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  • रजत पाटीदार ने 17 गेंदों में आईपीएल करियर का सबसे तेज कप्तानी अर्धशतक लगाकर एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बराबरी की।

    रजत पाटीदार ने 17 गेंदों में आईपीएल करियर का सबसे तेज कप्तानी अर्धशतक लगाकर एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बराबरी की।

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जिसने अपने बल्ले की धमक से चयनकर्ताओं के बंद दरवाजों पर जोरदार प्रहार किया है। रजत पाटीदार, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है, वर्तमान सीजन में जिस आक्रामक अंदाज में खेल रहे हैं, उसने उन्हें भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में पदार्पण का सबसे प्रबल दावेदार बना दिया है। मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की उनकी असाधारण क्षमता और दबाव के क्षणों में क्रीज पर अडिग रहने का उनका जज्बा उन्हें वर्तमान पीढ़ी के सबसे परिपक्व बल्लेबाजों की सूची में सबसे ऊपर रखता है।

    रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी और कप्तानी का नया चेहरा

    आईपीएल के इस सत्र में रजत पाटीदार ने रॉयल चेलेंजर बेंगलुरु के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालते हुए न केवल अपनी टीम को नई दिशा दी है बल्कि अपनी बल्लेबाजी को भी एक नए शिखर पर पहुंचाया है। उन्होंने हालिया मुकाबलों में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को खतरे में डाल दिया है। विशेष रूप से मुंबई के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने मात्र 17 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया। यह पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने आईपीएल के इतिहास में एक कप्तान के रूप में एडम गिलक्रिस्ट के सबसे तेज अर्धशतक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी की। उनकी इस पारी ने साबित कर दिया कि नेतृत्व का बोझ उनकी नैसर्गिक बल्लेबाजी को कुचलने के बजाय और अधिक निखारने का काम कर रहा है।

    मध्य क्रम में विस्फोटक बल्लेबाजी का पर्याय

    पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर दृष्टिकोण और तकनीकी कौशल है। वह स्पिनर्स के खिलाफ जितने सहज नजर आते हैं, तेज गेंदबाजों की गति का इस्तेमाल करने में भी उतने ही माहिर हैं। शुरुआती पांच मैचों में उनके आंकड़े किसी करिश्मे से कम नहीं हैं, जहां उन्होंने 213 से अधिक के स्ट्राइक रेट के साथ 222 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। टीम इंडिया को लंबे समय से एक ऐसे मध्य क्रम के बल्लेबाज की तलाश रही है जो मैच की स्थिति के अनुसार अपनी गति बदल सके। पाटीदार इस ढांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनकी बल्लेबाजी में वह ‘एक्स फैक्टर’ मौजूद है जो खेल के किसी भी मोड़ पर मैच का पासा पलटने की क्षमता रखता है।

    घरेलू अनुभव और भविष्य की राह

    रजत पाटीदार की यह सफलता कोई रातों-रात मिली उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट में बिताए गए सालों का कड़ा परिश्रम है। रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में लगातार रन बनाने का अनुभव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम आ रहा है। 2025 में अपनी कप्तानी में बेंगलुरु को पहला आईपीएल खिताब दिलाने के बाद, उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल की समझ में जबरदस्त परिपक्वता आई है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी वर्तमान फॉर्म को देखते हुए चयनकर्ता उन्हें आगामी टी20 सीरीज से बाहर रखने का जोखिम नहीं उठा सकते। वह न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हैं, बल्कि आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग के अनुरूप हर गेंद पर प्रहार करने का साहस भी रखते हैं।

    ब्लू जर्सी का बढ़ता इंतजार

    भारतीय टीम प्रबंधन वर्तमान में भविष्य की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और पाटीदार इस योजना का एक अनिवार्य हिस्सा नजर आते हैं। उनके गगनचुंबी छक्के और गैप ढूंढने की कला उन्हें एक पूर्ण टी20 खिलाड़ी बनाती है। जिस तरह से उन्होंने आईपीएल के दबाव भरे माहौल में निरंतरता दिखाई है, वह यह सुनिश्चित करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब यह केवल समय की बात है कि कब यह धाकड़ बल्लेबाज टीम इंडिया की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगा। उनकी यह अविश्वसनीय यात्रा भारतीय क्रिकेट के प्रति उनके अटूट समर्पण और संघर्ष की एक प्रेरक कहानी है।

  • डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

    डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं।

    दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है।

    इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं।

    आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है।

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  • 9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा

