Tag: cyber crime

  • पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए

    पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए


    ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर एक शादीशुदा महिला से करीब 2 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले मोबाइल नंबर से महिला को फोन किया और खुद को विदेशी नागरिक बताकर बातचीत शुरू की। कुछ समय तक दोस्ती का भरोसा जीतने के बाद उसने महिला को भारी मात्रा में सोना गिफ्ट करने का लालच दिया। इसके बाद आरोपी ने कहानी बनाई कि वह सोना लेकर भारत आ रहा था लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने खुद को छुड़ाने के लिए 2 लाख रुपए की जरूरत बताई। उसकी बातों में आकर महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 12 बार में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू किए तो महिला को ठगी का शक हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना बताई। शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार गेरू वाले बंगले के पास त्यागी नगर मुरार निवासी 25 वर्षीय गजल बाथम सोशल मीडिया पर एक अनजान व्यक्ति के संपर्क में आई थी। आरोपी पिछले कुछ दिनों से उसकी पोस्ट पर कमेंट कर रहा था। इसी दौरान 3 अक्टूबर 2026 को महिला के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले एक अनजान नंबर से कॉल आया। महिला को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि नंबर पाकिस्तान के कंट्री कोड से जुड़ा है। फोन करने वाले ने खुद को विदेशी नागरिक बताया और मीठी बातें करके उससे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की।

    अगले दिन 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने दोबारा फोन किया। उसने महिला से आधार कार्ड मांगा लेकिन महिला ने अपना आधार कार्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने दोस्ती का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसे बड़ी मात्रा में सोना गिफ्ट करना चाहता है और खुद लेकर भारत आ रहा है। सोना मिलने की उम्मीद में महिला उसकी बातों पर भरोसा करने लगी।

    कुछ देर बाद आरोपी ने घबराए हुए अंदाज में फोन किया और दावा किया कि वह सोना लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन एयरपोर्ट पर एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने महिला को बताया कि अधिकारियों ने उसे छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए मांगे हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके पास करीब 20 लाख रुपए का सोना है और यदि वह रकम भेज देगी तो वह इस परेशानी से बाहर निकल जाएगा। पुलिस के मुताबिक इसी कहानी के जरिए आरोपी ने महिला को पैसे भेजने के लिए तैयार किया।

    इसके बाद आरोपी ने महिला को अलग-अलग दुकानों के ऑनलाइन क्यूआर कोड भेजे। महिला ने उन कोड पर कुल 12 ट्रांजेक्शन में 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम कई हिस्सों में भेजी गई जिसमें 19 हजार रुपए से लेकर 36 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन शामिल थे। पैसे मिलने के बाद भी आरोपी नहीं रुका और उसने महिला से और रकम की मांग शुरू कर दी।

    जब महिला ने बताया कि उसके पास अब पैसे नहीं हैं तो आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी। ठगी का अहसास होने पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुरार थाना प्रभारी गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है उनकी बैंकिंग और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम

    जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें मोबाइल अचानक बंद होने के बाद युवक को लगा कि फोन में तकनीकी खराबी आ गई है लेकिन कुछ देर बाद जब वह नया मोबाइल खरीदने पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। बैंक खाते में करीब 88 हजार रुपए होने के बावजूद मोबाइल से भुगतान नहीं हो सका। खाते में सिर्फ 36 पैसे बचे थे। जब मिनी स्टेटमेंट निकलवाया गया तो पता चला कि खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 88 हजार 542 रुपए निकाले जा चुके हैं।

    मामला राजीव गांधी नगर निवासी 46 वर्षीय वीरेन्द्र बावरिया का है। वीरेन्द्र जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत कैंट थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 9 अगस्त की बताई जा रही है। वीरेन्द्र काम पर जाने से पहले भैंसासुर रोड स्थित एक दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने QR कोड स्कैन कर 150 रुपए का UPI भुगतान किया। इसके बाद वह तीन पत्ती चौक स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे उनका ओप्पो एंड्रॉयड मोबाइल अचानक ऑटो अपडेट होने लगा। अपडेट की प्रक्रिया के दौरान फोन बंद हो गया और इसके बाद दोबारा चालू नहीं हुआ।

    वीरेन्द्र को लगा कि फोन की बैटरी या सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ गई है। वह फोन लेकर ITI माढ़ोताल स्थित कटंगी रोड की एक मोबाइल दुकान पर पहुंचे। दुकानदार ने फोन चेक करने के बाद बताया कि बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज है और पुरानी बैटरी ठीक से काम नहीं कर रही है। फोन की समस्या के चलते वीरेन्द्र ने नया मोबाइल खरीदने का फैसला किया।

