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  • रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के रीवा में एक युवक की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया। मृतक परिवार का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर अधिक मात्रा में दवा देने की बात कही। बेटे की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। अस्पताल में हुए हंगामे के दौरान परिजनों ने इलाज के तरीके पर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

    परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज को दवा की अधिक मात्रा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल में नाराजगी जताई। परिवार का कहना है कि बेटे की मौत से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है। हालांकि, दवा की मात्रा, मरीज की स्थिति और मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

    अस्पताल में हंगामे के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मरीज को किस बीमारी के कारण भर्ती कराया गया था, उसका इलाज किस तरह किया जा रहा था और उसकी हालत में गिरावट कब आई। इन तथ्यों की जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही उपचार में किसी तरह की लापरवाही के आरोपों की पुष्टि हो सकती है।

    मौत के कारणों की जांच जरूरी

    इस तरह के मामले में मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, दी गई दवाओं की मात्रा, चिकित्सकीय निगरानी और मौत से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी होगी। केवल आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीज की मौत ओवरडोज के कारण हुई।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मृतक की उम्र, अस्पताल का नाम, भर्ती होने की तारीख, इलाज करने वाले डॉक्टरों का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। इन जानकारियों के बिना घटना के पूरे क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।

    मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। जांच में यह सामने आ सकेगा कि मरीज को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। परिजनों के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

  • कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत

    कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत


    श्योपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से बुरी खबर सामने आई है. नामीबियाई मादा चीता आशा (Namibian female cheetah Asha) के 8 महीने के एक शावक की मौत हो गई. आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था. अब उसके चार शावक ही बचे हैं. शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह सामने आएगी।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्ट उत्तम कुमार शर्मा ने बताया, सोमवार सुबह नियमित मॉनिटरिंग की गई. इस दौरान मादा चीता आशा अपने 5 में से 4 शावकों के साथ नजर आई. एक शावक के गायब होने पर उसकी तलाश शुरू की गई. टीम ने काफी खोजबीन की. इसके बाद शावक मृत अवस्था में मिला।

    शावक की मौत कैसे हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पार्क प्रबंधन ने 12 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में इसकी पुष्टि की है. मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चलेगा।

    उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक, शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 53 रह गई है. इनमें भारत में जन्मे 40 चीते शामिल हैं. पार्क प्रबंधन के मुताबिक, इनमें से 15 चीते फिलहाल जंगल में खुले घूम रहे हैं। वहीं, गांधी सागर अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में दो चीते मौजूद हैं. इस तरह भारत में चीतों की कुल संख्या अब 59 रह गई है।


    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगी मौत की वजह

    फिलहाल शावक की मौत के कारणों को लेकर स्थिति साफ नहीं है. पार्क प्रबंधन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा।

  • शिष्य की मौत के 9 दिन बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम का सामने आया बयान, जानिए क्‍या कहा ट्रस्ट ने ?

    शिष्य की मौत के 9 दिन बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम का सामने आया बयान, जानिए क्‍या कहा ट्रस्ट ने ?


    मथुरा। वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज से जुड़े राधा केलि कुंज आश्रम के साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के नौ दिन बाद ट्रस्ट की ओर से पहली विस्तृत अपील सामने आई है। ट्रस्ट ने कहा है कि घटना से महाराज और उनके अनुयायी आहत हैं तथा पुलिस की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं से अधूरी जानकारी, अफवाहों और पूर्वानुमानों के आधार पर आश्रम की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की गई है।

    गुरु कृपा कुंज आश्रम से जुड़ी इस घटना के बाद से कई सवाल उठ रहे हैं। परिजन और कुछ अन्य लोग आश्रम की व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच अलग-अलग जगहों से आए तीन परिवारों द्वारा अपने परिजनों की तलाश में आश्रम के बाहर हंगामा और नारेबाजी किए जाने की खबर भी सामने आई है। इसके बाद राधा केलि कुंज ट्रस्ट ने अपने फेसबुक पेज के जरिए अपील जारी की।

    ट्रस्ट ने क्या कहा?

    ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पिछले दिनों हुई घटना से पूज्य महाराज जी और समस्त अनुयायी अत्यंत आहत हैं। ट्रस्ट ने साधक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पुलिस प्रशासन को सहयोग दिया जा रहा है।

    ट्रस्ट ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक सभी श्रद्धालुओं, साधकों और आम लोगों से अनुरोध है कि किसी तरह की अपुष्ट जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर महाराज और आश्रम की छवि को धूमिल करने का प्रयास न किया जाए। ट्रस्ट को भरोसा है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद घटना से जुड़े वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।

    9 दिन बाद आया आश्रम की ओर से बयान

    घटना 25 सितंबर को हुई थी। पुलिस के मुताबिक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। प्रारंभिक तौर पर पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और पुलिस मोबाइल, सीसीटीवी फुटेज तथा आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ के जरिए घटना की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।

    अब घटना के नौ दिन बाद ट्रस्ट की ओर से यह अपील जारी की गई है। इससे पहले आश्रम की ओर से दीक्षा संबंधी गतिविधियों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा भी की गई थी।

    मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल

    दीपक लोधी की मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों में उनके शरीर और निजी अंग पर गंभीर चोट के निशान की बात सामने आई है। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए हैं और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन परिस्थितियों की वास्तविक वजह और घटनाक्रम के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    परिजनों की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। आश्रम के बाहर प्रदर्शन और सवाल उठाए जाने के बीच अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की तस्वीर कब स्पष्ट होती है।

    पुलिस की जांच जारी

    मामले में पुलिस आश्रम में रहने वाले साधकों की गतिविधियों, उनके बाहरी संपर्क, मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने आश्रम से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी की है।

    फिलहाल ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह पुलिस प्रशासन की जांच में सहयोग कर रहा है। दूसरी ओर, परिजन और अन्य लोग घटना की पूरी सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दीपक लोधी की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी।

  • बिहार में बाढ़ राहत बनी आफत: हेलीकॉप्टर से गिरा राशन का पैकेट सिर पर लगा, सारण में बुजुर्ग की मौत

    बिहार में बाढ़ राहत बनी आफत: हेलीकॉप्टर से गिरा राशन का पैकेट सिर पर लगा, सारण में बुजुर्ग की मौत


    सारण। बिहार के सारण जिले में बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने की कोशिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया। अमनौर थाना क्षेत्र के परशुरामपुर गांव में वायुसेना के हेलीकॉप्टर से गिराए जा रहे सूखे राशन के पैकेट 60 वर्षीय अनिल कुमार सिंह उर्फ अप्पू सिंह पर जा गिरे। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी गांव में हेलीकॉप्टर की तेज हवा के कारण एक महिला और उसके दो बच्चे भी घायल हो गए।

    हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने अनिल सिंह का शव सड़क पर रखकर आवागमन रोक दिया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के समझाने के बाद जाम हटाया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया।

    खाना खाने के बाद बैठे थे, तभी गिरा राशन का पैकेट

    मृतक के बेटे अभिनव प्रताप सिंह के मुताबिक, उनके पिता खाना खाने के बाद बैठे हुए थे। इसी दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री के पैकेट गिराए जा रहे थे। एक पैकेट उनके पिता के सिर पर आकर लगा, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद कई और पैकेट उनकी छाती पर भी जा गिरे।

    अनिल कुमार सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह अखबार हॉकर थे। अमनौर थानाध्यक्ष विमलेश कुमार ने भी घटना की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, गंभीर चोट लगने के कारण बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हुई।

    नेपाल से आई बाढ़ से कई प्रखंड प्रभावित

    नेपाल से आई बाढ़ के कारण सारण जिले के कई प्रखंड प्रभावित हैं। इनमें मकेर, अमनौर और परसा सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया है और वे टापू जैसे हालात में पहुंच गए हैं।

    ऐसे गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर से प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसी दौरान परशुरामपुर गांव में राशन के पैकेट गिराने के दौरान यह हादसा हुआ।

    छत पर खड़ी महिला और दो बच्चे भी घायल

    इसी गांव में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान दूसरा हादसा भी हुआ। रंभा देवी अपने दो बच्चों के साथ घर की छत पर खड़ी होकर हेलीकॉप्टर से गिराई जा रही राहत सामग्री का इंतजार कर रही थीं।

