Tag: death

  • तीर्थ में मृत्यु पर क्या कहते हैं शास्त्र? "पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की मान्यता, लेकिन…"

    तीर्थ में मृत्यु पर क्या कहते हैं शास्त्र? "पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की मान्यता, लेकिन…"


    नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में जान-माल के नुकसान के साथ बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। यह आपदा उस समय आई, जब नेपाल और तिब्बत के रास्ते कैलास मानसरोवर की तीर्थयात्रा चल रही थी। हादसे में प्रभावित भारतीयों में बड़ी संख्या श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है।

    इस घटना के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तीर्थ में या तीर्थयात्रा के दौरान हो जाए तो हिंदू धर्मग्रंथ इसे किस दृष्टि से देखते हैं? क्या पुण्यभूमि में प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है? शास्त्रों और पुराणों में कई तीर्थों में देहत्याग की महिमा बताई गई है, लेकिन इसके साथ कर्म और अंतिम समय के विचारों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    तीर्थ का अर्थ ही है भवसागर से पार जाने का माध्यम

    भारतीय परंपरा में तीर्थ केवल कोई धार्मिक स्थान नहीं है। ‘तीर्थ’ का अर्थ उस स्थान या माध्यम से जुड़ा है, जिसके सहारे मनुष्य संसार के बंधनों से पार जाने का प्रयास करता है। इसी कारण नदियों के तट, पर्वत, देवस्थल और प्राचीन धार्मिक नगर तीर्थ माने गए हैं।

    तीर्थयात्रा में स्नान, दर्शन, दान, तप, जप और आत्मशुद्धि जैसी साधनाएं शामिल होती हैं। इसलिए इसे केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की यात्रा नहीं, बल्कि धार्मिक संकल्प और साधना के रूप में देखा गया है।

    गीता में अंतिम समय के विचारों को सबसे अधिक महत्व

    तीर्थ में मृत्यु की मान्यता को समझने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का संदर्भ महत्वपूर्ण है। आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अंतिम समय में मनुष्य की मानसिक अवस्था और उसके विचारों का महत्व बताते हैं।

    श्रीकृष्ण कहते हैं—

    अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्।
    यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः॥

    अर्थात जो व्यक्ति अंतिम समय में मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।

    अगले श्लोक में इसी सिद्धांत को और स्पष्ट करते हुए कहा गया है—

    यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्।
    तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः॥

    अर्थात मनुष्य अंतिम समय में जिस भाव का स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है, वह उसी भाव को प्राप्त होता है। इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से केवल मृत्यु का स्थान ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उस समय व्यक्ति का चित्त किस अवस्था में था, इसे भी अहम माना गया है।

    काशी में मृत्यु को लेकर सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता

    तीर्थ में देहत्याग की चर्चा हो तो काशी का उल्लेख सबसे पहले आता है। काशी को ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा गया है। स्कंदपुराण के काशीखंड सहित कई पौराणिक परंपराओं में इसकी विशेष महिमा बताई गई है।

    धार्मिक मान्यता है कि काशी में देह त्यागने वाले व्यक्ति को भगवान शिव तारक मंत्र का उपदेश देते हैं और उसे संसार के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। इसी विश्वास के कारण सदियों से लोग जीवन के अंतिम चरण में काशी जाकर रहने की इच्छा रखते रहे हैं।

    हालांकि इतिहास में ‘करवत काशी’ जैसी कठोर परंपराओं का भी उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यताओं में मोक्ष की कामना से लोग काशी में जानबूझकर प्राण त्यागने तक के प्रयास करते थे। मीरा के पदों और कबीर की रचनाओं में भी ‘करवत कासी’ का संदर्भ मिलता है।

    केदार की यात्रा और कैलास पहुंचने की कथा

    स्कंदपुराण में तीर्थयात्रा से जुड़ी वसिष्ठ और उनके गुरु हिरण्यगर्भ की कथा भी मिलती है। दोनों हिमालय में केदार की यात्रा पर जाते हैं। यात्रा के दौरान असिधारा पर्वत पर हिरण्यगर्भ की मृत्यु हो जाती है।

    पुराण की कथा के अनुसार, तीर्थयात्रा के दौरान देह त्यागने और अंतिम समय में चित्त की शुद्ध अवस्था के कारण शिवगण उन्हें दिव्य विमान से कैलास ले जाते हैं। इस कथा में तीर्थयात्री की मृत्यु को शिवलोक की प्राप्ति से जोड़ा गया है।