    उन्होंने उसी दुकान से करीब 14 हजार रुपए का नया मोबाइल लेने की बात तय की। भुगतान के लिए उन्होंने PhonePe का इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन स्क्रीन पर बैलेंस कम होने का मैसेज दिखाई दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए क्योंकि उन्हें खाते में पर्याप्त रकम होने की उम्मीद थी। बैंक खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि उसमें सिर्फ 36 पैसे बचे हैं।

    इसके बाद वीरेन्द्र पास के SBI ATM पहुंचे और मिनी स्टेटमेंट निकाला। स्टेटमेंट देखते ही उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। उनके Union Bank of India की सदर शाखा के खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन किए गए थे। पहले 29 हजार रुपए फिर 50 हजार रुपए और इसके बाद 9 हजार 542 रुपए खाते से ट्रांसफर किए गए। कुल 88 हजार 542 रुपए की रकम उनके खाते से निकल चुकी थी।

    वीरेन्द्र का कहना है कि उन्होंने ये ट्रांजैक्शन नहीं किए थे। मोबाइल बंद होने और खाते से रकम निकलने के बीच संबंध को लेकर अब पुलिस साइबर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल बंद होने के दौरान खाते तक ठगों की पहुंच कैसे बनी और UPI ट्रांजैक्शन किस माध्यम से किए गए।

    इस घटना ने मोबाइल यूजर्स के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। अचानक मोबाइल बंद होने या अपडेट होने जैसी स्थिति में लोग अक्सर इसे सामान्य तकनीकी समस्या मान लेते हैं। लेकिन इस मामले में मोबाइल की खराबी सामने आने के बाद बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चला। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजैक्शन की जानकारी के आधार पर साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

  • आईपीएस निरंजन वायंगणकर को मिली पदोन्नति, बने साइबर पुलिस के नए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक

    आईपीएस निरंजन वायंगणकर को मिली पदोन्नति, बने साइबर पुलिस के नए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक

    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वर्ष 1999 बैच के अधिकारी निरंजन वी. वायंगणकर को पदोन्नति देते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद पर पदस्थ किया है।

    गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, वायंगणकर वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक (IG), साइबर, पुलिस मुख्यालय, भोपाल के पद पर कार्यरत हैं। पदोन्नति के बाद उन्हें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/साइबर, पुलिस मुख्यालय, भोपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    आदेश में कहा गया है कि अधिकारी द्वारा नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वेतन) नियम, 2016 के नियम-11 के अंतर्गत उनके द्वारा धारित पद की प्रतिष्ठा एवं जिम्मेदारी के अनुरूप अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर वेतनमान एवं अन्य सुविधाएं देय होंगी। गृह विभाग ने यह आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा उनके आदेशानुसार जारी किया है।
  • चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    मध्‍य प्रदेश। चित्रकूट में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को रामघाट पर नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बहती रही। सतना के पहाड़ी इलाकों और चित्रकूट में हुई बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ा। बाढ़ का पानी रामघाट के आसपास स्थित मठ-मंदिरों तक पहुंच गया। भरत मंदिर परिसर में भी पानी घुसने से फर्श पर मलबा जमा हो गया है।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रामघाट पर बैरिकेडिंग कर लोगों को नदी और घाट क्षेत्र की ओर जाने से रोक दिया है। कई मठ-मंदिरों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं। पानी कम होने के बाद मंदिरों और घाट क्षेत्र में जमा मलबे की सफाई शुरू करा दी गई है।

    भरत मंदिर में घुसा पानी, मलबे की सफाई शुरू
    मंदाकिनी का पानी भरत मंदिर परिसर में भी पहुंच गया। पानी के साथ बहकर आया मलबा मंदिर के अंदर फर्श पर जमा हो गया। जलस्तर कम होने के बाद मंदिर परिसर में सफाई का काम शुरू कराया गया। आसपास के मठ-मंदिरों में भी पानी और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से रामघाट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी के बढ़े जलस्तर से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सड़क-रास्ते जलमग्न, प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक स्कूल बंद
    लगातार बारिश और बाढ़ के कारण जिले के कई इलाकों में सड़क और रास्ते जलमग्न हो गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग के आदेश पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रंजना शुक्ला ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार जलभराव और तेज बहाव के बीच छोटे बच्चों का स्कूल आना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए दो दिन के लिए अवकाश किया गया है।

