दतिया बस हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा


ग्वालियरग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया बस हादसे से जुड़े अहम मामले में बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए साफ संदेश दिया है कि न्याय केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा, न कि अनुमान या अप्रमाणित सामग्री पर। कोर्ट ने पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 8 नवंबर 2022 को दतिया जिले के भांहेर-दतिया रोड पर हुए दर्दनाक बस हादसे से जुड़ा है। इस दुर्घटना में बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पहले ही मिल चुका था मुआवजे का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) दतिया ने बस चालक की लापरवाही मानते हुए मृतक के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

बीमा कंपनी की दलील पर कोर्ट का सख्त रुख
बीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटना जिस बस से हुई, वह बीमित बस नहीं थी। कंपनी ने दावा किया कि किसी अन्य बिना बीमा वाली बस को बचाने के लिए इस बस को फर्जी तरीके से मामले में शामिल किया गया है।

यूट्यूब वीडियो और गवाह दोनों खारिज
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में एक यूट्यूब वीडियो पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इसकी प्रमाणिकता और स्रोत स्पष्ट न होने के कारण इसे सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, कंपनी द्वारा पेश किए गए गवाह को ‘तैयार किया हुआ’ मानते हुए उसकी गवाही को भी अविश्वसनीय करार दिया गया।

पुलिस जांच पर सवाल उठाना पड़ा भारी
बीमा कंपनी ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर जांच गलत थी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया। यह तर्क भी कंपनी के खिलाफ गया।

जांच रिपोर्ट को नहीं माना ठोस साक्ष्य
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट केवल एक राय हो सकती है, उसे पुख्ता साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में केवल रिपोर्ट के आधार पर फैसले को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का अंतिम फैसला
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि हादसा बस क्रमांक MP32 P 0184 से ही हुआ था। इसके साथ ही बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी गई और पीड़ितों को मुआवजा देने के अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा गया।