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  • मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में आयोजित श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुबह 09 बजे श्री कृष्ण सुदामा रंग उत्सव गेर (चल समारोह) में सिंधी कॉलोनी से सम्मिलित होकर टॉवर चौराहे तक जाएंगे। टॉवर चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन सभी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री सम्मिलित होंगे। रंग उत्सव कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वागत द्वार, मंच लगाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से आने वाली मंडली, झांकियां, फाग उत्सव करने वाले संस्थाओं के द्वारा विशेष आयोजन भी किए जाएंगे। लाइव झांकियां भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होगी।

  • उज्जैन रंगपंचमी गेर पर हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन निगरानी से रखी जाएगी पैनी नजर

    उज्जैन रंगपंचमी गेर पर हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन निगरानी से रखी जाएगी पैनी नजर


    उज्जैनउज्जैन में रंगपंचमी गेर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस ने हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। शहर भर के गेर मार्ग पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा लागू की गई है, जिसमें ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी की जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और किसी भी असामाजिक गतिविधि को तुरंत रोकने के लिए तैयार है।

    पुलिस ने गेर मार्ग के ऊंचे स्थानों, संकरी गलियों और संवेदनशील चौराहों पर विशेष निगरानी रखी है। ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड कंट्रोल रूम तक भेजी जा रही है, जिससे अधिकारी भीड़ के घनत्व, यातायात और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर भीड़ को मोड़ने और मार्ग को व्यवस्थित करने के निर्देश तुरंत दिए जा रहे हैं।

    गेर शुरू होने से पहले पुलिस ने संवेदनशील स्थानों और छतों की भी जांच की। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी पत्थर, कांच या अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं जमा न हों। इसके साथ ही गेर में हड़बड़ी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरों का भी उपयोग किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की शहर में मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि रंगपंचमी गेर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, आनंददायक और व्यवस्थित बने।

    पुलिस ने बताया कि ड्रोन निगरानी और लाइव फीड के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। गेर मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मी और विशेष सुरक्षा दल भीड़ प्रबंधन में सक्रिय रहेंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित मार्ग और सुरक्षा नियमों का पालन करें।

    पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गेर में किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। ड्रोन और हाई-टेक कैमरों की मदद से प्रशासन पूरे गेर मार्ग का हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके।

    इस हाई-टेक निगरानी से रंगपंचमी गेर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मार्ग व्यवस्थित रहेगी। प्रशासन की यह पहल गेर को सुरक्षित बनाने और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

  • इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया में शामिल होगा बड़नगर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया में शामिल होगा बड़नगर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन जिले का बड़नगर भी विकास में अग्रणी रहेगा। बड़नगर अब इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया का भाग बनेगा। बड़नगर पर बाबा महाकाल सहित चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों का भी आशीर्वाद है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग की स्वीकृति प्रदान करने के लिए उनका आभार प्रकट करने मुख्यमंत्री निवास पहुंचे बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़नगरवासियों ने साफा और गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर नई ऊंचाइयां को छू रहा है। देश में मध्य प्रदेश का विशेष महत्व है। विकास के इस कारवां को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार समाज के हर वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया है। टेक्सटाइल सेक्टर के इस मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का लाभ भी बड़नगरवासियों को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बड़नगर क्षेत्र में संचालित गौशालाओं को नरवाई प्रबंधन के लिए मशीनें लेने में सहायता के उद्देश्य से स्वेच्छानुदान से अंश राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे नरवाई के निराकरण के साथ ही गौशालाओं को पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बड़नगर क्षेत्र के व्यायाम शालाओं को प्रोत्साहन स्वरूप एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से उज्जैन और बड़नगर अब 3 प्रमुख मार्गों के माध्यम से रतलाम से जुड़ गया है। तीसरा नया 2 लेन रास्ता गंभीर डैम के पास से नागदा होकर निकलने वाला है। लगभग 150 करोड़ रुपये का नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी सौगात है। इससे रतलाम की दूरी 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। नई सड़क से सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में भी सुविधा होगी। उज्जैन में विमानतल भी बनाया जा रहा है, इसका लाभ भी बड़नगर को मिलेगा। आगामी वर्षों में रतलाम सहित राजस्थान और गुजरात से भी बड़नगर का संपर्क सुगम और सशक्त होगा। सड़कें विकास का आधार हैं, इन सड़कों से बड़नगर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास के द्वार खुलेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ : 2028 को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में रतलाम से उज्जैन आने वाले श्रद्धालु मुख्यत: बदनावर-बड़नगर मार्ग से आवागमन करते हैं, जिसकी कुल लंबाई लगभग 115 कि.मी. है। प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की कुल लंबाई लगभग 74 कि.मी. है, जो वर्तमान प्रचलित मार्ग की तुलना में लगभग 40 कि.मी. कम है। इस मार्ग के विकसित होने से यात्रा की दूरी एवं समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें मित्र की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी हमारे लिए भगवान श्री हनुमान की तरह हैं, जिन्हें केवल जनभागीदारी की शक्ति का भान कराना होता है। सरकार के कार्य अपने आप होते चले जाते हैं। अभिनंदन समारोह में बड़नगर विधायक जितेंद्र पंड्या, अंतर सिंह देवड़ा, उमराव सिंह, विजय चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

