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  • जन्मदिन पर प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ का नया पोस्टर जारी, फाइल नंबर 025 और रहस्यमयी टैगलाइन ने बढ़ाई उत्सुकता

    जन्मदिन पर प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ का नया पोस्टर जारी, फाइल नंबर 025 और रहस्यमयी टैगलाइन ने बढ़ाई उत्सुकता

    नई दिल्ली । अभिनेता प्रभास के जन्मदिन के मौके पर उनकी आगामी ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा फिल्म ‘फौजी’ का नया पोस्टर जारी किया गया है। इस पोस्टर में प्रभास का अलग और विंटेज अंदाज देखने को मिल रहा है। पोस्टर सामने आने के बाद फिल्म के किरदार और कहानी से जुड़े संकेतों को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। खास तौर पर फाइल नंबर 025 और इसके साथ दी गई रहस्यमयी टैगलाइन ने लोगों का ध्यान खींचा है।

    फिल्म के नए पोस्टर में एक सुनहरे सिक्के पर प्रभास की वर्दी पहने हुए साइड प्रोफाइल दिखाई गई है। सिक्के के चारों ओर आग की लपटें नजर आती हैं, जो इसके दृश्य को प्रभावशाली बनाती हैं। पोस्टर में फाइल नंबर 025 का उल्लेख करते हुए संकेत दिया गया है कि इससे जुड़ी जानकारी का खुलासा होने वाला है। इसके साथ ही एक ऐसी बटालियन का जिक्र किया गया है, जो अकेले लड़ती है। इस संदेश ने फिल्म की कहानी और प्रभास के किरदार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पोस्टर में इस्तेमाल किए गए सैन्य रूप, पुराने जमाने की झलक और आग से जुड़े दृश्यों ने फिल्म के ऐतिहासिक एक्शन वाले स्वरूप को रेखांकित किया है। हालांकि, फाइल नंबर 025 के पीछे क्या रहस्य है और अकेले लड़ने वाली बटालियन का कहानी में क्या महत्व होगा, इसकी पूरी जानकारी पोस्टर में नहीं दी गई है। फिल्म की टीम ने वीडियो के माध्यम से किरदार से जुड़ा खुलासा करने का संकेत दिया है। ऐसे में दर्शकों की नजर अब अगले अपडेट पर टिकी हुई है।

    प्रभास के जन्मदिन पर जारी इस पोस्टर को लेकर उनके प्रशंसकों में उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा होने के बाद उनके नए लुक और फिल्म से जुड़ी जानकारी पर चर्चा शुरू हो गई है। प्रशंसक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि ‘फौजी’ में अभिनेता किस तरह की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म में उनके किरदार की पहचान और कहानी के प्रमुख पहलुओं को लेकर अभी और जानकारी सामने आना बाकी है।

    ‘फौजी’ का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण माइथ्री मूवी मेकर्स ने किया है, जबकि टी-सीरीज फिल्म्स इसे प्रस्तुत कर रहा है। इस परियोजना से नवीन येरनेनी, वाई रवि शंकर और भूषण कुमार निर्माता के रूप में जुड़े हैं। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया जा रहा है। प्रभास के लुक और पोस्टर की बनावट से फिल्म के सैन्य परिवेश की झलक मिलती है, हालांकि इसकी कहानी के विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आए हैं।

    फिल्म की रिलीज तारीख तीन दिसंबर 2026 बताई गई है। इसे दुनिया भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की योजना है। जन्मदिन पर पोस्टर जारी कर निर्माताओं ने फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। अब दर्शकों को इसके अगले वीडियो अपडेट, प्रभास के किरदार के खुलासे और कहानी से जुड़ी अन्य जानकारियों का इंतजार है। फिल्म की रिलीज में अभी समय है, इसलिए आने वाले प्रचार अभियान के दौरान इसके कथानक और अन्य पहलुओं पर और जानकारी मिलने की संभावना है।

  • रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को जिस तरह दिखाए जाने की बात सामने आई है, उस पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि फिल्म की प्रचार सामग्री मेडिकल पेशे की छवि को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में आईएमए ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म के प्रचार से जुड़ी सामग्री की समीक्षा कराने की मांग की है।

    आईएमए के मुताबिक, फिल्म में चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे पूरे मेडिकल पेशे के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक धारणा बन सकती है। संगठन को आशंका है कि ऐसी प्रस्तुति डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिष्ठा, सुरक्षा तथा जनता के भरोसे पर असर डाल सकती है। इसी वजह से एसोसिएशन चाहता है कि फिल्म की रिलीज से पहले संबंधित सामग्री की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

