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  • भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    नई दिल्ली:  भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल

    यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है

    पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है

    इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं

    इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई
     पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है

  • मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास

    मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास


    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस के अवसर पर इन राज्यों के नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के ये राज्य न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध हैं, बल्कि देश की एकता और विविधता का भी सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि आने वाले वर्षों में ये राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करें और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि और उल्लास बना रहे।

    मेघालय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य भारत का गौरव है। पर्वतमालाओं से घिरा, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मेघालय अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणास्रोत है।मणिपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत के गहने के रूप में प्रसिद्ध है। मणिपुर की कला, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर की पहचान उसकी अद्वितीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य शांति, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

    त्रिपुरा के संदर्भ में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह राज्य माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा से अभिसिंचित है और अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है। उन्होंने त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों और जनजीवन की सरलता को सराहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्रिपुरा ने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास और सामाजिक संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि बाबा महाकाल से यही मंगलकामना है कि प्रकृति की गोद में बसे ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति करें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाला समय इन राज्यों के लिए और अधिक अवसर लेकर आएगा।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इस संदेश को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।स्थापना दिवस के अवसर पर मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और जनउत्सव की तैयारियां की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राज्यों की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।

  • दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला

    दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला


    नई दिल्ली । दिल्ली में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को किया। उद्घाटन समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ गीत के साथ हुई। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख नेता मौजूद रहे।केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि ‘शब्दोत्सव 2026’ में भारत की विविधता और संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला है।
    उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है। मल्होत्रा ने कहा भारत हमेशा से विश्व गुरु था और आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति में बदलाव के साथ भारतीय संस्कृति को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश है। यह देश विश्व में कहीं और नहीं मिलता जहां 340 से अधिक भाषाएं और 1600 से ज्यादा बोलियां जीवित हैं। यह भारत की असली पहचान है।

    वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली को वैचारिक आतंकवाद का गढ़ बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कला और संस्कृति को फिर से समृद्ध किया जा रहा है। कपिल मिश्रा ने आगे कहा “दिल्ली में पिछले 10 महीनों में कई बड़े और दिव्य कार्यक्रम हुए हैं जो पहले कभी नहीं हुए थे। ‘शब्दोत्सव 2026’ का आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम दिल्ली को नक्सली विचारधारा झूठे इतिहास और धर्म विरोधी सोच से मुक्त कर रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में इस तरह का कार्यक्रम आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के रूप में है। “जब कोई आतंकवादी या नक्सली कोई हिंसक कदम उठाता है तो वह विचारों से ही शुरू होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन विचारों को बदलने का है।इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति साहित्य और कला को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया गया। ‘शब्दोत्सव 2026’ ने दिल्ली में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके जरिए राजधानी में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो रही है।