    9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा


    नई दिल्ली । जब कोई बल्लेबाज शानदार फॉर्म में होता है, तो उसे रोक पाना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों भारतीय घरेलू क्रिकेट में देखने को मिल रहा है, जहां एक 25 साल का युवा बल्लेबाज गेंदबाजों पर कहर बनकर टूट पड़ा है। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि विदर्भ के सलामी बल्लेबाज अमन मोखाड़े हैं, जिन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अपने बल्ले से रनों की झड़ी लगा दी है। अमन मोखाड़े ने इस टूर्नामेंट में अब तक 9 मैच खेले हैं और इनमें 5 शानदार शतक जड़ चुके हैं। इन 9 पारियों में उनके बल्ले से कुल 781 रन निकले हैं, जिससे वह इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
    उन्होंने कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनके नाम इस टूर्नामेंट में 721 रन दर्ज हैं। अमन की इस विस्फोटक बल्लेबाजी का ही नतीजा है कि विदर्भ की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है और अब खिताब जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। दाएं हाथ के इस ओपनर ने टूर्नामेंट की शुरुआत भी धमाकेदार अंदाज में की थी। पहले ही मैच में उन्होंने 110 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि दूसरे मुकाबले में 82 रन बनाए। इसके बाद तो मानो शतकों की बारिश ही हो गई। हर मैच में अमन का आत्मविश्वास और तकनीक देखने लायक रही, जिसने चयनकर्ताओं और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है।

    शानदार फॉर्म के चलते अमन मोखाड़े ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह अब लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 16 पारियों में कर दिखाया, जिससे उन्होंने देवदत्त पडिक्कल और अभिनव मुकुंद का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 1000 रन तक पहुंचने में 17 पारियां खेली थीं। इतना ही नहीं, अमन ने इस मामले में साउथ अफ्रीका के महान बल्लेबाज ग्रीम पोलॉक की बराबरी भी कर ली है, जिन्होंने भी 16 पारियों में 1000 लिस्ट-ए रन पूरे किए थे।

    अमन मोखाड़े का बल्ला सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी में ही नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में आग उगलता नजर आया है। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 7 पारियों में 577 रन बनाए थे, जबकि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके नाम 206 रन दर्ज हैं। अब विजय हजारे ट्रॉफी में 781 रन बनाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह लंबे रेस के घोड़े हैं। क्रिकेट फैंस के लिए अमन मोखाड़े भले ही नया नाम हों, लेकिन उनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। 16 जनवरी 2001 को जन्मे अमन ने ज्वाला सिंह से कोचिंग ली है, जिन्होंने भारतीय टीम के युवा स्टार यशस्वी जायसवाल को भी तैयार किया है। अमन एक आक्रामक ओपनर होने के साथ-साथ लेग ब्रेक गेंदबाजी भी कर सकते हैं। अब 18 जनवरी को विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल खेला जाना है और सभी की नजरें एक बार फिर इस रन मशीन पर टिकी होंगी।

  • स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड चैलेंज: शुभमन गिल को पछाड़कर बन सकती हैं 2025 की सबसे बड़ी रन मशीन

    स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड चैलेंज: शुभमन गिल को पछाड़कर बन सकती हैं 2025 की सबसे बड़ी रन मशीन


    नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला आज यानी मंगलवार, 30 दिसंबर को खेला जा रहा है। यह 2025 में टीम इंडिया का अंतिम मैच भी है। मैच से पहले क्रिकेट की नजरें उप-कप्तान स्मृति मंधाना पर टिकी हुई हैं, जो इस साल के रिकॉर्ड बनाने के करीब हैं।टीम इंडिया इस मैच में 5-0 से क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगी लेकिन मंधाना का ध्यान अब व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर है। 2025 में उन्होंने महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का कारनामा किया है। अब उनका लक्ष्य पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों मिलाकर इस साल सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज बनना है। इसके लिए उन्हें पुरुष क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शुभमन गिल का रिकॉर्ड तोड़ना होगा।

    स्मृति मंधाना ने इस साल सभी फॉर्मेट में कुल 1,703 रन बनाए हैं। वहीं शुभमन गिल ने 2025 में 1,764 रन बनाए हैं। अगर मंधाना आज श्रीलंका के खिलाफ कम से कम 62 रन बनाने में कामयाब रहती हैं, तो वह पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट मिलाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन जाएंगी।मंधाना के इस साल के परफॉर्मेंस की बात करें तो उनके अधिकांश रन वनडे फॉर्मेट में आए हैं। उन्होंने 23 वनडे मुकाबलों में 61.9 की औसत के साथ 1,362 रन बनाए, जिनमें 5 शतक शामिल हैं। इसके अलावा, टी20 फॉर्मेट में उन्होंने 9 मैचों में एक शतक के साथ 341 रन बनाए। मंधाना ने भारतीय महिला टीम को पहला वर्ल्ड कप जीताने में अहम योगदान दिया था।

