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  • असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन

    असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन


    नई दिल्ली। असम के प्रसिद्ध संगीतकार और गायक समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 वर्ष थी। समर लंबे समय से बीमार चल रहे थे और हाल ही में अस्पताल से घर लौटे थे। उनका निधन गुवाहाटी के निजारापार इलाके में उनके घर पर हुआ, जहां उनके परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं।
    परिवार ने उनके निधन की पुष्टि कर दी है।

    समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उन्होंने अपने जीवन में असमिया संगीत को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समर ने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए कई गाने गाए और संगीत तैयार किया।

    उनका संगीत करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ। उनका पहला एल्बम “उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी” 1968 में रिलीज हुआ। इसके अलावा उन्होंने असमिया फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के रूप में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने भूपेन हजारिका की विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और मोह बिसारिसु हेजार सोकुट जैसे प्रसिद्ध असमिया गीत गाए।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर शोक व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज हर मौके को खास बनाती थी और असम की संस्कृति में उनका योगदान अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी उनके निधन पर दुख जताया और बताया कि उनका जाना माघ बिहू के दिन और भी दुखद है।

    समर हजारिका के निधन से असमिया संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल असमिया संगीत को समृद्ध किया, बल्कि भूपेन हजारिका की विरासत को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।

    उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

    भूपेन हजारिका के बारे में जानकारी
    डॉ. भूपेन हजारिका असम के सुप्रसिद्ध संगीतकार, गायक और गीतकार थे। उनका जन्म 8 सितंबर 1926 को असम में हुआ था। उन्होंने असमिया, हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत लिखे और गाए। भूपेन हजारिका के लोकप्रिय असमिया गीतों में “मोइ एति जाजाबोर,” “बिस्तीर्ण पारेरे,” और “मानुहे मानुहोर बाबे” शामिल हैं। वहीं, हिंदी गीतों में उन्होंने “ओ गंगा बहती हो क्यों,” “समय ओ धीरे चलो” जैसे गीत दिए।

    समर हजारिका ने भूपेन हजारिका की संगीत विरासत को जीवित रखा और असमिया संस्कृति में संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन असम और भारत के संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है।

  • SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं

    SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के कारण हुई मौतों के आरोप अब बढ़ते जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न इलाकों से यह खबरें सामने आ रही हैं कि इस प्रक्रिया से जुड़े मानसिक दबाव और तनाव के कारण कुछ लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIR से जुड़ी चिंता के कारण राज्य में अब तक 77 मौतें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति गंभीर होती जा रही है, और इससे लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।

    कोलकाता के विभिन्न हिस्सों और अन्य जिलों से सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि SIR के नोटिस मिलने के बाद मानसिक तनाव और चिंता की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक मामला उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज क्षेत्र का है जहां 50 वर्षीय लक्ष्मीकांत राय की सोमवार को अचानक मौत हो गई। उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें हाल ही में SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस मिला था जिसके बाद वे गहरे मानसिक दबाव में थे। राय के बेटे हीरू राय ने कहा नोटिस मिलने के बाद से पापा खाना-पीना छोड़ चुके थे और काम पर भी नहीं जा रहे थे। उन्हें डर था कि उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है और इस कारण उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है।

    दूसरी घटना उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट इलाके की है जहां अनीता बिस्वास नामक बुजुर्ग महिला की स्ट्रोक के कारण मौत हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई में शामिल होने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं। अनीता की मौत के बाद उनके बेटे काशीनाथ बिस्वास ने बताया कि उनकी मां का नाम 1995 की मतदाता सूची में था लेकिन 2002 की सूची में उनका नाम गायब था। 5 जनवरी को दस्तावेज जमा करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से वह तनाव में रहने लगीं और अंतत स्ट्रोक के कारण उनकी मौत हो गई।

    इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता निताई वैश्य ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और इस प्रक्रिया को निरर्थक और दमनकारी बताया। वहीं बीजेपी युवा नेता गौरांग दास ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। पुलिस ने बताया कि इन मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल प्रशासन इस मुद्दे को लेकर कोई ठोस कदम उठाने में विफल नजर आ रहा है।

