Tag: Cybercrime

  • भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    पटना । बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में साइबर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए कुल 128 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि इस दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अफवाह फैलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए की गई है।

    राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।

    साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।

    बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

    सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया।

    मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

    नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार


    उज्जैन । उज्जैन में एक नाबालिग लड़की की तस्वीर का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग की छवि धूमिल करने और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंवासा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    जानकारी के अनुसार 21 जून को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। वायरल किए गए फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों का परिवार से कोई संबंध नहीं था लेकिन नाबालिग की तस्वीर जोड़कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में सामने आया कि मतदाता संबंधी सरकारी दस्तावेज में लगी नाबालिग की पासपोर्ट साइज फोटो बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी गई थी। इसके बाद यह फोटो कई लोगों के बीच साझा होती रही और अंततः गलत हाथों में पहुंचकर उसका दुरुपयोग किया गया।

    पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में तस्वीर साझा की और बाद में फोटो एडिटिंग के जरिए नाबालिग की तस्वीर को किसी अन्य युवती की तस्वीर के साथ जोड़कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। इसके बाद उस सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा।

    जांच के दौरान पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री किन-किन प्लेटफॉर्म और लोगों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    कार्रवाई के तहत पुलिस ने आबिद पटेल मुजफ्फर पटेल और एहसान पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी दस्तावेज से फोटो साझा करने के मामले में बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

    एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने कहा कि नाबालिग की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

  • फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे

    फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे

    मध्य प्रदेश:  के ग्वालियर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि साइबर अपराधी किस तरह सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों का नाम लेकर आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा रकम के लेन-देन और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
    जानकारी के अनुसार पीड़िता स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उन्हें मई महीने में एक कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग अवैध और आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। शुरुआत में यह मामला केवल सत्यापन जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे कॉल करने वालों ने महिला को गंभीर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाना शुरू कर दिया।

    साइबर ठगों ने महिला को बताया कि उनके बैंक खाते में करोड़ों रुपये का कथित काला धन जमा है और यह मामला राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियों के संज्ञान में है। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी और रिजर्व बैंक से जुड़ा अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। लगातार वीडियो कॉल और आधिकारिक कार्रवाई जैसी दिखने वाली बातचीत के जरिए महिला पर भरोसा बनाने की कोशिश की गई। ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान ऐसा माहौल तैयार किया मानो किसी पुलिस मुख्यालय अथवा जांच एजेंसी के कार्यालय से कार्रवाई की जा रही हो।

    जालसाजों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी संपत्ति भी जब्त हो सकती है। इसी डर का फायदा उठाकर उनसे चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में जमा करवाई गई। बताया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और क्लीन चिट मिलने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। मानसिक दबाव और भय के कारण महिला लगातार उनके निर्देशों का पालन करती रहीं।

    जांच में सामने आया है कि करोड़ों रुपये की यह राशि देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई। रकम कई किश्तों में भेजी गई, जिससे ठगों ने अपने नेटवर्क को छिपाने की कोशिश की। साइबर अपराधियों ने कथित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और जांच संबंधी कहानियां गढ़कर महिला को लंबे समय तक भ्रमित रखा। यह पूरा घटनाक्रम करीब 37 दिनों तक चलता रहा, जिसके दौरान महिला लगातार ठगों के संपर्क में रही।

    जब कथित जांच पूरी होने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली और संपर्क करने वाले लोगों के मोबाइल नंबर बंद होने लगे, तब पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही साइबर अपराध शाखा ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले साइबर अपराध देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर धन उगाही करते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंस या धन हस्तांतरण के निर्देश मिलने पर तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना आवश्यक है। फिलहाल ग्वालियर पुलिस इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचने और ठगी गई राशि की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

  • अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ की जा रही अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों से आहत होकर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। सौरव गांगुली ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर थाने में इस संबंध में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट फैलाकर आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख को धूमिल करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

