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  • SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं

    SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर धोखाधड़ी (Cyber ​​fraud) के मामलों में यदि वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) की लापरवाही सामने आती है तो पीड़ितों के नुकसान की भरपाई बैंकों को ही करनी होगी। ऐसे मामलों में बैंकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसे कड़े निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत बैंक अधिकारियों की चूक से हुई ठगी में बैंक पीड़ितों को गंवाई गई रकम के बराबर मुआवजा दें और उन पर मुकदमा भी चलाया जाए। अदालत ने जोर देकर कहा कि बैंकों को संभावित शिकार बन सकने वाले खाताधारकों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से तीखा सवाल किया कि किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति के खाते से असामान्य रूप से भारी रकम निकाले जाने पर समय रहते लेन-देन क्यों नहीं रोका जाता?


    रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा

    पीठ ने कहा कि घटना के बाद रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा है। रोकथाम का क्या? जैसे ही संदिग्ध लेन-देन दिखे, उसे फौरन रोका क्यों नहीं जाता? मुख्य न्यायाधीश ने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह की धोखाधड़ी के कई मामलों में बैंक अधिकारियों की कथित संलिप्तता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।


    केवाईसी के नियमों में संशोधनों की समीक्षा होगी

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रस्तावित ‘अपने ग्राहक को जानिए’ (केवाईसी) संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करेगी, जिसके 30 नवंबर तक अधिसूचित और 31 दिसंबर तक लागू होने की उम्मीद है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस नियामक ढांचे में डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को हर्जाना देने का ठोस प्रावधान होना चाहिए। पीठ ने माना कि बैंकों की जवाबदेही तय करने के साथ ‘म्यूल अकाउंट्स’ (ऐसे फर्जी खाते जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने के लिए किया जाता है) पर नकेल कसना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


    मामले घटे, फिर भी हर साल अरबों की चपत

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि अदालती हस्तक्षेप, मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों और जन-जागरूकता से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। इस पर सीजेआई ने ध्यान दिलाया कि इसके बावजूद इस साल देश को लगभग 800 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।नागरिकों के लगातार ठगी का शिकार होने पर हैरानी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि व्यापक अभियानों, मीडिया रिपोर्टों और अदालती आदेशों के बाद भी पढ़े-लिखे लोग जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की कि एक लोकतांत्रिक देश में कोई नागरिक यह कैसे मान लेता है कि उसे मोबाइल पर गिरफ्तार किया जा रहा है? मोबाइल को दीवार पर दे मारिए, गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी।


    सीधी देनदारी तय करने का विरोध जताया

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने न्यायिक निर्देशों के जरिए बैंकों पर सीधी देनदारी तय करने का विरोध किया और दलील दी कि यह विषय नियामक के रूप में आरबीआई के दायरे में आता है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत वित्तीय संस्थानों पर कड़े नियम लागू कर सकती है और इसके लिए प्रत्येक बैंक को अलग से पक्षकार बनाने की आवश्यकता नहीं है।

  • ट्रेन के टॉयलेट में पानी नहीं मिलने से बीच सफर उतर गया परिवार, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया 16 हजार रुपये का भुगतान

    ट्रेन के टॉयलेट में पानी नहीं मिलने से बीच सफर उतर गया परिवार, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया 16 हजार रुपये का भुगतान

    नई दिल्ली । ट्रेन में बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। कर्नाटक में एक परिवार को यात्रा के दौरान शौचालयों में पानी नहीं मिलने के कारण अपना सफर बीच में ही छोड़ना पड़ा। परिवार का आरोप था कि तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर मदद मांगने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद यात्रियों को दूसरी ट्रेन से आगे की यात्रा करनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त टिकट खरीदने पड़े। अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में रेलवे को मूल किराया ब्याज सहित लौटाने और मुआवजे के साथ मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।

    यह मामला ट्रेन नंबर 66575 से जुड़ा है। शिवमोगा के बसवनगुडी स्थित पीडब्ल्यूडी क्वार्टर्स में रहने वाले नागेंद्र अपने 23 परिवारजनों और रिश्तेदारों के साथ यशवंतपुर से शिवमोगा जा रहे थे। समूह में कुल 24 लोग शामिल थे। सभी यात्रियों ने यात्रा के लिए कुल 1,000 रुपये के जनरल टिकट खरीदे थे।