    स्मृति मंधाना का अंतरराष्ट्रीय करियर भी बेहद शानदार रहा है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 7 मैचों और 12 पारियों में 57.18 की औसत से 629 रन बनाए, जिसमें दो शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उन्होंने 117 मैचों में 48.38 की औसत से 5,322 रन बनाए, जिसमें 14 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के दम पर वह वनडे में छठी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। T20I में उन्होंने 157 मैचों में 29.94 की औसत और 124.22 के स्ट्राइक रेट से 4,102 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। वह T20I में दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं।

    इस मुकाबले में मंधाना का प्रदर्शन सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। टीम इंडिया की जीत के साथ वह इतिहास रच सकती हैं। फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञ दोनों इस मैच और मंधाना के प्रदर्शन को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनके रन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत और पुरुष क्रिकेट के रिकॉर्ड को चुनौती देने का प्रतीक हैं।इस मुकाबले का परिणाम और मंधाना का प्रदर्शन निश्चित रूप से 2025 की क्रिकेट वर्ष की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल होगा।

  • भूटान के सोनम येशे ने रचा इतिहास, T20I में 8 विकेट लेकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    भूटान के सोनम येशे ने रचा इतिहास, T20I में 8 विकेट लेकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड




    नई दिल्ली।
    क्रिकेट का दायरा लगातार फैल रहा है और अब नए-नए देश भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इसी कड़ी में भूटान क्रिकेट ने एक ऐसा ऐतिहासिक पल देखा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। म्यांमार के खिलाफ खेले गए T20 इंटरनेशनल मुकाबले में 22 वर्षीय युवा गेंदबाज सोनम येशे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो इससे पहले किसी भी गेंदबाज ने नहीं किया था।

    इस मैच में भूटान की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 127 रन बनाए। टीम के लिए नामगांग चेजय ने शानदार अर्धशतक जड़ा।

    उन्होंने 45 गेंदों में 50 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके अलावा नामगे थिनले ने 22 गेंदों में 27 रन और ताशी डोर्जी ने 17 रन जोड़कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी म्यांमार की टीम भूटान के गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बिखर गई। खासतौर पर सोनम येशे की घातक गेंदबाजी ने म्यांमार की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    सोनम ने अपने चार ओवर में महज 7 रन देकर 8 विकेट झटके और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक मैच में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं।

    इससे पहले पुरुष T20I क्रिकेट में अधिकतम 7 विकेट लेने का रिकॉर्ड था। साल 2023 में मलेशिया के स्याजरुल इद्रस ने चीन के खिलाफ 7 विकेट लिए थे, जबकि बहरीन के अली दाऊद ने भूटान के खिलाफ 7 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा था। लेकिन सोनम येशे ने इन दोनों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया।

    म्यांमार की पूरी टीम सिर्फ 45 रन पर ढेर हो गई। टीम के लिए केवल हेट लिन ऊ (12 रन) और प्याए फ्यो वाई (10 रन) ही दोहरे अंक तक पहुंच सके। बाकी बल्लेबाज सोनम येशे की धारदार गेंदों के सामने टिक नहीं पाए।

    इस तरह सोनम येशे की ऐतिहासिक गेंदबाजी के दम पर भूटान ने म्यांमार को 82 रनों से करारी शिकस्त दी। यह जीत न सिर्फ भूटान क्रिकेट के लिए यादगार रही, बल्कि यह भी साबित कर गई कि उभरते क्रिकेट राष्ट्र अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़े रिकॉर्ड बनाने का माद्दा रखते हैं।

  • विजय हजारे ट्रॉफी में शतक बनाने वाले बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने पीएम मोदी से की मुलाकात, कहा–जीवन का सबसे खास पल

    विजय हजारे ट्रॉफी में शतक बनाने वाले बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने पीएम मोदी से की मुलाकात, कहा–जीवन का सबसे खास पल


    नई दिल्ली।भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जो उनके करियर और जीवन के लिए एक अविस्मरणीय क्षण साबित हुई। पीएम से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। बिहार के मोतिहारी जिले से ताल्लुक रखने वाले 15 वर्षीय वैभव को हाल ही में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। क्रिकेट के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि के लिए यह सम्मान पाने वाले वे देश के पहले क्रिकेटर बन गए।प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई तस्वीरों में वैभव और पीएम मोदी के बीच आत्मीय बातचीत दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री ने वैभव की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया। वैभव ने भी कहा कि पीएम से मिला प्रोत्साहन उन्हें और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।

