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  • खराब फॉर्म ने बढ़ाई चिंता, क्या 2026 होगा आखिरी सीजन?

    खराब फॉर्म ने बढ़ाई चिंता, क्या 2026 होगा आखिरी सीजन?

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार रहे अजिंक्य रहाणे के लिए मौजूदा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान के तौर पर मैदान में उतर रहे रहाणे का बल्ला इस साल पूरी तरह खामोश है, जिसके चलते क्रिकेट गलियारों में अब उनके आईपीएल करियर के अंत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके प्रदर्शन में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो साल 2027 के मेगा ऑक्शन में इस दिग्गज खिलाड़ी को कोई भी फ्रेंचाइजी खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।

    अजिंक्य रहाणे को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 1.5 करोड़ रुपये की कीमत पर रिटेन किया था और उन पर कप्तानी का भरोसा भी जताया था। हालांकि, टीम के नेतृत्व में तो वह अपनी सूझबूझ दिखा रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत प्रदर्शन के मोर्चे पर वह बुरी तरह विफल रहे हैं। मौजूदा सीजन में खेले गए अब तक के 8 मैचों में रहाणे ने मात्र 23.14 की औसत से केवल 162 रन बनाए हैं। उनके स्कोर कार्ड पर नजर डालें तो 67 रनों की एक पारी को छोड़कर बाकी मैचों में वह 8, 41, 28 और शून्य जैसे अंकों पर आउट हुए हैं। रविवार को लखनऊ के खिलाफ हुए मैच में भी वह 15 गेंदों पर केवल 10 रन ही बना सके, जिसने टीम की मुश्किलों को बढ़ाया।

    आईपीएल के इतिहास में रहाणे का रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 206 मैचों में 30.2 की औसत से 5194 रन बनाए हैं, जिसमें 2 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में वर्तमान फॉर्म सबसे अधिक मायने रखती है। बढ़ती उम्र और टी-20 फॉर्मेट की मांग के अनुसार घटते स्ट्राइक रेट ने उनकी जगह पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कोलकाता की टीम जिस आक्रामक खेल के लिए जानी जाती है, उसमें रहाणे की धीमी बल्लेबाजी फिट नहीं बैठ रही है। ऐसे में पूरी संभावना है कि आगामी सीजन से पहले टीम उन्हें रिलीज कर दे।

    आगामी समय में होने वाले मेगा ऑक्शन के दौरान सभी टीमें भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं पर दांव लगाना पसंद करेंगी। रहाणे जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए खराब फॉर्म के साथ ऑक्शन पूल में जाना एक बड़ा खतरा हो सकता है। यदि अगले कुछ मैचों में रहाणे कोई बड़ी और प्रभावपूर्ण पारी नहीं खेलते हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि 2026 उनके सुनहरे आईपीएल सफर का अंतिम पड़ाव साबित हो सकता है। फिलहाल, टीम मैनेजमेंट और प्रशंसकों की नजरें उनके अगले प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो उनके भविष्य का फैसला करेगा।

  • अभिषेक शर्मा का 'सुपरमैन' अवतार: गेल और फिंच को पछाड़ा, एक पारी में 130+ रनों का बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड।

    अभिषेक शर्मा का 'सुपरमैन' अवतार: गेल और फिंच को पछाड़ा, एक पारी में 130+ रनों का बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का रौद्र रूप देखने को मिला है। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अभिषेक ने अपनी बल्लेबाजी से न केवल विपक्षी टीम के गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त किया, बल्कि क्रिकेट इतिहास के कई बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। इस मैच में उन्होंने मात्र 68 गेंदों का सामना करते हुए 10 चौकों और 10 गगनचुंबी छक्कों की मदद से नाबाद 135 रनों की पारी खेली। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत हैदराबाद की टीम दिल्ली के सामने 243 रनों का विशाल लक्ष्य रखने में सफल रही और अंततः एक बड़ी जीत दर्ज की।