    संगठन ने अपने पत्र में चार प्रमुख चिंताओं को सामने रखा है। पहली चिंता चिकित्सा पेशे को अनुचित रूप से बदनाम किए जाने और उसकी साख को नुकसान पहुंचने की है। दूसरी चिंता फिल्म में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा दिखाए जाने से जुड़ी है। तीसरा मुद्दा डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का है। वहीं, चौथी चिंता डॉक्टरों और मरीजों के बीच लंबे समय से बने भरोसे पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है।

    आईएमए का कहना है कि यदि प्रचार सामग्री के जरिए भ्रष्टाचार को पूरे चिकित्सा क्षेत्र की सामान्य स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे लोगों की धारणा प्रभावित हो सकती है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हिंसा को दिखाने के संभावित प्रभावों पर ध्यान देना जरूरी है। उसके अनुसार, चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लोगों की सुरक्षा और मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

    मेडिकल संगठन ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के चित्रण के साथ-साथ उसके प्रचार से जुड़ी सामग्री की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आईएमए ने यह भी कहा है कि यदि समीक्षा के दौरान उसकी आशंकाएं सही पाई जाती हैं, तो फिल्म निर्माताओं से आवश्यक बदलाव कराने पर विचार किया जाना चाहिए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगठन ने समीक्षा की मांग उठाई है। फिल्म में बदलाव को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म का टीजर 19 अक्टूबर को सनी देओल के 69वें जन्मदिन के अवसर पर जारी किया गया था। इसमें अभिनेता एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी में उनकी जिंदगी बेटी की मौत के बाद बदल जाती है। इसके बाद वह मामले की जांच शुरू करते हैं और इस प्रक्रिया में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं। कहानी का यही पहलू चिकित्सा पेशे के चित्रण को लेकर उठे विवाद के केंद्र में है।

    ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। फिल्म का निर्माण दीपक मुकुत, हेमंत मुकुत और लोकेश मुकुत ने किया है। यह वर्ष 2018 में आई मलयालम क्राइम थ्रिलर ‘जोसेफ’ का हिंदी रूपांतरण है, जिसकी कहानी शाही कबीर ने लिखी थी। फिल्म को वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया जा रहा है। इसमें सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 20 नवंबर 2026 है। अब देखना होगा कि आईएमए की मांग पर क्या कदम उठाए जाते हैं और विवाद का फिल्म की रिलीज से पहले क्या असर पड़ता है।

  • हॉरर, रोमांस और थ्रिलर का धमाका! 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होंगी 7 फिल्में, जानें पूरी लिस्ट

    हॉरर, रोमांस और थ्रिलर का धमाका! 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होंगी 7 फिल्में, जानें पूरी लिस्ट

    नई दिल्ली । बड़े पर्दे पर फिल्में देखने के शौकीन दर्शकों के लिए अक्टूबर का यह सप्ताह मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में अलग-अलग विषयों और शैलियों की कई फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। इनमें साइकोलॉजिकल थ्रिलर, रोमांटिक कहानी, एक्शन, साइंस-फिक्शन और कॉमेडी का मिश्रण देखने को मिलेगा। हिंदी फिल्मों के साथ हॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा की फिल्में भी दर्शकों के सामने होंगी। इस सप्ताह रिलीज होने वाली फिल्मों में 418, तू है मेरी किरण, उड़ता तीर, तुम मेरे हो, होप, पहला प्यार दूसरी बार और धूड़ शामिल हैं।

    418

    23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म 418 एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। इसकी कहानी 15 साल से बंद पड़े एक मेडिकल कॉलेज और उसके कमरा नंबर 418 के रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है। इस कमरे से जुड़े रहस्य लंबे समय से अनसुलझे हैं। फिल्म में डर और रोमांच के साथ विज्ञान तथा अंधविश्वास के बीच टकराव को दिखाया गया है। फिल्म को ए प्रमाणपत्र मिला है, इसलिए यह वयस्क दर्शकों के लिए निर्धारित है।

