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  • 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का पावन महीना, जानिए कब पड़ेंगे चारों सावन सोमवार

    30 जुलाई से शुरू होगा सावन का पावन महीना, जानिए कब पड़ेंगे चारों सावन सोमवार


    नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना और भक्ति का सबसे पवित्र माने जाने वाला सावन माह इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। हिंदू धर्म में इस महीने का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि पूरा सावन भगवान भोलेनाथ की उपासना को समर्पित माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त व्रत, पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    सावन में चार सोमवार का रहेगा विशेष संयोग
    सावन के सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और नियमपूर्वक सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। वर्ष 2026 के सावन माह में कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

    सावन सोमवार की तिथियां इस प्रकार हैं:

    प्रथम सोमवार – 3 अगस्त 2026
    द्वितीय सोमवार – 10 अगस्त 2026
    तृतीय सोमवार – 17 अगस्त 2026
    चतुर्थ सोमवार – 24 अगस्त 2026

    क्यों खास माना जाता है सावन?
    सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मिक शांति का भी प्रतीक माना जाता है। वर्षा ऋतु के बीच हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए अनुकूल माना जाता है। पूरे महीने शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और श्रद्धालु जल, दूध, दही, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा तथा चंदन अर्पित कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।

    पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
    सावन में सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस दौरान तामसिक भोजन से परहेज करते हैं और सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान शिव का ध्यान करते हैं। कई भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं, जबकि कुछ फलाहार ग्रहण कर व्रत का पालन करते हैं।

    पूजा के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही शिव चालीसा का पाठ और रुद्राभिषेक करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

  • बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व

    बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व


    नई दिल्ली। खाटूश्यामजी के विश्वप्रसिद्ध मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने उत्तर पश्चिम रेलवे की कमाई में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। निर्जला एकादशी और द्वादशी के मेले के साथ-साथ वीकेंड की छुट्टियों के चलते रींगस रेलवे स्टेशन जंक्शन पर यात्रियों का अभूतपूर्व दबाव देखने को मिला। इसी अवधि में रेलवे को रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई है।

    रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में करीब 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ट्रेन से यात्रा की, जिससे रींगस स्टेशन को ₹1.25 करोड़ से अधिक की आय हुई है।

    ट्रेनों में भारी भीड़, यात्रियों की बढ़ी संख्या

    रींगस स्टेशन अधीक्षक बाबूलाल बाजिया के अनुसार, बाबा श्याम के दर्शन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि कई ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। रविवार को वीकेंड की वजह से भीड़ और बढ़ गई, जिससे आने वाले दिनों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

    सुरक्षा के लिए 160 जवान तैनात

    भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जीआरपी चौकी प्रभारी एएसआई मुकेश कुमार सैनी ने बताया कि स्टेशन परिसर में 100 आरपीएफ और 60 जीआरपी जवानों की तैनाती की गई है। इनमें महिला कर्मियों को भी शामिल किया गया है ताकि महिला यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इसके अलावा स्वयंसेवक भी व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं। जयपुर मंडल से सीनियर डीसीएम जगदीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम लगातार स्टेशन पर निगरानी बनाए हुए है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए यात्रियों के लिए अस्थायी शेल्टर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु धूप और लू से राहत पा रहे हैं।

    भीड़ नियंत्रण के लिए खास इंतजाम

    स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रूट तय किए गए हैं ताकि अव्यवस्था या भगदड़ जैसी स्थिति न बने। यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 21 टिकट काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 12 मैनुअल और 9 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) शामिल हैं।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये विशेष व्यवस्थाएं रविवार देर रात तक जारी रहेंगी ताकि वीकेंड की भीड़ को सुचारु रूप से संभाला जा सके।

    रींगस: खाटूधाम का मुख्य प्रवेश द्वार

    गौरतलब है कि खाटूश्यामजी कस्बे में फिलहाल कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रींगस जंक्शन ही प्रमुख पड़ाव है। यहां से खाटूधाम की दूरी लगभग 17 किलोमीटर है, जिसे यात्री सड़क मार्ग, निजी वाहनों, ई-रिक्शा या पैदल यात्रा के जरिए पूरा करते हैं।