    अभिषेक शर्मा की यह पारी कई मायनों में ऐतिहासिक रही। अपनी इस नाबाद शतकीय पारी के साथ ही वे आईपीएल इतिहास में पांचवां सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस सूची में दिग्गज क्रिस गेल 175 रनों के साथ शीर्ष पर काबिज हैं, जबकि अभिषेक के नाम अब इस लीग के शीर्ष पांच स्कोर में से दो स्थान दर्ज हो गए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल यानी 2025 के सीजन में भी अभिषेक ने 141 रनों की पारी खेली थी, जो आईपीएल का तीसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। उनकी निरंतरता और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता ने उन्हें वर्तमान समय के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

    टी20 क्रिकेट के व्यापक स्वरूप की बात करें तो अभिषेक ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जो अब तक दुनिया का कोई भी दिग्गज बल्लेबाज नहीं कर सका। वे टी20 प्रारूप की एक ही पारी में चार बार 130 से अधिक रन बनाने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने ‘यूनिवर्स बॉस’ क्रिस गेल और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान आरोन फिंच को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनके नाम तीन-तीन बार यह उपलब्धि दर्ज थी। इसके साथ ही अभिषेक ने टी20 क्रिकेट में अपने 350 छक्के भी पूरे कर लिए हैं, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली का प्रमाण है।

    अभिषेक की इस उपलब्धि पर उनके मेंटर और पूर्व भारतीय दिग्गज युवराज सिंह ने भी खुशी जताई है। उन्होंने युवा बल्लेबाज को अपनी एकाग्रता बनाए रखने और इसी तरह प्रदर्शन जारी रखने का संदेश दिया है। मैच के दौरान अभिषेक को विपक्षी टीम से जीवनदान भी मिला, जिसका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया और अपनी टीम को जीत की हैट्रिक दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। हैदराबाद के कप्तान और प्रबंधन के लिए अभिषेक का यह फॉर्म टूर्नामेंट के आगामी चरण के लिए एक बहुत बड़ी मजबूती बनकर उभरा है। वर्तमान फॉर्म को देखते हुए अभिषेक शर्मा आगामी मैचों में कई और पुराने रिकॉर्ड्स को चुनौती दे सकते हैं।

  • 45 गेंदों में जड़ा करियर का पहला शतक, जयसूर्या के कीर्तिमान की बराबरी कर टीम की कराई धमाकेदार वापसी

    45 गेंदों में जड़ा करियर का पहला शतक, जयसूर्या के कीर्तिमान की बराबरी कर टीम की कराई धमाकेदार वापसी


    नई दिल्ली/अहमदाबाद। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे तिलक वर्मा ने सोमवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में अपनी बल्लेबाजी का वो रौद्र रूप दिखाया, जिसकी गूँज लंबे समय तक खेल गलियारों में सुनाई देगी। खराब फॉर्म और टीम की नाजुक स्थिति के बीच क्रीज पर उतरे तिलक ने न केवल अपने करियर का पहला शतक जड़ा, बल्कि अपनी आतिशी पारी से कई स्थापित रिकॉर्ड्स को भी मटियामेट कर दिया। यह पारी उस समय आई जब उनकी टीम गहरे संकट में थी और शुरुआती ओवरों के दौरान ही विपक्षी टीम की घातक गेंदबाजी ने शीर्ष क्रम को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। मात्र 45 गेंदों में खेली गई उनकी 101 रनों की इस पारी ने मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

    मैच की शुरुआत टीम के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी। शुरुआती तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद ऐसा लग रहा था कि टीम 150 के स्कोर तक भी मुश्किल से पहुँच पाएगी। तिलक वर्मा जब बल्लेबाजी करने आए, तो उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा और शुरुआत में बेहद संभलकर खेलना शुरू किया। उन्होंने अपनी पहली 22 गेंदों पर केवल 19 रन बनाए थे, जिसे देखकर किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ ही मिनटों में मैदान पर रनों का तूफान आने वाला है। जैसे ही पारी के आखिरी ओवरों का आगाज हुआ, तिलक ने अपने खेल का गियर पूरी तरह बदल दिया और गेंदबाजों पर कहर बनकर टूट पड़े।

