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  • चीफ जस्टिस की कॉकरोच टिप्पणी के दुरुपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को भेजा नोटिस

    चीफ जस्टिस की कॉकरोच टिप्पणी के दुरुपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को भेजा नोटिस


    नई दिल्ली । 
    भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्चुअल अदालती कार्यवाही के वीडियो को संपादित कर सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रसारित करने और उसका व्यावसायिक उपयोग करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर केंद्र सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से विस्तृत जवाब तलब किया है।

    यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा तीन माह पूर्व एक सुनवाई के दौरान की गई कॉकरोच टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालती कार्यवाही की चुनिंदा वीडियो क्लिप्स को चालाकी से एडिट कर सार्वजनिक किया गया जिसका मूल संदर्भ से कोई संबंध नहीं था।

    याचिकाकर्ता के अनुसार 15 मई को फर्जी वकीलों और अदालती प्रक्रियाओं के दुरुपयोग पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की थी। हालांकि बाद में इस वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मीम्स और व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रचारित किया गया।

    याचिका में दलील दी गई है कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जजों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। वर्तमान में अदालती कार्यवाहियों के अनधिकृत उपयोग और उससे होने वाली कमाई को रोकने के लिए कोई प्रभावी कानूनी तंत्र उपलब्ध नहीं है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न विधिक हलकों में न्यायालयीन कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही है। शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से इस प्रकार के दुरुपयोग को रोकने तथा संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों की जांच करने के संबंध में रुख स्पष्ट करने को कहा है।

  • थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म जगत और तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अभिनेता और नेता थलापति विजय के वैवाहिक जीवन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब नया अपडेट सामने आया है। उनकी पत्नी संगीता ने तलाक के लिए दायर की गई अर्जी वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही विजय और संगीता के अलग होने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दोनों के बीच कथित मतभेद और अलगाव की चर्चाओं ने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा था। अब तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर स्थिति बदलती नजर आ रही है।

    जानकारी के अनुसार, संगीता ने विजय से अलग होने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया। इसके बाद संबंधित अदालत ने तलाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय मामले को समाप्त कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद विजय के समर्थकों ने भी राहत महसूस की।

    इससे पहले दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वैवाहिक विवाद की वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ी थी। विजय का नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा गया था, हालांकि इन चर्चाओं को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

    विजय और संगीता की शादी वर्ष 1999 में हुई थी। दोनों करीब 27 वर्षों से साथ हैं। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हुए। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है। परिवार और निजी जीवन को लेकर विजय हमेशा काफी निजी रवैया रखते रहे हैं।

    थलापति विजय ने अभिनय के क्षेत्र में लंबा सफर तय करने के बाद राजनीति में भी कदम रखा है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने के बाद उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों पर भी लोगों की नजर बनी हुई थी।

    तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाएं एक नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की जोड़ी दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत की चर्चित जोड़ियों में रही है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद उनके अलग होने की खबरों ने प्रशंसकों को चिंता में डाल दिया था। अब अदालत में मामला खत्म होने के बाद उनके समर्थकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    फिलहाल यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है और विजय-संगीता के वैवाहिक संबंधों को लेकर आगे की स्थिति उनके व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि फिल्मी सितारों के निजी जीवन से जुड़ी खबरें किस तरह लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाती हैं।

  • अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गए हैं। अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या भाजपा उन्हें फिर सक्रिय भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल परिवार के जरिए ही आगे बढ़ेगी।

    टिकट कटा, लेकिन क्षेत्र में बनी रही सक्रियता
    महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के इस फैसले को कानूनी विवाद से दूरी बनाने की रणनीति माना गया। हालांकि, करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में बृजभूषण का जनाधार और संगठनात्मक प्रभाव कायम है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग नहीं किया। देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में उनके लगातार कार्यक्रम होते रहे और समर्थकों से संपर्क बना रहा। अदालत से राहत मिलने के बाद उनके आवास पर जुटी समर्थकों की भीड़ को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    समर्थकों ने फैसले को बताया न्याय की जीत
    कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल उनके पिता की नहीं, बल्कि न्याय की जीत है। उन्होंने आरोप लगाने वालों और विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अदालत का फैसला सच्चाई की पुष्टि करता है।

