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  • MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर

    MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर


    इंदौर।
    लोकसभा (Lok Sabha) में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Opposition Leader Rahul Gandhi) के 17 जनवरी को मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) दौरे के पहले ये शहर पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बन गया है। गांधी दूषित पानी से हुई लगभग 20 से भी ज्यादा लोगों की मौत के मामले को लेकर 17 को इंदौर आने वाले हैं। वे यहां प्रभावितों के परिजन से मुलाकात करेंगे। उनके इस दौरे के पहले राज्य में इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कल अपने इंदौर प्रवास के दौरान बिना किसी का नाम लिए इस मामले को लेकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ”हमने इस कठिनाई के दौर को महसूस किया है, संवेदना के साथ महसूस किया है, लेकिन आप अगर लाशों पर राजनीति करने आओगे, इंदौर बर्दाश्त नहीं करेगा। कोई बर्दाश्त करने वाला नहीं है।

    उन्होंने कहा कि अगर आपने आपदा में से अवसर तलाश कर राजनीति का रास्ता तलाशा, तो ये उचित नहीं कहा जा सकता। आप सकारात्मक विरोध करो, विपक्ष की आवाज विपक्ष की तरह से रखो, तो हम सब उस बात से सहमत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा,’लेकिन अगर आपने बात निकाली, तो बात दूर तलक तक जाएगी।

    वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, भाजपाइयों की जुबान अभी भी “भागीरथपुरा” का भय बढ़ा रही है! पीड़ित परिवारों के गहरे जख्मों पर नमक लगा रही है! अहंकार में डूबे हुए “23 सरकारी हत्याओं” के अपराधी इसीलिए निरंकुश हैं, क्योंकि जनमत का अपमान इनकी आदत में आ चुका है! तभी तो ये आंसूओं में डूबे इंदौर का दर्द भूलकर, “जुबानी-जहर” उगल रहे हैं! गलती सुधारने की बजाय अभी भी मुंहजोरी कर रहे हैं!”

    इसी बीच श्री पटवारी ने राहुल गांधी के दौरे के संबंध में कहा कि नेता प्रतिपक्ष इस घटना को लेकर बहुत चिंतित थे। पूरी घटना उनके संज्ञान में है। उन्होंने प्रभावितों के परिजनों से मिलने की इच्छा जाहिर की है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 17 जनवरी को इंदौर आगमन पीड़ित परिवारों और शहरवासियों को संबल, संवेदना और न्याय की उम्मीद देगा।

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सरकार जहां लगातार व्यवस्थाएं सुधारने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक मुद्दा बना रही है।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • भोपाल में शुरू हुई 'जल सुनवाई', लोगों ने लगाया कार्बाइड वाले पानी का आरोप

    भोपाल में शुरू हुई 'जल सुनवाई', लोगों ने लगाया कार्बाइड वाले पानी का आरोप



    भोपाल। शहर के 85 वार्डों में मंगलवार को पहली बार ‘जल सुनवाई’ आयोजित की गई। यह सुनवाई सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चली। इस दौरान आमजन ने पानी से जुड़ी अपनी शिकायतें सीधे नगर निगम अधिकारियों के सामने रखीं।
    ब्रिज विहार और निशातपुरा के रहवासियों ने निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय में पहुंचकर नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि नगर निगम उन्हें कार्बाइड का जहरीला पानी पीने को मजबूर कर रहा है। मोहल्ले के लोगों ने अपने मांगपत्र के साथ कार्यालय के बाहर नारेबाजी भी की।
    प्रदेश में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लगभग 23 लोगों की मौत हो चुकी है। भोपाल के आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव जैसे क्षेत्रों में भी पानी दूषित पाया गया है, जिसके चलते भूजल के उपयोग पर रोक लगा दी गई है।
    सरकार ने इस समस्या को देखते हुए हर मंगलवार को ‘जल सुनवाई’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस दौरान अधिकारी और एक्सपर्ट्स मिलकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देंगे।
    जल सुनवाई में क्या होगा शामिल
    जल के नमूनों का परीक्षण विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं
    रंग, स्वाद, गंध
    पीएच, कुल क्षारीयता, क्लोराइड
    कुल कठोरता, कैल्शियम कठोरता, मैग्नेशियम कठोरता
    टीडीएस, टरबीडिटी
    रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म, ई-कोलाई

    हर वार्ड में होगी सुनवाई
    नगर निगम के कमिश्नर संस्कृति जैन ने निर्देश दिया है कि सभी वार्ड कार्यालय में जल सुनवाई आयोजित की जाए। लोग अपने पानी के नमूने भी संबंधित वार्ड कार्यालय में जमा करवा सकेंगे।
    इस पहल से जनता को यह सुविधा मिलेगी कि वे सीधे अधिकारियों को अपनी शिकायतें बता सकें और जल की गुणवत्ता पर निगरानी रख सकें। यह कदम भोपाल में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति

    इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत और कई गंभीर बीमारियों की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी दूषित पानी पीने से नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इंदौर की यह त्रासदी एक चेतावनी की तरह है, जिससे पता चलता है कि कई शहरों में पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण की व्यवस्था गंभीर रूप से कमजोर है।

