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  • प्रभास के फैन की पिटाई से मचा बवाल थिएटर प्रबंधन की सफाई ने बढ़ाई बहस

    प्रभास के फैन की पिटाई से मचा बवाल थिएटर प्रबंधन की सफाई ने बढ़ाई बहस


    नई दिल्ली । हैदराबाद के सुदर्शन थिएटर में एक फिल्म शो के दौरान हुई मारपीट की घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है जहां एक ओर वायरल वीडियो में थिएटर स्टाफ एक फैन को डंडे और चप्पलों से पीटता नजर आ रहा है वहीं दूसरी ओर इस घटना के पीछे की वजह को लेकर अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं बताया जा रहा है कि यह मामला फिल्म के एक गाने को लेकर शुरू हुआ था जो एक शो में दिखाया गया लेकिन दूसरे शो में नहीं दिखाया गया इसी बात को लेकर कुछ फैंस नाराज हो गए और उन्होंने थिएटर प्रबंधन से जवाब मांगना शुरू कर दिया

    मामला तब और बढ़ गया जब फिल्म खत्म होने के बाद भी कुछ दर्शक थिएटर से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे वे बार बार उसी गाने को दोबारा चलाने की मांग कर रहे थे इस वजह से अगले शो की तैयारी में जुटे स्टाफ को परेशानी होने लगी थिएटर मालिक बालगोविंद के मुताबिक स्टाफ ने दर्शकों से शांति से बाहर निकलने का अनुरोध किया था लेकिन कुछ लोग इस दौरान आक्रामक हो गए और बहस तेज हो गई

    स्थिति ने गंभीर रूप तब ले लिया जब कथित तौर पर एक फैन ने महिला स्टाफ के साथ बदतमीजी की और आपत्तिजनक इशारे किए बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति नशे की हालत में था जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया थिएटर प्रबंधन का कहना है कि स्टाफ ने पहले स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन जब मामला नियंत्रण से बाहर होता गया तब हाथापाई शुरू हो गई

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस घटना को और अधिक चर्चा में ला दिया है जहां कुछ लोग थिएटर स्टाफ के रवैये की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि हिंसा किसी भी स्थिति का समाधान नहीं हो सकती वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति नशे में महिलाओं के साथ बदतमीजी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है और ऐसे मामलों में सीमा कहां तय की जानी चाहिए थिएटर मालिक ने कहा है कि वे फैंस के उत्साह को समझते हैं लेकिन नियमों और मर्यादा का पालन करना भी जरूरी है उन्होंने यह भी बताया कि री रिलीज फिल्मों के दौरान अक्सर कुछ लोग नशे की हालत में आ जाते हैं जिससे ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है

    फिलहाल इस मामले की सच्चाई पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने सिनेमाघरों में सुरक्षा व्यवस्था और व्यवहार के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में बेहतर प्रबंधन और संयमित प्रतिक्रिया अपनाई जाए ताकि दर्शकों का अनुभव सुरक्षित और सकारात्मक बना रहे

  • हजारों साल पहले ही समझ लिया गया था सिनेमा का रहस्य!

    हजारों साल पहले ही समझ लिया गया था सिनेमा का रहस्य!


    नई दिल्ली। आज के दौर में फिल्में देखना आम बात है, लेकिन सिनेमा का जन्म मानव इतिहास की सबसे अनोखी खोजों में से एक माना जाता है। जिस तकनीक के जरिए आज पर्दे पर चलती-फिरती तस्वीरें दिखाई देती हैं, उसकी बुनियादी समझ हजारों साल पहले ही दी जा चुकी थी। माना जाता है कि यूनानी दार्शनिक Aristotle ने लगभग 300 ईसा पूर्व ही उस सिद्धांत को समझ लिया था, जिस पर आधुनिक सिनेमा टिका हुआ है।
    हजारों साल पहले समझा गया था सिद्धांत

    लेखक और गीतकार Varun Grover ने एक बातचीत में बताया कि सिनेमा की तकनीक का मूल सिद्धांत प्राचीन समय में ही सामने आ चुका था। उनके अनुसार, आज फिल्मों में जो तकनीकी प्रक्रिया इस्तेमाल होती है, उसकी झलक अरस्तू के विचारों में मिलती है।