    यात्रा के दौरान परिवार के सदस्यों ने शिकायत की कि ट्रेन के शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं था। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से संपर्क कर सहायता मांगी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। समस्या दूर नहीं होने पर परिवार ने ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़ने का फैसला किया।

    दूसरी ट्रेन से आगे जाने के लिए परिवार को नए टिकट खरीदने पड़े। इस वजह से उन्हें 1,760 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। यात्रियों का कहना था कि यदि ट्रेन में जरूरी सुविधा उपलब्ध होती और समय पर सहायता मिल जाती, तो उन्हें बीच रास्ते में यात्रा बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस घटना के बाद नागेंद्र ने रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। हालांकि, नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने शिवमोगा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में ट्रेन के शौचालयों में पानी नहीं होने, स्टेशन पर मदद नहीं मिलने और दूसरी ट्रेन से यात्रा करने के कारण हुए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा उठाया गया।

    मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 23 अक्टूबर को अपना आदेश सुनाया। आयोग के अध्यक्ष टी. शिवन्ना और सदस्य बीडी योगानंद भंड्या की पीठ ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु और तुमकुरु स्टेशन मास्टरों को मूल टिकट किराया लौटाने का निर्देश दिया। आदेश के अनुसार, रेलवे को नागेंद्र को 1,000 रुपये का मूल किराया 15 अप्रैल 2025 से छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करना होगा।

    इसके अतिरिक्त, परिवार को हुई परेशानी के लिए 10,000 रुपये मुआवजा और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए 5,000 रुपये देने होंगे। इस प्रकार मूल किराये की वापसी, मुआवजे और कानूनी खर्च को मिलाकर रेलवे को कुल 16,000 रुपये का भुगतान करना होगा। मूल किराये पर निर्धारित ब्याज की राशि इसके अतिरिक्त होगी।

    आयोग ने भुगतान के लिए रेलवे को 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर देय राशि पर 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा, जो पूरा भुगतान होने तक लागू रहेगा। इस मामले में आयोग ने ट्रेन में पानी जैसी बुनियादी सुविधा की कमी और स्टेशन पर सहायता नहीं मिलने से यात्रियों को हुई परेशानी को सेवा में कमी के रूप में देखा।

  • कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती

    कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती


    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। उत्तर कोलकाता के मुक्तारामबाबू स्ट्रीट स्थित चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात हुए हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले कई पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से पंडाल बंद रखने की सलाह दी गई है।

    हादसे के समय बारिश हो रही थी। इसी दौरान पंडाल में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 19 में से 17 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घायलों में 24 लोगों की हालत खतरे से बाहर बताई गई, जबकि एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की बात कही है। प्रशासन हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहा है और शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    कोलकाता में दुर्गा पूजा के अवसर पर करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं। वहीं, पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 58,000 पूजा आयोजनों की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है। पुलिस कई पंडालों का निरीक्षण कर रही है और भीड़भाड़ वाले आयोजनों को आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

    हादसे के बाद कोलकाता के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू की गई है। यह प्रतिबंध 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक तीन दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। आदेश के तहत कोलकाता मेडिकल कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों सहित निर्धारित इलाकों में रैली, सभा, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने, शांति भंग होने और सुरक्षा संबंधी जोखिमों की आशंका को देखते हुए उठाया है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार सुबह घायलों से मिलने उस अस्पताल पहुंचे, जहां भगदड़ में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है। उनके साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इससे पहले शाह ने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। हादसे के बाद उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों में जाने का अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि मृतकों के 19 परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसके अलावा प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 13 पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

    मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी दुर्गा पूजा आयोजकों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने पर्याप्त रोशनी, प्रवेश और निकास के उचित रास्ते, भीड़ नियंत्रण तथा पुलिस और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हादसे के बाद प्रशासन का मुख्य ध्यान पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है।

  • कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया

    कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भोपाल और बैतूल जिले के निवासी मृतकों के परिवारों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने और उन्हें हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने को कहा है।

    यह हादसा 17 अक्टूबर की सुबह कोटा क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। श्रद्धालुओं से भरी एक मिनी बस अचानक चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई। इसके बाद बस सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरी। दुर्घटना में आठ लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव की कार्रवाई की गई तथा घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस में सवार लोग मध्य प्रदेश से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। बस में भोपाल के 21 लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई थी। इन यात्रियों में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल बताए गए। दुर्घटना के बाद यात्रियों और उनके परिजनों के बीच चिंता का माहौल बन गया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान और प्रभावित परिवारों से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई।

    कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने हादसे में आठ लोगों की मौत की पुष्टि की थी। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई की। बस के खाई में गिरने के कारण यात्रियों को नुकसान पहुंचा। हादसे के कारणों और परिस्थितियों से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के साथ ही प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में दिवंगत लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को सहायता देने के साथ हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भोपाल और बैतूल जिले के मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना भी की। उन्होंने शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की कामना की। इसके साथ ही दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

    इस हादसे ने धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त होने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता का उद्देश्य मृतकों के परिजनों को इस कठिन समय में राहत देना है। अधिकारियों को सहायता राशि उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को जरूरी सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई इस दुर्घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा और सड़क हादसों को रोकने के उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चालक का बस से नियंत्रण खोना दुर्घटना का तत्काल कारण बताया गया है, लेकिन हादसे से जुड़े अन्य कारणों के बारे में कोई विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। फिलहाल, आठ लोगों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

  • हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया

    हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया


    नई दिल्ली । पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पानीपत के सिवाह गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में जमीन मालिकों को राहत देते हुए अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। यह जमीन 25 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। पहले भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने इसका मुआवजा 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था।

    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। 28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को धारा छह के तहत अगली अधिसूचना जारी हुई। 26 सितंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    मुआवजे की इस राशि से असंतुष्ट जमीन मालिकों ने इसे बढ़ाने की मांग की और मामला अदालत तक पहुंचा। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इसके बाद भी मुआवजे को लेकर विवाद जारी रहा और मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट के सामने जमीन मालिकों और राज्य सरकार, दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलों के समर्थन में बिक्री विलेख पेश किए। जमीन मालिकों की ओर से वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई जमीन सौदों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक दर्ज थी।

    अदालत ने माना कि संबंधित अवधि के वास्तविक और तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध होने की स्थिति में पुराने अवार्ड को केवल उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू करना उचित नहीं है। जमीन का बाजार मूल्य तय करते समय आसपास की जमीन के वास्तविक लेन-देन, उनकी तुलना और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए कुछ बिक्री विलेखों में जमीन की कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ के बीच बताई गई थी। वहीं जमीन मालिकों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में इससे कहीं अधिक कीमत वाले सौदे सामने आए। अदालत ने उपलब्ध बिक्री विलेखों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद जमीन के उचित बाजार मूल्य का निर्धारण किया।

    अदालत ने अंततः अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया। इस तरह भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित 40 लाख रुपये प्रति एकड़ की राशि की तुलना में बाजार मूल्य में 38 लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी हुई।

    फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा तय करने के लिए किसी पुराने अवार्ड को हर मामले में सीधे आधार नहीं बनाया जा सकता। यदि संबंधित समय और क्षेत्र से जुड़े वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हैं, तो उनका उचित मूल्यांकन जरूरी है। इससे अधिग्रहित जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का अधिक उचित आकलन किया जा सकता है।

    इस फैसले के बाद सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन के लिए निर्धारित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गया है। मामला 25 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के उद्देश्य से की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा था।

  • नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद

    नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद


    नई दिल्ली। नेपाल में फ्लैश फ्लड से हुई भारी तबाही के बाद जलवायु संकट के लिए भारत, चीन और अमेरिका से मुआवजा देने की मांग को लेकर उठे विवाद पर भारत ने अपना रुख साफ किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने साझा चुनौती है और इससे निपटने की जिम्मेदारी भी इसी आधार पर तय होनी चाहिए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से मानना रहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े कदम ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए।

    नेपाल ने उठाया था ऐतिहासिक जिम्मेदारी का मुद्दा

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने फ्लैश फ्लड के बाद कहा था कि उनके देश का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग शून्य है, इसके बावजूद नेपाल को जलवायु संकट की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

    उन्होंने दुनिया के तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों—चीन, अमेरिका और भारत—से ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की अपील की थी। उनका कहना था कि इन देशों को नेपाल जैसे जलवायु संकट से प्रभावित और कमजोर देशों को मुआवजा देना चाहिए।

    नेपाल के विदेश मंत्री ने इसे किसी तरह की ‘दान’ की मांग नहीं, बल्कि इन देशों का कानूनी और नैतिक दायित्व बताया था।

