Tag: Delhi Police

  • PM मोदी और उनकी मां के AI वीडियो पर दिल्ली पुलिस सख्त, बिहार कांग्रेस को नोटिस जारी

    PM मोदी और उनकी मां के AI वीडियो पर दिल्ली पुलिस सख्त, बिहार कांग्रेस को नोटिस जारी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां से जुड़े AI वीडियो के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल ने इस मामले में बिहार कांग्रेस को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि विवादित वीडियो कांग्रेस के बिहार स्थित आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @INCBihar से पोस्ट किया गया था।

    जांच के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम पटना पहुंची। टीम ने बिहार कांग्रेस मुख्यालय ‘सदाकत आश्रम’ के बाहर नोटिस चस्पा किया है। पुलिस इस मामले से जुड़े एक मोबाइल नंबर की भी जांच कर रही है, जिसके बिहार कांग्रेस से संबंधित होने की बात सामने आई है।

    अमित कुमार मंडल को 5 नवंबर को दिल्ली बुलाया

    दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस में अमित कुमार मंडल को विशेष रूप से तलब किया गया है। उन्हें जांच में शामिल होने के लिए 5 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के भरत नगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल के कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

    सिम कार्ड और मोबाइल फोन भी लाने के निर्देश

    नोटिस के मुताबिक, अमित कुमार मंडल को पूछताछ के दौरान कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साथ लाने होंगे। पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबर का सिम कार्ड और 1 जुलाई 2025 से अब तक इस्तेमाल किए गए उन सभी मोबाइल हैंडसेट को पेश करने के लिए कहा है, जिनमें इस नंबर का उपयोग किया गया हो।

    इसके अलावा पुलिस ने @INCBihar एक्स हैंडल का आधिकारिक रूप से इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का नाम भी मांगा है। साथ ही 1 जुलाई 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच इस एक्स अकाउंट के संचालन के लिए अधिकृत लोगों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।

  • अमृतसर से हथियार, ट्रेन से मुंबई और फिर फायरिंग, टाइगर श्रॉफ केस में लॉरेंस गैंग के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

    अमृतसर से हथियार, ट्रेन से मुंबई और फिर फायरिंग, टाइगर श्रॉफ केस में लॉरेंस गैंग के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा


    नई दिल्ली। मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो युवकों और दो महिलाओं को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाएं कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए कुरियर का काम करती थीं और ट्रेन से पिस्तौल लेकर मुंबई पहुंची थीं। इस मामले में पहले ही तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक कुल सात आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार किसके निर्देश पर जुटाए गए और फायरिंग की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों से इनका संपर्क कैसे हुआ।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल सुमित राधा और बबिता के रूप में हुई है। कुणाल की उम्र 21 साल और सुमित की उम्र 19 साल बताई गई है। दोनों हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। वहीं 23 वर्षीय राधा उत्तर प्रदेश के सीतापुर और 23 वर्षीय बबिता आजमगढ़ की निवासी है। पुलिस के अनुसार हथियारों की व्यवस्था करने में कुणाल की अहम भूमिका थी। वह हाल ही में जेल से जमानत पर बाहर आया था। एक दोस्त के माध्यम से उसकी पहचान अनिल पंडित से हुई थी। इसके बाद दोनों कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत करने लगे। जांच में सामने आया कि अनिल पंडित के निर्देश पर कुणाल अमृतसर गया और वहां से एक पिस्तौल तथा 20 कारतूस जुटाए।

    पुलिस के मुताबिक हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए कुणाल ने राधा को तैयार किया। करीब दो महीने पहले दोनों की मुलाकात हुई थी। इसके बाद कुणाल ने उसे अपनी गतिविधियों के बारे में बताया और पिस्तौल लेकर मुंबई जाने के लिए राजी किया। 15 अक्टूबर 2026 को कुणाल राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा। दोनों महिलाएं ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हुईं। पिस्तौल राधा के बैग में रखी गई थी और सफर के दौरान कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए उनके संपर्क में रहा।

    जांच के अनुसार 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएं मुंबई के दादर स्टेशन पहुंचीं और एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास आया और राधा से बैग लेकर चला गया। उस बैग में पिस्तौल होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैग लेने वाला नाबालिग किसके संपर्क में था और हथियार आगे किसे सौंपा गया। फिलहाल वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद नहीं हुई है।

    इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर कई राउंड फायरिंग की गई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल खेलने के बाद लौट रहे थे। इस दौरान उनकी कार को निशाना बनाया गया। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से एक पोस्ट भी सामने आई थी लेकिन उसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस के मुताबिक फायरिंग के बाद हमलावरों को मुंबई से बाहर निकालने की कोशिश भी की गई थी। इसी मामले में राजस्थान के कोटा से पहले तीन संदिग्धों रेहान उर्फ सुक्का ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और एक नाबालिग को पकड़ा गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने आशंका जताई थी कि फायरिंग का मकसद अभिनेता को डराना था। हालांकि मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। चार नई गिरफ्तारियों के बाद अब पुलिस हथियार जुटाने से लेकर मुंबई पहुंचाने फायरिंग और आरोपियों को बाहर निकालने की कथित योजना तक सभी कड़ियों को जोड़ रही है। 

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत में देरी पर विवाद, पुलिस ने आरोप नकारे, गलत बॉन्ड जमा करने की बात कही

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत में देरी पर विवाद, पुलिस ने आरोप नकारे, गलत बॉन्ड जमा करने की बात कही


    नई दिल्ली ।
    सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत प्रक्रिया में देरी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद सामने आया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया जानबूझकर धीमी की गई और चार जमानतदारों की गारंटी बिना स्पष्ट कारण बताए खारिज कर दी गई। पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट पर भी निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जमानत के लिए गलत बॉन्ड जमा किए जा रहे थे, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। पुलिस के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

    सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, वह सुबह 11 बजे से मंदिर मार्ग थाने में मौजूद थीं। उन्हें बताया गया था कि जमानत से संबंधित सुनवाई दोपहर 12 बजे होगी। उनका दावा है कि जमानत की लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट शाम 4 बजकर 42 मिनट तक थाने नहीं पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि शाम 5 बजे तक मजिस्ट्रेट अदालत कक्ष में नहीं आए और वहां पहुंचने के बाद भी जमानत के मामले पर सुनवाई नहीं की गई।

    रत्ना सिंह ने प्रक्रिया में देरी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी वकील पिछले चार दिनों से उपस्थित नहीं हो रहे थे, लेकिन संबंधित दिन वह मौजूद थे। उनके मुताबिक, कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट के भीतर ही विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अदालत को बताया कि उन्हें धमकी भरा संदेश मिला है। इसके बाद पूरी चर्चा धमकी के मुद्दे पर केंद्रित हो गई।

    सीजेपी की लीगल हेड का आरोप है कि इस घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत हुआ कि जमानत की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई के सवाल पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में हुई देरी से वह निराश हैं। हालांकि, जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डालने के पार्टी के आरोपों को पुलिस ने स्वीकार नहीं किया है।

    पार्टी ने यह भी कहा कि यदि आशुतोष रांका और सौरभ दास को अगले दिन तक रिहा नहीं किया गया, तो वह उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी, जिन पर दोनों नेताओं को अवैध हिरासत में रखवाने का आरोप है। सीजेपी के अनुसार, इस मामले में उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से भी कानूनी सलाह ली है। पार्टी का कहना है कि जमानत प्रक्रिया में हुई देरी को लेकर वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

    दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पार्टी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जमानत के लिए ऐसे बॉन्ड जमा किए जा रहे थे, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता था। अधिकारी के मुताबिक, पुलिस के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है और गलत जमानत बॉन्ड के आधार पर रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।

    पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि रविवार को जमानत प्रक्रिया की सुनवाई के दौरान विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने धमकी भरे संदेश मिलने की जानकारी दी थी। अधिकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने कहा कि ऐसी धमकियों और जोखिम के बीच काम करना मुश्किल है। पुलिस ने इसी परिस्थिति को सुनवाई में देरी की वजह बताया है। अधिकारी ने यह भी कहा कि धमकी से संबंधित मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी जांच की जा रही है।

    इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। सीजेपी जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी और अपने नेताओं को हिरासत में रखे जाने का आरोप लगा रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि गलत बॉन्ड जमा होने और मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। फिलहाल विवाद जमानत संबंधी औपचारिकताओं, सुनवाई में देरी और धमकी के आरोपों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव

    पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव


    नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार तड़के रिहा कर दिया। रिहाई के बाद नेहा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को दिन या शाम के समय हिरासत में लेकर पूरी रात रखा जाता है और अगले दिन छोड़ा जाता है।

    दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को 16 अक्टूबर की शाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया था। पूरी रात हिरासत में रहने के बाद शनिवार सुबह उन्हें रिहा किया गया।

    ‘किस कानून के तहत पूरी रात हिरासत में रखना जायज?’

