Tag: corruption

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा

    भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) मंगलवार को जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index.-CPI) 2025 में 182 देशों और क्षेत्रों में से 91वें स्थान पर पहुंच गया। यह पिछली रैंकिंग की तुलना में पांच स्थान बेहतर है। वैश्विक गैर-सरकारी संगठन (Global Non-Governmental Organizations) ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) के नवीनतम सीपीआई के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले साल की तुलना में एक अंक बढ़ा है। वहीं, उसकी रैंक बेहतर हुई है। बर्लिन स्थित भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत इलाके में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति की वृद्धि धीमी रही है। वजह, कई देशों में पिछले साल जनता का गुस्सा देखा गया।


    दुनिया के हर हिस्से में खतरा

    2025 भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक दिखाता है कि भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि इसकी प्रगति की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि नेताओं को सत्ता के दुरुपयोग और इस गिरावट को प्रेरित करने वाले व्यापक कारकों, जैसे लोकतांत्रिक जांच और संतुलन की वापसी और स्वतंत्र नागरिक समाज पर हमलों से निपटने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि लोग अक्षम नेतृत्व से उकता चुके हैं। यह लोग अब सुधार की मांग कर रहे हैं।


    पत्रकारों के लिए खतरनाक

    सीपीआई दुनिया के 182 देशों और क्षेत्रों को उनके सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनुमानित स्तर के अनुसार रैंक करता है। परिणाम जीरो (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत साफ) के पैमाने पर दिए जाते हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में भी सूचीबद्ध किया गया है जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पत्रकारों पर भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए हमला किया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है, तो सत्ता को प्रभावी ढंग से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता और भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। 2012 से, वैश्विक स्तर पर गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में से 90 फीसदी से अधिक उन देशों में हुई हैं, जहां भ्रष्टाचार सूचकांक 50 से कम है। इनमें ब्राजील (35), भारत (39), मैक्सिको (27), पाकिस्तान (28) और इराक (28) शामिल हैं। यह विशेष रूप से उन पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करते हैं।


    भ्रष्टाचार की कीमत

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 के बाद से 31 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर में काफी कमी की है। बाकी इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। इस अवधि के दौरान या तो वह स्थिर रहे हैं या बदतर हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत गिरकर 42 के नए निचले स्तर पर आ गया है, जबकि दो-तिहाई से अधिक देश 50 से नीचे स्कोर कर रहे हैं। लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल की सुविधाओं में कमी आती है। बाढ़ से निपटने की क्षमता पर असर पड़ता है। कुल मिलाकर यह युवाओं के सपनों पर खत्म कर देता है। इस सूचकांक में डेनमार्क 89 प्वॉइंट्स के साथ टॉप पर है। वह फिनलैंड और सिंगापुर से आगे है। वहीं, दक्षिण सूडान और सोमालिया की हालत भ्रष्टाचार के मामले में काफी खराब है। दोनों के नौ-नौ प्वॉइंट्स हैं। इनके बाद वेनेजुएला है।

  • शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज

    शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज


    नई दिल्ली । चीन के रक्षा मंत्रालय ने देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जनरल झांग योउशिया और जनरल लियू झेनली के खिलाफ जांच शुरू की गई है। झांग पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैंजो आमतौर पर भ्रष्टाचार मामलों में इस्तेमाल होती है।

    75 साल के झांगसेंट्रल मिलिट्री कमीशन CMC के उपाध्यक्ष और पोलितब्यूरो के सदस्य रहे हैं। CMC सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण में काम करती है। झांग ने 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जॉइन की थी और वे वरिष्ठ अधिकारी थे जिनके पास असली युद्ध का अनुभव था। उन्हें तय उम्र से आगे पद पर बनाए रखना शी के भरोसे को दर्शाता था।

    पिछले साल अक्टूबर में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने सेना के 9 बड़े जनरलों को सस्पेंड किया था। विशेषज्ञ इसे दशकों में सेना का सबसे बड़ा सफाई अभियान मानते हैं। इसके बाद 200,000 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के लिए कार्रवाई की गई है।

    शी जिनपिंग ने बार-बार कहा है कि भ्रष्टाचार पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हालांकि आलोचक मानते हैं कि यह अभियान केवल सुधार के लिए नहींबल्कि सत्ता को मजबूत करने और विरोधियों को हटाने का जरिया भी है। इस कार्रवाई को सेना को अनुशासित और शी के प्रति वफादार बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

  • खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

    खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा


    खरगोन । क्रांतिकारी आदिवासी नायक जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति स्थापना को लेकर उपजा विवाद अब शासन की कड़ी कार्रवाई और राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए खरगोन नगरपालिका में पदस्थ दो इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित की गई मूर्ति में बरती गई भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते की गई है।