    वरुण ग्रोवर ने बताया कि अरस्तू ने एक घटना के जरिए यह समझा था कि इंसानी आंख और दिमाग किस तरह तस्वीरों को ग्रहण करते हैं। यही सिद्धांत आगे चलकर सिनेमा की बुनियाद बना।

    आंख और दिमाग का खेल

    कहानी के अनुसार, एक बार अरस्तू आसमान की ओर देख रहे थे। सूरज को देखने के बाद जब उन्होंने नजर दूसरी दिशा में घुमाई, तो उन्हें वहां भी सूरज जैसा प्रतिबिंब दिखाई दिया। इस घटना से उन्होंने अंदाजा लगाया कि जब कोई तस्वीर हमारी आंखों पर बनती है, तो उसका प्रभाव कुछ समय तक बना रहता है।

    दरअसल, किसी भी इमेज का असर लगभग एक चौथाई सेकंड तक हमारी आंखों में बना रहता है। अगर इसी दौरान दूसरी तस्वीर दिखाई जाए तो दिमाग दोनों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ जोड़कर देखता है। इसी वजह से स्थिर तस्वीरों की तेज़ सीरीज हमें चलती हुई दिखाई देती है। इसी सिद्धांत को आगे चलकर ‘पर्सिस्टेंस ऑफ विज़न’ कहा गया, जो सिनेमा और एनीमेशन की मूल तकनीक है।

    वरुण ग्रोवर का फिल्मी सफर

    Varun Grover हिंदी सिनेमा के चर्चित लेखक और गीतकार हैं। उन्होंने Masaan और Sandeep Aur Pinky Faraar जैसी फिल्मों के लिए सराहना हासिल की है। इसके अलावा वह Sacred Games जैसी चर्चित वेब सीरीज से भी जुड़े रहे हैं।

    उन्होंने Gangs of Wasseypur, Udta Punjab, Newton, Sui Dhaaga और RRR (हिंदी संस्करण) जैसे प्रोजेक्ट्स में लेखन का काम किया है।

    इस तरह, आज जिस सिनेमा को हम बड़े पर्दे पर देखते हैं, उसकी वैज्ञानिक नींव हजारों साल पहले रखे गए विचारों से जुड़ी मानी जाती है।

  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'Ikkis' देखने से क्यों कतरा रही हैं हेमा मालिनी? वजह जानकर आपकी आंखें भी हो जाएंगी नम

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'Ikkis' देखने से क्यों कतरा रही हैं हेमा मालिनी? वजह जानकर आपकी आंखें भी हो जाएंगी नम


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन को डेढ़ महीना बीत चुका है लेकिन ‘देओल परिवार’ और उनके चाहने वालों के लिए इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन साबित हो रहा है। हाल ही में धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई जिसे देख फैंस की आंखें नम हो गईं। धर्मेंद्र के करियर का यह अंतिम अध्याय न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों के लिए भी एक भावुक यात्रा बन गया है।हालांकि एक ताज्जुब की बात यह है कि धर्मेंद्र की पत्नी और बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने अब तक यह फिल्म नहीं देखी है। इस सवाल पर जब हेमा मालिनी से बातचीत की गई तो उन्होंने खुलासा किया कि वह इस फिल्म को देखने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं।

    फिल्म न देखने की वजह ‘भावुकता’

    हेमा मालिनी ने कहा “जब यह फिल्म रिलीज हुई तब मैं मथुरा में अपने काम में व्यस्त थी। सच कहूं तो मैंने अभी तक ‘इक्कीस’ नहीं देखी है क्योंकि यह मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला पल होगा। मेरी बेटी भी मुझसे यही कह रही थी। शायद मैं इसे तब देखूंगी जब मेरे घाव थोड़े भरने लगेंगे। मा मालिनी के लिए यह फिल्म एक भावनात्मक और दर्दनाक अनुभव हो सकती है क्योंकि इसमें उनके पति ने अपनी अंतिम फिल्म में प्रदर्शन किया है। वह शायद इस पल को महसूस करने के लिए और भी मानसिक रूप से तैयार होना चाहती हैं।