    भारत बोला- विकसित देशों को आगे आना चाहिए

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को जलवायु संकट से प्रभावित विकासशील देशों की मदद में आगे आना चाहिए।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिन विकसित देशों का ऐतिहासिक उत्सर्जन सबसे ज्यादा रहा है और जिन्होंने जलवायु संकट को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है, उन्हें उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ विकासशील देशों को वित्तीय सहायता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए मदद करनी चाहिए।

    नेपाल ने बाद में दी थी सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्री ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया था। उन्होंने कहा था कि न तो उन्होंने और न ही नेपाल सरकार ने भारत, चीन या अमेरिका से विशेष रूप से मुआवजा मांगा है। उनकी अपील पूरी वैश्विक बिरादरी से थी कि जलवायु परिवर्तन के असर को गंभीरता से समझा जाए और प्रभावित देशों को लंबे समय तक सहयोग दिया जाए।

    त्रासदी में 1200 से ज्यादा मौतें

    नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल की सरकार और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय के मुताबिक, करीबी दोस्त और साझेदार होने के नाते भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया दी और नेपाल में राहत, रिकवरी तथा पुनर्निर्माण के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा।

  • उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    नई दिल्ली ।कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे के मामले की सुनवाई करते हुए ‘गृहिणी’ और ‘होममेकर’ शब्द की परिभाषा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपने घर पर परिवार के सदस्यों की सेवा और देखभाल करती है, तो उसे कानूनी व सामाजिक रूप से ‘गृहिणी’ ही माना जाएगा। इसके लिए महिला का अनपढ़ होना या केवल घर के कामों तक सीमित रहना बिल्कुल आवश्यक नहीं है, भले ही उसके पास उच्च शैक्षणिक डिग्री हो या वह कोई नौकरी करती हो।

    न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमलता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम से जुड़े एक दुर्घटना मुआवजे के मामले पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर एक महिला वर्ष 2013 में बस दुर्घटना के दौरान घायल हो गई थी। पीड़िता ने दुर्घटना के कारण हुए आर्थिक नुकसान और अपनी कार्यक्षमता प्रभावित होने का हवाला देते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। वहीं परिवहन निगम का तर्क था कि महिला की उच्च शिक्षा को देखते हुए उसे केवल एक सामान्य गृहिणी मानकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता।

    उच्च न्यायालय ने परिवहन निगम की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कोई महिला कितनी भी पढ़ी-लिखी हो या उसके पास डॉक्टरेट जैसी उच्च उपाधि ही क्यों न हो, यदि वह घर पर अपने परिवार की भलाई के लिए योगदान दे रही है, तो वह गृहिणी की श्रेणी में आती है। पीठ ने माना कि एक पेशेवर या कामकाजी महिला भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए गृहिणी की भूमिका निभाती है और उसके इस योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने गृहिणी शब्द के अर्थ को और अधिक विस्तार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति बिना थके परिवार के लिए मेहनत करता है, अपने आराम का त्याग करता है और एक खुशहाल घर का आधार बनता है, वह होममेकर है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यह अवधारणा केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो घर चलाने और परिवार के पोषण में योगदान देता है, वह इस परिभाषा के दायरे में आता है।

    इस मामले में अदालत ने महिला के चिकित्सकीय स्थिति और उपचार की अवधि का आकलन करते हुए माना कि चोटों के कारण पीड़िता को कम से कम तीन महीने तक पूर्ण विश्राम करना पड़ा। इस दौरान वह अपने परिवार की सेवा करने में असमर्थ रही, जो कि एक प्रत्यक्ष क्षति है। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए पीड़िता की काल्पनिक आय तय की और निचली अदालत द्वारा निर्धारित राशि के अतिरिक्त 1,96,800 रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश जारी किया।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच उच्च न्यायालय के इस फैसले की काफी सराहना हो रही है। इस निर्णय को महिलाओं द्वारा घर और परिवार के प्रति दिए जाने वाले अमूल्य और अनपेक्षित योगदान को कानूनी रूप से मान्यता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

  • कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की

    कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के चामराजनगर और मैसूर क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ कथित मुठभेड़ में तीन तमिल लोगों की मौत के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घटना को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक दलों और नेताओं ने सवाल उठाए हैं। मृतकों के परिवारों के लिए घोषित मुआवजे को बढ़ाने के साथ ही मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।

