतीक्षित यह औद्योगिक परियोजना एक नए स्वरूप के साथ आगे बढ़ सकती है और पांढुर्ना तथा आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

  • छिंदवाड़ा में दर्दनाक हादसा: पत्नी के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे बुजुर्ग की मौत, नाती घायल

    छिंदवाड़ा में दर्दनाक हादसा: पत्नी के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे बुजुर्ग की मौत, नाती घायल


    मध्‍य प्रदेश । छिंदवाड़ा जिले के तामिया थाना क्षेत्र अंतर्गत साजंकुही में शुक्रवार शाम एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद नाती घायल हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब बुजुर्ग अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए बाजार से सामान लेने जा रहे थे।

    जानकारी के अनुसार, मृतक सुमरलाल उईके (70 वर्ष), निवासी धूर्वाढ़ाना, अपनी पत्नी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए थे। वे अपने नाती संजय के साथ टू-व्हीलर से सामान खरीदने निकले थे, तभी साजंकुही के पास एक तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी भीषण थी कि दादा और नाती दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत दोनों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन बुजुर्ग ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि नाती का इलाज जारी है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने सामने से आकर टू-व्हीलर को टक्कर मारी, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। हालांकि पुलिस ने अभी तक वाहन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी है।

    हादसे की सूचना मिलते ही तामिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर वाहन की तलाश की जा रही है।

    इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है, क्योंकि एक ही घर पहले से पत्नी की मौत के शोक में डूबा था और अब पति की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, अब इस घर से पति-पत्नी दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकलने की स्थिति बन गई है, जिससे माहौल बेहद गमगीन हो गया है।