    इंदौर हादसे की जांच में सामने आया कि देश के सात बड़े शहर पानी की गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए हैं।

    इन शहरों में गुजरात का गांधीनगर, तेलंगाना का हैदराबाद, उत्तर प्रदेश का ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल, और हरियाणा के रोहतक और झज्जर शामिल हैं। गांधीनगर में दूषित पानी के कारण टाइफाइड के 108 मामले दर्ज किए गए, और दो लोगों की मौत भी हुई। हैदराबाद में छह सैंपल में से चार में सीवेज, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और औद्योगिक वेस्ट पाए गए।
     इसके चलते नगर निगम ने जमीन के नीचे के पानी पर रोक लगा दी है।

    दूषित पानी के सेवन से आम लोगों में दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं।

    कुछ मामलों में गिलियन बैरे सिंड्रोम जैसे न्यूरोलॉजिकल रोग भी सामने आए हैं। इसके मुख्य लक्षणों में लगातार दस्त और उल्टी, तेज बुखार और कमजोरी, चक्कर आना या पेशाब कम होना, शरीर या आंखों में पीलापन और बच्चों एवं बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन के संकेत शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन शहरों में पानी की शुद्धता पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह केवल स्वास्थ्य आपात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    इंदौर की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दूषित पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन गई है। इसलिए प्रशासन को अब निष्क्रियता छोड़कर, सख्त निरीक्षण और त्वरित सुधार लागू करना होगा, ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

  • इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया

    इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया


    नई दिल्ली ।मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पानी की समस्या अब गंभीर रूप लेती जा रही है। इंदौर में दूषित पानी से मौत की घटना के बाद नगर निगम ने सक्रिय कदम उठाना शुरू किया है। शहर के कई इलाकों से गंदे पानी की शिकायतें आ रही थीं, जिनके समाधान के लिए जनता ने सीएम हेल्पलाइन CM Helpline का सहारा लिया।1 जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 140 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश मामलों का समाधान कर दिया गया है। नगर निगम कमिश्नर संघप्रिय सिंह ने बताया कि शिकायतों के निराकरण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिससे काम में तेजी लाई जा रही है।

    कुल 2600 ट्यूबवेलों में से अब तक 1200 की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष ट्यूबवेलों की सफाई भी जल्द ही पूरी की जाएगी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सफाई भी लगातार जारी है।शहर में कुछ स्थानों पर गंदे पानी की समस्या पुरानी और क्षतिग्रस्त सीवर तथा पेयजल लाइनों की वजह से उत्पन्न हो रही है। ऐसे 56 स्थानों की लाइनों को बदला जाएगा। नगर निगम ने इन इलाकों को चिन्हित किया है और हर क्षेत्र के लिए विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

    नगर निगम की टीम ने बताया कि फिलहाल 124 शिकायतों वाले स्थानों पर समस्या का समाधान कर दिया गया है और बाकी 16 पर काम चल रहा है। निगम ने जनता से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अब भी गंदे पानी की समस्या है तो वे सीधे सीएम हेल्पलाइन या नगर निगम कंट्रोल रूम से संपर्क करें।इस कदम से यह स्पष्ट है कि ग्वालियर नगर निगम पानी की समस्या को गंभीरता से ले रहा है। यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि समस्या के कारण आने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को रोका जा सके।

    शहरवासियों के लिए राहत की बात यह है कि समस्या का निराकरण सिस्टमेटिक और तेज़ी से किया जा रहा है। कंट्रोल रूम के माध्यम से शिकायतों का ट्रैक रखा जा रहा है और हर इलाके का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।ग्वालियर नगर निगम की यह पहल यह संदेश देती है कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन सचेत है और तकनीकी एवं प्रबंधन उपायों के जरिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

  • दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील

    दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील


    खंडवा । मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लगभग 18 लोगों की मौत हो गई जिसे लेकर शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और अब भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों ने इन उम्मीदों को और बिखेर दिया है। पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार के भरोसे न बैठें और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएं।

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल खंडवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। जब उनसे इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, चाहे खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत हो, इंदौर की घटना से हम सभी को सबक लेना चाहिए। सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे सरकार के भरोसे हम रहे, ये भी ठीक नहीं है। जनता की भी एक जिम्मेदारी बनती है। इस बयान से उन्होंने एक तरह से साफ कर दिया कि गंदगी और दूषित पानी की समस्या के लिए अब जिम्मेदारी सरकार के बजाय जनता पर डाल दी गई है।

    सांसद का यह बयान विवादों में घिर चुका है क्योंकि इसने सीधे तौर पर जनता पर सफाई का जिम्मा थोप दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अब जनता खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन लगाएगी या फिर नगर निगम की टंकियों को साफ कर घर-घर पानी पहुंचाने का काम करेगी अगर यही जिम्मेदारी जनता की है, तो फिर सवाल यह भी है कि सांसद जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग क्या कर रहे हैं क्या उनके कर्तव्यों में ऐसी समस्याओं का समाधान करना नहीं आता ।