  • मध्य प्रदेश में बन रहा इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सशक्त ईको सिस्टम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश में बन रहा इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सशक्त ईको सिस्टम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) मैन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, उन्नत परीक्षण अधोसंरचना, ऊर्जा उपलब्धता और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से एक सशक्त ईको सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 और इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के माध्यम से ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।


    वैश्विक बदलाव के साथ बढ़ती ईवी की संभावनाएं

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बढ़ रहा है और भारत भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैटरी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं।


    मजबूत ऑटोमोबाइल क्लस्टर और परीक्षण अधोसंरचना

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश इस परिवर्तन को अवसर के रूप में लेते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वयं को एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। राज्य में पीथमपुर देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स में से एक है, जहां 200 से अधिक ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट निर्माता संचालित हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही एशिया का सबसे बड़ा ऑटोमोटिव परीक्षण ट्रैक नैट्रैक्स उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल और ईवी उद्योग के लिए मजबूत तकनीकी आधार उपलब्ध हुआ है।


    इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से मैन्यूफेक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट के लिए संपूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इस नीति के माध्यम से बैटरी निर्माण, वाहन असेंबली से लेकर रीसाइक्लिंग तक के क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे उभरते सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और पंजीयन शुल्क में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।


    औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश में बढ़ेंगे अवसर

    उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के अंतर्गत उद्योगों को पूंजी अनुदान, भूमि रियायत, निर्यात परिवहन सहायता तथा हरित और अनुसंधान निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतियों के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल और उससे जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में अधिशेष राज्य है और यहां बिजली दरें देश में अपेक्षाकृत कम हैं, जिससे ईवी विनिर्माण इकाइयों और चार्जिंग अधोसंरचना के संचालन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं।


    भारत में ईवी की बढ़ती मांग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो पहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत, तीन पहिया में 23.4 प्रतिशत, यात्री कारों में 2 प्रतिशत और बसों में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। औद्योगिक अधोसंरचना, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं, निवेश अनुकूल नीतियां और ऊर्जा उपलब्धता जैसे कारकों के कारण मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

  • एक लाख करोड़ के बजट से संवरेगा मध्य प्रदेश के किसान का जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एक लाख करोड़ के बजट से संवरेगा मध्य प्रदेश के किसान का जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी के कल्या

