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  • लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    नई दिल्ली । बिहार के लखीसराय जिले में सावन के तीसरे सोमवार को इंद्र दमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम में बड़ा हादसा हो गया। सोमवार सुबह मंदिर परिसर के आसपास अचानक अफरा-तफरी मचने के बाद भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत होने की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई है, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।

    घटना के बाद शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौतों की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि भगदड़ थी। प्रशासन के अनुसार बिजली का पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह ने भीड़ में अचानक डर पैदा कर दिया।

    बताया गया कि हादसे के समय अशोक धाम मंदिर में सावन सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान अशोक धाम हाल्ट के आसपास एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों के आने के कारण वहां लोगों की आवाजाही और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी बीच कुछ युवकों के भागने से अफरा-तफरी और तेज हो गई।

    इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और वहां करंट फैल गया है। प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और संबंधित तार कवर किया हुआ था। इसके बावजूद अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू कर दिया।

    अचानक मची भगदड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाओं की कतार रही। भीड़ के दबाव में दबने से आठ महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

    सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की सहायता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की पहचान तथा उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

    जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में भीड़ बढ़ने, ट्रेनों के एक साथ आने, बिजली के पोल गिरने और अफवाह फैलने सहित सभी पहलुओं को देखा जाएगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश व्यवस्था के दौरान किन परिस्थितियों में दबाव अचानक बढ़ा।

    अशोक धाम मंदिर सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ जुटती है। ऐसे में हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित आवाजाही और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

    प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की स्थिति किस क्रम में बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

  • सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    नई दिल्ली ।  इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व एक भव्य धार्मिक आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। शहर के धर्म श्री क्षेत्र स्थित बालाजी मंदिर परिसर में मां राजराजेश्वरी और मां ललिता त्रिपुर सुंदरी के एक करोड़ हरिद्रा (हल्दी) और कुमकुम महाअर्चन का आयोजन प्रस्तावित है। इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और प्रशासन तथा आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
    आयोजकों के अनुसार यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसे भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सामूहिक पूजा, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है। इसके लिए लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    बताया गया है कि आयोजन का शुभारंभ 29 जुलाई की शाम छह बजे होगा। अनुष्ठान में 1100 वैदिक विद्वान और पंडित वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक अर्चन संपन्न कराएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर साधना, जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी कारण इस अवसर पर आयोजित होने वाला यह महाअर्चन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    आयोजन समिति का दावा है कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी प्रकार का शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए आवागमन, बैठने, पेयजल, प्रसाद वितरण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। अनुमान है कि आयोजन के दौरान करीब एक लाख श्रद्धालु परिसर में पहुंच सकते हैं, जिसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए हल्दी, कुमकुम, कमल पुष्प, नारियल, फल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग प्रबंध किए जा रहे हैं। आयोजन की भव्यता को देखते हुए इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल माना जा रहा है।

    धार्मिक आयोजकों का कहना है कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से इस महाअनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की भागीदारी अपेक्षित है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

    गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर सागर में होने वाला यह महाअर्चन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का भी संदेश देगा।

  • सावन में शिवमय होगी काशी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल समेत कई देशों से आएंगे श्रद्धालु

    सावन में शिवमय होगी काशी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल समेत कई देशों से आएंगे श्रद्धालु


    वाराणसी। सावन मास की शुरुआत के साथ ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पूरी तरह शिवभक्ति में डूब जाएगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और विशेष अनुष्ठानों के लिए देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दुबई और नेपाल सहित कई देशों से भी श्रद्धालुओं के आने की तैयारी है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है।

    सावन के दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा महामृत्युंजय महादेव, मार्कंडेय महादेव, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, ओंकारेश्वर, शूलटंकेश्वर और रामेश्वर महादेव सहित प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहले से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से पांच-पांच परिवार विशेष रूप से काशी पहुंचेंगे। ये श्रद्धालु जलाभिषेक, महारुद्राभिषेक और धार्मिक कथाओं का श्रवण कर भगवान शिव की आराधना करेंगे।