    यह पहली बार नहीं है जब भाजपा नेताओं के बयानों ने विवाद उठाया है। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता करते हुए ‘घंटा’ शब्द कहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने इस बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद विजयवर्गीय भी बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। इंदौर में हुए हादसे के बाद से प्रशासन की नाकामी और नेताओं के विवादास्पद बयानों ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या फिर इस बार भी जनता को ही दोषी ठहराया जाएगा।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल

    इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही बीमारियों और मौतों के मामलों के बाद प्रशासन ने नर्मदा पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने का दावा किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से इस क्षेत्र के नागरिकों को पीने योग्य नर्मदा पानी मिलना शुरू हो जाएगा। नर्मदा जल की लाइनों को पूरी तरह से साफ किया जा चुका है और पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, गुरुवार रात को भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल पाइपलाइन को प्रेशर से क्लोरीन द्वारा फ्लश किया गया था। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए और उनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 जनवरी से लोगों को नर्मदा जल पीने के लिए उपलब्ध होगा।कलेक्टर ने यह भी कहा कि फिलहाल क्षेत्र के सभी बोरिंग में क्लोरीन डाला जा चुका है और इन्हें केवल घरेलू उपयोग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई भी की जा रही है ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

    भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से यहां के लोग दूषित पानी से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अब प्रशासन की ओर से सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि जल समस्या जल्द हल हो जाएगी।नर्मदा जल की आपूर्ति से पहले, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाइप लाइनों की मरम्मत और सफाई का काम जोरों से चल रहा है। फिलहाल, कलेक्टर और प्रशासन का कहना है कि 11 जनवरी तक नर्मदा जल क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और पीने योग्य पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

  • इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित

    इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है। दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।

    राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।

    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। “हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं। दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।

    दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है। रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है।मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।

    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है।इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है।
    दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।
    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं।दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है।
    रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है। मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।
    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है। इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

  • इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई

    इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण पिछले कुछ दिनों में 18 मौतें हो चुकी हैं. और अब तक 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। बुधवार तक 330 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है. लेकिन 99 मरीज अभी भी इलाजरत हैं। अस्पतालों में ICU में मरीजों की संख्या बढ़ी है. जिनमें से 3 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इस गंभीर स्थिति ने इलाके के लोगों को खौफ में डाल दिया है. और अब वे टैंकर और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बुधवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया. और सीवरेज तथा नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने के निर्देश दिए। इलाके में पानी की सप्लाई टेस्टिंग की जा रही है. और लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है।
    स्वास्थ्य विभाग ने 61 टीमों का गठन किया था. जिनमें से 5013 घरों का सर्वे किया गया। इस सर्वे के माध्यम से 24786 लोगों को उचित सलाह दी गई और घर-घर दवाइयां भी वितरित की गईं। इसके साथ ही. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ICMR के सर्वे में पाया गया कि इलाके की 17 गलियां संक्रमित पाई गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की. और कहा कि इंदौर की छवि को इस घटना ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी हर नागरिक कामौलिक अधिकार है और यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषीअधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही. मुआवजे की राशि पर भी उचित निर्देश दिए जा सकते हैं।
    वहीं. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च आयोजित करने कीघोषणा की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मंगलवार को प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की। इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के सिलसिले ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. और प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

  • MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी

    MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर शहर (Gwalior City) में गंदे पानी की आपूर्ति (Contaminated Water Supply) और विभिन्न अव्यवस्थाओं के विरोध में भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास (BJP councilor Brijesh Shriwas) ने सोमवार को दंडवत यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस यात्रा का उद्देश्य महापौर और नगर निगम प्रशासन का ध्यान नागरिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    दंडवत यात्रा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से शुरू होकर परिषद कार्यालय तक पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “स्वच्छ पानी दो”, “गंदे पानी से परेशान जनता” और “जल समस्या का समाधान करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गंदे और बदबूदार पानी के कारण लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। यात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों में केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि शहर की बदहाल स्थिति को भी दर्शाया गया। इनमें टूटी सड़कें, खराब सफाई व्यवस्था, उफनते सीवर और कॉलोनियों में अंधेरे जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मार्च नगर सरकार और महापौर को “जगाने” के लिए किया गया है।

    इस मौके पर पार्षद बृजेश श्रीवास ने कहा कि यह आंदोलन जनता की पीड़ा और नाराजगी को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि लोगों में गहरी नाराजगी साफ नजर आई।

    महापौर शोभा सिकरवार का कहना था कि यह सब सिर्फ मीडिया में आने की स्टंटबाजी है। इंदौर में जो घटनाक्रम हुआ वहां बीजेपी के महापौर हैं, जो खुद कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं। जब सत्ता सरकार में होने के बाद भी बीजेपी महापौर की बात नहीं सुनी जाती तो यहां गलती महापौर की कैसे हो सकती है। इस तरह के स्टंट से विपक्ष के पार्षद सिर्फ ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं। यहां सब मिलकर काम कर रहे हैं और समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।