    शासन की सख्त कार्रवाई

    नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी आदेश के तहत सहायक यंत्री मनीष महाजन और उपयंत्री जितेन्द्र मेढ़ा को निलंबित किया गया है। विभाग ने माना है कि मूर्ति स्थापना की प्रक्रिया में इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर चूक की और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

    क्या है पूरा विवाद करोड़ों की मंजूरी, कौड़ियों की मूर्ति

    विवाद की जड़ मूर्ति के निर्माण में हुआ कथित भ्रष्टाचार है। नगरपालिका की प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल PIC ने टंट्या मामा की भव्य कांस्य या पत्थर की मूर्ति के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से महज 75 हजार से 1 लाख रुपये की सस्ती की मूर्ति स्थापित कर दी। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, आदिवासी समाज और राजनीतिक गलियारों में आक्रोश फैल गया।

    भाजपा पार्षदों का सद्बुद्धि यज्ञ और मोर्चा

    हैरान करने वाली बात यह है कि खरगोन नगरपालिका में भाजपा का ही परिषद अध्यक्ष छाया जोशी है, लेकिन अब भाजपा पार्षदों ने ही अपनी ही परिषद के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रोलिंग का डर भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। विरोध का तरीका: पार्षद भागीरथ बड़ोले के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने गांधी प्रतिमा पर ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग की।

    कांग्रेस का अल्टीमेटम और चक्का जाम की चेतावनी

    कांग्रेस इस मुद्दे पर और अधिक हमलावर हो गई है। जिला अध्यक्ष रवि नायक ने इसे आदिवासी अस्मिता का अपमान बताते हुए प्रशासन के 45 दिनों के आश्वासन को ठुकरा दिया है। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से 60 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में भव्य धातु की मूर्ति स्थापित नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

    अब आगे क्या

    नगरपालिका ने अपनी गलती सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं नया टेंडर 19 जनवरी 2026 को धातु की नई मूर्ति के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है। समय सीमा 2 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 45 दिनों के भीतर नई मूर्ति स्थापित करने का दावा किया गया है।

  • हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    भोपाल से शिखिल ब्यौहार की रिपोर्ट मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के रोशनपुरा उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम का ऐलान किया उन्होंने कहा कि 24 जनवरी को कांग्रेस एक दिन उपवास रखेगी और शंकराचार्य की पूजा करेगी इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता साधु संत सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहेंगे पीसी शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने कभी यह नहीं पूछा कि शंकराचार्य कौन हैं लेकिन बीजेपी की सरकार ने ऐसा अपमान किया शिष्यों के साथ मारपीट की गई और हिंदुओं की भावनाओं का ठेस पहुंचाई गई उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट को भी तहस नहस किया गया और मोक्ष की जगह को भी उजाड़ दिया गया उन्होंने कहा कि भोपाल में गौ माता का अपमान हुआ और गौमाता काटी जा रही है

    पूर्व मंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार रावणी तत्वों की तरह कार्य कर रही है और यह लोग कभी राम के पदचिन्हों पर नहीं चल सकते उन्होंने अयोध्या की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने पर कहा कि मुझे वहां जाना पड़ा और सरकार को सद्बुद्धि की जरूरत है उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार व्याप्त है सड़क धसने के मामलों में ठेकेदारों पर कार्रवाई होती है लेकिन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती और सीएम हेल्पलाइन भी पूरी तरह असहाय हो गई है उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में हर जगह भ्रष्टाचार और मनमानी फैली हुई है

    पीसी शर्मा ने SIR में कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल की कार्रवाई का जिक्र किया उन्होंने कहा कि 7 नंबर फॉर्म हटा रहे हैं और बीजेपी कार्यालय से फर्म के जरिए अल्पसंख्यकों को जबरन फॉर्म दिए जा रहे हैं आदिवासी के नाम काटे जा रहे हैं उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फर्जीवाड़े से चुनाव जीते गए अब नाम जबरन काटने का काम किया जा रहा है कांग्रेस इस मामले में कड़ा एक्शन लेगीइसके अलावा उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जारी जमानती वारंट का भी जिक्र किया और कहा कि पुलिस को उनका पता नहीं मिल रहा है उन्होंने यह संकेत दिया कि बीजेपी की सरकार राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रही है पीसी शर्मा ने कहा कि हार जीत राजनीति में होती है लेकिन हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है

    पूर्व मंत्री ने प्रेस वार्ता में प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही की ओर भी ध्यान आकर्षित किया उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढांचा और कानून व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और आम जनता को सरकारी मदद नहीं मिल रहीकांग्रेस के उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम को लेकर शहर भर में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है और नेताओं और साधु संतों के शामिल होने से इसे और अधिक जोर मिलने की संभावना है