    कोलकाता में बूथ लेवल ऑफिसर कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया है और आरोप लगाया है कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई कर्मचारियों की भी मौत हो चुकी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़पों की भी खबरें आईं। इसने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया आम नागरिकों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है।

  • भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मौत, तीन घायल: दमोह में दो बाइकों की जोरदार भिड़ंत

    भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मौत, तीन घायल: दमोह में दो बाइकों की जोरदार भिड़ंत

    दमोह । मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें दो बाइकों के बीच जोरदार टक्कर से दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा 17 मिल के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार में चल रही दो बाइकों के बीच भिड़ंत हो गई। मृतकों की पहचान बिज्जू अहिरवार और जीतेंद्र साहू के रूप में की गई है।

    घटनास्थल पर पुलिस और 108 एम्बुलेंस की टीम ने तुरंत पहुंचकर घायलों को जिला अस्पताल दमोह भेजा। घायलों में से दामोदर अहिरवार की हालत गंभीर बताई गई है, और उन्हें इलाज के लिए जबलपुर रेफर कर दिया गया। अन्य दो घायलों का इलाज जिला अस्पताल में ही चल रहा है, और उनकी हालत स्थिर है।ड्यूटी डॉक्टर कौशिकी राजपूत ने बताया कि हादसे में तीनों घायलों को तुरंत भर्ती किया गया था।

    इनमें से एक की हालत गंभीर थी, जिसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया है। बाकी दो का इलाज जारी है और उनकी हालत अब स्थिर है। पुलिस इस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना जा रहा है।इस हादसे ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर किया है। हादसे के बाद से इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है, और पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ाने का संकल्प लिया है।

  • हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    पोलैंड। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर ने यहूदियों का जिस तरह से नरसंहार किया और उन्हें यातनाएं दीं, उसकी कहानी जाकर भी रूह कांप उठती है। दूसरे विश्वयुद्ध की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है जिसे ‘एनी फ्रैंक का धोखा’ नाम से जाना जाता है। एनी फ्रैंक होलोकॉस्ट में सबसे चर्चित पीड़ित थीं। उनके एक करीबी ने ही फ्रैंक को परिवार सहित धोखा देकर पकड़वा दिया था। उन्होंने एक डायरी लिखी जिसको बाद में ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ के नाम से प्रकाशित किया गया । मात्र 15 साल की उम्र में ही एनी की मौत हो गई। उनकी एक सौतेली बहन इवा स्क्लॉस की 96 साल की उम्र में सोमवार को मौत हो गई है। इवा स्क्लॉस भी लंबे समय तक हिटलर के बनाए ऑस्त्विच यातना शिविर में रहीं। हालांकि रूस के हमले के बाद वह बच गईं।

    मौत का दरवाजा
    जानकारी के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाजियों के यातना शिविरों में करीब 10 लाख लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज्यादातर यहूदी ही थे। ऑस्त्विच के यातना शिविर को ‘मौत का दरवाजा कहा जाता है। कहा जाता है कि नाजी लोग जब बंदियों को यातना शिविर में ले जाते थे तो उनके बाल तक काट लेते थे ताकि वे किसी भी तरीके से कपड़े ना बना सकें।

    एनी फ्रैंक की सौतेली बहन इवा लंदन में एनी फ्रैंक ट्रस्ट चलाती थीं। ब्रिटेन के महाराज किंग चार्ल्स थर्ड ने इस ट्रस्ट को बनाने में मदद की थी। हिटलर के यातना शिविर से बचने के बाद इवा ने ठान लिया था कि बाकी बचा हुआ जीवन वह लोगों की मदद करने और ऐसा काम करने में बिताएंगी जिससे नफरत कम हो और प्रेम को बल मिले।

