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  • नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि इतने बड़े तथा विविधताओं वाले राज्य में प्रभावी कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है।

    नाना पाटेकर ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। इसके लिए स्पष्ट नीति, मजबूत नेतृत्व और निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी जरूरी है। उनके मुताबिक कानून व्यवस्था को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पिछले कई दशकों के दौरान उत्तर प्रदेश को बदलते हुए देखा है। उनके अनुसार प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के विश्वास में वृद्धि हुई है। प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव दिखाई देता है और सरकार के कामकाज में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है।

    नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस को आधुनिक संसाधन और नई तकनीक उपलब्ध कराने के साथ उसके आत्मविश्वास को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस बदलती परिस्थितियों में अपराध से निपटने में अधिक सक्षम हो सकती है।

    उन्होंने पुलिस और नागरिकों की संयुक्त भूमिका पर भी जोर दिया। नाना पाटेकर ने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक और सक्षम होगी, नागरिकों की सुरक्षा उतनी बेहतर होगी। वहीं जागरूक नागरिक अपराधियों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। उन्होंने खासतौर पर साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को गंभीर चुनौती बताया।

    अभिनेता ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करके फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराने की कोशिश करे और पैसे की मांग करे, तो लोगों को सावधान हो जाना चाहिए।

    नाना पाटेकर ने कहा कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीक नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा किया गया डर है। इसी डर का फायदा उठाकर ठग लोगों से उनकी मेहनत की कमाई हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो बातचीत में दबाव में आकर आर्थिक लेनदेन नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई फिल्म की भी सराहना की। उनका कहना था कि अगर कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सके या किसी बुजुर्ग को साइबर ठगी का शिकार होने से रोका जा सके, तो यह समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा।

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उनके पास फिल्मों की तरह गलती सुधारने या दोबारा प्रयास करने का अवसर नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश पुलिस आगे भी जनता के विश्वास को मजबूत बनाए रखेगी और प्रदेश को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। उनके बयान के दौरान कानून व्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा और नागरिक जागरूकता को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया।

  • साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के दौरान उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जबकि संबंधित संदिग्ध लेनदेन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी है।

    तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन राज्य के करीब 5 हजार पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक ग्राहकों से ईंधन बिक्री के बदले सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

    डीलरों के अनुसार किसी ग्राहक के यूपीआई भुगतान की पूरी पृष्ठभूमि की जांच करना उनके लिए संभव नहीं है। पेट्रोल पंप पर भुगतान प्राप्त करते समय कारोबारी के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे यह पता लगाया जा सके कि ग्राहक के बैंक खाते या उससे पहले हुए किसी लेनदेन का संबंध किसी साइबर अपराध की जांच से है या नहीं।

    डीलरों ने बताया कि डिजिटल भुगतान अब उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन करीब 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होने का दावा किया गया है। कई पेट्रोल पंपों पर कुल कारोबार का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और दूसरे कैशलेस माध्यमों से आने की बात कही गई है।

    समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी ग्राहक का भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच में शामिल पाया जाता है। डीलरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा सकते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।

    पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि एक विवादित लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को रोक देना उनके लिए गंभीर वित्तीय परेशानी पैदा करता है। पेट्रोल पंप का दैनिक संचालन लगातार बैंकिंग सुविधाओं पर निर्भर रहता है। ईंधन की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, बिजली और अन्य कारोबारी खर्चों के लिए बैंक खाते का सुचारू रूप से काम करना आवश्यक होता है।

    एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को पूछताछ के लिए सुबह के समय ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें कथित तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि किस लेनदेन को जांच के दायरे में रखा गया है।

    डीलरों का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली के जरिए ग्राहक से पैसा स्वीकार करने वाले व्यापारी को केवल इसलिए संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बाद में उस भुगतान को किसी साइबर अपराध की जांच से जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबारी और संदिग्ध अपराधी के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

    एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें वैध कारोबारियों के बैंक खातों को पर्याप्त आधार और स्पष्ट प्रक्रिया के बिना फ्रीज न किया जाए। संगठन चाहता है कि जांच एजेंसियां विवादित राशि और पूरे कारोबारी खाते के बीच अंतर करें, ताकि जांच भी जारी रहे और सामान्य कारोबार भी प्रभावित न हो।

    डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान नहीं निकला तो राज्य के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्राहक फिर से नकद भुगतान पर निर्भर हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु में तेजी से बढ़े डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ने की आशंका है।

  • आमिर खान को मिली धमकी की जांच तेज, स्वीडिश वीपीएन और टॉर ब्राउजर के इस्तेमाल की आशंका

    आमिर खान को मिली धमकी की जांच तेज, स्वीडिश वीपीएन और टॉर ब्राउजर के इस्तेमाल की आशंका

    नई दिल्ली । अभिनेता आमिर खान को सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश के माध्यम से मिली कथित धमकी के मामले में जांच तेज हो गई है। मुंबई पुलिस की साइबर टीम इस पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कर रही है और धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि संदेश भेजने के दौरान अपनी वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार धमकी से जुड़े ऑडियो संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट अलग-अलग नामों से साझा किए गए हैं। वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति ने स्वयं को आरजू बिश्नोई बताते हुए अभिनेता पर विभिन्न आरोप लगाए और उन्हें कथित तौर पर सबक सिखाने की बात कही। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी सामने आई, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस इन दोनों माध्यमों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है।

    प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में पुलिस को संबंधित डिजिटल गतिविधि का शुरुआती आईपी एड्रेस स्वीडन से जुड़ा मिला है। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि आईपी एड्रेस का इस प्रकार सामने आना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि कथित तौर पर वीपीएन और टॉर ब्राउजर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर वास्तविक लोकेशन छिपाने की कोशिश की गई है। ऐसे मामलों में इंटरनेट ट्रैफिक कई सर्वरों के माध्यम से गुजरता है, जिससे वास्तविक स्रोत तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

    साइबर विशेषज्ञ अब डिजिटल लॉग, नेटवर्क गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदेश किस डिवाइस, नेटवर्क या अकाउंट से भेजे गए और क्या इसके पीछे कोई एक व्यक्ति है या संगठित समूह। फिलहाल मामले में तकनीकी जांच जारी है और संबंधित सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब आमिर खान की हालिया शादी को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद कुछ लोगों और संगठनों ने अभिनेता पर आरोप लगाए और विरोध भी दर्ज कराया। इसी क्रम में कथित धमकी वाला ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।

    आमिर खान पहले भी इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी शादियां कानूनी प्रक्रिया के तहत संपन्न हुई हैं और किसी भी विवाह में धर्म परिवर्तन नहीं कराया गया। उन्होंने कहा था कि उनका परिवार विभिन्न धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है और उनकी निजी जिंदगी को लेकर फैलाई जा रही कई बातें तथ्यात्मक नहीं हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साइबर टीम का मुख्य उद्देश्य धमकी भेजने वाले की वास्तविक पहचान स्थापित करना और यह पता लगाना है कि संदेश किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है।

  • शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई

    शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के नागपुर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग के साथ बनाई गई एक रील तीन युवकों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गई। पुलिस को चुनौती देने वाले अंदाज में तैयार किया गया यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

    पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तीन युवक फिल्मी डायलॉग बोलते हुए स्वयं को शहर का वास्तविक “कमिश्नर” बताते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में प्रयुक्त संवाद को पुलिस ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यह सामग्री सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी और इसे व्यापक रूप से साझा भी किया गया था।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो पिछले कुछ समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा था। वीडियो में शामिल तीनों युवकों की पहचान शाहिद अब्जल शकील खान, मोहम्मद साहिल मोहम्मद शकील शेख और रिजवान मोहम्मद अजीज के रूप में की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करना, जो कानून व्यवस्था या सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करे, गंभीर विषय है। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के वीडियो कुछ लोगों को व्यवस्था के प्रति गलत संदेश दे सकते हैं और कानून का सम्मान कम करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

    पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वे कान पकड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगने से दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।