    ‘इक्कीस’ की स्क्रीनिंग में नम थीं सबकी आंखें

    1 जनवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म की मुंबई में विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी जहां सनी देओल और सलमान खान समेत बॉलीवुड के तमाम सितारे ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। ट्रेलर लॉन्च के दौरान भी सनी देओल भावुक हो गए थे और अपने पिता को याद करते हुए रो पड़े थे। धर्मेंद्र की यह फिल्म उनके करियर का एक ऐतिहासिक और यादगार विदाई मानी जा रही है।

    धर्मेंद्र और अगस्त्य नंदा का यादगार साथ

    फिल्म ‘इक्कीस’ को श्रीराम राघवन ने निर्देशित किया है और यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:मुख्य भूमिका: अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने शहीद अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है।धर्मेंद्र का रोल: फिल्म में धर्मेंद्र एक बेहद अहम और प्रभावशाली भूमिका में नजर आए हैं जो दर्शकों के दिल को छू लेती है। कहानी: यह 21 साल के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता की गाथा है जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।सह-कलाकार: फिल्म में जयदीप अहलावत और सिमर भाटिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

    एक युग का अंत

    धर्मेंद्र केवल एक अभिनेता नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के एक युग का नाम थे। उनकी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ न केवल एक युद्ध की कहानी है बल्कि धर्मेंद्र जैसे महान कलाकार को सिनेमाई जगत की तरफ से एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी है। फैंस सोशल मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं कि बड़े पर्दे पर उन्हें आखिरी बार देखना एक ऐतिहासिक और हृदयविदारक अनुभव है। हेमा मालिनी के लिए यह फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को देखना है और शायद इसलिए वह इसे देखने के लिए अब तक तैयार नहीं हो पाई हैं।

  • उर्मिला मातोंडकर ने फिल्मों से दूरी पर की बात कहा समय आ गया है कि वापस सेट पर लौटूं

    उर्मिला मातोंडकर ने फिल्मों से दूरी पर की बात कहा समय आ गया है कि वापस सेट पर लौटूं


    नई दिल्ली । उर्मिला मातोंडकर जो बॉलीवुड की शानदार एक्ट्रेसेस में शुमार हैं काफी समय से बड़े पर्दे से गायब हैं। उनकी फिल्मों से दूर रहने की वजह से कई लोग यह सोचने लगे थे कि क्या उर्मिला ने बॉलीवुड को अलविदा ले लिया है। अब इन अफवाहों पर उर्मिला ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और बताया कि वह अब सिल्वर स्क्रीन पर वापस लौटने के लिए तैयार हैं।

    उर्मिला ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए कहा “जब बात मेरे काम की आती है तो मैं हमेशा से ही सेलेक्टिव रही हूं। मैं किसी को इल्जाम नहीं लगा सकती जब लोग सोचते हैं कि मैं फिल्में या कुछ नहीं कर रही। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। फिलहाल मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि मैं वापस सिल्वर स्क्रीन पर आकर काम शुरू करूं।”
    उर्मिला ने इस बात का भी खुलासा किया कि वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपना डेब्यू करने वाली हैं।

    यह एक नया कदम होगा उनके लिए और वह खासतौर पर इस प्लेटफॉर्म पर ऐसे रोल करना चाहती हैं जो उन्होंने पहले कभी नहीं किए। उर्मिला ने कहा “ओटीटी पर बहुत कुछ चल रहा है और मैं ऐसे रोल करना चाहती हूं जो मेरे करियर के दौरान पहले कभी नहीं किए।उर्मिला के करियर की बात करें तो वह 1991 में फिल्म नमसिम्हा से बतौर लीड एक्ट्रेस अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने के बाद कई हिट फिल्मों का हिस्सा बनीं। रंगीला जुदाई सत्या कौन भूत और पिंजर जैसी फिल्मों में उनकी शानदार एक्टिंग को दर्शकों और क्रिटिक्स ने सराहा था।