    तू है मेरी किरण

    सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म तू है मेरी किरण रोमांस और साइकोलॉजिकल थ्रिलर का मेल है। कहानी प्यार और जुनून के बीच की महीन रेखा को सामने लाती है। शुरुआत में लड़की की ओर से सामान्य रिश्ते के रूप में शुरू होने वाला जुड़ाव धीरे-धीरे खतरनाक जुनून में बदलने लगता है। फिल्म में रिश्तों की जटिलता और प्यार के बदलते स्वरूप को प्रमुखता दी गई है।

    उड़ता तीर

    आयुष्मान खुराना और सारा अली खान अभिनीत उड़ता तीर भी 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। इसकी कहानी एक पाकिस्तानी जासूस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत आने के बाद अपनी याददाश्त खो बैठता है। इसके बाद वह खुद को देशभक्त भारतीय समझने लगता है और भारतीय आतंकवाद-रोधी दस्ते का अधिकारी मानने लगता है। कहानी में उसकी पहचान, याददाश्त और परिस्थितियों से पैदा होने वाले घटनाक्रम देखने को मिलेंगे।

    तुम मेरे हो

    गुरमीत चौधरी और ईशा मालवीय की मुख्य भूमिकाओं वाली तुम मेरे हो प्यार और मुश्किल परिस्थितियों पर आधारित कहानी है। इस फिल्म के जरिए ईशा मालवीय बॉलीवुड में कदम रख रही हैं। कहानी में दो प्रेमियों के रिश्ते को कई खतरों, उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित मोड़ों से गुजरते हुए दिखाया गया है। दोनों अपने रिश्ते को बचाए रखने के लिए कठिन हालात का सामना करते हैं। फिल्म में रोमांस के साथ एक्शन और भावनात्मक घटनाक्रम भी शामिल हैं।

    होप

    हॉलीवुड फिल्म होप साइंस-फिक्शन और सर्वाइवल थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए खास हो सकती है। इसकी कहानी उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा के पास स्थित एक छोटे गांव में सामने आने वाली रहस्यमयी घटनाओं पर आधारित है। गांव में अचानक जानवरों के शव मिलने लगते हैं। इसके बाद पुलिस प्रमुख और कुछ शिकारी जंगलों में छिपे खतरनाक एलियन का सामना करते हैं। उन्हें अपनी जान बचाने के साथ उस रहस्यमयी जीव को खत्म करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

    पहला प्यार दूसरी बार

    पहला प्यार दूसरी बार दोस्तों की मस्ती, छुट्टियों और स्कूल रीयूनियन पर आधारित फिल्म है। इसकी कहानी छह पक्के दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी छुट्टियां और मुलाकात कई मजेदार घटनाओं का कारण बनती हैं। गलतफहमियों और उलझनों के बीच कहानी आगे बढ़ती है। दोस्तों के साथ हल्की-फुल्की और मनोरंजक फिल्म देखने की इच्छा रखने वाले दर्शकों के लिए यह विकल्प हो सकती है।

    धूड़

    धूड़ राजस्थानी सिनेमा से जुड़ी फिल्म है, जिसका नाम रेत के तूफान के अर्थ को दर्शाता है। फिल्म में राजस्थान की रेतीली जमीन, समृद्ध संस्कृति और स्थानीय लोगों के संघर्ष को एक परिवार की कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसे देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली राजस्थानी फिल्मों में एक खास उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है। इस तरह 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली ये सात फिल्में अलग-अलग पसंद वाले दर्शकों को मनोरंजन के विविध विकल्प देंगी।

  • देवरहा बाबा के जीवन पर बनेगी फिल्म ‘मचान बाबा’, जॉर्ज पंचम, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी मुलाकातों पर भी होगा फोकस

    देवरहा बाबा के जीवन पर बनेगी फिल्म ‘मचान बाबा’, जॉर्ज पंचम, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी मुलाकातों पर भी होगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रसिद्ध संत देवरहा बाबा के जीवन और उनसे जुड़े रहस्यमयी प्रसंगों को अब बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी है। उनके जीवन, अनूठी जीवनशैली और देश-विदेश की प्रमुख हस्तियों से जुड़ी मुलाकातों पर आधारित फिल्म ‘मचान बाबा’ का आधिकारिक टाइटल पोस्टर जारी कर दिया गया है। फिल्म का उद्देश्य संत के जीवन के विभिन्न पहलुओं को शोध के आधार पर दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना है। इससे पहले नीब करौरी बाबा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मिली सफलता के बाद अब देवरहा बाबा की कहानी को फिल्म के माध्यम से सामने लाने की तैयारी की गई है।