    पूर्व कप्तान द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में मुख्य रूप से ‘सौरव गांगुली फैंस’ (Sourav Ganguly Fans) नाम के एक बेहद लोकप्रिय फेसबुक पेज का विशेष उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस फेसबुक पेज पर वर्तमान में ३६ लाख से भी अधिक फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं और इस मंच के संचालक इसे सौरव गांगुली का आधिकारिक फैन पेज होने का दावा करते हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इसी बड़े मंच का दुरुपयोग करते हुए पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे पोस्ट पब्लिश किए जा रहे हैं, जो आम लोगों के बीच गांगुली की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। गांगुली ने अपनी शिकायत के साथ इस फेसबुक पेज के लिंक्स, कुछ स्क्रीनशॉट्स और इससे जुड़ी एक खेल वेबसाइट की अहम जानकारियां भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस प्रशासन से साझा की हैं।

    सार्वजनिक जीवन में आलोचना और व्यक्तिगत मानहानि के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सौरव गांगुली ने अपने आवेदन में बेहद गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि लोगों की अलग-अलग राय होना और आलोचनाएं मिलना सार्वजनिक जीवन का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन, किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। गांगुली ने जोर देकर कहा है कि अपनी साख की रक्षा के लिए और इस तरह की भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष की तरफ से शिकायत मिलने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, गांगुली की लिखित अर्जी के आधार पर संबंधित फेसबुक पेज के एडमिन और उससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की गहनता से तकनीकी जांच की जा रही है। इस कानूनी विवाद के बीच, हाल ही में राजनीतिक गलियारों में उड़े एक बड़े बवंडर पर भी सौरव गांगुली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली के जरिए सांसद यूसुफ पठान को इस्तीफा देने का संदेश भिजवाया था।

    इस पूरे सियासी विवाद को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए सौरव गांगुली और सांसद यूसुफ पठान दोनों ने ही इसे पूरी तरह से काल्पनिक, फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। पूर्व कप्तान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए कभी नहीं कहा गया और न ही उनकी इस विषय पर यूसुफ पठान से कोई बातचीत हुई है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और सोशल मीडिया पेज के जरिए फैलाई जा रही नकारात्मकता के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी की मानहानि करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

  • विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

    विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

    सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं।

    मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया।

    जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो।

    वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

  • 114 बैंक खाते, करोड़ों का ट्रांजेक्शन और विदेशी नेटवर्क: झांसी में इंडोनेशियाई सिम और चाइनीज ऐप से साइबर ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार

    114 बैंक खाते, करोड़ों का ट्रांजेक्शन और विदेशी नेटवर्क: झांसी में इंडोनेशियाई सिम और चाइनीज ऐप से साइबर ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार



    झांसी। झांसी में साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। यह नेटवर्क चाइनीज वेबसाइटों, इंडोनेशियाई सिम कार्ड और हवाला चैनल के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 114 बैंक खातों का इस्तेमाल कर भारी पैमाने पर अवैध ट्रांजेक्शन किए। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और करोड़ों रुपये के डिजिटल लेनदेन से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। अब तक 4.35 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज की जा चुकी है।

    गिरोह लोगों को ऑनलाइन गेमिंग, सट्टा और निवेश के नाम पर फंसाता था। इसके बाद ठगी की रकम को पहले यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदला जाता था और फिर उसे अमेरिकी डॉलर व चीनी युआन में कन्वर्ट कर हवाला नेटवर्क के जरिए आगे भेज दिया जाता था।

    इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड इंदौर निवासी ध्रुव बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस के अनुसार गिरोह में शामिल सदस्य इंडोनेशिया की सिम का इस्तेमाल कर बैंक खातों को ऑपरेट करते थे और किराए पर लिए गए खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर करते थे।

    फिलहाल साइबर सेल और अन्य एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं, क्योंकि आशंका है कि यह गिरोह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशी साइबर नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।

  • जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे

    जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे


    जबलपुर । जबलपुर में शेयर बाजार में मुनाफे के झांसे में फंसाकर डॉक्टर से तीन करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मोहित पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब तक कुल तीन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई ने इस मामले को उजागर किया है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों संस्कार केशरवानी और सौरभ विश्वकर्मा की पूछताछ में मोहित पटेल का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 500 प्रतिशत तक मुनाफे का झांसा दिया और डॉक्टर के साथ 3 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपी ने यस बैंक में करेंट अकाउंट खोलकर साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर पैसे ट्रांसफर किए।