    छात्रों की छुट्टी, शिक्षक पहुंचेंगे स्कूल
    बीएसए रंजना शुक्ला के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए है। स्कूलों में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिकाएं निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचेंगे और विभागीय एवं अन्य आवश्यक सरकारी कार्य करेंगे। सभी विद्यालय प्रबंधनों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बारिश और अवकाश के दौरान बच्चों को जलभराव वाले इलाकों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले पानी के पास न जाने दें।

    फिलहाल प्रशासन की नजर मंदाकिनी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर बनी हुई है। रामघाट पर बैरिकेडिंग के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पानी उतरने के बाद घाट और मंदिर क्षेत्रों में जमा मलबे की सफाई कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान को मिली रफ्तार: देवास में मैराथन निकालकर पुलिस ने लोगों को किया साइबर अपराधों के प्रति जागरूक

    'सेफ क्लिक 2.0' अभियान को मिली रफ्तार: देवास में मैराथन निकालकर पुलिस ने लोगों को किया साइबर अपराधों के प्रति जागरूक


    इंदौर । बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच देवास पुलिस लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही है। इसी कड़ी में मंगलवार सुबह ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत शहर में एक जागरूकता मैराथन का आयोजन किया गया। इस मैराथन में पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी, पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लेकर साइबर सुरक्षा का संदेश दिया।

    सुबह छह बजे भोपाल चौराहे से शुरू हुई मैराथन को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए औद्योगिक क्षेत्र थाना परिसर तक पहुंची। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने साइबर अपराधों से बचाव से जुड़े संदेश दिए और नागरिकों से सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने की अपील की। अभियान का उद्देश्य लोगों को इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को बताया कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध संदेश, फर्जी कॉल या ईमेल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। साथ ही बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने यह भी बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए या नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर सेल से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर शिकायत दर्ज कराने से कई मामलों में ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

    देवास पुलिस का ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान पिछले चौदह दिनों से लगातार चल रहा है। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस टीम लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं, सोशल मीडिया ठगी, फिशिंग लिंक, केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाले धोखाधड़ी के मामलों और ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब आम नागरिक भी जागरूक और सतर्क रहें। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। देवास पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत सूचना दें और सुरक्षित डिजिटल आदतों को अपनाकर स्वयं के साथ अपने परिवार को भी साइबर अपराधों से सुरक्षित रखें।

  • ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे

    ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और उज्जैन में ई रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है जिसने हजारों चालकों की चिंता बढ़ा दी है। मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाकर वाहन को बीच रास्ते में बंद कर दिया जाता है। इसके बाद आरोपी खुद को मैकेनिक बताकर मौके पर पहुंचता है और कुछ ही मिनटों में बैटरी दोबारा चालू करने के बदले दो सौ से चार सौ रुपये तक वसूल लेता है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जबकि पूरे नेटवर्क और तकनीकी खामियों की जांच जारी है।

    उज्जैन में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कई ई रिक्शा चलते चलते अचानक बंद हो गए। हर बार एक युवक मौके पर पहुंचता और खुद को मैकेनिक बताकर कुछ ही देर में वाहन चालू कर देता। शुरुआत में चालकों को यह सामान्य तकनीकी खराबी लगी लेकिन जब एक जैसी घटनाएं बार बार होने लगीं तो ई रिक्शा एसोसिएशन को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    बुधवार शाम लोटी स्कूल तिराहे पर एक ई रिक्शा अचानक बंद हुआ। कुछ देर बाद एक युवक वाहन ठीक करने के नाम पर तीन सौ रुपये मांगने पहुंचा। पहले से सतर्क चालक ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसकी पहचान रीतेश भानूपा के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि वह मोबाइल में उपलब्ध एक बैटरी मैनेजमेंट ऐप के जरिए ब्लूटूथ से आसपास मौजूद ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाता था। जहां सुरक्षा के लिए पासवर्ड नहीं लगा होता था वहां से वह बैटरी लॉक कर देता और बाद में पैसे लेकर उसे दोबारा चालू कर देता था।

    इस तरह की घटनाएं केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहीं। भोपाल के पुराने शहर में भी कई ई रिक्शा बीच रास्ते में अचानक बंद हो गए। चालकों का आरोप है कि बैटरी लॉक होने के बाद उन्हें कंपनी के सर्विस सेंटर तक जाना पड़ा जहां अनलॉक करने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे लिए गए। इससे उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई और यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई जगह विवाद की स्थिति भी बन गई।