    यह घटना सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर मनोरंजन या लोकप्रियता के उद्देश्य से बनाई जाने वाली सामग्री भी कानूनी दायरे में आती है। यदि किसी पोस्ट, वीडियो या रील से सार्वजनिक व्यवस्था, सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा या सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था।

    जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

    साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    पटना । बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में साइबर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए कुल 128 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि इस दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अफवाह फैलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए की गई है।

    राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।

    साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।

    बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

    सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया।

    मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

    नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार


    उज्जैन । उज्जैन में एक नाबालिग लड़की की तस्वीर का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग की छवि धूमिल करने और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंवासा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    जानकारी के अनुसार 21 जून को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। वायरल किए गए फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों का परिवार से कोई संबंध नहीं था लेकिन नाबालिग की तस्वीर जोड़कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में सामने आया कि मतदाता संबंधी सरकारी दस्तावेज में लगी नाबालिग की पासपोर्ट साइज फोटो बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी गई थी। इसके बाद यह फोटो कई लोगों के बीच साझा होती रही और अंततः गलत हाथों में पहुंचकर उसका दुरुपयोग किया गया।

    पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में तस्वीर साझा की और बाद में फोटो एडिटिंग के जरिए नाबालिग की तस्वीर को किसी अन्य युवती की तस्वीर के साथ जोड़कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। इसके बाद उस सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा।

    जांच के दौरान पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री किन-किन प्लेटफॉर्म और लोगों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    कार्रवाई के तहत पुलिस ने आबिद पटेल मुजफ्फर पटेल और एहसान पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी दस्तावेज से फोटो साझा करने के मामले में बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

    एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने कहा कि नाबालिग की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

  • फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे

    फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे

    मध्य प्रदेश:  के ग्वालियर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि साइबर अपराधी किस तरह सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों का नाम लेकर आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा रकम के लेन-देन और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
    जानकारी के अनुसार पीड़िता स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उन्हें मई महीने में एक कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग अवैध और आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। शुरुआत में यह मामला केवल सत्यापन जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे कॉल करने वालों ने महिला को गंभीर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाना शुरू कर दिया।

    साइबर ठगों ने महिला को बताया कि उनके बैंक खाते में करोड़ों रुपये का कथित काला धन जमा है और यह मामला राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियों के संज्ञान में है। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी और रिजर्व बैंक से जुड़ा अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। लगातार वीडियो कॉल और आधिकारिक कार्रवाई जैसी दिखने वाली बातचीत के जरिए महिला पर भरोसा बनाने की कोशिश की गई। ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान ऐसा माहौल तैयार किया मानो किसी पुलिस मुख्यालय अथवा जांच एजेंसी के कार्यालय से कार्रवाई की जा रही हो।

    जालसाजों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी संपत्ति भी जब्त हो सकती है। इसी डर का फायदा उठाकर उनसे चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में जमा करवाई गई। बताया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और क्लीन चिट मिलने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। मानसिक दबाव और भय के कारण महिला लगातार उनके निर्देशों का पालन करती रहीं।

    जांच में सामने आया है कि करोड़ों रुपये की यह राशि देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई। रकम कई किश्तों में भेजी गई, जिससे ठगों ने अपने नेटवर्क को छिपाने की कोशिश की। साइबर अपराधियों ने कथित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और जांच संबंधी कहानियां गढ़कर महिला को लंबे समय तक भ्रमित रखा। यह पूरा घटनाक्रम करीब 37 दिनों तक चलता रहा, जिसके दौरान महिला लगातार ठगों के संपर्क में रही।

    जब कथित जांच पूरी होने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली और संपर्क करने वाले लोगों के मोबाइल नंबर बंद होने लगे, तब पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही साइबर अपराध शाखा ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले साइबर अपराध देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर धन उगाही करते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंस या धन हस्तांतरण के निर्देश मिलने पर तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना आवश्यक है। फिलहाल ग्वालियर पुलिस इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचने और ठगी गई राशि की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।