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  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • हनुमान जयंती पर ग्वालियर में मंदिरों में उमड़े भक्‍त, रोकड़िया सरकार को लगाया 5100 लड्डुओं का भोग

    हनुमान जयंती पर ग्वालियर में मंदिरों में उमड़े भक्‍त, रोकड़िया सरकार को लगाया 5100 लड्डुओं का भोग


    ग्वालियर । ग्वालियर में हनुमान जयंती के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

    सिंधिया रियासत कालीन छतरी मैदान स्थित रोकड़िया हनुमान मंदिर में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। यहां तड़के 4 बजे से अभिषेक और पूजन की शुरुआत हुई, जिसके बाद भगवान को चोला चढ़ाकर भव्य श्रृंगार किया गया और मंदिर के पट खोले गए। मंदिर में सुंदरकांड पाठ जारी है और भगवान को 5100 लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जा रहा है। साथ ही फूल बंगला और छप्पन भोग जैसी आकर्षक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

    शहर के मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, जो करीब 300 वर्ष पुराना माना जाता है, वहां भी सुबह से भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु दूर-दूर तक कतारों में लगकर बाबा के दर्शन कर रहे हैं। हनुमान जयंती पर शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर घाटीगांव स्थित धुआं वाले हनुमान मंदिर में मेले का आयोजन किया गया है, जहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। इसी तरह जौरासी घाटी में स्थित जौरासी हनुमान मंदिर पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

    वहीं बहोड़ापुर धाम मंदिर में बुधवार से अखंड रामायण पाठ जारी है, जिसका समापन गुरुवार शाम को होगा। यहां बाबा को परंपरा के अनुसार सोने के वर्क वाला चोला अर्पित किया गया है, जिससे मंदिर में भक्ति का विशेष वातावरण बना हुआ है।

  • मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से

    मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से


    मैहर। मध्यप्रदेश के मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आस्था का रंग देखने लायक था। लगभग 600 फीट ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और हर ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु 1060 सीढ़ियों और रोपवे से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और भक्ति व उत्साह का माहौल पूरे धाम में छाया रहा।

    मंदिर का पौराणिक महत्व

    माना जाता है कि मां शारदा देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सती का हार तांडव के दौरान यहीं गिरा था इसी कारण इस स्थान का नाम मैहर पड़ा। मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा “मैं” को हरने वाली हैं अर्थात् हमारे अंदर जो अहंकार और अज्ञान होता है उसे हरने वाली माता हैं।

    आल्हा की परंपरा और पूजा विधि

    लोककथाओं के अनुसार वीर योद्धा आल्हा आज भी ब्रह्ममुहूर्त में माता की प्रथम पूजा करते हैं। कई बार ऐसे प्रमाण मिले हैं जब सुबह मंदिर के पट खोलने पर बत्ती जलती पाई गई या आसपास कभी दिखाई न देने वाले फूल मंदिर में पाए गए। पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा को नौ दिनों में अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। जो भक्त मंदिर दर्शन के लिए नहीं आ पाते वे मां शारदा के नाम का जप करें और व्रत रखें मां की कृपा बनी रहेगी।

    सुरक्षा और सुविधाएं

    नवरात्रि मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। 600 से ज्यादा जवान जिनमें 40 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं 24 घंटे तैयार रहेंगे। इसके अलावा बम स्कॉट की टीमें सिविल ड्रेस में भी लगातार गश्त कर रही हैं। प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी है जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने माता शारदा देवी के दर्शन कर आस्था और भक्ति के साथ नव संवत्सर का स्वागत किया।

  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।

  • मैहर स्टेशन पर नवरात्रि मेले के लिए 15 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

    मैहर स्टेशन पर नवरात्रि मेले के लिए 15 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मैहर स्टेशन पर आगामी नवरात्रि मेले के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए 15 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव देने का फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था 19 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। हर ट्रेन मैहर स्टेशन पर पांच मिनट रुकेगी, जिससे मां शारदा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नवरात्रि के समय मां शारदा मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यह अस्थायी ठहराव लगाया गया है। प्रमुख ट्रेनों में लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गोरखपुर एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस–छपरा एक्सप्रेस, चेन्नई–छपरा एक्सप्रेस, वलसाड–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस और कोल्हापुर–धनबाद एक्सप्रेस शामिल हैं।

    इसके अलावा, एलएलटी–रक्सौल एक्सप्रेस, दुर्ग–नवतनवा एक्सप्रेस, पुणे–गोरखपुर एक्सप्रेस, पूर्णा–पटना एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस–अयोध्या कैंट एक्सप्रेस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस–रांची एक्सप्रेस भी मैहर में रुकेंगी। अन्य ट्रेनों में बांद्रा टर्मिनस–पटना एक्सप्रेस, पुणे–बनारस एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गुवाहाटी एक्सप्रेस और सूरत–छपरा एक्सप्रेस शामिल हैं।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेनों के समय और ठहराव की अद्यतन जानकारी रेलवे की अधिकृत एनटीईएस ऐप या हेल्पलाइन नंबर 139 के माध्यम से अवश्य प्राप्त करें।