    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में नेहा बोरा ने कहा कि हर तरह से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से ऐसा चलन बना हुआ है, जिसमें लोगों को दिन हो या शाम, कभी भी हिरासत में ले लिया जाता है और पूरी रात रखने के बाद अगले दिन सुबह या शाम को छोड़ा जाता है।

    नेहा ने सवाल उठाया कि किस अधिकार, कानून या आदेश के तहत किसी व्यक्ति को पूरी रात हिरासत में रखना उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक सूर्यास्त के बाद महिलाओं को हिरासत में लेने पर प्रतिबंध संबंधी नियम हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी कार्रवाई हो रही है।

    ‘अराजकता का नैरेटिव फैलाने वाले पहले खुद देखें’

    नेहा बोरा ने दिल्ली में यातायात और आम लोगों की आवाजाही को लेकर भी पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अराजकता और अव्यवस्था का नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर अराजकता कैसी और किसकी ओर से फैलाई जा रही है?

    उन्होंने आरोप लगाया कि सेंट्रल दिल्ली में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और काम पर जाने के लिए चुने जाने वाले रास्ते बंद मिलते हैं। नेहा ने कहा कि पूरे देश में अव्यवस्था का माहौल बनाया जा रहा है और आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए।

    ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग और SIR रोकने की मांग

    AISA अध्यक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी मांग दोहराई। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की मांग की।

    नेहा ने कहा कि ऐसा होने से आम नागरिक चैन से रह सकेंगे और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। यह मांग CJP के प्रस्तावित मार्च और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में उठाई गई।

    ‘5-6 घंटे तक वकील से संपर्क की कोशिश करती रही’

    नेहा बोरा ने हिरासत के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और अन्य जानकारियां मांगीं, लेकिन काफी देर तक उन्हें अपनी बात रखने या किसी वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई।

    उन्होंने कहा कि उनके वकील 5-6 घंटे तक उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे। बाद में किसी तरह फोन पर संपर्क हो पाने के बाद ही वकील को उनसे मिलने की अनुमति मिली। नेहा ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई लंबे समय से की जा रही है।

    फिलहाल, हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और कानूनी प्रक्रिया को लेकर नेहा बोरा की ओर से लगाए गए आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान

    सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान


    नई दिल्ली।
    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ सीजेपी से जुड़े सौरभ दास आशुतोष रांका रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। शिकायत दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की ओर से दर्ज कराई गई है। आरोप है कि एसीपी के संबंध में अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी से जुड़े नेताओं और पुलिस के बीच विवाद पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को जंतर मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब एससी एसटी एक्ट के तहत नया मामला दर्ज होने से पार्टी से जुड़े लोगों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं और तिरंगा फहराएं। दीपके ने यह भी अपील की कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते वे अपने शहरों में भी तिरंगा फहराएं। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जेल जाने की संभावना से उन्हें चिंता नहीं है। प्रस्तावित मार्च को लेकर अब प्रशासन की व्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रहेगी।

    इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लगाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र समूह है और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

    विदेशी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर भी दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के इस दावे पर कि भारत में हाल के कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है उन्होंने कहा कि यदि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। फिलहाल सीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले और प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

  • CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप

    CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली पुलिस पर अपने दो पदाधिकारियों को हिरासत में लेने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को रविवार शाम कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था। पार्टी का दावा है कि इसके बाद से दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष इन आरोपों से अलग है।

    इस बीच, सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन की तारीख बताने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इससे पहले शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।

    रत्ना सिंह ने पुलिस से मांगी जानकारी

    सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दोनों पदाधिकारियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को शाम के समय कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था, लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

    रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि दोनों को हिरासत में रखने की वजह और उनके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह बताने की मांग की कि दोनों को कहां रखा गया है और उनके मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि कानून से ऊपर उठकर काम करना।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप

    पार्टी के शीर्ष नेताओं में शामिल सौरभ दास ने भी दोनों पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दोनों को हिरासत में लिया गया और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। दास के अनुसार, बालकृष्णन के भाई को भी उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है।