    अनुष्ठानों के संचालन के लिए पूर्वांचल के जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से वैदिक ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जा रहा है। वहीं काशी के कई विद्वान ब्राह्मण भी मध्य प्रदेश के अमरकंटक और महाराष्ट्र सहित अन्य स्थानों पर सावन के धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने जाएंगे।

    सावन को देखते हुए प्रमुख शिव मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग की जा रही है, जबकि पूजन सामग्री और रुद्राभिषेक की बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। यजमान अपने-अपने वैदिक ब्राह्मणों से अनुष्ठानों की तिथियां तय कर रहे हैं।

    सावन भर शहर में श्रीशिव महापुराण, श्रीमद्भागवत, श्रीविष्णु पुराण और रामचरितमानस कथा जैसे धार्मिक आयोजनों की भी धूम रहेगी। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं इन कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। मारवाड़ी समाज की ओर से 17 अगस्त से सप्ताहभर चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रख्यात भागवत वक्ता श्रीकांत बालव्यास काशी प्रवचन देंगे।

    पूरे सावन मास में शिवालयों में रुद्राभिषेक, महारुद्र, सप्तचंडी यज्ञ, रुद्रचंडी अनुष्ठान और महामृत्युंजय मंत्र जाप जैसे धार्मिक कार्यक्रम होंगे। श्रद्धालु सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा, भगवान शिव का जलाभिषेक तथा घरों में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और लेखन कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करेंगे।

  • भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का एक ही दिन पड़ना बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वर्ष 12 जुलाई 2026 को भगवान शिव को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत, रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और सुबह से ही देश भर के शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस प्रकार के संयोग में की गई पूजा और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    धार्मिक गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के चलते प्रदोष व्रत का पालन किया जा रहा है। चूंकि आज रविवार का दिन है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त उपासना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आज प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम को 07:20 बजे से लेकर रात के 09:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष आरती और अर्घ्य आदि प्रदान कर सकते हैं।

    इसके साथ ही, संध्या काल के पश्चात चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होने के कारण आज ही के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्य रात्रि में संपन्न की जाती है। इस व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 13 जुलाई की रात को यानी आधी रात के समय 12:07 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा, जहां शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।

    इस महासंयोग के अवसर पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन अनाज जैसे चावल, गेहूं और दाल का दान करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद रंग की मिठाइयों का दान करने से आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं और इच्छित वरदान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सफेद वस्त्रों का दान करने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    पर्यावरण और ग्रहों की शांति के दृष्टिकोण से आज के शुभ दिन पर पौधों का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर छायादार या पूजनीय पौधों का दान करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, उचित समय पर महादेव का अभिषेक करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से मनुष्य को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का पावन महीना, जानिए कब पड़ेंगे चारों सावन सोमवार

    30 जुलाई से शुरू होगा सावन का पावन महीना, जानिए कब पड़ेंगे चारों सावन सोमवार


    नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना और भक्ति का सबसे पवित्र माने जाने वाला सावन माह इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। हिंदू धर्म में इस महीने का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि पूरा सावन भगवान भोलेनाथ की उपासना को समर्पित माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त व्रत, पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    सावन में चार सोमवार का रहेगा विशेष संयोग
    सावन के सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और नियमपूर्वक सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। वर्ष 2026 के सावन माह में कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

    सावन सोमवार की तिथियां इस प्रकार हैं:

    प्रथम सोमवार – 3 अगस्त 2026
    द्वितीय सोमवार – 10 अगस्त 2026
    तृतीय सोमवार – 17 अगस्त 2026
    चतुर्थ सोमवार – 24 अगस्त 2026

    क्यों खास माना जाता है सावन?
    सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मिक शांति का भी प्रतीक माना जाता है। वर्षा ऋतु के बीच हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए अनुकूल माना जाता है। पूरे महीने शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और श्रद्धालु जल, दूध, दही, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा तथा चंदन अर्पित कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।

    पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
    सावन में सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस दौरान तामसिक भोजन से परहेज करते हैं और सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान शिव का ध्यान करते हैं। कई भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं, जबकि कुछ फलाहार ग्रहण कर व्रत का पालन करते हैं।

    पूजा के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही शिव चालीसा का पाठ और रुद्राभिषेक करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

  • बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व

    बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व


    नई दिल्ली। खाटूश्यामजी के विश्वप्रसिद्ध मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने उत्तर पश्चिम रेलवे की कमाई में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। निर्जला एकादशी और द्वादशी के मेले के साथ-साथ वीकेंड की छुट्टियों के चलते रींगस रेलवे स्टेशन जंक्शन पर यात्रियों का अभूतपूर्व दबाव देखने को मिला। इसी अवधि में रेलवे को रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई है।

    रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में करीब 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ट्रेन से यात्रा की, जिससे रींगस स्टेशन को ₹1.25 करोड़ से अधिक की आय हुई है।

    ट्रेनों में भारी भीड़, यात्रियों की बढ़ी संख्या

    रींगस स्टेशन अधीक्षक बाबूलाल बाजिया के अनुसार, बाबा श्याम के दर्शन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि कई ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। रविवार को वीकेंड की वजह से भीड़ और बढ़ गई, जिससे आने वाले दिनों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

    सुरक्षा के लिए 160 जवान तैनात

    भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जीआरपी चौकी प्रभारी एएसआई मुकेश कुमार सैनी ने बताया कि स्टेशन परिसर में 100 आरपीएफ और 60 जीआरपी जवानों की तैनाती की गई है। इनमें महिला कर्मियों को भी शामिल किया गया है ताकि महिला यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इसके अलावा स्वयंसेवक भी व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं। जयपुर मंडल से सीनियर डीसीएम जगदीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम लगातार स्टेशन पर निगरानी बनाए हुए है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए यात्रियों के लिए अस्थायी शेल्टर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु धूप और लू से राहत पा रहे हैं।

    भीड़ नियंत्रण के लिए खास इंतजाम

    स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रूट तय किए गए हैं ताकि अव्यवस्था या भगदड़ जैसी स्थिति न बने। यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 21 टिकट काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 12 मैनुअल और 9 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) शामिल हैं।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये विशेष व्यवस्थाएं रविवार देर रात तक जारी रहेंगी ताकि वीकेंड की भीड़ को सुचारु रूप से संभाला जा सके।

    रींगस: खाटूधाम का मुख्य प्रवेश द्वार

    गौरतलब है कि खाटूश्यामजी कस्बे में फिलहाल कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रींगस जंक्शन ही प्रमुख पड़ाव है। यहां से खाटूधाम की दूरी लगभग 17 किलोमीटर है, जिसे यात्री सड़क मार्ग, निजी वाहनों, ई-रिक्शा या पैदल यात्रा के जरिए पूरा करते हैं।

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में खाटूश्यामजी से करीब 11 किलोमीटर दूर सुंदपुरा गांव में नया रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की है। इसके बाद भविष्य में भक्तों को खाटूधाम पहुंचने के लिए एक और नजदीकी विकल्प मिलेगा, जिससे रींगस स्टेशन पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

  • तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले केश दान ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी इस प्रथा ने न केवल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी दर्ज की है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी साबित हुई है। मई 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा केश दान किए जाने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को मानव बालों की नीलामी से अब तक की सबसे अधिक आय मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मई माह के पहले 27 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना मुंडन कराया। यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिर में केश दान की धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था पहले की तुलना में और मजबूत हुई है।

    इस रिकॉर्ड केश दान का सीधा प्रभाव मंदिर की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष में मानव बालों की ई-नीलामी से लगभग 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार संचित मानव बालों का भंडार अब कई लाख किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मांग बनी हुई है।

    मानव बालों की ई-नीलामी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तिरुमला मंदिर में प्राप्त बालों को गुणवत्ता और लंबाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों की बाजार में विशेष मांग होती है, जिनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और विभिन्न सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर को इस माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है।

    धार्मिक दृष्टि से केश दान को समर्पण, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में बाल अर्पित करने से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के कारण देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेते हैं।

    पौराणिक कथाओं में भी इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। समय के साथ यह धार्मिक परंपरा मंदिर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई और आज यह श्रद्धा तथा आर्थिक प्रबंधन दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखती है।

    पिछले कुछ वर्षों में मंदिर को मानव बालों की बिक्री से होने वाली आय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक मानव बालों की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता के कारण तिरुमला मंदिर की नीलामी को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इससे मंदिर प्रशासन को अपनी धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं।

    केश दान की यह परंपरा आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गई है, बल्कि आस्था और आर्थिक प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वैश्विक बाजार में मानव बालों की मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी इस आय स्रोत के और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल

    UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल


    शाहजहांपुर।
    यूपी (UP) के हरपालपुर (Harpalpur) से 60 यात्रियों को बैठाकर फर्रुखाबाद आ रही प्राइवेट बस (BUS) शाहजहांपुर (Shahjahanpur.) के अल्लाहगंज थाना क्षेत्र में गांव रघुनाथपुर के पास शुक्रवार को ओवरटेक करने के दौरान पलट गई। इससे 25 यात्री घायल हो गए। इनमें 11 को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अन्य वहीं उपचार हुआ। बस में सवार अधिकांश यात्री बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के चलते पांचाल घाट पर गंगा स्नान करने जा रहे थे।

    हरदोई जनपद के हरपालपुर से सुबह प्राइवेट बस में करीब 60 यात्री सवार हुए। चालक बस को तेजी भगा रहा था। कुछ यात्रियों ने उससे सही से बस चलाने के लिए भी कहा। पर उसने एक नहीं सुनी। इस बीच गांव रघुनाथपुर के पास आगे चल रहे वाहन को ओवर टेक करने के प्रयास में बस पलट गई। इससे चीख पुकार मच गई। पुलिस व आसपास के ग्रामीणों ने बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसमें 25 यात्री घायल हो गए। एंबुलेंस से 11 घायल यात्रियों को लोहिया अस्पताल भेजा गया है। इनमें से नौ को भर्ती कर लिया गया। दो यात्रियों को मरहम पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना की जानकारी होने पर एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम, एसडीएम सदर रजनीकांत पांडेय ने सीओ अभय वर्मा लोहिया अस्पताल में पहुंच कर मरीजों का हाल जाना है।

    हरदोई थाना पाली के गांव पांडेयपुरवा निवासी राधिका(45), नन्हीं देवी (60), सवायजपुर गांव सलउद्दीपुर के विश्व प्रताप सिंह (31), मिलरगवां की उमाकांती (55), माहरेपुर की गुड्डी (55), रामदेवी (65), अनुष्का (8) पुत्री प्रदीप पाल, नंदबाग के रामलड़ैते (47), जदुवीर सिंह (60), गोकुल बेहटा के गांव रामपुर मानपुर के रंजीत सिंह, अमरेखा के राजू (30) को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    लोहिया अस्पताल में भर्ती हरदोई जिले के थाना सवायजपुर क्षेत्र के गांव मिरगवां निवासी घायल उमाकांती के पुत्र राहुल ने बताया कि बस पलटने पर उनकी मां के कुंडल व छह हजार रुपये वहीं गिर गए थे। बस से निकालने के दौरान एक सिपाही ने कुंडल व रुपये उठा लिए थे। मांगने उसने कहा कि पहले अस्पताल जाकर इलाज कराओ बाद में थाने आकर ले जाना। पर जब राहुल रुपये व कुंडल मांगने गया तो सिपाही ने रुपये व कुंडल लेने से ही इनकार कर दिया। इससे परेशान व्यवस्था कोसता रहा।

  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।