    ‘मचान बाबा’ का निर्माण ओजस फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। यह कंपनी सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली ओजस सॉफ्टेक की फिल्म और कंटेंट इकाई है। इस परियोजना को ब्रिटेन में स्थापित भारतीय मूल की कारोबारी पूनम गुप्ता और अमेरिका में रहने वाले उद्यमी विकल्प पालीवाल मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। निर्माताओं के अनुसार, इसकी कहानी में संत के जीवन से जुड़े प्रसंगों को विस्तार से शामिल किया जाएगा।

    फिल्म की खास बात देवरहा बाबा की जीवनशैली और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों पर किया जा रहा शोध है। देवरहा बाबा पेड़ या बांस से बने मचान पर रहने के अपने अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते थे। फिल्म में उनकी रहस्यमयी आयु और जीवन से जुड़े पहलुओं को भी दिखाने की तैयारी है। निर्माताओं के अनुसार, इन विषयों को प्रस्तुत करने के लिए शोध किया जा रहा है, ताकि कहानी में संत के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं को शामिल किया जा सके।

    शोध के दायरे में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों के प्रसंग भी शामिल हैं। इन प्रमुख हस्तियों के साथ देवरहा बाबा के संबंधों और मुलाकातों को फिल्म में जगह देने की योजना है। इसके अलावा, नीब करौरी बाबा और देवरहा बाबा के बीच आत्मीयता तथा आपसी सम्मान से जुड़े प्रसंगों पर भी काम किया जा रहा है। इस तरह फिल्म में संत के आध्यात्मिक जीवन के साथ उन ऐतिहासिक संदर्भों को भी प्रस्तुत करने का प्रयास होगा, जो उनके जीवन से जुड़े बताए जाते हैं।

    निर्माताओं ने कहा है कि ‘मचान बाबा’ केवल चमत्कारों या अंधविश्वास पर केंद्रित फिल्म नहीं होगी। इसे भारतीय आस्था, समृद्ध इतिहास, राजनीति और संत जीवन से जुड़े गूढ़ पहलुओं को सामने लाने वाली कहानी के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिल्म में इन विषयों को प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, फिल्म में शामिल किए जाने वाले सभी प्रसंगों और उन्हें पर्दे पर दिखाने के तरीके के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म को वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। टाइटल पोस्टर जारी होने के साथ इस परियोजना की औपचारिक घोषणा हो गई है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि देवरहा बाबा के जीवन से जुड़े आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रसंगों को फिल्म किस रूप में पेश करती है। निर्माताओं के लिए इस संत के जीवन की विशिष्टताओं को शोध के साथ पर्दे पर उतारना परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

  • नानी ने बताया बेटे अर्जुन का उनकी फिल्मों के चुनाव पर कितना असर, ‘द पैराडाइज’ को लेकर भी किया खुलासा

    नानी ने बताया बेटे अर्जुन का उनकी फिल्मों के चुनाव पर कितना असर, ‘द पैराडाइज’ को लेकर भी किया खुलासा


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के अभिनेता नानी इन दिनों अपनी फिल्म ‘द पैराडाइज’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उन्होंने पहले से अलग और ज्यादा इंटेंस अंदाज में किरदार निभाया है। इसी बीच एक प्रमोशनल बातचीत में नानी ने अपने करियर, फिल्मों के चुनाव और बेटे अर्जुन के उनकी पसंद पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में खुलकर बात की। अभिनेता ने बताया कि पिता बनने के बाद फिल्मों को लेकर उनका नजरिया पहले की तुलना में काफी बदला है।

    नानी लंबे समय से अलग-अलग तरह के किरदारों और पारिवारिक दर्शकों के बीच लोकप्रिय फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने करियर में लगातार अलग तरह के प्रयोग भी किए हैं। साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘वी’ में उन्होंने सीरियल किलर का किरदार निभाकर अपनी सामान्य छवि से हटकर भूमिका निभाई थी। इसके बाद भी वह एक्शन और गंभीर विषयों वाली फिल्मों का हिस्सा बने।