    वैभव सूर्यवंशी का नाम चर्चा में तब आया, जब उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी के मैच में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों में 190 रन की ऐतिहासिक पारी खेली। इस पारी में उन्होंने 16 चौके और 15 छक्के जड़े। इसके साथ ही वैभव लिस्ट-ए क्रिकेट में शतक बनाने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए और पाकिस्तान के जहूर इलाही का 39 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।वैभव बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज हैं और कम उम्र में ही उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है। विजय हजारे ट्रॉफी जैसे बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों को चौंकाने वाला रहा। माना जा रहा है कि भविष्य में वे भारत के अंडर-19 और सीनियर स्तर के क्रिकेट में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को कला, खेल, नवाचार, सामाजिक सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। वैभव का इस सूची में शामिल होना न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए गर्व की बात है। इससे पहले इस मंच पर शतरंज खिलाड़ी आर प्रज्ञानानंद और आर वैशाली जैसे नाम अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।वैभव की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2025 की शुरुआत में वे गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले भारतीय क्रिकेटरों में शामिल थे। विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के बीच एक किशोर खिलाड़ी का इस तरह चर्चा में आना भारतीय क्रिकेट के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है।

    बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, वैभव के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर वह अपनी फॉर्म और फिटनेस बनाए रखते हैं, तो जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और बड़े मौके मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री से हुई यह मुलाकात और मिला सम्मान उनके करियर को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।इस उपलब्धि और सम्मान ने वैभव सूर्यवंशी को केवल एक क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना दिया है। उनका यह सफर यह दिखाता है कि कड़ी मेहनत, टैलेंट और सही दिशा मिलने पर कम उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

  • ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नया इतिहास! एलेक्स कैरी ने कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक रन बनाने वाले विकेटकीपर का बड़ा रिकॉर्ड बनाया

    ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नया इतिहास! एलेक्स कैरी ने कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक रन बनाने वाले विकेटकीपर का बड़ा रिकॉर्ड बनाया


    नई दिल्ली।ऑस्ट्रेलिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज एलेक्स कैरी ने शनिवार को ब्रिसबेन में खेले जा रहे एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट मैच के दौरान एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। कैरी अब एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर बल्लेबाजों में दूसरे स्थान पर आ गए हैं। यह रिकॉर्ड पहले एडम गिलक्रिस्ट के नाम था, जिन्होंने पांच बार यह कारनामा कर इतिहास रचा था।

    हालांकि चौथे टेस्ट के दौरान कैरी का प्रदर्शन थोड़ी निराशा वाला रहा। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में वह जल्दी ही सस्ते में आउट होकर पवेलियन लौट गए। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने गिलक्रिस्ट के खास क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली।एलेक्स कैरी ने 2025 में ऑस्ट्रेलिया के लिए कुल 767 रन बनाए, जिससे वह साल 2005 के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विकेटकीपर बन गए। एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने 2001 में 870, 2004 में 837, 2005 में 836, 2002 में 792 और 2003 में 714 रन बनाए थे।

    कैरी ने साल 2025 में श्रीलंका, वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका WTC फाइनलऔर इंग्लैंड के खिलाफ कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। उनके इस प्रदर्शन के चलते वह आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टॉप-10 बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो चुके हैं।ब्रिसबेन में खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच का पहला दिन बेहद रोमांचक रहा। पहले दिन ही 20 विकेट गिर गए, और दोनों टीमों की पहली पारी पूरी हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक दूसरी पारी में बिना किसी नुकसान के चार रन बना लिए थे, जिससे उन्हें 46 रन की बढ़त मिली।

    दूसरे दिन भी विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा। लंच ब्रेक तक ऑस्ट्रेलिया ने 25 ओवर में 6 विकेट खोकर 98 रन बनाए। पहले सेशन में टीम ने 94 रन जोड़े और 6 विकेट गंवाए। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने कुल मिलाकर 140 रन की बढ़त हासिल कर ली। इंग्लैंड के जोश टंग ने 45 रन देकर पांच विकेट लिए। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड ने मेजबान टीम को 152 रन पर ऑलआउट कर दिया। जवाब में इंग्लैंड की टीम 29.5 ओवर में 110 रन पर ऑलआउट हो गई।इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने पहले तीन टेस्ट मैच जीतकर 11 दिन के भीतर सीरीज अपने नाम कर ली थी। इस जीत के साथ ही टीम के लिए कैरी का प्रदर्शन और भी खास बन गया है, क्योंकि उन्होंने टीम को मजबूत बल्लेबाजी का सहारा दिया और गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड को चुनौती दी।

    एक कैलेंडर ईयर में ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा टेस्ट रन:

    870 – एडम गिलक्रिस्ट, 2001

    837 – एडम गिलक्रिस्ट, 2004

    836 – एडम गिलक्रिस्ट, 2005

    792 – एडम गिलक्रिस्ट, 2002

    767 – एलेक्स कैरी, 2025

    714 – एडम गिलक्रिस्ट, 2003

    इस उपलब्धि से यह साफ हो गया है कि एलेक्स कैरी ने न सिर्फ खुद को टीम का अहम हिस्सा बनाया है, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके इस प्रदर्शन से युवा खिलाड़ियों में भी प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में ऑस्ट्रेलिया के लिए कई रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद बढ़ जाएगी।