    इवा का जन्म 1929 में विएना में हुआ था। ऑस्ट्रिया पर नाजियों के कब्जे के बाद वे भागकर ऐम्सटर्डम चले गए। वहीं इवा की दोस्ती एी से हुई थी। फ्रैंक की तरह इवा का परिवार भी दो साल तक यातना शिविर में रहा। 1945 में जब रूस की सेना ने शिविर से बंदियों को छुड़वाया तो इवा और उनकी मां की जान बच गई। उनके परिवार के बाकी लोग यातना शिविर में मारे गए थे। इवा के पिता भी ऑस्त्विच में ही मारे गए थे। 1953 में इवा की मां फ्रिजी ने एनी फ्रैंक के पिता से शादी कर ली। एनी फ्रैंक की मौत बेलसन बेलसन कैंप में पहले ही हो चुकी थी।

    इवा ने लगभग एक दशक तक यातना शिविर के बारे में किसी से बात ही नहीं की। वह युद्ध की उस विभीषिका से बाहर ही नहीं आ पा रही थीं। ऐसे में वह ज्यादातर चुप ही रहती थीं। 1986 में एनी फ्रैंक एग्जिबिशन शुरू होने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह नई पीढञी को नाजियों के अत्याचार के बारे में बताएँगी। इसके बाद उन्होंने यातना शिविर के बारे में बताना शुरू किया। इवा ने पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।

  • दिल्ली मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में लगी भीषण आगपति-पत्नी और बेटी की जलकर मौत

    दिल्ली मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में लगी भीषण आगपति-पत्नी और बेटी की जलकर मौत


    नई दिल्ली । दिल्ली के बाहरी इलाके के आदर्श नगर में स्थित दिल्ली मेट्रो के स्टाफ क्वार्टर में एक भयंकर आग लगने से एक ही परिवार के तीन सदस्य जलकर मर गए। यह दर्दनाक घटना बीती रात 2:39 बजे हुईजब दमकल विभाग को सूचना मिली कि डीएमआरसी के स्टाफ क्वार्टर में आग लग गई है। तुरंत बाद दमकल की छह गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईंलेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दमकल विभाग के अनुसारआग पांचवीं मंजिल पर लगी थी। जब उनकी टीम ने आग बुझाई और अंदर प्रवेश कियातो उन्होंने तीन जले हुए शव पाए।
    मृतकों की पहचान 42 वर्षीय अजय38 वर्षीय नीलम और उनकी 10 वर्षीय बेटी जान्हवी के रूप में हुई है। परिवार के अन्य सदस्य या कोई अन्य व्यक्ति मौके पर नहीं थाऔर यह तीनों एक कमरे में सो रहे थे जब यह दुर्घटना हुई।दमकल विभाग ने आग के कारणों के बारे में जानकारी दी है कि यह घरेलू सामान में आग लगने की सूचना थीलेकिन आग के स्रोत और कारण की पूरी जांच अभी की जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी हैऔर फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है ताकि आग लगने के कारणों का पता लगाया जा सके।

    इस दुखद घटना ने न केवल उस परिवार को नुकसान पहुँचायाबल्कि समूचे इलाके को भी झकझोर दिया है। लोग इस घटना के कारणों और सुरक्षा के मानकों पर सवाल उठा रहे हैं।यह घटना मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की आवश्यकता को भी उजागर करती है।दमकल विभाग और पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर लगातार जांच कर रहे हैं।

    वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह आग कोई शॉर्ट सर्किट या किसी और तकनीकी कारण से लगी थीया फिर यह कोई और कारण हो सकता है।फिलहालहादसे के बाद आसपास के लोगों और स्थानीय प्रशासन में भी चिंता का माहौल है। इस हादसे ने यह भी दिखाया कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आग जैसी घटनाओं से बचने के लिए और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत हैविशेष रूप से ऐसी इमारतों में जहां परिवार रहते हैं।

  • कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल

    कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल


    मंडला । मंडला जिले के चौकी पिंडरई क्षेत्र में शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें 21 वर्षीय युवक करण यादव की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब वह परीक्षा देने जबलपुर जाने के लिए बाइक से पिंडरई जा रहा था।

    घटना के अनुसार करण यादव बाइक पर अपने पिता बसंत यादव के साथ जा रहा था। जैसे ही वह तुमेगांव मंदिर के पास पहुंचे घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी पिकअप वाहन दिखाई नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि बाइक सीधे पिकअप वाहन से टकरा गई। हादसे के समय पिकअप वाहन पूरी तरह से खड़ा था और कोहरे के कारण करण को उसे देखने का मौका नहीं मिला।

