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  • हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत

    हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भोपाल में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। वह सुबह करीब 11:30 बजे विधानसभा भवन पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने गुरुद्वारे में मत्था टेका और करुणा धाम आश्रम पहुंचकर संत सुदेश शांडिल्य महाराज से आशीर्वाद लिया। वहीं दूसरी ओर नामांकन के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया था। यह सीट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपना इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। अब इस रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए पुरी को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने शनिवार को औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल कर दिया।

    नामांकन की तैयारियां पहले से शुरू हो गई थीं। शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के लिए प्रस्तावक बनने पर सहमति दी थी। उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय में इससे संबंधित सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद शनिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुरी ने विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन जमा किया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा राजेंद्र शुक्ल मौजूद रहे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रहलाद पटेल और नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विधायक सुरेंद्र पटवा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।

    नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले के बाद हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दिवाली से पहले प्रदेश को पुरी के रूप में एक सांसद का उपहार मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुरी के संसदीय अनुभव और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।

    सीएम ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश को बीना रिफाइनरी नागरिक उड्डयन स्मार्ट सिटी मेट्रो रेल मेट्रोपॉलिटन सिटी और स्वच्छता अभियान जैसे क्षेत्रों में कई सौगातें दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी पुरी प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर नामांकन के दौरान राजनीतिक विरोध की आशंका भी बनी रही। पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या और कार्रवाई के विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इस घटनाक्रम ने नामांकन के राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया।

    खास बात यह रही कि नामांकन दाखिल करने से पहले और बाद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। मीडिया के सामने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी का पक्ष रखा। अब राज्यसभा उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया और चुनावी नतीजे पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

  • खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी

    खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे 343 मतदाता पहचान पत्र मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गईNarmada Voter ID Cards, Khargone News, Madhya Pradesh Politics, Congress Protest, Election Investigation है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ये पहचान पत्र इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में वोटर कार्ड मिलने से निर्वाचन व्यवस्था और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर कांग्रेस ने पुलिस से शिकायत कर जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पहचान पत्र नर्मदा घाट तक कैसे पहुंचे और इन्हें वहां किसने छोड़ा।

    जानकारी के अनुसार रविवार को मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सफाई कार्य में जुटे स्वयंसेवकों की नजर पानी में तैरते और नदी किनारे पड़े मतदाता पहचान पत्रों पर पड़ी। जब बड़ी संख्या में कार्ड मिलने की जानकारी सामने आई तो मामले ने गंभीर रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि इन पहचान पत्रों पर इंदौर के तिलक नगर आस्था पैलेस और आसपास के क्षेत्रों के पते दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    घटना की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने वहां मिले मतदाता पहचान पत्रों को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया। अब इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता उनकी संख्या और उनके नर्मदा घाट तक पहुंचने के कारणों की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कार्ड वास्तविक हैं या नहीं और यदि वे वास्तविक हैं तो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर कैसे पहुंचे। फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    वोटर कार्ड मिलने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने सवाल उठाया कि इंदौर के मतदाताओं से जुड़े इतने सारे पहचान पत्र खरगोन जिले के नर्मदा घाट पर कैसे मिले। कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दस्तावेजों के स्रोत और उनके यहां पहुंचने की पूरी जानकारी सामने आ सके।

    कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी कार्यकर्ता थाने का घेराव करेंगे। इसके साथ ही नदी में और भी मतदाता पहचान पत्र होने की आशंका जताते हुए व्यापक तलाशी कराने की मांग की गई है। पार्टी ने इस घटना को कथित वोट चोरी से जोड़कर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं पुलिस के अनुसार कांग्रेस की शिकायत प्राप्त हुई है और थाना प्रभारी को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता पहचान पत्र नदी किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें वहां छोड़ने के पीछे क्या कारण था। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। तब तक इस घटना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को जांच के आधार पर ही परखा जाना जरूरी है।

  • इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल

    इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में मैदान आवंटन और किराया निर्धारण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अधिकारियों से अलग-अलग आयोजनों के लिए जमीन देने की प्रक्रिया का हिसाब मांगा। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम के लिए मैदान उपलब्ध कराने के बदले 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। इसी कथित अंतर को लेकर कांग्रेस ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और शुल्क से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचे और सीईओ का घेराव किया। चौकसे ने कहा कि जब तक मैदान पर हुए कार्यक्रमों की अनुमति और भुगतान से संबंधित रसीदें उपलब्ध नहीं कराई जातीं तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन का आवंटन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सभी आयोजकों पर समान नियम लागू होने चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि दोनों कार्यक्रमों के लिए जारी अनुमति पत्रों और किराए की राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुल्क किस आधार पर तय किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद राजू भदौरिया ने भी IDA के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यदि एक राजनीतिक दल से मैदान के इस्तेमाल के लिए बड़ी रकम ली गई है तो दूसरे दल को जमीन उपलब्ध कराने के दौरान भी नियमों और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन पूरी तरह मुफ्त दिए जाने के आरोप की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    विवाद का एक दूसरा पहलू पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान में प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार भी है। यहां करीब 40 दिनों के बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। दुकानों के अलावा जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराए की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये तक किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने फिलहाल प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। बताया जा रहा है कि इस राशि में दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल हैं। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि तीन से चार दिन के राजनीतिक कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो करीब 40 दिन चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर तय होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन और खर्च का विवरण भी मांगा है।