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।

  • नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित

    नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित


    रायपुर । छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों रुपये की खरीदी करने का मामला सामने आया है जिसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। इस वित्तीय अनियमितता और खरीदी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कॉलेज के प्राचार्य और तीन सहायक प्राध्यापकों समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला महासमुंद जिले के बाद सामने आया है, जहां भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गई थीं। अब नारायणपुर जिले में भी बिना निविदा टेंडर प्रक्रिया अपनाए पीएम-उषा फंड से खरीदी की गई है जिससे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
    क्या है पूरा मामला
    नारायणपुर जिले के नवीन वीरांगना रमोतिन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में पीएम उषा फंड से खरीदी किए गए उपकरणों और सामग्रियों को लेकर सवाल उठ रहे थे। नियमों के अनुसार, जब सरकारी फंड से किसी प्रकार की खरीदारी होती है तो टेंडर प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र कुमार पटेल और सहायक प्राध्यापकों भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद और नोहर राम को निलंबित कर दिया है। विभाग ने इन आरोपियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू करने का फैसला किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

    उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि विभाग लगातार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी फंड का सही उपयोग हो और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं। यह मामला उन लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा संदेश है जिनका भविष्य सरकारी योजनाओं और फंड्स पर निर्भर करता है। इसके अलावा इससे यह भी साबित होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी तरह के गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला

    इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला


    नई दिल्ली । पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को करारा झटका लगा है. फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने तोशाखाना II भ्रष्टाचार मामले में दोनों को 17-17 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया ।
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा इमरान खान को एक बेहद कीमती बुल्गारी ज्वेलरी सेट गिफ्ट में दिया गया था. जांच में सामने आया कि इस गहनों की वास्तविक कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी लेकिन इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीदकर नियमों का उल्लंघन किया गया. अदालत ने इसे सरकारी विश्वास के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्ट आचरण करार दिया ।
    इमरान खान 2023 से जेल में बंद
    यह फैसला अदियाला जेल में बनाए गए विशेष कोर्ट रूम में विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने सुनाया. गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से ही विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. तोशाखाना केस पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक हालांकि तोशाखाना मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी. इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे तोशाखाना मामले के इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे ।
  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बीच 4 क्रिकेटर निलंबित… लगे भ्रष्टाचार के आरोप

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बीच 4 क्रिकेटर निलंबित… लगे भ्रष्टाचार के आरोप


    गुवाहाटी।
    असम क्रिकेट संघ (एसीए) (Assam Cricket Association – ACA) ने चार क्रिकेटरों अमित सिन्हा, इशान अहमद, अमन त्रिपाठी और अभिषेक ठाकुरी को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 (Syed Mushtaq Ali Trophy 2025) के दौरान कथित भ्रष्ट आचरण में शामिल होने के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग चरण पर असम का प्रतिनिधित्व किया है और उनके खिलाफ राज्य पुलिस की अपराध शाखा में एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर असम के कुछ खिलाड़ियों को प्रभावित करने और उकसाने का प्रयास का आरोप लगाया गया है जिन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हिस्सा लिया था।

    एसीए सचिव सनातन दास ने कहा, ‘‘आरोप सामने आने के बाद बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी एवं सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने जांच की। एसीए ने भी आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया इनके गंभीर कदाचार में शामिल होने के संकेत मिलते हैं जो खेल की अखंडता को प्रभावित करता है। ’’

    असम के सैयद मुश्ताक लीग मैच 26 नवंबर से आठ दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित हुए थे और वह वर्तमान में जारी सुपर लीग चरण में प्रवेश करने में असफल रहा। दास ने कहा, ‘‘स्थिति के और अधिक बिगड़ने की किसी भी संभावना को रोकने के लिए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक जांच का अंतिम परिणाम नहीं आ जाता या संघ द्वारा कोई और निर्णय नहीं लिया जाता। ’’

    निलंबन अवधि के दौरान इन खिलाड़ियों को एसीए, उसकी जिला इकाइयों या संबद्ध क्लबों द्वारा आयोजित किसी भी राज्य-स्तरीय टूर्नामेंट या मैच में भाग लेने से रोक दिया गया है। निलंबन के दौरान मैच रेफरी, कोच, अंपायर आदि के रूप में किसी भी क्रिकेट संबंधित गतिविधि में भाग लेना भी प्रतिबंधित है। दास ने कहा कि सभी जिला संघों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्लबों और अकादमियों को एसीए के निर्णय की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।