    हेलीकॉप्टर के नीचे से उड़ने के कारण पैदा हुई तेज हवा की वजह से रंभा देवी छत से बगल के मकान पर जा गिरीं। उनके कमर में गंभीर चोट आई है। वहीं, उनके दोनों बच्चों के पैरों में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। तीनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

    एक ही गांव में दो हादसों से ग्रामीणों में दहशत

    राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान एक ही गांव में दो हादसे होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एक ओर बाढ़ से लोग परेशान हैं, वहीं राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान हुए हादसे ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है और घायल महिला व उसके बच्चों का इलाज कराया जा रहा है।

  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था


    नई दिल्ली । वृंदावन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में आश्रम पहुंचे थे। परिवार को शुरुआत में यह बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। परिजन जब आश्रम पहुंचे तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया। सोनू के मुताबिक, परिवार के सदस्य कई घंटे तक बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें घटना से जुड़ी पूरी जानकारी तत्काल नहीं दी गई।

    परिजनों के अनुसार, दीपक लोधी वर्ष 2024 से आश्रम से जुड़े हुए थे। सोनू पटेल का दावा है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से दीपक की परिवार से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परिवार का कहना है कि जब भी कोई सदस्य उनसे मिलने के लिए पहुंचता था, तो उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था। इस वजह से परिजनों का दीपक से संपर्क बेहद सीमित हो गया था।

    सोनू पटेल ने यह भी बताया कि दीपक पिछले करीब दो वर्षों से अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते थे। ऐसे में परिवार के लोग उनसे फोन पर भी बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय से उनका दीपक से सीधा संपर्क नहीं था। मौत की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं और घटना की पूरी जानकारी सामने आने की मांग की है।

    उधर, घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं।

    दीपक के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी सामने आई है। ये चोटें छत से गिरने के कारण आईं या इससे पहले लगी थीं, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे आत्महत्या के अलावा कोई अन्य कारण तो नहीं है।

    फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों का इंतजार है। पुलिस घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मौत की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है। वहीं, दीपक के परिजन घटना को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • एयर शो में दिखा मौत का खौफनाक मंजर, आग के गोले में बदला F-4 फैंटम; दोनों पायलटों की मौत

    एयर शो में दिखा मौत का खौफनाक मंजर, आग के गोले में बदला F-4 फैंटम; दोनों पायलटों की मौत


    एथेंस।
    ग्रीस में एक एयर शो के दौरान शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। एथेंस के पास स्थित तानाग्रा एयर बेस पर प्रदर्शन कर रहा दो सीटों वाला F-4 फैंटम फाइटर जेट अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई।

    दुर्घटना उस समय हुई जब लड़ाकू विमान एयर शो में करतब दिखा रहा था। विमान जमीन से महज कुछ मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। अचानक उसने नीचे की ओर गोता लगाया और कुछ ही पलों में आग के विशाल गोले में बदल गया। हादसे का दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए।

    उड़ान के कुछ मिनट बाद ही हुआ क्रैश

    यह हादसा एथेंस फ्लाइंग वीक के दौरान हुआ। यह ग्रीस का वार्षिक एयर शो है, जिसमें विभिन्न देशों की सैन्य और नागरिक विमानन टीमें हिस्सा लेती हैं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, F-4 फैंटम ने उड़ान भरने के करीब तीन मिनट बाद ही खतरनाक तरीके से नीचे की ओर झुकना शुरू कर दिया। विमान जमीन के बेहद करीब दाईं तरफ मुड़ता दिखाई दिया और इसके तुरंत बाद वह क्रैश हो गया।

    ग्रीस के सरकारी प्रसारक ईआरटी की तस्वीरों में भी विमान को जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर तेज मोड़ लेते हुए देखा गया। इसके बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें भीषण आग लग गई।

    क्रैश के बाद जंगल में फैली आग

    फाइटर जेट के जमीन से टकराते ही आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। दुर्घटना के बाद लगी आग आसपास के जंगल तक पहुंच गई, जिससे बचाव दल के सामने चुनौती और बढ़ गई।