    बताया गया है कि वन क्षेत्र में तीन लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। इसमें तीनों लोगों की मौत हो गई। शुरुआती तौर पर उन्हें शिकारी होने के संदेह से जोड़ा गया। हालांकि घटना के बाद सामने आए आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने पूरे मामले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना के बाद चामराजनगर के हनूर क्षेत्र में मृतकों के परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले को लेकर तमिलनाडु में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हुई।

    तमिलनाडु के कई नेताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कर्नाटक सरकार से विस्तृत जांच कराने की मांग की है। कुछ नेताओं ने कथित मुठभेड़ को फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए मृतकों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

    तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए हत्या का मामला दर्ज करने और पारदर्शी तथा निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी।

    पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने भी मामले को लेकर कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए और केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों के लिए घोषित पांच लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार्य बताते हुए मामले में गंभीर जांच की जरूरत बताई। उनके अनुसार, घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आनी चाहिए और मृतकों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।

    दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विरोध बढ़ने के बाद मजिस्ट्रेट जांच का निर्णय भी लिया गया है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका क्या रही, जैसे सवालों का जवाब तलाशना है।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रही मांग है। एक तरफ वन विभाग की ओर से घटना को मुठभेड़ की परिस्थितियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिवार और राजनीतिक दल इसे गंभीर संदेह के साथ देख रहे हैं।

    अब निगाह मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीनों लोगों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी। फिलहाल मुआवजा बढ़ाने, जिम्मेदारी तय करने और स्वतंत्र जांच की मांग के कारण यह मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से “कवच” योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर पांच हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्य प्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है।

    उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

  • नेटफ्लिक्स पर टॉप ट्रेंड कर रही 'मुसाफिर कैफे', मुख्य किरदार 'चंदर' के लिए विक्रांत मैसी को मिली मोटी रकम

    नेटफ्लिक्स पर टॉप ट्रेंड कर रही 'मुसाफिर कैफे', मुख्य किरदार 'चंदर' के लिए विक्रांत मैसी को मिली मोटी रकम


    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई रोमांटिक ड्रामा सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। रिलीज होते ही यह सीरीज प्लेटफॉर्म की टॉप 10 ट्रेंडिंग लिस्ट में पहले स्थान पर काबिज हो चुकी है। मशहूर लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के इसी नाम से लिखे गए चर्चित उपन्यास पर आधारित इस सीरीज को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। रुचिर अरुण के निर्देशन में बनी इस सीरीज की कहानी, किरदारों की अदाकारी और इसकी स्टारकास्ट की फीस को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरीज में मुख्य किरदार ‘चंदर’ की भूमिका निभाने वाले अभिनेता विक्रांत मैसी सबसे ज्यादा फीस लेने वाले कलाकार बने हैं। दावों के अनुसार, विक्रांत मैसी को इस सीरीज में काम करने के लिए 10 से 15 करोड़ रुपये के बीच की मोटी रकम मिली है। वहीं, सीरीज में चंदर की पहली पसंद और बिंदास लड़की ‘सुधा’ का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री वेदिका पिंटो को अपने रोल के लिए लगभग 3 से 5 करोड़ रुपये की फीस दी गई है।

    सीरीज में दूसरा मुख्य महिला किरदार ‘प्रीति’ का है, जिसे अभिनेत्री महिमा मकवाना ने निभाया है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि महिमा की फीस वेदिका पिंटो से थोड़ी कम रही है। महिमा को इस रोल के लिए करीब 2 से 3 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा, सीरीज में ‘मार्क’ के महत्वपूर्ण सपोर्टिंग रोल में नजर आए दिग्गज अभिनेता आदिल हुसैन को 3 से 4 करोड़ रुपये की फीस मिली है।

    इन मुख्य कलाकारों के अलावा सपोर्टिंग रोल्स में नजर आईं अनुभा फतेहपुरिया, लवलीन मिश्रा और सादिया सिद्दीकी जैसे अनुभवी कलाकारों को 80 लाख रुपये से लेकर 2 करोड़ रुपये तक का पारिश्रमिक दिया गया है। हालांकि, फीस से जुड़ा यह पूरा आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स के दावों पर आधारित है। रिश्तों की कश्मकश, प्यार और सपनों के बीच बुनी गई ‘मुसाफिर कैफे’ अपनी सादगी और किरदारों के बेहतरीन अभिनय के कारण दर्शकों का दिल जीत रही है।