    मोहित पटेल पेशे से गुमास्ता और एमएसएमई के दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसके साथ ही वह इनकम टैक्स के दस्तावेज बनाने में भी संलिप्त रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। वर्तमान में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल आरोपी से पूछताछ कर मामले की गहनता से जांच कर रही है।

    इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में अवास्तविक मुनाफे का लालच लोगों को गंभीर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की ठगी की घटनाओं में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस गिरफ्तारी से अन्य संभावित आरोपियों तक पुलिस की पकड़ मजबूत हुई है और मामले की जांच जारी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान

    सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये के गबन को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में बैंकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि आरबीआई, बैंक और दूरसंचार विभाग जैसे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की चिंता

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे असामान्य और बड़े पैमाने के लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत सतर्क करें। उदाहरण के लिए, यदि कोई आमतौर पर 10-20 हजार रुपये निकालने वाला पेंशनभोगी अचानक लाखों रुपये निकालता है, तो बैंक को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए। पीठ ने जोर देकर कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से गबन की गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। यह बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण हो सकता है।

    CBI को जांच में शामिल किया गया

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया। गुजरात और दिल्ली की सरकारों को कहा गया कि वे इस जांच के लिए आवश्यक स्वीकृति दें। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की भी सिफारिश की।

    SOP और AI का इस्तेमाल

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपाय जैसे अस्थायी डेबिट होल्ड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के लिए AI टूल्स के उपयोग की सिफारिश भी की ताकि संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।

    बैंकों पर कड़ी टिप्पणी
    पीठ ने कहा कि बैंकों का ध्यान ज्यादातर व्यवसायिक मोड पर है, जिससे वे अपराधियों के लिए मंच बन सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने बताया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ये बैंक अब एक बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे धन के रखवाले हैं और भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। कई बार बैंक धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर एनसीएलटी/एनसीएलएटी जैसी संस्थाएं सामने आती हैं।”

    डिजिटल अरेस्ट क्या है
    ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध का बढ़ता स्वरूप है, जिसमें ठग पीड़ित को सरकारी अधिकारी या अदालत के रूप में पेश कर ऑडियो/वीडियो कॉल के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पैसे देने के लिए मजबूर करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई को देशव्यापी जांच करने और आरबीआई से साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज़ करने में AI का उपयोग करने का निर्देश दे रखा है।

  • गूगल रिव्यू से कमाई का झांसा: ठगों ने वर्किंग वुमन ऐश्वर्या से की 5 लाख की ठगी

    गूगल रिव्यू से कमाई का झांसा: ठगों ने वर्किंग वुमन ऐश्वर्या से की 5 लाख की ठगी


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक और साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने एक महिला को गूगल रिव्यू के नाम पर बड़ी रकम का लालच देकर ठग लिया। बरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें महिला ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें गूगल रिव्यू के बदले अच्छी कमाई का वादा किया और धीरे-धीरे करीब 5 लाख रुपये की ठगी कर ली।

    पीड़िता, ऐश्वर्या नामदेव, एक वर्किंग वुमन हैं जो हैदराबाद की एक निजी कंपनी में डाटा एनालिस्ट के तौर पर काम करती हैं और वर्क फ्रॉम होम करती हैं। कुछ समय पहले उनके व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि गूगल पर रिव्यू लिखकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इस लालच में फंसकर ऐश्वर्या ने ठगों के साथ संपर्क किया और एक टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ीं।

    शुरुआत में ठगों ने उन्हें छोटे-मोटे मुनाफे का वादा कर विश्वास जीता। इसके बाद ठगों ने ऐश्वर्या को और ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उन्होंने करीब 5 लाख रुपये निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुकी हैं तो उन्होंने बरेला थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अब साइबर ठगों की तलाश कर रही है। पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी ऑफर पर विश्वास न करें जो घर बैठे बड़ी कमाई का वादा करता हो। साथ ही साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान लिंक या ग्रुपों में निवेश करने से बचें।