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  • रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मई के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत चीन के बाद रूस के हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।

    देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।

    भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।

    रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।

  • कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर

    कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली।
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोमवार 6 जुलाई को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। इससे वाहन चालकों को बढ़ोतरी से राहत तो मिली है, लेकिन सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक ही स्तर पर बनी हुई हैं और बाजार की नजर अब आगे होने वाले संभावित बदलाव पर टिकी है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादन बढ़ाने के फैसलों और वैश्विक आपूर्ति में सुधार की उम्मीद के चलते ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क नीचे आए हैं। इससे यह उम्मीद जगी कि भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर फिलहाल कीमतों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है।

    राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, जयपुर, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में भी निर्धारित दरों पर ईंधन की बिक्री जारी है।

    सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत दिखाई देना संभव नहीं है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि तेल कंपनियां अभी भी कुछ समय पहले ऊंची कीमतों पर खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं। इसके अलावा परिवहन, बीमा और अन्य परिचालन लागत भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कच्चे तेल के सस्ता होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    सरकार का यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे आती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां पूर्व में हुए अतिरिक्त खर्च और लागत की भरपाई करने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए तत्काल राहत की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    गौरतलब है कि मई 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से अब तक किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ है। यही कारण है कि उपभोक्ता अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद घरेलू कीमतों में कटौती की उम्मीद लगाए हुए हैं।

    जो उपभोक्ता अपने शहर के ताजा पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं, वे संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक डिजिटल सेवाओं या एसएमएस सुविधा के माध्यम से रोजाना अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि विभिन्न राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय कर अलग-अलग होते हैं, इसलिए शहरों के अनुसार ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल देशभर में कीमतें स्थिर हैं, जबकि बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मौजूदा नरमी घरेलू ईंधन दरों में राहत का रास्ता कब खोलती है।

  • महंगा हुआ कच्चा तेल, नहीं बढ़े खुदरा दाम; पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर हो रहा नुकसान

    महंगा हुआ कच्चा तेल, नहीं बढ़े खुदरा दाम; पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर हो रहा नुकसान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में सीमित बदलाव के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनियों का रिटेल मार्जिन सकारात्मक रहने के बजाय नुकसान में पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कारोबार पर पड़ रहा है।

    उपलब्ध वित्तीय आकलनों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल की खुदरा बिक्री पर प्रति लीटर लगभग 6 रुपये और डीजल पर करीब 18.9 रुपये का नुकसान हुआ। इसके विपरीत पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यही कंपनियां पेट्रोल और डीजल दोनों पर प्रति लीटर लाभ दर्ज कर रही थीं। एक वर्ष के भीतर रिटेल मार्जिन का मुनाफे से नुकसान में बदल जाना ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि रही। हालांकि वैश्विक बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ाए गए। परिणामस्वरूप कंपनियों की लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर बढ़ गया, जिससे रिटेल मार्जिन नकारात्मक हो गया।

    सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरी से तैयार ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मानकों और आयात लागत के आधार पर तय करती हैं। इसके बाद परिवहन, भंडारण, विपणन, वितरण, डीलर कमीशन और अन्य परिचालन खर्च जोड़कर अंतिम खुदरा मूल्य निर्धारित किया जाता है। जब वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और घरेलू खुदरा कीमतें स्थिर रहती हैं, तब कंपनियों को प्रति लीटर नुकसान उठाना पड़ता है।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन की बिक्री में भी कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना रहा। बाजार मूल्य की तुलना में कम दरों पर आपूर्ति करने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को कुल मिलाकर भारी राजस्व प्रभाव का सामना करना पड़ा। इससे कंपनियों की परिचालन आय और लाभप्रदता दोनों प्रभावित हुई हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2022 में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और यूक्रेन संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी। इसके बाद घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक संतुलित और नियंत्रित तरीके से अपनाई गई। इस नीति का लाभ तब मिलता है जब वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होता है और घरेलू कीमतें स्थिर रहती हैं, लेकिन कीमतों में तेजी आने पर यही स्थिति कंपनियों के लिए नुकसान का कारण बन जाती है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, विनिमय दर और घरेलू मूल्य निर्धारण नीति तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक बाजार में कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रहता है और खुदरा कीमतों में समानुपातिक संशोधन नहीं होता, तो सरकारी तेल कंपनियों के रिटेल मार्जिन पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं कीमतों में नरमी आने की स्थिति में कंपनियों की लाभप्रदता में दोबारा सुधार की संभावना भी बनी रहेगी।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख


    नई दिल्ली ।
    देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं भविष्य में कीमतों में संभावित राहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

    केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कच्चे तेल की खरीद, परिवहन, भंडारण और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसकी खरीद लगभग दो महीने पहले हुई थी।

    सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं या उनमें और गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक होने पर खुदरा कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जा सकता है।

    हाल के दिनों में देश की एक निजी ईंधन विपणन कंपनी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में राहत दे सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का निर्णय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के रुख को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी रही। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैट के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और कर संरचना जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में गिरावट आने के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल कमी होना हमेशा संभव नहीं होता।

    सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो उपभोक्ताओं को भविष्य में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • ईंधन कीमतों में कटौती से बढ़ी राहत की उम्मीद, पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपये सस्ता, बचत पर उपभोक्ताओं की नजर

    ईंधन कीमतों में कटौती से बढ़ी राहत की उम्मीद, पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपये सस्ता, बचत पर उपभोक्ताओं की नजर

    नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में आई राहत ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी राहत की उम्मीद दी है। निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन विपणन कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में क्रमशः 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का फैसला लागू किया है। इस निर्णय के बाद कई शहरों में कंपनी के पेट्रोल पंपों पर ईंधन पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो रहा है।

    ईंधन की कीमतों में यह कटौती ऐसे समय की गई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी आने से कच्चे तेल के दाम नीचे आए हैं। इसका असर घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है और निजी कंपनियों ने उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया है।

    कीमतों में कमी का सबसे अधिक फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिनका दैनिक खर्च ईंधन पर निर्भर करता है। टैक्सी चालक, कैब सेवा से जुड़े ड्राइवर, डिलीवरी पार्टनर, छोटे कारोबारी और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले वाहन मालिकों के लिए यह कटौती मासिक ईंधन खर्च में उल्लेखनीय बचत का कारण बन सकती है। कई उपभोक्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे महंगाई के दौर में राहत देने वाला कदम बताया है।

    ईंधन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो आगे भी खुदरा कीमतों में राहत की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, अंतिम कीमतें वैश्विक बाजार, विनिमय दर, कर संरचना और विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं।

    दूसरी ओर, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। राष्ट्रीय राजधानी सहित कई प्रमुख शहरों में सरकारी कंपनियों के पंपों पर पहले से लागू दरें ही प्रभावी हैं। ऐसे में निजी और सरकारी कंपनियों की मूल्य नीति के बीच अंतर भी उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

    ईंधन के अलावा हाल ही में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कमी दर्ज की गई है, जिससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को परिचालन लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में कीमतों की यह नरमी यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो परिवहन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे वस्तुओं की ढुलाई की लागत कम होने के साथ कई क्षेत्रों में महंगाई का दबाव भी कुछ हद तक घट सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में अन्य ईंधन कंपनियां भी कीमतों में इसी तरह की राहत देती हैं या नहीं।

  • दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ आगे बढ़े, हालांकि दिन के अंतिम चरण में मुनाफावसूली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बढ़त सीमित हो गई। इसके बावजूद बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहने के संकेत मिले।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।

    बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।

    इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में आईटी, रियल्टी और बैंकिंग क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान प्रमुख रूप से देखने को मिला, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और कारोबारी माहौल सकारात्मक बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।

    लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

  • कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का सीधा असर भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर देखने को मिला है। बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे पूरे ऊर्जा सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार में आई तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के कारण देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका लाभ घरेलू तेल कंपनियों को मिला।