    ई रिक्शा चालकों का कहना है कि वाहन अचानक बंद होने से दिनभर की कमाई पर असर पड़ता है। स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले चालकों और रोजाना सवारी ढोने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई चालकों ने बताया कि एक ही दिन में उनकी गाड़ी कई बार बंद हुई जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मोबाइल ऐप सामान्य रूप से उपलब्ध है और यदि ई रिक्शा की बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो कुछ मॉडलों में उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से अब कई कंपनियां ब्लूटूथ के लिए पासवर्ड सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बैटरी का सुरक्षा पासवर्ड तुरंत सक्रिय कराएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को वाहन या मोबाइल सिस्टम तक पहुंच न दें।

    पुलिस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने चालकों को इस तरीके से निशाना बनाया गया और सुरक्षा में कहां चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता की भी मांग करती है। समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाकर ही इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क

    सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क


    इंदौर । इंदौर में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार आरोपी चेतन नाथ से पूछताछ में सामने आया है कि नशे का पूरा कारोबार सोशल मीडिया कॉलिंग के जरिए संचालित किया जाता था। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में एक भी सेव संपर्क नंबर नहीं मिला जिससे पुलिस को अंदेशा है कि गिरोह पहचान छिपाने के लिए आधुनिक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। फिलहाल अदालत ने आरोपी को दो जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

    द्वारकापुरी थाना पुलिस के अनुसार चेतन नाथ की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि ड्रग्स की खरीद और सप्लाई के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेज की बजाय सोशल मीडिया कॉलिंग का उपयोग किया जाता था ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल का तकनीकी विश्लेषण कर उसके डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस ने बताया कि जब टीम चेतन नाथ को पकड़ने उसके ठिकाने पर पहुंची थी तब वहां उसका एक साथी भी मौजूद था। पुलिस को देखते ही वह मौके से फरार हो गया। पूछताछ में पता चला कि दोनों पहले जेल में साथ रह चुके हैं और लंबे समय से संपर्क में थे। अब पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और उसके संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।

    पूछताछ के दौरान चेतन नाथ ने यह भी दावा किया कि उसके पास से बरामद 19 लाख रुपये नकद उसके एक साथी की जमानत के लिए जुटाए गए थे। हालांकि पुलिस इस दावे को पूरी तरह सत्यापित करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी नकदी नशे के कारोबार से अर्जित की गई हो सकती है और इसके वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 8 किलो गांजा और पिस्टल के 22 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद कारतूसों के स्रोत और उनके संभावित इस्तेमाल को लेकर भी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी के पास हथियारों से जुड़ा कोई नेटवर्क भी था या नहीं।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ दिन पहले पुलिस ने लकी नाथ नामक आरोपी को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया था। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बैक ट्रैकिंग करते हुए चेतन नाथ तक पहुंच बनाई। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकता और इसके तार दूसरे शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से डिजिटल साक्ष्यों बैंकिंग लेनदेन और कॉलिंग पैटर्न की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

  • मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार

    मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जिन्होंने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उज्जैन और भोपाल में सामने आई इन घटनाओं में लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए एआई की मदद से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किए गए। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    पहला मामला उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र का है जहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही एक छात्रा को सुनियोजित साजिश का शिकार बनाया गया। छात्रा की तस्वीर को अश्लील वीडियो के साथ जोड़कर डीपफेक कंटेंट तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया तथा गांव के व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दिया गया। इस घटना के बाद छात्रा के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।

    पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश के पीछे छात्रा का ही एक रिश्तेदार था जिसका उद्देश्य छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था। जांच में यह भी पता चला कि छात्रा की तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड से हासिल की गई थी। आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान जमा कराई गई फोटो एक महिला बीएलओ के माध्यम से आरोपियों तक पहुंची जिसके बाद उसी तस्वीर का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया।

    इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। महिला बीएलओ को अदालत से जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में पारिवारिक और चुनावी रंजिश को इस घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    दूसरा मामला भोपाल के करोंद इलाके का है जहां शादी से इनकार करने पर एक युवती ने बदला लेने के उद्देश्य से युवक के परिवार को निशाना बनाया। आरोप है कि युवती ने एआई तकनीक की मदद से युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर उन्हें वायरल कर दिया।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी बेटी मानसिक तनाव से गुजर रही है और पूरा परिवार सामाजिक बदनामी का सामना कर रहा है। परिवार ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इन दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा सामाजिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय पूरी सावधानी बरतें। यदि किसी व्यक्ति को अपने नाम या तस्वीर का दुरुपयोग होने की जानकारी मिले तो बिना देर किए पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।