Tag: corruption
-

इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली । पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को करारा झटका लगा है. फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने तोशाखाना II भ्रष्टाचार मामले में दोनों को 17-17 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया ।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा इमरान खान को एक बेहद कीमती बुल्गारी ज्वेलरी सेट गिफ्ट में दिया गया था. जांच में सामने आया कि इस गहनों की वास्तविक कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी लेकिन इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीदकर नियमों का उल्लंघन किया गया. अदालत ने इसे सरकारी विश्वास के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्ट आचरण करार दिया ।इमरान खान 2023 से जेल में बंदयह फैसला अदियाला जेल में बनाए गए विशेष कोर्ट रूम में विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने सुनाया. गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से ही विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. तोशाखाना केस पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक हालांकि तोशाखाना मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी. इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे तोशाखाना मामले के इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे । -

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बीच 4 क्रिकेटर निलंबित… लगे भ्रष्टाचार के आरोप
गुवाहाटी। असम क्रिकेट संघ (एसीए) (Assam Cricket Association – ACA) ने चार क्रिकेटरों अमित सिन्हा, इशान अहमद, अमन त्रिपाठी और अभिषेक ठाकुरी को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 (Syed Mushtaq Ali Trophy 2025) के दौरान कथित भ्रष्ट आचरण में शामिल होने के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग चरण पर असम का प्रतिनिधित्व किया है और उनके खिलाफ राज्य पुलिस की अपराध शाखा में एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर असम के कुछ खिलाड़ियों को प्रभावित करने और उकसाने का प्रयास का आरोप लगाया गया है जिन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हिस्सा लिया था।एसीए सचिव सनातन दास ने कहा, ‘‘आरोप सामने आने के बाद बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी एवं सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने जांच की। एसीए ने भी आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया इनके गंभीर कदाचार में शामिल होने के संकेत मिलते हैं जो खेल की अखंडता को प्रभावित करता है। ’’
असम के सैयद मुश्ताक लीग मैच 26 नवंबर से आठ दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित हुए थे और वह वर्तमान में जारी सुपर लीग चरण में प्रवेश करने में असफल रहा। दास ने कहा, ‘‘स्थिति के और अधिक बिगड़ने की किसी भी संभावना को रोकने के लिए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक जांच का अंतिम परिणाम नहीं आ जाता या संघ द्वारा कोई और निर्णय नहीं लिया जाता। ’’
निलंबन अवधि के दौरान इन खिलाड़ियों को एसीए, उसकी जिला इकाइयों या संबद्ध क्लबों द्वारा आयोजित किसी भी राज्य-स्तरीय टूर्नामेंट या मैच में भाग लेने से रोक दिया गया है। निलंबन के दौरान मैच रेफरी, कोच, अंपायर आदि के रूप में किसी भी क्रिकेट संबंधित गतिविधि में भाग लेना भी प्रतिबंधित है। दास ने कहा कि सभी जिला संघों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्लबों और अकादमियों को एसीए के निर्णय की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।
-

इंदौर सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की मामले में कार्रवाई, एक निलंबित, एक का वेतन काटा
इंदौर । इंदौर के एमवायएच अस्पताल में एक बार फिर शासकीय डॉक्टरों की लापरवाही और निजी अस्पतालों को मरीज भेजने का मामला सामने आया है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर किया है जहां सरकारी अस्पतालों से लाखों रुपये की सैलरी लेने वाले डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय निजी अस्पतालों से रिश्वत लेने में व्यस्त रहते हैं।हाल ही में एक मरीज, जो रतलाम से न्यूरोसर्जरी विभाग में इलाज के लिए एमवायएच अस्पताल आया था, का इलाज करने के बजाय उसे निजी अस्पताल भेजने का मामला सामने आया। रात के समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज को इलाज के लिए भेजने के बजाय उसे जमीन पर लिटा दिया और कहा कि उसका आयुष्मान कार्ड है, इसलिए उसे इंडेक्स अस्पताल में भेजा जाए। यह सारी प्रक्रिया मरीज द्वारा लिखित शिकायत करने के बाद उजागर हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि एमसीएच के एक विद्यार्थी ने मरीज को निजी अस्पताल भेजने का निर्णय लिया था, और इसके बदले उसे निजी अस्पताल से रकम मिलती थी। इस मामले की जांच के बाद डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है।
इतना ही नहीं एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की यह घटना अकेली नहीं है। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को इमरजेंसी इलाज देने में भी परेशानी होती है। हाल ही में सिमरोल सड़क हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया था, लेकिन इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। कलेक्टर के अस्पताल पहुंचने पर यह लापरवाही सामने आई। दो घंटे बाद जब महिला सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर आईं, तो उन्होंने बताया कि वह घर पर आराम कर रही थीं। इस लापरवाही के लिए डीन ने महिला डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया।
अस्पताल में भर्ती मरीजों की कमी के पीछे भी इन डॉक्टरों की लापरवाही और निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ मुख्य कारण मानी जा रही है। एमवायएच अस्पताल के हड्डी रोग विभाग, पेट रोग विभाग, मेडिसिन विभाग और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर भी मरीजों को निजी अस्पताल भेजने के इस गिरोह में शामिल हैं। इन गिरोहों के संरक्षण में ही ड्यूटी डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर यह कृत्य कर रहे हैं। इसके अलावा एंबुलेंस संचालक स्टाफ और आउटसोर्स कंपनियों के कर्मचारी भी इन गतिविधियों में शामिल हैं। इस कारण से सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या घटती जा रही है, और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना में एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है, और ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने वाली सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को बर्खास्त किया गया है।
यह घटना इंदौर के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करती है। मरीजों की जान से खेलने वाले इन डॉक्टरों और उनके गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि जनता को उचित इलाज मिल सके और सरकारी अस्पतालों में विश्वास पुनः बहाल हो।