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  • वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद निचले स्तर से संभले, लेकिन कारोबार का अंत लाल निशान में हुआ। आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों से बाजार को कुछ सहारा मिला, इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।

    सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।

    निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।

    इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।

    कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।

    पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।

    बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।

    प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे और बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 23,500 के स्तर से नीचे चला गया।

    बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764.23 पर पहुंच गया। एनएसई का निफ्टी 50 भी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। लगातार तीसरे सत्र की गिरावट ने बाजार में बनी कमजोर धारणा को और मजबूत किया।

    सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 75,577.58 के स्तर के मुकाबले 361.36 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,216.22 पर खुला था। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से यह दिन के निचले स्तर 74,764.23 तक पहुंच गया। इस स्तर पर सूचकांक में 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 23,635.10 के मुकाबले 113 अंक यानी 0.47 प्रतिशत नीचे 23,522.05 पर खुला। दिन के कारोबार में यह और फिसलकर 23,431.50 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस तरह निफ्टी में दिन के दौरान 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 0.51 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और इसमें 3.24 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 2.23 प्रतिशत तथा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.23 प्रतिशत कमजोर हुए। निफ्टी एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत निफ्टी मेटल में 1.79 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थ, अदाणी पोर्ट्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील, हिंडाल्को, अपोलो हॉस्पिटल और एनटीपीसी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। इन कंपनियों के शेयरों में करीब पांच से एक प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। दूसरी तरफ इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा कमजोर शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका को ध्यान में रखते हुए बाजार की कीमतों का आकलन कर रहे हैं। लगातार जारी लड़ाई और जवाबी कार्रवाई के कारण निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की संभावना बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहने पर प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती बढ़ सकती है। ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। बॉन्ड यील्ड और करेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सतर्क रहने की संभावना है। इससे जोखिम लेने की उनकी क्षमता सीमित रह सकती है और बाजार की धारणा पर दबाव बना रह सकता है।

  • कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रविवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। तेल विपणन कंपनियों ने 23 अगस्त के लिए घरेलू बाजार में ईंधन के दाम पहले के स्तर पर ही बनाए रखे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और आने वाले समय में ईंधन लागत को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    23 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में रविवार होने के कारण कारोबार बंद है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार के बंद भाव के आसपास ही बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा, जबकि शुक्रवार को इसमें 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। दूसरी ओर, अमेरिकी WTI क्रूड 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर रहा और इसमें शुक्रवार को 0.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    घरेलू बाजार की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 111.12 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.43 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर है।

    चेन्नई में पेट्रोल 107.75 रुपये और डीजल 99.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का 98.79 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर पर है।

    अन्य प्रमुख शहरों में गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये प्रति लीटर है, जबकि गाजियाबाद में इसका भाव 101.80 रुपये है। पटना में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 113.35 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। गाजियाबाद में डीजल 95.29 रुपये और चंडीगढ़ में डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का असर देश की ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तेल विपणन कंपनियों की लागत और उनकी अंडर-रिकवरी पर दबाव बढ़ सकता है।

    पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होतीं। इनमें केंद्र और राज्य स्तर के कर, वैट, डीलर कमीशन तथा परिवहन लागत जैसे कई घटक शामिल होते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग रहते हैं।

    देश में तेल कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव लागू करती हैं। कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर विनिमय दर सहित विभिन्न बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है। फिलहाल 23 अगस्त को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत यह है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड महंगा होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।

  • निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका ईरान तनाव के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने मजबूत खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।

    सप्ताह के दौरान एफआईआई का निवेश व्यवहार उतार चढ़ाव वाला रहा। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की। इसके बाद लगातार दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने खरीदारी की, लेकिन सप्ताह के अंतिम दो सत्रों में फिर से बिकवाली का रुख अपनाया। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

    20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच एफआईआई की गतिविधियों पर नजर डालें तो शुरुआती सप्ताह में वे शुद्ध विक्रेता रहे। इसके बाद लगातार तीन सप्ताह तक उन्होंने खरीदारी की। हालांकि मौजूदा सप्ताह में उनका रुख फिर बदल गया और उन्होंने शुद्ध निकासी की। इसके बावजूद पिछले एक महीने की कुल अवधि में एफआईआई अभी भी 1,282 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे हैं।

    दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार मजबूती दिखाई। पिछले एक महीने के दौरान डीआईआई ने प्रत्येक सप्ताह शुद्ध खरीदारी की। इस अवधि में उनका कुल निवेश 48,390 करोड़ रुपये रहा। केवल मौजूदा सप्ताह में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 17,320 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित करने में मदद मिली।

    अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों से भी घरेलू निवेशकों की मजबूत भूमिका सामने आती है। इस अवधि में एफआईआई ने कुल 2,510 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि डीआईआई का निवेश 34,370 करोड़ रुपये रहा है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत पूंजी बाजार की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की। मध्य सप्ताह में सूचकांक 24,026 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में इसमें सुधार देखने को मिला और निफ्टी अपने निचले स्तर से ऊपर आया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में यह 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट है।

    व्यापक बाजार में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। निफ्टी मिडकैप 100 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया और सप्ताह के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में बनी हुई है।

    बाजार के लिए आगे कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका ईरान के बीच भू राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से भारतीय बाजार पर दबाव की आशंका है। आने वाले दिनों में एफआईआई की दिशा भी बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। वहीं डीआईआई की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।

  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार को कारोबारी सत्र के अंत में लाल निशान में बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 प्रतिशत कमजोर होकर 24,078.30 अंक पर रहा।

    बाजार में बुधवार को व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें 1.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत कमजोर हुआ। मीडिया, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज से जुड़े सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, सर्विसेज, फार्मा और कंजप्शन सूचकांकों में भी कमजोरी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में दबाव केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने बिकवाली की।

    हालांकि आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ राहत दी। दोनों सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। कमजोर रुपये और कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग से आईटी कंपनियों को समर्थन मिलने की बात बाजार जानकारों ने कही।

    लार्जकैप शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 130.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 63,408.75 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 101.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,707.15 अंक पर रहा।

    सेंसेक्स में कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इंफोसिस और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल और इंडिगो में गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक भी कमजोर होकर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी का एक कारण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद स्थायी कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर बनी हुई है। ऊंचे क्रूड और बॉन्ड यील्ड का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। कमजोर रुपये से आईटी कंपनियों को संभावित लाभ की उम्मीद ने इस क्षेत्र के कुछ शेयरों को समर्थन दिया। हालांकि वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी फेड मिनट्स को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।

  • अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे

    अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव में फिलहाल नरमी आने के संकेतों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख तेल बेंचमार्क लगभग पांच प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने तनाव कम होने की संभावना के बीच मुनाफावसूली की, जिससे पिछले कुछ सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बाजार में दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी करीब 5.09 प्रतिशत टूटकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में आई यह गिरावट हाल के समय की बड़ी गिरावटों में शामिल रही।

    बाजार में नरमी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में विराम की संभावना रही। ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए कि यदि अमेरिका सैन्य अभियान आगे नहीं बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कुछ कम हुई है।

    हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। बाजार को आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने बाजार की चिंता को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान आई तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी महीने की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इसलिए निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर ही कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय होने की संभावना है।

  • वैश्विक तेल बाजार में गिरावट का दबाव, अमेरिका-ईरान कूटनीति से क्रूड प्राइस में बड़ी नरमी दर्ज

    वैश्विक तेल बाजार में गिरावट का दबाव, अमेरिका-ईरान कूटनीति से क्रूड प्राइस में बड़ी नरमी दर्ज

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की उम्मीदों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और क्रूड छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बाजार में यह गिरावट उस समय देखने को मिली है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं और भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। इस घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर पड़ा है, जिससे निवेशकों की धारणा में बदलाव देखा जा रहा है।

    वैश्विक बाजार में अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से उस जोखिम प्रीमियम में कमी के कारण हुई है, जो लंबे समय से मध्य पूर्व में तनाव की वजह से तेल कीमतों में शामिल था। जैसे ही कूटनीतिक समाधान की संभावना बढ़ी, बाजार ने भविष्य की आपूर्ति को अधिक स्थिर मानते हुए कीमतों में कटौती शुरू कर दी।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है, जिसमें सीजफायर को आगे बढ़ाने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से अभी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संवाद की प्रक्रिया जारी रहने से बाजार में सकारात्मक संकेत बने हैं। इसी उम्मीद के चलते तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम हुई है और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से कार्य करने लगे, तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में और नरमी आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है क्योंकि कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    इस बीच भारत सहित कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति सामान्य बनी हुई है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और सरकार की ओर से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के पर्याप्त भंडार बनाए रखने का दावा किया गया है। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को भी सक्रिय किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी या असंतुलन की स्थिति न बने।

    विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पूरी तरह अमेरिका-ईरान वार्ता के परिणाम और वैश्विक आपूर्ति स्थिरता पर निर्भर करेगी। यदि समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कीमतों में और गिरावट संभव है, जबकि किसी भी प्रकार की रुकावट या तनाव बढ़ने पर बाजार फिर से अस्थिर हो सकता है। फिलहाल बाजार कूटनीतिक संकेतों पर नजर बनाए हुए है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।