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  • PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके

    PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके


    नई दिल्ली ।
    बैंक में जमा अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, यह हर खाताधारक की सबसे बड़ी चिंता होती है। लेकिन पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ी करीब 35 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी ने ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में 25 ग्राहकों की शिकायतें सामने आने, कई बैंक कर्मचारियों को निलंबित किए जाने और प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, रकम किस तरह गायब हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    मामले में ग्रेटर नोएडा के एक गांव में रहने वाले 60 वर्षीय संतोष ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते में जमा रकम में गड़बड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी करीब 1.18 करोड़ रुपये की राशि गायब होने का दावा किया गया है। संतोष का कहना है कि उन्होंने जमीन और जेवर से जुड़े लेनदेन के बाद यह पैसा बैंक में जमा किया था। अन्य ग्राहकों ने भी अपने खातों से बड़ी रकम गायब होने की शिकायत की है। प्रभावित लोगों में ऐसे ग्राहक भी बताए गए हैं, जिन्होंने बेटी की शादी, इलाज और परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए बचत की थी।

    इस तरह के मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बैंक खाते में गड़बड़ी का पता कैसे लगाया जाए। अनधिकृत लेनदेन, जाली दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर और डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी अलग-अलग परिस्थितियों में वित्तीय नुकसान का कारण बन सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को पीएनबी के मौजूदा मामले का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।

    खाताधारकों को अपनी पासबुक, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल पर मिलने वाले लेनदेन संदेशों की नियमित जांच करनी चाहिए। खाते में दर्ज जमा और निकासी का मिलान करने से किसी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यदि बैंक रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली राशि और वास्तविक बैलेंस के बीच अंतर नजर आए, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए।

    बैंकिंग धोखाधड़ी में बाहरी साइबर अपराधियों के साथ-साथ आंतरिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग की आशंका भी अलग-अलग मामलों में सामने आती रही है। साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और खाते को सुरक्षित रखने, केवाईसी अपडेट करने या किसी समस्या को ठीक करने के नाम पर गोपनीय जानकारी मांगते हैं। ऐसे में ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड और कार्ड की संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक खोलने या किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से भी बचना जरूरी है।

    बैंक में जमा रकम की सुरक्षा के लिए भारत में जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम यानी डीआईसीजीसी की व्यवस्था है। इसके तहत पात्र बैंक जमाओं पर निर्धारित शर्तों के अनुसार एक जमाकर्ता को एक बैंक में समान अधिकार और क्षमता के तहत मूलधन तथा ब्याज मिलाकर अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलती है। यह सीमा हर खाते पर अलग-अलग लागू नहीं होती। एक ही बैंक में संबंधित जमाकर्ता की पात्र जमाओं को जोड़कर इसकी गणना की जाती है। इसलिए किसी बैंक में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक की पूरी जमा राशि स्वतः बीमित है।

    यदि खाते से बिना अनुमति पैसे निकलने का पता चले, तो सबसे पहले संबंधित बैंक की शाखा या आधिकारिक ग्राहक सेवा के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत संख्या, बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन से जुड़े संदेशों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस से भी संपर्क करना चाहिए। बैंक से निर्धारित प्रक्रिया के तहत समाधान नहीं मिलने पर पात्रता के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक की शिकायत व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।

    पीएनबी की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ा मामला ग्राहकों के लिए बैंक खातों की नियमित निगरानी का महत्व सामने लाता है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई करना, गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना और बैंक से लिखित शिकायत करना नुकसान को सीमित करने में मददगार हो सकता है। वहीं, बैंकिंग संस्थानों के लिए आंतरिक नियंत्रण मजबूत रखना और शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है।

  • 2027 से WhatsApp और Telegram पर सिम-बाइंडिंग नियम संभव, सिम हटाने पर अकाउंट की सेवाएं हो सकती हैं बंद

    2027 से WhatsApp और Telegram पर सिम-बाइंडिंग नियम संभव, सिम हटाने पर अकाउंट की सेवाएं हो सकती हैं बंद

    नई दिल्ली । व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए 2027 से नए नियम लागू हो सकते हैं। प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग व्यवस्था के तहत अकाउंट से जुड़े भारतीय मोबाइल नंबर का सक्रिय सिम या ई-सिम उसी डिवाइस में मौजूद होना जरूरी हो सकता है, जिस पर संबंधित अकाउंट इस्तेमाल किया जा रहा है। दूरसंचार विभाग ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को 31 दिसंबर 2026 तक इन नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना और भारतीय मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग को रोकना बताया गया है।

