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  • अक्षय कुमार की बेटी के साथ ऑनलाइन हुई शर्मनाक घटना: साइबर सुरक्षा सत्र में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

    अक्षय कुमार की बेटी के साथ ऑनलाइन हुई शर्मनाक घटना: साइबर सुरक्षा सत्र में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

    नई दिल्ली। डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इससे जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल प्लेटफॉर्म बच्चों और युवाओं के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसी के बीच साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसी से जुड़ा एक गंभीर मामला हाल ही में सामने आया, जिसने हर माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है।

    अभिनेता अक्षय कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बेटी के साथ हुई एक डरावनी ऑनलाइन घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी 13 वर्षीय बेटी नितारा ऑनलाइन वीडियो गेम खेल रही थी, जहां वह अन्य खिलाड़ियों के साथ बातचीत भी कर सकती थी। इसी दौरान एक अनजान व्यक्ति ने उससे बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे उसकी पहचान पूछते हुए एक बेहद आपत्तिजनक दिशा में बातचीत को मोड़ दिया।

    अक्षय के अनुसार, उस व्यक्ति ने बच्ची से उसकी पहचान जानने के बाद अनुचित और आपत्तिजनक संदेश भेजे और यहां तक कि उससे निजी तस्वीरों की मांग भी कर डाली। यह घटना ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर हुई, जिससे यह साफ होता है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा कितनी कमजोर हो सकती है यदि उन्हें सही मार्गदर्शन न मिले। सौभाग्य से, नितारा ने तुरंत स्थिति को समझते हुए गेम बंद कर दिया और पूरी बात अपने परिवार को बता दी, जिससे किसी बड़ी परेशानी से बचाव हो सका।

    इस घटना ने अक्षय कुमार को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत अनुभव न मानकर एक गंभीर सामाजिक मुद्दे के रूप में सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज साइबर अपराध उतना ही खतरनाक हो चुका है जितना कोई पारंपरिक अपराध हो सकता है, बल्कि कई मामलों में यह और भी अधिक जोखिम भरा है क्योंकि इसमें अपराधी अपनी पहचान छुपाकर काम करते हैं।

    इसी संदर्भ में उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि स्कूलों में बच्चों के लिए नियमित रूप से साइबर सुरक्षा से जुड़ा विशेष समय निर्धारित किया जाना चाहिए, जहां उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन खतरों की पहचान और उनसे बचने के तरीकों के बारे में सिखाया जाए। उनका यह भी कहना था कि अगर बच्चों को शुरुआत से ही सही जानकारी दी जाए, तो ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

    विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि आज के समय में बच्चे बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दुनिया में सक्रिय रहते हैं, जिससे वे आसानी से साइबर अपराधियों के संपर्क में आ सकते हैं। ऑनलाइन गेमिंग, चैटिंग और सोशल मीडिया ऐसे प्लेटफॉर्म बन चुके हैं जहां अपराधी अक्सर अपनी पहचान छुपाकर बच्चों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दें और उनसे लगातार संवाद बनाए रखें।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा अब केवल एक तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह हर परिवार की प्राथमिक आवश्यकता बन चुकी है। बच्चों को इंटरनेट के उपयोग के साथ-साथ इसके खतरों के बारे में जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

    अक्षय कुमार द्वारा साझा किया गया यह अनुभव केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है, जो बताता है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

  • हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत

    हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत


    इंदौर । इंदौर की पुलिस अब तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए हाईटेक रणनीति पर काम कर रही है। मिनी मुंबई के नाम से पहचाने जाने वाले इस शहर में पुलिस कमिश्नरेट ने फैसला लिया है कि अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलते ही मौके पर ही कार्रवाई कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने या समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

    इसी योजना के तहत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक विशेष साइबर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न थानों से करीब 80 पुलिसकर्मियों को बुलाकर आधुनिक तकनीक और साइबर अपराध से निपटने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh के निर्देश पर किया गया, जिनका मानना है कि बदलते तकनीकी दौर में पुलिस को भी लगातार खुद को अपडेट रखना होगा।

