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  • दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। के दतिया जिले के भांडेर तहसील अंतर्गत उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद कई ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में भोजन करने के बाद लोगों को उल्टी, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी शिकायतें होने लगीं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर प्रभावित लोगों का इलाज शुरू किया। हालांकि, ग्रामीणों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी तिलक सिंह यादव के पिता एदल सिंह पटेल का बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से त्रयोदशी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। भोजन के दौरान लोगों ने अन्य व्यंजनों के साथ रसगुल्ले भी खाए। इसके बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और गांव में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को लेकर चिंता बढ़ गई।

    इस घटना में लगभग एक हजार लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही बीमारी के दायरे का सही आकलन किया जा सकेगा।

    ग्रामीणों के बीमार पड़ने के बाद रसगुल्लों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। आशंका जताई जा रही है कि मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल किया गया मावा खराब हो सकता था। मावा या खोया दूध को पकाकर तैयार किया जाता है और कई प्रकार की मिठाइयों में इसका उपयोग होता है। यदि मिठाई बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री दूषित हो, तो उसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, उड़ीना गांव की घटना में खराब मावे को बीमारी का कारण मानने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यह स्पष्ट होना बाकी है कि रसगुल्ले तैयार करने में किस सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, मावा कहां से लाया गया था और मिठाई बनाने की प्रक्रिया में साफ-सफाई के मानकों का पालन हुआ था या नहीं। जांच पूरी होने से पहले किसी खाद्य सामग्री या व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 17 अक्टूबर को गांव में चिकित्सा शिविर लगाया। शिविर में बीमार ग्रामीणों की जांच की गई और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल के अलावा इंदरगढ़ और भांडेर के अस्पतालों में भी इलाज के लिए जाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित लोगों की स्थिति का आकलन किया और जरूरत के अनुसार उपचार दिया।

    भांडेर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयंत यादव के अनुसार, गांव में लगाए गए शिविर के दौरान जांच किए गए लोगों में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई गई है और किसी गंभीर समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि बीमारी के स्रोत का पता लगाया जा सके।

    यह घटना सार्वजनिक और पारिवारिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता तथा स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे कार्यक्रमों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उसे तैयार करने के तरीके और सुरक्षित रखरखाव पर ध्यान देना आवश्यक है। भोजन करने के बाद उल्टी, पेट दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। उड़ीना गांव में ग्रामीणों के बीमार पड़ने के मामले में अब बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि और प्रभावित लोगों की स्थिति पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • दतिया विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता को चुनौती, चुनावी हलफनामे में पुराने आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप

    दतिया विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता को चुनौती, चुनावी हलफनामे में पुराने आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप

    मध्य प्रदेश। की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी विवाद के कारण चर्चा में है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे में उन्होंने वर्ष 1991 के एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। इस मामले के सामने आने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    यह याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने दायर की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के दौरान अपने शपथ पत्र में कुछ आपराधिक मामलों की जानकारी दी, लेकिन 1991 में दर्ज एक अन्य मामले का उल्लेख नहीं किया। याचिका में इस कथित चूक को उनके निर्वाचन को चुनौती देने का आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से उनके चुनाव को निरस्त करने की मांग की है।

    याचिका में वर्ष 1991 की एक घटना का उल्लेख किया गया है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम हुआ था। आरोप के मुताबिक, इस घटना के दौरान पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिनमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले की जानकारी जुलाई 2026 के उपचुनाव के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में नहीं दी गई।

    मामले में वर्ष 2020 के एक अन्य आपराधिक प्रकरण का भी जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि घनश्याम सिंह ने 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल अपने शपथ पत्र में भी इस मामले से संबंधित जानकारी का उल्लेख नहीं किया था। इस तरह याचिका में अलग-अलग चुनावों के दौरान दिए गए हलफनामों में कथित रूप से जानकारी छिपाने का मुद्दा उठाया गया है।

    शुक्रवार को सुनवाई के दौरान ग्वालियर खंडपीठ ने विधायक को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानना चाहा। अदालत की इस कार्रवाई के बाद अब मामले में उनके जवाब और आगे होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने से यह साबित नहीं होता कि विधायक ने जानबूझकर जानकारी छिपाई है या उनका निर्वाचन अवैध है। इन सवालों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।

    दतिया विधानसभा सीट पर यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी वर्ष पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद यहां उपचुनाव कराया गया था। भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि और सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हुई थी। इसके बाद खाली हुई सीट पर जुलाई 2026 में मतदान हुआ, जिसमें कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की।