    गरुड़ पुराण में पवित्र भूमि पर मृत्यु का उल्लेख

    गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प, अध्याय 14 में मृत्यु के बाद धर्मराज की सभा तक पहुंचने वाले पुण्यात्माओं का वर्णन मिलता है। इसमें काशी में मृत्यु, धर्म की रक्षा करते हुए प्राण त्यागने और योग करते हुए शरीर छोड़ने वालों के साथ पवित्र जल में दुर्घटनावश डूबने या पवित्र तीर्थ और पुण्यभूमि में मृत्यु होने का भी उल्लेख किया गया है।

    इसमें ऐसे पुण्यात्माओं के लिए धर्मराज की सभा की ओर जाने वाले उत्तरी मार्ग का वर्णन मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि धार्मिक परंपरा में पुण्यभूमि पर मृत्यु को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है।

    पांडवों की कथा बताती है कि केवल स्थान ही सब कुछ नहीं

    महाभारत में पांडवों की अंतिम यात्रा का प्रसंग भी इस विषय को अलग दृष्टि से समझाता है। यात्रा के दौरान द्रौपदी और चारों भाई एक-एक करके गिरते जाते हैं। युधिष्ठिर उनके पतन को उनके जीवन में मौजूद अलग-अलग दोषों से जोड़ते हैं।

    इस प्रसंग से यह विचार सामने आता है कि भारतीय शास्त्रीय परंपरा में स्थान के साथ कर्म और चित्त की भी भूमिका है। यानी किसी पवित्र स्थान पर मृत्यु को महत्व दिया गया है, लेकिन मनुष्य के कर्म और उसकी मानसिक अवस्था को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया।

    प्रयाग और अयोध्या की भी अलग धार्मिक मान्यताएं

    पद्मपुराण के स्वर्गखंड में प्रयाग और उसके आसपास के तीर्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसमें गंगा और यमुना के तट पर स्थित तीर्थों में देह त्यागने की धार्मिक महत्ता बताई गई है। यहां तक कहा गया है कि इन पवित्र तीर्थों में मृत्यु पाने वाले व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता।

    इसी तरह स्कंदपुराण के वैष्णवखंड में अयोध्या में देहत्याग को ‘स्वर्गद्वार’ का मार्ग बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे व्यक्ति को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

    क्या तीर्थ में मृत्यु से निश्चित रूप से मोक्ष मिल जाता है?

    शास्त्रीय मान्यताओं को समग्र रूप से देखें तो इसका उत्तर इतना सीधा नहीं है कि तीर्थ में मृत्यु होते ही हर व्यक्ति को निश्चित रूप से मोक्ष मिल जाता है। अलग-अलग पुराणों में कुछ तीर्थों की मृत्यु-महिमा जरूर बताई गई है, लेकिन गीता जैसे ग्रंथ अंतिम समय के भाव, स्मरण और चित्त की अवस्था को भी निर्णायक महत्व देते हैं।

    यही कारण है कि तीर्थयात्रा को केवल पर्यटन नहीं माना गया। इसमें संयम, उपवास, स्नान, दान, जप, देवदर्शन और सांसारिक आसक्तियों से दूरी जैसी साधनाएं जुड़ी हैं।

    इस दृष्टि से तीर्थयात्रा धार्मिक संकल्प के साथ शुरू होने वाली आध्यात्मिक यात्रा है। मान्यता है कि पुण्यभूमि का वातावरण मनुष्य के चित्त को ईश्वर और आध्यात्मिक चिंतन की ओर ले जाता है। इसलिए तीर्थ में मृत्यु को विशेष पुण्य से जोड़कर देखा गया है, लेकिन उसके साथ व्यक्ति के कर्म और अंतिम मानसिक भाव को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

  • धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप

    धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप





    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले स्थित धामपुर शुगर मिल्स (DSM) के संस्थापक और वरिष्ठ उद्योगपति कुंवर विजय कुमार गोयल का 86 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर है।

    विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।

    गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।

    गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।

  • ‘वैदिक स्कूल या यातना गृह?’ 11 साल के छात्र की मौत ने खड़े किए सवाल, शरीर पर 45 चोटों के निशान

