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  • सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान

    सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान


    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान आज फिर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा माफी मांगने के बाद भी विजयवर्गीय ने अपने तेवर में नरमी नहीं दिखाई और मीडिया से बातचीत में कहा कप्तान है वो तो यार माफी मांगी तो क्या हो गया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    दरअसल बजट सत्र के चौथे दिन भागीरथपुरा दूषित पानी और मौतों के मामले पर जब विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस बहस के दौरान विजयवर्गीय ने असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुए उमंग सिंघार को औकात में रहो कह दिया जिससे सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    हंगामे के बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने खेद जताया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जिससे सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील की गई। हालांकि विजयवर्गीय के तेवर इसके बावजूद नरम नहीं पड़े। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार सी प्रतिक्रिया भी दी।

    इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी पलटवार किया और कहा कि वह अपनी औकात जनता की सेवा करने और उनके सवालों को उठाने में ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष गंभीर मुद्दों जैसे भागीरथपुरा मौतों या अडानी ग्रुप के साथ समझौते पर चर्चा करता है तो इसका जवाब इस तरह के बयान से नहीं दिया जाना चाहिए।

    वहीं युवा कांग्रेस ने दोषी मंत्री के बयान के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है और आज उनके बंगले के बाहर घेराव कार्यक्रम होगा जिसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

    बीजेपी शासन के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक बीजेपी विधायक ने कहा कि विपक्ष के लोग मुट्ठी भर हैं और उनका मोर्चा छोटा है जबकि उनकी पार्टी का मोर्चा बड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले बदतमीजी की थी और इसलिए पूरा विपक्ष माफी मांगे।

    इस पूरे विवाद ने विधानसभा सत्र को गर्मा‑गर्म बहस और सियासी टकराव का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री की माफी के बावजूद मंत्री का बयान सियासी कारवाई और विरोध प्रदर्शन का विषय बन गया है जिससे सदन और बाहर दोनों जगह राजनीति गरमाई हुई है।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी

    मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र दौरान आज सदन में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल और उससे हुए लोगों की मौत का मामला फिर से चर्चा में है। यह मुद्दा पहले भी बजट सत्र के दौरान उठाया जा चुका है और विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर विस्तृत बहस की मांग कर रहा है।

    भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं हुईं और कई की मौत भी हुई जिससे स्थानीय लोग और विपक्ष दोनों ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस विधायक स्थगन प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखेंगे। इस मुद्दे पर विपक्ष ने पहले भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और संसद में इसे गंभीर विषय के रूप में उठाया।

    विपक्ष का आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बच्चों और बड़ों समेत अनेक लोगों को एक्यूट डायरिया जैसी बीमारी हुई जिसके चलते कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है और कई दर्जन लोग अस्पताल में भर्ती रहे। कांग्रेस ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और इसके लिए मंत्रियों की इस्तीफा की मांग भी की।

    सांसदों ने कहा कि दूषित पानी मामले को विस आवाज़ में उठाने के लिए स्थगन प्रस्ताव जरूरी है ताकि पूरे मुद्दे पर विस्तार से बहस हो और जवाबदेही तय की जा सके। विपक्ष ने तर्क दिया कि सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया और पीड़ितों को दी गई मुआवजे की राशि अपर्याप्त है जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    सरकार की ओर से जवाब में कहा गया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य और नगर प्रशासन विभागों ने घटनास्थल पर कार्यवाही की है और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामला राजनीति से ऊपर है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने सहित राहत कार्य किये जा रहे हैं।

    सदन में इस मुद्दे को लेकर कई बार कार्यवाही स्थगित भी हुई क्योंकि विपक्ष ने इसे व्यापक रूप से उठाने की मांग की है। कांग्रेस ने दावा किया कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हो सकती है और सरकार की जवाबदेही तय किये बिना इस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ा जाये।

    राज्यसभा में नेताओं ने जोर देकर कहा है कि सदी में स्वच्छ भारत की बात करते हुए यदि नागरिकों को सुरक्षित पीने का पानी न मिल रहा हो तो यह गंभीर समस्या है जिसे जल्द ही नीति स्तर पर भी संबोधित किया जाना चाहिए। स्थगन प्रस्ताव पर आज होने वाली चर्चा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • शंकराचार्य के अपमान पर जबलपुर में बवाल: कांग्रेस ने फूँका सीएम योगी का पुतला; मौनी अमावस्या स्नान विवाद

    शंकराचार्य के अपमान पर जबलपुर में बवाल: कांग्रेस ने फूँका सीएम योगी का पुतला; मौनी अमावस्या स्नान विवाद


    जबलपुर । प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को रोके जाने और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस घटना के विरोध में आज जबलपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। क्या है पूरा विवाद? बीते 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने परंपरागत राजसी स्नान शाही स्नान के लिए रथ पर सवार होकर संगम तट की ओर जा रहे थे।
    इसी दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए उनके रथ को रोक दिया। इस दौरान शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। इस अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने संगम स्नान करने से इनकार कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। कांग्रेस का हमला: हिंदू आस्था और सनातन परंपरा पर प्रहार जबलपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को साधु-संतों का घोर अपमान बताया। कांग्रेस पार्षद दल के सचेतक अयोध्या तिवारी ने कहा “एक तरफ भाजपा खुद को सनातन की रक्षक बताती है वहीं दूसरी तरफ देश के सर्वोच्च धर्मगुरुओं में से एक शंकराचार्य जी को उनके संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। योगी सरकार का यह व्यवहार अक्षम्य है।

    कांग्रेस पार्षद संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या जैसे पवित्र दिन पर संतों को रोकना और उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी करना हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। आंदोलन तेज करने की चेतावनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में माफी नहीं मांगी गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे। जबलपुर की सड़कों पर आज भारी गहमागहमी देखी गई और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।