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  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।

  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15वीं मौत, पेयजल लाइन में सीवेज मिलने की पुष्टि; NHRC ने मांगी रिपोर्ट

    इंदौर में दूषित पानी से 15वीं मौत, पेयजल लाइन में सीवेज मिलने की पुष्टि; NHRC ने मांगी रिपोर्ट


    इंदौर /मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने एक और जान ले ली है। गुरुवार को 68 वर्षीय गीताबाई की मौत के साथ ही इस जल त्रासदी में मृतकों की संख्या 15 हो गई। अब तक 16 बच्चों सहित 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि सभी मौतें और बीमारियां दूषित पानी पीने के कारण हुई हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO डॉ. माधव हसानी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पानी में बैक्टीरियल संक्रमण था। मरीजों में डायरिया, उल्टी और तेज बुखार जैसे लक्षण पाए गए, जो पानी से फैलने वाली बीमारियों के संकेत हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट और कल्चर टेस्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे संक्रमण के सटीक कारणों का पता चलेगा।

    राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि भागीरथपुरा में पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिला। पाइपलाइन पुलिस चौकी के पास से गुजर रही है, जहां से लीकेज की आशंका सबसे अधिक है। शौचालय के नीचे से गुजर रही जल आपूर्ति लाइन में सीवेज के मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है और प्रभावित इलाके में टैंकरों से साफ पानी सप्लाई किया जा रहा है।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग NHRC ने इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में मौतों के कारण, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और पीड़ितों को दी गई सहायता का ब्यौरा मांगा गया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज दोपहर 12 बजे के बाद सुनवाई होने की संभावना है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ऑनलाइन सुनवाई करेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से अब तक की कार्रवाई और स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रेनेज के पानी में शिगेला, साल्मोनेला, हैजा कोलेरा और ई. कोलाई जैसे घातक बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं। यदि यह पानी पेयजल लाइन में मिल जाए, तो यह अत्यंत विषैला हो जाता है और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है।

    इंदौर की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा करती है। पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत, संक्रमित क्षेत्र में पानी की सप्लाई और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं। अब इस त्रासदी की आगे की कार्रवाई NHRC रिपोर्ट और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।भागीरथपुरा जल संकट ने यह साबित कर दिया है कि शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था में निगरानी और नियमित निरीक्षण न होने पर छोटे-छोटे लीकेज भी बड़े जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकते हैं। प्रशासन और सरकार दोनों के लिए यह चेतावनी है कि शहरों में जल सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार


    इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से फैल रही गंभीर बीमारी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। पांच महीने के मासूम अव्यान साहू की मौत दस्त और उल्टी से हुई। बच्चे के परिवार ने बताया कि घर में गाढ़े दूध में नगर निगम के नल का पानी मिलाकर पिलाया गया था, लेकिन वही पानी जहरीला साबित हुआ। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी ने पूरे इलाके में व्यापक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया।

    अव्यान का परिवार पिछले 10 सालों से उसकी उपस्थिति का इंतजार कर रहा था, लेकिन यह खुशी मातम में बदल गई। पिता सुनील साहू ने मीडिया से बताया कि बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। चिकित्सक से परामर्श के बाद घर पर दवाइयां दी जा रही थीं, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि दूध गाढ़ा था, इसलिए वे इसे नगर निगम के नल के पानी में मिलाकर पिला रहे थे, लेकिन वही पानी उनके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।

    सरकारी आंकड़ों और स्थानीय बयानों के अनुसार, अब तक भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण कम-से-कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग पेट और दस्त जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। कई गंभीर मरीज शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिला। नगर निगम के कर्मचारियों ने मंगलवार देर शाम इस लीकेज का पता लगाया। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।

    इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह दावा कर रहे हैं कि नौ लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि इलाके में गंदा पानी नल से बहते देखा गया है और पहले भी अस्वस्थ जल आपूर्ति पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। लेकिन यह समस्या पिछले एक सप्ताह में जानलेवा रूप ले चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जांच अभियान शुरू किया है, और प्राथमिक उपचार तथा अस्पतालों में भर्ती की सुविधा प्रदान की जा रही है।

    यह मामला इंदौर जैसे “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जल स्रोत की सुरक्षा और जलापूर्ति अवसंरचना की निगरानी में खामियों ने स्थानीय निवासियों को भारी कीमत चुकाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि दूषित पानी के फैलाव को रोकने, नियमित जांच करने और सार्वजनिक जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक हैअदालत और उच्च प्रशासन ने भी इस स्थिति पर संज्ञान लिया है। व्यापक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और चिकित्सा सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।