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  • पाकिस्तान के समर्थन में चीन, कहा- व्यापार और निवेश में जारी रहेगा सहयोग

    पाकिस्तान के समर्थन में चीन, कहा- व्यापार और निवेश में जारी रहेगा सहयोग

    इस्लामाबाद। चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान के प्रति अपने समर्थन को दोहराया है। पाकिस्तान में चीन के राजदूत जियांग जेदोंग ने गुरुवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि चीन पाकिस्तान में व्यापार और निवेश के लिए लगातार सहयोग करता रहेगा।
    पाक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार बैठक में उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान चीनी राजदूत ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता और सुधार प्रयासों की सराहना की।

    प्रधानमंत्री शरीफ ने चीन के निरंतर आर्थिक सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि पाकिस्तान, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस चरण में कृषि, औद्योगिक सहयोग और प्राथमिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    बैठक के दौरान जियांग जेदोंग ने व्यापार और निवेश के क्षेत्र में चीन के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ाने की उम्मीद भी जताई।

    प्रधानमंत्री शरीफ ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका को रेखांकित किया और आपसी हितों के मुद्दों पर सभी स्तरों पर करीबी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।

  • तुर्किए ने तोड़ा पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो सपना, द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित रह गया रक्षा समझौता

    तुर्किए ने तोड़ा पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो सपना, द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित रह गया रक्षा समझौता

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के करीबी साथी तुर्किए ने इस्लामाबाद की महत्वाकांक्षा,मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने की योजना, को झटका दे दिया है। अंकारा ने स्पष्ट किया है कि वह सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ किसी बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन में शामिल नहीं होगा। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया था, और उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इसमें जल्द ही तुर्किए और अजरबैजान जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन तुर्किए ने साफ कर दिया कि फिलहाल सभी चर्चाएँ केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग तक ही सीमित हैं।

    एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए के रक्षा अधिकारी स्पष्ट हैं कि राष्ट्रपति एर्दोगान की सरकार न तो बहुपक्षीय समझौते में शामिल है और न ही इस पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ संबंध केवल रणनीतिक उद्देश्यों तक ही सीमित हैं। सऊदी अरब भी किसी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे के पक्ष में नहीं है और केवल द्विपक्षीय समझौतों को ही प्राथमिकता देती है।

    पाकिस्तानी सेना की चुनौतियां
    तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान की सेना की सीमित संसाधन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है।

    पाकिस्तान पहले से ही तीन सीमाओं, भारत, अफगानिस्तान और ईरान—पर सक्रिय है और आंतरिक स्तर पर भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। तुर्किए के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में सऊदी अरब के साथ समझौता पाकिस्तानी सेना को और भी अधिक बंटवारा कर रहा है, जिससे बहुपक्षीय रक्षा जिम्मेदारियों को निभाना कठिन हो जाएगा।

    तकनीकी निर्भरता और आर्थिक सीमाएं
    पाकिस्तान की अधिकांश सैन्य तकनीक चीन पर निर्भर है, विशेष रूप से एयर डिफेंस और एयरफोर्स क्षेत्र में। तुर्किए के अनुसार, पाकिस्तान की एकमात्र प्रमुख रणनीतिक ताकत उसकी परमाणु क्षमता है। इसके अलावा आर्थिक दबाव और सीमित वित्तीय संसाधन भी बहुपक्षीय गठबंधन की संभावना को चुनौती देते हैं।

    तुर्किए ने जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत है। अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य उपकरण, ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली उपलब्ध करा रहा है। दोनों देश साझा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं, लेकिन कोई बहुपक्षीय समझौता नहीं हुआ।

    इस्लामिक नाटो का सपना अधर में
    पाकिस्तान के पीएम और सेना प्रमुख मुनीर ने मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने का प्रयास किया था, जिसमें सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौते ने संभावनाओं को बढ़ाया। 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान यह प्रचार हुआ कि जल्द ही बहुपक्षीय समझौते की घोषणा होगी। लेकिन यात्रा के बाद केवल द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग पर सहमति बनी, कोई बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन नहीं बनाया गया।