    ‘एक बार फिर संसद जाऊंगा’ बयान फिर चर्चा में

    बृजभूषण शरण सिंह पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि वे एक बार फिर संसद पहुंचेंगे। अदालत से बरी होने के बाद उनके इस बयान को नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधाएं समाप्त होने के बाद उनके लिए सक्रिय राजनीति के रास्ते फिर खुल सकते हैं।

    भाजपा के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती
    हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अदालत से राहत मिलने के बावजूद भाजपा का फैसला केवल कानूनी आधार पर नहीं होगा। पार्टी संगठन, सामाजिक संदेश, राष्ट्रीय छवि और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही आगे की रणनीति तय करेगी।

    फिलहाल दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है
    2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
    यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी भी संभव मानी जा रही है।
    हालांकि इन संभावनाओं पर भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

    मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क बना बड़ी ताकत
    गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में बृजभूषण शरण सिंह का मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी बरकरार है। उनके बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि प्रतीक भूषण सिंह गोंडा जिले से विधायक हैं। ऐसे में अदालत के फैसले के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि
    जनवरी 2023 में महिला पहलवानों की शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया था। लगभग तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 2 जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है।

  • संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका

    संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका


    नई दिल्ली । दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर से जुड़े संपत्ति विवाद में एक बार फिर नया कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके रोजमर्रा के खर्चों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। इस याचिका के बाद संपत्ति विवाद की जटिलताएं और बढ़ती दिखाई दे रही हैं, हालांकि अदालत पहले से ही इस मामले में अंतरिम आदेशों के तहत स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

    प्रिया कपूर की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से जारी रहने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगी है, ताकि स्कूल फीस और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्च समय पर पूरे किए जा सकें। यह मामला मुख्य रूप से संजय कपूर की बेटी समायरा और बेटे कियान की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित बताया जा रहा है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ विदेशी संयुक्त खातों के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि बच्चों की विदेश में शिक्षा, रहने और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा किया जा सके। इस पहल को परिवार की ओर से बच्चों के हितों की सुरक्षा और उनकी शिक्षा को बाधित न होने देने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब संपत्ति से जुड़े कई पहलुओं पर पहले से ही कानूनी जांच और विवाद चल रहा है।

    इससे पहले अदालत ने इस मामले में संपत्ति के बड़े और स्थायी निर्णयों पर रोक लगाते हुए स्थिति को यथावत बनाए रखने के आदेश दिए थे। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के अधिकारों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि, बच्चों से जुड़े आवश्यक खर्चों को लेकर अदालत ने पहले भी संवेदनशील रुख अपनाया है और जरूरतों के आधार पर सीमित अनुमति देने पर विचार किया गया है।

    संजय कपूर के निधन के बाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी कथित वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद सामने आए। अलग-अलग पक्षों की ओर से संपत्ति के अधिकारों और प्रबंधन को लेकर दावे किए जाने लगे, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। समय के साथ यह विवाद और जटिल होता गया और इसमें कई कानूनी पहलू जुड़ते चले गए।

    अब प्रिया कपूर की नई याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस नए अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और बच्चों के हितों तथा संपत्ति विवाद के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और सभी पक्ष अदालत के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इस लंबे चल रहे विवाद की दिशा तय हो सकती है।

  • US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध

    US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क (10% Global Import Duty) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था।

    राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है।


    क्या है धारा 122?

    यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था।


    इन क्षेत्रों पर असर नहीं

    ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं।


    सरकार की दलील?

    ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था।


    आगे क्या होगा?

    अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।

  • स्पाइसजेट को कोर्ट से बड़ा झटका, रियल एस्टेट निवेश में रिकॉर्ड 37% उछाल

    स्पाइसजेट को कोर्ट से बड़ा झटका, रियल एस्टेट निवेश में रिकॉर्ड 37% उछाल

    नई दिल्ली। देश के बिजनेस सेक्टर में एक ही दिन दो अलग-अलग तरह की खबरें सामने आई हैं, जिनमें एक तरफ विमानन क्षेत्र की कंपनी को कानूनी झटका लगा है, तो दूसरी तरफ रियल एस्टेट बाजार में निवेश में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह दोनों घटनाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के दो अलग-अलग रुझानों को दर्शाती हैं।

    विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी स्पाइसजेट और उसके प्रमोटर को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कंपनी की ओर से दायर की गई एक पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने कंपनी और उसके प्रमोटर पर जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले दिए गए आदेश में कंपनी को एक बड़ी राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे लेकर पुनर्विचार की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    कंपनी की ओर से यह दलील दी गई थी कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक दबावों के कारण उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। साथ ही कुछ संपत्तियों को सुरक्षा के रूप में देने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। इस फैसले के बाद कंपनी पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।

    दूसरी ओर रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में इस क्षेत्र में निवेश में 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और कुल निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा इस क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। निवेशक अब स्थिर और आय देने वाली संपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। खासकर वाणिज्यिक संपत्तियों में निवेश बढ़ने से बाजार में स्थिरता और विकास दोनों का संकेत मिल रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों की रुचि बढ़ने से इस सेक्टर में आगे भी विस्तार की संभावना है। लगातार बढ़ता निवेश यह दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक भरोसा कायम है।

    कुल मिलाकर एक तरफ स्पाइसजेट को कानूनी और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के सकारात्मक पक्ष को दर्शा रही है। दोनों घटनाएं मिलकर देश के कारोबारी माहौल की एक संतुलित तस्वीर पेश करती हैं, जिसमें चुनौतियां भी हैं और मजबूत अवसर भी लगातार बन रहे हैं।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि केसः अदालत में पेश होंगी भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की मूर्तियां

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि केसः अदालत में पेश होंगी भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की मूर्तियां


    मथुरा ।
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Shri Krishna Janmabhoomi) बनाम शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Eidgah Mosque) मामले में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के विश्वरूप एवं अन्य देवों की मूर्तियों के तथ्य अदालत में पेश किए जाएंगे। ये मूर्तियां समय समय पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र में कराई गई खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं जो इस समय मथुरा के राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं। जन्मभूमि पक्ष ने पत्र के माध्यम से इन सभी के बारे में पूरी जानकारी संग्रहालय से प्राप्त कर ली है। जन्मभूमि पक्ष इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानकर चल रहा है।

    मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जन्मभूमि पक्ष यह बात रख रहा है कि जहां वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद बनी है वही क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक जन्मस्थान है जबकि मस्जिद पक्ष इसका विरोध कर रहा है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में जन्मभूमि पक्ष वाद बिंदू तय कराने के लिए अपनी दलील पेश कर रहा है जबकि मस्जिद पक्ष ने दलील दी है कि दूसरा पक्ष पहले यह तो साबित करे कि यह आस्था का विषय है। दोनों पक्ष अपनी अपनी बात के लिए तमाम साक्ष्य जुटा रहे हैं।

    इस मामले के वादी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने आरटीआई के माध्यम से राजकीय संग्रहालय से उन मूर्तियों की जानकारी जुटाई है जो विभिन्न समय पर इस क्षेत्र में हुई खुदाई में प्राप्त हुई हैं। वहां से विधिवत सूचना प्रेषित कर दी गई है। ऐसी सात मूर्तियां एवं स्तंभ की जानकारी दी गई जो यहां से प्राप्त हुए हैं। इनमें से तीन मूर्ति व एक स्तंभ ऐसा है जिसे हिंदू पक्ष अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानकर चल रहा है।

    ये भगवान कार्तिकेय एवं अग्निदेव की, देवी गंगा एवं विश्वरूप विष्णु भगवान की हैं। अन्य भगवान बुद्ध एवं जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ से जुड़े हैं। ये सभी कटरा केशवदेव, श्रीकृष्ण जन्मस्थान से प्राप्त हुई हैं। यह पूरा क्षेत्र कटरा केशवदेव के ही नाम से जाना जाता है व अभिलेखों में भी दर्ज है।