    ‘वैदिक स्कूल या यातना गृह?’ 11 साल के छात्र की मौत ने खड़े किए सवाल, शरीर पर 45 चोटों के निशान


    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 11 वर्षीय छात्र दिव्यांश की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिवार ने इसे सीधा हत्या का मामला बताते हुए स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    7 दिन पहले छोड़ा था स्कूल, अब मिला शव

    परिजनों के मुताबिक, दिव्यांश को महज एक सप्ताह पहले लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में पढ़ाई के लिए छोड़ा गया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्कूल संचालक बच्चे का शव कार से उसके घर लेकर पहुंचा, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

    शरीर पर 40-45 चोटों के निशान

    परिवार का आरोप है कि बच्चे के हाथ-पैर बांधे गए थे और बेरहमी से पिटाई की गई।

    शरीर पर 40 से 45 चोटों के निशान मिले
    सिगरेट से दागने के भी आरोप
    गंभीर शारीरिक यातना की आशंका

    इन हालातों ने “वैदिक शिक्षा” के नाम पर चल रहे संस्थान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    हत्या और साक्ष्य मिटाने का केस

    पिता नरेंद्र द्विवेदी की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और चालक के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

    सवालों के घेरे में गुरुकुल व्यवस्था

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता भी खड़ी करती है। जिस स्थान को शिक्षा और संस्कार का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की क्रूरता ने सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

    आगे क्या?

    अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच से ही स्पष्ट हो पाएगा कि दिव्यांश की मौत किन परिस्थितियों में हुई और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।

    कानपुर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है—बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता मानी जाएगी।

  • करणवीर बोहरा के पिता और फिल्म प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा का निधन, तेजा और टक्कर जैसी फिल्मों के निर्माता रहे

    करणवीर बोहरा के पिता और फिल्म प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा का निधन, तेजा और टक्कर जैसी फिल्मों के निर्माता रहे


    नई दिल्ली। अएक्टर करणवीर बोहरा ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता और जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा के निधन की जानकारी दी। महेंद्र बोहरा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से कई दशकों से जुड़े थे और उन्होंने तेजा, टक्कर, प्यार का कर्ज और लश्कर जैसी फिल्मों का निर्माण किया।

    करणवीर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपने पिता को याद करते हुए लिखा, “लव यू डैड। मैंने आपको शब्दों से ज्यादा मिस करूंगा। आपने एक अच्छी और पूरी जिंदगी जी।” उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि इस दुनिया से शांति से और बिना किसी तकलीफ के जाना चाहिए, और महेंद्र बोहरा ने ऐसा ही किया।

    एक्टर ने आगे कहा कि उनके पिता ने उन्हें और उनकी बहन को हिम्मत, उम्मीद और मेहनत करना सिखाया। उन्होंने लिखा, आपने मुझे सिखाया कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। गिरो तो दोबारा खड़े होना चाहिए। जिंदगी को जोश और पॉजिटिविटी के साथ जीना चाहिए।

    करणवीर ने अपने पिता के पेशेवर जीवन की भी तारीफ की और कहा कि महेंद्र बोहरा ने उन्हें सिखाया कि एक्टर और प्रोड्यूसर दोनों के तौर पर मेहनत और क्रिएटिविटी की अहमियत समझना चाहिए। उनके पिता ने हमेशा अच्छा व्यवहार करना और सपने देखने की प्रेरणा दी।

    महेंद्र बोहरा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रामकुमार बोहरा के बेटे के रूप में आए और कई बड़े सितारों जैसे नसीरुद्दीन शाह, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और सोनाली बेंद्रे के साथ काम किया। उनकी फिल्में दर्शकों में हमेशा यादगार रही हैं।

  • भोपाल आईटी पार्क में माली की करंट से मौत: पेशाब करने गए थे, खुले तार की चपेट में आकर झुलसे

    भोपाल आईटी पार्क में माली की करंट से मौत: पेशाब करने गए थे, खुले तार की चपेट में आकर झुलसे


    भोपाल। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल के आईटी पार्क में एक बुजुर्ग माली की करंट लगने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय मलखान सिंह आईटी पार्क में माली का काम करते थे। पौधों को पानी देने के बाद वे पास के गार्डन के एक कोने में पेशाब करने गए थे, जहां एक खुला हुआ तार पड़ा था। इस तार की चपेट में आते ही वे गंभीर रूप से झुलस गए।