    इस गंभीर हादसे में करण को बहुत गंभीर चोटें आईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके पिता बसंत यादव को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नैनपुर में भर्ती कराया गया।
    घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

    प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है लेकिन घना कोहरा और सड़क पर खड़ी गाड़ी को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
    अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है खासकर कोहरे जैसे मौसम में।

  • गुना में भीषण सड़क हादसा जन्मदिन समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकराई दो की मौत आठ घायल

    गुना में भीषण सड़क हादसा जन्मदिन समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकराई दो की मौत आठ घायल


    गुना । गुना जिले में मंगलवार रात करीब 2 बजे धरनावदा के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। एक फोर व्हीलर तेज गति से अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि कार में सवार 12 लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई जबकि आठ अन्य घायल हो गए।

    मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति

    मृतकों की पहचान लाल सिंह 37 निवासी उकाबद खुर्द और माया कंजर पत्नी रामदास निवासी बिलौरी चिंता कटारा के रूप में हुई है। वहीं घायल होने वालों में मोहन पुत्र बाबूलाल नरेंद्र लोधा चंचल बाई अरविंद लोधा फूल सिंह रायना बाई नगमा कंजर और रूप सिंह शामिल हैं।हादसा इतना गंभीर था कि वाहन की हालत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति का इलाज चल रहा है।

    हादसे के कारण और प्रशासन की कार्रवाई

    प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि कार की गति बहुत तेज थी और संभवत: चालक का संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस और प्रशासन ने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी घायलों का इलाज जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज गति और लापरवाही की वजह से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो रही है और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन को और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की अहमियत को उजागर करता है और यह बताता है कि सड़क पर चलने के दौरान हमें पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।

  • वायर खींचना: छोटे बच्चों का खेलते समय ढीले या खुले तारों को खींचना, जिससे उन्हें ज़ोरदार झटका लगता है।

    वायर खींचना: छोटे बच्चों का खेलते समय ढीले या खुले तारों को खींचना, जिससे उन्हें ज़ोरदार झटका लगता है।


    नई दिल्ली सर्दियों के मौसम में नहाने, कपड़े धोने या घरेलू कामों में हल्के गर्म पानी की जरूरत हर घर में होती है। इसी कारण कई लोग गीजर की जगह इमर्शन रॉड का उपयोग करते हैं क्योंकि यह किफायती होने के साथ-साथ आसानी से इस्तेमाल भी हो जाता है। लेकिन इसकी कीमत कम जरूर है पर ज़रा-सी लापरवाही जान तक ले सकती है।

    हाल ही में यूपी के हाथरस जिले के नगला चौबे गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां 3 साल की एक बच्ची खेलते-खेलते इमर्शन रॉड के तारों के संपर्क में आ गई और उसे जोरदार करंट लगा। अस्पताल पहुंचाने से पहले ही बच्ची की जान चली गई। इससे पहले देवरिया में भी एक महिला पानी गर्म करते समय करंट की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गई थी। ऐसे कई हादसे हर साल होते हैं, जिनकी वजह सिर्फ इमर्शन रॉड के गलत या असावधान इस्तेमाल होती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम समझेंगे-इमर्शन रॉड कितना खतरनाक हो सकता है इसे सुरक्षित तरीके से कैसे इस्तेमाल करें, और खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

    इमर्शन रॉड क्या होता है और कैसे काम करता है?
    इमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक हीटिंग डिवाइस है, जो स्टेनलेस स्टील या कॉपर की कॉइल से बना होता है। इसका एक सिरा पानी में डाला जाता है और दूसरा प्लग के जरिए बिजली से जुड़ता है। जैसे ही बिजली प्रवाहित होती है, कॉइल गर्म होकर पानी को गर्म करना शुरू कर देती है। 1000–1500 वॉट की रॉड आमतौर पर 5–10 मिनट में पानी को गर्म कर देती है। लेकिन हमेशा ध्यान रखें-रॉड हवा में चालू न हो, वरना यह ओवरहीट होकर जल सकती है। इमर्शन रॉड से होने वाले खतरे ।