    दास ने आरोप लगाया कि दोनों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उनका दावा है कि उन्हें न तो परिवार के सदस्यों से बात करने दी जा रही है और न ही अपनी पसंद का वकील उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि दोनों के ठिकाने की जानकारी तत्काल नहीं दी गई, तो पार्टी के वकील अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।

    ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। इनके संबंध में पुलिस का विस्तृत पक्ष इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आवश्यक है।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का इंतजार

    सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि पार्टी दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की तारीख पूछ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस जल्द तारीख तय करेगी। रांका के मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर प्रदर्शन के लिए जुटेगी।

    उन्होंने राजधानी में पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली को जिस तरह बंद किया गया है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उनके अनुसार, इससे लोगों और कारोबारियों को परेशानी हो रही है, जबकि त्योहारों का समय भी नजदीक है। उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन के लिए कोई निर्धारित स्थान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

    ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा’

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन के लिए जगह नहीं दी गई, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।

    दीपके ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात जारी रहने पर एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब देश से लोकतंत्र को ही हटा दिया जाए। वहीं, सौरभ दास ने कहा कि सरकार का जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है और पार्टी इसे मनमाना मानती है।

    दादी के निधन के बाद दीपके की हिरासत पर भी विवाद

    शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया था। कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। दादी के निधन की खबर मिलने के बाद वह अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर रवाना हो गए थे।

    दीपके ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनकी दादी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी उन्हें रिश्तेदार को फोन करने के लिए मोबाइल उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने पुलिस पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।

    दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

    दिल्ली पुलिस ने दीपके के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी डीसीपी नेहा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो फुटेज दिखाते हुए कहा कि दीपके को उनकी दादी के निधन और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी समय पर और संवेदनशीलता के साथ दी गई थी।

    पुलिस के अनुसार, दीपके को परिवार से फोन पर बात करने का विकल्प दिया गया था। इसके अलावा अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गृह नगर जाने हेतु प्रशासनिक और यात्रा संबंधी सहायता की पेशकश भी की गई थी। पुलिस का दावा है कि दीपके ने इस पेशकश को स्वीकार नहीं किया।

    इस तरह, सीजेपी जहां अपने दो पदाधिकारियों के ठिकाने और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दीपके की हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस ने पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।

  • CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय

    CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शनकारियों की संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 35 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थान भी चिह्नित किए हैं।

    हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 स्थान तय

    पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए पहले से तैयारी की गई है। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थानों का चयन किया गया है। ये स्थान नई दिल्ली से दूर और राजधानी के बाहरी इलाकों में स्थित हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन स्थानों में मॉडल टाउन स्थित छत्रसाल स्टेडियम, न्यू पुलिस लाइन, बवाना का राजीव गांधी स्टेडियम, नांगलोई का सूरजमल स्टेडियम और दक्षिण दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम तथा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम शामिल हैं। इन स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    कनॉट प्लेस के पास कुछ प्रदर्शनकारी हिरासत में

    समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शनिवार को कनॉट प्लेस इलाके में जनपथ के पास कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

    पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ऐसे लोगों पर भी नजर रख रही है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है या जिन पर लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है।

    जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    CJP के दोबारा प्रदर्शन के ऐलान के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।

    केंद्र सरकार की ओर से भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अनधिकृत जमावड़े को रोकना है।

    प्रदर्शन से पहले हिरासत केंद्रों की व्यवस्था, पुलिस बल की तैनाती और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाए जाने से राजधानी में सुरक्षा इंतजाम चर्चा में हैं।

  • प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक और FIR दर्ज की है। इस मामले में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप है। यह इस प्रदर्शन को लेकर दर्ज की गई दूसरी FIR है। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी बिना अनुमति आकाशवाणी भवन के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों की इस कोशिश के दौरान वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम में आकाशवाणी भवन के दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। दोनों का मेडिकल कराया गया है। पुलिस ने प्रदर्शन वाली जगह और भवन परिसर की तस्वीरें भी जुटाई हैं। इसके अलावा कुछ दीवारों को नुकसान पहुंचने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।

    FIR में सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े आरोपों को शामिल किया गया है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। आकाशवाणी भवन में प्रवेश की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और परिसर में हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के अलावा कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम दर्ज किए गए हैं।