    हालांकि वह पिछले कुछ समय से बड़े पर्दे से दूर थीं लेकिन उन्होंने 2022 में टीवी शो डीआईडी सुपर मॉम्स में भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा वह 2018 में फिल्म ब्लैकमेल के गाने बेवफा ब्यूटी में नजर आईं थीं।
    उनकी आखिरी फिल्म बतौर लीड एक्ट्रेस ईएमआई थी जिसमें उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब उर्मिला के फैंस उनके ओटीटी डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि वह नया अनुभव हासिल करने के लिए तैयार हैं। उर्मिला की वापसी निश्चित रूप से बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक नई हलचल मचाएगी।

  • थिएटर में फिल्म देखने वालों के लिए बने ये नियम क्या आप जानते हैं

    थिएटर में फिल्म देखने वालों के लिए बने ये नियम क्या आप जानते हैं


    नई दिल्ली । थिएटर में फिल्म देखने के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं जिनका उद्देश्य दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अगर आप एक मूवी लवर हैं और अक्सर सिनेमाघरों में फिल्में देखने जाते हैं तो ये नियम आपके लिए जानना जरूरी हैं।

    बाहर का खाना और पानी

    आमतौर पर सिनेमाघरों में बाहर का खाना और पानी ले जाने की अनुमति नहीं होती है लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में यह नियम लागू नहीं होता। जैसेअगर आपके साथ छोटा बच्चा हैतो आप बच्चे के लिए खाना और पानी लेकर जा सकते हैं। थिएटर आपको कोई रोक नहीं सकता है। स्वास्थ्य संबंधी कारणअगर किसी व्यक्ति को विशेष डाइट की जरूरत है जिसे डॉक्टर ने सलाह दी है तो वह थिएटर के मालिक को सूचित करके अपनी डाइट का खाना लेकर जा सकते हैं। थिएटर की सुरक्षा मालिक की जिम्मेदारी है कि वह दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इस संदर्भ में कुछ प्रमुख नियम हैं

    EXIT साइनथिएटर हॉल में स्पष्ट रूप से EXIT साइन लगे होने चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में दर्शक सही रास्ते से बाहर निकल सकें।
    लाइटिंगहॉल में लाइट्स का सही तरीके से काम करना चाहिए ताकि अंधेरे में किसी को कोई परेशानी न हो।हवा की सही व्यवस्थासिनेमाघरों में वेंटिलेशन की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि हवा की कोई कमी न हो और दर्शकों को शुद्ध हवा मिल सके।आग से बचावथिएटर में आग से बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए। आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सुरक्षा उपाय लागू हो सकें जैसे अग्निशामक यंत्र फायर एक्सटिंगuisher और अलार्म सिस्टम।

    मुफ्त पानी की सुविधा

    सिनेमाघरों में आपको मुफ्त पानी उपलब्ध कराया जाता है। यह एक नियम है जिससे दर्शक पानी के बिना परेशान न हों। अगर आपको पानी चाहिए तो आप थिएटर से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पानी ले सकते हैं।

    इमरजेंसी एग्जिट और सीढ़ियां

    सिनेमाघरों में इमरजेंसी एग्जिट और सीढ़ियों का ध्यान रखा जाता है। इनका इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थितियों में किया जाएगा जिससे हर किसी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

     टिकट चेकिंग

    कई थिएटरों में एक नियम होता है कि अधिकारिक टिकट के बिना सिनेमाघर में प्रवेश नहीं किया जा सकता। यह नियम सुरक्षा और व्यवस्थापन के लिए जरूरी है।

     शांति बनाए रखें

    फिल्म देखने के दौरान थिएटर में शांति बनाए रखना भी एक आवश्यक नियम है। तेज आवाज़ में बात करना या फोन का इस्तेमाल शांति को भंग कर सकता है और आपके लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए ध्यान रखें कि आप दूसरों की फिल्म देखने के अनुभव को खराब न करें। इन नियमों को जानने से आपको सिनेमाघर में एक अच्छा अनुभव मिलेगा। सुरक्षा स्वास्थ्य और आरामदायक माहौल सुनिश्चित करने के लिए ये नियम बनाए गए हैं। अगली बार जब आप सिनेमाघर जाएं तो इन नियमों का पालन जरूर करें और एक सुरक्षित और सुखद फिल्म अनुभव का आनंद लें।