    फिल्मों के चुनाव पर बात करते हुए नानी ने बताया कि उनके बेटे अर्जुन के बड़े होने का असर भी उनके फैसलों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब वह इस बात के बारे में सोचते हैं कि जब उनका बेटा बड़ा होकर उनकी फिल्में देखेगा, तब वह उन दृश्यों को किस नजर से देखेगा। अभिनेता के मुताबिक, वह ऐसा कोई मौका नहीं चाहते जब उनका बेटा उनकी फिल्म देखते हुए असहज महसूस करे और उन्हें खुद भी उस स्थिति में शर्मिंदगी महसूस हो।

    नानी ने मजाकिया अंदाज में यह सवाल भी रखा कि जब उनका बेटा 15 साल का होगा और उनकी फिल्म देखेगा, तब क्या उन्हें कुछ दृश्यों के दौरान चैनल बदलना पड़ेगा। उन्होंने माना कि बेटे के जीवन में आने के बाद उनकी फिल्में चुनने की प्रक्रिया पर सकारात्मक असर पड़ा है। अब किसी प्रोजेक्ट को स्वीकार करते समय वह उसके कंटेंट और परिवार के नजरिए से भी विचार करते हैं।

    हालांकि, नानी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह सिर्फ पारिवारिक फिल्मों तक सीमित रहना चाहते हैं। ‘द पैराडाइज’ जैसी फिल्म में उन्होंने एक्शन और इंटेंसिटी से भरी भूमिका निभाई है। फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला है, इसलिए उनका बेटा अभी इसे नहीं देख सकता।

    नानी ने बताया कि उनका बेटा उनसे पूछ चुका है कि क्या वह ‘द पैराडाइज’ देख सकता है। अभिनेता ने उसे समझाया कि फिल्म रिलीज होते ही इसे देखना संभव नहीं है। जब उन्हें लगेगा कि अर्जुन इस तरह की फिल्म देखने के लिए सही उम्र और मानसिक तैयारी में है, तब वह इसे देख सकेगा।

    जब नानी से पूछा गया कि इस तरह की इंटेंस फिल्में करने से क्या वह पारिवारिक दर्शकों से दूर हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर अलग-अलग तरह के जॉनर और किरदारों को तलाशना जरूरी है। उनके अनुसार, कुछ कहानियों और किरदारों को खास तरह की तीव्रता और प्रदर्शन की जरूरत होती है और कलाकार के लिए ऐसे अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं।

    ‘द पैराडाइज’ का निर्देशन श्रीकांत ओडेला ने किया है। फिल्म में नानी के साथ राघव जुयाल, मोहनलाल, सोनाली बेंद्रे और संपत राज अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को कई भाषाओं में रिलीज किया गया है और इसका संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने तैयार किया है। नानी के लिए यह फिल्म उनके करियर में एक और अलग तरह का प्रयोग मानी जा रही है।

  • अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व की एक खास बात बताई है। उन्होंने कहा कि शाहरुख किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते और मुश्किल समय में भी सामने वाले का आत्मविश्वास बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। दोनों कलाकारों ने कई फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी जोड़ी को दर्शकों ने अलग-अलग भूमिकाओं में देखा है।

    अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान ने ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मोहब्बतें’, ‘वीर जारा’, ‘भूतनाथ’ और ‘कभी अलविदा ना कहना’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर अमिताभ ने शाहरुख के स्वभाव को लेकर अपनी बात रखी।

    यह बातचीत उस समय हुई जब अभिनेता राजकुमार राव एक फिल्म के प्रचार के लिए अमिताभ बच्चन के शो में पहुंचे थे। उनके साथ अभिनेत्री वामिका गब्बी भी मौजूद थीं। बातचीत के दौरान राजकुमार राव ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्मी यात्रा ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    राजकुमार ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अभिनेता बनने का फैसला कर लिया था। उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि उनके घर में अमिताभ का पोस्टर तक मौजूद था। इसके साथ ही उन्होंने शाहरुख खान की यात्रा से भी प्रभावित होने की बात कही।

    राजकुमार के अनुसार, शाहरुख की कहानी उन्हें इसलिए प्रेरित करती थी क्योंकि वह दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर थिएटर और छोटे-छोटे कार्यक्रमों से होते हुए हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे बने। राजकुमार ने अपने शुरुआती मुंबई प्रवास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार एक शो के सिलसिले में मुंबई पहुंचे थे, तब उनका चयन नहीं हुआ था। उस दौर में वह शाहरुख के बंगले के बाहर तक खड़े रहते थे।