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    ण के लिए काम कर रही है। किसान कल्याण के लिए इस साल बजट में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि प्रस्तावित है। किसान कल्याण वर्ष में कृषि आधारित व्यापार गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं, जिससे किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को सागर जिले के गढ़ाकोटा के ऐतिहासिक रहस मेले के शुभारंभ एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के हितग्राहियों के राशि अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सागर जिले के रहली क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देते हुए फूड पार्क स्थापित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती आल्हा-ऊदल जैसे वीरों की धरती है। सागर जिले का रहस मेला ऐतिहासिक है। उन्होंने रहस मेले के 217 साल पुराने गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए और उनके शौर्य को प्रणाम करते हुए कहा -“बड़े लडैया महोबा वाले, जिन की मार सही ना जाये। एक को मारे दोई मर जावे, तीजा खौफ खाये मर जाये।।”- ऐसी वीरता और पराक्रम का लोहा मनवाने वाले मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान योद्धाओं की भूमि को कोटिशः नमन।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परमात्मा ने ऋतुओं और मौसम के साथ मेलों का अद्भुत संबंध बनाया है। जब धान और सोयाबीन कटे तो दीवाली और गेहूं की फसल आने पर होली मनाई जाती है। बुंदेलखंड की धरती पर आकर मन आनंदित हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। बजट 2026-27 में नई यशोदा योजना की शुरुआत की गई है। अब हमारे स्कूलों में 8वीं तक के विद्यार्थियों को ट्रेटा पैक दूध नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपये की राशि मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए संकल्पित है। रहली में सूक्ष्म औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कमेटी गठित की जाए। यहां पारम्परिक बीड़ी उद्योग के साथ हस्त शिल्प कलाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की माह जनवरी पेड इन फरवरी 2026 की राशि हितग्राहियों के खातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस पेंशन योजनाओं में प्रति हितग्राही प्रतिमाह 600 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने 32.78 लाख से अधिक हितग्राहियों के खाते में 196.72 करोड़ की राशि ट्रांसफर की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रहली विधासभा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती देते हुए खेजरा-शाहपुर-मोकलपुर फ्लाईओवर के निर्माण की स्वीकृति दी। उन्होंने रहली एवं गढ़ाकोटा कृषि उपज मंडी के उन्नयन के लिए 5-5 करोड़ रुपये एवं शाहपुर उपमंडी के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का सही दाम और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें, इसके साथ ही उन्होंने रहली रमखरिया, सिमरिया नायक बहेरिया मढ़ि (लगभग 22 किलोमीटर) मार्ग के उन्नयन और चौड़ीकरण की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड में बीड़ी उद्योग और तेंदूपत्ता संग्रहण केवल व्यापार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जीविका रहा है। यहां बीड़ी, तेंदूपत्ते और हस्तकला आधारित लघु इकाइयों को मिलेगा प्रोत्साहन दिया जाएगा। बीड़ी बनाने वाले एवं तेंदूपत्ता का संग्रहण करने वाले व्यक्तियों के उन्नयन के लिए सांसद, विधायक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि एक कमेटी बनाकर लिये गये निर्णय अनुसार कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स एवं स्टेडियम कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। इसी प्रकार ढाना में शासकीय महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय और इतिहास के नए विषय खोलने को भी मंजूरी दी।

    उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा के लिए सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। रहली क्षेत्र के विद्यार्थियों को भव्य सांदीपनि विद्यालय की सौगात मिली है। अब बच्चों को गणवेश, किताबें, साइकिलें नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। स्कूल टॉपर को स्कूटी दी जाती है। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं।

    प्रमुख घोषणाएं

    – गढ़ाकोटा और रहली में मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनेगा।
    – महाविद्यालय में वाणिज्य और इतिहास के नए संकाय की कक्षाएं शुरू होंगी।
    – क्षेत्र में नया फ्लाई-ओवर और सड़कों का उन्नयन किया जाएगा।
    – गढ़ाकोटा और रहली कृषि उपज मंडी में विकास कार्यों के लिए 5-5 करोड़ की राशि मिलेगी।
    – शाहपुरा कृषि उपज मंडी के विकास कार्यों के लिए भी एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
    – सोनार नदी के माध्यम से सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

    कार्यक्रम में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि रहस मेले की शुरुआत 217 साल पहले बुंदेलखंड के तत्कालीन शासक मर्दन सिंह जूदेव के राज्यारोहण के उपलक्ष में हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा भी वर्ष 1990 में यहां पधारे थे। मेला परंपरागत रूप से हर वर्ष भव्यता के साथ आयोजित हो रहा है। रहली-गढ़ाकोटा क्षेत्र पहले काफी पिछड़ा था, लेकिन 2003 में राज्य और उसके बाद वर्ष 2014 में केंद्र में हमारी सरकार बनने के बाद यहां विकास की गति तेज हुई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विशेष आशीर्वाद से रहली क्षेत्र की जरूरी आवश्यकताएं पूर्ण हुई हैं। क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को विस्तार देने की जरूरत है। भार्गव ने लव-कुश धाम निर्माण और राज्य के भीतर नदी जोड़ो प्रकल्प के तहत बुंदेलखंड में मां नर्मदा को सोनार नदी से जोड़ने का सुझाव दिया।

  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जायेगा। जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उनके निवास पर भेंट करने आए इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न ग्रामों के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन मार्ग का निर्माण कार्य किसानों के हित में करने के निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रूपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जायेगा। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

  • MP: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का परलोक गमन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख

    MP: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का परलोक गमन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख


    भोपाल।
    उत्तर प्रदेश- मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सीमा पर सतना जिले (Satna district) में स्थित देश में प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज (Mahant Swami Paramhans Sachchidanand Maharaj) शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने 102 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम सांस ली। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही देशभर में फैले लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परम पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के परलोक गमन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का सम्पूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवता के कल्याण को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल अनुयायियों को यह अपार दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की है।