    इस व्यवस्था का सीधा असर उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है, जो मैसेजिंग ऐप पर अकाउंट बनाने के बाद रजिस्टर्ड सिम कार्ड निकाल देते हैं या उसे किसी दूसरे फोन में इस्तेमाल करते हैं। नए नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि अकाउंट से जुड़ा नंबर उसी डिवाइस में सक्रिय सिम या ई-सिम के माध्यम से सत्यापित हो। यदि सिम निकाल दिया जाता है, नंबर बदल जाता है या सिम निष्क्रिय हो जाता है, तो संबंधित अकाउंट की सेवाएं सीमित या निलंबित की जा सकती हैं, जब तक नंबर का दोबारा सत्यापन नहीं हो जाता।

    सरकार की इस पहल के पीछे ऑनलाइन धोखाधड़ी के उन तरीकों पर रोक लगाने का उद्देश्य है, जिनमें भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके मैसेजिंग अकाउंट बनाए जाते हैं और बाद में उनका संचालन दूसरे देशों से किया जाता है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, कुछ धोखाधड़ी गिरोह सिम कार्ड के माध्यम से अकाउंट तैयार करते हैं और फिर उनका इस्तेमाल फिशिंग, आर्थिक ठगी तथा तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों के लिए करते हैं। सक्रिय सिम और मैसेजिंग अकाउंट के बीच संबंध मजबूत होने से ऐसे मामलों की रोकथाम में मदद मिलने की उम्मीद है।

    व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म मोबाइल नंबर के आधार पर उपयोगकर्ता का पंजीकरण करते हैं, इसलिए उनके इस व्यवस्था के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि, अलग-अलग ऐप पर नियमों के लागू होने की स्थिति को लेकर पूरी स्पष्टता जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्नैपचैट पर इन नियमों के लागू होने की संभावना कम बताई गई है, जबकि सिग्नल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उपयोगकर्ताओं को अपने संबंधित ऐप की आधिकारिक जानकारी और नियमों के अंतिम स्वरूप पर नजर रखनी चाहिए।

    इन संभावित बदलावों का असर उन लोगों पर अधिक पड़ सकता है, जो एक फोन में सिम रखते हैं लेकिन व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप किसी दूसरे डिवाइस पर चलाते हैं। इसी तरह, अकाउंट बनाने के बाद सिम निकाल देने वाले, मुख्य रूप से वाई-फाई के जरिए ऐप इस्तेमाल करने वाले और डुअल-सिम फोन में अकाउंट से जुड़े नंबर को निष्क्रिय छोड़ने वाले उपयोगकर्ताओं को भी परेशानी हो सकती है।

    हालांकि, सिम-बाइंडिंग नियमों का मतलब यह नहीं है कि 1 जनवरी 2027 से व्हाट्सएप किसी खास आईफोन या एंड्रॉइड फोन पर चलना बंद कर देगा। प्रस्तावित व्यवस्था का संबंध मोबाइल नंबर के सत्यापन और अकाउंट की सुरक्षा से है, न कि किसी विशेष मोबाइल ब्रांड या ऑपरेटिंग सिस्टम से। इसलिए इसे फोन के मॉडल पर आधारित प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा।

    प्रस्तावित नियमों में भौतिक सिम कार्ड के साथ ई-सिम को भी शामिल किया गया है। यदि अकाउंट से जुड़ा नंबर सक्रिय ई-सिम के रूप में उसी डिवाइस में मौजूद रहता है, तो उपयोगकर्ता को निर्धारित शर्तों के तहत सेवा जारी रखने में आसानी हो सकती है। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया और सत्यापन से जुड़े व्यावहारिक निर्देश नियमों के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेंगे।

    उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल जरूरी है कि वे अपने मैसेजिंग अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर की सक्रियता बनाए रखें और सिम बदलने या दूसरे फोन में स्थानांतरित करने से पहले संभावित प्रभाव को समझें। इन नियमों का उद्देश्य सुरक्षा मजबूत करना है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम दिशानिर्देश किस तरह लागू किए जाते हैं और प्लेटफॉर्म सत्यापन की प्रक्रिया कैसे संचालित करते हैं।

  • सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी निजी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप टूल की मदद से बदलकर फर्जी तस्वीर तैयार की गई और बाद में उसका इस्तेमाल प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर और बैनर में किया गया।