    राजकुमार की बात सुनने के बाद अमिताभ बच्चन ने शाहरुख के साथ काम करने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शाहरुख ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी भी बात पर आसानी से हार नहीं मानते। उनके मुताबिक, किसी भी समस्या का सामना होने पर शाहरुख अपने व्यवहार से सामने वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

    इस दौरान राजकुमार राव की आगामी फिल्म ‘प्रहार’ की भी चर्चा हुई। यह फिल्म सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित बताई गई है। फिल्म के ट्रेलर में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े मामले और अजमल कसाब के मुकदमे को भी दिखाया गया है।

    वहीं अमिताभ बच्चन के आगामी प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह ‘कल्कि 2898 एडी’ और ‘सेक्शन 84’ से जुड़े हैं। ‘कल्कि 2898 एडी’ में उनके साथ प्रभास और कमल हासन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। दूसरी ओर ‘सेक्शन 84’ में अमिताभ के साथ निमृत कौर और अभिषेक बनर्जी नजर आएंगे।

    अमिताभ और शाहरुख की फिल्मों में साथ दिखाई देने की यात्रा के साथ अब उनके पुराने अनुभवों से जुड़े किस्से भी चर्चा में बने रहते हैं। इस बातचीत में अमिताभ की कही बात ने शाहरुख के काम करने के तरीके और संघर्ष के दौरान उनके रवैये की एक झलक पेश की।

  • नानी की द पैराडाइज ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर पकड़ी रफ्तार, 3:30 बजे तक 19.56 करोड़ रुपये का कलेक्शन

    नानी की द पैराडाइज ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर पकड़ी रफ्तार, 3:30 बजे तक 19.56 करोड़ रुपये का कलेक्शन

    नई दिल्ली ।नानी और राघव जुयाल की एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘द पैराडाइज’ 24 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। रिलीज के पहले ही दिन फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलता दिखाई दे रहा है और शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़ों में तेज कमाई दर्ज की गई है। फिल्म ने दोपहर तक अलग-अलग भाषाओं में करोड़ों रुपये का कलेक्शन कर लिया था।

    शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, ‘द पैराडाइज’ ने रिलीज के दिन दोपहर 2 बजे तक तेलुगु भाषा में 17.77 करोड़ रुपये की कमाई की। इस दौरान तेलुगु वर्जन की ऑक्यूपेंसी 58 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं हिंदी भाषा में फिल्म ने 1.11 करोड़ रुपये और तमिल भाषा में 0.68 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।

    इसके बाद शाम 3:30 बजे तक फिल्म का कुल कलेक्शन बढ़कर 19.56 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस समय तक फिल्म की कुल ऑक्यूपेंसी 46.8 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, ये आंकड़े दिन के अंतिम आंकड़े नहीं हैं। पहले दिन की पूरी कमाई का अंतिम आंकड़ा रात 10:30 बजे के बाद सामने आने की उम्मीद है।

    फिल्म की रिलीज से पहले भी इसकी कमाई को लेकर मजबूत शुरुआत देखने को मिली थी। नियमित मॉर्निंग शो शुरू होने से पहले ही एडवांस बुकिंग और पेड प्रीमियर शो के जरिए फिल्म ने दुनिया भर में 40 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया था। इस आधार पर यह नानी के करियर की एडवांस बुकिंग के लिहाज से सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्मों में शामिल हो गई।

    फिल्म ने नानी की पिछली बड़ी ओपनिंग फिल्म ‘HIT: द थर्ड केस’ के शुरुआती प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया। साल 2025 में रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले दिन दुनिया भर में 37.80 करोड़ रुपये की कमाई की थी। ‘द पैराडाइज’ की प्री-रिलीज कमाई ने रिलीज से पहले ही इसके प्रति दर्शकों की दिलचस्पी को सामने रखा था।

    ‘द पैराडाइज’ नानी और निर्देशक श्रीकांत ओडेला की दूसरी साथ काम करने वाली फिल्म है। इससे पहले दोनों ‘दसारा’ में साथ काम कर चुके हैं। नई फिल्म की कहानी 1980 के दशक के सिकंदराबाद की पृष्ठभूमि में रखी गई है। इसमें एक हाशिए पर रहने वाले समुदाय के संघर्ष को दिखाया गया है, जो भेदभाव का सामना करते हुए एक व्यक्ति के नेतृत्व में नागरिकता हासिल करने की कोशिश करता है।