    धारकुंडी आश्रम के प्रमुख संत एवं शिष्य स्वामी संजय बाबा ने बताया कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज पिछले कुछ महीनों से मुंबई स्थित आश्रम में प्रवास कर रहे थे। एक जनवरी को उन्होंने चित्रकूट के धारकुंडी आश्रम में भक्तों के बीच अपना 102वां जन्मदिवस मनाया था। इसके बाद स्वास्थ्य खराब होने पर वे इलाज के लिए मुंबई गए थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे बदलापुर स्थित आश्रम में ठहरे हुए थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

    उन्होंने बताया कि मुंबई से उनका पार्थिव शरीर शनिवार देर रात चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अपने आराध्य को श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को आश्रम परिसर में अंतिम दर्शन कराए जाएंगे, जबकि सोमवार को आश्रम की परंपरा के अनुसार समाधि दी जाएगी।

    स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वामी अड़गड़ानंद महाराज विशेष विमान से धारकुंडी पहुंच चुके हैं। चित्रकूट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधु, संत और महंत भी आश्रम पहुंच रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूपी–एमपी सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। चित्रकूट प्रभारी एसपी सत्यपाल सिंह और सतना एसपी हंसराज सिंह स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।


    1956 में हुई थी आश्रम की स्थापना

    स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद के आशीर्वाद से 22 नवंबर 1956 को धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र बेहद पिछड़ा माना जाता था और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कहा जाता है कि स्वामी जी ने आश्रम परिसर में बहने वाली स्वच्छ और निरंतर जलधाराओं से बिजली उत्पादन की व्यवस्था शुरू कराई थी। आश्रम में स्थित दो झरनों का पानी वर्ष भर लगातार बहता रहता है, जो आगे चलकर नदी का रूप ले लेता है। मान्यता है कि स्थापना काल से लेकर वर्ष 1970 तक कई बार शेर भी आश्रम परिसर में आते-जाते थे और स्वामी जी के सान्निध्य में रहते थे। इससे जुड़ी अनेक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।

  • मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य अधोसंरचना विस्तार से स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार, मेडिकल हब बनने की ओर प्रगति

    मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य अधोसंरचना विस्तार से स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार, मेडिकल हब बनने की ओर प्रगति


    भोपाल । मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त करने के लिए समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ प्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार की ओर अग्रसर है।

    मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश की मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के तहत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू और एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में वृद्धि हुई है।

    जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है। सिकल सेल मिशन के तहत व्यापक स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार किए गए, जिससे पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है। आपात स्थिति में गंभीर रोगियों को पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा से उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, और अब तक 120 से अधिक नागरिकों को सेवा का लाभ मिला है। साथ ही निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

    मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब 33 मेडिकल कॉलेज हैं। पिछले दो वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी मेडिकल कॉलेज 12 से बढ़कर 14 हो गए हैं। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन शुरू हो गया है। आगामी दो वर्षों में 6 शासकीय और पीपीपी मॉडल पर 13 मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना है। सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हो गई हैं, जबकि कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी सीटें भी बढ़ाकर 2862 की गई हैं, साथ ही 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।

    कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 773.07 करोड़ रुपये के अधोसंरचनात्मक कार्य शुरू किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ और सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल के लिए 383.22 करोड़ रुपये के कार्य प्रारंभ हुए हैं। 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

    आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन और एमआरआई, भोपाल और रीवा में कार्डियक कैथ लैब स्थापित की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ शुरू हुई हैं, जबकि इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए और विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है।

  • शोक संतप्त महाराष्ट्र: अजित पवार के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्त की गहरी संवेदना

    शोक संतप्त महाराष्ट्र: अजित पवार के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्त की गहरी संवेदना


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार के आकस्मिक निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. श्री पवार को विनम्र श्रद्धांजलि देकर बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा की परम शांति की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. श्री अजित पवार एक उदार छवि वाले महाराष्ट्र के जमीनी राजनेता थे। उन्होंने अलग-अलग सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों के दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन करते हुए महाराष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान दिया। वे गरीब, वंचित और पिछड़ों के कल्याण के लिए सदैव समर्पित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जारी संदेश में कहा कि महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट में लैंडिंग के प्रयास के दौरान हुआ विमान हादसा हृदय विदारक है। इसमें श्री अजित पवार सहित पांच व्यक्तियों के निधन की सूचना मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. श्री पवार उनके अच्छे मित्र थे। उनके निधन से मन व्यथित और पीड़ा से भरा हुआ है। श्री पवार का इस तरह से हम सबको छोड़कर चले जाना अविश्वनीय है। दु:ख की इस घड़ी में मध्यप्रदेश सरकार श्री अजित पवार के समर्थकों और शोकाकुल परिजन के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्लेन दुर्घटना में मृत सभी व्यक्तियों की आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजन को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।