    हमनें संग्रहालय से रखी इन मूर्तियों के बारे में जानकारी ली है। चाहे भगवान विष्णु का विश्वरूप हो या भगवान कार्तिकेय या नदी देवी की मूर्ति, सभी यह दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र हिंदू आस्था का केंद्र रहा है। खास तौर से भगवान कृष्ण से जुड़ा रहा है। हम ये सारे तथ्य अदालत में पेश कर रहे हैं।
    -एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास

    मामला अदालत में विचाराधीन है। इस दौरान विभिन्न साक्ष्य कोर्ट में पेश किए जाते हैं। जो भी सबूत वो कोर्ट में पेश करेंगे उसका अध्ययन कर हम अपनी दलील पेश करेंगे। पहले भी इस तरह के तथ्य पेश किए गए हैं।
    -एडवोकेट तनवीर अहमद, शाही ईदगाह मस्जिद सचिव एवं पैरोकार

  • फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा

    फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा


    भोपाल । भोपाल में एयरलाइन सेवाओं को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है जहां फ्लाई ओला एयरलाइंस पर सेवा में कमी और यात्रियों को परेशान करने के आरोप में 50 लाख रुपये का दावा ठोका गया है। यह दावा कमलाकर सिंह द्वारा उपभोक्ता आयोग में दायर किया गया है जिससे एयरलाइन सेक्टर में हलचल मच गई है।

    पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने एयरलाइन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी यात्रा के दौरान न केवल लापरवाही बरती गई बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया गया। इस मामले की सुनवाई अब 21 अप्रैल को उपभोक्ता आयोग में तय की गई है जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

    शिकायत के अनुसार कमलाकर सिंह ने 22 मार्च को रीवा से भोपाल के लिए टिकट बुक कराया था और 26 मार्च की उड़ान के लिए उनका टिकट कन्फर्म था। तय समय पर वे रीवा एयरपोर्ट पहुंच गए लेकिन उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। बाद में एयरलाइन की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ्लाइट रद्द कर दी गई।

    सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय रहते कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कमलाकर सिंह को मजबूरी में निजी वाहन से करीब 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय कर भोपाल पहुंचना पड़ा।

    इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं किया जो यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।

    उपभोक्ता आयोग में दायर इस मामले में सेवा में कमी के साथ साथ मानसिक उत्पीड़न को भी आधार बनाया गया है। यदि आयोग इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देता है तो यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है।

    यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रही हैं या नहीं। अब सभी की नजर 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है जहां इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।

  • MP: 11 साल की बेटी से रेप करता रहा बाप… मां डालती रही पर्दा…. कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की सजा

    MP: 11 साल की बेटी से रेप करता रहा बाप… मां डालती रही पर्दा…. कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की सजा


    अशोक नगर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की जिला अदालत (District Court) ने एक मां-बाप को 20-20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। पिता नाबालिग बेटी (Minor Daughter) से लगातार रेप कर रहा था और इस घिनौने काम में उसकी पत्नी यानी नाबालिग की मां उसका साथ दे रही थी। मां लगातार दबाव बना रही है कि वह केस वापस ले-ले। न्यायालय में कह दे कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

    मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले (Ashok Nagar district) में एक बाप अपनी 11 साल की नाबालिग बेटी से लगातार रेप करता है और उसकी मां बेटी की हिफाजत करने के बताए पति के गुनाहों पर लगातार पर्दा डालने का काम करती है। बेटी हिम्मत वाली निकली और एक दिन थाने पहुंच गई। वह पूछने लगी कि टीआई साहब कौन हैं। मुझे उनसे ही बात करना है। महिला सब इंस्पेक्टर ने उसकी बात सुनी तो वह दंग रह गई। बेटी ने बताया कि उसका सौतेला पिता उसके साथ रेप करता है। जब उसने मां को यह बात बताई तो वह पिता का ही साथ दे रही थी। उल्टा उसे डांट फटकार कर मुंह बंदा करा रही थी।