    दिन के कारोबार में Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई और यह 410.50 रुपये के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया। इसी तरह Bharat Petroleum Corporation Limited के शेयरों में भी 2.46 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई और यह 319.50 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।

    वहीं Indian Oil Corporation Limited के शेयर भी 1.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 147.47 रुपये के उच्चतम स्तर पर कारोबार करते नजर आए। इन तीनों प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में आई तेजी ने ऊर्जा सेक्टर को मजबूती प्रदान की।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट इस तेजी का प्रमुख कारण है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

    पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता के संकेत मिले हैं। इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है, जिससे ईरान के तेल निर्यात में वृद्धि की संभावना बन सकती है।

    इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की संभावनाओं ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारू संचालन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत का संकेत है क्योंकि इससे आयात बिल में कमी आती है और भुगतान संतुलन पर दबाव घटता है। इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है और आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।

    इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में कमी और रुपये की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। इन दोनों कारकों से आने वाले समय में निवेश प्रवाह में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    ऊर्जा क्षेत्र में आई यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी और ऊर्जा कीमतों में नरमी से बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना हुआ है।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी देखने को मिला। लगातार दो सप्ताह की कमजोरी के बाद बाजार ने वापसी करते हुए प्रमुख सूचकांकों को ऊंचे स्तरों तक पहुंचाया।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा में सुधार का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद रही। भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना, जिसका लाभ भारतीय इक्विटी बाजार को मिला। साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी ने आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत का संकेत दिया।

    कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,600 अंक के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर 75,500 अंक के स्तर को पार करने में सफल रहा। पूरे सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत प्रदर्शन किया और निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। लार्ज-कैप कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कायम रहा, जबकि हाल के महीनों में तेज बढ़त हासिल कर चुके मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सीमित मुनाफावसूली देखने को मिली।

    वित्तीय क्षेत्र इस सप्ताह बाजार का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। निजी बैंकों में निवेशकों की सक्रिय खरीदारी और सकारात्मक नियामकीय माहौल ने बैंकिंग शेयरों को समर्थन दिया। इसके अलावा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की कंपनियों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर आय वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित हुए।

    दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में बना रहा। अमेरिका में आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी खर्च में संभावित कमी की आशंकाओं ने आईटी शेयरों की गति को सीमित किया। वहीं धातु क्षेत्र पर भी दबाव देखने को मिला, क्योंकि चीन में मांग कमजोर रहने की चिंताओं और कमोडिटी कीमतों में नरमी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी रही। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की, हालांकि सप्ताह के अंतिम चरण में यह दबाव कुछ कम होता दिखाई दिया। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी और बाजार को मजबूत समर्थन प्रदान किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। घरेलू महंगाई से जुड़े आंकड़े, चीन के औद्योगिक उत्पादन के संकेतक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति निवेशकों की नजर में रहेंगे। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटती है, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का रुख आगे भी जारी रह सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण घरेलू निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। कारोबार की शुरुआत में ही प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और बाजार गिरावट के साथ खुला।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा प्रभाव उन देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाली हर बड़ी हलचल का असर घरेलू वित्तीय बाजारों पर दिखाई देता है।

    बाजार में शुरुआती कमजोरी के पीछे वैश्विक संकेत भी एक प्रमुख कारण रहे। विदेशी बाजारों में निवेशकों ने बढ़ते तनाव और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाई। इसका प्रभाव एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजारों में दबाव बढ़ गया।

    तेल कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता खर्च दोनों पर पड़ता है। यही वजह है कि तेल कीमतों में उछाल को निवेशक अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में देखते हैं।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऊर्जा और तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। बढ़ती तेल कीमतों से इन कंपनियों को संभावित लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखा गया। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का भी आकलन कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी मुख्य रूप से अनिश्चितता से प्रेरित है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और हालात सामान्य होते हैं तो बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

    भारत जैसे तेजी से बढ़ते आर्थिक ढांचे के लिए ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक है। तेल कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल शेयर बाजार के आंकड़ों पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

    फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों, तेल कीमतों की चाल और निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।