    कांग्रेस की मुख्य मांग है कि IDA मैदान आवंटन के नियम किराए की गणना और शुल्क में छूट से जुड़ी शर्तों को सार्वजनिक करे। पार्टी का कहना है कि पारदर्शिता से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अलग-अलग आयोजनों के लिए राशि में अंतर क्यों है और कहीं सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं हो रहा। अब इस मामले में IDA का आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होगा। प्राधिकरण की ओर से आवंटन की शर्तें और शुल्क निर्धारण का आधार सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल

    IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के मैदान आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने प्राधिकरण पर मैदान उपलब्ध कराने में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा है। पार्टी का दावा है कि राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए मैदान आवंटित करने पर 14 लाख रुपये से अधिक का शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि दोनों आयोजन के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया तो इसके पीछे क्या आधार था और क्या भाजपा के कार्यक्रम के लिए कोई विशेष छूट दी गई थी। इन मुद्दों को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में शुक्रवार दोपहर कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचकर सीईओ का घेराव करने वाले हैं।

    कांग्रेस की मांग है कि सार्वजनिक जमीन के आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेज और नियम सार्वजनिक किए जाएं। पार्टी जानना चाहती है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई थी और भुगतान किन शर्तों के तहत लिया गया। वहीं भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत 7 अक्टूबर को विजय नगर में आयोजित कार्यक्रम के लिए मैदान किस आधार पर आवंटित किया गया और इसके बदले कोई शुल्क लिया गया या नहीं। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और राजनीतिक आयोजनों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। हालांकि भाजपा को जमीन मुफ्त दिए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    मैदान आवंटन को लेकर विवाद के बीच पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान पर प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार का मामला भी उठाया गया है। यहां करीब 40 दिनों तक चलने वाले बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। बाजार में जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराये की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। इसमें दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि जब कुछ दिनों के राजनीतिक आयोजन के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो लगभग 40 दिन तक चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर निर्धारित होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन शुल्क और खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि अलग-अलग आयोजनों के लिए शुल्क निर्धारण में अंतर है तो IDA को उसका स्पष्ट आधार बताना चाहिए। पार्टी ने आशंका जताई है कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता होने पर प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान हो सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में IDA का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही शुल्क निर्धारण और आवंटन की शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद अब प्राधिकरण के जवाब पर नजर रहेगी क्योंकि यह विवाद सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और समान नियम लागू करने के सवाल से जुड़ा है।

  • कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी

    कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी


    सिलवानी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विरोध प्रदर्शन से लेकर नेताओं के बयानों और नौकरशाही के अंदरूनी घटनाक्रम तक कई दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं। रायसेन के सिलवानी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता आग की चपेट में आ गया तो ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी एक कार्यकर्ता झुलस गया। वहीं रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया तो रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। दूसरी ओर शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव के बचाव का मामला भी चर्चा में रहा।

    रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

    इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।

    इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

    विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप रहे। विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन आयोग में महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में विरोध दर्ज कराया।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ी संख्या में बल तैनात किया और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ने का प्रयास करते दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देश में चिंता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने युवाओं, किसानों और नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।

    बिहार की राजधानी पटना में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां वामपंथी दलों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    पटना में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन भी जारी था। छात्र अपनी अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।

    नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।

    हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जताया।

    इस तरह अलग-अलग राज्यों में हुए प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। वहीं, पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए।

  • विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की मांग की। राज्यपाल ने मामले पर पुनर्विचार करने और सरकार से चर्चा के बाद उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

    मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस का विरोध
    कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर विजय शाह पहले से ही राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। इसी मामले में राज्य कैबिनेट द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। उमंग सिंघार के साथ विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे भी राजभवन पहुंचे।

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिंघार ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और सरकार के पास मंत्री को हटाने और केस चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    ‘देश की बेटी के अपमान पर सरकार चुप’
    उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसे अभियानों की बात करने वाली सरकार सेना की महिला अधिकारी के अपमान के मामले में चुप है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।

    सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वे मामले पर पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी राज्यपाल के पाले में डाल दी है।

    केके मिश्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध में सरकार का यह फैसला उचित नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला देश की संप्रभुता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है।

    मिश्रा ने 2015 के व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने कहा कि राजभवन को संविधान और न्यायपालिका के सामने चुनौती खड़ा करने वाला संस्थान नहीं बनना चाहिए।

    यूसीसी को लेकर भी सरकार पर हमला
    राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इसे खत्म किया जाएगा। सिंघार ने आरोप लगाया कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है।

    विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसे संविधान के अनुच्छेद 29 से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

  • कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    झांसी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को झांसी में महिला कांग्रेस ने कचहरी चौराहा पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    महिला कांग्रेस की शहर अध्यक्ष आसिया सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा विरोध और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन छात्रों के आंदोलन को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों से देशभर के कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। ऐसे समय में आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष का मजाक उड़ाना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

    प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत से देश के विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सांसद अपने बयान पर माफी नहीं मांगती हैं तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक किया जाएगा। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।