    नई FIR को लेकर राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले ही 45 FIR दर्ज हैं और उनके लिए हर FIR एक “मेडल” की तरह है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

    चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है। विपक्षी नेता SIR से जुड़े मुद्दों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। अब दूसरी FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। इस मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए फोटो और अन्य जानकारी जांच का हिस्सा हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर के पास कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के सामने कई मोबाइल वीडियो और अन्य फुटेज आए हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शन के दौरान किन लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी या मारपीट हुई। इन वीडियो के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के साथ घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी देख रही है कि घटना की शुरुआत किस तरह हुई और अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान क्या-क्या हुआ। सामने आए वीडियो में महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के दृश्य होने की बात कही गई है। पुलिस अन्य माध्यमों से मिले वीडियो और फुटेज की भी जांच कर रही है, ताकि घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया जा सके और कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान की जा सके। मौजूदा जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की उन धाराओं के तहत FIR दर्ज होने की संभावना है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, उनके काम में बाधा डालने और ड्यूटी के दौरान उन्हें रोकने जैसे अपराध शामिल हैं। इस कार्रवाई से पहले पुलिस अलग-अलग वीडियो फुटेज का मिलान कर रही है। जांच का मुख्य फोकस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं तथा उनमें शामिल लोगों की पहचान पर है।

    यह मामला 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। विपक्षी नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने पुलिस बैरिकेड पार करके जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। राहुल गांधी ने बैरिकेड से लगे गेट को खोलने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया और कहा कि कई विपक्षी नेता घायल हुए। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन के दौरान जमीन पर लेटी हुई नजर आईं। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी करने और जमीन पर गिराने का आरोप लगाया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग से जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस की ओर से सामने आए मामलों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और ड्यूटी में बाधा डालने से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है। इससे पहले 6 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर भी दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार, INDIA ब्लॉक ने संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च की योजना बनाई थी, लेकिन इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।

  • PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ

    PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ


    नई दिल्ली।
    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने पिछले महीने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) (‘Cockroach Janata Party’ – CJP) के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को गंदी-गंदी गालियां देने की आरोपी नाबालिग लड़की पर कोई केस दर्ज नहीं करने का फैसला किया है। इस लड़की का वीडियो सोशल मीडिया में खूब तेजी से वायरल हुआ था। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस सूत्रों ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी।

    नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द कहने की आरोपी नाबालिग लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर दिल्ली पुलिस को भेज दी थी। एफआईआर में उसकी उम्र 25 साल बताई गई थी। हालांकि उस लड़की ने बाद में एक वीडियो में माफी मांगते हुए बताया था कि वह अभी 15 साल की है और उसने विरोध प्रदर्शन में शामिल दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ये टिप्पणियां की थीं।


    ‘खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही, मुझे माफ कर दीजिए’

    हाल ही में उसने एक वीडियो में कहा था, “मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो कुछ भी किया, वो माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत-सी गलत बातें कही हैं। यह मेरी पहली और आखीरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।”


    पीएम मोदी ने प्रदर्शन में शामिल बच्चों को किया माफ

    प्रदर्शनकारियों पर नरमी बरतने की अपीलों के बीच इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले शुक्रवार को एक इंस्टाग्राम वीडियो मैसेज के माध्यम से कहा कि उन्होंने उन सभी भटके हुए बच्चों को माफ कर दिया है जिन्होंने उन्हें गालियां दीं और अपशब्द कहे थे।

    पीएम मोदी में कहा कि उन्हें सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने और परेशान करने से हालात नहीं बदलेंगे। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। मैं समाज से भी गुजारिश करता हूं कि वे मेरी बात को स्वीकार करें।


    लड़की की मां ने PM से की थी ये अपील

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बच्चों को माफ करने संबंधी वीडियो जारी किए जाने के बाद आरोपी नाबालिग लड़की की मां ने उनसे अपील की थी कि वे अधिकारियों को उनकी बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश दें। मां ने कहा कि पीएम ने देश की एक बेटी को माफ करके बड़प्पन दिखाया है, जिसने बहुत ही गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया था। मैं हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद करती हूं। आज उसका नया जन्म हुआ है। प्रधानमंत्री ने उसे जीवनदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश करती हूं कि कृपया उसके खिलाफ गलत नाम और उम्र के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करा दें, अब वह आपकी शरण में है।