    इमर्शन रॉड का सबसे बड़ा जोखिम है इलेक्ट्रिक शॉक।

    यदि रॉड में कट जंग या वायरिंग में खराबी हो तो करंट सीधे पानी में फैल सकता है। मेटल बाल्टी में रॉड का इस्तेमाल करंट लगने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। रॉड को पानी में डाले बिना चालू करने पर कॉइल जल सकती है और फटने तक की नौबत आ सकती है।  ओवरहीटिंग के कारण प्लास्टिक बाल्टी पिघल सकती है, जिससे गंभीर चोट या जलने की घटना हो सकती है।

    इमर्शन रॉड का उपयोग करते समय जरूरी सावधानियां ।


    कुछ सरल नियम आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। हमेशा रॉड को पानी में डूबोकर ही स्विच ऑन करें। रॉड चालू रहते समय पानी या बाल्टी को हाथ न लगाएं।
    बच्चों को इसके पास बिल्कुल न जाने दें। मेटल बाल्टी का उपयोग बिल्कुल न करें, प्लास्टिक बाल्टी ही इस्तेमाल करें। रॉड चालू होने पर हाथ गीले न हों और न ही गीली सतह पर खड़े हों।  पानी गर्म होने के बाद पहले प्लग निकालें, फिर ही रॉड को बाहर निकालें।

    अगर करंट लग जाए तो क्या करें?

    सबसे पहले घर का मेन स्विच ऑफ करें। प्रभावित व्यक्ति को हाथ से छूकर न बचाएं। लकड़ी या प्लास्टिक की किसी वस्तु से अलग करें। व्यक्ति बेहोश हो तो तुरंत CPR दें और एम्बुलेंस बुलाएं।
    करंट का झटका दिल की धड़कन रोक सकता है, इसलिए मेडिकल सहायता तत्काल जरूरी है।

    इमर्शन रॉड खरीदते समय किन चीजों पर ध्यान दें? 

    ISI या BIS सर्टिफिकेशन जरूर देखें। यह सुरक्षा मानकों की पुष्टि करता है। वायर की गुणवत्ता मजबूत होनी चाहिए। पतला या ढीला वायर दुर्घटना की वजह बनता है। पावर रेटिंग 1000–1500 वॉट घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त है। मटेरियल स्टेनलेस स्टील या कॉपर की रॉड ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ होती है। थ्री-पिन प्लग और वाटरप्रूफ हैंडल होना चाहिए। इंडिकेटर लाइट से पता चलता है कि रॉड चालू है या नहीं। भरोसेमंद ब्रांड और कम-से-कम एक साल की वारंटी देखें। ऑनलाइन यूजर रिव्यू पढ़कर प्रोडक्ट की विश्वसनीयता जरूर जांचें।

    इमर्शन रॉड की सफाई और देखभाल ।


    हर 10–15 दिनों में कॉइल पर जमी सफेद परत को साफ करें। इसके लिए रॉड को नींबू के रस या सिरके में 20–30 मिनट भिगो दें और फिर ब्रश से हल्के हाथ से साफ करें। रॉड को हमेशा सूखा करके ही स्टोर करें और समय-समय पर प्लग तथा वायर की जांच करते रहें। कुछ आम सवाल-संक्षिप्त जवाब रॉड को चालू छोड़कर कहीं न जाएं-यह बेहद खतरनाक है। रॉड बिना पानी के चालू करना बिल्कुल गलत है। स्विच ऑफ करने के बाद 10 सेकंड रॉड को पानी में रहने दें। मेटल बाल्टी में रॉड कभी न इस्तेमाल करें। प्लास्टिक बाल्टी सुरक्षित है लेकिन ओवरहीटिंग से बचें।पुरानी रॉड को हर सीज़न शुरू होने से पहले टेक्नीशियन से चेक कराएं।थोड़ी सतर्कता और सही तरीके से उपयोग आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इमर्शन रॉड सुरक्षित है बस सावधानी अनिवार्य है।