    डीएनए टेस्ट से स्पष्ट हुआ मामला

    जिले के शाढ़ौरा थाना क्षेत्र में 2024 में की गई नाबालिग की शिकायत को पुलिस ने बहुत गंभीरता से लिया। पुलिस ने तत्काल आरोपी पिता को गिरफ्तार किया और घर से सबूत एकत्रित किए। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल कराया और पिता के उपयोग किए कपड़े तौलिया आदि की फॉरेंसिक जांच कराई तो लड़की का मेडिकल और पिता के कपड़ों व तौलिया से मिले डीएनए से स्पष्ट हो गया कि बाप ही बेटी के साथ रेप कर रहा था।


    नाबालिग से मां के बारे में भी बताया

    पुलिस ने पिता के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण पेश किया। इसके बाद उसकी पत्नी यानी पीड़िता की मां उसकी जमानत के लिए प्रयास करने लगी। वह बार-बार पुलिस को आवेदन देकर बता रही थी कि ऐसा कुछ भी नहीं है, उसका पति बेगुनाह है। महिला की इस तरह की हरकतों से पुलिस को उस पर भी शक हुआ। नाबालिग से मां के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मां लगातार दबाव बना रही है कि वह केस वापस ले-ले। न्यायालय में कह दे कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।


    पिता को रोकने के बजाए उसे ही डांटती थी

    नाबालिग ने पुलिस को बताया कि मां से जब भी बोलती कि पापा ऐसा करते हैं तो वह उन्हें रोकने के बजाए उसे ही डांटती थी। शाढ़ौरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी नरेंद्र ने बताया कि जब पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो वह दूसरी कहानी बनाने लगा। उसने बेटी की उम्र 17 साल बताई। साथ ही कहा कि उसका किसी लड़के से अफेयर है, जिसके साथ वह फिजिकल रिलेशन बनाती है। इसके बाद उस लड़के को बुलाकर पूछा गया तो लड़के ने बताया कि उसका लड़की के साथ इस तरह का कोई संबंध नहीं है। उसकी उम्र भी 11 साल है। इस पर पिता पर शक गहरा गया। पुख्ता सबूत मिले तो पिता को आरोपी बना लिया गया।


    दोनों को 20-20 साल का कठोर कारावास

    पुलिस मुख्यालय का निर्देश है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में किसी को सजा हो तो उसका अच्छे से प्रचार प्रसार किया जाए, ताकि अन्य अपराधों में भी लोग सामने आएं और आरोपियों को पकड़ने में पुलिस की मदद करें। इस घटनाक्रम में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और मजबूत केस बनाया, जिससे आरोपी पिता और उसका साथ देने वाली आरोपी मां दोनों को 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा मिली है।

  • सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार

    सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार


    दतिया/ सेवढ़ा। अंगद सरकार मंदिर के पास स्थित व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 17 फरवरी की यह वारदात पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है। हत्या के मुख्य आरोपी रवि बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने अखलेश यादव पर हमला करने के लिए मौका देख कर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

    घटना के समय क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। वारदात का तरीका और स्थान यह संकेत दे रहे थे कि हत्या पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। मंदिर परिसर के पास हत्या के दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों में डर और दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तुरंत ही क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    पुलिस अधीक्षक के अनुसार, घटना स्थल और साक्ष्यों को देखकर हमें शक हुआ कि यह किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा है। आरोपी की पहचान और उसके इरादों का पता लगाने के लिए तकनीकी और फील्ड साक्ष्यों का उपयोग किया गया। पुलिस ने लगातार दबिश दी और 25 फरवरी को पुख्ता सूचना मिलने पर रवि बघेल को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह हत्या पुरानी दुश्मनी के चलते की गई थी। उसने स्पष्ट किया कि उसका मकसद अखलेश यादव को रास्ते से हटाना था और मौका मिलते ही उसने पत्थर से हमला कर हत्या को अंजाम दिया। इस खुलासे के बाद इलाके में कुछ हद तक राहत महसूस की गई, क्योंकि मुख्य आरोपी अब पकड़ में आ चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह भी जांच कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रवि बघेल के अलावा अन्य किसी की भूमिका है या नहीं, इसे लेकर छानबीन जारी है। सभी पहलुओं पर ध्यान देकर हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय के मार्ग में कोई बाधा न आए।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मामले से संबंधित किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करें ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। यह हत्या मामले ने एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रंजिश कभी-कभी जानलेवा हो सकती है।