    महिला ने साइबर पुलिस थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसकी तस्वीर का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया। उसके मुताबिक, मूल तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक और गलत रूप दिया गया। महिला का कहना है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

    शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर तैयार की गई फर्जी तस्वीर के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर जंतर-मंतर पर लगाए गए। महिला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ अमर्यादित नारे भी लगाए गए। उसने कहा कि उसकी निजी तस्वीर को सार्वजनिक प्रदर्शन में इस तरह इस्तेमाल किए जाने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई और उसे सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए गए और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत में विशेष रूप से इंस्टाग्राम के माध्यम से वीडियो वायरल किए जाने का उल्लेख है। महिला के अनुसार, तस्वीर और वीडियो के प्रसार से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा तथा निजी जीवन से जुड़ी सामग्री उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक हुई।

    इस मामले में एफआईआर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया है। एफआईआर में नाम दर्ज होने और आरोपी बनाए जाने की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए मामले में उनकी भूमिका जांच के दौरान स्पष्ट होगी।

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका सीजेपी या जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसकी तस्वीर को बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उसने कहा कि तस्वीर में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    मामले में अब पुलिस द्वारा प्रदर्शन से संबंधित पोस्टर, बैनर, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा सकती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की मूल तस्वीर कहां से प्राप्त की गई, उसमें बदलाव किस माध्यम से किया गया और तैयार की गई सामग्री को प्रदर्शन तक कैसे पहुंचाया गया।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो और तस्वीरों की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री तैयार करने, उसे सार्वजनिक करने और प्रदर्शन में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका जांच का हिस्सा हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    महिला ने पूरे घटनाक्रम को अपनी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि या जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

  • यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    नई दिल्ली ।इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार बीते एक साल में दुनियाभर के करीब दो करोड़ बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण या उससे जुड़े अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।

    यह रिपोर्ट 21 देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 21 हजार बच्चों से जुटाए गए सर्वे पर आधारित है। इसके लिए 2020 से 2025 के बीच जानकारी एकत्र की गई। अध्ययन में ब्राजील और पाकिस्तान समेत कई देश शामिल रहे। केन्या और सर्बिया भी सर्वे का हिस्सा थे, जबकि भारत को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक 12 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 1.5 करोड़ बच्चे अनचाहे और आपत्तिजनक यौन कंटेंट के संपर्क में आए। वहीं लगभग 90 लाख बच्चों ने ऐसी यौन प्रकृति की बातचीत या संपर्क के लिए दबाव का सामना करने की जानकारी दी।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले गलत व्यवहार में सोशल मीडिया की भूमिका प्रमुख रही। रिपोर्ट में सामने आया कि दर्ज किए गए ऐसे व्यवहारों में लगभग 60 प्रतिशत मामले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुए। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल रहे।

    ऑनलाइन गेमिंग भी बच्चों के लिए जोखिम का एक क्षेत्र सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 14 प्रतिशत गलत व्यवहार के मामले ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे। इससे संकेत मिलता है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए केवल सोशल मीडिया पर निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों की जरूरत है।

    रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न से जुड़े आधे से अधिक मामलों में कथित रूप से ऐसा व्यक्ति शामिल था, जिसे बच्चा पहले से जानता था। इनमें दोस्त, रिश्तेदार या पार्टनर जैसे लोग शामिल थे। यानी बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरा हमेशा किसी अनजान व्यक्ति से ही नहीं आता।

    अध्ययन के अनुसार करीब 38 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि वे पहली बार ऑनलाइन इस तरह की यौन गतिविधि या उत्पीड़न के शिकार हुए। अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप के सर्वेक्षण वाले देशों में 12 से 17 वर्ष की उम्र के पांच में से एक से अधिक बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण के कम से कम एक रूप का अनुभव बताया।

    रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है। नौ देशों से जुटाए गए आंकड़ों में अनुमानित 11 लाख बच्चों ने बताया कि उनकी एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो बनाए गए थे। ऐसे अनुभवों से बच्चों में चिंता और मानसिक दबाव का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया गया।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों की ओर से सुरक्षा उपायों में सुधार किए जाने की बात कही गई है। किशोरों के अकाउंट को अधिक निजी बनाने और वयस्कों के लिए किशोरों को संदेश भेजने की क्षमता सीमित करने जैसे कदम उठाए गए हैं। हालांकि बच्चों के ऑनलाइन शोषण के सामने आए आंकड़े लगातार सतर्कता की जरूरत बताते हैं।