    पुलिस कमिश्नरेट की योजना के अनुसार थाना स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी या डिजिटल फ्रॉड होने पर वह सीधे थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा सके और तत्काल कार्रवाई शुरू हो सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Amit Singh और आर.के. सिंह सहित शहर के सभी डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी भी मौजूद रहे।

    प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह सिखाया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही किस तरह त्वरित कार्रवाई की जाए। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी Rajesh Dandotiya और उनकी तकनीकी टीम ने पुलिसकर्मियों को कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in पोर्टल, एनसीआरपी सिस्टम, संचार साथी, समन्वय, ई-DAR, निदान और साइबर पुलिस पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन पोर्टल्स के जरिए शिकायत मिलते ही ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पीड़ित के बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को तुरंत होल्ड भी कराया जा सकता है।

    प्रशिक्षण सत्र में यह भी बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत कार्रवाई की जाए तो ठगी की रकम को ट्रैक कर उसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से पुलिस अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना चाहती है, जो तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए तत्काल कदम उठा सकें।

    पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने इस दौरान कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपराधी भी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनसे एक कदम आगे रहना होगा। उनका लक्ष्य है कि शहर का हर थाना साइबर अपराधों से निपटने में सक्षम बने और कोई भी पीड़ित व्यक्ति थाने से निराश होकर वापस न लौटे।

    कमिश्नरेट के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। आने वाले समय में इंदौर के प्रत्येक थाने में साइबर मामलों में दक्ष पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके।

  • इंस्टाग्राम दोस्ती के जाल में फंसा युवक, नग्न वीडियो बनाकर वसूले 56 हजार..

    इंस्टाग्राम दोस्ती के जाल में फंसा युवक, नग्न वीडियो बनाकर वसूले 56 हजार..


    मैहर। इंस्टाग्राम पर शुरू हुई एक सामान्य सी दोस्ती मैहर में एक युवक के लिए खौफनाक अनुभव बन गई। पुलिस के अनुसार करीब दस दिन पहले भदनपुर निवासी युवक शिवशंकर गुप्ता की पहचान इंस्टाग्राम पर मानषी नामदेव नाम की महिला से हुई। बातचीत बढ़ी तो दोनों के बीच मिलने का फैसला हुआ। महिला ने खुद को अविवाहित बताया और युवक को भरोसे में ले लिया।

    डोसा डेट के बहाने घर तक पहुंचाया
    बुधवार को दोनों पहले शहर की चौपाटी पहुंचे जहां साथ में डोसा खाया। इसके बाद महिला ने युवक से घर छोड़ने की बात कही और उसे अपने मकान पर ले गई। घर पहुंचते ही महिला पानी लाने के बहाने अंदर गई और तभी वहां पहले से मौजूद उसके तीन पुरुष साथी बाहर आ गए।

    मारपीट और शर्मनाक साजिश

    आरोप है कि महिला और उसके साथियों ने युवक के साथ मारपीट की। इसके बाद जबरन उसके कपड़े उतरवाकर उसका नग्न वीडियो बनाया गया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवक को मानसिक रूप से डरा दिया गया। डर और बदनामी के भय से युवक ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए 56 हजार रुपये आरोपितों को ट्रांसफर कर दिए।

    ब्लैकमेलिंग के सबूत मिले
    घटना के बाद पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर मैहर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य महिला आरोपित और एक पुरुष को गिरफ्तार कर लिया। महिला के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग के साक्ष्य मौजूद हैं।

    पुलिस की कार्रवाई जारी
    मैहर थाना पुलिस का कहना है कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। दो अन्य फरार आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस गिरोह ने पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम तो नहीं दिया।

    पुलिस की अपील
    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहें और निजी मुलाकात से पहले पूरी सावधानी बरतें।

  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।