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  • विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की मांग की। राज्यपाल ने मामले पर पुनर्विचार करने और सरकार से चर्चा के बाद उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

    मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस का विरोध
    कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर विजय शाह पहले से ही राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। इसी मामले में राज्य कैबिनेट द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। उमंग सिंघार के साथ विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे भी राजभवन पहुंचे।

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिंघार ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और सरकार के पास मंत्री को हटाने और केस चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    ‘देश की बेटी के अपमान पर सरकार चुप’
    उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसे अभियानों की बात करने वाली सरकार सेना की महिला अधिकारी के अपमान के मामले में चुप है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।

    सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वे मामले पर पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी राज्यपाल के पाले में डाल दी है।

    केके मिश्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध में सरकार का यह फैसला उचित नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला देश की संप्रभुता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है।

    मिश्रा ने 2015 के व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने कहा कि राजभवन को संविधान और न्यायपालिका के सामने चुनौती खड़ा करने वाला संस्थान नहीं बनना चाहिए।

    यूसीसी को लेकर भी सरकार पर हमला
    राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इसे खत्म किया जाएगा। सिंघार ने आरोप लगाया कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है।

    विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसे संविधान के अनुच्छेद 29 से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

  • कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    झांसी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को झांसी में महिला कांग्रेस ने कचहरी चौराहा पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    महिला कांग्रेस की शहर अध्यक्ष आसिया सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा विरोध और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन छात्रों के आंदोलन को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों से देशभर के कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। ऐसे समय में आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष का मजाक उड़ाना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

    प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत से देश के विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सांसद अपने बयान पर माफी नहीं मांगती हैं तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक किया जाएगा। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी Meenakshi Natarajan का नामांकन निरस्त होने के विरोध में सोमवार को मंदसौर में कांग्रेस और युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया और बाद में बल प्रयोग भी किया।

    जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कार्यालय पर एकत्रित हुए थे। यहां से वे रैली के रूप में भाजपा कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और इसी के विरोध में वे अपना प्रतिरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।

    पुलिस प्रशासन ने गांधी चौराहे से बालाजी मंदिर के बीच पहले से ही बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था की थी। जब प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ आगे बढ़ने पर अड़ी रही। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद से पानी की बौछार की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और विरोध जारी रखा। बाद में पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी सूचना है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया गया।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सीएसपी जितेंद्र भास्कर के अनुसार, भाजपा कार्यालय घेराव के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पानी की बौछार और अन्य आवश्यक कदम उठाए गए।

    पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 10 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    इस घटना के बाद मंदसौर में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।

  • शिवपुरी में धरना दे रहे कांग्रेसियों पर हमला, नामजद शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप

    शिवपुरी में धरना दे रहे कांग्रेसियों पर हमला, नामजद शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में कांग्रेस के धरने के दौरान हिंसा का मामला सामने आया है। 27 मई को नवीन नगर परिषद भवन के पास चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच अचानक हालात बिगड़ गए, जब करीब 10 से 12 मोटरसाइकिलों पर सवार होकर 25 से 30 लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों के हाथों में लाठी-डंडे और प्लास्टिक पाइप थे। धरना स्थल पर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर भागने लगे।

    वीडियो वायरल, हमले की पुष्टि का दावा
    घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ नकाबपोश युवक बाइक से आते और फिर अचानक मारपीट करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में भगदड़ और हंगामे जैसी स्थिति भी देखी जा सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह वीडियो हमले की पुष्टि करता है और इसी आधार पर आरोपियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

    कांग्रेस का आरोप: सुनियोजित हमला, कार्रवाई में देरी
    ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल गुप्ता के अनुसार इस हमले में कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें अतुल पाराशर, राजवीर सिंह परमार, रामस्वरूप कुशवाह और चंद्रशेखर गौतम सहित अन्य शामिल हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने भी आरोप लगाया कि नामजद शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