    बच्चों को डिजिटल खतरों की जानकारी देने के साथ अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को अनचाहे संपर्क, आपत्तिजनक सामग्री और दबाव वाली बातचीत की पहचान करने के बारे में जागरूक करना जरूरी है। किसी संदिग्ध स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने की जानकारी भी उन्हें दी जानी चाहिए।

    रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा एक व्यापक चुनौती बन चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और एआई आधारित सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के बीच तकनीकी सुरक्षा, जागरूकता और प्रभावी निगरानी को साथ लेकर चलना जरूरी है।

  • नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि इतने बड़े तथा विविधताओं वाले राज्य में प्रभावी कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है।

    नाना पाटेकर ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। इसके लिए स्पष्ट नीति, मजबूत नेतृत्व और निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी जरूरी है। उनके मुताबिक कानून व्यवस्था को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पिछले कई दशकों के दौरान उत्तर प्रदेश को बदलते हुए देखा है। उनके अनुसार प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के विश्वास में वृद्धि हुई है। प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव दिखाई देता है और सरकार के कामकाज में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है।

    नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस को आधुनिक संसाधन और नई तकनीक उपलब्ध कराने के साथ उसके आत्मविश्वास को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस बदलती परिस्थितियों में अपराध से निपटने में अधिक सक्षम हो सकती है।

    उन्होंने पुलिस और नागरिकों की संयुक्त भूमिका पर भी जोर दिया। नाना पाटेकर ने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक और सक्षम होगी, नागरिकों की सुरक्षा उतनी बेहतर होगी। वहीं जागरूक नागरिक अपराधियों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। उन्होंने खासतौर पर साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को गंभीर चुनौती बताया।

    अभिनेता ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करके फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराने की कोशिश करे और पैसे की मांग करे, तो लोगों को सावधान हो जाना चाहिए।

    नाना पाटेकर ने कहा कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीक नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा किया गया डर है। इसी डर का फायदा उठाकर ठग लोगों से उनकी मेहनत की कमाई हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो बातचीत में दबाव में आकर आर्थिक लेनदेन नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई फिल्म की भी सराहना की। उनका कहना था कि अगर कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सके या किसी बुजुर्ग को साइबर ठगी का शिकार होने से रोका जा सके, तो यह समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा।

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उनके पास फिल्मों की तरह गलती सुधारने या दोबारा प्रयास करने का अवसर नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश पुलिस आगे भी जनता के विश्वास को मजबूत बनाए रखेगी और प्रदेश को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। उनके बयान के दौरान कानून व्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा और नागरिक जागरूकता को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया।

  • साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के दौरान उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जबकि संबंधित संदिग्ध लेनदेन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी है।

    तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन राज्य के करीब 5 हजार पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक ग्राहकों से ईंधन बिक्री के बदले सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

    डीलरों के अनुसार किसी ग्राहक के यूपीआई भुगतान की पूरी पृष्ठभूमि की जांच करना उनके लिए संभव नहीं है। पेट्रोल पंप पर भुगतान प्राप्त करते समय कारोबारी के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे यह पता लगाया जा सके कि ग्राहक के बैंक खाते या उससे पहले हुए किसी लेनदेन का संबंध किसी साइबर अपराध की जांच से है या नहीं।

    डीलरों ने बताया कि डिजिटल भुगतान अब उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन करीब 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होने का दावा किया गया है। कई पेट्रोल पंपों पर कुल कारोबार का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और दूसरे कैशलेस माध्यमों से आने की बात कही गई है।

    समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी ग्राहक का भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच में शामिल पाया जाता है। डीलरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा सकते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।

    पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि एक विवादित लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को रोक देना उनके लिए गंभीर वित्तीय परेशानी पैदा करता है। पेट्रोल पंप का दैनिक संचालन लगातार बैंकिंग सुविधाओं पर निर्भर रहता है। ईंधन की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, बिजली और अन्य कारोबारी खर्चों के लिए बैंक खाते का सुचारू रूप से काम करना आवश्यक होता है।

    एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को पूछताछ के लिए सुबह के समय ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें कथित तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि किस लेनदेन को जांच के दायरे में रखा गया है।

    डीलरों का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली के जरिए ग्राहक से पैसा स्वीकार करने वाले व्यापारी को केवल इसलिए संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बाद में उस भुगतान को किसी साइबर अपराध की जांच से जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबारी और संदिग्ध अपराधी के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

    एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें वैध कारोबारियों के बैंक खातों को पर्याप्त आधार और स्पष्ट प्रक्रिया के बिना फ्रीज न किया जाए। संगठन चाहता है कि जांच एजेंसियां विवादित राशि और पूरे कारोबारी खाते के बीच अंतर करें, ताकि जांच भी जारी रहे और सामान्य कारोबार भी प्रभावित न हो।

    डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान नहीं निकला तो राज्य के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्राहक फिर से नकद भुगतान पर निर्भर हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु में तेजी से बढ़े डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ने की आशंका है।

  • आमिर खान को मिली धमकी की जांच तेज, स्वीडिश वीपीएन और टॉर ब्राउजर के इस्तेमाल की आशंका

    आमिर खान को मिली धमकी की जांच तेज, स्वीडिश वीपीएन और टॉर ब्राउजर के इस्तेमाल की आशंका

    नई दिल्ली । अभिनेता आमिर खान को सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश के माध्यम से मिली कथित धमकी के मामले में जांच तेज हो गई है। मुंबई पुलिस की साइबर टीम इस पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कर रही है और धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि संदेश भेजने के दौरान अपनी वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार धमकी से जुड़े ऑडियो संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट अलग-अलग नामों से साझा किए गए हैं। वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति ने स्वयं को आरजू बिश्नोई बताते हुए अभिनेता पर विभिन्न आरोप लगाए और उन्हें कथित तौर पर सबक सिखाने की बात कही। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी सामने आई, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस इन दोनों माध्यमों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है।

    प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में पुलिस को संबंधित डिजिटल गतिविधि का शुरुआती आईपी एड्रेस स्वीडन से जुड़ा मिला है। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि आईपी एड्रेस का इस प्रकार सामने आना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि कथित तौर पर वीपीएन और टॉर ब्राउजर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर वास्तविक लोकेशन छिपाने की कोशिश की गई है। ऐसे मामलों में इंटरनेट ट्रैफिक कई सर्वरों के माध्यम से गुजरता है, जिससे वास्तविक स्रोत तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

    साइबर विशेषज्ञ अब डिजिटल लॉग, नेटवर्क गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदेश किस डिवाइस, नेटवर्क या अकाउंट से भेजे गए और क्या इसके पीछे कोई एक व्यक्ति है या संगठित समूह। फिलहाल मामले में तकनीकी जांच जारी है और संबंधित सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब आमिर खान की हालिया शादी को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद कुछ लोगों और संगठनों ने अभिनेता पर आरोप लगाए और विरोध भी दर्ज कराया। इसी क्रम में कथित धमकी वाला ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।

    आमिर खान पहले भी इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी शादियां कानूनी प्रक्रिया के तहत संपन्न हुई हैं और किसी भी विवाह में धर्म परिवर्तन नहीं कराया गया। उन्होंने कहा था कि उनका परिवार विभिन्न धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है और उनकी निजी जिंदगी को लेकर फैलाई जा रही कई बातें तथ्यात्मक नहीं हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साइबर टीम का मुख्य उद्देश्य धमकी भेजने वाले की वास्तविक पहचान स्थापित करना और यह पता लगाना है कि संदेश किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है।

  • शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई

    शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के नागपुर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग के साथ बनाई गई एक रील तीन युवकों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गई। पुलिस को चुनौती देने वाले अंदाज में तैयार किया गया यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

    पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तीन युवक फिल्मी डायलॉग बोलते हुए स्वयं को शहर का वास्तविक “कमिश्नर” बताते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में प्रयुक्त संवाद को पुलिस ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यह सामग्री सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी और इसे व्यापक रूप से साझा भी किया गया था।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो पिछले कुछ समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा था। वीडियो में शामिल तीनों युवकों की पहचान शाहिद अब्जल शकील खान, मोहम्मद साहिल मोहम्मद शकील शेख और रिजवान मोहम्मद अजीज के रूप में की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करना, जो कानून व्यवस्था या सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करे, गंभीर विषय है। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के वीडियो कुछ लोगों को व्यवस्था के प्रति गलत संदेश दे सकते हैं और कानून का सम्मान कम करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

    पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वे कान पकड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगने से दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।

    यह घटना सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर मनोरंजन या लोकप्रियता के उद्देश्य से बनाई जाने वाली सामग्री भी कानूनी दायरे में आती है। यदि किसी पोस्ट, वीडियो या रील से सार्वजनिक व्यवस्था, सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा या सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था।

    जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

    साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।