    इस निर्णय से नवरात्रि मेले के दौरान मैहर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा और राहत मिलने की उम्मीद है।

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  • तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम

    तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम


    नई दिल्ली। राजधानी के तुलसी नगर में स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में दो दिवसीय ध्वजा महोत्सव का भव्य आयोजन शनिवार और शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और भगवान पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत अनुभव किया। मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक आनंद से गूंज उठा। मंदिर समिति के अध्यक्ष आईएल मेहता ने बताया कि इस अवसर पर सभी धार्मिक अनुष्ठानों और विधियों को बड़े श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया।

    इस ध्वजा महोत्सव में विशेष रूप से आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भक्तों को धर्म, भक्ति और संयम की सीख दी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था बनाए रखने और धार्मिक कृत्यों में भाग लेने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मंदिर की मूलनायक प्रतिमा शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के अभिषेक का सौभाग्य तुलसी नगर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी और उनके परिवार को प्राप्त हुआ। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए गौरव का अवसर बना।

    ध्वजा महोत्सव के पहले दिन, शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। अभिषेक, पूजन, प्रार्थना और भजन कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। मंदिर में भक्ति और उल्लास का माहौल पूरे दिन बना रहा। इस दौरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, मनोज संघवी, शिल्पा कोठारी सहित जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि महोत्सव का दूसरा दिन शनिवार 7 मार्च को सुबह 8 बजे प्रारंभ होगा। इस दिन आचार्य संघ के मार्गदर्शन में ध्वजाओं का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। इस भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में डूबेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि जैन समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करता है।

    ध्वजा महोत्सव के माध्यम से मंदिर समिति ने यह संदेश दिया कि भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाते हैं। तुलसी नगर का यह आयोजन जैन धर्म के इतिहास और परंपरा का प्रतीक बनकर उभरा है। महोत्सव ने लोगों को न केवल भगवान के प्रति आस्था बढ़ाने का अवसर दिया, बल्कि समाज में मेलजोल, सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवित रखा।

    इस प्रकार, शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ध्वजा महोत्सव ने भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहेगा।

  • उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

    उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

     उज्जैनउज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे।

    महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए।

    सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी।

    ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा।

    सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए।

    मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।

  • उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु

    उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु


    उज्जैनधर्मनगरी उज्जैन में फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही फाग महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों ने रंग-बिरंगी होली खेलते हुए भगवान के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा दिखाई। नई पेठ स्थित गजलक्ष्मी मंदिर, छत्री चौक का गोपाल मंदिर और खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों ने गुलाल और फूलों से भगवान के चरणों को सजाया और भजन-कीर्तन के मधुर गीतों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मंदिरों में फाग उत्सव का आयोजन भक्ति, संगीत और रंगों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल होकर भगवान के चरणों में प्रार्थना करते हुए गुलाल उड़ाते और फूलों की होली खेलते नजर आए। भजन-कीर्तन और कीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला का स्मरण करते हुए होली के पारंपरिक उत्सव में भाग लिया।

    इस बार फाग महोत्सव में उज्जैन के अलावा देवास, इंदौर, रतलाम और आसपास के अन्य शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने बताया कि फाल्गुन मास में होली का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ गोपियों द्वारा खेली गई होली की परंपरा का प्रतीक है। पुजारी अनिमेश शर्मा ने बताया कि यह उत्सव भक्तों के लिए भक्ति और उल्लास का अवसर होता है और प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के बाद फाल्गुन मास की शुरुआत से इसे विशेष रूप से मनाया जाता है।

    फाग महोत्सव के दौरान मंदिरों में रंगों के साथ-साथ फूलों और पिचकारियों का भी आनंद लिया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में रंगीन गुलाल डालते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया और भक्ति गीतों में सम्मिलित होकर उत्सव का आनंद लिया। मंदिरों में साफ-सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि बड़े पैमाने पर आए श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस रंगीन महोत्सव में भाग ले सकें।

    इस साल फाग महोत्सव में मंदिरों की सजावट भी आकर्षक थी। मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी वस्तुओं से विशेष आयोजन किया गया, जिससे भक्तों को न केवल भक्ति का अनुभव मिला बल्कि होली के पारंपरिक रंगों का भी आनंद लेने का अवसर मिला।

    शहरवासियों और मंदिर प्रशासन ने फाग महोत्सव को सफल बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का ख्याल रखा। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस उत्सव के दौरान मंदिरों में रंग और फूलों से होली खेलना भगवान के प्रति उनकी आस्था और प्रेम को दर्शाता है।