    उपचुनाव में घनश्याम सिंह का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से हुआ था। अब उनके निर्वाचन को अदालत में चुनौती दिए जाने से दतिया की राजनीति में एक नया कानूनी मुद्दा सामने आया है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले में उनकी सदस्यता समाप्त होगी या सीट पर दोबारा उपचुनाव कराना पड़ेगा।

    आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालत में याचिकाकर्ता के आरोपों और चुनावी हलफनामे से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है। यदि आरोप न्यायिक प्रक्रिया में साबित होते हैं और अदालत निर्वाचन को प्रभावित करने वाली कानूनी अनियमितता पाती है, तो उसके अनुसार फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर विधायक से जवाब मांगा है और मामले का अंतिम परिणाम आना बाकी है।

  • दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश: की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं में आ गई है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के आरोप से जुड़े प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कदम इस मामले में दायर याचिका पर उठाया है। नोटिस सामने आने के बाद दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि फिलहाल उपचुनाव की स्थिति बनने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    यह मामला वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र दाखिल करते समय घनश्याम सिंह ने इस आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया था।

    इसी आरोप को आधार बनाकर दीपक बेलपत्री सहित कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अब अदालत ने विधायक को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अवधेश नायक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से नोटिस मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। नायक ने इस मामले को लेकर राजेंद्र भारती की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के पीछे भारती की भूमिका हो सकती है।

    अवधेश नायक ने राजेंद्र भारती पर कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के माध्यम से राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे भी भारती की भूमिका थी। ये आरोप नायक की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या राजेंद्र भारती की इस मामले पर प्रतिक्रिया का विवरण नहीं है।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि कांग्रेस ने दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी। ऐसे में विधायक को जारी हुए नोटिस के बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अब सबसे अहम सवाल यह है कि पुराने आपराधिक मामले और नामांकन पत्र में जानकारी नहीं देने के आरोप पर अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। यदि कानूनी कार्यवाही में कोई ऐसा आदेश आता है जिसका विधानसभा सदस्यता पर प्रभाव पड़ता हो, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी हो सकते हैं। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती और न ही अपने आप उपचुनाव की स्थिति बनती है।

    फिलहाल ग्वालियर हाईकोर्ट के नोटिस के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार है। विधायक का जवाब, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का विचार और आगे आने वाले आदेश ही तय करेंगे कि इस प्रकरण का दतिया की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे

    दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे


    दतिया।
    मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा के पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान आपस में ही भिड़ गए। प्रदर्शन के दौरान माइक पर नारे लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते खींचतान और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख विधायक को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए। शुक्रवार को घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा।

    दरअसल, शिक्षा विभाग के सब इंजीनियर भूपेंद्र कुमार राजपूत के साथ 15 सितंबर को हुई मारपीट के विरोध में विधायक प्रीतम सिंह लोधी गुरुवार दोपहर अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मामले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच माइक पर नारे लगाने को लेकर समर्थकों के बीच विवाद हो गया।

    माइक छीनने को लेकर शुरू हुई झूमाझटकी

    बताया जाता है कि प्रदर्शन के दौरान एक युवक हाथ में माइक लेकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को ‘चंबल टाइगर’ बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाने लगा। इसी दौरान युवक ने दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दी।

    इस पर भीड़ में मौजूद एक अन्य समर्थक ने आगे बढ़कर युवक के हाथ से माइक छीन लिया। माइक को लेकर दोनों के बीच खींचतान शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की और झूमाझटकी में बदल गया। समर्थकों के बीच बढ़ते विवाद को देखकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का हुजूम आगे बढ़ा।

    भाजपा सरकार के खिलाफ भी लगे मुर्दाबाद के नारे

    घटना के दौरान समर्थकों के बीच विवाद के साथ भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। सामने आए वीडियो में माइक को लेकर समर्थकों के बीच खींचतान होती दिखाई दे रही है। माइक छीने जाने से नाराज युवक ने ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।

    एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान विधायक के समर्थकों के बीच हुई इस घटना और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।

  • दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच

    दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच


    भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक समीक्षा तेज कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चुनावी नतीजों, भीतरघात की शिकायतों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    सोमवार को आए उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी बैठक में पहुंचकर कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो साक्ष्य संगठन के समक्ष रखे।

