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  • प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में हुआ है खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में हुआ है खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को “नए भारत की नई खादी” के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को एक बयान में कहा कि आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मप्र खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों 2023-24 से 2025-26 में कुल 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख, 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख और 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण दिया गया।

    उन्होंने कहा कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गाँव की ओर जाओ’ संदेश को साकार करते हुए बोर्ड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, परंपरागत कारीगरी को आधुनिक नवाचार से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

    प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत, भारत में बनाओ, स्वदेशी के लिए मुखर, स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियानों और “सबका साथ, सबका विकास” मंत्र ने खादी एवं ग्रामोद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। “स्थानीय से वैश्विक” का दृष्टिकोण कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है।

    राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 50 हजार से 5 लाख तक की ऋण सुविधा व्यक्तिगत बुनकर, उद्यमी, स्व-सहायता समूह, हथकरघा संगठन और सहकारी समितियों को दी जा रही है। बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में तीन वर्षों में 616 बुनकर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर बीमित किए गए। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में 436 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का जीवन बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा मिल रहा है।

    राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी एवं पॉलीवस्त्र खादी के साथ मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा दे रहा है। विपणन के लिए “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” जैसे नाम स्थापित किए गए हैं जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक हैं। “अपना हाथ – अपना साथ” के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

    प्रबंध संचालक माल सिंह भयड़िया ने बताया कि महात्मा गांधी जी के “गाँव की ओर चलो” आह्वान से प्रेरित होकर मंडल ने ग्रामोद्योग को आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया है। सुव्यवस्थित योजनाओं से ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार मिल रहा है। बोर्ड की नई अंतरजाल साइट कारीगरों, उद्यमियों एवं समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शनियाँ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं।

    तीन वर्षों की प्रगति एक नजर में

    – बुनकर मुद्रा योजना: 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित
    – प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: 616 बुनकर बीमित
    – प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: 840 बुनकर बीमित

  • क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम

    क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम


    नई दिल्ली।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म (Hinduism) में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बड़ा चार धाम’ (‘Big Four Dham’) भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए-


    किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम?

    बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है.
    बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित
    रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
    द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर
    पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार)


    बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत)

    बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे।


    रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत)

    रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है.


    द्वारका धाम (पश्चिम भारत)

    द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है.


    जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत)

    पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं.


    क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा?

    बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है।


    चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर

    छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है।

    दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है।


    बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स

    1. पहले से प्लान करें
    यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है.


    2. सही समय चुनें

    रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है.


    3. जरूरी पेपर रखें

    बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है.


    4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें

    इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें.


    5. लोकल गाइड लें

    इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी.

    6. कैश साथ रखें
    हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.

  • देश में LPG की खपत में गिरावट, मार्च में 13 प्रतिशत घटकर 24 लाख टन पहुंची

    देश में LPG की खपत में गिरावट, मार्च में 13 प्रतिशत घटकर 24 लाख टन पहुंची


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के चलते आपूर्ति शृंखला (Supply) में आई रुकावटों के चलते भारत (India) में एलपीजी (LPG) की खपत मार्च में तेजी से घटी। इस दौरान एलपीजी की खपत करीब 13% घटकर 23.79 लाख टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 27.29 लाख टन थी।

    पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार, मार्च में घरेलू एलपीजी आपूर्ति 8.1 फीसदी घटकर 22.19 लाख टन रह गई, जबकि गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली आपूर्ति में लगभग 48 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। थोक एलपीजी बिक्री 75% कम हुई। इस बीच, 39,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किए हैं।


    मार्च में स्थिर ही विमानन ईंधन की खपत

    विमानन ईंधन की खपत मार्च में लगभग स्थिर रही और यह करीब 8.07 लाख टन दर्ज की गई, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल की मांग मजबूत रही। मार्च में पेट्रोल की खपत 7.6 फीसदी बढ़कर 37.8 लाख टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 फीसदी बढ़कर 87.27 लाख टन हो गई।

    भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। सैन्य तनाव के कारण इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा आई, जिससे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आपूर्ति प्रभावित हुई। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए होटल, उद्योग और अन्य वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए एलपीजी आपूर्ति में कटौती की।

  • देश में गर्मी दिखाने लगी तीखे तेवर… कई शहरों में तापमान पहुंचा 40 डिग्री के आसपास

    देश में गर्मी दिखाने लगी तीखे तेवर… कई शहरों में तापमान पहुंचा 40 डिग्री के आसपास


    नई दिल्ली।
    पिछले कुछ दिनों के दौरान हल्की बारिश के बाद अब गर्मी (Heat wave ) ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत (North India) के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (Temperature 40 degrees Celsius) के आसपास पहुंच गया है और अगले पांच दिनों के दौरान इसके 40 डिग्री के पार जाने की संभावना है। राजस्थान में कई जगह तो पहले ही तापमान 40 डिग्री से ज्यादा हो गया है। इस सप्ताह, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में लू चलने और उमस भरे मौसम रहने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर भारत में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश के आसार हैं।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक बीते 24 घंटों के दौरान उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ स्थानों पर 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तटीय महाराष्ट्र, ओडिशा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर आंधी आई। वहीं, सौराष्ट्र और कच्छ, नगालैंड, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश भी दर्ज की गई। दिल्ली, यूपी और राजस्थान में शुष्क मौसम के साथ तेज धूप का असर दिखने लगा है। कोलकाता में भी उमस भरी गर्मी बढ़ गई है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जो आने वाले पांच दिनों में 42 डिग्री तक पहुंच सकता है। उत्तर प्रदेश में बांदा 40.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा


    आज रात सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ

    मौसम विभाग ने बताया कि बुधवार की रात से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में एक नए कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 15 से 18 अप्रैल के दौरान हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा और बर्फबारी हो सकती है। कुछ जगहों पर गरज के साथ बिजली कड़कने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश में 17 से 19 अप्रैल के दौरान छिटपुट वर्षा हो सकती है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 17 और 18 अप्रैल को बारिश होने और 30-40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 17 और 18 अप्रैल को हल्की ओलावृष्टि भी हो सकती है।


    पूर्वोत्तर में कुछ जगहों पर भारी बारिश के आसार

    असम और मेघालय में 18 अप्रैल तक छिटपुट बारिश, गरज और चमक के साथ 30-50 किमी की गति से हवा चल सकती है। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर बिजली गिरने की संभावना है। 15 से 17 अप्रैल के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी यही स्थिति रहेगी। 15 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश में और 18 अप्रैल को असम, मेघालय और नागालैंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।


    राजस्थान में बाड़मेर व ओडिशा में टिटलगढ़ रहा सबसे गर्म

    राजस्थान में पिछले 24 घंटों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। चुरू, चितौड़गढ़, कोटा और बाड़मेर में पारा 40 डिग्री के पार चला गया है। प्रदेश में बाड़मेर में सबसे अधिक तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 17 और 18 अप्रैल को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों, विशेषकर जोधपुर और बीकानेर डिवीजनों में, अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा सकता है। कुछ स्थानों पर लू चलने की संभावना है। ओडिशा में कई स्थानों पर लू चल रही है। टिटलगढ़ में सबसे अधिक 41.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

  • देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त

    देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त


    नई दिल्ली।
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board- PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा (Anjan Kumar Mishra) ने कहा है कि भारत का तरल ईंधन का मौजूदा भंडार देश की 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, इसे इस तरह से नहीं बढ़ाया जा सकता कि यह कई महीनों तक चल सके। नई दिल्ली में आयोजित ‘पीएचडीसीसीआई हाइड्रोकार्बन समिट 2026’ के दौरान उन्होंने मौजूदा ऊर्जा स्थिति और वैश्विक संकट पर विस्तार से चर्चा की।


    ईंधन भंडार और पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

    मिश्रा ने कहा कि हमारे पास पहले से ही तरल ईंधन का रिजर्व मौजूद है, लेकिन ऐसा भंडार नहीं बनाया जा सकता जो छह महीने तक चले। यह 20 से 40 दिनों की मांग को पूरा कर सकता है, लेकिन उससे लंबी अवधि के लिए नहीं। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि इसका असर भारत पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह झूठ नहीं बोलूंगा कि इसका असर भारत पर हो रहा है, लेकिन निश्चित रूप से सरकार ने पूरी योजना बना ली है और हम स्थिति पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।’