    आग बुझाने के लिए 11 दमकल विमान और हेलीकॉप्टर मौके पर लगाए गए। एयर बेस के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को इलाके से बाहर निकलने की अपील भी की जाती रही।

    नागरिकों को नहीं पहुंचा नुकसान

    हादसे में F-4 फैंटम पर सवार दोनों पायलटों की जान चली गई। हालांकि, दुर्घटना के दौरान आसपास मौजूद नागरिकों या स्थानीय लोगों के घायल होने की कोई खबर नहीं है।

    हादसे के बाद एयर शो की सुरक्षा और दुर्घटना के कारणों को लेकर जांच शुरू किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विमान इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरते समय अचानक नियंत्रण से बाहर कैसे हुआ।

  • घंटों लगातार बैठे रहना पड़ सकता है भारी, हर अतिरिक्त घंटे से कैंसर से मौत का खतरा

    घंटों लगातार बैठे रहना पड़ सकता है भारी, हर अतिरिक्त घंटे से कैंसर से मौत का खतरा

    लंदन। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को लेकर एक बड़े अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है। शोध के मुताबिक, रोजाना बिना ब्रेक लंबे समय तक बैठे रहने की अवधि में हर अतिरिक्त एक घंटा कैंसर से मौत के 9% अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया। वहीं, बैठने के समय के एक घंटे को हल्की शारीरिक गतिविधि से बदलने पर कैंसर से मौत का जोखिम 12% कम देखा गया।

    यह अध्ययन ग्लासगो विश्वविद्यालय के फ्रेडरिक हो और उनके सहयोगियों ने किया है। शोध में लगातार बैठे रहने और कैंसर से जुड़े कई स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया।

    सिर्फ कैंसर से मौत ही नहीं, कई प्रकार के कैंसर से संबंध

    अध्ययन में लंबे समय तक लगातार बैठे रहने और कैंसर से मृत्यु के बढ़े जोखिम के बीच संबंध पाया गया। इसके अलावा, कुल कैंसर होने तथा मोटापे से जुड़े कई कैंसर के मामलों से भी लंबे समय तक बैठे रहने का संबंध सामने आया।

    इनमें भोजन नली, यकृत, गुर्दे, अग्न्याशय, बड़ी आंत, स्तन, अंडाशय और थायरॉयड से जुड़े कैंसर शामिल थे।

    एक घंटे बैठने की जगह हल्की गतिविधि से फायदा

    अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी रहा कि लगातार बैठे रहने के समय को हल्की शारीरिक गतिविधि से बदलने पर जोखिम कम होने का संबंध पाया गया। शोध के मुताबिक, यदि लगातार बैठने के एक घंटे की जगह हल्की गतिविधि की जाए तो कैंसर से मौत का जोखिम 12% तक कम पाया गया।

    इससे संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की दिनचर्या में बहुत कठिन व्यायाम के बजाय छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों को शामिल करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    बीच-बीच में उठना बन सकता है बचाव का तरीका

    शोध में लगातार बैठने की अवधि को बीच-बीच में हल्की गतिविधि से तोड़ने के भी सकारात्मक संकेत मिले। ऐसा करने पर अध्ययन में शामिल सभी प्रमुख स्वास्थ्य परिणामों में जोखिम कम होने का संबंध पाया गया।

    यानी लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने के बजाय समय-समय पर उठना, कुछ कदम चलना या हल्की गतिविधि करना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है।

    क्या संदेश देता है अध्ययन?

    अध्ययन के निष्कर्ष लंबे समय तक बैठे रहने वाली आधुनिक जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत बताते हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो काम, यात्रा या अन्य कारणों से दिन का बड़ा हिस्सा लगातार बैठे हुए बिताते हैं, बैठने के लंबे दौर को बीच-बीच में हल्की गतिविधि से तोड़ना महत्वपूर्ण हो सकता है।

    हालांकि, अध्ययन में सामने आए आंकड़े संबंध (association) को दर्शाते हैं; इन्हें यह साबित करने के तौर पर नहीं पढ़ना चाहिए कि लगातार बैठना अकेले ही कैंसर का कारण बनता है।

