Tag: Cybercrime

  • अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ की जा रही अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों से आहत होकर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। सौरव गांगुली ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर थाने में इस संबंध में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट फैलाकर आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख को धूमिल करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

    पूर्व कप्तान द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में मुख्य रूप से ‘सौरव गांगुली फैंस’ (Sourav Ganguly Fans) नाम के एक बेहद लोकप्रिय फेसबुक पेज का विशेष उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस फेसबुक पेज पर वर्तमान में ३६ लाख से भी अधिक फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं और इस मंच के संचालक इसे सौरव गांगुली का आधिकारिक फैन पेज होने का दावा करते हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इसी बड़े मंच का दुरुपयोग करते हुए पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे पोस्ट पब्लिश किए जा रहे हैं, जो आम लोगों के बीच गांगुली की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। गांगुली ने अपनी शिकायत के साथ इस फेसबुक पेज के लिंक्स, कुछ स्क्रीनशॉट्स और इससे जुड़ी एक खेल वेबसाइट की अहम जानकारियां भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस प्रशासन से साझा की हैं।

    सार्वजनिक जीवन में आलोचना और व्यक्तिगत मानहानि के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सौरव गांगुली ने अपने आवेदन में बेहद गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि लोगों की अलग-अलग राय होना और आलोचनाएं मिलना सार्वजनिक जीवन का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन, किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। गांगुली ने जोर देकर कहा है कि अपनी साख की रक्षा के लिए और इस तरह की भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष की तरफ से शिकायत मिलने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, गांगुली की लिखित अर्जी के आधार पर संबंधित फेसबुक पेज के एडमिन और उससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की गहनता से तकनीकी जांच की जा रही है। इस कानूनी विवाद के बीच, हाल ही में राजनीतिक गलियारों में उड़े एक बड़े बवंडर पर भी सौरव गांगुली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली के जरिए सांसद यूसुफ पठान को इस्तीफा देने का संदेश भिजवाया था।

    इस पूरे सियासी विवाद को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए सौरव गांगुली और सांसद यूसुफ पठान दोनों ने ही इसे पूरी तरह से काल्पनिक, फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। पूर्व कप्तान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए कभी नहीं कहा गया और न ही उनकी इस विषय पर यूसुफ पठान से कोई बातचीत हुई है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और सोशल मीडिया पेज के जरिए फैलाई जा रही नकारात्मकता के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी की मानहानि करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

  • विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

    विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

    सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं।

    मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया।

    जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो।

    वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

  • 114 बैंक खाते, करोड़ों का ट्रांजेक्शन और विदेशी नेटवर्क: झांसी में इंडोनेशियाई सिम और चाइनीज ऐप से साइबर ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार

    114 बैंक खाते, करोड़ों का ट्रांजेक्शन और विदेशी नेटवर्क: झांसी में इंडोनेशियाई सिम और चाइनीज ऐप से साइबर ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार



    झांसी। झांसी में साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। यह नेटवर्क चाइनीज वेबसाइटों, इंडोनेशियाई सिम कार्ड और हवाला चैनल के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 114 बैंक खातों का इस्तेमाल कर भारी पैमाने पर अवैध ट्रांजेक्शन किए। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और करोड़ों रुपये के डिजिटल लेनदेन से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। अब तक 4.35 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज की जा चुकी है।

    गिरोह लोगों को ऑनलाइन गेमिंग, सट्टा और निवेश के नाम पर फंसाता था। इसके बाद ठगी की रकम को पहले यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदला जाता था और फिर उसे अमेरिकी डॉलर व चीनी युआन में कन्वर्ट कर हवाला नेटवर्क के जरिए आगे भेज दिया जाता था।

    इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड इंदौर निवासी ध्रुव बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस के अनुसार गिरोह में शामिल सदस्य इंडोनेशिया की सिम का इस्तेमाल कर बैंक खातों को ऑपरेट करते थे और किराए पर लिए गए खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर करते थे।

    फिलहाल साइबर सेल और अन्य एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं, क्योंकि आशंका है कि यह गिरोह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशी साइबर नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।

  • जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे

    जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे


    जबलपुर । जबलपुर में शेयर बाजार में मुनाफे के झांसे में फंसाकर डॉक्टर से तीन करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मोहित पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब तक कुल तीन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई ने इस मामले को उजागर किया है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों संस्कार केशरवानी और सौरभ विश्वकर्मा की पूछताछ में मोहित पटेल का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 500 प्रतिशत तक मुनाफे का झांसा दिया और डॉक्टर के साथ 3 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपी ने यस बैंक में करेंट अकाउंट खोलकर साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर पैसे ट्रांसफर किए।

    मोहित पटेल पेशे से गुमास्ता और एमएसएमई के दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसके साथ ही वह इनकम टैक्स के दस्तावेज बनाने में भी संलिप्त रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। वर्तमान में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल आरोपी से पूछताछ कर मामले की गहनता से जांच कर रही है।

    इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में अवास्तविक मुनाफे का लालच लोगों को गंभीर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की ठगी की घटनाओं में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस गिरफ्तारी से अन्य संभावित आरोपियों तक पुलिस की पकड़ मजबूत हुई है और मामले की जांच जारी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान

    सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये के गबन को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में बैंकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि आरबीआई, बैंक और दूरसंचार विभाग जैसे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की चिंता

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे असामान्य और बड़े पैमाने के लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत सतर्क करें। उदाहरण के लिए, यदि कोई आमतौर पर 10-20 हजार रुपये निकालने वाला पेंशनभोगी अचानक लाखों रुपये निकालता है, तो बैंक को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए। पीठ ने जोर देकर कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से गबन की गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। यह बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण हो सकता है।

    CBI को जांच में शामिल किया गया

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया। गुजरात और दिल्ली की सरकारों को कहा गया कि वे इस जांच के लिए आवश्यक स्वीकृति दें। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की भी सिफारिश की।

    SOP और AI का इस्तेमाल

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपाय जैसे अस्थायी डेबिट होल्ड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के लिए AI टूल्स के उपयोग की सिफारिश भी की ताकि संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।

    बैंकों पर कड़ी टिप्पणी
    पीठ ने कहा कि बैंकों का ध्यान ज्यादातर व्यवसायिक मोड पर है, जिससे वे अपराधियों के लिए मंच बन सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने बताया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ये बैंक अब एक बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे धन के रखवाले हैं और भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। कई बार बैंक धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर एनसीएलटी/एनसीएलएटी जैसी संस्थाएं सामने आती हैं।”

    डिजिटल अरेस्ट क्या है
    ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध का बढ़ता स्वरूप है, जिसमें ठग पीड़ित को सरकारी अधिकारी या अदालत के रूप में पेश कर ऑडियो/वीडियो कॉल के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पैसे देने के लिए मजबूर करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई को देशव्यापी जांच करने और आरबीआई से साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज़ करने में AI का उपयोग करने का निर्देश दे रखा है।

  • गूगल रिव्यू से कमाई का झांसा: ठगों ने वर्किंग वुमन ऐश्वर्या से की 5 लाख की ठगी

    गूगल रिव्यू से कमाई का झांसा: ठगों ने वर्किंग वुमन ऐश्वर्या से की 5 लाख की ठगी


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक और साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने एक महिला को गूगल रिव्यू के नाम पर बड़ी रकम का लालच देकर ठग लिया। बरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें महिला ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें गूगल रिव्यू के बदले अच्छी कमाई का वादा किया और धीरे-धीरे करीब 5 लाख रुपये की ठगी कर ली।

    पीड़िता, ऐश्वर्या नामदेव, एक वर्किंग वुमन हैं जो हैदराबाद की एक निजी कंपनी में डाटा एनालिस्ट के तौर पर काम करती हैं और वर्क फ्रॉम होम करती हैं। कुछ समय पहले उनके व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि गूगल पर रिव्यू लिखकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इस लालच में फंसकर ऐश्वर्या ने ठगों के साथ संपर्क किया और एक टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ीं।

    शुरुआत में ठगों ने उन्हें छोटे-मोटे मुनाफे का वादा कर विश्वास जीता। इसके बाद ठगों ने ऐश्वर्या को और ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उन्होंने करीब 5 लाख रुपये निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुकी हैं तो उन्होंने बरेला थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अब साइबर ठगों की तलाश कर रही है। पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी ऑफर पर विश्वास न करें जो घर बैठे बड़ी कमाई का वादा करता हो। साथ ही साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान लिंक या ग्रुपों में निवेश करने से बचें।

  • डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी

    डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक नया ठगी का तरीका अपनाया, जिसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है। अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह घटना बुजुर्ग व्यक्ति बसंत कुमार मैदमवार 80 के साथ हुई, जो एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर 2025 को फरियादी को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें स्क्रीन पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है जिसे ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा।

    डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी और बार-बार वीडियो कॉल्स से भयभीत हो गए बुजुर्ग बसंत कुमार से ठगों ने उनके बैंक खातों की “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। फरियादी ने कई बार अपने बैंक खातों से रकम ट्रांसफर की, और इस प्रक्रिया में कुल 23.50 लाख रुपये की ठगी हो गई। जब दो दिसंबर को बसंत कुमार गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने इस मामले को साइबर ठगी का मामला बताया। इसके बाद, उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया।

    यह ठगी का तरीका साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और तकनीकी ज्ञान को दर्शाता है। वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस अधिकारियों के द्वारा बनाई गई डर की स्थिति का फायदा उठाकर बुजुर्गों और अन्य असुरक्षित लोगों को ठगना अब सामान्य होता जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। यह घटना एक चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक सक्रिय नहीं होते। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कभी भी किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

  • सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा

    सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा


    नई दिल्ली।
    बिहार की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक आस्था महिला सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया है। आयुष चिकित्सकों के नियुक्तिपत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला चिकित्सक से हिजाब हटाने को कहे जाने की घटना अब राज्य से बाहर तक चर्चा का विषय बन गई है। इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया है कि सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को धमकी देने का वीडियो सामने आया है जिसकी जांच बिहार पुलिस ने शुरू कर दी हैबताया जा रहा है कि पाकिस्तान के कुख्यात डॉन शहजाद भट्टी की ओर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुलेआम धमकी दी गई है। वीडियो में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें अन्यथा भविष्य में होने वाली घटनाओं की शिकायत न करें। इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए बिहार पुलिस के साइबर थाना को जांच सौंपी गई है।

    डीजीपी विनय कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वीडियो की सत्यता और उसके स्रोत की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आर्थिक अपराध इकाईईओयू के अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान ने कहा कि ईओयू का साइबर प्रभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि जिस महिला आयुष चिकित्सक को नियुक्तिपत्र देने के दौरान मुख्यमंत्री ने हिजाब हटाने को कहा था उसने नौकरी ज्वॉइन न करने का फैसला किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। न तो संबंधित महिला चिकित्सक की ओर से कोई सार्वजनिक बयान आया है और न ही विभाग की तरफ से इस पर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है।

    विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियुक्तिपत्र मिलने के बाद ज्वॉइनिंग के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद भवन में आयुष चिकित्सकों का नियुक्तिपत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कुल 1283 नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्तिपत्र सौंपे गए थे जिनमें से 10 चिकित्सकों को प्रतीकात्मक रूप से मुख्यमंत्री ने स्वयं नियुक्तिपत्र दिया था।हिजाब विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दलराजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटना को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि नियुक्तिपत्र वितरण जैसे गरिमामय कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला से हिजाब हटाने को कहना न केवल महिला सम्मान के खिलाफ है बल्कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति सरकार की सोच को भी दर्शाता है। एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री और सरकार से इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    वहीं सत्तारूढ़ जनता दलयूनाइटेड ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जदयू के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेटियों के सशक्तीकरण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने हर धर्म जाति और वर्ग की महिलाओं की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति के लिए लगातार काम किया है। नीरज कुमार ने राजद पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को पहले अपने अतीत पर नजर डालनी चाहिए। फिलहाल हिजाब विवाद महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा और पाकिस्तान से आई धमकी-इन तीनों मुद्दों ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगी।

  • CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां

    CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां


    नई दिल्ली । देश में बढ़ते हुए संगठित साइबर अपराधों पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया है जिसका अनुमानित आकार ₹1 000 करोड़ से अधिक का है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन स्कीमों के माध्यम से आम जनता को निशाना बना रहा था। CBI ने इस मामले में गहन जांच के बाद 17 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोपपत्र चार्जशीट दाखिल किया है। इन आरोपियों में चार विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो इस रैकेट के अंतर्राष्ट्रीय आयामों को दर्शाते हैं।

    ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन

    जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ठगों ने ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए फर्जी लोन ऑफर आकर्षक लेकिन झूठे लोन प्रस्तावों के ज़रिए प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ठगी करना।
    नकली निवेश और पोंजी स्कीम मल्टी लेवल मार्केटिंग और पोंजी योजनाओं के झूठे वादे देकर लोगों से बड़ी पूंजी निवेश करवाना।
    फर्जी मोबाइल ऐप कई नकली मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना।झूठे नौकरी प्रस्ताव अच्छी वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर सिक्योरिटी डिपॉजिट या रजिस्ट्रेशन फीस लेना।CBI सूत्रों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के संचालन में चीन से जुड़े ठगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी जो भारत में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े पैमाने की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।

    फर्जी कंपनियों का जाल

    धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को वैध दिखाने और उसे विदेश भेजने के लिए इस गिरोह ने कंपनियों का एक बड़ा जाल बिछाया था। प्रारंभिक जांच में 58 से लेकर 111 जैसा कि शीर्षक में बताया गया है तक फर्जी या शेल कंपनियों का पता चला है जिनका उपयोग केवल ठगी के पैसे को लेयरिंग करने के लिए किया जाता था।CBI ने इस मामले में अक्टूबर में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
    आरोपपत्र में सभी 17 आरोपियों पर धोखाधड़ी आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।इस खुलासे से यह साफ होता है कि साइबर अपराधी अब छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क बनाकर संगठित रूप से काम कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को लगातार अपनी जांच तकनीकों को उन्नत करना पड़ रहा है। CBI की यह सफलता देश में साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

  • 1000 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: CBI ने चीनी मास्टरमाइंड सहित 30 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    1000 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: CBI ने चीनी मास्टरमाइंड सहित 30 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट


    नई दिल्‍ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक के क्रिप्टोकरेंसी(Cryptocurrency) निवेश घोटाले में दो चीनी नागरिकों वान जून और ली अनमिंग सहित कुल 30 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। यह मामला कोविड लॉकडाउन(Covid Lockdown) के दौरान फर्जी ‘एचपीजेड टोकन’ (‘HPZ Token’)ऐप के जरिए लोगों को लुभाकर बिटकॉइन माइनिंग के नाम पर ठगने से जुड़ा है। जांच में पता चला है कि यह घोटाला विदेशी साइबर अपराधी गिरोह का हिस्सा था, जिसने भारत की नई-नई शुरू हुई पेमेंट एग्रीगेटर (Payment Aggregator)व्यवस्था का भी हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर धन विदेश भेजा।

    दरअसल, यह पूरा घोटाला कथित तौर पर चीनी नागरिकों द्वारा नियंत्रित कंपनी शिगू टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने चलाया था। बताया गया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान इस गिरोह ने बड़ी मात्रा में पैसा इकट्ठा किया और उसे हेराफेरी कर विदेश भेज दिया। कुछ ही महीनों में 150 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो गई थी। ये खाते अपराध से कमाए धन को इकट्ठा करने और उसे वैध दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।

    सीबीआई जांच में सामने आया है कि यह विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित एक बड़े और सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा था। यही गिरोह कोविड के बाद के समय में कई अन्य घोटालों के लिए भी जिम्मेदार था, जिनमें फर्जी लोन ऐप, फर्जी निवेश स्कीम और फर्जी ऑनलाइन जॉब ऑफर के जरिए भारतीय नागरिकों को ठगा गया। जांच में पता चला कि ठगों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए शुरुआती निवेश पर कुछ रिटर्न भी दिए, लेकिन बाद में पूरी राशि क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दी।

    सीबीआई जांच में ये भी पता चला कि मुख्य आरोपी चीनी नागरिक वान जून की पहचान जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एक चीनी संस्था की सहायक कंपनी) के प्रमुख निदेशक के तौर पर हुई। उसने डॉर्टसे नामक एक व्यक्ति की मदद से शिगू टेक्नोलॉजी सहित कई शेल कंपनियां बनाईं। बाद में सीबीआई में डॉर्टसे को भी गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की चार्जशीट में मुख्य साजिशकर्ताओं समेत 27 व्यक्ति और 3 कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं गिरोह के कई सदस्य अभी भी सीबीआई की पहुंच से बाहर हैं। फिलहाल उनकी तलाश और जांच जारी है। बता दें कि एजेंसी ने पिछले साल अप्रैल में इस मामले में FIR दर्ज की थी। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की और विभिन्न बैंक खातों में जमा 91.6 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए थे।