    देश में कोई संकट नहीं, पड़ोसियों की भी हो रही मदद

    वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुई चिंताओं को खारिज करते हुए पीएनजीआरबी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि देश में जीवाश्म ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में तरल ईंधन का कोई संकट नहीं है और पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मिश्रा ने बताया कि भारत इस संकट की घड़ी में केवल अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है।


    आयात निर्भरता और तेल खरीद के नए विकल्प

    आयात पर निर्भरता कम करने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाना एक क्रमिक प्रक्रिया है। सरकार के हालिया प्रयासों और नई खोजों के बावजूद इसे रातों-रात हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कच्चे तेल की खरीद का दायरा काफी बढ़ाया है। अब आपूर्ति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आ रहा है। इसके अलावा मोजाम्बिक और अंगोला में भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।


    कीमतों में उछाल अस्थायी होगा

    अगर वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होती है, तो इस चिंता पर मिश्रा ने कहा कि इसका असर केवल कुछ समय के लिए होगा। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो हम स्थिति को संभालने में सक्षम होंगे… जो भी मूल्य वृद्धि होगी, वह बहुत ही अस्थायी होगी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कीमतें अंततः संकट से पहले के स्तर पर लौट आएंगी।

  • देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय

    देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय


    नई दिल्ली।
    देश में पाचन संबंधी बीमारियां (Digestive diseases) तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोग गंभीर बीमारियों को लेकर अब भी जागरूकता नहीं हैं। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट (National Survey Perception Audit) में पता चला कि दिल्ली (Delhi) के 80% लोग नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal cancer) (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने यह सर्वे 14 बड़े भारतीय शहरों में किया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में एक कार्यक्रम में साझा किए गए। दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है।


    सर्वे में शामिल शहर

    सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिये से सर्वे किया गया।


    सर्वे का परिणाम

    – करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं।
    – 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है।
    – 80% फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते।
    – 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। 35.5% लोग नियमित व्यायाम करते हैं।


    डॉक्टर की सलाह

    – बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी जरूरी।

    डॉक्टरों ने दी चेतावनी
    ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम कम कर सकते हैं।

  • मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

    मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ने डिजिटल सेवाओं के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए) रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश के देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि हमारे सद्प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता, जनहितैषी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन के मानकों के अनुसार यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होकर पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गर्व का विषय है कि प्रदेश में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 1,752 ई-सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन दी जा रही हैं, जिससे लोगों को सरकारी काम के लिए दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं। खास बात यह है कि 59 अनिवार्य सेवाओं को 100 प्रतिशत लागू भी किया गया है। प्रदेश में डिजिटल सेवाओं के विस्तार में काफी तेजी दिखाई है। अब गांव से लेकर शहर तक लोग ऑनलाइन ही कई जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

    राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, ई-सेवाओं की संख्या के आधार पर कर्नाटक ने 2,102 सेवाओं के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि 1,752 सेवाओं के साथ मध्य प्रदेश दूसरे, 1,645 सेवाओं के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे और 1,634 ई-सेवाओं के साथ तमिलनाडु चौथे स्थान पर है।

  • 2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण

    2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2033 तक देश के सभी नागरिकों को बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह एक मजबूत और समावेशी इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है, जहां सरकार की नीतियों के कारण समाज के सबसे निचले तबके को भी सुरक्षा कवच मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा क्षेत्र का आकार 1,17,505 करोड़ रुपये हो गया, जिसके तहत देश के 58 करोड़ लोगों को कवर किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 42,420 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया है। निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 37,752 करोड़ रुपये है। स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का योगदान 37,331 करोड़ रुपये है।

    उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 2.51 करोड़ व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां जारी हुईं, जिनसे 6.01 करोड़ लोगों को कवर मिला। इसके अतिरिक्त, 13.05 लाख ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के जरिए 27.51 करोड़ सदस्य कवर किए गए हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति प्रीमियम 943 डॉलर है, जबकि भारत में यह केवल 97 डॉलर है। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार कई लक्षित सुधार कर रही है। व्यक्तिगत प्रीमियम पर जीएसटी छूट और ग्रामीण व सामाजिक क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए नियामक संस्था इरडा द्वारा 2024 में अधिसूचित नए नियम इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके अलावा, बाजार में गहराई लाने और पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार दिसंबर 2025 में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए एक विधेयक लेकर आई।

    वित्त मंत्री ने कहा कि देश के सबसे गरीब नागरिकों को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मात्र 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का लाइफ कवर देती है। इसमें अब तक 26.79 करोड़ नामांकन हो चुके हैं। आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई) देश की 40 प्रतिशत निचली आबादी (लगभग 12 करोड़ परिवार) को हर साल 5 लाख रुपये का अस्पताल खर्च कवर देती है। 28 फरवरी 2026 तक देश भर में 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

  • देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…

    देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…


    नई दिल्ली ।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में मौसम ने एक बार फिर करवट की है। हिमालयी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों पर हिमपात और घाटियों व आसपास के मैदानी इलाकों में गरज के साथ बारिश (Rain), तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने से तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उससे सटे आसपास के मैदानी इलाकों में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय (Western Disturbance Active) हो रहा है, जिसके चलते 18 से 20 मार्च के दौरान इन इलाकों में बारिश और तूफानी हवाओं के साथ कहीं-कहीं ओले गिरने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सोमवार सुबह 8:30 बजे तक आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर के राज्यों और झारखंड में छिटपुट स्थानों पर ओलावृष्टि हुई।

    उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-20 सेमी) दर्ज की गई है। अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-11 सेमी) हुई। बंगाल के कोलकाता और मालद में कुछ जगहों पर 50-65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी में फंसे 235 लोग निकाले

    जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के सिंथन टॉप पर रविवार रात भारी बर्फबारी में फंसे 235 लोगों और 38 गाड़ियों को सेना ने सुरक्षित निकाला लिया है। व्हाइट नाइट कोर के जवानों ने लोगों को गर्म खाना, पीने का पानी और रहने की जगह भी दी। वहीं, डांगदुरु में भूस्खलन के बाद से लापता व्यक्ति का सुराग सोमवार को भी नहीं लग पाया है। बचाव कार्य जारी है।


    उत्तराखंड में ठंड ने फिर दी दस्तक

    उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है। रविवार रात ऊंची चोटियों पर जहां भारी हिमपात हुआ वहीं निचले इलाकों में बादलों के गरजने के साथ हुई झमाझम बारिश ने ठिठुरन बढ़ा दी है। मुनस्यारी के खलिया टॉप, पंचाचूली, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार की पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है।


    लाहौल से 10 हजार पर्यटक निकाले

    हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। मनाली-लेह मार्ग पर 1,500 वाहनों में फंसे 10 हजार सैलानी और स्थानीय लोग रोहतांग टनल होकर सुरक्षित निकाल लिए गए हैं। रविवार को रातभर कड़ाके की ठंड के बीच लोगों को गाड़ियों में ही रहना पड़ा।

  • ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?

    ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?


    नई दिल्ली।
    वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध (America, Israel, and Iran War) ने मध्य पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर गहरा असर पड़ रहा है। इस तनाव के कारण भारत की 40% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अचानक ठप हो गई है। यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं है; इसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था, उद्योगों की रफ्तार और भविष्य में महंगाई की दर पर पड़ सकता है। सरकार एक्शन मोड में है और पेट्रोलियम मंत्रालय युद्ध स्तर पर ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ (गैस वितरण की नई योजना) तैयार कर रहा है। आइए इस संकट की गहराई, उद्योगों पर इसके प्रभाव और भारत के ‘प्लान बी’ का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।


