न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने डॉक्टरों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय फिल्म निर्माता एम एम मूवीज और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वरुण सिंह ने अदालत से फिल्म के टीजर के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने फिलहाल इस मांग पर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।
यह याचिका चार डॉक्टरों ने दाखिल की है। इनमें डॉ. निशांत सोनी डॉ. आशीष तोमर डॉ. रवि भाटिया और डॉ. शिवम वत्सल शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग कॉर्पोरेट अस्पतालों में प्रैक्टिस करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म के टीजर में निजी अस्पतालों और वहां काम करने वाले डॉक्टरों को लेकर ऐसे आरोप दिखाए गए हैं जिनसे पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि पहले से ही मरीजों के नाराज परिजनों की ओर से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे माहौल में इस तरह की सामग्री स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
डॉक्टरों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि टीजर में एक निजी अस्पताल को दिखाया गया है जहां ब्रेन स्टेम डेथ घोषित होने के बाद एक युवती के अंगदान के लिए सहमति लेने की प्रक्रिया दिखाई गई है। इसके अलावा डॉक्टरों पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने अनावश्यक जांच करवाने और कमीशन लेने जैसे आरोपों को भी फिल्म में दिखाए जाने पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना पर्याप्त पुष्टि के इस तरह की सामग्री प्रसारित करना मानहानिकारक हो सकता है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि संबंधित अधिकारी फिल्म के टीजर की जांच करें और जांच पूरी होने तक इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने या ब्लॉक करने के निर्देश दिए जाएं।
इस विवाद के पीछे फिल्म की कहानी को लेकर भी चर्चा हो रही है। याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सूर्या मलयालम फिल्म जोसेफ का हिंदी रूपांतरण है। साल 2018 में रिलीज हुई जोसेफ का निर्देशन एम पद्मकुमार ने किया था। इसकी कहानी एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के इर्दगिर्द घूमती है जो निजी अस्पतालों में कथित अंग तस्करी से जुड़े एक रैकेट का पर्दाफाश करता है। कहानी में ब्रेन स्टेम डेथ के गलत प्रमाणपत्र के जरिए अंग निकालने जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया गया था।
फिलहाल इस पूरे मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। ऐसे में अब सबकी नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। एक तरफ फिल्म की रिलीज नजदीक है तो दूसरी तरफ डॉक्टरों की आपत्तियों ने इसके टीजर को लेकर बहस तेज कर दी है। अब देखना होगा कि अदालत में सुनवाई के बाद फिल्म के निर्माताओं और संबंधित अधिकारियों का क्या पक्ष सामने आता है।