    तिलक की बल्लेबाजी का असली जादू अंतिम ओवरों यानी 16वें से 20वें ओवर के बीच देखने को मिला। उन्होंने अंतिम 23 गेंदों में अविश्वसनीय रूप से 82 रन कूट डाले। विशेषकर पारी के आखिरी तीन ओवरों में उन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट लगाए और टीम के स्कोर में 58 रनों का भारी योगदान दिया। अपनी इस पूरी पारी के दौरान तिलक ने 8 शानदार चौके और 7 गगनचुंबी छक्के जड़े। उनकी आक्रामकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने डेथ ओवर्स की महज 18 गेंदों में 65 रन बना डाले, जो खेल के इतिहास की सबसे तेज और प्रभावशाली पारियों में से एक गिनी जा रही है।

    इस शतक के साथ ही तिलक वर्मा ने दिग्गजों की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज करा लिया है। उन्होंने 45 गेंदों में अपनी सेंचुरी पूरी कर दिग्गज सनथ जयसूर्या के सबसे तेज शतक के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। इससे पहले खेले गए मैचों में तिलक का बल्ला पूरी तरह खामोश था और उन्होंने बहुत ही कम रन बनाए थे, जिसके चलते उनके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि, इस एक पारी ने न केवल उनके आलोचकों का मुँह बंद कर दिया है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि वे बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। उनकी इस जादुई पारी की बदौलत टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 199 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिलक की यह पारी तकनीकी कौशल और मानसिक दृढ़ता का बेहतरीन नमूना थी। शुरुआत में रक्षात्मक खेल दिखाकर विकेट बचाना और फिर अंत में गेंदबाजों की बखिया उधेड़ना एक परिपक्व खिलाड़ी की निशानी है। जिस तरह से उन्होंने मुख्य गेंदबाजों के खिलाफ जोखिम भरे शॉट्स को आसानी से अंजाम दिया, उसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। इस शतकीय प्रहार ने न केवल टीम को मजबूती दी है, बल्कि पूरे टूर्नामेंट के समीकरणों को भी रोमांचक बना दिया है।

  • वरुण चक्रवर्ती ने रचा नया इतिहास कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सौ विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने

    वरुण चक्रवर्ती ने रचा नया इतिहास कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सौ विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने

    नई दिल्ली/अहमदाबाद। क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय टी20 मंच पर अपनी फिरकी का जादू बिखेर रहे मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। गुजरात के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अपनी धारदार गेंदबाजी के दम पर चक्रवर्ती ने अपनी टीम के लिए एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसे अब तक कोई भी भारतीय गेंदबाज इस विशेष फ्रैंचाइजी के लिए हासिल नहीं कर पाया था। वरुण चक्रवर्ती अब कोलकाता की टीम की ओर से खेलते हुए इस प्रतियोगिता में सौ विकेट पूरे करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही उन्होंने टीम के गौरवशाली इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

    मैदान पर अपनी विविधताओं और सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर चक्रवर्ती ने जैसे ही इस मैच में अपना शिकार किया वैसे ही उन्होंने इस जादुई आंकड़े को छू लिया। टीम के इतिहास पर नजर डालें तो उनसे पहले केवल दो विदेशी गेंदबाजों ने ही इस फ्रैंचाइजी के लिए सौ से अधिक विकेट लेने का कारनामा किया था। वरुण चक्रवर्ती अब इस विशिष्ट क्लब में शामिल होने वाले तीसरे गेंदबाज और पहले भारतीय बन गए हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टीम के गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती प्रदान की है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि वे आधुनिक क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली स्पिनरों में से एक हैं।

    मुकाबले के दौरान चक्रवर्ती ने विपक्षी बल्लेबाजों को अपनी फिरकी के जाल में फंसाए रखा और रन गति पर पूरी तरह लगाम लगाए रखी। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने महत्वपूर्ण समय पर टीम को सफलता दिलाई जिससे विरोधी टीम बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने में नाकाम रही। वरुण चक्रवर्ती का इस प्रतियोगिता में करियर उतार चढ़ाव भरा रहा है लेकिन पिछले कुछ सत्रों से उन्होंने अपनी निरंतरता और कौशल से सबको प्रभावित किया है। एक अभ्यास गेंदबाज से लेकर एक प्रमुख विकेट लेने वाले गेंदबाज तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।