    संकट के मुख्य कारण

    वर्तमान संकट की जड़ मध्य पूर्व में है। मार्च 2026 तक, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। कतर ने अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे यूरोप और भारत जैसे आयातकों पर दबाव बढ़ा है। भारत के लिए यह इसलिए गंभीर है क्योंकि उसकी लगभग 52% कच्चे तेल की आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक तेल कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो फरवरी 2026 के 72 डॉलर से 15% ऊपर है। भारत में एलपीजी (कुकिंग गैस) की कीमतें 7% बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हो गई हैं, जबकि कमर्शियल एलपीजी 1,883 रुपये तक पहुंच गई है।

    भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता FY26 के पहले 10 महीनों में 88.6% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 88.2% से अधिक है। घरेलू उत्पादन स्थिर रहने (23.5 मिलियन टन) के बावजूद मांग 1.6% बढ़कर 202.2 मिलियन टन हो गई है। एलएनजी आयात में भी 50% कटौती की संभावना है, क्योंकि पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से सप्लाई पर फोर्स मेजर घोषित कर दिया है।

    यह खबर आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
    यह संकट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। LNG का उपयोग सिर्फ कारखानों में नहीं होता, बल्कि यह शहरों में पाइप वाली गैस (PNG), वाहनों के ईंधन (CNG), बिजली उत्पादन और कृषि (उर्वरक) के लिए रीढ़ की हड्डी है। गैस की सप्लाई घटने से खुले बाजार में इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे परोक्ष रूप से परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा के उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इसलिए, इस संकट को समझना हर नागरिक के लिए आवश्यक है।


    किन उद्योगों पर गिरेगी गाज?

    सरकार के नए ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ के तहत गैस की राशनिंग तय है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर बांटा जाएगा। गैर-प्राथमिकता वाले उद्योग (सबसे बड़ा खतरा): रिपोर्ट के अनुसार, गैर-प्राथमिकता वाले सेक्टरों को गैस सप्लाई में भारी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें तुरंत कोयला, नेफ्था या फर्नेस ऑयल जैसे वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख करना होगा।

    आम तौर पर सिरेमिक, कांच उद्योग, स्पंज आयरन और कुछ पेट्रोकेमिकल इकाइयों को गैर-प्राथमिकता की श्रेणी में रखा जाता है। इन उद्योगों में उत्पादन धीमा होने की आशंका है। फर्टिलाइजर सेक्टर प्राथमिकता वाला है, लेकिन कटौती संभव है: यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली 60% LNG अकेले कतर से आती है। हालांकि सरकार इसे ‘प्राथमिकता’ मानती है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में भी हल्की कटौती से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

    खेती और किसानों के लिए क्या है स्थिति?
    कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए फिलहाल पैनिक (घबराने) का कोई कारण नहीं है। सरकार और उद्योग ने इसके लिए पहले से एक मजबूत ‘शॉक-एब्जॉर्बर’ तैयार रखा है। खरीफ की बुवाई जून में शुरू होगी। अभी मांग कम है, इसलिए उर्वरक कंपनियां अपने कारखानों का नियमित रखरखाव कर रही हैं। देश में उर्वरक का 17.7 मिलियन टन (MT) का सुरक्षित भंडार है, जो पिछले साल (लगभग 13 MT) की तुलना में 36.5% अधिक है। DAP और NPK की बहुतायत: इनका स्टॉक पिछले साल से 70-80% अधिक है। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए भारत ने अपनी सप्लाई चेन को विविध किया है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे।


    भारत कैसे करेगा अपनी जरूरतें पूरी?

    भारत हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। गैस की इस भारी कमी को पूरा करने के लिए ‘प्लान बी’ पर तेजी से काम हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की ओर रुख: भारत अपनी 60% LNG पहले से ही पश्चिम एशिया के बाहर से मंगाता है। अब कतर की भरपाई के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की कंपनियों से अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत तेज कर दी गई है।


    सामने खड़ी हैं 2 बड़ी चुनौतियां

    जहाजों का इंतजाम: अचानक नई जगह से गैस लाने के लिए विशेष क्रायोजेनिक LNG टैंकर (जहाज) रातों-रात जुटाना बेहद मुश्किल है।
    लिक्विफिकेशन क्षमता: जिन नए देशों से हम गैस मांग रहे हैं, उनके पास गैस को तरल में बदलने की अतिरिक्त क्षमता तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए।