Tag: Delhi Police

  • रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद

    रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद


    नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रोहिणी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक कलयुगी पिता को ‘प्राकृतिक जीवन के अंत’ यानी आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने इस अपराध को समाज की अंतरात्मा पर आघात बताते हुए दोषी पिता पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता-पुत्री का रिश्ता सबसे पवित्र होता है, लेकिन दोषी ने अपनी क्रूरता से इस भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता की मां ने घर छोड़ दिया और दूसरा विवाह कर लिया। इसके बाद सुरक्षा देने के बजाय पिता ही भक्षक बन गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2021 की रात पिता ने पहली बार अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। डरी-सहमी पीड़िता ने जब अपनी सगी बुआ को इस आपबीती के बारे में बताया, तो वहां से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। बुआ ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मामले को दबाने और छिपाने का प्रयास किया। अंततः मई 2021 में जब पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी घटना बताई, तब जाकर पुलिस में मामला दर्ज हुआ और इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की बुआ के व्यवहार पर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि बुआ ने अपराध की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाया, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 21 ,1 के तहत गंभीर अपराध है। हालांकि, बुआ के दो छोटे बच्चों और उसकी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने उसे जेल भेजने के बजाय 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

    अदालत में विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने दलील दी कि ऐसे अपराधी किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में नजीर पेश करे। बचाव पक्ष ने आरोपी के पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने और जेल में अच्छे आचरण का हवाला देकर रियायत की मांग की थी, जिसे न्यायाधीश ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 42 का संदर्भ देते हुए दोषी को धारा 6 के तहत अधिकतम दंड यानी ताउम्र कैद की सजा से दंडित किया। यह फैसला संदेश देता है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों पर न्याय प्रणाली का रुख बेहद कड़ा और समझौताविहीन रहेगा।

  • ED के छापों के बाद कोलकाता से दिल्ली तक सियासी बवाल, TMC के 8 सांसद अमित शाह के दफ्तर के बाहर हिरासत में

    ED के छापों के बाद कोलकाता से दिल्ली तक सियासी बवाल, TMC के 8 सांसद अमित शाह के दफ्तर के बाहर हिरासत में


    नई दिल्ली । कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर ईडी की छापेमारी के बाद राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है। यह छापेमारी पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टीके बीच राजनीतिक संघर्ष को और गहरा कर दिया है। इस पर टीएमसी और बीजेपी दोनों ही पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।

    TMC के सांसदों ने मंगलवार, 9 जनवरी को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया, विरोध जताने के लिए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए सांसदों ने ईडी की कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। इस दौरान TMC के प्रमुख नेताओं में से डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने टीएमसी के नेताओं, डेरेक ओ’ब्रायन और महुआ मोइत्रा को हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कुल आठ सांसदों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन उन्हें माहौल को देखते हुए बाद में रिहा कर दिया गया।

    महुआ मोइत्रा ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, यह हमारे साथ अन्याय हो रहा है। हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किसी के सामने झुकने वाली नहीं हैं। गृह मंत्रालय ने ईडी का गलत इस्तेमाल किया है। ईडी को हमारी पार्टी की राजनीतिक और रणनीतिक जानकारी चुराने के लिए भेजा गया था। ममता बनर्जी शेरनी हैं और उन्होंने हमारी पार्टी की प्रॉपर्टी की रक्षा की है। हम बीजेपी को हराकर दिखाएंगे।

    TMC सांसद शताब्दी रॉय ने भी तीखा हमला करते हुए कहा, कल पूरी दुनिया ने देखा कि गृह मंत्रालय ने ईडी का गलत इस्तेमाल किया। ये सिर्फ चुनाव जीतने के लिए अपनी एजेंसियों को भेजते हैं, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सकते। वहीं, कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि BJP ने ग्यारह साल तक सही टेंडर जारी नहीं किए और अपनी पार्टी के लोगों को काम देकर उन्हें लूटने का मौका दिया।

    टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकतंत्र को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल कर रही है और यह सब असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है। TMC नेताओं का कहना है कि ईडी की छापेमारी को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, खासकर चुनावों से पहले। गौरतलब है कि ईडी ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े धनशोधन की जांच के तहत कोलकाता स्थित आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी। इसके बाद टीएमसी सरकार पर आरोप लगाते हुए लगातार हमलावर हो गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक मैदान को और भी गरम कर दिया है, और दोनों प्रमुख दलों के बीच आगामी विधानसभा चुनावों में संघर्ष तेज हो गया है।

  • तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था

    तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था


    नई दिल्ली। बीतीरात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुए बवाल मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम आया है। पुलिस उनसे पत्थरबाजी के इस मामले में पूछताछ करेगी। मोहिबुल्लाह नदवी कहा कि मेरी जानकारी में हाईकोर्ट का ऐसा कोई ऑर्डर नहीं है, जिसमें अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया हो। अभी बात ही चल रही थी कि कितना मस्जिद का एरिया है और कितना अतिक्रमण हुआ है। या अतिक्रमण नहीं भी हुआ है।
    इसी दरमियान रात में मुझे खबर मिली कि मस्जिद को घेर लिया गया है।

    बवाल वाली जगह क्यों पहुंचे थे सपा सांसद?
    सपा सांसद ने आगे कहा, ‘इससे पहले महरौली में एक मस्जिद रातोंरात गायब कर दी गई थी। उसके लिए मैंने संसद में भी आवाज उठाई थी। तुर्कमान गेट वाली खबर मैंने सुनी तो सोचा कि लोग कहीं बेकाबू ना हो जाएं, इसलिए मैं मौके पर पहुंचा था। मैं जब वहां गया तो लोगों से अपील की कि अपने-अपने घरों में जाएं। एक वीडियो भी हैं, जिसमें मैं लोगों से शांत रहने के लिए कह रहा हूं।’

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पत्थरबाजी क्यों?
    गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात दिल्ली पुलिस और MCD की टीम, तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची थी।

    तभी मौके पर उन्मादियों की भीड़ पहुंच गई और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी।

    दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों पर की FIR
    पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। अबतक 5 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए दंगाइयों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जब इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी, उस वक्त अफवाह फैला दी गई कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है।

    यही बोलकर लोगों को जमा किया गया और फिर बवाल हो गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। वहीं, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का कहना है कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और न ही किसी को हिंसा के लिए उकसाया। उनका दावा है कि वे सिर्फ शांति बनाए रखने और हालात को काबू में रखने के उद्देश्य से वहां पहुंचे थे। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
  • डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी

    डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक नया ठगी का तरीका अपनाया, जिसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है। अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह घटना बुजुर्ग व्यक्ति बसंत कुमार मैदमवार 80 के साथ हुई, जो एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर 2025 को फरियादी को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें स्क्रीन पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है जिसे ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा।

    डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी और बार-बार वीडियो कॉल्स से भयभीत हो गए बुजुर्ग बसंत कुमार से ठगों ने उनके बैंक खातों की “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। फरियादी ने कई बार अपने बैंक खातों से रकम ट्रांसफर की, और इस प्रक्रिया में कुल 23.50 लाख रुपये की ठगी हो गई। जब दो दिसंबर को बसंत कुमार गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने इस मामले को साइबर ठगी का मामला बताया। इसके बाद, उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया।

    यह ठगी का तरीका साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और तकनीकी ज्ञान को दर्शाता है। वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस अधिकारियों के द्वारा बनाई गई डर की स्थिति का फायदा उठाकर बुजुर्गों और अन्य असुरक्षित लोगों को ठगना अब सामान्य होता जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। यह घटना एक चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक सक्रिय नहीं होते। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कभी भी किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।