    भीतरघात और फर्जी प्रचार की होगी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण कुछ स्थानीय पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित भ्रामक पोस्ट और फर्जी पत्रों की भी जांच होगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर उनके राजनीतिक संबंधों की पड़ताल की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    दो सदस्यीय जांच समिति गठित
    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चुनावी हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

    खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी के भीतर भी उठे सवाल
    चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के भीतर से भी आत्ममंथन की आवाजें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर “आत्ममंथन का समय…” लिखकर संगठन को संकेत दिया, जबकि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी प्रभावी होने लगते हैं तो चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं।

    जनादेश स्वीकार, भविष्य की तैयारी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी कमियों का आकलन करेगी और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी।

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 (42.39%) और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 (38.57%) मत मिले। हार के बाद भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अभियान शुरू कर दिया है।

  • दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करने और हार के कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने समीक्षा समिति के गठन की घोषणा की है। समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि समिति उपचुनाव के दौरान संगठन की भूमिका, चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी।

    भाजपा के अनुसार समिति यह भी आकलन करेगी कि चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं हो सका और किन कारणों से पार्टी सीट जीतने में असफल रही। समीक्षा रिपोर्ट में संगठनात्मक सुधार, चुनावी रणनीति और भविष्य की तैयारियों से जुड़े सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी कार्ययोजना में आवश्यक बदलाव कर सकती है।

    दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। इसके बाद रिक्त हुई सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ। कांग्रेस ने एक बार फिर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने इस बार पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी को नए चेहरे से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया।

    चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने भी पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में व्यापक प्रचार किया था। इसके बावजूद भाजपा सीट अपने नाम नहीं कर सकी। इस नतीजे के बाद पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवार बदलने के फैसले को लेकर हो रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। उपचुनाव में भाजपा ने नया उम्मीदवार उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। अब इस निर्णय को भी समीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल माना जा रहा है।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद बूथवार मतदान के आंकड़ों ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर 121 पर भी भाजपा कांग्रेस से पीछे रही। इस बूथ पर कांग्रेस को भाजपा से अधिक मत मिले, जिससे स्थानीय संगठन की सक्रियता और परंपरागत वोट बैंक को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। इसके बाद पार्टी के भीतर समन्वय और संभावित भीतरघात को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं।

    भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार की निष्पक्ष समीक्षा से भविष्य में संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दतिया उपचुनाव में हार के पीछे कौन-कौन से प्रमुख कारण रहे और पार्टी आगे किन सुधारों पर जोर देगी।

  • दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी


    दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में मतदान संपन्न हो गया। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    सुबह मतदान शुरू होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

    निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। मतदाताओं के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन और पुलिस ने पूरे दिन मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी, जिससे मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के 2,20,410 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 1,16,116 पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, जबकि 1,04,284 महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48 रहा। वहीं 10 अन्य मतदाताओं में से 40 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

    मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और निर्वाचन सामग्री लेकर सुरक्षित रूप से संग्रहण केंद्र पहुंचे, जहां सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने मतदान प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

  • Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे क्षेत्र में मतदान को लेकर उत्साह बना रहा। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।

    मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल और जिगना क्षेत्रों में फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। वहीं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में हार की आशंका होने पर कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है।

    उधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले मतदान का बहिष्कार किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। बाद में एसडीएम अशोक अवस्थी की समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    इसी बीच रामसागर गांव के एक मतदान केंद्र से पुलिस कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गई। उस पर मतदाताओं से बातचीत करने का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं के थाने पहुंचने और विरोध दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एजेंट को छोड़ दिया।

    इस उपचुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि सीधा मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फर्जीवाड़ा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से पराजित किया था। उन्हें 88,977 और नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे, जबकि NOTA को 1,452 मत प्राप्त हुए थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दतिया प्रवास पर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दतिया प्रवास पर


    भोपाल,। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई, शनिवार को दतिया विधानसभा क्षेत्र के प्रवास पर रहेंगे। प्रवास के दौरान आप विभिन्न आमसभाओं, प्रबुद्धजन बैठक, प्रमुख कार्यकर्ताओं से भेंटकर व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दोपहर 2 बजे दतिया के उदगवां एवं सायं 4 बजे सीतापुर मंडल के ग्राम उपरायं में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। आप सायं 6ः30 बजे दतिया चुनाव कार्यालय, होटल रतन रॉयल में आयोजित प्रबुद्धजन बैठक को संबोधित करने के पश्चात् दतिया नगर व ग्रामीण के प्रमुख कार्यकर्ताओं से भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सायं 7ः45 बजे होटल एमपीटी मोटेल में व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.