    गेंदबाजी विभाग में चक्रवर्ती की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है और उन्होंने कई मौकों पर अकेले दम पर मैच का रुख मोड़ा है। सौ विकेटों का यह आंकड़ा पार करना उनकी मेहनत और खेल के प्रति उनके समर्पण का परिणाम है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि चक्रवर्ती की गेंदबाजी में जो रहस्य है वह बल्लेबाजों के लिए आज भी एक बड़ी पहेली बना हुआ है। इस मील के पत्थर को छूने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि वे आने वाले मैचों में और भी कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे। उनकी यह उपलब्धि भारतीय घरेलू प्रतिभा की ताकत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है।

  • स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ बनीं भारत की सबसे सफल बल्लेबाज

    स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ बनीं भारत की सबसे सफल बल्लेबाज

    नई दिल्ली/डरबन। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने खेल के सबसे छोटे प्रारूप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली जा रही मौजूदा श्रृंखला के दौरान मंधाना ने वह मुकाम हासिल किया जो अब तक किसी भी भारतीय क्रिकेटर के नाम नहीं था। स्मृति मंधाना अब भारत की ओर से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उन्होंने इस विशिष्ट उपलब्धि के मामले में भारतीय पुरुष टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा के स्थापित रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

    मैदान पर अपनी कलात्मक बल्लेबाजी के लिए पहचानी जाने वाली मंधाना ने जैसे ही इस मुकाबले में व्यक्तिगत स्तर पर तेरहवां रन बनाया वैसे ही उन्होंने रोहित शर्मा के पूर्ववर्ती रनों के आंकड़े को पार कर लिया। रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रारूप से विदाई लेने से पहले जो शिखर स्थापित किया था उसे अब मंधाना ने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। स्मृति मंधाना के नाम अब एक सौ इकसठ मैचों में चार हजार दो सौ चवालीस रन दर्ज हो गए हैं जो उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल टी20 बल्लेबाज बनाता है।

    मैच के घटनाक्रम पर नजर डालें तो विपक्षी टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। भारतीय टीम ने निर्धारित ओवरों में सात विकेट खोकर एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए विरोधी टीम ने अंतिम क्षणों में जीत हासिल कर ली लेकिन भारतीय खेमे के लिए मंधाना की यह व्यक्तिगत सफलता सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी रही। हार के बावजूद मंधाना के बल्ले से निकला यह रिकॉर्ड भारतीय महिला क्रिकेट के सशक्तिकरण और वैश्विक मंच पर उनकी बढ़ती धमक का प्रतीक बनकर उभरा है।

    विश्व स्तर पर सर्वाधिक टी20 रनों की सूची पर गौर करें तो स्मृति मंधाना अब दूसरे पायदान पर पहुंच गई हैं। उनसे आगे अब केवल न्यूजीलैंड की एक खिलाड़ी का नाम आता है जबकि भारतीय खिलाड़ियों की सूची में मंधाना अब शीर्ष पर विराजमान हैं। मंधाना के बाद रोहित शर्मा और फिर हरमनप्रीत कौर का स्थान आता है। मंधाना का यह सफर आने वाले समय में युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह महिला क्रिकेट के प्रति बदलते नजरिए और मैदान पर उनके अटूट समर्पण की जीत है।

  • रजत पाटीदार ने 17 गेंदों में आईपीएल करियर का सबसे तेज कप्तानी अर्धशतक लगाकर एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बराबरी की।

    रजत पाटीदार ने 17 गेंदों में आईपीएल करियर का सबसे तेज कप्तानी अर्धशतक लगाकर एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बराबरी की।

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जिसने अपने बल्ले की धमक से चयनकर्ताओं के बंद दरवाजों पर जोरदार प्रहार किया है। रजत पाटीदार, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है, वर्तमान सीजन में जिस आक्रामक अंदाज में खेल रहे हैं, उसने उन्हें भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में पदार्पण का सबसे प्रबल दावेदार बना दिया है। मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की उनकी असाधारण क्षमता और दबाव के क्षणों में क्रीज पर अडिग रहने का उनका जज्बा उन्हें वर्तमान पीढ़ी के सबसे परिपक्व बल्लेबाजों की सूची में सबसे ऊपर रखता है।

    रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी और कप्तानी का नया चेहरा

    आईपीएल के इस सत्र में रजत पाटीदार ने रॉयल चेलेंजर बेंगलुरु के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालते हुए न केवल अपनी टीम को नई दिशा दी है बल्कि अपनी बल्लेबाजी को भी एक नए शिखर पर पहुंचाया है। उन्होंने हालिया मुकाबलों में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को खतरे में डाल दिया है। विशेष रूप से मुंबई के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने मात्र 17 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया। यह पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने आईपीएल के इतिहास में एक कप्तान के रूप में एडम गिलक्रिस्ट के सबसे तेज अर्धशतक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी की। उनकी इस पारी ने साबित कर दिया कि नेतृत्व का बोझ उनकी नैसर्गिक बल्लेबाजी को कुचलने के बजाय और अधिक निखारने का काम कर रहा है।

    मध्य क्रम में विस्फोटक बल्लेबाजी का पर्याय

    पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर दृष्टिकोण और तकनीकी कौशल है। वह स्पिनर्स के खिलाफ जितने सहज नजर आते हैं, तेज गेंदबाजों की गति का इस्तेमाल करने में भी उतने ही माहिर हैं। शुरुआती पांच मैचों में उनके आंकड़े किसी करिश्मे से कम नहीं हैं, जहां उन्होंने 213 से अधिक के स्ट्राइक रेट के साथ 222 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। टीम इंडिया को लंबे समय से एक ऐसे मध्य क्रम के बल्लेबाज की तलाश रही है जो मैच की स्थिति के अनुसार अपनी गति बदल सके। पाटीदार इस ढांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनकी बल्लेबाजी में वह ‘एक्स फैक्टर’ मौजूद है जो खेल के किसी भी मोड़ पर मैच का पासा पलटने की क्षमता रखता है।

    घरेलू अनुभव और भविष्य की राह

    रजत पाटीदार की यह सफलता कोई रातों-रात मिली उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट में बिताए गए सालों का कड़ा परिश्रम है। रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में लगातार रन बनाने का अनुभव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम आ रहा है। 2025 में अपनी कप्तानी में बेंगलुरु को पहला आईपीएल खिताब दिलाने के बाद, उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल की समझ में जबरदस्त परिपक्वता आई है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी वर्तमान फॉर्म को देखते हुए चयनकर्ता उन्हें आगामी टी20 सीरीज से बाहर रखने का जोखिम नहीं उठा सकते। वह न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हैं, बल्कि आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग के अनुरूप हर गेंद पर प्रहार करने का साहस भी रखते हैं।

    ब्लू जर्सी का बढ़ता इंतजार

    भारतीय टीम प्रबंधन वर्तमान में भविष्य की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और पाटीदार इस योजना का एक अनिवार्य हिस्सा नजर आते हैं। उनके गगनचुंबी छक्के और गैप ढूंढने की कला उन्हें एक पूर्ण टी20 खिलाड़ी बनाती है। जिस तरह से उन्होंने आईपीएल के दबाव भरे माहौल में निरंतरता दिखाई है, वह यह सुनिश्चित करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब यह केवल समय की बात है कि कब यह धाकड़ बल्लेबाज टीम इंडिया की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगा। उनकी यह अविश्वसनीय यात्रा भारतीय क्रिकेट के प्रति उनके अटूट समर्पण और संघर्ष की एक प्रेरक कहानी है।

  • डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

    डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं।

    दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है।

    इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं।

    आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है।

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  • 9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा

    9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा


    नई दिल्ली । जब कोई बल्लेबाज शानदार फॉर्म में होता है, तो उसे रोक पाना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों भारतीय घरेलू क्रिकेट में देखने को मिल रहा है, जहां एक 25 साल का युवा बल्लेबाज गेंदबाजों पर कहर बनकर टूट पड़ा है। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि विदर्भ के सलामी बल्लेबाज अमन मोखाड़े हैं, जिन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अपने बल्ले से रनों की झड़ी लगा दी है। अमन मोखाड़े ने इस टूर्नामेंट में अब तक 9 मैच खेले हैं और इनमें 5 शानदार शतक जड़ चुके हैं। इन 9 पारियों में उनके बल्ले से कुल 781 रन निकले हैं, जिससे वह इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
    उन्होंने कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनके नाम इस टूर्नामेंट में 721 रन दर्ज हैं। अमन की इस विस्फोटक बल्लेबाजी का ही नतीजा है कि विदर्भ की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है और अब खिताब जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। दाएं हाथ के इस ओपनर ने टूर्नामेंट की शुरुआत भी धमाकेदार अंदाज में की थी। पहले ही मैच में उन्होंने 110 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि दूसरे मुकाबले में 82 रन बनाए। इसके बाद तो मानो शतकों की बारिश ही हो गई। हर मैच में अमन का आत्मविश्वास और तकनीक देखने लायक रही, जिसने चयनकर्ताओं और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है।

    शानदार फॉर्म के चलते अमन मोखाड़े ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह अब लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 16 पारियों में कर दिखाया, जिससे उन्होंने देवदत्त पडिक्कल और अभिनव मुकुंद का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 1000 रन तक पहुंचने में 17 पारियां खेली थीं। इतना ही नहीं, अमन ने इस मामले में साउथ अफ्रीका के महान बल्लेबाज ग्रीम पोलॉक की बराबरी भी कर ली है, जिन्होंने भी 16 पारियों में 1000 लिस्ट-ए रन पूरे किए थे।

    अमन मोखाड़े का बल्ला सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी में ही नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में आग उगलता नजर आया है। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 7 पारियों में 577 रन बनाए थे, जबकि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके नाम 206 रन दर्ज हैं। अब विजय हजारे ट्रॉफी में 781 रन बनाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह लंबे रेस के घोड़े हैं। क्रिकेट फैंस के लिए अमन मोखाड़े भले ही नया नाम हों, लेकिन उनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। 16 जनवरी 2001 को जन्मे अमन ने ज्वाला सिंह से कोचिंग ली है, जिन्होंने भारतीय टीम के युवा स्टार यशस्वी जायसवाल को भी तैयार किया है। अमन एक आक्रामक ओपनर होने के साथ-साथ लेग ब्रेक गेंदबाजी भी कर सकते हैं। अब 18 जनवरी को विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल खेला जाना है और सभी की नजरें एक बार फिर इस रन मशीन पर टिकी होंगी।

  • स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड चैलेंज: शुभमन गिल को पछाड़कर बन सकती हैं 2025 की सबसे बड़ी रन मशीन

    स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड चैलेंज: शुभमन गिल को पछाड़कर बन सकती हैं 2025 की सबसे बड़ी रन मशीन


    नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला आज यानी मंगलवार, 30 दिसंबर को खेला जा रहा है। यह 2025 में टीम इंडिया का अंतिम मैच भी है। मैच से पहले क्रिकेट की नजरें उप-कप्तान स्मृति मंधाना पर टिकी हुई हैं, जो इस साल के रिकॉर्ड बनाने के करीब हैं।टीम इंडिया इस मैच में 5-0 से क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगी लेकिन मंधाना का ध्यान अब व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर है। 2025 में उन्होंने महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का कारनामा किया है। अब उनका लक्ष्य पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों मिलाकर इस साल सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज बनना है। इसके लिए उन्हें पुरुष क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शुभमन गिल का रिकॉर्ड तोड़ना होगा।