    नामजद शिकायत और पुलिस की स्थिति
    कांग्रेस द्वारा दी गई शिकायत में मंगल लोधी, सुनील लोधी, आजाद लोधी, सौरव लोधी, जीवन लोधी, असवेन्द्र लोधी, कपूर लोधी और आकाश लोधी सहित कई लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि, पिछोर थाना प्रभारी नीतू सिंह अहिरवार का कहना है कि कुछ नामजद आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जांच में घटना स्थल पर मौजूदगी साबित नहीं हुई है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज में कई लोग चेहरा ढके हुए नजर आए हैं, जिससे पहचान में कठिनाई हो रही है।

    पुलिस के अनुसार पहले अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की बात कही गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता नामजद एफआईआर पर अड़े रहे। फिलहाल मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जांच जारी, तनाव बरकरार
    घटना के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और कांग्रेस लगातार कार्रवाई की मांग कर रही है। वहीं पुलिस जांच और साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

  • इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज

    इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज


    इंदौर। इंदौर शहर में लगातार बढ़ रही पानी की समस्या को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शहर की कई कॉलोनियों और बस्तियों में पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं, और टैंकरों के जरिए भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    कांग्रेस ने मंगलवार को राजबाड़ा पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन शाम 5 बजे से शुरू होगा, जिसमें कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल होंगे। इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के साथ-साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे।

    कांग्रेस का आरोप है कि शहर में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन नगर निगम और महापौर की ओर से इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। इसी कारण जनता को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महापौर के इस्तीफे की मांग करेगी। चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया है कि वर्तमान महापौर शहर की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की जनता “त्राहिमाम” कर रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं।

    प्रदर्शन की रूपरेखा के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ता राजबाड़ा पर धरना देंगे, नारेबाजी करेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध जताएंगे। इसके बाद यह प्रदर्शन नगर निगम कार्यालय की ओर बढ़ेगा, जहां प्रतीकात्मक रूप से खाली मटके फोड़े जाएंगे। यह कदम पानी संकट और प्रशासन की कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जा रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल शुरुआत है और यदि जल समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और भी व्यापक किया जाएगा। उनका आरोप है कि शहर में बढ़ती आबादी के अनुरूप जल प्रबंधन व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, जिसके कारण यह संकट लगातार गहराता जा रहा है।

    इधर, प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, लेकिन शहर में पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए यह मुद्दा पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में राजबाड़ा पर होने वाला यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर इंदौर में पानी संकट अब सिर्फ जनसमस्या नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • NTA भंग करने की मांग तेज, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन

    NTA भंग करने की मांग तेज, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन

    रीवा। NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच रीवा में भी सियासी और छात्र संगठनों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने 19 मई को डिप्टी सीएम आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के खिलाफ यह आंदोलन किया जाएगा।

    रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में NSUI रीवा जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता घंटी और शंख बजाकर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    NSUI ने “NEET 2026 न्याय अभियान” के तहत कई अहम मांगें रखी हैं। संगठन ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित छात्रों के लिए मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता और फ्री लीगल एड उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

    संगठन का कहना है कि यदि दोबारा परीक्षा आयोजित की जाती है तो छात्रों को मुफ्त यात्रा और ठहरने की सुविधा भी सरकार को उपलब्ध करानी चाहिए। NSUI नेताओं ने कहा कि केवल री-एग्जाम कराना समाधान नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता में नेताओं ने 2015 के AIPMT पेपर लीक, 2024 और अब 2026 के NEET विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रहे घोटाले शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कोटा, सीकर और जयपुर जैसे बड़े कोचिंग हब की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई।

    इधर, NSUI के प्रदर्शन ऐलान से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी रीवा में मशाल जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    रीवा में बढ़ते विरोध प्रदर्शन से साफ है कि NEET पेपर लीक मामला अब सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक और जनआंदोलन बनता जा रहा है।

  • बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग

    बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग


    भोपाल । भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर बीजेपी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चिंतामणि मालवीय से जुड़ा है, जिन पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर कब्जा करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उज्जैन में एक वृद्ध महिला की संपत्ति पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में उन्होंने दस्तावेज और एफिडेविट भी राज्यपाल को सौंपे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।

    प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विधायक के खिलाफ पहले से ही यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज के विश्वास को आहत करते हैं, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

    मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस ने केवल इस मामले को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने लोकसभा और मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनके मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया नहीं जा सकेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

  • इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।

    कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा।

    इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।