    उज्जैन में फाग महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है बल्कि यह शहर में पर्यटन और सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा देता है। इस उत्सव ने पूरे शहर को रंगों और खुशियों से सराबोर कर दिया।

  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर

    ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर


    खंडवा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रविवार की ब्रह्म मुहूर्त में रात तीन बजे से ही मंदिर परिसर भक्तों और साधु-संतों की उपस्थिति से गुलजार रहा। फूलों से सजे भव्य मंदिर में साधु-संतों ने विशेष दर्शन और पूजा की, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए रात 3:30 बजे मंदिर के पट खुले।भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान कर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित किया। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने पुल से श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर प्रवेश कराया, जबकि नए झूला पुल के माध्यम से बाहर निकाला गया। इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

    रात के समय मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। बैंड बाजो की ध्वनि और बम भोले की गूंज के साथ सन्यासी और साधु-संतों ने शोभायात्रा निकाली और सबसे पहले भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर में फूलों की भव्य सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों से सजा परिसर रात और दिन दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दोपहर में भोग आरती का आयोजन भी किया गया। इस दौरान भगवान शिव को 151 किलो मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही तीर्थ नगरी के आश्रमों और नगर के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी और प्रसादी का वितरण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में आनंद और धार्मिक उमंग का माहौल बना रहा।

    मंदिर में यह विश्वास है कि भगवान शिव साक्षात् रूप में ओंकारेश्वर में निवास करते हैं। दिनभर सृष्टि का संचालन करने के बाद वे रात में नर्मदा किनारे विश्राम करते हैं। इसलिए आज मंदिर में चौपड़-पांसे और झूला नहीं सजाया गया और रात में आरती का आयोजन नहीं होगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर ओंकारेश्वर में मंदिर प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी तत्परता दिखाई। भारी भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित व्यवस्था और श्रद्धालुओं का सहयोग इसे सफल आयोजन बनाने में सहायक रहा।

    भक्तों ने कहा कि ओंकारेश्वर में ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन करने का अनुभव अलौकिक और अद्वितीय रहा। फूलों से सजे मंदिर परिसर, भव्य शोभायात्रा, और नर्मदा स्नान के साथ जल अर्पण ने इस महापर्व की महिमा को और बढ़ा दिया। यह महाशिवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और उमंग का केंद्र भी बनी। मंदिर में पवित्र माहौल, सुरक्षा और सुव्यवस्था ने इसे श्रद्धालुओं के लिए यादगार अवसर बना दिया।

  • पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन

    पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन


    सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पचमढ़ी इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आ रहा है महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित चौरागढ़ मेला पूरे जोश के साथ चल रहा है चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की आस्था से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है भगवान शिव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर चौरागढ़ शिखर तक पहुंच रहे हैं

    कठिन और पथरीली चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु अपने कंधों पर भारी त्रिशूल उठाकर मंदिर तक जाते हैं मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाया जाता है इसी कारण दिनभर नहीं बल्कि देर रात तक भी भक्तों की कतार शिखर मंदिर तक बनी रहती है भक्त नाचते गाते जयकारे लगाते हुए भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं पहाड़ी की ठंडी हवा और थकान भी आस्था के आगे कमजोर साबित हो रही है

    मेले में भारी भीड़ के बीच अपनों से बिछड़ने वालों के लिए प्रशासन द्वारा बनाया गया खोया-पाया केंद्र काफी कारगर साबित हो रहा है पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही हैं हाल ही में सिवनी जिले का आठ वर्षीय बालक शौर्य नायक भीड़ में खो गया था जिसे कंट्रोल रूम की सतर्कता से ढूंढकर परिजनों को सौंपा गया इसी तरह छिंदवाड़ा निवासी आशा राठौर को भी उनके भाई से मिलवाया गया

    कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देश पर मेला व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और एसडीएम आकिब खान स्वयं पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पल-पल की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दे रही हैं सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है

    मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल चौबीस घंटे तैनात है परिवहन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालुओं से अतिरिक्त किराया न वसूला जाए वहीं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सफाई मित्र सुबह से सक्रिय रहते हैं शौचालयों की नियमित सफाई कचरा प्रबंधन और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जा रहा है

    पचमढ़ी का चौरागढ़ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था की जीत का जीवंत उदाहरण बन गया है त्रिशूल लेकर शिखर तक पहुंचते भक्त प्रशासन की सजग व्यवस्था सुरक्षा और स्वच्छता का अनुभव कर आस्था और विश्वास से परिपूर्ण हो रहे हैं इस मेला ने यह दिखा दिया है कि कठिन मार्ग और भारी भीड़ के बीच भी श्रद्धा कभी कमजोर नहीं होती है