    स्मृति मंधाना ने इस साल सभी फॉर्मेट में कुल 1,703 रन बनाए हैं। वहीं शुभमन गिल ने 2025 में 1,764 रन बनाए हैं। अगर मंधाना आज श्रीलंका के खिलाफ कम से कम 62 रन बनाने में कामयाब रहती हैं, तो वह पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट मिलाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन जाएंगी।मंधाना के इस साल के परफॉर्मेंस की बात करें तो उनके अधिकांश रन वनडे फॉर्मेट में आए हैं। उन्होंने 23 वनडे मुकाबलों में 61.9 की औसत के साथ 1,362 रन बनाए, जिनमें 5 शतक शामिल हैं। इसके अलावा, टी20 फॉर्मेट में उन्होंने 9 मैचों में एक शतक के साथ 341 रन बनाए। मंधाना ने भारतीय महिला टीम को पहला वर्ल्ड कप जीताने में अहम योगदान दिया था।

    स्मृति मंधाना का अंतरराष्ट्रीय करियर भी बेहद शानदार रहा है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 7 मैचों और 12 पारियों में 57.18 की औसत से 629 रन बनाए, जिसमें दो शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उन्होंने 117 मैचों में 48.38 की औसत से 5,322 रन बनाए, जिसमें 14 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के दम पर वह वनडे में छठी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। T20I में उन्होंने 157 मैचों में 29.94 की औसत और 124.22 के स्ट्राइक रेट से 4,102 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। वह T20I में दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं।

    इस मुकाबले में मंधाना का प्रदर्शन सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। टीम इंडिया की जीत के साथ वह इतिहास रच सकती हैं। फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञ दोनों इस मैच और मंधाना के प्रदर्शन को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनके रन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत और पुरुष क्रिकेट के रिकॉर्ड को चुनौती देने का प्रतीक हैं।इस मुकाबले का परिणाम और मंधाना का प्रदर्शन निश्चित रूप से 2025 की क्रिकेट वर्ष की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल होगा।

  • भूटान के सोनम येशे ने रचा इतिहास, T20I में 8 विकेट लेकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    भूटान के सोनम येशे ने रचा इतिहास, T20I में 8 विकेट लेकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड




    नई दिल्ली।
    क्रिकेट का दायरा लगातार फैल रहा है और अब नए-नए देश भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इसी कड़ी में भूटान क्रिकेट ने एक ऐसा ऐतिहासिक पल देखा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। म्यांमार के खिलाफ खेले गए T20 इंटरनेशनल मुकाबले में 22 वर्षीय युवा गेंदबाज सोनम येशे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो इससे पहले किसी भी गेंदबाज ने नहीं किया था।

    इस मैच में भूटान की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 127 रन बनाए। टीम के लिए नामगांग चेजय ने शानदार अर्धशतक जड़ा।

    उन्होंने 45 गेंदों में 50 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके अलावा नामगे थिनले ने 22 गेंदों में 27 रन और ताशी डोर्जी ने 17 रन जोड़कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी म्यांमार की टीम भूटान के गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बिखर गई। खासतौर पर सोनम येशे की घातक गेंदबाजी ने म्यांमार की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    सोनम ने अपने चार ओवर में महज 7 रन देकर 8 विकेट झटके और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक मैच में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं।

    इससे पहले पुरुष T20I क्रिकेट में अधिकतम 7 विकेट लेने का रिकॉर्ड था। साल 2023 में मलेशिया के स्याजरुल इद्रस ने चीन के खिलाफ 7 विकेट लिए थे, जबकि बहरीन के अली दाऊद ने भूटान के खिलाफ 7 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा था। लेकिन सोनम येशे ने इन दोनों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया।

    म्यांमार की पूरी टीम सिर्फ 45 रन पर ढेर हो गई। टीम के लिए केवल हेट लिन ऊ (12 रन) और प्याए फ्यो वाई (10 रन) ही दोहरे अंक तक पहुंच सके। बाकी बल्लेबाज सोनम येशे की धारदार गेंदों के सामने टिक नहीं पाए।

    इस तरह सोनम येशे की ऐतिहासिक गेंदबाजी के दम पर भूटान ने म्यांमार को 82 रनों से करारी शिकस्त दी। यह जीत न सिर्फ भूटान क्रिकेट के लिए यादगार रही, बल्कि यह भी साबित कर गई कि उभरते क्रिकेट राष्ट्र अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़े रिकॉर्ड बनाने का माद्दा रखते हैं।