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में खाटूश्यामजी से करीब 11 किलोमीटर दूर सुंदपुरा गांव में नया रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की है। इसके बाद भविष्य में भक्तों को खाटूधाम पहुंचने के लिए एक और नजदीकी विकल्प मिलेगा, जिससे रींगस स्टेशन पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

  • तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले केश दान ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी इस प्रथा ने न केवल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी दर्ज की है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी साबित हुई है। मई 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा केश दान किए जाने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को मानव बालों की नीलामी से अब तक की सबसे अधिक आय मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मई माह के पहले 27 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना मुंडन कराया। यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिर में केश दान की धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था पहले की तुलना में और मजबूत हुई है।

    इस रिकॉर्ड केश दान का सीधा प्रभाव मंदिर की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष में मानव बालों की ई-नीलामी से लगभग 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार संचित मानव बालों का भंडार अब कई लाख किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मांग बनी हुई है।

    मानव बालों की ई-नीलामी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तिरुमला मंदिर में प्राप्त बालों को गुणवत्ता और लंबाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों की बाजार में विशेष मांग होती है, जिनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और विभिन्न सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर को इस माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है।

    धार्मिक दृष्टि से केश दान को समर्पण, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में बाल अर्पित करने से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के कारण देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेते हैं।

    पौराणिक कथाओं में भी इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। समय के साथ यह धार्मिक परंपरा मंदिर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई और आज यह श्रद्धा तथा आर्थिक प्रबंधन दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखती है।

    पिछले कुछ वर्षों में मंदिर को मानव बालों की बिक्री से होने वाली आय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक मानव बालों की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता के कारण तिरुमला मंदिर की नीलामी को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इससे मंदिर प्रशासन को अपनी धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं।

    केश दान की यह परंपरा आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गई है, बल्कि आस्था और आर्थिक प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वैश्विक बाजार में मानव बालों की मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी इस आय स्रोत के और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल

    UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल


    शाहजहांपुर।
    यूपी (UP) के हरपालपुर (Harpalpur) से 60 यात्रियों को बैठाकर फर्रुखाबाद आ रही प्राइवेट बस (BUS) शाहजहांपुर (Shahjahanpur.) के अल्लाहगंज थाना क्षेत्र में गांव रघुनाथपुर के पास शुक्रवार को ओवरटेक करने के दौरान पलट गई। इससे 25 यात्री घायल हो गए। इनमें 11 को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अन्य वहीं उपचार हुआ। बस में सवार अधिकांश यात्री बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के चलते पांचाल घाट पर गंगा स्नान करने जा रहे थे।

    हरदोई जनपद के हरपालपुर से सुबह प्राइवेट बस में करीब 60 यात्री सवार हुए। चालक बस को तेजी भगा रहा था। कुछ यात्रियों ने उससे सही से बस चलाने के लिए भी कहा। पर उसने एक नहीं सुनी। इस बीच गांव रघुनाथपुर के पास आगे चल रहे वाहन को ओवर टेक करने के प्रयास में बस पलट गई। इससे चीख पुकार मच गई। पुलिस व आसपास के ग्रामीणों ने बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसमें 25 यात्री घायल हो गए। एंबुलेंस से 11 घायल यात्रियों को लोहिया अस्पताल भेजा गया है। इनमें से नौ को भर्ती कर लिया गया। दो यात्रियों को मरहम पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना की जानकारी होने पर एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम, एसडीएम सदर रजनीकांत पांडेय ने सीओ अभय वर्मा लोहिया अस्पताल में पहुंच कर मरीजों का हाल जाना है।

    हरदोई थाना पाली के गांव पांडेयपुरवा निवासी राधिका(45), नन्हीं देवी (60), सवायजपुर गांव सलउद्दीपुर के विश्व प्रताप सिंह (31), मिलरगवां की उमाकांती (55), माहरेपुर की गुड्डी (55), रामदेवी (65), अनुष्का (8) पुत्री प्रदीप पाल, नंदबाग के रामलड़ैते (47), जदुवीर सिंह (60), गोकुल बेहटा के गांव रामपुर मानपुर के रंजीत सिंह, अमरेखा के राजू (30) को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    लोहिया अस्पताल में भर्ती हरदोई जिले के थाना सवायजपुर क्षेत्र के गांव मिरगवां निवासी घायल उमाकांती के पुत्र राहुल ने बताया कि बस पलटने पर उनकी मां के कुंडल व छह हजार रुपये वहीं गिर गए थे। बस से निकालने के दौरान एक सिपाही ने कुंडल व रुपये उठा लिए थे। मांगने उसने कहा कि पहले अस्पताल जाकर इलाज कराओ बाद में थाने आकर ले जाना। पर जब राहुल रुपये व कुंडल मांगने गया तो सिपाही ने रुपये व कुंडल लेने से ही इनकार कर दिया। इससे परेशान व्यवस्था कोसता रहा।

  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • हनुमान जयंती पर ग्वालियर में मंदिरों में उमड़े भक्‍त, रोकड़िया सरकार को लगाया 5100 लड्डुओं का भोग

    हनुमान जयंती पर ग्वालियर में मंदिरों में उमड़े भक्‍त, रोकड़िया सरकार को लगाया 5100 लड्डुओं का भोग


    ग्वालियर । ग्वालियर में हनुमान जयंती के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

    सिंधिया रियासत कालीन छतरी मैदान स्थित रोकड़िया हनुमान मंदिर में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। यहां तड़के 4 बजे से अभिषेक और पूजन की शुरुआत हुई, जिसके बाद भगवान को चोला चढ़ाकर भव्य श्रृंगार किया गया और मंदिर के पट खोले गए। मंदिर में सुंदरकांड पाठ जारी है और भगवान को 5100 लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जा रहा है। साथ ही फूल बंगला और छप्पन भोग जैसी आकर्षक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

    शहर के मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, जो करीब 300 वर्ष पुराना माना जाता है, वहां भी सुबह से भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु दूर-दूर तक कतारों में लगकर बाबा के दर्शन कर रहे हैं। हनुमान जयंती पर शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर घाटीगांव स्थित धुआं वाले हनुमान मंदिर में मेले का आयोजन किया गया है, जहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। इसी तरह जौरासी घाटी में स्थित जौरासी हनुमान मंदिर पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

    वहीं बहोड़ापुर धाम मंदिर में बुधवार से अखंड रामायण पाठ जारी है, जिसका समापन गुरुवार शाम को होगा। यहां बाबा को परंपरा के अनुसार सोने के वर्क वाला चोला अर्पित किया गया है, जिससे मंदिर में भक्ति का विशेष वातावरण बना हुआ है।

  • मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से

    मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से


    मैहर। मध्यप्रदेश के मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आस्था का रंग देखने लायक था। लगभग 600 फीट ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और हर ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु 1060 सीढ़ियों और रोपवे से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और भक्ति व उत्साह का माहौल पूरे धाम में छाया रहा।

    मंदिर का पौराणिक महत्व

    माना जाता है कि मां शारदा देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सती का हार तांडव के दौरान यहीं गिरा था इसी कारण इस स्थान का नाम मैहर पड़ा। मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा “मैं” को हरने वाली हैं अर्थात् हमारे अंदर जो अहंकार और अज्ञान होता है उसे हरने वाली माता हैं।

    आल्हा की परंपरा और पूजा विधि

    लोककथाओं के अनुसार वीर योद्धा आल्हा आज भी ब्रह्ममुहूर्त में माता की प्रथम पूजा करते हैं। कई बार ऐसे प्रमाण मिले हैं जब सुबह मंदिर के पट खोलने पर बत्ती जलती पाई गई या आसपास कभी दिखाई न देने वाले फूल मंदिर में पाए गए। पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा को नौ दिनों में अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। जो भक्त मंदिर दर्शन के लिए नहीं आ पाते वे मां शारदा के नाम का जप करें और व्रत रखें मां की कृपा बनी रहेगी।

    सुरक्षा और सुविधाएं

    नवरात्रि मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। 600 से ज्यादा जवान जिनमें 40 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं 24 घंटे तैयार रहेंगे। इसके अलावा बम स्कॉट की टीमें सिविल ड्रेस में भी लगातार गश्त कर रही हैं। प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी है जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने माता शारदा देवी के दर्शन कर आस्था और भक्ति के साथ नव संवत्सर का स्वागत किया।

  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।