    आसपास मौजूद उनके साथियों ने उन्हें झुलसी हुई हालत में देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। उन्हें हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बाद गांधी नगर पुलिस ने बताया कि मलखान सिंह को उनके साथी ने सबसे पहले देखा था, जो तार की चपेट में आने के बाद जमीन पर गिर गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार की दोपहर करीब तीन बजे पोस्टमार्टम के बाद उनके शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और संबंधित विभाग से खुले तारों की स्थिति पर जवाब तलब किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर जताया दुःख

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर जताया दुःख

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. गुरु ने संचालक गजेटियर सहित अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. गुरु ने मध्यप्रदेश से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों के संरक्षण और पुराने ग्रंथों के पुनर्प्रकाशन में विशेष योगदान दिया। उनके कार्य ने इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    डॉ. यादव ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

  • बाल्टी में हाथ डालते ही इमर्शन रॉड से करंट, 5 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत; परिजन PM से इनकार, थाने के सामने हुआ हंगामा

    बाल्टी में हाथ डालते ही इमर्शन रॉड से करंट, 5 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत; परिजन PM से इनकार, थाने के सामने हुआ हंगामा


    रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज में एक 5 वर्षीय बच्ची की करंट लगने से मौत ने परिवार में मातम और क्षेत्र में चिंता की लहर फैला दी है। घटना हदाईपुर की बताई जा रही है जहां सुरेंद्र जैन की पुत्री स्वस्ति जैन 5 घर में हाथ धोने के लिए बाल्टी में हाथ डाला तभी उसमें रखी इमर्शन रॉड से करंट लग गया। बच्ची की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत सिविल अस्पताल लेकर गए लेकिन डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिजन मासूम के पीएम पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते थे। उन्होंने अस्पताल में लिखित रूप से डॉक्टर को बताया और शव को घर ले आए। इसके बाद पुलिस को भी परिजनों ने पीएम न कराने की मांग की। परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर शमशान पहुंच गए। इस बीच अस्पताल से थाने में सूचना पहुंची कि बच्ची अज्ञात कारण से करंट लगने से मृत हुई है।

    जब पुलिस ने मर्ग मृत्यु का मामला दर्ज किया और नियम अनुसार पीएम कराने के लिए कहा तो परिजन ने विरोध किया। शमशान में शव लेकर आए परिजन थाने के सामने भी एकत्रित हो गए और पीएम कराने से इनकार करते रहे। लोगों का कहना था कि पहले पुलिस ने मूक सहमति दी थी लेकिन बाद में पीएम के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

    हालांकि पुलिस ने मामले की गंभीरता बताते हुए समझाइश दी और नियमों के अनुसार पीएम कराना आवश्यक बताया। अंततः परिजन समझौता करके शव को फिर से सिविल अस्पताल ले गए। पीएम के बाद परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में शव को पलकमति वाले शमशान में दफन कर दिया।

    इस पूरे विवाद ने यह सवाल उठाया है कि क्या परिवार और पुलिस के बीच संवाद सही ढंग से हुआ या नहीं। पुलिस का कहना है कि मर्ग की सूचना मिलने पर पीएम अनिवार्य था इसलिए नियम के अनुसार पीएम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं परिजन का आरोप है कि पुलिस ने पहले मूक सहमति दी और बाद में पीएम के लिए दबाव बनाया।

    इस हादसे ने घरों में इमर्शन रॉड से पानी गर्म करने की प्रथा पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और पुलिस का मानना है कि इमर्शन रॉड को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए ताकि ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों। स्वस्ति की मौत से परिवार में शोक का माहौल है और आसपास के लोग भी इस घटना को चेतावनी मानकर बच्चों की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।

  • पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

    पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक


    नई दिल्ली।  भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पी टी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है। इस खबर से खेल और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    कैसे हुआ निधन?
    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वी श्रीनिवासन शुक्रवार तड़के अपने आवास पर अचानक बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    पीटी उषा के जीवन में उनका योगदान
    वी श्रीनिवासन केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी थे और पी टी उषा के जीवन में उनका अहम योगदान रहा। वे उषा के खेल करियर से लेकर राजनीतिक सफर तक हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। उन्हें उषा का मजबूत संबल माना जाता था।

    पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोकपीएम मोदी ने जताया दुख
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन करके पीटी उषा के परिवार को शोक संवेदना जताई और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दी श्रद्धांजलि
    केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा:पी.टी. उषा और उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। इस मुश्किल समय में ईश्वर से हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं।


    उड़नपरी के लिए यह बड़ी क्षति
    पीटी उषा, जिन्हें ‘उड़नपरी’ के नाम से जाना जाता है, भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायक हस्तियों में से एक हैं।
    उनके निजी जीवन में यह क्षति न केवल उनके लिए, बल्कि उनके चाहने वालों के लिए भी बेहद दुखद है।सोशल मीडिया पर खिलाड़ी, कोच, प्रशंसक और आम लोग लगातार उन्हें हिम्मत और संबल देने के संदेश भेज रहे हैं।
  • मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा

    मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा


    वॉशिंगटन। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोलीबारी से एक शख्स की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के बीच विवाद तेज हो गया।

    ट्रंप ने मिनेसोटा के गवर्नर और मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे पर आरोप लगाया कि वे विद्रोह भड़का रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि नेता अपनी “घमंडी और अहंकारी बयानबाजी” से हिंसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोगों के पैसे और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ट्रंप ने ICE एजेंट पर हमला करने वाले व्यक्ति की फिंगर की तस्वीरें भी साझा कीं।राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि स्थानीय पुलिस को ICE अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्यों तैनात नहीं किया गया और दावा किया कि मृतक हथियारबंद था। ट्रंप ने कहा कि ICE एजेंट्स को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

    वहीं, गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने संघीय कार्रवाई की निंदा की और अधिकारियों को मिनेसोटा से तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अभियान गलत है और राष्ट्रपति को इसे तुरंत रोकना चाहिए।घटना मिनियापोलिस के दक्षिणी हिस्से में हुई, और स्थानीय अधिकारी जांच में जुटे हैं। लोगों से शांति बनाए रखने और प्रभावित इलाके से दूर रहने की अपील की गई है।

    यह घटना ICE के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे एंटी-इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान हुई। इससे पहले 7 जनवरी को 37 वर्षीय रेनी गुड नामक महिला की ICE फायरिंग में मौत हो गई थी, जिससे अमेरिका में भारी विरोध हुआ था। रेनी गुड तीन बच्चों की मां थीं, और DHS का दावा था कि वह एजेंट पर हमला कर रही थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ICE एजेंट का बचाव किया था

  • सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत

    सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत


    मदुरै । लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अक्सर वजन घटाने के लिए उपायों की तलाश करते रहते हैं। हाल ही में यह एक छात्रा की दर्दनाक मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताए गए तरीके के अनुसार ‘वेंकारम’ यानी बोरेक्स का सेवन करने के बाद स्नातक की प्रथम वर्ष की एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई है।

    पुलिस ने मंगलवार बताया कि 19 वर्षीय कलैयारसी दिहाड़ी मजदूर वेल मुरुगन (51) और विजयलक्ष्मी की पुत्री थी और नरिमेडु स्थित एक निजी महिला कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वह सेलूर के मीनाम्बलपुरम इलाके की कामराज क्रॉस स्ट्रीट में रहती थी।

    पुलिस ने बताया कि वजन कुछ ज्यादा होने के कारण कलैयारसी अक्सर वजन घटाने से जुड़े उपाय तलाशती रहती थी।

    पिछले सप्ताह उसने ‘वजन घटाने और छरहरी काया के लिए वेंकारम’ शीर्षक वाला एक यूट्यूब वीडियो देखा था और 16 जनवरी को कीझामासी स्ट्रीट के थर्मुट्टी इलाके के पास स्थित दवा की एक दुकान से यह पदार्थ खरीदा।

    पुलिस ने बताया कि कलैयारसी ने 17 जनवरी को वीडियो में बताए गए तरीके से इसका सेवन किया, जिसके बाद उसे उल्टी और दस्त होने लगे। उसकी मां उसे मुनिसलाई स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। हालांकि उसी शाम लक्षण दोबारा उभरे और पास के एक अन्य अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर उसने तेज पेट दर्द और मल में खून आने की शिकायत की।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 11 बजे उल्टी और दस्त की स्थिति गंभीर हो गई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। सेलूर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।