    फिल्म में नानी मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ राघव जुयाल, सोनाली कुलकर्णी और कायादु लोहार भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। ‘द पैराडाइज’ तमिल, तेलुगु और हिंदी समेत कुल आठ भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है। इसकी अवधि करीब 2 घंटे 54 मिनट बताई गई है।

  • साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का आदान-प्रदान लंबे समय से देखने को मिलता रहा है। हिंदी फिल्मों के कई कलाकार दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। खास तौर पर पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड सितारों के साउथ फिल्मों में खलनायक के किरदार निभाने का चलन तेजी से बढ़ा है। अब इस सूची में अभिनेता और डांसर राघव जुयाल का नाम भी जुड़ गया है।

    राघव जुयाल साउथ की चर्चित फिल्म ‘द पैराडाइज’ में खलनायक की भूमिका में दिखाई देंगे। नानी अभिनीत इस फिल्म में राघव के किरदार को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है। बताया गया है कि वह फिल्म में विक्रम मालिक नाम के मुख्य खलनायक का किरदार निभा रहे हैं। उनका यह किरदार पहले निभाई गई भूमिकाओं से अलग और अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आने वाला है।

    राघव ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘सोनाली केबल’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में काम किया। अब साउथ सिनेमा में उनकी एंट्री बतौर विलेन हुई है। ‘द पैराडाइज’ में उनकी भूमिका फिल्म की कहानी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्होंने ‘साहो’ में रॉय का किरदार निभाया था। इसके बाद वह रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ में वर्मन के रूप में नजर आए। दोनों फिल्मों में उनके किरदारों का अंदाज हिंदी फिल्मों में निभाई गई उनकी पारंपरिक भूमिकाओं से अलग रहा।

    बॉबी देओल ने भी साउथ सिनेमा में खलनायक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सूर्या की फिल्म ‘कंगुवा’ में उधीरन की भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ में महादेव के किरदार में दिखाई दिए। साउथ की फिल्मों में बॉबी के नकारात्मक किरदारों ने उनके अभिनय के एक अलग पक्ष को दर्शकों के सामने रखा।

    संजय दत्त भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभा चुके हैं। यश अभिनीत ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में उन्होंने अधीरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका लुक और किरदार काफी अलग अंदाज में पेश किया गया था। यह फिल्म व्यावसायिक रूप से भी बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही।

    इमरान हाशमी का नाम भी इस सूची में शामिल है। उन्होंने पवन कल्याण की फिल्म ‘दे कॉल हिम ओजी’ में ओमी भाई नाम के खलनायक की भूमिका निभाई। इस फिल्म के जरिए इमरान ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग मौजूदगी दर्ज कराई। उनके किरदार को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा रही।

    सैफ अली खान ने भी साउथ फिल्म ‘देवरा पार्ट 1’ में नकारात्मक भूमिका निभाई। उन्होंने फिल्म में भैरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ जूनियर एनटीआर और जान्हवी कपूर नजर आए थे। सैफ का यह किरदार भी उनके अब तक के कई हिंदी फिल्म किरदारों से अलग था।

    इस तरह राघव जुयाल के ‘द पैराडाइज’ में खलनायक बनने के साथ बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का यह सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। अलग-अलग भाषाओं और फिल्म उद्योगों के कलाकारों के साथ आने से दर्शकों को भी नए तरह के किरदार और अभिनय देखने को मिल रहे हैं।

  • 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किसने जीते बड़े सम्मान, यामी गौतम से ममूटी तक इन सितारों का रहा जलवा

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किसने जीते बड़े सम्मान, यामी गौतम से ममूटी तक इन सितारों का रहा जलवा

    नई दिल्ली । गुजरात के एकता नगर में मंगलवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 2024 के लिए भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी प्रतिभाओं को इस समारोह में सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

    इस अवसर पर भारतीय सिनेमा की उपलब्धियों के साथ फिल्म कलाकारों और पूरी फिल्म इंडस्ट्री की सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में लोकप्रिय कलाकारों के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि खासकर बच्चों और युवाओं पर फिल्म सितारों की बातों और व्यवहार का गहरा असर पड़ता है।

    राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों से ऐसे उत्पादों के प्रचार से बचने की अपील की, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफल कलाकार जब स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली के फायदे बताते हैं, तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उनके मुताबिक सच्चा सितारा वही है जो समाज में सकारात्मक रोशनी फैलाए। राष्ट्रपति ने किसी विशेष कलाकार या ब्रांड का नाम नहीं लिया, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री से अपने प्रभाव का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने का आग्रह किया।

    समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर की प्रत्येक जूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके अनुसार निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं के दृष्टिकोण को शामिल करने से उसका दायरा और व्यापक हो सकता है।

    राष्ट्रपति ने सिनेमा के पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने छोटे कलाकारों, सहायकों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों के सम्मान तथा सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण केवल पर्दे पर दिखाई देने वाले कलाकारों की मेहनत से संभव नहीं होता, बल्कि बड़ी संख्या में लोग इसमें योगदान देते हैं।

    पुरस्कारों की बात करें तो ‘आर्टिकल 370’ को वर्ष 2024 के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया। इसी फिल्म में अभिनय के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति के साथ यामी के अभिनय को भी इस सम्मान के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में ममूटी और कार्तिक आर्यन को सम्मानित किया गया। ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए जबकि कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। दोनों कलाकारों को मुख्य भूमिका में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

    समारोह में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान वर्ष 2024 के लिए प्रदान किया गया।

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का समापन ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ हुआ। समारोह में पुरस्कारों के साथ भारतीय सिनेमा की विविधता, कलाकारों की भूमिका और फिल्म निर्माण से जुड़े हर व्यक्ति के योगदान को भी प्रमुखता दी गई।

  • पांच बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं शबाना आजमी, कभी 30 रुपये में बेचती थीं कॉफी

    पांच बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं शबाना आजमी, कभी 30 रुपये में बेचती थीं कॉफी

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा में शबाना आजमी का नाम दमदार अभिनय और शानदार फिल्मी सफर के लिए जाना जाता है। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना शामिल है। यह उपलब्धि उन्हें अलग पहचान देती है। उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और हर बार अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी।

    शबाना आजमी ने जिन फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया, उनमें ‘अंकुर’, ‘अर्थ’, ‘खंडहर’, ‘पार’ और ‘गॉडमदर’ शामिल हैं। उनकी पहली ही फिल्म ‘अंकुर’ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद उनके अभिनय का सिलसिला लगातार मजबूत होता गया।

    वर्ष 1974 में रिलीज हुई ‘अंकुर’ से शबाना ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। फिल्म में उन्होंने एक ग्रामीण महिला की भूमिका निभाई थी। अपने शुरुआती ही काम में उन्होंने किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया और इसी फिल्म के लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

    इसके बाद ‘अर्थ’ में उन्होंने शादीशुदा जिंदगी से जुड़े भावनात्मक संघर्षों को पर्दे पर उतारा। इस भूमिका के लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अगले वर्ष ‘खंडहर’ में उनके गंभीर अभिनय को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।

    ‘पार’ में निभाया गया रामा का किरदार उनके पुरस्कारों की सूची में चौथी उपलब्धि लेकर आया। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद 1998 में आई ‘गॉडमदर’ में उन्होंने रामबाई का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और उन्हें पांचवीं बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

    शबाना आजमी का सफर इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनके शुरुआती जीवन में मेहनत और आत्मनिर्भरता का अनुभव रहा। वह प्रसिद्ध कवि कैफी आजमी और रंगमंच से जुड़ी शौकत आजमी की बेटी हैं। कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए काम किया था।

    बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई के एक पेट्रोल पंप पर कॉफी प्रमोटर के तौर पर काम किया। वहां वह आने वाले लोगों को कॉफी बेचती थीं और इस काम के बदले उन्हें रोजाना 30 रुपये मिलते थे। उस दौर का यह अनुभव उनके जीवन के संघर्ष और मेहनत से जुड़े अध्यायों में शामिल है।

    अभिनय को पेशे के तौर पर चुनने के लिए शबाना ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से प्रशिक्षण लिया। वहां उन्होंने अभिनय का कोर्स किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद ‘अंकुर’ से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई और उन्होंने जल्द ही गंभीर भूमिकाओं के लिए अपनी अलग पहचान बना ली।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा शबाना आजमी को भारत सरकार की ओर से पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। उनका करियर कई दशकों में फैला हुआ है और उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ रंगमंच में भी काम किया है।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार की बात करें तो शबाना आजमी की पांच जीत एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड है। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन और ममूटी चार-चार बार यह सम्मान हासिल कर चुके हैं। शबाना की उपलब्धियां उनके लंबे और विविधतापूर्ण फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।