  • तीर्थ में मृत्यु पर क्या कहते हैं शास्त्र? "पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की मान्यता, लेकिन…"

    तीर्थ में मृत्यु पर क्या कहते हैं शास्त्र? "पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की मान्यता, लेकिन…"


    नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में जान-माल के नुकसान के साथ बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। यह आपदा उस समय आई, जब नेपाल और तिब्बत के रास्ते कैलास मानसरोवर की तीर्थयात्रा चल रही थी। हादसे में प्रभावित भारतीयों में बड़ी संख्या श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है।

    इस घटना के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तीर्थ में या तीर्थयात्रा के दौरान हो जाए तो हिंदू धर्मग्रंथ इसे किस दृष्टि से देखते हैं? क्या पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है? शास्त्रों और पुराणों में कई तीर्थों में देहत्याग की महिमा बताई गई है, लेकिन इसके साथ कर्म और अंतिम समय के विचारों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    तीर्थ का अर्थ ही है भवसागर से पार जाने का माध्यम

    भारतीय परंपरा में तीर्थ केवल कोई धार्मिक स्थान नहीं है। ‘तीर्थ’ का अर्थ उस स्थान या माध्यम से जुड़ा है, जिसके सहारे मनुष्य संसार के बंधनों से पार जाने का प्रयास करता है। इसी कारण नदियों के तट, पर्वत, देवस्थल और प्राचीन धार्मिक नगर तीर्थ माने गए हैं।

    तीर्थयात्रा में स्नान, दर्शन, दान, तप, जप और आत्मशुद्धि जैसी साधनाएं शामिल होती हैं। इसलिए इसे केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की यात्रा नहीं, बल्कि धार्मिक संकल्प और साधना के रूप में देखा गया है।

    गीता में अंतिम समय के विचारों को सबसे अधिक महत्व

    तीर्थ में मृत्यु की मान्यता को समझने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का संदर्भ महत्वपूर्ण है। आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अंतिम समय में मनुष्य की मानसिक अवस्था और उसके विचारों का महत्व बताते हैं।

    श्रीकृष्ण कहते हैं—

    अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्।
    यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः॥

    अर्थात जो व्यक्ति अंतिम समय में मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।

    अगले श्लोक में इसी सिद्धांत को और स्पष्ट करते हुए कहा गया है—

    यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्।
    तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः॥

    अर्थात मनुष्य अंतिम समय में जिस भाव का स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है, वह उसी भाव को प्राप्त होता है। इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से केवल मृत्यु का स्थान ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उस समय व्यक्ति का चित्त किस अवस्था में था, इसे भी अहम माना गया है।

    काशी में मृत्यु को लेकर सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता

    तीर्थ में देहत्याग की चर्चा हो तो काशी का उल्लेख सबसे पहले आता है। काशी को ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा गया है। स्कंदपुराण के काशीखंड सहित कई पौराणिक परंपराओं में इसकी विशेष महिमा बताई गई है।

    धार्मिक मान्यता है कि काशी में देह त्यागने वाले व्यक्ति को भगवान शिव तारक मंत्र का उपदेश देते हैं और उसे संसार के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। इसी विश्वास के कारण सदियों से लोग जीवन के अंतिम चरण में काशी जाकर रहने की इच्छा रखते रहे हैं।

    हालांकि इतिहास में ‘करवत काशी’ जैसी कठोर परंपराओं का भी उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यताओं में मोक्ष की कामना से लोग काशी में जानबूझकर प्राण त्यागने तक के प्रयास करते थे। मीरा के पदों और कबीर की रचनाओं में भी ‘करवत कासी’ का संदर्भ मिलता है।

    केदार की यात्रा और कैलास पहुंचने की कथा

    स्कंदपुराण में तीर्थयात्रा से जुड़ी वसिष्ठ और उनके गुरु हिरण्यगर्भ की कथा भी मिलती है। दोनों हिमालय में केदार की यात्रा पर जाते हैं। यात्रा के दौरान असिधारा पर्वत पर हिरण्यगर्भ की मृत्यु हो जाती है।

    पुराण की कथा के अनुसार, तीर्थयात्रा के दौरान देह त्यागने और अंतिम समय में चित्त की शुद्ध अवस्था के कारण शिवगण उन्हें दिव्य विमान से कैलास ले जाते हैं। इस कथा में तीर्थयात्री की मृत्यु को शिवलोक की प्राप्ति से जोड़ा गया है।

    गरुड़ पुराण में पवित्र भूमि पर मृत्यु का उल्लेख

    गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प, अध्याय 14 में मृत्यु के बाद धर्मराज की सभा तक पहुंचने वाले पुण्यात्माओं का वर्णन मिलता है। इसमें काशी में मृत्यु, धर्म की रक्षा करते हुए प्राण त्यागने और योग करते हुए शरीर छोड़ने वालों के साथ पवित्र जल में दुर्घटनावश डूबने या पवित्र तीर्थ और पुण्यभूमि में मृत्यु होने का भी उल्लेख किया गया है।

    इसमें ऐसे पुण्यात्माओं के लिए धर्मराज की सभा की ओर जाने वाले उत्तरी मार्ग का वर्णन मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि धार्मिक परंपरा में पुण्यभूमि पर मृत्यु को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है।

    पांडवों की कथा बताती है कि केवल स्थान ही सब कुछ नहीं

    महाभारत में पांडवों की अंतिम यात्रा का प्रसंग भी इस विषय को अलग दृष्टि से समझाता है। यात्रा के दौरान द्रौपदी और चारों भाई एक-एक करके गिरते जाते हैं। युधिष्ठिर उनके पतन को उनके जीवन में मौजूद अलग-अलग दोषों से जोड़ते हैं।

    इस प्रसंग से यह विचार सामने आता है कि भारतीय शास्त्रीय परंपरा में स्थान के साथ कर्म और चित्त की भी भूमिका है। यानी किसी पवित्र स्थान पर मृत्यु को महत्व दिया गया है, लेकिन मनुष्य के कर्म और उसकी मानसिक अवस्था को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया।

    प्रयाग और अयोध्या की भी अलग धार्मिक मान्यताएं

    पद्मपुराण के स्वर्गखंड में प्रयाग और उसके आसपास के तीर्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसमें गंगा और यमुना के तट पर स्थित तीर्थों में देह त्यागने की धार्मिक महत्ता बताई गई है। यहां तक कहा गया है कि इन पवित्र तीर्थों में मृत्यु पाने वाले व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता।

    इसी तरह स्कंदपुराण के वैष्णवखंड में अयोध्या में देहत्याग को ‘स्वर्गद्वार’ का मार्ग बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे व्यक्ति को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

    क्या तीर्थ में मृत्यु से निश्चित रूप से मोक्ष मिल जाता है?

    शास्त्रीय मान्यताओं को समग्र रूप से देखें तो इसका उत्तर इतना सीधा नहीं है कि तीर्थ में मृत्यु होते ही हर व्यक्ति को निश्चित रूप से मोक्ष मिल जाता है। अलग-अलग पुराणों में कुछ तीर्थों की मृत्यु-महिमा जरूर बताई गई है, लेकिन गीता जैसे ग्रंथ अंतिम समय के भाव, स्मरण और चित्त की अवस्था को भी निर्णायक महत्व देते हैं।

    यही कारण है कि तीर्थयात्रा को केवल पर्यटन नहीं माना गया। इसमें संयम, उपवास, स्नान, दान, जप, देवदर्शन और सांसारिक आसक्तियों से दूरी जैसी साधनाएं जुड़ी हैं।

    इस दृष्टि से तीर्थयात्रा धार्मिक संकल्प के साथ शुरू होने वाली आध्यात्मिक यात्रा है। मान्यता है कि पुण्यभूमि का वातावरण मनुष्य के चित्त को ईश्वर और आध्यात्मिक चिंतन की ओर ले जाता है। इसलिए तीर्थ में मृत्यु को विशेष पुण्य से जोड़कर देखा गया है, लेकिन उसके साथ व्यक्ति के कर्म और अंतिम मानसिक भाव को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

  • धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप

    धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप





    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले स्थित धामपुर शुगर मिल्स (DSM) के संस्थापक और वरिष्ठ उद्योगपति कुंवर विजय कुमार गोयल का 86 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर है।

    विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।

    गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।

    गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।